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  • रोहित–विराट के बाद संकट में वनडे क्रिकेट, अश्विन–इरफान ने ICC और BCCI को चेताया

    रोहित–विराट के बाद संकट में वनडे क्रिकेट, अश्विन–इरफान ने ICC और BCCI को चेताया


    नई दिल्ली । वनडे क्रिकेट का भविष्य एक बार फिर गंभीर चर्चा के केंद्र में आ गया है। भारत के दो सबसे बड़े सितारे रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों के संभावित संन्यास को देखते हुए पूर्व क्रिकेटरों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते बड़े फैसले नहीं लिए गए तो यह फॉर्मेट आने वाले वर्षों में अपनी प्रासंगिकता खो सकता है। खासतौर पर 2027 वनडे विश्व कप के बाद वनडे क्रिकेट का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

    पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ICC और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI को साफ शब्दों में आगाह किया है कि मौजूदा ढांचे के साथ वनडे क्रिकेट को बचाना मुश्किल होगा। दोनों का मानना है कि द्विपक्षीय सीरीज की घटती अहमियत और टूर्नामेंट्स की अधिकता ने इस फॉर्मेट की चमक फीकी कर दी है।कोविड-19 महामारी के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां पांच मैचों की वनडे सीरीज आम बात हुआ करती थीं, वहीं अब ज्यादातर टीमें केवल तीन मैचों की औपचारिक सीरीज खेलती नजर आती हैं। कई देशों के लिए वनडे क्रिकेट अब सिर्फ विश्व कप तक सीमित होता जा रहा है, जबकि टी20 क्रिकेट और फ्रेंचाइज़ी लीग्स ने दर्शकों का बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींच लिया है।

    अश्विन ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल ऐश की बात में इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अगर रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे बड़े नाम वनडे क्रिकेट से हटते हैं तो दर्शकों की दिलचस्पी और तेजी से कम हो सकती है। अश्विन ने घरेलू क्रिकेट का उदाहरण देते हुए बताया कि विजय हजारे ट्रॉफी को आमतौर पर सीमित दर्शक ही देखते हैं, लेकिन जब रोहित और विराट इस टूर्नामेंट में खेले, तो स्टेडियमों में भारी भीड़ देखने को मिली।उनके मुताबिक, यह साफ संकेत है कि मौजूदा दौर में वनडे क्रिकेट काफी हद तक स्टार खिलाड़ियों पर निर्भर है। अगर बड़े चेहरे नहीं होंगे, तो दर्शकों को आकर्षित करना और भी मुश्किल हो जाएगा। अश्विन ने ICC के मौजूदा टूर्नामेंट मॉडल पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि साल भर में लगातार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट कराने से फैंस में थकान पैदा हो रही है और हर इवेंट की अहमियत कम होती जा रही है।

    अश्विन ने सुझाव दिया कि ICC को फुटबॉल की तर्ज पर वनडे विश्व कप को चार साल में सिर्फ एक बार आयोजित करना चाहिए ताकि इस टूर्नामेंट की प्रतिष्ठा और रोमांच बना रहे। उनका कहना है कि जब कोई इवेंट दुर्लभ होता है तो उसकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है।वहीं इरफान पठान ने भी वनडे क्रिकेट के गिरते ग्राफ पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय सीरीज अब दर्शकों को रोमांचित नहीं कर पा रही हैं। इरफान के अनुसार, अगर वनडे क्रिकेट को फिर से लोकप्रिय बनाना है, तो ट्राई सीरीज और क्वाड्रेंगुलर सीरीज जैसे फॉर्मेट्स को दोबारा शुरू करना होगा।

    इरफान का मानना है कि जब एक ही सीरीज में तीन या चार टीमें हिस्सा लेती हैं तो मुकाबलों की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और हर मैच का महत्व भी ज्यादा होता है। इससे दर्शकों की रुचि बनी रहती है और खिलाड़ियों को भी अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने का मौका मिलता है।कुल मिलाकर अश्विन और इरफान दोनों इस बात पर सहमत हैं कि अगर ICC और BCCI ने समय रहते ठोस और साहसिक फैसले नहीं लिए तो वनडे क्रिकेट धीरे-धीरे हाशिए पर चला जाएगा। 50 ओवर का यह पारंपरिक फॉर्मेट कभी क्रिकेट की पहचान हुआ करता था, लेकिन बदलते दौर में इसे बचाने के लिए बड़े और दूरदर्शी बदलाव अब जरूरी हो गए हैं।

