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  • बैतूल में नरोत्तम मिश्रा ने सुरभि खंडेलवाल को दी श्रद्धांजलि

    बैतूल में नरोत्तम मिश्रा ने सुरभि खंडेलवाल को दी श्रद्धांजलि


    बैतूल । बैतूल मध्यप्रदेश में गुरुवार को पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दुखद निधन के शोक में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल के निवास पर पहुंचकर उनकी पुत्री सुरभि खंडेलवाल को श्रद्धांजलि दी अर्पित की।

    मिश्रा ने खंडेलवाल परिवार से मुलाकात कर इस कठिन समय में संवेदना व्यक्त की और परिवार को ढांढस बंधाया। उन्होंने दिवंगत सुरभि के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और कुछ समय तक परिवार के साथ बैठकर शोक व्यक्त किया।

    इस दौरान उन्होंने कहा कि परिवार इस दुखद समय में अकेला नहीं है और पार्टी एवं समाज उनके साथ खड़ा है। मिश्रा की यह श्रद्धांजलि स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव का अवसर भी बनी।

    खंडेलवाल परिवार ने मिश्रा के इस दुख साझा करने के कदम की सराहना की और कहा कि उनके साथ मौजूदगी से परिवार को कुछ सांत्वना मिली।

    यह घटना बैतूल में राजनीति और समाज के बीच मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक बनकर सामने आई, जहां नेता अपने संवेदनशील दृष्टिकोण से परिवार के दुःख में साझीदार बने।

  • बैतूल के घोघरा में चार साल से बंद नल-जल योजना, ग्रामीण नदी और कुएं पर निर्भर

    बैतूल के घोघरा में चार साल से बंद नल-जल योजना, ग्रामीण नदी और कुएं पर निर्भर

    बैतूल । बैतूल जिले के आदिवासी बहुल भीमपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत चोहटा पोपटी के अंतर्गत आने वाले ग्राम घोघरा में नल-जल योजना पिछले चार वर्षों से ठप पड़ी हुई है। इस वजह से ग्रामीणों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए आज भी प्राकृतिक स्रोतों नदी और कुएं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

    स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि योजना के तहत बोरवेल और ट्यूबवेल का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके साथ ही पाइपलाइन बिछा दी गई है और संपवेल का निर्माण भी तैयार है। बावजूद इसके योजना को शुरू नहीं किया गया है जिससे गांव के लोग अब भी कठिन परिस्थितियों में जलापूर्ति के लिए प्रयासरत हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि पानी की कमी खासकर गर्मियों में गंभीर रूप ले लेती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन गई है। पंचायत और स्थानीय प्रशासन से बार-बार संपर्क के बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

    वहीं ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि संबंधित विभाग जल्द ही इस योजना को चालू करके गांव में सुरक्षित और नियमित पेयजल की सुविधा सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि योजना शुरू होने से ग्रामीणों का जीवन आसान होगा और स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से भी राहत मिलेगी।

  • ग्वालियर में ई-वाहनों को बढ़ावा: पहला चार्जिंग स्टेशन शुरू, 15 रुपए प्रति यूनिट पर मिलेगी सुविधा

    ग्वालियर में ई-वाहनों को बढ़ावा: पहला चार्जिंग स्टेशन शुरू, 15 रुपए प्रति यूनिट पर मिलेगी सुविधा



    ग्वालियर।  शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए नगर निगम ने पहला ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन शुरू कर दिया है। अब शहर के ई-वाहन चालक पेट्रोल पंप की तरह आसानी से अपने वाहनों को चार्ज करा सकेंगे। यहां ₹15 प्रति यूनिट के हिसाब से चार्जिंग की सुविधा मिलेगी।

    यह चार्जिंग स्टेशन सिटी सेंटर स्थित तरुण पुष्कर के पास स्थापित किया गया है। इसका उद्घाटन गुरुवार को ग्वालियर की महापौर शोभा सिकरवार ने किया। इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त संघप्रिय सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

    नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि शहर में तेजी से बढ़ रहे इलेक्ट्रिक वाहनों को देखते हुए यह सुविधा शुरू की गई है, ताकि वाहन चालकों को चार्जिंग के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े।

