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  • कल्कि 2898 एडी’ में सबसे महंगे एक्टर कौन? जानिए किसे मिले थे रोजाना 2 मिलियन डॉलर

    कल्कि 2898 एडी’ में सबसे महंगे एक्टर कौन? जानिए किसे मिले थे रोजाना 2 मिलियन डॉलर


    नई दिल्ली। साइंस-फिक्शन फिल्म Kalki 2898 AD रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई। निर्देशक Nag Ashwin की इस महत्वाकांक्षी फिल्म में कई बड़े सितारे नजर आए, जिनमें Prabhas, Amitabh Bachchan, Deepika Padukone और Kamal Haasan जैसे नाम शामिल थे। फिल्म का भव्य विजुअल, दमदार कहानी और शानदार स्टारकास्ट दर्शकों को खूब पसंद आई। हालांकि फिल्म की सफलता के साथ एक और बात चर्चा में आई-इस फिल्म में सबसे ज्यादा फीस किस अभिनेता ने ली।

    कमल हासन बने सबसे महंगे स्टार
    रिपोर्ट्स के अनुसार इस फिल्म में सबसे ज्यादा फीस साउथ के दिग्गज अभिनेता Kamal Haasan को मिली। फिल्ममेकर युगी सेतु ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि कमल हासन को इस फिल्म के लिए करीब 150 करोड़ रुपये दिए गए थे। खास बात यह है कि उन्होंने फिल्म की शूटिंग के लिए बहुत कम समय दिया था, लेकिन उनकी फीस फिर भी सबसे ज्यादा रही। युगी सेतु ने बताया कि कमल हासन को लगभग 20 दिनों की कॉल शीट के लिए यह रकम दी गई थी।

    हर दिन की फीस ने चौंकाया
    इंटरव्यू में युगी सेतु ने कहा कि कमल हासन का कद और अनुभव ही ऐसा है कि उन्हें इतनी बड़ी फीस दी गई। उन्होंने बताया कि अगर 150 करोड़ रुपये को शूटिंग के दिनों के हिसाब से देखा जाए तो उनकी प्रति दिन की फीस लगभग 1 मिलियन डॉलर बनती है। बाद में जब यह सामने आया कि उन्होंने वास्तव में लगभग 10 दिन शूटिंग की थी, तो यह रकम करीब 2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 16 से 18 करोड़ रुपये प्रतिदिन के बराबर हो जाती है। इस तरह कमल हासन इस फिल्म के सबसे महंगे अभिनेता साबित हुए।

    फिल्म में निभाया दमदार किरदार
    फिल्म में कमल हासन ने सुप्रीम यास्किन नाम के किरदार को निभाया, जो एक रहस्यमयी और शक्तिशाली शासक है। कहानी में वह ‘द कॉम्प्लेक्स’ नाम की डायस्टोपियन दुनिया पर शासन करता है। हालांकि फिल्म के पहले भाग में उनका स्क्रीन टाइम सीमित था, लेकिन उनका किरदार कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दर्शकों को उनकी खलनायकी और अभिनय काफी प्रभावशाली लगा।

    सीक्वल में बढ़ सकती है भूमिका
    फिल्म के अंत में यह संकेत भी मिलता है कि आने वाले सीक्वल में सुप्रीम यास्किन का किरदार और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कमल हासन का रोल अगले भाग में ज्यादा विस्तृत और दमदार नजर आएगा। फिल्म की भव्यता और इसकी स्टारकास्ट को देखते हुए ‘कल्कि 2898 एडी’ को भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी साइंस-फिक्शन फिल्मों में से एक माना जा रहा है।

  • आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब सऊदी अरब से मांगी दीर्घकालिक आर्थिक मदद

    आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब सऊदी अरब से मांगी दीर्घकालिक आर्थिक मदद


    इस्लामाबाद।
    आर्थिक चुनौतियों (Economic Challenges) से जूझ रहे कंगाल पाकिस्तान (Poor Pakistan) ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) से दीर्घकालिक आर्थिक सहायता की मांग की है। सोमवार को सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद ने रियाद से कई वित्तीय सहायताओं का अनुरोध किया है, जिनमें 5 अरब डॉलर की मौजूदा अल्पकालिक जमा राशि को 10 साल की दीर्घकालिक सुविधा में बदलने का प्रस्ताव भी शामिल है।

    रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने सऊदी अरब से स्थगित भुगतान पर मिलने वाली तेल सुविधा को 1.2 अरब डॉलर से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर करने और उसकी अवधि बढ़ाने का भी अनुरोध किया है। इसके अलावा पाकिस्तान ने प्रवासी नागरिकों द्वारा भेजे गए लगभग 10 अरब डॉलर के धन के प्रतिभूतिकरण (सिक्योरिटाइजेशन) का प्रस्ताव भी रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष सरकारी सूत्रों ने बताया कि अमेरिका और इजरायल के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ जारी युद्ध से पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव के कारण पाकिस्तान की आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई हैं।


