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  • मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर  50 लाख तक का लोन और सब्सिडी

    मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर 50 लाख तक का लोन और सब्सिडी


    भोपाल। 
    मध्यप्रदेश सरकार राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें व्यवसायिक रूप से प्रगति करने के लिए कई योजनाओं को लागू कर रही है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को रोजगार की तलाश तक सीमित न रखकर उन्हें उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित करना है। इसके लिए सरकार उन्हें लोन ट्रेनिंग सब्सिडी और अन्य वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना रही हैं।

    महिलाओं के लिए उद्यमिता योजनाएं

    मध्यप्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए कई तरह की उद्यमिता योजनाएं शुरू की हैं जिनके जरिए महिलाएं अपने छोटे-से-व्यवसाय की शुरुआत कर सकती हैं। इन योजनाओं के तहत महिलाओं को न केवल व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन और सब्सिडी मिल रही है बल्कि उन्हें विभिन्न प्रकार की ट्रेनिंग भी दी जा रही है जिससे वे अपनी क्षमताओं को पहचान सकें और व्यवसाय के विभिन्न पहलुओं से अवगत हो सकें।

    सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इन योजनाओं के तहत महिलाओं को एक मजबूत आर्थिक आधार प्रदान किया जाए। इसके लिए राज्य में कई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जिसमें महिलाएं अपने कौशल को सुधार सकती हैं और विभिन्न उद्योगों में कदम रख सकती हैं। इसके अलावा सरकार महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए लोन के साथ-साथ मार्जिन मनी और सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी प्रदान कर रही है।

    ₹50 लाख तक का लोन और वित्तीय सहायता

    मध्यप्रदेश सरकार महिलाओं के लिए व्यवसाय स्थापित करने के लिए ₹50 लाख तक का लोन उपलब्ध करवा रही है। यह लोन उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराता है। इसके अलावा महिलाओं को रेडीमेड गारमेंट उद्योग जैसी क्षेत्रों में भी विशेष सहायता दी जा रही है जहां उन्हें प्रति माह ₹5000 की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। यह राशि महिलाओं को उनके व्यवसाय के संचालन में सहायक साबित हो रही है और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही है।

    इसके अतिरिक्त अक्टूबर 2025 तक MSME सूक्ष्म लघु और मझोले उद्योग क्षेत्र में 850 से अधिक इकाइयों को कुल ₹275 करोड़ की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। यह वित्तीय सहायता महिला उद्यमियों के लिए एक मजबूत आधार बनी है जो उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करती है।

    महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार के कदम

    मध्यप्रदेश सरकार ने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए हैं। उदाहरण के लिए महिलाएं अब विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत स्वयं सहायता समूह बना सकती हैं और इन्हें सरकार से सहायता मिल सकती है। इसके अलावा महिलाओं को छोटे से लेकर बड़े स्तर तक व्यवसाय स्थापित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा समर्थन और मार्गदर्शन भी प्रदान किया जा रहा है।

    इसके साथ ही महिलाएं अब अधिक से अधिक व्यवसायों के लिए सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं जो न केवल उनकी व्यक्तिगत स्थिति को मजबूत कर रहे हैं बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह पहल महिलाओं को नए अवसरों की ओर मार्गदर्शन करने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद कर रही है।

    मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक सकारात्मक कदम है। लोन ट्रेनिंग सब्सिडी और अन्य सुविधाओं के माध्यम से महिलाओं को व्यवसाय स्थापित करने का एक मजबूत मंच मिल रहा है। इससे न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है बल्कि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं। सरकार की इस पहल से महिलाओं को रोजगार की दिशा में एक नई राह मिल रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।

  • मप्र में मंत्रिमंडल विस्तार भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद होगा फैसला मंत्री प्रदर्शन रिपोर्ट भी अहम

    मप्र में मंत्रिमंडल विस्तार भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद होगा फैसला मंत्री प्रदर्शन रिपोर्ट भी अहम


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार के दो वर्ष पूरे होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। हालांकि पार्टी सूत्रों के अनुसार यह विस्तार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के बाद ही किया जाएगा। केंद्रीय नेतृत्व द्वारा मंत्रालयों के कार्यों का गहन मूल्यांकन किए जाने के बाद ही इस प्रक्रिया में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद विस्तार की संभावना

