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  • डेंगू–चिकनगुनिया से जूझ रहे युजवेंद्र चहल, फिटनेस बिगड़ने के कारण क्रिकेट से कुछ हफ्तों का ब्रेक

    डेंगू–चिकनगुनिया से जूझ रहे युजवेंद्र चहल, फिटनेस बिगड़ने के कारण क्रिकेट से कुछ हफ्तों का ब्रेक


    नई दिल्ली/भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल इन दिनों क्रिकेट मैदान से दूर हैं। इसकी वजह उननई दिल्लीकी खराब सेहत है। चहल डेंगू और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिसके चलते उनकी फिटनेस पर गहरा असर पड़ा है और उन्हें डॉक्टरों ने पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है। इस बीमारी के कारण उन्हें घरेलू क्रिकेट के अहम मुकाबलों से भी बाहर रहना पड़ा है।युजवेंद्र चहल को आखिरी बार नवंबर महीने में हरियाणा की ओर से सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के ग्रुप मैच में खेलते हुए देखा गया था। इसके बाद से ही वह टीम से लगातार बाहर चल रहे थे, जिससे उनके फैंस के बीच उनकी अनुपस्थिति को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे थे। अब खुद चहल ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बात की पुष्टि कर दी है कि वह डेंगू और चिकनगुनिया से प्रभावित रहे हैं और इसी वजह से क्रिकेट से ब्रेक लेना पड़ा। 
    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला हरियाणा के लिए बेहद अहम था, लेकिन इस निर्णायक मैच में भी चहल अपनी टीम का हिस्सा नहीं बन सके। फाइनल से पहले उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपनी सेहत को लेकर अपडेट साझा किया। चहल ने लिखा कि वह टीम के साथ मैदान पर उतरना चाहते थे, लेकिन शरीर ने साथ नहीं दिया। उन्होंने हरियाणा टीम को फाइनल के लिए शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि वह जल्द पूरी तरह फिट होकर वापसी करेंगे।

    डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से उबरने में आमतौर पर समय लगता है और इसका सीधा असर खिलाड़ी की फिटनेस और स्टैमिना पर पड़ता है। ऐसे में चहल की वापसी को लेकर कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि अब उनकी नजरें विजय हजारे ट्रॉफी पर होंगी, जिसकी शुरुआत 24 दिसंबर से हो रही है। हालांकि, इसमें उनका खेलना पूरी तरह उनकी फिटनेस रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।गौरतलब है कि युजवेंद्र चहल पिछले काफी समय से भारतीय सीनियर टीम से भी बाहर चल रहे हैं। अगस्त 2023 के बाद से उन्होंने भारत के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेला है। टी20 वर्ल्ड कप के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका नहीं मिला, हालांकि इसके बावजूद घरेलू क्रिकेट और विदेशी लीगों में उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा है।

    बीमारी से पहले चहल इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेलते हुए नजर आए थे। उन्होंने नॉर्थम्पटनशायर की ओर से वनडे कप और काउंटी चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी गेंदबाजी किफायती रही, जबकि रेड बॉल क्रिकेट में उन्होंने तीन मैचों में 12 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की थी। उनके इस प्रदर्शन ने यह दिखाया था कि वह अभी भी लंबे फॉर्मेट में प्रभावी गेंदबाज बने हुए हैं।फिलहाल, चहल का पूरा फोकस अपनी सेहत पर है। फैंस और क्रिकेट जगत को उम्मीद है कि वह जल्द ही इन बीमारियों से पूरी तरह उबरकर मैदान पर वापसी करेंगे और एक बार फिर अपनी लेग स्पिन से बल्लेबाजों को परेशान करते नजर आएंगे।

  • Amavasya 2026: जानें साल 2026 में अमावस्या की सभी 13 तिथियां, मौनी और सोमवती अमावस्या सहित

    Amavasya 2026: जानें साल 2026 में अमावस्या की सभी 13 तिथियां, मौनी और सोमवती अमावस्या सहित


    नई दिल्ली/हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष 12 या कभी-कभी 13 अमावस्याएं होती हैं। अमावस्या वह तिथि है जब चंद्रमा पूरी तरह लुप्त हो जाता है और कृष्ण पक्ष समाप्त हो जाता है। साल 2026 में कुल 13 अमावस्या पड़ने वाली हैं। इनमें मौनी अमावस्या और सोमवती अमावस्या विशेष महत्व रखती हैं। आइए जानते हैं 2026 में आने वाली सभी अमावस्याओं की तिथियां और उनके महत्व के बारे में।