    आईएमएफ के साथ भी चल रही बातचीत

    दूसरी ओर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ 7 अरब डॉलर की विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) कार्यक्रम की तीसरी समीक्षा पूरी करने के लिए बातचीत कर रहा है। पाकिस्तान और सऊदी अरब पहले से ही व्यापक आर्थिक सहयोग पैकेज पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन हालिया वैश्विक तनावों ने इन वार्ताओं को और तेज कर दिया है।

    रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में जमा 5 अरब डॉलर की सऊदी राशि को दीर्घकालिक ऋण में बदलने का अनुरोध किया है। इस प्रस्ताव के तहत मौजूदा अल्पकालिक जमा को अनुकूल दरों पर 10 साल की ऋण सुविधा में बदला जा सकता है। दूसरे प्रस्ताव में स्थगित भुगतान के आधार पर मिलने वाली तेल सुविधा को बढ़ाने की मांग की गई है। इसके तहत मौजूदा 1.2 अरब डॉलर की व्यवस्था को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक करने और भुगतान अवधि को एक साल से बढ़ाकर तीन साल करने का सुझाव दिया गया है।


    प्रवासी धन और अंतरराष्ट्रीय फंड जुटाने की योजना

    तीसरे प्रस्ताव के तहत पाकिस्तान ने प्रवासी नागरिकों द्वारा भेजी गई धनराशि के प्रतिभूतिकरण की योजना रखी है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने और महंगे विदेशी ऋण पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। चौथे प्रस्ताव में सऊदी अरब से पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय सुकुक (इस्लामिक बॉन्ड) जारी करने के प्रयासों के लिए गारंटी देने पर विचार करने को कहा गया है, जिससे पाकिस्तान को कम ब्याज दरों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूंजी जुटाने में मदद मिल सके।


    व्यापार और निवेश से जुड़े प्रस्ताव

    पाकिस्तान ने सऊदी अरब से एक्सिम ऋण लाइन उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है। इसके अलावा इस्लामाबाद ने आयात से जुड़े लेनदेन के लिए बैंक गारंटी की अनिवार्यता को समाप्त करने पर भी विचार करने की अपील की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब के सार्वजनिक निवेश कोष (PIF) से देश में संभावित निवेश के अवसर तलाशने का भी आग्रह किया है। साथ ही आईएमएफ कार्यक्रम के अनुरूप कर सुधारों और प्राथमिक अधिशेष लक्ष्यों में संभावित समायोजन के लिए भी समर्थन मांगा गया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से किए गए इन आठ प्रमुख अनुरोधों पर सऊदी अरब की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है। अखबार ने बताया कि उसने इस संबंध में पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान से भी संपर्क किया, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली हैं।

  • ट्रंप के ईरान युद्ध जल्द खत्म होने के संकेत के बाद कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट,,,

    ट्रंप के ईरान युद्ध जल्द खत्म होने के संकेत के बाद कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट,,,


    नई दिल्ली।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के यह संकेत देने के बाद कि ईरान में युद्ध जल्द (Iran War) ही समाप्त हो जाएगा, कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Price) में भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 91.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत में 10% तक की गिरावट आई और यह 85.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।

    यह गिरावट सोमवार को हुए उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बाद आई है, जब तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दायरा महामारी के दौरान कीमतों के नकारात्मक होने के बाद सबसे ज्यादा था। बता दें मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने ग्लोबल एनर्जी माार्केट्स को हिलाकर रख दिया है और मुद्रास्फीति संकट को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

    ब्लूमबर्ग के मुताबिक फ्लोरिडा में एक संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि वह तेल से संबंधित प्रतिबंधों में छूट देने और होर्मुज स्ट्रेट्स से टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए अमेरिकी नौसेना को तैनात करने की योजना बना रहे हैं।

    ट्रंप ने सोमवार देर रात पत्रकारों से कहा, “हम तेल की कीमतों को कम रखना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “इस संकट की वजह से कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ गई थीं,” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह संघर्ष इस सप्ताह के अंत तक खत्म होगा।


    तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं थीं

    सोमवार को तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं, जब फारस की खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों को होर्मुज के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण उत्पादन कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। यह संकरे जलमार्ग आमतौर पर वैश्विक कच्चे तेल के प्रवाह का पांचवां हिस्सा संभालता है। हालांकि, बाद में सत्र में कीमतों में गिरावट आई क्योंकि, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने आपातकालीन भंडार जारी करने के प्रयास पर विचार किया।