    पेट्रोल पंप की तरह होगी चार्जिंग
    नगर निगम की सहायक यंत्री (विद्युत) अभिलाषा बघेल ने बताया कि यह स्टेशन पूरी तरह आधुनिक तकनीक से लैस है और यहां पेट्रोल पंप की तरह चार्जिंग गन का उपयोग किया जाएगा। वाहन चालक अपने ई-वाहन को चार्जिंग गन से कनेक्ट कर चार्ज करा सकेंगे।

    चार्जिंग पूरी होने के बाद मशीन में इस्तेमाल हुई बिजली की यूनिट और कुल राशि स्क्रीन पर दिखाई देगी। भुगतान करने के बाद कर्मचारी चार्जिंग गन हटा देंगे। इससे प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनी रहेगी।

    45 मिनट में 80 प्रतिशत बैटरी चार्ज
    यह चार्जिंग स्टेशन 60 KVA क्षमता का है। इसकी मदद से बड़ी इलेक्ट्रिक कार की करीब 80 प्रतिशत बैटरी लगभग 45 मिनट में चार्ज हो सकती है। इससे शहर में ई-वाहन चलाने वालों को तेज और सुविधाजनक चार्जिंग सुविधा मिल सकेगी।

    एक साथ दो वाहन होंगे चार्ज
    इस स्टेशन पर एक समय में दो ई-वाहनों को चार्ज किया जा सकता है। इससे व्यस्त समय में भी वाहन चालकों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

    शहर में पांच स्थानों पर बनेंगे चार्जिंग स्टेशन
    नगर निगम ने शहर में कुल पांच स्थानों को ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन के लिए चिन्हित किया है। फिलहाल इनमें से तीन स्थानों पर स्टेशन चालू हो चुके हैं।

    इनमेंतरुण पुष्कर, सिटी सेंटर,नगर निगम मुख्यालय के पास मल्टीलेवल पार्किंग (सिटी सेंटर) मल्टीलेवल पार्किंग कंपूशामिल हैं। बाकी स्थानों पर भी जल्द ही चार्जिंग स्टेशन शुरू किए जाने की योजना है।

    पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम
    नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से प्रदूषण में कमी आएगी और शहर का पर्यावरण बेहतर होगा। इसी उद्देश्य से शहर में धीरे-धीरे चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।

  • हाईकोर्ट का अहम आदेश: महिला को सुरक्षा के साथ ससुराल भेजा, पति-ससुर को सम्मानजनक व्यवहार की सख्त हिदायत

    हाईकोर्ट का अहम आदेश: महिला को सुरक्षा के साथ ससुराल भेजा, पति-ससुर को सम्मानजनक व्यवहार की सख्त हिदायत


    ग्वालियर। पारिवारिक विवाद से जुड़े एक मामले में बुधवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अहम आदेश देते हुए एक महिला को सुरक्षा व्यवस्था के साथ उसके ससुराल लौटने की अनुमति दी। अदालत ने साथ ही महिला के पति और ससुर को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार करें और किसी भी प्रकार की प्रताड़ना न करें। कोर्ट ने महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था भी लागू की है।

    यह मामला हैबियस कॉर्पस याचिका के रूप में अदालत के सामने आया था। याचिकाकर्ता प्रदीप राठौर ने कोर्ट में आरोप लगाया था कि उसकी बहन प्रियंका राठौर को उसके पति नरेंद्र राठौर और ससुर द्वारा मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। साथ ही यह भी कहा गया कि परिवार के लोगों को उससे संपर्क करने नहीं दिया जा रहा था, जिसके चलते मामला अदालत तक पहुंचा।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने महिला, उसके पति और अन्य संबंधित पक्षों को अदालत में पेश होने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान सभी पक्ष अदालत में उपस्थित हुए और जजों ने महिला सहित सभी की बात विस्तार से सुनी।

    सुनवाई के दौरान प्रियंका राठौर ने अदालत के सामने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि पति और ससुर अक्सर उन्हें परेशान करते हैं और कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि एक बार उसके पति ने उसे सीढ़ियों से धक्का देने की कोशिश भी की थी, जिससे वह काफी भयभीत हो गई थी।

    हालांकि, महिला ने अदालत को यह भी बताया कि उसका 8 वर्षीय बेटा है और वह अपने बेटे के भविष्य और परिवार को बचाने की कोशिश करना चाहती है। इसी कारण उसने फिलहाल ससुराल वापस जाकर रिश्तों को सुधारने और विवाद सुलझाने का एक मौका देने की इच्छा जताई।