    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 20 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है और पार्टी नेताओं का मानना है कि इस तिथि के आसपास भाजपा को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जाएगा। पार्टी के नेताओं के बीच चर्चा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होने के बाद ही मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार पर निर्णय लिया जाएगा। इसके पीछे यह कारण है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश के मंत्रिमंडल में फेरबदल करने के लिए पूरी तरह से तैयार है लेकिन यह बदलाव भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से मंजूरी मिलने के बाद ही होगा।

    मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन पर रिपोर्ट कार्ड तैयार

    मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण पहलू है जो सरकार के मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन से जुड़ा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश के मंत्रियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए अलग-अलग एजेंसियों से रिपोर्ट कार्ड तैयार करवाया है। इन रिपोर्ट कार्ड्स में मंत्रियों की कार्यकुशलता जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी और उनके विभागों के कार्यों की समीक्षा की गई है। माना जा रहा है कि इन रिपोर्ट्स को विस्तार के निर्णय में अहम भूमिका दी जाएगी।

    हालांकि सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व मध्य प्रदेश के कुछ मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन से काफी नाराज भी है और इन रिपोर्ट्स के आधार पर ही अगले कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा मंत्रियों के कामकाज का आकलन करने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विभागवार समीक्षा बैठकें भी आयोजित की हैं। इन बैठकों का उद्देश्य मंत्रियों की कार्यशैली का मूल्यांकन करना और यह सुनिश्चित करना था कि हर विभाग अपने लक्ष्यों को पूरा कर रहा है या नहीं।

    छत्तीसगढ़ के बाद मध्य प्रदेश में भी होगा फेरबदल

    इसी साल छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय की सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था और इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश में भी मोहन यादव अपनी टीम में फेरबदल कर सकते हैं। भाजपा नेताओं के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व की निगाहें अब प्रदेश के मंत्रियों पर हैं और उनके प्रदर्शन की समीक्षा के आधार पर ही किसी को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी या फिर बाहर किया जाएगा।

    विस्तार के लिए प्रमुख नेता की नियुक्ति

    मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान इस बात की संभावना जताई जा रही है कि कुछ नई चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है खासकर उन नेताओं को जो हाल के विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं या फिर जिनकी जनता में बेहतर छवि बन चुकी है। इस विस्तार के बाद यह देखा जाएगा कि सरकार में किसी को नई जिम्मेदारी दी जाती है या कुछ पुराने मंत्रियों को बदलकर नए मंत्रियों की नियुक्ति की जाती है।

    केंद्रीय नेतृत्व की नाराजगी और मंत्रियों की समीक्षा

    केंद्रीय नेतृत्व का मध्य प्रदेश के मंत्रियों के प्रति असंतोष का मुख्य कारण उनके कार्यों में लापरवाही और प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर उनका कमजोर रवैया बताया जा रहा है। भाजपा की केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि किसी भी तरह की असंतोषपूर्ण कार्यशैली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही अपने विभागों में सुधार और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार रहें।

    मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के लिए सभी आँखें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर टिकी हैं। यह संभावना जताई जा रही है कि जेपी नड्डा के कार्यकाल के अंत और नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद ही मुख्यमंत्री मोहन यादव मंत्रिमंडल में फेरबदल करेंगे। इस निर्णय में प्रमुख भूमिका मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन पर तैयार रिपोर्ट कार्ड की होगी जो भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय को प्रभावित करेगा। इसके अलावा जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में बदलाव किए जाएंगे।

  • शाहिद अफरीदी का बड़ा बयान: गौतम गंभीर पर तंज, विराट और रोहित को बताया टीम की असली रीढ़

    शाहिद अफरीदी का बड़ा बयान: गौतम गंभीर पर तंज, विराट और रोहित को बताया टीम की असली रीढ़

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट पर पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी की प्रतिक्रियाएँ हमेशा सुर्खियों में रहती हैं। इस बार अफरीदी ने टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर की आलोचना करते हुए भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली और रोहित शर्मा की जमकर तारीफ की। अफरीदी ने कहा कि कोहली और रोहित टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं और 2027 तक ओवरऑल टीम के लिए अहम बने रहेंगे।