  • राहुल गांधी की राम से तुलना पर सियासी बवाल, नाना पाटोले के बयान को संजय निरुपम ने बताया हास्यास्पद

    राहुल गांधी की राम से तुलना पर सियासी बवाल, नाना पाटोले के बयान को संजय निरुपम ने बताया हास्यास्पद

    नई दिल्ली।कांग्रेस नेता नाना पाटोले द्वारा राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से किए जाने पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। इस बयान पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। गुरुवार को उन्होंने इसे न केवल हास्यास्पद बयान बताया बल्कि कांग्रेस पार्टी के राम के प्रति रुख पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

    संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास भगवान राम और राम मंदिर के विरोध से जुड़ा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कांग्रेस ने हमेशा बाधाएं खड़ी कीं और कई बार भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाए। ऐसे में राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से करना पूरी तरह अनुचित और हास्यास्पद है।उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेताओं को भगवान राम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं करना चाहिए। निरुपम के अनुसार कांग्रेस पार्टी के आचरण और उसके नेताओं की गतिविधियों को देखते हुए उनकी तुलना भगवान राम से नहीं बल्कि रावण से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा राम के नाम को बदनाम मत कीजिए। जिन लोगों का आचरण राम के आदर्शों से मेल नहीं खाता वे ऐसी तुलना करने के अधिकारी नहीं हैं।

    दरअसल यह विवाद तब शुरू हुआ जब बुधवार को कांग्रेस नेता नाना पाटोले से राहुल गांधी के राम मंदिर न जाने को लेकर सवाल किया गया। इसके जवाब में पाटोले ने कहा था कि कांग्रेस भगवान राम का काम कर रही है और राहुल गांधी शोषितों पीड़ितों और वंचितों के लिए वही कार्य कर रहे हैं जो भगवान राम ने किया था। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी देशभर में न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और जब वे अयोध्या जाएंगे तो राम मंदिर में प्रार्थना करेंगे।नाना पाटोले ने यह भी दावा किया कि जब रामलला के मंदिर के ताले बंद थे तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें खुलवाने का आदेश दिया था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नाना पाटोले राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से जोड़कर विवादों में आए हों। इससे पहले अक्टूबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने राहुल गांधी और भगवान राम के नाम को जोड़ते हुए बयान दिया था जिस पर भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया था।उस समय पाटोले ने सफाई देते हुए कहा था कि कांग्रेस राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से नहीं करती बल्कि यह केवल एक संयोग है कि दोनों के नामआर अक्षर से शुरू होते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि भगवान राम शंकराचार्य और राहुल गांधी की यात्राओं में समानता बताना तुलना नहीं है।

    हालांकि भाजपा नेताओं ने उनके इस तर्क को खारिज करते हुए इसे हिंदू भावनाओं का अपमान बताया था। भाजपा नेता सीआर केशवन ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नाना पाटोले से सवाल किया था कि राहुल गांधी अब तक अयोध्या राम मंदिर क्यों नहीं गए।अब एक बार फिर इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और राहुल गांधी कांग्रेस तथा राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर सियासी टकराव तेज हो गया है।

     

  • सरकारी निर्देश के बाद बदली गई ‘धुरंधर’ की डिजिटल कॉपी, 1 जनवरी से थिएटर्स में चलेगा नया वर्जन

    सरकारी निर्देश के बाद बदली गई ‘धुरंधर’ की डिजिटल कॉपी, 1 जनवरी से थिएटर्स में चलेगा नया वर्जन