    दूसरी ओर, महिला के पति नरेंद्र राठौर, जो एक बैंक में मार्केटिंग से जुड़े कार्य करते हैं, ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में अपनी पत्नी के साथ सम्मानजनक व्यवहार करेंगे और उसे किसी प्रकार की हानि नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि वे परिवार को साथ लेकर चलना चाहते हैं।

    महिला की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अदालत ने एक विशेष व्यवस्था भी की है। कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता अंजली ज्ञानानी और जनकगंज थाने की महिला आरक्षक अंतिमा तिवारी तथा आरती लोधी को छह महीने के लिए “शौर्य दीदी” के रूप में नियुक्त किया है। इनकी जिम्मेदारी होगी कि वे समय-समय पर महिला से संपर्क कर उसकी स्थिति की जानकारी लें और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि महिला के साथ किसी प्रकार की प्रताड़ना या दुर्व्यवहार की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।

    इस आदेश को घरेलू विवाद के मामलों में महिला सुरक्षा और पारिवारिक समाधान के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है, जहां अदालत ने एक ओर महिला की सुरक्षा सुनिश्चित की है तो दूसरी ओर परिवार को भी संबंध सुधारने का अवसर दिया है।

  • टीईटी अनिवार्यता के आदेश का विरोध तेज, राज्य कर्मचारी संघ ने सरकार से कहा-फैसला वापस लें

    टीईटी अनिवार्यता के आदेश का विरोध तेज, राज्य कर्मचारी संघ ने सरकार से कहा-फैसला वापस लें



    भोपाल । मध्यप्रदेश में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) पास करना अनिवार्य करने के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध मप्र राज्य कर्मचारी संघ ने स्कूल शिक्षा विभाग के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है और सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इस निर्देश से प्रदेश के लाखों शिक्षकों में असमंजस और असंतोष की स्थिति बन गई है।

    संघ ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े आदेश को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की जाए, ताकि पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा की जा सके।

    सेवा में कार्यरत शिक्षकों को परीक्षा देने का निर्देश
    राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी निर्देश में यह कहा गया है कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। जबकि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक कई वर्षों से नियमित रूप से सेवा दे रहे हैं।

    संघ का तर्क है कि यह आदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के प्रावधानों की गलत व्याख्या के आधार पर जारी किया गया है। यदि इसे लागू किया गया तो हजारों शिक्षकों के सामने अनावश्यक संकट खड़ा हो सकता है।

    2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर नियम लागू नहीं
    पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता मूल रूप से प्राथमिक (कक्षा 1 से 5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8) के लिए नए शिक्षकों की भर्ती के समय लागू की गई थी। यह नियम उन शिक्षकों के लिए बनाया गया था जो 2009 के बाद नियुक्त हुए हैं।

    संघ का कहना है कि मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक 2009 से पहले नियुक्त हुए थे और वे लंबे समय से सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे हैं। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक टीईटी परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न केवल अनुचित है बल्कि उनके मनोबल को भी प्रभावित करेगा।

    तीन लाख शिक्षकों में बढ़ा असमंजस
    राज्य कर्मचारी संघ के अनुसार शिक्षा विभाग ने अपने निर्देश में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला दिया है, लेकिन इस संबंध में राज्य सरकार या विभागीय स्तर पर कोई स्पष्ट नीति या आदेश जारी नहीं किया गया है। इसी कारण प्रदेश के लगभग तीन लाख शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है।

    संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश को तुरंत वापस नहीं लिया गया तो शिक्षक वर्ग में व्यापक असंतोष फैल सकता है। संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी पत्र पर तत्काल रोक लगाई जाए और शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए।

    न्यायालय जाने की भी चेतावनी
    संघ ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि यदि सरकार इस मामले में जल्द कोई स्पष्ट फैसला नहीं लेती, तो संगठन न्यायालय में पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) दायर करने पर भी विचार करेगा। उनका कहना है कि प्रदेश के शिक्षकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर कानूनी विकल्प अपनाया जाएगा।

  • भोपाल: सूखी सेवनिया स्टेशन पर 'ट्रेन हादसा' छत काटकर निकाले गए यात्री, NDRF और रेलवे की जॉइंट मॉक ड्रिल में दिखा रेस्क्यू का दम!