    साल 2026 की पहली अमावस्या – मौनी अमावस्या

    साल की पहली अमावस्या माघ मास में पड़ रही है, जिसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। मौनी अमावस्या पर व्रत रखने, दान देने और पितरों का तर्पण करना विशेष रूप से लाभकारी होता है। साथ ही भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने का भी खास महत्व है। मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने की परंपरा प्रचलित है। इस साल मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को पड़ रही है।

    सोमवती अमावस्या 2026
    जब अमावस्या का दिन सोमवार को पड़ता है, उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। साल 2026 में दो बार सोमवती अमावस्या है। पहली सोमवती अमावस्या 15 जून 2026 को और दूसरी 9 नवंबर 2026 को है। इस दिन व्रत और विशेष पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और पितृ दोष से मुक्ति का लाभ माना जाता है।

    शनिश्चरी अमावस्या 2026
    शनिवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन शनिदेव की विशेष पूजा का विधान होता है। साल 2026 में शनिश्चरी अमावस्या दो बार पड़ रही है – 16 मई और 10 अक्टूबर 2026। इस दिन शनिदेव की पूजा और रुद्राभिषेक करने से कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

    अमावस्या का धार्मिक महत्व

    अमावस्या की रात चंद्रमा पूरी तरह गायब हो जाता है और इसे काली रात कहा जाता है। इस दिन किया गया दान, व्रत और पितरों के लिए तर्पण अत्यंत लाभकारी माना जाता है। कई बार अमावस्या तिथि दो दिन तक चलती है – पहला दिन स्नान-दान के लिए शुभ होता है और दूसरा दिन तर्पण, व्रत और पूजा-अर्चना के लिए।

    साल 2026 की सभी अमावस्या तिथियां:

    मौनी अमावस्या: 18 जनवरी 2026 अग्रहायण अमावस्या: 16 फरवरी 2026 फाल्गुन अमावस्या: 18 मार्च 2026 चैत्र अमावस्या: 16 अप्रैल 2026 वैशाख अमावस्या: 16 मई 2026 शनिश्चरी ज्येष्ठ अमावस्या: 15 जून 2026 सोमवती  आषाढ़ अमावस्या: 15 जुलाई 2026 श्रावण अमावस्या: 13 अगस्त 2026 भाद्रपद अमावस्या: 12 सितंबर 2026 आश्विन अमावस्या: 10 अक्टूबर 2026 शनिश्चरी
    कार्तिक अमावस्या: 9 नवंबर 2026 सोमवती मार्गशीर्ष अमावस्या: 8 दिसंबर 2026 पौष अमावस्या: 6 जनवरी 2027

    विशेष सलाह:

    अमावस्या पर व्रत रखने, पितरों का तर्पण करने और दान देने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मौनी और सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व अधिक माना जाता है।साल 2026 में अमावस्या के दिन धार्मिक अनुष्ठान और पूजा के माध्यम से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

  • मौत के बाद क्या होता है? 10 प्रमुख धर्मों की रहस्यमय मान्यताएं

    मौत के बाद क्या होता है? 10 प्रमुख धर्मों की रहस्यमय मान्यताएं

    नई दिल्ली/मौत के बाद क्या होता है? यह सवाल इंसान के अस्तित्व से जुड़ा सबसे गहरा रहस्य है। अलग-अलग धर्म इस पर अलग-अलग विचार रखते हैं। विश्व में हजारों धर्म हैं, और लगभग हर धर्म में मृत्यु और उसके बाद की जीवन यात्रा पर अलग मान्यता मिलती है। यहाँ 10 प्रमुख धर्मों के दृष्टिकोण पर नजर डालते हैं।

    1. ईसाई धर्म
    ईसाई धर्म में मौत को अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत माना जाता है। उनके अनुसार, हर जीव में आत्मा रहती है और मरने के बाद भगवान का न्याय होता है। अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग जाते हैं और पापी नर्क में जन्म लेते हैं।

    2. इस्लाम
    इस्लाम में मृत्यु से डरने की बजाय इसे स्वीकार करना सिखाया जाता है। मुस्लिम मानते हैं कि अल्लाह मृत्यु के समय फरिश्ते भेजते हैं और आत्मा की परीक्षा लेते हैं। पाक आत्मा को बरजख भेजा जाता है, जहां वह कयामत के दिन का इंतजार करती है।

    3. हिंदू धर्म

    हिंदू धर्म में मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र को ‘संसार’ कहा जाता है। आत्मा कई जन्मों में नए शरीर में आती है- कभी इंसान तो कभी जानवर। मोक्ष प्राप्त करने पर पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है।