    ट्रंप पर अतिरिक्त दबाव

    यह संघर्ष अब अपने दूसरे सप्ताह में है और इसमें एक दर्जन से अधिक देश शामिल हो गए हैं, जिससे तेल, प्राकृतिक गैस और गैसोइल जैसे उत्पादों सहित ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है। अमेरिका में खुदरा पेट्रोल की कीमतें अगस्त 2024 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे ट्रंप पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैंकरों को एस्कॉर्ट करने या तेल संबंधी प्रतिबंधों में छूट देने की योजना पर अतिरिक्त जानकारी नहीं दी, सिवाय इसके कि उन्होंने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर इस विषय पर चर्चा की थी। पिछले सप्ताह, ट्रंप प्रशासन ने भारत के लिए रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद में अस्थायी रूप से वृद्धि करने का रास्ता साफ कर दिया, जो इस व्यापार पर महीनों से चल रहे दबाव से उलट था।


    बाजार की नजरें होर्मुज पर

    बाजार की नजरें होर्मुज से टैंकरों के आवागमन को फिर से शुरू होते देखने पर टिकी हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से कई जहाजों पर हमले के कारण अधिकांश जहाजों ने इस जलमार्ग से बचना शुरू कर दिया है। फिर भी, हाल के दिनों में सऊदी कच्चा तेल ले जाने वाला एक टैंकर वहां से गुजरा, जबकि ईरान ने इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल भेजना जारी रखा है।


    होर्मुज के बंद होने के कारण

    भंडारण तेजी से भर जाने के कारण सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने उत्पादन कम कर दिया है। मध्य पूर्व से कच्चे तेल और तेल उत्पादों के प्रवाह पर पड़े इस संकट के कारण रिफाइनरियों ने कुछ कार्यों और आपूर्ति को रोक दिया है, और एशियाई ऊर्जा खरीदारों ने मूल रूप से अन्य क्षेत्रों के लिए जाने वाले ईंधन शिपमेंट को लुभाने के लिए प्रतिस्पर्धियों से आगे बढ़कर बोली लगाई है।

  • Iran युद्ध के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उछाल… 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा कुल बाजार मूल्य

    Iran युद्ध के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उछाल… 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा कुल बाजार मूल्य


    नई दिल्ली।
    ईरान युद्ध (Iran America War) के कारण दुनियाभर के बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। दूसरी तरफ, इस अनिश्चितता के बीच सोने (Gold) की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। लिहाजा, निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में तेजी से सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इस वजह से वैश्विक स्तर पर सोने का कुल बाजार मूल्य लगभग 30 से 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह मूल्य भारत और ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम (UK) की संयुक्त अर्थव्यवस्था यानी साझा GDP से भी काफी बड़ा माना जा रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों और उसके जवाब में ईरान की सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता आई है। इसी वजह से निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सोने में लगाना शुरू कर दिया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,400 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई है और यह 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने वाली है।


    क्यों कहा जा रहा है ‘फाइनेंशियल सुपरपावर’?

    एक रिपोर्ट के मुताबिक सोने की कीमतों में इस तेज बढ़ोत्तरी के कारण दुनिया में मौजूद कुल सोने का अनुमानित मूल्य 30–35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भारत की कुल जीडीपी फिलहाल लगभग 3.5 से 4 ट्रिलियन डॉलर के बीच है जिसके जल्द ही 5 ट्रिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है। दूसरी तरफ यूनाइडेट किंगडम यानी ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की है। इस तरह सोने का कुल मूल्य दोनों देशों की संयुक्त जीडीपी से कई गुना बड़ा हो गया है। इसी कारण कुछ विश्लेषक इसे “गोल्ड सुपरपावर” कह रहे हैं।


    निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना

    जब दुनिया में युद्ध, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद संपत्ति मानते हैं। इसलिए हर बार किसी बड़े भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सोने की मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हाल के महीनों में सोने की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने की खरीद, महामारी के बाद बढ़ी महंगाई, डॉलर और अन्य मुद्राओं पर बढ़ती अनिश्चितता।


    आगे क्या होगा?

    हालांकि विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि यदि ईरान संघर्ष कम होता है, वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत होती है या ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है। वहीं कई विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कागजी मुद्राओं पर कम होते भरोसे के कारण सोना लंबे समय तक मजबूत निवेश बना रह सकता है। बहरहाल, ईरान युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बीच सोना एक बार फिर दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षित संपत्ति के रूप में उभर रहा है, जिसका कुल मूल्य कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से भी अधिक हो चुका है।

  • ईरान युद्ध के कारण देश में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित… जानें कैसे पूरी होगी जरूरतें?

