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  • ग्वालियर में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर पथराव: गिरवाई में पुलिस और भीड़ आमने-सामने, हालात काबू करने के लिए किया गया बल प्रयोग

    ग्वालियर में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर पथराव: गिरवाई में पुलिस और भीड़ आमने-सामने, हालात काबू करने के लिए किया गया बल प्रयोग




    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Gwalior में अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम पर भीड़ ने पथराव कर दिया, जिसके बाद स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। घटना शहर के Girwai इलाके की बताई जा रही है। विवाद बढ़ने पर पुलिस को हालात नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    जानकारी के मुताबिक तहसीलदार न्यायालय द्वारा एक जमीन पर बेदखली का आदेश जारी किया गया था। इसी आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची थी। प्रशासन की टीम का उद्देश्य जमीन से अतिक्रमण हटाकर उसे खाली कराना था।

    बताया जा रहा है कि उस जमीन पर कुछ लोग लंबे समय से मकान बनाकर रह रहे थे। जैसे ही प्रशासन की टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, वहां मौजूद लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह विरोध उग्र हो गया और मौके पर मौजूद भीड़ ने पुलिस और प्रशासनिक अमले पर पथराव शुरू कर दिया।

    पथराव के बाद स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। वायरल वीडियो में पुलिस और भीड़ के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट जैसी स्थिति भी दिखाई दे रही है। कुछ वीडियो में पुलिसकर्मियों द्वारा लाठीचार्ज करते हुए भी देखा जा सकता है, जिसमें महिलाओं के साथ भी सख्ती बरतने के आरोप सामने आए हैं।

    घटना के दौरान इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हालात पर काबू पा लिया। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और पथराव करने वालों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

    प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेश का पालन कराने के लिए ही यह कार्रवाई की जा रही थी। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय दिए बिना अचानक कार्रवाई की गई, जिसके कारण विवाद की स्थिति बनी।

    फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि दोबारा किसी तरह की अशांति न फैले।

    Keywords: ग्वालियर गिरवाई पथराव, अतिक्रमण हटाने कार्रवाई, ग्वालियर पुलिस लाठीचार्ज, गिरवाई जमीन विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई ग्वालियर, पथराव वीडियो वायरल, पुलिस भीड़ झड़प, मध्यप्रदेश कानून व्यवस्था.

  • मंत्री परमार ने चित्रकूट के पंचवटी घाट पर किया श्रमदान, मां मंदाकिनी नदी को स्वच्छ रखने का संदेश दिया

    मंत्री परमार ने चित्रकूट के पंचवटी घाट पर किया श्रमदान, मां मंदाकिनी नदी को स्वच्छ रखने का संदेश दिया


    भोपाल । चित्रकूट की पवित्र घाटियों में सोमवार को एक जीवंत दृश्य देखने को मिला जब उच्च शिक्षा तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने पंचवटी घाट पर माँ मंदाकिनी नदी के स्वच्छता अभियान में स्वयं हाथ बंटाया। मंत्री ने घाट परिसर में सफाई करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं स्थानीय नागरिकों और प्रशासनिक अधिकारियों को स्वच्छता के महत्व की याद दिलाई और जनभागीदारी की प्रेरणा दी।

    मंत्री परमार ने कहा कि चित्रकूट धार्मिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ बहने वाली माँ मंदाकिनी नदी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसकी स्वच्छता बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि जनभागीदारी से ही सफल होने वाला एक जनआंदोलन है।

    घाट परिसर में पहुंचे सभी लोगों के साथ मिलकर मंत्री ने कचरा एकत्रित किया आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित किया और लोगों से आग्रह किया कि वे नदी में कोई कचरा न डालें। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय समुदाय प्रशासन और आगंतुकों का सहयोग ही स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक पर्यावरण सुनिश्चित कर सकता है।

    इस अवसर पर जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर माँ मंदाकिनी की स्वच्छता के लिए श्रमदान किया और इस पहल का उत्साहजनक समर्थन किया। मंत्री परमार ने आशा जताई कि इस प्रकार के अभियान स्थानीय लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी को बढ़ाएंगे।