    नई दिल्ली। फिल्मधुरंधर को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, 31 दिसंबर को देशभर के थिएटर मालिकों को डिस्ट्रीब्यूटर्स की ओर से एक ईमेल भेजा गया, जिसमें बताया गया कि फिल्म की डिजिटल कॉपी DCP को बदल दिया गया है। इस नई कॉपी में फिल्म के कुछ हिस्सों में बदलाव किए गए हैं जिन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश के अनुसार लागू किया गया है।ईमेल में साफ तौर पर थिएटर संचालकों को निर्देश दिए गए कि वे फिल्म की पुरानी डिजिटल कॉपी हटाकर नई DCP डाउनलोड करें। साथ ही यह भी कहा गया कि 1 जनवरी 2026 से केवल बदला हुआ वर्जन ही सिनेमाघरों में चलाया जाए। सूत्रों के अनुसार, नए वर्जन में फिल्म के दो शब्दों को म्यूट किया गया है और एक डायलॉग में आंशिक बदलाव किया गया है।

    इंडिया टुडे को मिली जानकारी के मुताबिक, फिल्म मेंबलोच शब्द को एक या दो जगह म्यूट किया गया है। बताया जा रहा है कि यह फैसला तब लिया गया, जब पिछले हफ्ते बलोच समुदाय के कुछ लोगों ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म में उनके समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और नफरत फैलाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया है।सूत्रों के अनुसार, बलोच समुदाय की आपत्ति खासतौर पर फिल्म के एक डायलॉग को लेकर थी, जिसे अभिनेता संजय दत्त बोलते नजर आते हैं। डायलॉग में समुदाय का जिक्र कथित तौर पर नकारात्मक संदर्भ में किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में इसी डायलॉग को सबूत के तौर पर पेश करते हुए कहा कि यह बयान आपत्तिजनक है और इससे समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचती है।

    इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और अंततः सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश पर फिल्म के कंटेंट में यह बदलाव किया गया। हालांकि फिल्म की कहानी, मुख्य प्लॉट या किरदारों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि सिर्फ विवादित शब्दों और डायलॉग को एडिट किया गया है।गौरतलब है किधुरंधर 5 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म में रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। वहीं राकेश बेदी, सारा अर्जुन, गौरव गेरा, सौम्या टंडन और दानिश पंडोर ने सपोर्टिंग रोल निभाए हैं।

    फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है और दर्शकों के बीच इसकी जबरदस्त चर्चा रही है। अब कंटेंट में किए गए इन बदलावों के बाद फिल्म नए साल से एक संशोधित वर्जन के साथ सिनेमाघरों में दिखाई जाएगी।इसके अलावा, मेकर्स पहले ही फिल्म के दूसरे पार्ट का ऐलान कर चुके हैं, जो 19 मार्च को रिलीज होने वाला है। ऐसे मेंधुरंधर को लेकर दर्शकों की उत्सुकता आने वाले समय में और बढ़ने की उम्मीद है।

  • बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ती ‘धुरंधर’: अक्षय खन्ना की एंट्री ने बदली फिल्म की किस्मत, कास्टिंग की पूरी कहानी आई सामने

    बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ती ‘धुरंधर’: अक्षय खन्ना की एंट्री ने बदली फिल्म की किस्मत, कास्टिंग की पूरी कहानी आई सामने


    नई दिल्ली।आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म धुरंधर को रिलीज हुए लगभग एक महीना हो चुका है लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसकी रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही। फिल्म लगातार कमाई के नए रिकॉर्ड बना रही है और दर्शकों की पसंद बनी हुई है। जहां एक ओर फिल्म की कहानी और निर्देशन की तारीफ हो रही है, वहीं दूसरी ओर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है अभिनेता अक्षय खन्ना की, जिनका किरदार रहमान डकैत सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।

    फैंस न सिर्फ अक्षय खन्ना की दमदार एक्टिंग की तारीफ कर रहे हैं बल्कि कई लोग इसे उनके करियर के बेहतरीन रोल्स में से एक बता रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस रोल ने अक्षय को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया, उसके लिए शुरुआत में उन्हें कास्ट करने का कोई प्लान ही नहीं था।फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस पूरी कहानी से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि धुरंधर की कास्टिंग आसान नहीं थी और इस फिल्म के लिए उन्हें असाधारण मेहनत करनी पड़ी। मुकेश के मुताबिक फिल्म में दिखाई देने वाला हर एक किरदार बहुत सोच-समझकर चुना गया है, ताकि कहानी में सच्चाई और गहराई बनी रहे।