    ईरान युद्ध के कारण देश में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित… जानें कैसे पूरी होगी जरूरतें?


    नई दिल्ली।
    वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में उथल-पुथल मची हुई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध (America, Israel, and Iran War) ने मध्य पूर्व की ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई चेन बाधित हो गई है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर गहरा असर पड़ रहा है। इस तनाव के कारण भारत की 40% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई अचानक ठप हो गई है। यह केवल एक अंतरराष्ट्रीय घटना नहीं है; इसका सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था, उद्योगों की रफ्तार और भविष्य में महंगाई की दर पर पड़ सकता है। सरकार एक्शन मोड में है और पेट्रोलियम मंत्रालय युद्ध स्तर पर ‘ऑप्टिमाइजेशन प्लान’ (गैस वितरण की नई योजना) तैयार कर रहा है। आइए इस संकट की गहराई, उद्योगों पर इसके प्रभाव और भारत के ‘प्लान बी’ का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।


    संकट के मुख्य कारण

    वर्तमान संकट की जड़ मध्य पूर्व में है। मार्च 2026 तक, ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से ब्लॉक कर दिया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा संभालता है। कतर ने अपनी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) उत्पादन को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिससे यूरोप और भारत जैसे आयातकों पर दबाव बढ़ा है। भारत के लिए यह इसलिए गंभीर है क्योंकि उसकी लगभग 52% कच्चे तेल की आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरती है। इसके परिणामस्वरूप, वैश्विक तेल कीमतें 83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो फरवरी 2026 के 72 डॉलर से 15% ऊपर है। भारत में एलपीजी (कुकिंग गैस) की कीमतें 7% बढ़कर दिल्ली में 913 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर हो गई हैं, जबकि कमर्शियल एलपीजी 1,883 रुपये तक पहुंच गई है।

    भारत की ऊर्जा आयात निर्भरता FY26 के पहले 10 महीनों में 88.6% तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के 88.2% से अधिक है। घरेलू उत्पादन स्थिर रहने (23.5 मिलियन टन) के बावजूद मांग 1.6% बढ़कर 202.2 मिलियन टन हो गई है। एलएनजी आयात में भी 50% कटौती की संभावना है, क्योंकि पेट्रोनेट एलएनजी ने कतर से सप्लाई पर फोर्स मेजर घोषित कर दिया है।

    यह खबर आपके लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
    यह संकट सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। LNG का उपयोग सिर्फ कारखानों में नहीं होता, बल्कि यह शहरों में पाइप वाली गैस (PNG), वाहनों के ईंधन (CNG), बिजली उत्पादन और कृषि (उर्वरक) के लिए रीढ़ की हड्डी है। गैस की सप्लाई घटने से खुले बाजार में इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे परोक्ष रूप से परिवहन, माल ढुलाई और रोजमर्रा के उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। इसलिए, इस संकट को समझना हर नागरिक के लिए आवश्यक है।


    किन उद्योगों पर गिरेगी गाज?

    सरकार के नए ‘ऑप्टिमाइजेशन प्लान’ के तहत गैस की राशनिंग तय है। इसका स्पष्ट अर्थ है कि उपलब्ध गैस को प्राथमिकता के आधार पर बांटा जाएगा। गैर-प्राथमिकता वाले उद्योग (सबसे बड़ा खतरा): रिपोर्ट के अनुसार, गैर-प्राथमिकता वाले सेक्टरों को गैस सप्लाई में भारी कटौती का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें तुरंत कोयला, नेफ्था या फर्नेस ऑयल जैसे वैकल्पिक ईंधनों की ओर रुख करना होगा।

    आम तौर पर सिरेमिक, कांच उद्योग, स्पंज आयरन और कुछ पेट्रोकेमिकल इकाइयों को गैर-प्राथमिकता की श्रेणी में रखा जाता है। इन उद्योगों में उत्पादन धीमा होने की आशंका है। फर्टिलाइजर सेक्टर प्राथमिकता वाला है, लेकिन कटौती संभव है: यूरिया उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली 60% LNG अकेले कतर से आती है। हालांकि सरकार इसे ‘प्राथमिकता’ मानती है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उर्वरक क्षेत्र की सप्लाई में भी हल्की कटौती से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

    खेती और किसानों के लिए क्या है स्थिति?
    कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए फिलहाल पैनिक (घबराने) का कोई कारण नहीं है। सरकार और उद्योग ने इसके लिए पहले से एक मजबूत ‘शॉक-एब्जॉर्बर’ तैयार रखा है। खरीफ की बुवाई जून में शुरू होगी। अभी मांग कम है, इसलिए उर्वरक कंपनियां अपने कारखानों का नियमित रखरखाव कर रही हैं। देश में उर्वरक का 17.7 मिलियन टन (MT) का सुरक्षित भंडार है, जो पिछले साल (लगभग 13 MT) की तुलना में 36.5% अधिक है। DAP और NPK की बहुतायत: इनका स्टॉक पिछले साल से 70-80% अधिक है। फॉस्फेटिक उर्वरकों के लिए भारत ने अपनी सप्लाई चेन को विविध किया है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता न रहे।


    भारत कैसे करेगा अपनी जरूरतें पूरी?