    मंत्री ने यह भी कहा कि स्वच्छता के लिए छोटे छोटे प्रयास भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। नदी और घाट का पर्यावरण केवल प्रशासनिक कर्मियों का कार्यक्षेत्र नहीं बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखें और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाएं।

    इस मौके पर उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा कि इस तरह के अभियान धार्मिक स्थलों की साफ सफाई के साथ साथ स्थानीय पर्यटन और स्वास्थ्य के लिए भी बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि पंचवटी घाट जैसे धार्मिक स्थल स्वच्छ रहेंगे तो वहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का अनुभव भी सकारात्मक होगा।

    घाट पर श्रमदान करते हुए मंत्री परमार ने यह संदेश भी दिया कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का काम केवल सरकार के हाथ में नहीं छोड़ना चाहिए। हर नागरिक की भागीदारी से ही माँ मंदाकिनी और अन्य नदियों का जल स्वच्छ और सुरक्षित रहेगा। यह कदम चित्रकूट के धार्मिक और सामाजिक जीवन में स्वच्छता के प्रति नई चेतना का प्रतीक बन गया है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के टूरिज्म सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों लोगों ने फिलहाल अपने ट्रैवल प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की संभावना थी, लेकिन मौजूदा हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी या नई बुकिंग ही नहीं कराई।

    ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म MakeMyTrip की भोपाल लोकेशन हेड Richa Singh Bhadauria के मुताबिक लगभग 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले से फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जो सीधे प्रभावित हुए हैं। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने अनिश्चित हालात को देखते हुए अपनी यात्रा योजनाएं टाल दी हैं। हालांकि फिलहाल इंटरनेशनल ट्रैवल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन पर्यटन कारोबार में साफ तौर पर सुस्ती देखी जा रही है।

    60 करोड़ का संभावित कारोबार अटका
    मिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपए प्रति व्यक्ति का होता है। यदि 60 हजार रुपए का औसत और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपए का संभावित ट्रैवल कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि सभी मामलों में पूरी राशि का नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड या क्रेडिट शेल का विकल्प दे रही हैं।

    60–70% यात्रियों को मिला पूरा रिफंड
    ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार प्रभावित बुकिंग्स में से लगभग 60 से 70 प्रतिशत यात्रियों को पूरा रिफंड मिल गया है। ऐसा उन मामलों में हुआ जहां एयरलाइंस ने खुद फ्लाइट रद्द की या शेड्यूल बदला। वहीं करीब 15 से 25 प्रतिशत यात्रियों को आंशिक नुकसान हुआ है, जो मुख्य रूप से वीजा फीस, होटल कैंसिलेशन पॉलिसी या नॉन-रिफंडेबल बुकिंग के कारण हुआ। कई यात्रियों ने रिफंड लेने के बजाय भविष्य के लिए ट्रैवल क्रेडिट या क्रेडिट शेल का विकल्प चुना है।

    भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा कैंसिलेशन
    ट्रैवल ट्रेड के अनुभव के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी कुछ प्रभाव देखा गया है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं बल्कि धीमी पड़ गई हैं।

    क्रूज ट्रैवल में भी 30–40% गिरावट
    वैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री अपनी यात्रा पूरी तरह रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं।

    लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा प्रभावित
    मौजूदा हालात का सबसे ज्यादा असर लीजर ट्रैवल सेगमेंट पर पड़ा है, जिसमें फैमिली हॉलीडे, हनीमून ट्रिप और ग्रुप टूर शामिल हैं। इसके मुकाबले कॉर्पोरेट ट्रैवल अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है, क्योंकि बिजनेस मीटिंग और काम से जुड़े यात्राओं को पूरी तरह टालना कई बार संभव नहीं होता।

    एयरलाइंस दे रही लचीले विकल्प
    मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई एयरलाइंस यात्रियों को राहत देने की कोशिश कर रही हैं। कुछ कंपनियां क्रेडिट शेल की वैधता बढ़ा रही हैं, जबकि कई एयरलाइंस बिना अतिरिक्त शुल्क के भविष्य की तारीख पर रीबुकिंग की सुविधा दे रही हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री का फोकस फिलहाल यात्रियों का भरोसा बनाए रखने और सुरक्षित समय पर यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने पर है।