    मुकेश छाबरा ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार फिल्म की स्क्रिप्ट सुनी, तो उन्हें अहसास हुआ कि यह प्रोजेक्ट साधारण नहीं है। आमतौर पर वह किसी फिल्म की कास्टिंग तीन महीने में पूरी कर लेते हैं, लेकिन धुरंधर उनके लिए एक लंबा और चुनौतीपूर्ण सफर साबित हुई। पहले से ही फिल्म में रणवीर सिंह जैसे बड़े स्टार की कास्टिंग हो चुकी थी, ऐसे में बाकी किरदारों के लिए सही कलाकार ढूंढना और भी मुश्किल हो गया।कास्टिंग डायरेक्टर के अनुसार, चाहे वह छोटा रोल हो या बड़ा, हर कलाकार को भाषा, लुक और किरदार की सच्चाई को ध्यान में रखकर चुना गया। अक्षय खन्ना, आर. माधवन, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और अन्य कलाकारों की कास्टिंग इसी सोच का नतीजा है।

    अक्षय खन्ना को लेकर मुकेश छाबरा ने बताया कि उन्हें शुरू से लगता था कि रहमान डकैत के रोल के लिए अक्षय बिल्कुल परफेक्ट हैं। हालांकि जब उन्होंने यह आइडिया निर्देशक आदित्य धर के सामने रखा, तो वह हैरान रह गए। आदित्य को यकीन नहीं हो रहा था और उन्होंने मजाक में कहा कि मुकेश शायद पागल हो गए हैं। लेकिन मुकेश अपने फैसले पर अड़े रहे।इसके बाद उन्होंने खुद अक्षय खन्ना से संपर्क किया। शुरुआत में अक्षय ने भी हैरानी जताई, लेकिन मुकेश ने उन्हें पूरी स्क्रिप्ट सुनने के लिए राजी कर लिया। अक्षय बिना किसी टीम के आदित्य धर के ऑफिस पहुंचे और करीब चार घंटे तक पूरी स्क्रिप्ट ध्यान से सुनी। स्क्रिप्ट खत्म होने के बाद अक्षय का रिएक्शन बेहद पॉजिटिव था और उन्होंने फिल्म को लेकर उत्साह दिखाया।

    हालांकि अंतिम फैसला लेने में अक्षय ने थोड़ा वक्त लिया, लेकिन एक बार स्क्रिप्ट को दोबारा पढ़ने के बाद उन्होंने फिल्म करने के लिए हां कह दी। मुकेश छाबरा के मुताबिक, इसके बाद चीजें बहुत तेजी से आगे बढ़ीं।आज नतीजा सबके सामने है। धुरंधर में अक्षय खन्ना का किरदार दर्शकों को इतना पसंद आया कि वह फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी बन गए हैं। सोशल मीडिया पर सिर्फ उन्हीं की चर्चा है। अब जब फिल्म जबरदस्त सफलता हासिल कर चुकी है, तो दर्शकों को इसके दूसरे पार्ट का बेसब्री से इंतजार है, जो 19 मार्च 2026 को रिलीज होने वाला है।

  • स्टेन स्वामी का मेमोरियल पर दिए बयान पर फ‍िर चर्चा में आए जस्‍ट‍िस स्‍वाम‍िनाथन ?

    स्टेन स्वामी का मेमोरियल पर दिए बयान पर फ‍िर चर्चा में आए जस्‍ट‍िस स्‍वाम‍िनाथन ?

    चैन्‍नई। तमिलनाडु में मंदिर में दीप जलाने के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और केंद्र में विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आए जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन ने एक और अहम फैसला सुनाया है। मद्रास हाई कोर्ट में जस्टिस स्वामीनाथन ने 1755 में अंग्रेजों के खिलाफ लड़े नथम कनवाई युद्ध की याद में स्मारक स्तूप बनाने का रास्ता साफ कर दिया है।
    यह फैसला 18वीं सदी में गुलामी के दौर में भारतीयों के प्रतिरोध की एक प्रेरक इतिहास को उदाहरण बनाता है।

    जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन की तरफ से यह फैसला नथम के तहसीलदार द्वारा इस स्मारक को अनुमति न दिए जाने के बाद आया है। तहसीलदार द्वारा अनुमति न मिलने के बाद एक याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में रिट दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वामीनाथन ने इस बात पर चिंता जताई कि आज की पीढ़ी को भारत के औपनिवेशिक शासन का इतिहास पता नहीं है, न ही उन्हें इस गुलामी से मुक्त कराने के लिए लड़ी गई लड़ाइयों के बारे में ही जानकारी है।

    जस्टिस ने कहा, “राज्य में अगर स्टैन स्वामी की याद में पत्थर का स्तंभ लगाया जा सकता है, उसके लिए अनुमति कि आवश्यकता नहीं पड़ी, तो निश्चित रूप से नथन कनवाई युद्ध की स्मृति में स्तूप स्थापित करने किए भी किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।”

    गौरतलब है कि अदालत ने जिन स्टेन स्वामी का जिक्र हुआ है वह जेसुइट पादरी और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता थे। इनका नाम भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा से भी जोड़ा जाता है, 2021 में इनकी मौत के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी याद में एक स्मृति स्तंभ बनाने की अनुमति दी थी।
    क्या हुआ था नथम कनवाई युद्ध में?

    इस स्मारक को बनाने के लिए याचिका लेकर आए वकील ने तथ्य रखा कि वर्ष 1755 में नथम कनवाई इलाके में मेलूर कल्लर समुदाय और ब्रिटिश सेना के बीच में एक भीषण युद्ध हुआ था। इस युद्ध में कल्लर समुदाय विजयी रहा था। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह युद्ध कोइलकुड़ी के तिरुमोगुर मंदिर की वजह से हुआ था। इस मंदिर से ब्रिटिश सैनिकों ने कर्नल अलेक्जेंडर हेरॉन के नेतृत्व में पीतल की मूर्तियां और अन्य कीमती सामान लूट लिया था। इसके बाद जुटे कल्लर समुदाय ने युद्ध के जरिए इन मूर्तियों को वापस पा लिया।

  • इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…

    इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…


    हैदराबाद। भाजपा शासित मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले और देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा जीतने वाले इंदौर में दूषित पानी पीने के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप से अब तक 13 मौत का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस आंकड़े पर स्थानीय लोगों, सरकार और अधिकारियों के बीच विरोधाभास बना हुआ है।
    इस बीच, हैदराबाद से सांसद और AIMIM की चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस हादसे के लिए भाजपा को न सिर्फ जिम्मेदार ठहराया है बल्कि उसकी नीतियों की भी आलोचना की है। ओवैसी ने दो टूक कहा कि ये लोग आम लोगों के घरों पर बुलडोजर तो चलवा सकते हैं लेकिन उन्हें साफ पानी पीने जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं दे सकते हैं।

    हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, “…उन्हें (बीजेपी) सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन की परवाह है… वे साफ पीने के पानी जैसी ज़रूरी चीज़ें भी नहीं दे सकते और खुद को विश्वगुरु कहते हैं।”

    उन्होंने कहा, “उन्हें सिर्फ बुलडोजर की फिक्र है। किसी मुसलमनान पर इल्जाम लगा तो उसको लाकर पीटते हैं और घर तोड़ देते हैं। इनकी सरकार ऐसी ही है कि देश में इंसानों को बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा सकते। हम 2026 में आ गए हैं और ये लोग विश्वगुरू बनने का दावा करते हैं लेकिन साफ पानी भी नहीं दे सकते हैं। लोग गंदा पानी पीकर मर रहे हैं तो इन लोगों (बीजेपी के लोगों) को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।”

    13 लोगों के मरने का दावा
    बता दें कि इंदौर में स्थानीय नागरिकों ने दूषित जल के प्रकोप के दौरान पिछले आठ दिन में छह माह के बच्चे समेत 13 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है, जबकि प्रशासन ने डायरिया से केवल चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक पहली नजर में लीकेज के कारण पेयजल की पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिलने के कारण भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला। भागीरथपुरा, राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है।
    अधिकारियों के मुताबिक चार लोगों की मौत

    विजयवर्गीय ने संवाददाताओं को बताया कि उल्टी-दस्त के प्रकोप से भागीरथपुरा में 1,400 से 1,500 लोग प्रभावित हुए जिनमें से लगभग 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।