    4. बौद्ध धर्म

    बौद्ध धर्म में जीवन और मृत्यु सतत प्रक्रिया है। आत्मा मृत्यु के बाद अन्य जन्मों में जाती है। पुनर्जन्म का स्वरूप व्यक्ति के कर्मों पर निर्भर करता है।

    5. सिख धर्म

    सिख धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा कर्मों के आधार पर पुनर्जन्म प्राप्त करती है। भगवान का ध्यान और अहंकार पर नियंत्रण पाने से आत्मा पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो सकती है।

    6. बहाई धर्म
    बहाई धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा जारी रहती है। शरीर मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन आत्मा स्वतंत्र और खुश रहती है। आत्मा की तरक्की में भगवान की कृपा और जीवित लोगों के नेक कर्म मदद करते हैं। मृत्यु को भय की चीज नहीं माना जाता।

    7. जैन धर्म

    जैन धर्म में आत्मा हमेशा जीवित रहती है। मृत्यु और पुनर्जन्म का चक्र केवल कर्मों से तय होता है। अहिंसा और अच्छे कर्म के माध्यम से आत्मा पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त होती है।

    8. जोरोस्ट्रियन धर्म

    जोरोस्ट्रियन धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा का न्याय ‘चिनवट ब्रिज’ पर होता है। अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग जाते हैं और बुरे कर्म करने वाले नर्क में। अंततः सभी आत्माएं शुद्ध होकर भगवान के पास लौट जाती हैं।

    9. शिंटो धर्म जापान 

    शिंटो धर्म में आत्मा शरीर की मृत्यु के बाद जीवित रहती है और जिंदा लोगों की सहायता करती है। मरने के बाद व्यक्ति पवित्र आत्मा बन जाता है और परिवार और समुदाय की रक्षा करता है।

    10. अन्य प्राचीन और लोकधर्म

    अफ्रीकी, इंडिजिनस और अन्य लोकधर्मों में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा विभिन्न रूपों में देखी जाती है। कुछ में आत्मा पूर्वजों के साथ मिलती है, कुछ में जीवन और प्रकृति के चक्र में सम्मिलित होती है।
    मृत्यु के बाद जीवन को लेकर इन सभी धर्मों की मान्यताएं भले ही अलग हों, लेकिन एक साझा संदेश है: मृत्यु अंत नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। चाहे स्वर्ग, नर्क या पुनर्जन्म हो, सभी धर्म आत्मा के महत्व और उसके कर्मों पर जोर देते हैं।

  • मंदिर और कई चीजों में छूट: जानिए किस देश में हिंदुओं को है विशेष अधिकार

    मंदिर और कई चीजों में छूट: जानिए किस देश में हिंदुओं को है विशेष अधिकार



    नई दिल्ली ।
    अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि मुस्लिम-बहुल देशों में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं को समान अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता नहीं मिलती। इसी तर्क के आधार पर कुछ लोग यह भी कहते हैं कि जब मुस्लिम देशों में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं, तो भारत में मुसलमानों के बराबरी के अधिकारों की बात क्यों की जाए। लेकिन जमीनी हकीकत इस सोच से काफी अलग है। दुनिया में ऐसे मुस्लिम-बहुल देश भी हैं, जहां हिंदू न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि उन्हें धार्मिक, सांस्कृतिक और कानूनी स्तर पर व्यापक आजादी भी मिली हुई है। इनमें सबसे प्रमुख नाम इंडोनेशिया का है।

    इंडोनेशिया: जहां हिंदुओं को मिली खुली धार्मिक आजादी

    दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया हिंदुओं के लिए धार्मिक सहिष्णुता का बड़ा उदाहरण माना जाता है। यहां हिंदू आबादी भले ही करीब 1.7 प्रतिशत हो, लेकिन उन्हें अपने धर्म के पालन की पूरी स्वतंत्रता है। इंडोनेशिया में हिंदू धर्म परिषद जैसी संस्थाएं मौजूद हैं, जो विवाह, पारिवारिक और धार्मिक मामलों को देखती हैं। हिंदू मंदिरों का निर्माण, पूजा-पाठ, त्योहारों का आयोजन और धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी रोक-टोक के किए जाते हैं। खास बात यह है कि यहां रामायण और महाभारत जैसे भारतीय महाकाव्य लोक संस्कृति का हिस्सा हैं। कठपुतली नाटकों, लोक मंचन और पारंपरिक उत्सवों में आज भी राम और कृष्ण के पात्र जीवंत नजर आते हैं।