    तनाव लंबा चला तो बढ़ सकता है असर
    ट्रैवल इंडस्ट्री का मानना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है, क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है, तो इंटरनेशनल टूरिज्म में गिरावट और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों की मांग फिर तेजी से वापस लौट सकती है।

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  • फूड एक्सपोर्ट में भारत का दम, आंकड़ा 5 लाख करोड़ के करीब: पीयूष गोयल

    फूड एक्सपोर्ट में भारत का दम, आंकड़ा 5 लाख करोड़ के करीब: पीयूष गोयल


    नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने कहा कि भारत का खाद्य और कृषि उत्पादों का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है और अब यह सालाना करीब 5 लाख करोड़ रुपये (55 अरब डॉलर से अधिक) तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की कृषि क्षमता और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाती है।
    नई दिल्ली में आयोजित Aahar – The International Food and Hospitality Fair के 40वें संस्करण के उद्घाटन के दौरान उन्होंने खाद्य, कृषि और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत के लोगों से अपील की कि वे मिलकर भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बनाने की दिशा में काम करें। गोयल ने कहा कि सरकार की नीतियां, बढ़ते व्यापार समझौते और वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों की मांग इस दिशा में बड़े अवसर पैदा कर रही हैं।

    कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में तेज उछाल
    मंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों यानी 2014 से 2025 के दौरान भारत के कृषि और खाद्य निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में प्रोसेस्ड फूड का निर्यात चार गुना, फल और दालों का निर्यात तीन गुना और प्रोसेस्ड सब्जियों का निर्यात चार गुना बढ़ा है। इसके अलावा कोको का निर्यात तीन गुना और अनाज का निर्यात दोगुना हो गया है। वहीं चावल का निर्यात भी इस अवधि में करीब 62 प्रतिशत बढ़ा है। गोयल ने कहा कि इन उपलब्धियों ने भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों की कतार में ला खड़ा किया है। वर्तमान में भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कृषि उत्पाद निर्यातक बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आगे और बड़ी संभावनाओं का संकेत देती है।

    ‘दुनिया की फूड बास्केट’ बनने की दिशा में भारत
    गोयल ने कहा कि भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में दुनिया में शीर्ष स्थान दिलाने का लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जा सकता है। यह लक्ष्य प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस विजन से जुड़ा है, जिसमें भारत को “दुनिया की फूड बास्केट” बनाने की बात कही गई है।
    उन्होंने कहा कि इसके लिए किसानों, उद्यमियों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यातकों को मिलकर काम करना होगा। यदि उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर ज्यादा ध्यान दिया जाए तो भारतीय कृषि उत्पाद वैश्विक बाजार में और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।

    व्यापार समझौतों से खुले नए वैश्विक बाजार
    मंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, जिनके जरिए 38 विकसित और समृद्ध देशों के बाजारों तक पहुंच मिली है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुले हैं और भारतीय कंपनियां वैश्विक वैल्यू चेन से तेजी से जुड़ रही हैं।
    उन्होंने कहा कि आज भारत को वैश्विक व्यापार के करीब दो-तिहाई हिस्से तक प्राथमिक बाजार पहुंच प्राप्त है। इससे भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य बन रहा है और निर्यात के नए रास्ते खुल रहे हैं।

    किसानों और एमएसएमई के हितों की सुरक्षा
    गोयल ने स्पष्ट किया कि एफटीए वार्ताओं के दौरान सरकार ने किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी उत्पादकों को कोई रियायत नहीं दी गई है। इसी तरह जीन संशोधित (GM) उत्पादों को भी शुल्क में छूट या बाजार तक पहुंच नहीं दी गई है। इसके अलावा चावल, गेहूं, मक्का, सोया मील और कई तरह की दालों जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों को भी व्यापार समझौतों में सुरक्षित रखा गया है। वहीं चीनी क्षेत्र में भी आम तौर पर कोई रियायत नहीं दी गई है, ताकि विदेशी आयात से भारतीय किसानों और घरेलू उत्पादकों को नुकसान न हो।

    एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से बढ़ेगा वैल्यू एडिशन
    मंत्री ने किसानों और उद्यमियों से Agriculture Infrastructure Fund के 1 लाख करोड़ रुपये के फंड का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर ध्यान देने से किसानों को वैश्विक बाजार में बेहतर कीमत मिल सकती है।
    उन्होंने कहा कि अब बड़ी संख्या में छोटे उद्यम भी फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

    आहार मेले में पहली बार इटली बना पार्टनर देश
    गोयल ने बताया कि इस वर्ष आयोजित आहार फूड एंड हॉस्पिटैलिटी फेयर में Italy को पहली बार पार्टनर देश बनाया गया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 13 मार्च और शनिवार को यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए भी खोली जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे खासकर युवाओं को भारत और दुनिया के फूड, बेवरेज और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की ताकत को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

  • मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार, 4865 युवाओं को गांवों में मिलेगी जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार, 4865 युवाओं को गांवों में मिलेगी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री Mohan Yadav की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री Chaitanya Kashyap ने बताया कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि स्वामित्व को मजबूत करने और योजनाओं की निगरानी बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठा रही है।

    46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च सरकार देगी
    कैबिनेट ने फैसला लिया है कि SVAMITVA Yojana के तहत प्रदेश के करीब 46 लाख ग्रामीण नागरिकों की संपत्ति रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क राज्य सरकार खुद वहन करेगी। इस निर्णय से सरकार पर करीब 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।

    इस योजना की शुरुआत Ministry of Panchayati Raj ने वर्ष 2020 में की थी। इसके तहत ड्रोन तकनीक से गांवों की आबादी वाली जमीन का सीमांकन कर प्रॉपर्टी कार्ड दिए जाते हैं। इससे ग्रामीणों को कानूनी स्वामित्व मिलता है, भूमि विवाद कम होते हैं और बैंक से लोन लेने में भी आसानी होती है।

    योजनाओं का फीडबैक लेने नया कार्यक्रम
    कैबिनेट ने योजनाओं की जमीनी स्थिति जानने के लिए “सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम” शुरू करने का भी निर्णय लिया है। यह कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा।

    इसके तहत प्रदेश के हर विकासखंड से 15 युवाओं का चयन किया जाएगा और कुल 4865 युवाओं को गांवों में तैनात किया जाएगा। चयन प्रक्रिया Atal Bihari Vajpayee School of Good Governance and Policy Analysis के माध्यम से होगी।

    युवाओं को मिलेगा मानदेय
    चयनित युवाओं को 10 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा और उन्हें एक साल के अनुबंध पर रखा जाएगा। इस पूरी योजना पर तीन साल में लगभग 170 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने-अपने विकासखंड में चल रही सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का अध्ययन और फीडबैक रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन स्कूल के जरिए मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इसके लिए विशेष डैशबोर्ड और डिजिटल पोर्टल भी बनाया जाएगा।

    2031 तक जारी रहेंगी कई योजनाएं
    कैबिनेट ने ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, योजना-आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनजातीय कार्य और महिला-बाल विकास सहित सात विभागों की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने के लिए 33,240 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

    इनमें महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग की योजनाएं, छात्रवृत्ति कार्यक्रम, आरडीएसएस योजना, दिव्यांगजनों के लिए प्रोफेशनल टैक्स में छूट और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।

    स्वास्थ्य केंद्रों में होगी भर्ती
    कैबिनेट ने मैहर, निमरानी और कैमोर में पीएफआईसी के तहत अस्पतालों के लिए स्टाफ भर्ती को मंजूरी दी है। श्रम विभाग के माध्यम से डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों सहित 51 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। साथ ही चितरंगी में व्यवहार न्यायाधीश के पद को भी मंजूरी दी गई है।