    भोपाल: सूखी सेवनिया स्टेशन पर 'ट्रेन हादसा' छत काटकर निकाले गए यात्री, NDRF और रेलवे की जॉइंट मॉक ड्रिल में दिखा रेस्क्यू का दम!


    भोपाल। राजधानी के नजदीक सूखी सेवनिया रेलवे स्टेशन पर गुरुवार सुबह ठीक 11 बजे एक बड़े रेल हादसे की ‘इमरजेंसी कॉल’ ने पूरे मंडल को अलर्ट मोड पर ला दिया। सूचना थी कि स्टेशन के पास एक ट्रेन पटरी से उतर गई है और कोच एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए हैं। देखते ही देखते मौके पर हूटर बजाती दुर्घटना राहत ट्रेनें (ART) और NDRF की टीमें पहुँच गईं। यह नजारा भोपाल रेल मंडल द्वारा आयोजित एक फुल स्केल मॉक ड्रिल का था, जिसका उद्देश्य आपदा के समय रिस्पांस टाइम और तालमेल को परखना था।

    रेस्क्यू ऑपरेशन: गैस कटर से काटी गई ट्रेन की छत
    मॉक ड्रिल को इतना वास्तविक रूप दिया गया था कि ड्रिल के दौरान ट्रेन के कोचों को एक-दूसरे के ऊपर चढ़ा हुआ दिखाया गया। अंदर फंसे ‘यात्रियों’ को बचाने के लिए टीमों ने निम्नलिखित कदम उठाए:

    कटर का इस्तेमाल: कोच के भीतर फंसे यात्रियों तक पहुँचने के लिए NDRF की टीम ने हाइड्रोलिक और गैस कटर का उपयोग कर खिड़कियों के शीशे तोड़े और ट्रेन की छत को काटकर रास्ता बनाया।
     बोगी के नीचे फंसे डमी यात्रियों को निकालने के लिए आधुनिक ‘हाई-प्रेशर एयरबैग्स’ का सहारा लिया गया, जिससे भारी-भरकम कोच को उठाकर रास्ता बनाया गया।बाहर निकाले गए यात्रियों को तुरंत मौके पर मौजूद रेलवे मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार दिया और एम्बुलेंस के जरिए ‘अस्पताल’ रवाना किया।

    अफसरों की मौजूदगी: डीआरएम ने खुद परखा रिस्पांस टाइम
    इस पूरी ड्रिल के दौरान भोपाल रेल मंडल के प्रबंधक (DRM) पंकज त्यागी अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने बचाव कार्य की बारीकियों का निरीक्षण किया और टीमों के तालमेल को सराहा।ड्रिल में रेलवे के आरपीएफ (RPF), जीआरपी (GRP), मेडिकल विंग और NDRF के जवानों ने एक साथ काम किया।स्टेशन मास्टर से सूचना मिलने के बाद राहत ट्रेनों के पहुँचने और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने तक का समय ‘गोल्डन ऑवर’ के मानकों के अनुरूप रहा।

    सुरक्षा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास है। सूखी सेवनिया में हुई यह मॉक ड्रिल इस बात का प्रमाण है कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में हमारी रेलवे और राहत टीमें कम से कम समय में जान-माल की रक्षा करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।

  • होम ग्राउंड पर चुनौती, Royal Challengers Bengaluru के लिए M. Chinnaswamy Stadium में शुरुआती मैच मुश्किल

    होम ग्राउंड पर चुनौती, Royal Challengers Bengaluru के लिए M. Chinnaswamy Stadium में शुरुआती मैच मुश्किल


    नई दिल्ली। भारत के पूर्व क्रिकेटर Abhinav Mukund का मानना है कि मौजूदा चैंपियन Royal Challengers Bengaluru (आरसीबी) को आगामी Indian Premier League सीजन में अपने घरेलू मैदान पर कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि टीम के शुरुआती मुकाबले काफी कठिन होंगे और खिलाड़ियों के लिए हालात को जल्दी समझना जरूरी होगा।

