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ऐसे में भक्तों के मन में यह सवाल है कि दोष से बचने के लिए होलिका कब जलाई जाए। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को शाम 05:07 बजे समाप्त हो जाएगी, लेकिन शास्त्रों के नियम और ग्रहण की शुद्धि के अनुसार ही दहन का समय तय करना उचित रहेगा।
सूतक काल और चंद्र ग्रहण का प्रभाव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूतक काल सुबह 09:39 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा, जो शाम 06:46 बजे ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा। सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान की मनाही होती है, इसलिए होलिका दहन की रस्में शाम 06:46 बजे के बाद ही की जानी चाहिए।
भद्रा का समय और दहन का मुहूर्त
होलिका दहन का सबसे सटीक और शुभ मुहूर्त शाम 06:47 बजे (ग्रहण समाप्ति) के बाद से लेकर रात 08:50 बजे तक रहेगा। यह वह समय है जब आप बिना किसी भय या दोष के होलिका दहन कर सकते हैं। ग्रहण के तुरंत बाद किया गया यह दहन नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने की प्रबल संभावना रखता है।
दोष से मुक्ति के सरल नियम
होलिका की अग्नि में अनाज और नारियल अर्पित करना घर में सुख-शांति लाता है। माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से किसी भी प्रकार के ग्रहों की उग्रता शांत होती है और घर के संचालन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

रूस का बयान
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि दोनों देशों के नागरिक और सैन्य बल हताहत हुए हैं।
चीन की अपील
चीन ने भी दोनों पक्षों से बातचीत और युद्धविराम पर जोर दिया। इसके अलावा कई अन्य देश भी संयम बरतने और तत्काल शांति स्थापित करने की अपील कर चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उनके प्रवक्ता ने कहा कि सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
सीमा और डूरंड रेखा
ब्रिटिश शासन के दौरान खींची गई विवादित 2,611 किलोमीटर लंबी सीमा, जिसे डूरंड रेखा कहा जाता है, समय-समय पर दोनों देशों के बीच तनाव और गोलीबारी का कारण रही है। अफगानिस्तान की मौजूदा तालिबानी सरकार इसे मान्यता नहीं देती और इस समझौते को समाप्त करने की मांग करती रही है।
हाल की घटनाएँ
इस्लामाबाद में दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, सीमा पर अफगान सेना ने कुछ चौकियों पर सफेद झंडे लहराए, जिसे आमतौर पर गोलीबारी रोकने और शांति स्थापित करने का संकेत माना जाता है।

अधिकारियों के मुताबिक 16 मार्च 2022 को वेटलैंड एक्ट लागू होने के बाद इस दायरे में किया गया कोई भी निर्माण स्वतः अवैध माना जाएगा, चाहे उसे किसी भी स्तर पर अनुमति मिली हो। साथ ही पुराने अतिक्रमणों को भी हटाने की कार्रवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के तहत की जाएगी। प्रशासन को इसकी रिपोर्ट एनजीटी में प्रस्तुत करनी है, जिसके चलते कार्रवाई तेज कर दी गई है।
कहां-कहां मिले अवैध निर्माण
टीटी नगर अनुभाग के सेवनिया गौड़, धर्मपुरी, प्रेमपुरा, आमखेड़ा, पीपलखेड़ी, कोटरा सुल्तानाबाद और बरखेड़ी खुर्द में 108 निर्माण चिन्हित हुए हैं। इनमें अधिकांश पक्के मकान हैं। भदभदा क्षेत्र में हाल ही में कार्रवाई भी की गई है और आगे व्यापक अभियान की तैयारी है।
खानूगांव के आसपास 3 मकान, हलालपुरा में 7 और कोहेफिजा में 35 मकान FTL दायरे में पाए गए हैं। खानूगांव में 15 सरकारी जमीनों पर कब्जे सामने आए हैं। हुजूर के मुगालिया छाप और खजूरी में सीमांकन जारी है, जहां बड़े स्तर पर अतिक्रमण की आशंका है।