    ‘एक जिला-एक उत्पाद’ को बढ़ावा
    राज्य सरकार ने One District One Product योजना के तहत स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए 37.50 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की है। इस योजना में एमएसएमई, उद्योग और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग मिलकर काम करेंगे।

    कैबिनेट बैठक में इन मुद्दों पर भी चर्चा
    बैठक से पहले कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं। सरकार ने गेहूं की खरीदी के लिए MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल पर 40 रुपये बोनस जोड़कर 2625 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद का फैसला किया। वहीं उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय भी लिया गया।

    इसके अलावा मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल Pachmarhi को जर्मनी द्वारा “ग्रीन डेस्टिनेशन” प्रमाणन मिलने को प्रदेश के पर्यटन के लिए बड़ी उपलब्धि बताया गया।

  • कुकिंग गैस पर सरकार का बड़ा फैसला, PNG और LPG की निर्बाध सप्लाई के आदेश

    कुकिंग गैस पर सरकार का बड़ा फैसला, PNG और LPG की निर्बाध सप्लाई के आदेश


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने Essential Commodities Act (ईसीए) के तहत अहम आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के तहत घरेलू रसोई के लिए Piped Natural Gas (PNG), परिवहन के लिए Liquefied Petroleum Gas (LPG) और Compressed Natural Gas (CNG) की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से बढ़ी चिंता
    सरकार के आकलन के अनुसार मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण Strait of Hormuz के रास्ते आने वाले Liquefied Natural Gas (LNG) के शिपमेंट में बाधा आई है। कुछ आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर की घोषणा भी की है, जिसके तहत सीमित आपूर्ति को पहले प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।

    रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश
    सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम को भी एलपीजी पूल में भेजने के लिए कहा गया है, ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके।

    उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस आपूर्ति तय
    आदेश के अनुसार प्राथमिकता क्षेत्र-2 में आने वाले उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति उनके पिछले छह महीनों की औसत खपत के 70 प्रतिशत तक सुनिश्चित की जाएगी।

    साथ ही यह भी कहा गया है कि इन संयंत्रों को गैस का इस्तेमाल केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही करना होगा। इसके लिए उन्हें प्रमाण पत्र Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) को जमा करना होगा।

    उद्योगों को भी सीमित आपूर्ति जारी रहेगी
    गैस मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि प्राथमिकता क्षेत्र-1 में आने वाले चाय उद्योग, विनिर्माण इकाइयों और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय गैस ग्रिड के माध्यम से गैस की आपूर्ति जारी रखी जाए।

    इन उपभोक्ताओं को परिचालन उपलब्धता के आधार पर पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत के 80 प्रतिशत तक गैस आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    सिटी गैस नेटवर्क को भी निर्देश
    आदेश में यह भी कहा गया है कि City Gas Distribution (CGD) नेटवर्क संचालित करने वाली कंपनियां अपने नेटवर्क से जुड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को भी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराएं।

    सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति में संभावित संकट के बीच घरेलू और आवश्यक क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि आम लोगों की रसोई और जरूरी उद्योगों पर इसका असर कम से कम पड़े।

  • सास बहू से देवरानी जेठानी तक: रिश्तों की साझेदारी से चमक रहा छिंदवाड़ा का ग्रामीण पर्यटन

    सास बहू से देवरानी जेठानी तक: रिश्तों की साझेदारी से चमक रहा छिंदवाड़ा का ग्रामीण पर्यटन


    छिंदवाड़ा । छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्राम धीरे धीरे एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। सास बहू मां बेटी या देवरानी जेठानी जैसे रिश्ते अब केवल पारिवारिक संबंध नहीं बल्कि ग्रामीण पर्यटन की नई ताकत बन गए हैं। ग्राम धूसावानी में श्रीमती मनेशी धुर्वे और उनकी सास श्रीमती अलका धुर्वे इस बदलाव की मिसाल हैं। दोनों मिलकर अपने होम स्टे में पर्यटकों का स्वागत करती हैं भोजन तैयार करती हैं और पूरे उत्साह के साथ मेहमाननवाजी करती हैं।