    चिन्नास्वामी स्टेडियम में चुनौतीपूर्ण शुरुआत
    मुकुंद के अनुसार M. Chinnaswamy Stadium की परिस्थितियां आरसीबी के लिए शुरुआत में थोड़ी मुश्किल साबित हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल टीम के चैंपियन बनने के बाद हुए विजय जुलूस के दौरान भगदड़ की घटना के बाद करीब आठ से नौ महीनों तक इस मैदान पर कोई प्रतिस्पर्धी क्रिकेट नहीं खेला गया। ऐसे में खिलाड़ियों को मैदान की स्थिति और पिच के व्यवहार को समझने में समय लग सकता है।

    विरोधी टीमों से कड़ी टक्कर
    मुकुंद ने JioHotstar पर बातचीत के दौरान कहा कि आरसीबी को अपने शुरुआती मैचों में मजबूत टीमों से भिड़ना है। टीम का पहला मुकाबला 28 मार्च को Sunrisers Hyderabad के खिलाफ होगा, जबकि 4 अप्रैल को उन्हें Chennai Super Kings से भिड़ना है। उन्होंने इन दोनों मुकाबलों को आरसीबी के लिए अग्नि परीक्षा जैसा बताया।

    घरेलू मैदान पर पिछला प्रदर्शन कमजोर
    पिछले सीजन में आरसीबी का प्रदर्शन अपने घरेलू मैदान की तुलना में बाहर के मैचों में बेहतर रहा था। बेंगलुरु की टीम घर पर केवल दो मैच जीत सकी थी, जबकि तीन मुकाबलों में उसे हार का सामना करना पड़ा। एक मैच बारिश के कारण रद्द हो गया था। यह आंकड़े बताते हैं कि टीम को अपने ही मैदान पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए और मेहनत करनी होगी।

    चिन्नास्वामी में आरसीबी का रिकॉर्ड
    आरसीबी ने M. Chinnaswamy Stadium में अब तक कुल 96 आईपीएल मैच खेले हैं। इनमें टीम को 46 मुकाबलों में जीत मिली है, जबकि 47 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। चार मैच ऐसे भी रहे जिनका कोई नतीजा नहीं निकल सका। आंकड़े बताते हैं कि इस मैदान पर आरसीबी का रिकॉर्ड संतुलित रहा है, इसलिए नए सीजन में टीम के लिए यहां मजबूत प्रदर्शन करना बेहद अहम होगा।

  • ‘इससे बड़ा पल नहीं’ -बैक टू बैक ICC Men's T20 World Cup खिताब पर Jasprit Bumrah की प्रतिक्रिया

    ‘इससे बड़ा पल नहीं’ -बैक टू बैक ICC Men's T20 World Cup खिताब पर Jasprit Bumrah की प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली। भारत के स्टार तेज गेंदबाज Jasprit Bumrah ने कहा है कि लगातार दो टी20 विश्व कप जीतना उनके करियर का सबसे खास और गर्व का पल है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा चुनौतीपूर्ण काम करना चाहते थे और क्रिकेट को भी इसी सोच के साथ चुना था। जब उन्हें मैदान पर कुछ अलग और खास करने का मौका मिलता है, तो उससे उन्हें बेहद खुशी मिलती है।

    चुनौती लेना हमेशा पसंद रहा
    Board of Control for Cricket in India (बीसीसीआई) के बीसीसीआई टीवी पर साझा किए गए एक वीडियो में बुमराह ने कहा कि वह कभी भी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहते। उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियों में टीम के लिए आगे आना ही असली खिलाड़ी की पहचान होती है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा मैच के अहम मौकों पर गेंदबाजी करना पसंद करते हैं और इसी चुनौती ने उन्हें क्रिकेट की ओर आकर्षित किया।

    अहमदाबाद से शुरू हुआ सफर
    बुमराह ने बताया कि उनका क्रिकेट करियर Ahmedabad से शुरू हुआ था। उन्होंने गुजरात के लिए खेलते हुए अपने खेल को निखारा और धीरे-धीरे राष्ट्रीय टीम तक पहुंचे। अब उसी धरती पर विश्व कप खेलना और फाइनल में शानदार प्रदर्शन करना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि पिछली बार टीम जीत से थोड़ा पीछे रह गई थी, लेकिन इस बार भारत ने बाजी मार ली।