    कोहली और रोहित की जमकर तारीफ
    अफरीदी ने भारतीय टीम के दो स्टार बल्लेबाजों, विराट कोहली और रोहित शर्मा की तारीफ करते हुए कहा कि ये दोनों न केवल भारत के बल्कि दुनिया के सबसे भरोसेमंद ODI बल्लेबाजों में शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से हाल ही में साउथ अफ्रीका के खिलाफ इन दोनों के शानदार प्रदर्शन की ओर ध्यान दिलाया। अफरीदी ने कहा, “विराट और रोहित भारतीय बैटिंग लाइन-अप की असली ताकत हैं। उनके हालिया फॉर्म को देखकर लगता है कि वे लंबे समय तक टीम के लिए अहम बने रहेंगे।” अफरीदी का मानना है कि बड़े टूर्नामेंट और महत्वपूर्ण सीरीज में टीम को इन दोनों खिलाड़ियों को जरूर उतारना चाहिए।

    अफरीदी ने सुझाव दिया कि जब टीम किसी कमजोर विरोधी के खिलाफ खेले, तो युवा खिलाड़ियों को अवसर देने के लिए कोहली और रोहित को आराम दिया जा सकता है। यह रणनीति टीम को संतुलित रखते हुए नए टैलेंट को मौका देने में मदद करेगी।

    गौतम गंभीर की कोचिंग पर तंज
    शाहिद अफरीदी ने भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर की कोचिंग शैली पर सीधे निशाना साधा। अफरीदी ने कहा कि गंभीर ने कोच के रूप में शुरुआत में यह छवि बनाई कि वे हमेशा सही होते हैं, लेकिन समय ने साबित कर दिया कि हर बार सही होना संभव नहीं है। अफरीदी और गंभीर के बीच पहले भी मैदान पर कई बार विवाद हो चुका है। अफरीदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब गंभीर ने पहले ही साफ कर दिया था कि 2027 वर्ल्ड कप अभी दूर है और टीम युवा खिलाड़ियों को मौके देकर नई दिशा देना चाहती है।

    रोहित के रिकॉर्ड छक्कों पर अफरीदी की खुशी
    अफरीदी ने रोहित शर्मा के हालिया ODI छक्कों के रिकॉर्ड को तोड़ने पर अपनी खुशी जताई। उन्होंने कहा, “रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही बनाए जाते हैं और मुझे खुशी है कि मेरा रिकॉर्ड किसी क्लासी बल्लेबाज जैसे रोहित ने तोड़ा।” रोहित ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ रायपुर ODI में अपना 355वां छक्का जड़कर अफरीदी (351 छक्के) को पीछे छोड़ दिया। अफरीदी ने इसे खेल की प्रगति और भारतीय क्रिकेट की बढ़ती ताकत का हिस्सा बताया।

    IPL 2008 की यादें और रोहित का मैच विनिंग अंदाज
    अफरीदी ने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए IPL 2008 का जिक्र किया, जब वे डेक्कन चार्जर्स के लिए खेल रहे थे। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें पहली बार एहसास हुआ कि रोहित भविष्य में भारतीय क्रिकेट के बड़े सितारे बनेंगे। अफरीदी ने कहा, “उनकी बल्लेबाजी में वह क्लास थी जो किसी भी दिन मैच का रुख बदल सकती थी। रोहित एक मैच विनर खिलाड़ी हैं और उन्होंने हर अवसर पर अपनी टीम को मजबूत बनाया है।”

    अफरीदी का निष्कर्ष
    शाहिद अफरीदी की राय में, विराट कोहली और रोहित शर्मा के अनुभव और क्लास की वजह से टीम इंडिया के ODI लाइन-अप की रीढ़ मजबूत है। जबकि गौतम गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठाए गए हैं, अफरीदी का जोर इस बात पर है कि टीम इंडिया को अपने अनुभवी खिलाड़ियों की काबिलियत का पूरा लाभ उठाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर युवाओं को मौके देकर संतुलन बनाना चाहिए।