    सावरवानी गांव में भी श्रीमती मालती यदुवंशी अपनी सास श्रीमती शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम स्टे का संचालन कर रही हैं। यह केवल दो परिवारों की कहानी नहीं बल्कि पूरे जिले में ग्रामीण पर्यटन में महिलाओं की भागीदारी की एक जीवंत तस्वीर है। इन होम स्टे से महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता तो मिल रही है साथ ही रिश्तों में विश्वास और सहयोग का नया आयाम भी देखने को मिल रहा है।

    छिंदवाड़ा जिला अब मध्यप्रदेश के उन जिलों में शामिल है जहाँ सबसे अधिक होम स्टे संचालित हैं। जिले में लगभग 50 से अधिक होम स्टे हैं और इन सबका पंजीकरण महिलाओं के नाम पर है। संचालन की ज़िम्मेदारी भी अधिकांशतः महिलाएं ही संभालती हैं। सावरवानी चोपना काजरा देवगढ़ चिमटीपुर गुमतरा और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में महिलाएं स्थानीय संस्कृति खानपान और आतिथ्य के हर पहलू को संभाल रही हैं।

    पर्यटक इन होम स्टे में आने पर केवल ठहरने नहीं आते बल्कि ग्रामीण जीवन और संस्कृति के करीब से अनुभव करते हैं। महिलाएं पर्यटकों के लिए पारंपरिक व्यंजन तैयार करती हैं लोकनृत्य और लोकगायन से उन्हें क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती हैं। इससे पर्यटकों को ग्रामीण अनुभव मिलता है और महिलाओं को आर्थिक सम्मान भी प्राप्त होता है।

    सास बहू मां बेटी देवरानी जेठानी जैसे रिश्तों की यह साझेदारी ग्रामीण पर्यटन के लिए नई पहचान बन गई है। महिलाएं स्वागत से लेकर भोजन आवास और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रबंधन तक पूरी जिम्मेदारी लेती हैं। यह पहल साबित कर रही है कि परिवार की महिलाएं मिलकर केवल घर ही नहीं बल्कि पूरे गांव की विकास यात्रा को आगे बढ़ा सकती हैं।

    स्थानीय लोग मानते हैं कि होम स्टे की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ साथ पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ा रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों का और विस्तार होने की संभावनाएं भी उज्ज्वल दिखाई दे रही हैं। छिंदवाड़ा का यह ग्रामीण पर्यटन मॉडल यह दिखाता है कि रिश्तों का सहयोग और विश्वास नई आर्थिक और सामाजिक दिशा में कैसे बदल सकता है।

  • भारत में नौकरियों की बहार! अप्रैल-जून में हायरिंग आउटलुक 68% के रिकॉर्ड स्तर पर

    भारत में नौकरियों की बहार! अप्रैल-जून में हायरिंग आउटलुक 68% के रिकॉर्ड स्तर पर


    नई दिल्ली। वैश्विक मानव संसाधन कंपनी ManpowerGroup की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में कंपनियां कर्मचारियों की भर्ती को लेकर काफी आशावादी हैं। 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए Net Employment Outlook (NEO) बढ़कर 68 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 17 प्रतिशत अंक और पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 24 प्रतिशत अंक अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद और Goods and Services Tax (GST) के तहत हुए सुधारों से कंपनियों को फायदा मिल रहा है, जिससे नई भर्तियों की योजना तेज हुई है।

    फाइनेंस और इंश्योरेंस सेक्टर में सबसे ज्यादा अवसर
    रिपोर्ट के मुताबिक फाइनेंस और इंश्योरेंस सेक्टर में भर्ती का आउटलुक सबसे मजबूत रहा, जो 71 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 8 अंक और सालाना आधार पर 26 अंक की बढ़ोतरी दर्शाता है। इससे संकेत मिलता है कि वित्तीय सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में नौकरी के अवसर तेजी से बढ़ सकते हैं।