    परिवार की मौजूदगी ने बनाया पल खास
    बुमराह ने कहा कि इस जीत को और खास बनाने वाली बात यह थी कि उनका परिवार भी उस समय उनके साथ मौजूद था। उनका बेटा और उनकी मां स्टेडियम में मौजूद थे, जिससे यह जीत उनके लिए और भावुक पल बन गई। उन्होंने कहा कि इस तरह के पल जीवन में बहुत कम आते हैं और वह इसके लिए भगवान के बेहद आभारी हैं।

    भारत ने रचा इतिहास
    भारतीय टीम ने 8 मार्च को खेले गए ICC Men’s T20 World Cup 2026 के फाइनल में New Zealand national cricket team को 96 रन से हराकर खिताब अपने नाम किया। इसके साथ ही India national cricket team लगातार दो टी20 विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बन गई। भारत अब तक कुल तीन टी20 विश्व कप खिताब जीत चुका है।

    फाइनल में बुमराह का शानदार प्रदर्शन
    फाइनल मुकाबले में बुमराह ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए चार ओवर में केवल 15 रन देकर चार विकेट झटके। उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया। इससे पहले सेमीफाइनल में भी उन्होंने शानदार गेंदबाजी कर टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

  • भ्रष्टाचार रोधी नियमों का उल्लंघन, International Cricket Council ने Jevon Searles समेत तीन लोगों को किया सस्पेंड

    भ्रष्टाचार रोधी नियमों का उल्लंघन, International Cricket Council ने Jevon Searles समेत तीन लोगों को किया सस्पेंड


    नई दिल्ली।अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद International Cricket Council (आईसीसी) ने भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों के चलते वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर Javon Searles, टाइटंस टीम के मालिक Chitranjan Rathod और टीम अधिकारी Griffith को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई Cricket West Indies और आईसीसी के एंटी-करप्शन कोड के तहत की गई है।

    ‘बिम10’ टूर्नामेंट से जुड़े आरोप
    आईसीसी के बयान के अनुसार तीनों पर 2023-24 में खेले गए BIM10 Tournament से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं, जो क्रिकेट वेस्टइंडीज एंटी-करप्शन कोड के दायरे में आते हैं। इसके अलावा टीम अधिकारी ग्रिफिथ पर अंतरराष्ट्रीय मैचों से जुड़ा एक अतिरिक्त आरोप भी है, जो सीधे आईसीसी एंटी-करप्शन कोड के तहत आता है।

    तुरंत प्रभाव से निलंबन
    आईसीसी ने बताया कि तीनों को तत्काल प्रभाव से क्रिकेट से निलंबित कर दिया गया है। हालांकि उन्हें आरोपों का जवाब देने के लिए 11 मार्च 2026 से 14 दिन का समय दिया गया है। इस दौरान वे अपने बचाव में जवाब दाखिल कर सकते हैं।

    अलग-अलग धाराओं में आरोप
    आईसीसी के अनुसार चितरंजन राठौड़ पर क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड के तहत तीन आरोप लगाए गए हैं, जबकि सियरल्स पर चार आरोप दर्ज किए गए हैं। वहीं टीम अधिकारी ग्रिफिथ पर क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड के तहत चार और आईसीसी कोड के तहत एक अतिरिक्त आरोप लगाया गया है।

    मैच फिक्सिंग से जुड़े आरोप
    क्रिकेट वेस्टइंडीज एंटी-करप्शन कोड के आर्टिकल 2.1.1 के तहत आरोप है कि ‘बिम10’ टूर्नामेंट 2023-24 के मैचों के नतीजे, आचरण या किसी अन्य पहलू को फिक्स करने, फिक्स करने की कोशिश करने या अनुचित तरीके से प्रभावित करने की कोशिश की गई। इसके अलावा आर्टिकल 2.1.4 के तहत खिलाड़ियों को भ्रष्ट गतिविधियों के लिए उकसाने, निर्देश देने या सुविधा उपलब्ध कराने के आरोप भी शामिल हैं।

    जांच में सहयोग न करने का आरोप
    आर्टिकल 2.4.4 के तहत आरोप है कि संभावित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में अधिकारियों के साथ उचित सहयोग नहीं किया गया। वहीं सियरल्स और ग्रिफिथ पर आर्टिकल 2.4.2 के उल्लंघन का भी आरोप है, जिसके तहत किसी भी संदिग्ध संपर्क या प्रस्ताव की जानकारी क्रिकेट वेस्टइंडीज को देना अनिवार्य होता है।