    अफरीदी का यह बयान भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर उन्होंने कोहली और रोहित को टीम की रीढ़ बताया, वहीं गंभीर की कोचिंग पर तंज भी कसा। इससे साफ है कि अफरीदी का मानना है कि टीम इंडिया को संतुलित और मजबूत रखने के लिए अनुभवी खिलाड़ियों का उपयोग जरूरी है। 2027 तक विराट और रोहित टीम की अहमियत बनाए रख सकते हैं, जबकि युवा खिलाड़ियों को अवसर देने की रणनीति से टीम की लंबी दूरी की तैयारी भी मजबूत हो सकती है।

    इस तरह, शाहिद अफरीदी ने भारतीय क्रिकेट की वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीति पर अपनी राय रखी है, जिससे टीम इंडिया के फैंस और विश्लेषक दोनों ही नए सिरे से विचार कर रहे हैं।

  • आठवें वेतन आयोग का लाभ सभी पेंशनभोगियों को मिलेगा, सरकार ने खत्म किया संदेह

    आठवें वेतन आयोग का लाभ सभी पेंशनभोगियों को मिलेगा, सरकार ने खत्म किया संदेह


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग को लेकर चल रही चर्चाओं और संदेहों का अंत करते हुए स्पष्ट जवाब दिया है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि 69 लाख पेंशनभोगियों को भी इस आयोग के लाभ का पूरा फायदा मिलेगा, जो पहले संदेह के घेरे में थे। इसके साथ ही, सरकार ने इस मामले में स्पष्टता प्रदान करते हुए पेंशनभोगियों को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब दिया है।

    सरकार का आधिकारिक बयान

    वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 8 दिसंबर 2025 को लोकसभा में लिखित रूप में जवाब दिया कि आठवें वेतन आयोग के लाभ से लगभग 50.14 लाख केंद्रीय कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनभोगी सीधे प्रभावित होंगे। पंकज चौधरी ने बताया कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग 8th CPC की सिफारिशें लागू होने के बाद, इसके प्रभाव में आने वालों की संख्या में काफी वृद्धि होगी। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि बजट में आवश्यक प्रावधान किए जाएंगे, क्योंकि यह एक बड़ा व्यय केंद्र सरकार के लिए होगा।

    AIDEF की आपत्ति और सरकार की प्रतिक्रिया

    इससे पहले, ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने आठवें वेतन आयोग के दायरे से 69 लाख पेंशनभोगियों को बाहर किए जाने के खिलाफ आपत्ति जताई थी। उन्होंने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर टर्म ऑफ रेफरेंस में असंगतियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे।  का कहना था कि पेंशनभोगियों को इस आयोग से बाहर करना अनुचित होगा, क्योंकि वे पहले से ही सरकार द्वारा निर्धारित पेंशन नियमों का पालन कर रहे हैं

    और उन्हें आयोग के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।अब सरकार ने इस आपत्ति पर स्पष्टता देते हुए कहा है कि पेंशनभोगियों को इस वेतन आयोग के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा और यह सभी 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए लागू होगा। यह निर्णय पेंशनभोगियों के लिए राहत का संकेत है, जिन्होंने इस मामले में लगातार सरकार से जवाब मांगा था।

    वेतन आयोग का प्रभाव

    आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण परिवर्तन लेकर आएंगी। इस आयोग की सिफारिशों के अनुसार, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की वेतन संरचना, भत्ते और अन्य सुविधाओं में वृद्धि की संभावना है। यह कदम केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा व्यय होगा, क्योंकि इसे लागू करने के लिए बजट में खास प्रावधान किए जाएंगे। केंद्र सरकार के लिए यह निर्णय व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे लागू करने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। लेकिन, यह कदम कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा, जो लंबे समय से वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे थे।

    आगे क्या होगा

    अब जबकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेंशनभोगियों को भी आठवें वेतन आयोग का लाभ मिलेगा, यह सभी संबंधित पक्षों के लिए एक राहत की बात है। इसके बाद, केंद्र सरकार को इस फैसले को बजट में शामिल करना होगा और इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट में किस तरह से इस फैसले को लागू करने के लिए कदम उठाए जाते हैं और यह निर्णय केंद्र सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर कितना प्रभाव डालता है।