    सांस्कृतिक जुड़ाव और ऐतिहासिक संबंध

    भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते हजारों साल पुराने हैं। प्राचीन काल में भारतीय व्यापारी और नाविक इंडोनेशिया पहुंचे, जिससे वहां हिंदू और बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव पड़ा। जावा और बाली जैसे द्वीपों में आज भी प्राचीन हिंदू-बौद्ध साम्राज्यों की झलक मिलती है। बाली द्वीप तो आज भी हिंदू संस्कृति का मजबूत केंद्र है। इंडोनेशियाई भाषा ‘बहासा इंडोनेशिया’ में संस्कृत के कई शब्द आज भी प्रचलित हैं, जो इस गहरे सांस्कृतिक संबंध को दर्शाते हैं।

    मलेशिया भी है उदाहरण

    इंडोनेशिया के अलावा मलेशिया भी एक ऐसा मुस्लिम-बहुल देश है, जहां करीब 6.3 प्रतिशत हिंदू आबादी रहती है और उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है। कुल मिलाकर यह साफ है कि हर मुस्लिम देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति एक जैसी नहीं होती और इंडोनेशिया जैसे देश धार्मिक सह-अस्तित्व की मिसाल पेश करते हैं।
  • सबसे सस्ता Personal Loan: ये 5 बैंक दे रहे हैं कम ब्याज पर लोन, जानें ₹12 लाख की EMI और पूरा हिसाब

    सबसे सस्ता Personal Loan: ये 5 बैंक दे रहे हैं कम ब्याज पर लोन, जानें ₹12 लाख की EMI और पूरा हिसाब



    personal loan
    :पर्सनल लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर देखना ही काफी नहीं होता। प्रोसेसिंग फीस, प्री-पेमेंट चार्ज, लेट फीस और अन्य शर्तें भी कुल लागत को प्रभावित करती हैं। सबसे कम ब्याज दर आमतौर पर उन्हीं ग्राहकों को मिलती है, जिनका सिबिल स्कोर 800 या उससे ज्यादा होता है। हालांकि, अंतिम ब्याज दर बैंक आपकी आय, नौकरी की स्थिरता और क्रेडिट प्रोफाइल देखकर तय करता है।अगर आप पात्रता पूरी करते हैं, तो सही बैंक चुनकर आप हजारों रुपये की बचत कर सकते हैं।

    सबसे सस्ते पर्सनल लोन देने वाले 5 बैंक

    1. बैंक ऑफ महाराष्ट्र
    सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक ऑफ महाराष्ट्र इस समय सबसे कम शुरुआती ब्याज दरों में पर्सनल लोन दे रहा है।

    ब्याज दर: 8.75% शुरुआती

    प्रोसेसिंग फीस: लोन अमाउंट का 1% + GST

    अधिकतम लोन: ₹20 लाख

    न्यूनतम सालाना आय: ₹3 लाख

    गारंटर: नहीं
    बैंक का दावा है कि वह देश के सबसे सस्ते पर्सनल लोन में से एक ऑफर कर रहा है।

    2. पंजाब एंड सिंध बैंक
    यह बैंक भी किफायती ब्याज दर पर पर्सनल लोन की सुविधा दे रहा है।

    ब्याज दर: 9.60% शुरुआती

    प्रोसेसिंग फीस: 0.50% से 1% तक

    3. एचडीएफसी बैंक 
    प्राइवेट सेक्टर में एचडीएफसी बैंक तेज प्रोसेसिंग के लिए जाना जाता है।

    ब्याज दर: 9.99% शुरुआती

    प्रोसेसिंग फीस: अधिकतम ₹6,500

    अधिकतम लोन: ₹50 लाख (पात्रता पर निर्भर)

    डिस्बर्सल: प्री-अप्रूव्ड ग्राहकों को 10 सेकेंड में फंड ट्रांसफर

    4. एक्सिस बैंक
    ब्याज दर: 9.99% शुरुआती

    प्रोसेसिंग फीस: लोन अमाउंट का 2% तक

    5. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक
    ब्याज दर: 9.99% शुरुआती

    प्रोसेसिंग फीस: लोन अमाउंट का 2% तक

    ₹12 लाख के पर्सनल लोन पर EMI का हिसाब
    अगर आप ₹12 लाख का पर्सनल लोन 5 साल (60 महीने) के लिए लेते हैं, तो अलग-अलग ब्याज दर पर आपकी EMI कुछ इस तरह होगी:

    8.75% ब्याज दर पर
    मंथली EMI: ₹24,765

    कुल ब्याज: ₹2,85,881

    9.99% ब्याज दर पर
    मंथली EMI: ₹25,491

    कुल ब्याज: ₹3,29,433

    यानी सिर्फ ब्याज दर में 1–1.25% का फर्क आपके कुल भुगतान में करीब ₹43,000 से ज्यादा का अंतर ला सकता है।अगर आप सबसे सस्ता पर्सनल लोन चाहते हैं, तो आवेदन से पहले अच्छी तरह तुलना करना बेहद जरूरी है।अपना सिबिल स्कोर सुधारेंब्याज दर के साथ प्रोसेसिंग फीस और शर्तें भी देखें EMI कैलकुलेशन पहले ही कर लें सही बैंक चुनकर आप न सिर्फ कम EMI चुका सकते हैं, बल्कि अपने वित्तीय बोझ को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।

  • U19 एशिया कप 2025: फाइनल में भारत-पाकिस्तान की टक्कर के आसार, सेमीफाइनल जीत तय करेगी हाई-वोल्टेज मुकाबला

    U19 एशिया कप 2025: फाइनल में भारत-पाकिस्तान की टक्कर के आसार, सेमीफाइनल जीत तय करेगी हाई-वोल्टेज मुकाबला

    U19 Asia Cup 2025
    नई दिल्ली
    /अंडर-19 एशिया कप 2025 अब अपने सबसे रोमांचक चरण में पहुंच गया है। क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एक बार फिर भारत और पाकिस्तान फाइनल में आमने-सामने होंगे। टूर्नामेंट में अब तक के प्रदर्शन को देखें तो यह संभावना काफी मजबूत नजर आ रही है। भारतीय अंडर-19 टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाया है और ग्रुप स्टेज में शीर्ष स्थान हासिल किया है। आयुष म्हात्रे की कप्तानी में भारतीय टीम संतुलित और आत्मविश्वास से भरी हुई नजर आई है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी-दोनों ही विभागों में टीम ने विरोधियों पर दबदबा बनाया है। खास बात यह है कि सीनियर टीम ने इसी साल UAE में पाकिस्तान को हराकर एशिया कप जीता था और अब 81 दिन बाद जूनियर टीम के पास भी वही इतिहास दोहराने का मौका है।

    सेमीफाइनल की पूरी तस्वीर

    U19 एशिया कप 2025 के सेमीफाइनल मुकाबलों का कार्यक्रम तय हो चुका है। 19 दिसंबर को खेले जाने वाले पहले सेमीफाइनल में भारत का सामना श्रीलंका से होगा। वहीं, दूसरे सेमीफाइनल में डिफेंडिंग चैंपियन बांग्लादेश और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे। अगर सेमीफाइनल में भारत श्रीलंका को हराने में सफल रहता है और पाकिस्तान बांग्लादेश को मात देता है, तो 21 दिसंबर को दुबई में भारत-पाकिस्तान के बीच फाइनल मुकाबला खेला जाएगा। यह मुकाबला सिर्फ ट्रॉफी के लिए नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच पुरानी क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता का एक और रोमांचक अध्याय होगा।

    ग्रुप स्टेज में भारत का दमदार प्रदर्शन
    ग्रुप स्टेज में भारत और पाकिस्तान की टीमें पहले ही आमने-सामने आ चुकी हैं। 14 दिसंबर को खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को 90 रन से करारी शिकस्त दी थी। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 46.1 ओवर में 240 रन बनाए। एरन जॉर्ज ने शानदार 85 रन की पारी खेली, जबकि कनिष्क चौहान ने 46 रन का अहम योगदान दिया।लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और 150 रन पर ऑलआउट हो गई। भारत की ओर से कनिष्क चौहान और दीपेश देवेंद्रन ने 3-3 विकेट चटकाए। किशन सिंह ने 2 विकेट लिए, जबकि युवा गेंदबाज वैभव सूर्यवंशी ने भी अहम सफलता दिलाई।

    फाइनल में क्या दांव पर होगा?

    अगर भारत और पाकिस्तान सेमीफाइनल में जीत दर्ज करते हैं, तो फाइनल मुकाबला एशिया कप ट्रॉफी के साथ-साथ प्रतिष्ठा की लड़ाई भी बन जाएगा। भारत जहां अपने दबदबे को कायम रखना चाहेगा, वहीं पाकिस्तान ग्रुप स्टेज की हार का बदला लेने उतरेगा।क्रिकेट फैंस के लिए यह मुकाबला किसी त्योहार से कम नहीं होगा। दोनों टीमों की मौजूदा फॉर्म को देखते हुए फाइनल में कांटे की टक्कर तय मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें 19 दिसंबर के सेमीफाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि 21 दिसंबर को दुबई में क्रिकेट का सबसे बड़ा जूनियर मुकाबला देखने को मिलेगा या नहीं।

  • क्या आप भी रख पाते हैं अपनी स्किन का अच्छे से ध्यान अपनाएं ये 5 ब्यूटी टिप्सत्वचा पर आएगा निखार