    भारत हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है। गैस की इस भारी कमी को पूरा करने के लिए ‘प्लान बी’ पर तेजी से काम हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की ओर रुख: भारत अपनी 60% LNG पहले से ही पश्चिम एशिया के बाहर से मंगाता है। अब कतर की भरपाई के लिए ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों की कंपनियों से अतिरिक्त सप्लाई के लिए बातचीत तेज कर दी गई है।


    सामने खड़ी हैं 2 बड़ी चुनौतियां

    जहाजों का इंतजाम: अचानक नई जगह से गैस लाने के लिए विशेष क्रायोजेनिक LNG टैंकर (जहाज) रातों-रात जुटाना बेहद मुश्किल है।
    लिक्विफिकेशन क्षमता: जिन नए देशों से हम गैस मांग रहे हैं, उनके पास गैस को तरल में बदलने की अतिरिक्त क्षमता तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए।

  • देश में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं… सरकार उठा रही ऐहतियाती कदम

    देश में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं… सरकार उठा रही ऐहतियाती कदम

    पश्चिम एशिया संकट (West Asian Crisis) के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल व एलपीजी की कीमतों (Crude Oil and LPG Prices) में उछाल के बीच सरकार (Government) ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार का दावा है कि भारत में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं है। पर रसोई गैस (LPG) और पीएनजी की घरेलू सप्लाई को तरजीह देने के लिए कुछ एहतियाती उपाय किए हैं। इनमें कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में कमी और घरेलू गैस का बुकिंग टाइम बढ़ाना शामिल है।


    बुकिंग अवधि बढ़ाई

    सरकार ने घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि भी 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है। मतलब यह कि गैस सिलेंडर सप्लाई के अगले 25 दिन तक उपभोक्ता दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे। हालांकि, सरकार की दलील है कि आम उपभोक्ता एक वर्ष में औसतन सात सिलेंडर इस्तेमाल करता है। ऐसे में वह एक सिलेंडर को तकरीबन 50 दिन इस्तेमाल करता है। ऐसे में 25 दिन की बुकिंग अवधि से कोई मुश्किल नहीं आएगी।


    फिलहाल दाम नहीं बढ़ेंगे

    सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की कोई संभावना नहीं है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, पर अभी वह स्थिति नहीं आई है कि कीमतों में इजाफा किया जाए। उनके मुताबिक कच्चे तेल की कीमत 120 -125 डॉलर के आसपास रहती है, तो तेल कंपनियों पर खास दबाव नहीं पड़ेगा। पर कीमत ऊपर चली जाती है, तो वह अलग स्थिति होगी।


    घरेलू पीएनजी को तरजीह

    सरकार का कहना है कि घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं को भी गैस की कोई मुश्किल नहीं आएगी। गैस का ज्यादातर हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। ऐसे में सरकार ने कुछ उद्योगों को उपलब्धता के आधार पर गैस मुहैया कराने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम उठाना जरूरी है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ज्यादा दिन तक बंद रहता है, तो एलएनजी को लेकर दबाव की स्थिति बन सकती है।


    कमर्शियल एलपीजी कम

    पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच सरकार ने घरेलू एलपीजी सप्लाई को बरकरार रखने के लिए होटल और उद्योगों में एलपीजी की सप्लाई में कमी लाने का फैसला किया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी क्योंकि, इस वक्त घरेलू उपभोक्ताओं को वक्त पर रसोई गैस उपलब्ध कराना सरकार और तेल कंपनियों की पहली प्राथमिकता है।


    कमर्शियल एलएनजी के दामों में बढ़ोतरी

    पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कमर्शियल एलएनजी की कीमतों में इजाफा उनकी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है। ऐसे में कमर्शियल एलएनजी के दामों में वृद्धि पर सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। यह सवाल किए जाने पर कि क्या इसका असर सीएनजी की कीमतों पर भी होगा, उन्होंने कहा कि सीएनजी प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। उस पर प्रभाव की संभावना कम है।