    आठवें वेतन आयोग का लाभ अब सभी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा, जैसा कि सरकार ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है। इससे संबंधित कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच खुशी की लहर है, क्योंकि यह उनकी लंबे समय से लंबित उम्मीदों का फल है। हालांकि, इस फैसले के लागू होने के बाद केंद्र सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर इसका प्रभाव पड़ेगा, और इसे बजट में सही तरीके से प्रावधानित करना होगा।

  • Year Ender 2025: मिडिल क्लास के लिए राहत, इनकम टैक्स और GST सुधार से बढ़ी बचत

    Year Ender 2025: मिडिल क्लास के लिए राहत, इनकम टैक्स और GST सुधार से बढ़ी बचत

    नई दिल्ली। वर्ष 2025 मिडिल क्लास के लिए कई मामलों में शानदार साबित हुआ। इस साल सरकार ने टैक्स और जीएसटी में बड़े सुधार किए, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ा और वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हुआ। सबसे ज्यादा राहत इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव और जीएसटी 2.0 रिफॉर्म से मिली।

    इनकम टैक्स में बड़ी राहत
    केंद्र सरकार ने आम आदमी पर टैक्स का बोझ कम करने के लिए इस साल कई फैसले लिए। बजट 2025 में सरकार ने इनकम टैक्स छूट की लिमिट 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी। इसके साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत मिलने वाली 75,000 रुपये की छूट को मिला दिया जाए तो यह बढ़कर 12.75 लाख रुपये हो जाती है। इसका मतलब है कि कोई भी सैलरीड क्लास 12.75 लाख रुपये तक की आमदनी पर इनकम टैक्स छूट का दावा कर सकता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन की छूट केवल सैलरीड क्लास को ही मिलेगी।

    जीएसटी 2.0 से मिडिल क्लास को बड़ा फायदा
    सरकार ने 2025 में जीएसटी स्लैब्स में भी बड़ा बदलाव किया। पुराने चार स्लैब 5%, 12%, 18% और 28% को घटाकर अब केवल दो स्लैब 5% और 18% रह गए हैं। वहीं, लग्जरी और सिन गुड्स पर जीएसटी की दर 40% कर दी गई।

    453 चीजों पर GST रेट में बदलाव
    नए जीएसटी रेट लागू होने के बाद 453 चीजों की दरों में बदलाव हुआ, जिनमें से 413 चीजों की दर में कमी हुई। करीब 295 जरूरी चीजों पर जीएसटी रेट 12% से घटाकर 5% या जीरो कर दिया गया। 1,200 सीसी या उससे कम की पेट्रोल कारों और 1,500 सीसी या कम की डीजल कारों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% की गई। इसी तरह, 350 सीसी या उससे कम की बाइक पर भी जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दी गई।

    लग्जरी गाड़ियों और बाइक पर 40% GST
    लग्जरी गाड़ियों और बाइक पर जीएसटी 40% तय की गई। इसके साथ ही कारों पर सेस को भी खत्म कर दिया गया। इन सुधारों का उद्देश्य देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाना था। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की दूसरी तिमाही में देश की ग्रोथ रेट 8.2% दर्ज की गई, जो पिछली कई तिमाहियों में सबसे तेज है।

    टोल प्लाजा पर भी मिली राहत
    साल 2025 में आम लोगों के लिए टोल टैक्स का बोझ भी कम किया गया। सरकार ने एनुअल पास का ऐलान किया, जिसे 15 अगस्त से लागू कर दिया गया। फास्टैग एनुअल पास की कीमत 3,000 रुपये है। इसके तहत कोई भी वाहन चालक सालभर में 200 टोल प्लाजा पार कर सकता है। इस योजना से एक टोल प्लाजा पार करने की कीमत घटकर केवल 15 रुपये रह जाती है, जिससे हाइवे पर सफर पहले की तुलना में काफी सस्ता हो गया है।
    साल 2025 मिडिल क्लास के लिए राहत और फायदे लेकर आया। इनकम टैक्स में छूट, GST स्लैब्स में कमी और टोल पास सुविधा ने आम आदमी की जेब पर सकारात्मक असर डाला। सरकार के ये कदम आर्थिक दृष्टि से आम जनता को सहारा देने और खर्च में कटौती करने में मददगार साबित हुए हैं।