    यूटिलिटीज और नेचुरल रिसोर्सेज में भी बड़ा उछाल
    यूटिलिटीज और नेचुरल रिसोर्सेज सेक्टर में तिमाही आधार पर सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस सेक्टर का आउटलुक 22 अंक बढ़कर चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह 2021 की चौथी तिमाही के बाद इस क्षेत्र का सबसे मजबूत भर्ती संकेत है।

    हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भर्ती धीमी
    दूसरी ओर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भर्ती का आउटलुक सबसे कम 31 प्रतिशत रहा। इससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र की कंपनियां फिलहाल भर्ती को लेकर कुछ सतर्क बनी हुई हैं।

    ऑटो और आईटी सेक्टर में नौकरियों की ज्यादा उम्मीद
    रिपोर्ट के अनुसार नई नौकरियों के मामले में ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके बाद आईटी और आईटी सर्विसेज सेक्टर का स्थान है, जहां कंपनियां बड़े पैमाने पर भर्ती की योजना बना रही हैं।

    कंपनियों को कुशल कर्मचारियों की कमी
    Sandeep Gulati ने कहा कि 2026 की दूसरी तिमाही के आंकड़े एक मिश्रित स्थिति दिखाते हैं।
    एक तरफ कंपनियां भर्ती को लेकर काफी उत्साहित हैं, वहीं दूसरी ओर योग्य और कुशल प्रतिभा की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 82 प्रतिशत कंपनियों को जरूरत के मुताबिक योग्य कर्मचारी ढूंढने में कठिनाई हो रही है।

    उत्तर भारत में सबसे ज्यादा भर्ती की उम्मीद
    क्षेत्रीय स्तर पर देखा जाए तो भारत के उत्तरी क्षेत्र में भर्ती का आउटलुक सबसे मजबूत रहा, जहां NEO करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं पूर्वी क्षेत्र में तिमाही आधार पर सबसे तेज सुधार देखने को मिला है, जहां उम्मीदें 20 अंक बढ़ गई हैं। यह 2012 की तीसरी तिमाही के बाद इस क्षेत्र का सबसे ऊंचा स्तर है।

    एआई का बढ़ रहा इस्तेमाल
    रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 87 प्रतिशत कंपनियां भर्ती, ऑनबोर्डिंग और ट्रेनिंग की प्रक्रिया में Artificial Intelligence (AI) का इस्तेमाल कर रही हैं।

    एशिया-प्रशांत क्षेत्र में AI अपनाने की औसत दर करीब 80 प्रतिशत है। इस मामले में China 95 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है, जबकि India दूसरे स्थान पर है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में AI और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से भर्ती की प्रक्रिया और तेज तथा प्रभावी हो सकती है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश के पर्यटन पर: 10 हजार यात्रियों ने रोकी विदेश यात्रा, 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश के पर्यटन पर: 10 हजार यात्रियों ने रोकी विदेश यात्रा, 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप क्षेत्र में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के पर्यटन कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों पर्यटकों ने फिलहाल अपने प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने यात्रा टाल दी है।

    हजारों बुकिंग प्रभावित, कई यात्रियों ने नए प्लान ही नहीं बनाए
    ट्रैवल कंपनियों के मुताबिक करीब 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले ही फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जिन पर सीधे असर पड़ा है। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने हालात को देखते हुए नई बुकिंग ही नहीं कराई या अपनी यात्रा संबंधी पूछताछ वापस ले ली। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन ट्रैवल इंडस्ट्री में साफ तौर पर मंदी का संकेत दिखाई देने लगा है।

    करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावित
    मिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपये प्रति व्यक्ति का होता है। अगर औसत 60 हजार रुपये प्रति व्यक्ति और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड, क्रेडिट शेल या रीबुकिंग का विकल्प दे रही हैं, जिससे पूरा नुकसान नहीं माना जा रहा।

    भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा असर
    ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से बुकिंग कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी प्रभाव है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह रुकी नहीं हैं बल्कि धीमी पड़ी हैं।

    क्रूज ट्रैवल में भी आई गिरावट
    वैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री क्रूज ट्रिप रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं।