    ग्रिफिथ पर अतिरिक्त आरोप
    ग्रिफिथ पर आईसीसी एंटी-करप्शन कोड के आर्टिकल 2.4.7 के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है। इसके तहत आरोप है कि उन्होंने एंटी-करप्शन यूनिट की जांच में बाधा डालने, जरूरी जानकारी छिपाने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश की।

    आईपीएल में भी खेल चुके हैं सियरल्स
    गौरतलब है कि Javon Searles वेस्टइंडीज अंडर-19 टीम के लिए खेल चुके हैं और 2018 में Kolkata Knight Riders की ओर से Indian Premier League में भी हिस्सा ले चुके हैं। फिलहाल आईसीसी की इस कार्रवाई के बाद उनके क्रिकेट करियर पर सवाल खड़े हो गए हैं।

  • पश्चिम एशिया तनाव का असर: Silver में 5,000 रुपये से ज्यादा की तेजी, कीमती धातुओं में उछाल

    पश्चिम एशिया तनाव का असर: Silver में 5,000 रुपये से ज्यादा की तेजी, कीमती धातुओं में उछाल


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर शुरुआती कारोबार में सोने में हल्की गिरावट दिखी, लेकिन बाद में इसमें मजबूती लौट आई। वहीं चांदी ने शुरुआती कमजोरी से उबरते हुए तेज उछाल दर्ज किया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निचले स्तर पर मजबूत खरीदारी के कारण चांदी में यह तेजी देखने को मिली।

    सोने की कीमतों में हल्की बढ़त
    खबर लिखे जाने तक दोपहर करीब 1:36 बजे एमसीएक्स पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 361 रुपये यानी 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,62,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया। सोने ने दिन की शुरुआत 1,62,799 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से की थी, जो पिछले बंद भाव 1,61,789 रुपये से ज्यादा था। हालांकि बाद में वैश्विक बाजार से कमजोर संकेत मिलने के कारण इसकी कीमतों में कुछ गिरावट भी देखी गई।

    मांग क्षेत्र बना 1.56–1.57 लाख का स्तर
    विशेषज्ञों का मानना है कि 1,56,000 से 1,57,000 रुपये का स्तर सोने के लिए मजबूत मांग क्षेत्र बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार यदि कीमतें इस स्तर से ऊपर बनी रहती हैं, तो मध्यम अवधि में सोने का तेजी वाला रुझान बरकरार रह सकता है। अगर सोना 1,65,000 रुपये के स्तर से ऊपर मजबूती से निकलता है, तो आगे चलकर 1,75,000 से 1,80,000 रुपये तक नई तेजी देखने को मिल सकती है।

    चांदी में 5,900 रुपये से ज्यादा का उछाल
    दूसरी ओर चांदी की कीमतों में सत्र के दौरान मजबूत तेजी दर्ज की गई। एमसीएक्स पर मई डिलीवरी वाली चांदी 5,911 रुपये यानी 2.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,74,402 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। चांदी ने 2,69,212 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की थी, जो इसके पिछले बंद भाव 2,68,491 रुपये से थोड़ा ज्यादा था। दिन के दौरान मजबूत खरीदारी के कारण इसकी कीमतों में तेजी और बढ़ गई।

    वैश्विक बाजार में मिला-जुला रुख
    वैश्विक बाजार में हालांकि सोने की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड लगभग 0.2 प्रतिशत गिरकर 5,165.73 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी करीब 0.2 प्रतिशत गिरकर 5,171.40 डॉलर प्रति औंस पर रहे। वहीं स्पॉट सिल्वर लगभग स्थिर रहकर 85.82 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा।

    पश्चिम एशिया तनाव का असर
    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे समय में निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग बढ़ जाती है। पिछले कुछ दिनों में इसी वजह से इन धातुओं की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

    तेल और डॉलर के कारण कमजोर हुआ रुपया
    इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय मुद्रा Indian Rupee भी दबाव में आ गई। गुरुवार को रुपया अमेरिकी मुद्रा United States Dollar के मुकाबले करीब 0.3 प्रतिशत गिरकर 92.3575 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इससे पहले इसी सप्ताह रुपया 92.3475 के स्तर तक गिरा था, जिसे गुरुवार को पार कर दिया गया।