  • Year Ender 2025: क्रिकेट जगत ने खो दिए अपने अनमोल रत्न

    Year Ender 2025: क्रिकेट जगत ने खो दिए अपने अनमोल रत्न

    2025 क्रिकेट प्रेमियों के लिए रोमांचक रहा, लेकिन साथ ही यह साल दुखद भी रहा। इस साल कई दिग्गज खिलाड़ियों ने हमेशा के लिए खेल से विदा ली। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट ने इन सितारों को खोकर गहरा सदमा झेला।

    पद्माकर शिवलकर:
    मार्च में भारत के लेफ्ट-आर्म स्पिनर पद्माकर शिवलकर का 88 साल की उम्र में निधन हो गया। घरेलू क्रिकेट में उनके 636 विकेट उन्हें लेजेंडरी बनाते हैं। बीसीसीआई ने उन्हें सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया था।

    जुनैल जफर खान:
    18 मार्च को ऑस्ट्रेलिया में क्लब मैच के दौरान पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ी जुनैल जफर खान की भीषण गर्मी के बीच मैदान पर गिरने से मृत्यु हो गई। वह ओल कोंकोर्डियंस क्रिकेट क्लब के लिए खेल रहे थे।

    बॉब काउपर:
    मई में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के दिग्गज बॉब काउपर का 84 साल की उम्र में निधन हुआ। 1960 के दशक में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 27 टेस्ट खेले और 1968 एशेज सीरीज में 307 रन की ऐतिहासिक पारी खेली।

    दिलीप दोशी:
    जून में भारत के पूर्व स्पिनर दिलीप दोशी का 77 साल की उम्र में लंदन में निधन हुआ। उन्होंने भारत के लिए 33 टेस्ट और 15 वनडे खेले। दोशी घरेलू क्रिकेट के स्तंभ रहे और सौराष्ट्र तथा बंगाल के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी।

    बेन ऑस्टिन और रॉबिन स्मिथ:
    28 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के बेन ऑस्टिन का अभ्यास के दौरान घायल होने से निधन हुआ। दिसंबर में इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज रॉबिन स्मिथ का 62 साल की उम्र में निधन हुआ। स्मिथ ने 62 टेस्ट में 4,000 से ज्यादा रन बनाए और 1980-90 के दशक में इंग्लैंड के प्रमुख बल्लेबाज रहे।

    2025 क्रिकेट जगत के लिए ना सिर्फ रोमांचक मैचों का साल रहा, बल्कि यह उनके सम्मान और याद में भी याद रहेगा जिन्होंने अपने योगदान से खेल को समृद्ध किया।

  • वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

    वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

     
    नई दिल्ली । संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम् पर जारी बहस ने मंगलवार को एक नया मोड़ लिया जब गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। इस मुद्दे पर पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी और अब अमित शाह ने विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए। वंदे मातरम् पर संसद में चल रही यह बहस 9 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में इसकी शुरुआत के बाद और भी तेज हो गई है।

    अमित शाह का बयान

    अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा की आवश्यकता तब भी थी जब यह रचना रची गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चर्चा आजादी के आंदोलन के दौरान भी जरूरी थी और आज भी यह जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत 2047 में एक विकसित राष्ट्र बनेगा तब भी वंदे मातरम् पर चर्चा जारी रहेगी। शाह ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कहा कि यह रचना विदेशी आक्रमणों और सांस्कृतिक चुनौतियों के प्रतिकार के रूप में सामने आई थी।

    गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि वंदे मातरम् को लेकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के समय इसका एक बड़ा महत्व था। यह न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन चुका था बल्कि यह भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान का भी प्रतीक था। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज वंदे मातरम् को लेकर विवाद उठाना और इसके महत्व को कम करने की कोशिश करना भारतीयता और भारतीय संस्कृति को कमजोर करने जैसा है।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर बयान

    अमित शाह ने इस मुद्दे पर एक और ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा नेहरू ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए थे और इंदिरा गांधी ने इसके विरोध में खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने हमेशा इस पर विवाद उठाया जबकि वंदे मातरम् ने भारतीय जनमानस को एकजुट किया और यह हर भारतीय का राष्ट्रीय गीत बन गया।

    शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के खिलाफ राजनीति करना भारतीय संस्कृति और भारतीयता के खिलाफ है। उनका यह भी कहना था कि अगर कांग्रेस के नेताओं के विचार इस गीत के खिलाफ थे तो यह पार्टी की सोच का संकेत है कि वह भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को प्राथमिकता नहीं देती।

    विपक्ष पर अमित शाह के आरोप

    अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो लोग वंदे मातरम् के खिलाफ बोलते हैं वे दरअसल भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद का अपमान कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह गीत हर भारतीय के दिल में गूंजता है और यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता एकता और अखंडता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस गीत का विरोध कर राजनीति कर रहे हैं और अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल और संसद में गहमागहमी

    वंदे मातरम् पर संसद में चली यह बहस अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। यह मामला केवल एक गीत का नहीं बल्कि भारतीयता संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुड़ा हुआ है। अमित शाह के बयान ने विपक्ष को चुप्प रहने की चुनौती दी है वहीं विपक्ष ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् को लेकर किसी भी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यह गीत सभी भारतीयों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है और इसे किसी विशेष पार्टी या विचारधारा से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

    वंदे मातरम् पर यह बहस अब केवल एक गीत तक सीमित नहीं रही बल्कि यह भारतीय संस्कृति राष्ट्रीय एकता और राजनीति से जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर अमित शाह और उनकी पार्टी इस मुद्दे को भारतीयता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं वहीं विपक्ष इसे राजनीति से जोड़ते हुए इसे विवादित बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर भी चर्चा का विषय बना रहेगा और इस पर अधिक राजनीतिक बयानबाजी की संभावना है।

  • भीड़ त्रासदी 2025: वेंकटेश्वर मंदिर से प्रयागराज तक, 129 मौतें, प्रशासन और जनता की चूक जारी

    भीड़ त्रासदी 2025: वेंकटेश्वर मंदिर से प्रयागराज तक, 129 मौतें, प्रशासन और जनता की चूक जारी

    2025 भारत के लिए बेहद दुखद साल बन गया, जब देश में आठ भीषण भगदड़ की घटनाओं में 129 लोगों की जान गई। यह घटनाएं प्रशासन और आम जनता की सुरक्षा और अनुशासन की कमी को उजागर करती हैं।

    साल 2025 की प्रमुख भगदड़ घटनाएं:

    9 जनवरी – आंध्र प्रदेश, तिरुमाला हिल्स (वेंकटेश्वर मंदिर)

    वैकुंठ द्वार दर्शन के टिकट के लिए लाइन में भगदड़

    6 मौतें, कई घायल

    29 जनवरी – प्रयागराज (महाकुंभ)

    मौनी अमावस्या पर लाखों श्रद्धालु घाट पर

    30 मौतें, 60 घायल

    15 फरवरी – प्रयागराज (नई दिल्ली रेलवे स्टेशन)

    प्लेटफॉर्म पर अफरातफरी

    18 मौतें, 4 बच्चे शामिल

    3 मई – गोवा (शिरगाओ, लैराई देवी जात्रा मंदिर)

    बिजली का झटका और भगदड़

    6 मौतें, 70 घायल

    4 जून – बेंगलुरु (IPL जश्न)

    3 लाख से अधिक लोग जुटे, नियंत्रण न होने से भगदड़

    11 मौतें, 50+ घायल

    27 जुलाई – उत्तराखंड (हरिद्वार, मनसा देवी मंदिर)

    अफवाह फैलने से भगदड़

    9 मौतें, 30+ घायल

    27 सितंबर – तमिलनाडु (करूर, विजय रैली)

    भारी भीड़ और देर से आगमन

    41 मौतें, 50+ घायल

    1 नवंबर – आंध्र प्रदेश (वेंकटेश्वर मंदिर, श्रीकाकुलम)

    एकादशी पर भारी भीड़

    9 मौतें (8 महिलाएं, 1 बच्चा)

    भगदड़ के मुख्य कारण:

    भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की कमी

    संकरे रास्ते और अनुचित एंट्री-एग्जिट प्लान

    आयोजकों और श्रद्धालुओं द्वारा सुरक्षा नियमों की अनदेखी

    अफवाह फैलना और अचानक हलचल

    तकनीकी निगरानी की कमी (CCTV, क्राउड सेंसर)

    सार्वजनिक जगहों पर अनुशासन की कमी

    विशेषज्ञों के अनुसार, हर घटना प्रशासन और आम जनता के लिए चेतावनी है: भीड़ को संभावित खतरे के रूप में देखना और अनुशासन अपनाना अनिवार्य है।

    क्या प्रशासन और लोग सतर्क हुए?