    रिफाइनरी एलपीजी उत्पादन बढ़ाए

    पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने एक बार फिर सभी रिफाइनरी को दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद का उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि ज्यादा से ज्यादा एलपीजी का उत्पादन किया जाए। इसके साथ सरकार अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया से भी एलपीजी खरीद रही है। सरकार का कहना है कि इन देशों से गैस के आयात को और तेज किया गया है।


    अमेरिका का रुख करेगा तय

    पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का ज्यादा असर अमेरिका के बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका में पेट्रोल डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होते हैं। ऐसे में अमेरिकी उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ना लाजिमी है। ऐसे में अमेरिका युद्ध को लंबा खींचने का निर्णय करता है, तो उसके उपभोक्ताओं को इसकी ज्यादा कीमत चुकानी होगी।

  • युद्ध के बीच ईरान के तेल भंडार पर अमेरिका की नजर…. ट्रंप के बयान से हलचल

    युद्ध के बीच ईरान के तेल भंडार पर अमेरिका की नजर…. ट्रंप के बयान से हलचल


    तेहरान।
    युद्ध के बीच अमेरिका (America) अब ईरान के तेल पर भी कब्जे (Controls Iran oil ) के संकेत दे रहा है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा है कि इसे लेकर बातचीत जरूर हुई थी। उन्होंने इस मुद्दे पर ज्यादा जानकारी नहीं दी। खास बात है कि ईरान पहले ही आरोप लगा चुका है कि अमेरिका दुनिया के तेल संसाधनों पर अवैध नियंत्रण हासिल करना चाहता है। जबकि, अमेरिका दावा करता है कि इजरायल के हित में वह युद्ध लड़ रहा है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर खुलकर बात नहीं की थी कि अमेरिका ईरानी तेल पर कब्जा करना चाहता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कुछ लोगों ने बात जरूर की है। इस दौरान उन्होंने वेनेजुएला का भी जिक्र किया।

    ट्रंप ने कहा, ‘आपने वेनेजुएला को देखा।’ उन्होंने कहा, ‘लोगों ने इसके बारे में सोचा है, लेकिन अभी इस पर बात करना जल्दबाजी होगी।’ खास बात है कि ट्रंप ने बीते महीने कहा था कि अमेरिका को अपने नए दोस्त से 80 मिलियन बैरल तेल मिला है।


    अमेरिकी की बड़ी साजिश, ईरान के आरोप

    ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान तेल संसाधनों पर अवैध नियंत्रण हासिल करना है। अगर वे ईरान और वेनेजुएला दोनों के तेल पर नियंत्रण कर लेता है तो दुनिया के लगभग 31 प्रतिशत तेल संसाधनों पर उनका नियंत्रण हो जाएगा। अमेरिका ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि वह यह युद्ध इजरायल के हित में लड़ रहा। अमेरिका बेनकाब हो चुका है।


    तेल मोर्चे पर है अमेरिका की नजर

    व्हाइट हाउस ने सोमवार को कहा कि वर्तमान में तेल कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई है, वो कुछ समय की ही है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने बयान में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पूरी ऊर्जा टीम ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने से काफी पहले ही ऊर्जा बाजारों को स्थिर रखने के लिए एक मजबूत योजना तैयार कर ली थी, और वे सभी विश्वसनीय विकल्पों की समीक्षा जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रशासन ऊर्जा बाजारों में स्थिरता बनाए रखने के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठा सकता है।


    कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था

    ईरान युद्ध के तेज होने से पश्चिम एशिया में उत्पादन और पोत परिवहन पर मंडराते खतरे के बीच सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं थीं। हालांकि, बाद में कीमतों में कुछ नरमी देखी गई, लेकिन इस उथल-पुथल से दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत सुबह उछलकर 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, लेकिन बाद में यह 101 डॉलर के करीब आ गई। इसी तरह, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 119.48 डॉलर तक पहुंचने के बाद घटकर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।


    क्या थी वजह

    कीमतों में आई ताजा नरमी का कारण उन खबरों को माना जा रहा था जिनमें कहा गया था कि जी-7 देश रणनीतिक तेल भंडार से आपूर्ति जारी करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, बाद में सोमवार को ही जी-7 समूह ने फिलहाल इन सुरक्षित भंडारों का उपयोग न करने का फैसला किया है। फ्रांस के वित्त मंत्री ने कहा कि समूह बाजार को स्थिर करने के लिए तैयार है, लेकिन फिलहाल हम भंडार से तेल निकालने की स्थिति तक नहीं पहुंचे हैं। इससे पहले शनिवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने भी सामरिक भंडार के इस्तेमाल की संभावना को कमतर बताया था।

  • बांग्लादेश में नई सरकार आने के बाद भी हिंदुओं पर हमले जारी… फिर हुई दो की हत्या