    उन्होंने कहा कि इन मरीजों की हालत खतरे से बाहर है और स्वस्थ होने पर लोगों को अस्पताल से लगातार छुट्टी दी जा रही है।विजयवर्गीय ने उल्टी-दस्त के प्रकोप से मरे लोगों के आंकड़े को लेकर जारी विरोधाभास पर कहा,‘‘मुझे प्रशासन के अधिकारियों ने इस प्रकोप से चार लोगों की मौत की जानकारी दी है, पर यहां (भागीरथपुरा में) आठ-नौ लोगों की मौत की सूचना है। हम इस सूचना की तसदीक कर लेंगे और इसके सही पाए जाने पर संबंधित मृतकों के परिवारों के मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के अनुसार सहायता राशि प्रदान की जाएगी।’’
    अतिरिक्त मुख्य सचिव का दौरा

    इस बीच, राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्थानीय अफसरों के साथ भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा करके हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पेयजल की आपूर्ति की पाइपलाइन के लीकेज को दुरुस्त करने के बाद भागीरथपुरा में बृहस्पतिवार को जलप्रदाय किया गया और घरों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए।

  • लड़की बनकर लड़के से इंस्टाग्राम पर चैट, रोमांस के नाम पर अपहरण

    लड़की बनकर लड़के से इंस्टाग्राम पर चैट, रोमांस के नाम पर अपहरण

    मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे में एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए 15 वर्षीय लड़के के अपहरण का मामला सामने आया है।
    आरोपियों ने सबसे पहले लड़की बनकर लड़के के साथ भावनात्मक संबंधों को मजबूत किया फिर उसे रोमेंटिक संबंध बनाने के लिए एक जगह पर बुलाया, जहां पर उसका अपहरण करने की कोशिश की गई। हालांकि, इस मामले की जानकारी जल्दी ही पुलिस के पास पहुंच गई, जिससे पुलिस ने लड़के को बचा लिया और चार आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

    रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित एक निजी स्कूल में कक्षा दसवीं का छात्र है। आरोपियों ने लड़की के नाम से एक फर्जी आईडी बनाकर उससे दोस्ती बढ़ाई, फिर धीरे-धीरे उसके साथ रोमेंटिक बातें करने लगे। कुछ समय के बाद जब आरोपियों ने पीड़ित का भरोसा जीत लिया और उसे रोमांटिक संबंध के लिए ठाणे के कल्याण पूर्व स्थित नंदीवली में मिलने बुला लिया।

    भरोसे में आने पर लड़का कैब के जरिए वहां पहुंच गया।

    लड़के के वहां पहुंचते ही चारों आरोपियों ने उसका अपहरण कर लिया और उसे एक रिहायशी इमारत के कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने उसके परिजनों से संपर्क करके 20 लाख रुपए की मांग की और दवाब बनाने के लिए कई मैसेज भी भेजे।

    इसके बाद लड़के के माता-पिता की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत ही कार्रवाई शुरू की और सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर पहले कार और फिर उस जगह का पता लगाया, जहां पर लड़के को छोड़ा गया था। इसके बाद पुलिस ने नंदीवली के कमरे में छापा मारा औऱ लड़के को छुड़ा लिया, इसके बाद पुलिस ने 24 घंटे के अंदर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के मुताबिक आरोपियों की पहचान प्रदीप कुमार जायसवाल (24), विशाल पासी(19), चंदन मौर्य (19) और सत्यम यादव के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि उन पर भारतीय न्याय संहिता के तहत अपहरण और जबरन वसूली के आरोप लगाकर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