वीआईपी रोड क्षेत्र में एक मंत्री और एक आईएएस अधिकारी के बंगले के पास भी लाल निशान लगाए गए हैं। विधायक आरिफ मसूद के कॉलेज की बाउंड्रीवॉल के समीप भी राजस्व अमले ने सीमांकन कर निशान लगाए हैं।
दो स्तर पर होगी कार्रवाई
16 मार्च 2022 के बाद हुए निर्माण – सीधे अवैध माने जाएंगे और हटाए जाएंगे।
इससे पहले के निर्माण – संबंधित विभागों (नगर निगम, पंचायत, टीएंडसीपी, पर्यावरण, वन आदि) से अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे जाएंगे। अनुमति प्रक्रिया की भी जांच होगी।
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने संबंधित एसडीएम को होली से पहले सीमांकन पूरा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तालाब में गिरने वाले गंदे नालों की पहचान कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
रामसर साइट पर भी अतिक्रमण
बड़ा तालाब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रामसर साइट है, बावजूद इसके वर्षों से अतिक्रमण बढ़ते रहे हैं। भदभदा, बिसनखेड़ी, गौरागांव, बील गांव और सूरजनगर क्षेत्रों में फार्म हाउस, रिसॉर्ट और बड़ी इमारतें FTL सीमा के बेहद करीब पाई गई हैं। कुछ स्थानों पर नगर निगम की मुनार से सटी बाउंड्रीवाल और सड़क निर्माण भी मिला है, जो नियम विरुद्ध है।
मुनारों में गड़बड़ी का मामला
जांच में यह भी सामने आया कि FTL सीमा तय करने वाली मुनारों में फर्जीवाड़ा किया गया है। मौके पर पांच तरह की अलग-अलग मुनारें मिलीं। कुछ पर बीएमसी (भोपाल नगर निगम) लिखा है, जबकि कई बिना पहचान के सफेद रंग से रंगी मिलीं। इन्हीं संदिग्ध मुनारों के आसपास सबसे अधिक अतिक्रमण पाए गए हैं।
पिछले दस वर्षों में तीन बार सर्वे होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। इस बार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब देखना होगा कि वर्षों से फाइलों में दबी कार्रवाई जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।

आत्मविश्वास कोई जन्म से मिला गुण नहीं है बल्कि इसे रोजमर्रा की आदतों से विकसित किया जा सकता है। अच्छी बात यह है कि छोटे छोटे बदलाव अपनाकर अपने भीतर छिपी क्षमता को बाहर लाया जा सकता है। जब हम खुद को समझते हैं और अपनी प्रगति को पहचानते हैं तो धीरे धीरे आत्मबल मजबूत होने लगता है।
सबसे पहले जरूरी है कि छोटी छोटी सफलताओं को नजरअंदाज न किया जाए। अक्सर लोग दिनभर की उपलब्धियों को महत्व नहीं देते लेकिन हर छोटा कदम आगे बढ़ने का संकेत होता है। यदि आप अपनी छोटी उपलब्धियों को स्वीकार करते हैं तो दिमाग सकारात्मक संकेत देता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
स्पष्ट लक्ष्य तय करना भी बेहद जरूरी है। बिना दिशा के आगे बढ़ना मुश्किल होता है। छोटे और व्यावहारिक लक्ष्य बनाएं और उन्हें समय सीमा में पूरा करने की कोशिश करें। जब लक्ष्य पूरे होते हैं तो खुद पर भरोसा मजबूत होता है। बड़े लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा करना ज्यादा प्रभावी और व्यावहारिक तरीका है।
पॉजिटिव सेल्फ टॉक आत्मविश्वास बढ़ाने का शक्तिशाली साधन है। अक्सर हम खुद से नकारात्मक बातें करते हैं जिससे मनोबल गिरता है। यदि इन विचारों को बदलकर सकारात्मक संवाद अपनाया जाए तो बड़ा फर्क पड़ सकता है। मैं सक्षम हूं और मैं कोशिश करूंगा जैसे वाक्य मन को मजबूत बनाते हैं और डर को कम करते हैं।
नई स्किल सीखना भी आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रभावी तरीका है। जब आप कोई नया कौशल सीखते हैं या नई जानकारी हासिल करते हैं तो भीतर से आत्मसंतोष मिलता है। यह अनुभव धीरे धीरे आत्मविश्वास को मजबूत करता है। चाहे कोई कोर्स हो नई भाषा हो या कोई रचनात्मक गतिविधि सीखना हमेशा फायदेमंद रहता है।
बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान देना भी जरूरी है। सीधा खड़े होना आंखों में देखकर बात करना और हल्की मुस्कान बनाए रखना ये छोटी बातें भी आत्मविश्वास को दर्शाती हैं। सकारात्मक शारीरिक हावभाव अपनाने से न केवल दूसरों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है बल्कि खुद को भी भीतर से मजबूती महसूस होती है।
साथ ही सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताना आत्मविश्वास के लिए लाभकारी है। हमारा वातावरण हमारी सोच को प्रभावित करता है। ऐसे लोगों के साथ रहें जो प्रेरित करें और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। नकारात्मक माहौल से दूरी बनाकर ही आत्मबल को सुरक्षित रखा जा सकता है।
आत्मविश्वास धीरे धीरे विकसित होने वाली शक्ति है। निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच से इसे मजबूत बनाया जा सकता है। जब खुद पर भरोसा मजबूत होता है तो सफलता की राह भी आसान लगने लगती है।

ग्रुप-2 की अंकतालिका पर नजर डालें तो इंग्लैंड 6 अंकों के साथ शीर्ष पर है और सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुका है। न्यूजीलैंड के खाते में 3 अंक हैं और उसका नेट रन रेट +1.390 है, जो उसे फिलहाल बढ़त दिला रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान के पास 1 अंक है और उसका नेट रन रेट -0.461 है। ऐसे में पाकिस्तान को सिर्फ जीत से काम नहीं चलेगा, उसे जीत का अंतर भी बड़ा रखना होगा।
समीकरण बिल्कुल साफ है। अगर पाकिस्तान पहले बल्लेबाजी करता है तो उसे कम से कम 64 रन से जीत दर्ज करनी होगी। वहीं अगर लक्ष्य का पीछा करता है तो मुकाबला 13.1 ओवर के भीतर खत्म करना होगा। तभी उसका नेट रन रेट न्यूजीलैंड से बेहतर हो सकेगा। अगर पाकिस्तान यह अंतर हासिल नहीं कर पाया, तो न्यूजीलैंड सीधे अंतिम चार में पहुंच जाएगा। इतना ही नहीं, यदि मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो जाता है तो भी न्यूजीलैंड को फायदा मिलेगा और पाकिस्तान की उम्मीदें खत्म हो जाएंगी। यानी यह मुकाबला पाकिस्तान के लिए पूरी तरह ‘करो या मरो’ की स्थिति है।
इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच हुआ मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 159 रन बनाए। जवाब में इंग्लैंड ने दबाव के बावजूद शानदार वापसी की। 16.5 ओवर में 117 रन पर 6 विकेट गिरने के बाद रेहान अहमद और विल जैक्स ने संयम दिखाया और टीम को जीत तक पहुंचाया। यह मैच R. Premadasa Stadium में खेला गया और इसी नतीजे ने पूरे ग्रुप का गणित बदल दिया।
अब निगाहें पाकिस्तान बनाम श्रीलंका मुकाबले पर टिकी हैं। अगर पाकिस्तान बड़ा उलटफेर करता है तो वह इंग्लैंड के साथ सेमीफाइनल में पहुंच जाएगा। पहला सेमीफाइनल Eden Gardens में 4 मार्च को और दूसरा Wankhede Stadium में 5 मार्च को खेला जाएगा।
अब सवाल यही है—क्या पाकिस्तान दबाव में दम दिखाएगा या न्यूजीलैंड अपनी मजबूत नेट रन रेट के दम पर अंतिम चार में जगह बनाए रखेगा? जवाब मैदान पर मिलेगा, लेकिन इतना तय है कि ग्रुप-2 का यह मुकाबला टूर्नामेंट का सबसे बड़ा थ्रिलर साबित होने वाला है।

सबसे पहले बात करते हैं रोप ब्रेड पोनीटेल की। यह स्टाइल फ्रेंच ब्रेड से अलग और अधिक कूल लगती है। इसे बनाने के लिए बालों को दो हिस्सों में बांटकर ट्विस्ट करें और फिर रस्सी जैसी चोटी बनाकर पोनीटेल में बांध लें। होली खेलने के दौरान यह हेयरस्टाइल बालों को व्यवस्थित और सुरक्षित रखती है।
दूसरी स्टाइल है साइड ट्विस्ट लो बन। लो बन हर किसी को पसंद आता है लेकिन साइड ट्विस्ट जोड़ने से यह अधिक आकर्षक और एलिगेंट लगती है। यह हेयरस्टाइल चेहरे की शेप को निखारती है और कुर्ता पलाजो या साड़ी हर आउटफिट के साथ परफेक्ट बैठती है।