    बांग्लादेश में नई सरकार आने के बाद भी हिंदुओं पर हमले जारी… फिर हुई दो की हत्या


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यकों (Minorities) के लिए हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। नई सरकार (New government) आने के बाद भी हिंदुओं और हिंदू मंदिरों (Hindu Temples) पर हमले का सिलसिला नहीं रुका है। पिछले एक हफ्ते में अलग-अलग घटनाओं में दो हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। वहीं, चार अन्य लोग, जिसमें एक पुजारी भी शामिल है, मंदिर के बाहर बम धमाके में घायल हो गए हैं। बांग्लादेश के दक्षिणपंथी ग्रुप, जातियो हिंदुओ मोहाजोतो ने इसकी जानकारी दी है। 6 मार्च और 7 मार्च को बोगुरा और कॉक्स बाजार में दो व्यक्तियों की हत्या कर दी गई, जबकि 8 मार्च को चुमिल्ला शहर में पूजा के दौरान एक हिंदु मंदिर पर क्रूड बम फेंके गए, जिससे काफी डर फैल गया।


    मंदिर पर हमले की पुष्टि

    बांग्लादेश समाचार की एक रिपोर्ट में कालीगाछ टाला काली मंदिर पर हमले की पुष्टि की है। कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी तौहीदुल अनवर ने बताया कि पुरोहित केशोब चक्रवर्ती, साथ ही अन्य दो लोगों को अस्पताल में उपचार मिला। मंदिर समिति के अध्यक्ष सजोल कुमार चंदा ने कहाकि धमाका धार्मिक समारोह के दौरान हुआ। सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर एक नकाबपोश व्यक्ति को धमाके से थोड़ी देर पहले मंदिर में प्रवेश करते और एक बैग छोड़ते हुए दिखाया गया। घायल पुजारी केशब चक्रवर्ती ने बताया कि बम विस्फोट के बाद, मेरे सामने एक सफेद चीज गिरी…बाद में, धुआं देखकर, दूसरों ने मुझे बताया कि यह एक बम था।


    क्षेत्र में फैल गई घबराहट

    विस्फोट के बाद क्षेत्र में घबराहट फैल गई। पहले धमाके के बाद, हमलावरों ने कथित तौर पर नजदीकी बौद्ध मंदिर और एक निजी ऑफिस के पास दो और साधारण बम फोड़ दिए। मेट्रोपॉलिटन पूजा उत्सव फ्रंट के संयोजक श्यामल कृष्ण ने स्थल का दौरा किया और जिम्मेदारों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया।

    उन्होंने कहाकि जो लोग शांतिपूर्ण वातावरण को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें जल्दी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। घटना के बाद पुलिस अधिकारियों, जिनमें कुमिला के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद अनीसुज्जमान भी शामिल थे, ने स्थल का दौरा किया और जांच में सहायता के लिए एक एंटी बम स्क्वॉड को बुलाया गया।

  • मां के साथ रूस गए बच्चे का पता लगाए सरकार, उसके भारतीय पिता से मिलाने का करे प्रयास: SC

    मां के साथ रूस गए बच्चे का पता लगाए सरकार, उसके भारतीय पिता से मिलाने का करे प्रयास: SC


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को केंद्र सरकार (Central Government) से उस नाबालिग बच्चे का पता लगाने और उसे उसके भारतीय पिता (Indian Father) से वर्चुअल माध्यम से मिलाने के प्रयास करने को कहा, जिसे उसकी मां रूस ले गई है। बच्चे की कस्टडी को लेकर रूसी महिला और उसके भारतीय पति के बीच अदालत में मुकदमा चल रहा है, इस बीच महिला बच्चे को अपने साथ लेकर मॉस्को चली गई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि महिला और उसके बेटे के ठिकाने को गुप्त रखा जा सकता है। फिलहाल उन्हें भारत वापस लाने का कोई प्रयास न किया जाए।

    पीठ ने कहा कि नाबालिग बच्चे को उसके पिता से आभासी रूप से मिलाने के लिए राजनयिक प्रयास जारी रखे जाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने रूस स्थित भारतीय दूतावास से भी अपील किया कि अधिकारी सीमित उद्देश्य से महिला और बच्चे का पता लगाने के लिए वहां के अधिकारियों से इस मामले पर बात करें। केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि भारत और रूस के विदेश सचिवों की बैठक और इंटरपोल के ब्लू कॉर्नर नोटिस सहित कई प्रयासों के बावजूद बच्चे का पता लगाने में कोई खास प्रगति नहीं हुई है।