  • एक शख्स ने सचमुच खोद दी अपनी ही कब्र, लाखों खर्च कर बनवाया अपना मकबरा

    एक शख्स ने सचमुच खोद दी अपनी ही कब्र, लाखों खर्च कर बनवाया अपना मकबरा

    हैदराबाद। ‘अपनी कब्र खुद खोदने’ वाली कहावत तो आपने अक्सर सुनी होगी। लेकिन क्या हो अगर आपको पता चले कि इस कहावत को एक शख्स ने सच कर दिखाया है। इस शख्स ने ना सिर्फ मौत के बाद खुद को दफनाए जाने की तैयारी कर ली है, बल्कि उसने अपनी कब्र भी तैयार कर ली है। जानकारी के मुताबिक उसने इस पर करीब 12 लाख रुपए खर्च भी किए हैं।
    एक रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना के एक गांव रहने वाले 80 साल के इस बुजुर्ग की इस हरकत से स्थानीय लोग दंग रह गए हैं। जगतियाल जिले के लक्ष्मीपुर के रहने वाले नक्का इंद्रय्या के इस अपने मकबरे को एक नाम भी दिया गया है। लोग इसे ‘ग्रेनाइट महल’ के नाम से पुकारते हैं क्योंकि इसे पूरी तरह ग्रेनाइट से बनाया गया है। इसकी कीमत लगभग 12 लाख रुपये बताई जा रही है।
    ढांचा करीब 5 फीट गहरा और छह फीट से ज्यादा लंबा है। डिजाइन को बनाने के लिए तमिलनाडु से खास तौर पर एक मिस्त्री को बुलाया गया था।
    रोज करते हैं सफाई

    इंद्रय्या ने अपनी दिवंगत पत्नी की कब्र के बगल में अपनी कब्र बनवाई है। वह रोज अपनी कब्र की सफाई करने भी जाते हैं और आस-पास के पौधों को पानी देते हैं, पत्थर को साफ करते हैं और फिर बैठकर सुकून के पल बिताते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें यह जानकर सुकून मिलता है कि सब कुछ ठीक वैसे ही तैयार किया गया है जैसा वह चाहते थे।

    रिपोर्ट में इंद्रय्या के हवाले से बताया गया, “यह मेरा घर है, जिसे मैंने अपने लिए खोदा है। मेरे मरने के बाद, मुझे यहीं दफनाया जाएगा, इसलिए मैंने इसे ठीक वैसे ही बनाया जैसा मैं चाहता था।”

    वह यह भी कहते हैं कि मरने के बाद वह किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते। उन्होंने कहा, “मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता था। मौत से डरने की कोई जरूरत नहीं है। हर किसी को मरना है। मुझे भी मरना है। कम से कम मुझे पता है कि मुझे कहां दफनाया जाएगा।”

  • कश्मीरियों को निशाना बनाने वालों पर भड़के फारुख अब्दुल्ला

    कश्मीरियों को निशाना बनाने वालों पर भड़के फारुख अब्दुल्ला

    नई दिल्‍ली। देश में कई जगह पर कश्मीरियों के साथ हुई हिंसा को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने अपनी भड़ास निकाली है। ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में कश्मीरियों को निशाना बनाने वाले यह लोग ‘हिटलर के रास्ते पर’ चल रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि एक समय के बाद यह ‘अतिवादी’ लोग खत्म हो जाएंगे।

    कश्मीरियों के हाथ देश में हुई हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग हिटलर जैसा शासन बनाना चाहते हैं।

    उन्होंने कहा, “यह हमारी किस्त्म है कि कुछ लोग ऐसे हैं, जिनका मकसद कुछ और ही है। यह हिटलर के रास्ते पर चलकर हिटलर जैसा शासन बनाना चाहते हैं। लेकिन इन्हें याद रखना चाहिए कि हिटलर ने भी खुद को गोली मार ली और खत्म हो गया। वहीं, नाजीवाद का भी अंत हो गया। यहां भी एक समय आएगा जब यह अतिवादी चले जाएंगे।”

    गौरतलब है कि हाल ही में देश के कुछ इलाकों में कश्मीरियों के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। इनमें दिल्ली, हरियाणा तमिलनाडु समेत अन्य राज्यों में हुई घटनाएं शामिल थीं। इसमें शॉल बेचने के लिए आने वाले कश्मीरी युवाओं के साथ मारपीट करने और परेशान करने की घटनाएं दर्ज हुई थी। इसी मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी राय रखी थी।

    विदेश मंत्री जयशंकर की खालिदा जिया के निधन पर बांग्लादेश यात्रा को लेकर अपनी बात रखते हुए फारुख ने कहा कि यह अच्छा है। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश हमारा पुराना मित्र है। हमें इस दोस्ती को आगे बढ़ाना होगा और इसे और मजबूत करना होगा।”

    पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर अपनी बात रखते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि यह साल भारत की पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती को बढ़ाए, ताकि हम इन मुश्किलों से निकल सकें। उन्होंने कहा,, “नया साल शुरू हो गया है। ईश्वर बारिश और बर्फ भेजे ताकि हमारी परेशानियां कम हों। मैं प्रार्थना करता हूं कि हमारे देश में शांति बनी रहे और हम पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती करें, ताकि इन मुश्किलों से बाहर निकल सकें।

  • आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान… सिडनी टेस्ट होगा आखिरी मैच

    आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान… सिडनी टेस्ट होगा आखिरी मैच


    नई दिल्ली।
    ऑस्ट्रेलिया के स्टार ओपनर (Australian Star Opener) उस्मान ख्वाजा (Usman Khawaja) ने इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट का ऐलान (Retirement Announced from International Cricket) कर दिया है। यह ऐलान उन्होंने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए किया, इस दौरान उनका परिवार भी वहां मौजूद था। उन्होंने बताया कि इंग्लैंड के खिलाफ सिडनी में होने वाला 5वां एशेज मुकाबला उनके करियर का आकिरी मैच होने वाला है। ख्वाजा ने शुक्रवार को ही अपने इस फैसले की जानकारी टीम के साथी खिलाड़ियों को भी दी। ख्वाजा ने रिटायरमेंट का ऐलान करते हुए अपने पूरे करियर में झेले गए नस्लवाद के बारे में भी बात की। बता दें, 5 मैच की इस टेस्ट सीरीज में ऑस्ट्रेलिया अजेय बढ़त बना चुका है और वह 3-1 से आगे चल रहा है।

    उस्मान ख्वाजा ने कहा, “क्रिकेट के जरिए भगवान ने मुझे मेरी कल्पना से कहीं ज्यादा दिया है। उन्होंने मुझे ऐसी यादें दी हैं जिन्हें मैं हमेशा अपने साथ रखूंगा, ऐसी दोस्ती जो खेल से कहीं आगे है, और ऐसे सबक जिन्होंने मुझे, जो मैं आज हूं, मैदान के बाहर बनाया है। लेकिन कोई भी करियर सिर्फ एक इंसान का नहीं होता। जाहिर है, मुझे बहुत मदद मिली। मेरे माता-पिता, जो वहां बैठे हैं, आपके बलिदानों के लिए धन्यवाद, जो कभी हाइलाइट्स रील में नहीं आए।”

    उस्मान ख्वाजा ने इस दौरान एशेज में अपनी तैयारी और पीठ की दिक्कतों को लेकर अपने साथ हुए नस्लीय स्टीरियोटाइपिंग के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “ऐसी टिप्पणियां, ‘वह टीम के प्रति कमिटेड नहीं है। ‘वह सिर्फ अपने बारे में सोच रहा था। उसने एक दिन पहले गोल्फ कॉम्पिटिशन खेला। वह स्वार्थी है। वह काफी मेहनत से ट्रेनिंग नहीं करता। उसने मैच से एक दिन पहले ट्रेनिंग नहीं की। वह आलसी है।’ ये वही स्टीरियोटाइप हैं, वही नस्लीय स्टीरियोटाइप जिनके साथ मैं पूरी जिंदगी बड़ा हुआ हूं… यही बात मुझे सबसे ज्यादा निराश करती है, क्योंकि मुझे लगा था कि हम इससे आगे निकल चुके हैं। लेकिन अभी भी थोड़ा बहुत ऐसा है, जिससे मुझे हर दिन लड़ना पड़ता है, जो मेरे लिए बहुत निराशाजनक है।”

    उस्मान ख्वाजा ने 2011 में ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट डेब्यू किया था। सिडनी में जो वह इंग्लैंड के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट खेलेंगे वह उनके करियर का 88वां मुकाबला होगा। ख्वाजा ऑस्ट्रेलिया की 2023 WTC चैंपियन टीम का भी हिस्सा थे। उन्होंने मैदान के बाहर एक मजबूत विरासत छोड़ी है, वह ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पहले पाकिस्तान में जन्मे क्रिकेटर और देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले मुस्लिम क्रिकेटर हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 49 वनडे मैच भी खेले हैं।