    घरेलू पर्यटन की ओर बढ़ा रुझान
    अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए अब कई यात्री घरेलू पर्यटन की ओर रुख कर रहे हैं। ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक हाल के दिनों में हिमाचल, गोवा, केरल और राजस्थान जैसे पर्यटन स्थलों के लिए पूछताछ बढ़ी है। जो परिवार पहले दुबई या यूरोप की योजना बना रहे थे, वे अब भारत के भीतर ही छुट्टियां मनाने के विकल्प तलाश रहे हैं।

    साउथ-ईस्ट एशिया बन रहा नया विकल्प
    मिडिल ईस्ट के विकल्प के रूप में अब यात्रियों का रुझान दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर भी बढ़ रहा है। सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों के लिए इंक्वायरी बढ़ने लगी है। आसान वीजा प्रक्रिया और अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल के कारण पर्यटक इन्हें बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

    अगर तनाव लंबा चला तो और बढ़ सकता है असर
    ट्रैवल इंडस्ट्री का कहना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर असर और बढ़ सकता है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों का भरोसा लौटेगा और पर्यटन बाजार फिर तेजी से उभर सकता है।

  • शेयर बाजार में शानदार रैली! सेंसेक्स 650 अंक चढ़ा, निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    शेयर बाजार में शानदार रैली! सेंसेक्स 650 अंक चढ़ा, निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें


    नई दिल्ली। मंगलवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में अच्छी तेजी दर्ज की गई। सुबह करीब 11:45 बजे BSE Sensex 668 अंक यानी 0.68 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,224 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 भी 198 अंक या 0.85 प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,225 के स्तर पर पहुंच गया।

    बाजार में यह तेजी कई घरेलू और वैश्विक कारणों के चलते देखने को मिल रही है, जिनमें कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों का सकारात्मक रुख प्रमुख हैं।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी
    लार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की मजबूत खरीदारी देखने को मिली। Nifty Midcap 100 Index 721 अंक यानी 1.28 प्रतिशत की तेजी के साथ 56,892 पर पहुंच गया। वहीं Nifty Smallcap 100 Index 274 अंक या 1.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,406 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में व्यापक खरीदारी हो रही है और निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को मिला सहारा
    भारतीय बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को माना जा रहा है। Brent Crude की कीमत करीब 6 प्रतिशत गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है।

    गौरतलब है कि एक दिन पहले यानी सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में आई तेज गिरावट से ऊर्जा लागत कम होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे शेयर बाजार को समर्थन मिला है।

    ट्रंप के बयान से कम हुआ भू-राजनीतिक तनाव
    कच्चे तेल में आई गिरावट के पीछे अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का बयान भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि Iran के साथ चल रहा युद्ध समाप्त होने के करीब है।

    इस बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव कम होने की उम्मीद बनी, जिससे तेल की कीमतों में नरमी आई और इसका सकारात्मक असर शेयर बाजार पर पड़ा।

    रुपये की मजबूती से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
    शेयर बाजार में तेजी का एक कारण डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा की मजबूती भी है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया मजबूत दिखाई दिया।

    कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये का उच्चतम स्तर 91.72 और न्यूनतम स्तर 92.33 रहा। मजबूत रुपये से आयात लागत कम होने की उम्मीद रहती है, जिससे बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बनता है।

    इंडिया विक्स में गिरावट से घटा बाजार का डर
    बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला India VIX भी मंगलवार को तेजी से नीचे आया। खबर लिखे जाने तक यह करीब 15.37 प्रतिशत गिरकर 19.77 पर पहुंच गया था। इंडिया विक्स में गिरावट का मतलब है कि बाजार में डर कम हो रहा है और निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है, जो शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।

    वैश्विक बाजारों से भी मिला समर्थन
    वैश्विक बाजारों में तेजी का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिला। एशिया के प्रमुख बाजार जैसे Nikkei 225, Shanghai Composite Index और Hang Seng Index बढ़त के साथ खुले।

    इसके अलावा सोल, बैंकॉक और जकार्ता के बाजारों में भी मजबूती देखी गई। वहीं अमेरिकी बाजार भी सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और भारतीय शेयर बाजार को भी सहारा मिला।