    क्या आप भी रख पाते हैं अपनी स्किन का अच्छे से ध्यान अपनाएं ये 5 ब्यूटी टिप्सत्वचा पर आएगा निखार


    नई दिल्ली । आजकल हर किसी की चाहत होती है कि उसकी त्वचा सुंदरग्लोइंग और हेल्दी हो। लेकिन बढ़ते प्रदूषणतनाव और गलत दिनचर्या के कारण त्वचा पर प्रभाव पड़ने लगता है। इसलिएसही स्किनकेयर रूटीन अपनाना जरूरी है। बाजार में कई महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स मौजूद हैंलेकिन घरेलू और प्राकृतिक उपायों से भी अपनी त्वचा को निखारा जा सकता है।अगर आप भी अपनी त्वचा को सही तरीके से ध्यान नहीं दे पा रहे हैंतो इन 5 आसान स्किन केयर टिप्स को अपनाकर आप अपनी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बना सकते हैं।

    क्लींसिंग

    क्लींजर का इस्तेमाल करने से त्वचा की गंदगी और प्रदूषण से मुक्त होती है। यह पिंपल्स और डलनेस जैसी समस्याओं से बचाता है। लेकिनकुछ लोग अपनी त्वचा को अच्छे से क्लींस नहीं करते। डबल क्लीनिंग से आपकी त्वचा के अंदर से गंदगी और तेल निकल जाता हैजिससे आपकी स्किन साफ और ताजगी से भरी रहती है।

    कैसे करें

    अच्छे क्लींजर का उपयोग करें। हल्के हाथों से चेहरे को अच्छे से साफ करें।गुनगुने पानी से चेहरा धोएं। टोनिंग क्लींजर के बाद त्वचा को टोन करना जरूरी है। टोनर आपकी त्वचा के पोर्स को सिकोड़ता है और त्वचा को फ्रेश बनाता है। टोनर त्वचा में नमी बनाए रखता है और त्वचा को साफ करता है।

    टोनर

    अच्छे क्वालिटी के टोनर का इस्तेमाल करें। टोनर को चेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें। इसे सूखने दें ताकि यह पूरी तरह से त्वचा में समा जाए। सिरम का उपयोग स्किन केयर रूटीन में एक अहम कदम है। यह त्वचा के अंदर तक जाकर उसे रिपेयर करता है। सिरम में एंटी-एजिंग और हाइड्रेटिंग गुण होते हैंजो त्वचा को नमी प्रदान करते हैं। टोनिंग के बाद सिरम का उपयोग करें। सिरम को हल्के हाथों से चेहरे पर लगाएं और मसाज करें। ध्यान रखें कि सिरम आपकी त्वचा के प्रकार के हिसाब से हो।

    मॉइस्चराइजर

    मॉइस्चराइजर हर स्किनकेयर रूटीन का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह त्वचा को नमी प्रदान करता है और त्वचा को मुलायम बनाता है। चेहरे पर सही मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करने से त्वचा की नमी बनी रहती हैजिससे वह डिहाइड्रेटेड नहीं होती। अपनी त्वचा की जरूरत के हिसाब से एक अच्छा मॉइस्चराइजर चुनें। मॉइस्चराइजर को चेहरे और गर्दन पर अच्छे से लगाएं।

    सनस्क्रीन

    सनस्क्रीन का इस्तेमाल स्किनकेयर रूटीन का आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। यह आपकी त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता हैजो त्वचा की उम्र बढ़ाने के साथ-साथ जलन और दाग धब्बों का कारण बन सकते हैं। स्किनकेयर रूटीन के आखिरी स्टेप के रूप में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। इसे चेहरे और गर्दन पर अच्छे से लगाएं। रोज़ाना सनस्क्रीन का उपयोग करना चाहिएचाहे आप बाहर जाएं या न जाएं।

    इन 5 स्किनकेयर टिप्स को अपनाकर आप अपनी त्वचा को निखार सकते हैं। इन टिप्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और ध्यान रखें कि आपकी त्वचा को समय पर और सही तरीके से देखभाल मिले। प्राकृतिक और साधारण तरीके से स्किन की देखभाल करने से न सिर्फ आपकी त्वचा हेल्दी रहेगीबल्कि वह ज्यादा चमकदार भी दिखेगी।

  • रिटायरमेंट से पहले ‘छक्के’ मारने की प्रवृत्ति चिंताजनक: CJI सूर्यकांत की न्यायपालिका को सख्त चेतावनी

    रिटायरमेंट से पहले ‘छक्के’ मारने की प्रवृत्ति चिंताजनक: CJI सूर्यकांत की न्यायपालिका को सख्त चेतावनी