    आखिर क्या है पूरा मामला

    महिला वर्ष 2019 से भारत में रह रही थी और वह एक्स-1 वीजा पर भारत आई थी, जिसकी अवधि समाप्त हो चुकी थी। हालांकि, अदालती कार्यवाही के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर वीजा की अवधि बढ़ाने का निर्देश दिया। पिछले साल 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया गया कि शायद रूसी महिला नाबालिग बेटे के साथ नेपाल सीमा के रास्ते देश छोड़कर चली गई है और संभवतः शारजाह के रास्ते अपने देश पहुंच गई है।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को अस्वीकार्य बताया और अदालत की घोर अवमानना का मामला कहा। बच्चे के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी अलग रह रही पत्नी बच्चे की कस्टडी से जुड़े अदालती आदेश का पालन नहीं कर रही है। उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसे महिला और अपने बेटे के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने 22 मई, 2025 को निर्देश दिया कि बच्चे की स्पेशल कस्टडी सप्ताह में तीन दिन (सोमवार, मंगलवार और बुधवार) के लिए मां को दी जाए और शेष दिनों के लिए बच्चा अपने पिता की विशेष अभिरक्षा में रहे।

  • गर्मी से बचने के देसी नुस्खे: शरीर को ठंडा रखती हैं ये 5 पारंपरिक चीजें, लू और डिहाइड्रेशन से मिलेगा बचाव

    गर्मी से बचने के देसी नुस्खे: शरीर को ठंडा रखती हैं ये 5 पारंपरिक चीजें, लू और डिहाइड्रेशन से मिलेगा बचाव


    नई दिल्‍ली । जैसे जैसे गर्मी का मौसम बढ़ता है, वैसे वैसे शरीर पर इसका असर भी साफ दिखाई देने लगता है। तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान लोगों को जल्दी थका देता है और लू, डिहाइड्रेशन तथा पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। आज के समय में लोग गर्मी से राहत पाने के लिए फ्रिज के ठंडे पानी और एसी का सहारा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद और ग्रामीण जीवन में ऐसे कई पारंपरिक उपाय मौजूद हैं जो बिना किसी आधुनिक सुविधा के भी शरीर को ठंडा और स्वस्थ बनाए रखते हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं मिट्टी के घड़े मटका के पानी की। शहरों में भले ही आरओ और फ्रिज का इस्तेमाल बढ़ गया हो, लेकिन मिट्टी के घड़े का पानी आज भी सबसे प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। घड़े की मिट्टी में मौजूद छोटे छोटे छिद्र वाष्पीकरण की प्रक्रिया के जरिए पानी को स्वाभाविक रूप से ठंडा रखते हैं। यह पानी शरीर को धीरे धीरे ठंडक देता है और पाचन तंत्र के लिए भी बेहतर माना जाता है। इसके विपरीत फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी गले और पेट के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए बेल का शरबत भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में इसे गर्मी का सबसे प्रभावी पेय माना जाता है। बेल में फाइबर और विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाती है और पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाती है। एक गिलास बेल का शरबत न केवल लू के प्रभाव को कम करता है बल्कि पूरे दिन शरीर को तरोताजा बनाए रखता है।

    इसके अलावा गांवों में खस और जूट के परदे भी प्राकृतिक कूलिंग का एक बेहतरीन तरीका माने जाते हैं। पुराने समय से ही लोग खस या जूट के बोरों को पानी से गीला करके खिड़कियों पर लगाते हैं। जब गर्म हवा इन गीले परदों से होकर गुजरती है तो कमरे का तापमान 5 से 10 डिग्री तक कम हो जाता है। खस की हल्की खुशबू वातावरण को ताजगी से भर देती है और मन को भी शांति देती है।

    गर्मियों में शरीर को ऊर्जा देने और ठंडा रखने के लिए सत्तू भी बेहद लोकप्रिय है। चना और जौ से बना सत्तू पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसे पानी में घोलकर पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और शरीर का तापमान भी नियंत्रित रहता है। यही वजह है कि गांवों में किसान चिलचिलाती धूप में काम करने से पहले सत्तू का सेवन करना पसंद करते हैं।

    वहीं प्याज का देसी नुस्खा भी गर्मी से बचाव के लिए लंबे समय से अपनाया जाता रहा है। ग्रामीण इलाकों में मान्यता है कि जेब में प्याज रखकर बाहर निकलने से लू नहीं लगती। प्याज में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करते हैं। कच्चे प्याज का सलाद या छाछ के साथ इसका सेवन करने से भी शरीर की गर्मी कम होती है।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो हमारे पारंपरिक और देसी उपाय न केवल सस्ते और आसान हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी हैं। यदि गर्मियों में इन प्राकृतिक तरीकों को अपनाया जाए तो शरीर को ठंडा रखने के साथ साथ कई मौसमी बीमारियों से भी बचा जा सकता है।