इसके बाद आती है क्राउन ब्रेड पोनीटेल। इसमें सिर के आगे से पतली चोटी बनाकर इसे क्राउन की तरह घुमाया जाता है और पोनीटेल में जोड़ दिया जाता है। यह स्टाइल खुली बालों जैसा लुक देती है लेकिन बाल पूरी तरह बंधे रहते हैं जिससे रंग गुलाल से बाल सुरक्षित रहते हैं।
अगर आप कुछ यूनिक और परफेक्ट होली लुक चाहती हैं तो स्कार्फ बन हेयरस्टाइल ट्राई कर सकती हैं। इसमें बालों में रंगीन स्कार्फ या दुपट्टा लपेटकर बन बनाया जाता है। यह स्टाइल बालों को रंग और धूप से बचाती है और साथ ही ट्रेडिशनल और बोहो लुक देती है।
अंत में स्पेस बन हेयरस्टाइल भी होली पार्टी के लिए बेहतरीन है। इसमें बालों को दो हिस्सों में बांटकर दो छोटे छोटे बन बनाए जाते हैं। यह हेयरस्टाइल यंग फन और क्यूट लुक देती है। दोस्तों के साथ होली पार्टी में यह स्टाइल आपके पूरे लुक को चार चांद लगा देती है।
इस होली बालों की सुरक्षा और खूबसूरती को ध्यान में रखते हुए इन आसान और ट्रेंडी हेयरस्टाइल्स को अपनाएं। रोप ब्रेड साइड ट्विस्ट लो बन क्राउन ब्रेड पोनीटेल स्कार्फ बन और स्पेस बन जैसे विकल्प आपके होली लुक को परफेक्ट बनाएंगे और बालों को भी सुरक्षित रखेंगे।


रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया कि 20 फरवरी को समाप्त हफ्ते सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा माने जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 1.03 अरब डॉलर घटकर 572.56 अरब डॉलर रहीं। इस दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 97.7 करोड़ डॉलर घटकर 127.48 अरब डॉलर रह गया।
आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में विशेष आहरण अधिकार(एसडीआर) 8.4 करोड़ डॉलर घटकर 18.84 अरब डॉलर रहा। 20 फरवरी को समाप्त हफ्ते सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार 1.8 करोड़ डॉलर घटकर 4.71 अरब डॉलर रह गया है।
केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जनवरी तक सालाना लक्ष्य का 63 फीसदी
केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जनवरी के अंत तक 9.8 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक बजट लक्ष्य का 63 फीसदी है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी है।
वित्त मंत्रालय ने महालेखा नियंत्रक (सीजीए) की ओर से जारी आंकड़ों में बताया कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 74.5 फीसदी था। केंद्र सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 फीसदी यानी 15.58 लाख करोड़ रुपये रहेगा।
महालेखा नियंत्रक (सीजीए) के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 तक केंद्र को कुल 27.08 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो संशोधित अनुमान (आरई) के तहत वित्त वर्ष 2025-26 की कुल प्राप्तियों का 79.5 फीसदी है। इसमें 20.94 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व, 5.57 लाख करोड़ रुपये का गैर-कर राजस्व और 57,129 करोड़ रुपये की गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां शामिल हैं।
सीजीए के आंकड़ों के अनुसार भारत सरकार ने करों के हिस्से के रूप में राज्यों को 11.39 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 65,588 करोड़ रुपये अधिक हैं। इसके अलावा भारत सरकार का कुल व्यय 36.9 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान का 74.3 फीसदी है। इसमें से 28.47 लाख करोड़ रुपये राजस्व मद और 8.42 लाख करोड़ रुपये पूंजी मद में खर्च किए गए। वहीं, कुल राजस्व व्यय में 9.88 लाख करोड़ रुपये ब्याज भुगतान और 3.54 लाख करोड़ रुपये प्रमुख सब्सिडी पर खर्च हुए।