    नई दिल्ली
    ।न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख दिखाया है। बुधवार, 17 दिसंबर 2025, को एक अहम सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत ने रिटायरमेंट से ठीक पहले कुछ न्यायिक अधिकारियों द्वारा पारित किए जा रहे विवादित आदेशों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने इस प्रवृत्ति की तुलना क्रिकेट के आखिरी ओवर में लगाए जाने वाले छक्कों से करते हुए इसे न्याय व्यवस्था के लिए खतरनाक करार दिया।

    यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है – CJ
    I
    सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी मध्य प्रदेश के एक जिला जज की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिन्हें रिटायरमेंट से महज 10 दिन पहले दो विवादित आदेश पारित करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ कर रही थी।

    CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा

    कुछ न्यायिक अधिकारी सेवानिवृत्ति से पहले ऐसे आदेश पारित करने लगते हैं मानो वे क्रिकेट मैच के आखिरी ओवर में छक्के मार रहे हों। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंता का विषय है।

    गलत आदेश बनाम बेईमानी – फर्क जरूरी

    हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हर गलत न्यायिक आदेश कदाचार नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में किसी जज को केवल इसलिए निलंबित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसका आदेश गलत पाया गया हो, क्योंकि ऐसे आदेशों को अपील या उच्च अदालत के जरिए सुधारा जा सकता है।

    लेकिन CJI ने एक अहम सवाल उठाया-

    अगर कोई आदेश स्पष्ट रूप से बेईमानी, पक्षपात या बाहरी हितों से प्रेरित हो, तो क्या उसे सिर्फ एक  गलती माना जा सकता है? यही सवाल इस पूरे मामले का केंद्र रहा।

    जज का पक्ष: बेदाग रिकॉर्ड का दावा

    मध्य प्रदेश के संबंधित जिला जज 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन 19 नवंबर को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के चलते राज्य में जजों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई, जिससे उनका कार्यकाल एक साल और बढ़ गया। जज की ओर से सीनियर एडवोकेट विपिन सांघी ने दलील दी कि उनका पूरा सेवा रिकॉर्ड बेदाग रहा है और उन्हें हमेशा सकारात्मक वार्षिक मूल्यांकन मिले हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ न्यायिक आदेशों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करना न्यायिक स्वतंत्रता के खिलाफ है।

    सुप्रीम कोर्ट का संतुलित रुख

    सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से आंशिक सहमति जताई कि न्यायिक त्रुटि और कदाचार के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने सीधे तौर पर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और जज को पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निलंबन से जुड़ी जानकारियां RTI के जरिए मांगना उचित तरीका नहीं है, खासकर जब मामला वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी से जुड़ा हो। ऐसे मामलों में संस्थागत प्रक्रियाओं और अभ्यावेदन का सहारा लिया जाना चाहिए।

    न्यायपालिका की साख पर बड़ा संदेश

    CJI सूर्यकांत की यह टिप्पणी केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे न्यायिक तंत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि न्यायिक स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन उसके साथ ईमानदारी और जवाबदेही भी उतनी ही अहम है।यह फैसला और टिप्पणी न्यायपालिका के भीतर आत्ममंथन की जरूरत को रेखांकित करती है। रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके न्यायिक अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे अपने पद की गरिमा और निष्पक्षता को आखिरी दिन तक बनाए रखें, क्योंकि न्यायपालिका की साख किसी एक आदेश से भी प्रभावित हो सकती है।

  • एक्ट्रेस निधि अग्रवाल के साथ हैदराबाद में घटी बदतमीजी, भीड़ ने की धक्का-मुक्की, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

    एक्ट्रेस निधि अग्रवाल के साथ हैदराबाद में घटी बदतमीजी, भीड़ ने की धक्का-मुक्की, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो


    नई दिल्ली । बॉलीवुड और साउथ की मशहूर एक्ट्रेस निधि अग्रवाल के साथ एक डरावनी घटना घटीजब वो हैदराबाद में अपनी फिल्म द राजा साब के सॉन्ग सहना सहना के लॉन्च इवेंट के बाद बाहर जा रही थीं। इवेंट के दौरान सब कुछ ठीक रहालेकिन जैसे ही इवेंट खत्म हुआ और निधि गाड़ी की ओर बढ़ींएक भारी भीड़ ने उन्हें घेर लिया।
    वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि निधि अपनी गाड़ी में बैठने की कोशिश कर रही हैंतभी अचानक लोगों की भीड़ उन्हें घेर लेती है। यह भीड़ निधि की एक झलक पाने और उनके साथ तस्वीरें खींचने के लिए उतावली हो जाती है। लोगों की धक्का-मुक्की और खींचतान से निधि असहज हो जाती हैं। उन्हें देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो कितनी परेशान और घबराई हुई हैं।सुरक्षा गार्ड्स किसी तरह भीड़ से निधि को बचाते हैं और उन्हें गाड़ी में सुरक्षित बैठाते हैं। गाड़ी में बैठने के बादनिधि स्पष्ट रूप से शॉक्ड और परेशान दिखाई देती हैं।
    उन्होंने सबसे पहले राहत की सांस लीफिर गुस्से में आकर भीड़ पर चिल्लाते हुए अपनी असहमति व्यक्त की। घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और फैंस ने इस घटना की कड़ी निंदा की। एक यूजर ने लिखायह घटना बहुत डिस्टर्बिंग है जबकि दूसरे ने इवेंट के मैनेजमेंट को लापरवाह बताते हुए कहाक्या इस तरह के इवेंट्स की योजना बनानी चाहिए घटिया मैनेजमेंट। कुछ यूजर्स ने फैंस के व्यवहार पर भी सवाल उठाएऔर कहा कि फैंस को अपनी लिमिट में रहना चाहिए। वहीं कुछ ने इसे एक मीडिया और भीड़ की लापरवाही बताया और कहा कि ये लोग फैंस की आड़ में गिद्ध की तरह व्यवहार कर रहे हैं।
    इस हादसे पर फिलहाल निधि अग्रवाल की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया हैलेकिन सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में कई सेलेब्स और फैंस आ गए हैं। फिल्म द राजा साब की बात करें तोयह फिल्म 9 जनवरी 2026 को रिलीज होगी। इसमें निधि अग्रवाल के साथ अभिनेता प्रभास मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। इस फिल्म में संजय दत्त और मालविका मोहनन भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। निधि अग्रवाल इससे पहले मुन्ना माइकलईस्मार्ट शंकरऔर ईश्वरन जैसी फिल्मों में अपनी शानदार एक्टिंग से पहचान बना चुकी हैं।

  • वैभव लक्ष्मी व्रत: समृद्धि और सुख-शांति का पावन उपाय, जानें सही विधि और जरूरी नियम

    वैभव लक्ष्मी व्रत: समृद्धि और सुख-शांति का पावन उपाय, जानें सही विधि और जरूरी नियम


    नई दिल्ली
    ।हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। वैभव लक्ष्मी व्रत माता लक्ष्मी के उसी स्वरूप की उपासना का विशेष माध्यम है, जो जीवन में आर्थिक स्थिरता, मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली प्रदान करता है। यह व्रत मुख्य रूप से शुक्रवार के दिन रखा जाता है और इसे विशेष रूप से व्यापार, नौकरी, पारिवारिक कलह और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत की शुरुआत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से की जा सकती है। व्रत करने वाले व्यक्ति को शुरुआत में 11 या 21 शुक्रवारों तक व्रत रखने का संकल्प लेना चाहिए। हालांकि, मलमास या खरमास में इस व्रत की शुरुआत या उद्यापन नहीं करना चाहिए।

    वैभव लक्ष्मी व्रत की सही पूजा विधि

    व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ, साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। पूजा हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए।लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। साथ ही श्रीयंत्र, कलश और चांदी का सिक्का रखें। माता लक्ष्मी को सिंदूर, रोली, मौली, लाल फूल, फल और खीर का भोग अर्पित करें। इसके बाद विधिपूर्वक वैभव लक्ष्मी व्रत कथा का पाठ करें। कथा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।पूजा के अंत में माता लक्ष्मी की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों की सुख-समृद्धि की कामना करें।

    व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

    वैभव लक्ष्मी व्रत के दिन सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज़ करें। प्याज, लहसुन, मांसाहार और खट्टी चीज़ों का सेवन न करें। फल, दूध, मखाने और हल्का सात्विक भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है।पूजा के दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता आवश्यक है। नकारात्मक विचारों से दूर रहें और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए श्रद्धा बनाए रखें। व्रत के दिन जरूरतमंदों को दान देना और सेवा करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, जिससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

    वैभव लक्ष्मी व्रत के लाभ

    वैभव लक्ष्मी व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से व्यक्ति को आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है। घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मानसिक तनाव कम होता है और आत्मिक शुद्धता प्राप्त होती है।इसके साथ ही व्यवसाय और नौकरी में उन्नति के नए अवसर बनते हैं। पारिवारिक कलह दूर होती है और पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है। कुल मिलाकर, वैभव लक्ष्मी व्रत जीवन में समृद्धि, खुशहाली और स्थिरता लाने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली धार्मिक अनुष्ठान है।