    लगातार हादसों के बावजूद सुरक्षा उपाय अभी भी अपूर्ण हैं।

    बड़े आयोजनों में फुल-प्रूफ सुरक्षा और तकनीकी निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता।

    आम जनता और आयोजकों में सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाना जरूरी।

    2025 की ये घटनाएं स्पष्ट संदेश देती हैं कि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा पर गंभीर ध्यान न दिया गया तो अनगिनत जानें हर साल जोखिम में रहेंगी।

  • मां हिंदू, पिता क्रिश्चिय फिर भी दीया मिर्ज़ा ने क्यों अपनाया मुस्लिम सरनेम जानें वजह

    मां हिंदू, पिता क्रिश्चिय फिर भी दीया मिर्ज़ा ने क्यों अपनाया मुस्लिम सरनेम जानें वजह


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की खूबसूरत और टैलेंटेड एक्ट्रेस दीया मिर्ज़ा ने 2001 में बॉलीवुड इंडस्ट्री में कदम रखा और अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना ली। हालांकि दीया की व्यक्तिगत जिंदगी और उनके बैकग्राउंड के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उनका परिवार काफी विविधतापूर्ण रहा है उनकी मां हिंदू और पिता क्रिश्चियन थे फिर भी उन्होंने मुस्लिम सरनेम मिर्ज़ा क्यों अपनाया इसके पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प और भावुक है। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से।

    दीया मिर्ज़ा का बैकग्राउंड और सरनेम का बदलाव

    दीया मिर्ज़ा का असली सरनेम हैंडरिच था जो उनके ईसाई पिता के परिवार से जुड़ा हुआ था। हालांकि जब वह महज 4 साल की थीं उनके माता-पिता का तलाक हो गया। इसके कुछ साल बाद 9 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। इस घटना ने दीया को एक गहरे भावनात्मक झटके से गुजरने पर मजबूर किया। लेकिन इसके बाद उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया जब उनकी मां ने अहमद मिर्ज़ा से शादी की।

    अहमद मिर्ज़ा ने न केवल दीया की मां से विवाह किया बल्कि वह दीया के लिए एक सच्चे पिता की तरह बने। दीया ने एक इंटरव्यू में इस रिश्ते को बेहद खूबसूरत बताया और कहा कि अहमद मिर्ज़ा ने उन्हें हमेशा अपने बच्चे की तरह प्यार दिया। उनका यह प्यार इतना सच्चा था कि दीया ने मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के दौरान अपने सौतेले पिता के प्रति सम्मान और स्नेह दिखाने के लिए उनका सरनेम मिर्ज़ा अपना लिया।

    मिर्ज़ा सरनेम अपनाने का कारण

    दीया मिर्ज़ा का कहना है कि अहमद मिर्ज़ा के साथ उनका रिश्ता बहुत गहरा था और वह हमेशा उनके लिए एक सच्चे पिता की तरह थे। दीया ने बताया कि मिस इंडिया में हिस्सा लेने के समय उन्होंने महसूस किया कि उन्हें अहमद मिर्ज़ा का सरनेम अपनाना चाहिए क्योंकि यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था। उनका कहना था कि यह सिर्फ एक नाम नहीं था बल्कि यह एक संबंध था जो मेरे दिल के करीब था।

    दो पिता खोने का दर्द

    दीया मिर्ज़ा ने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। वह महज 23 साल की थीं जब उनके सौतेले पिता अहमद मिर्ज़ा का निधन हो गया। दीया ने उस समय को याद करते हुए कहा कि मैंने एक ही जीवन में दो पिता खो दिए हैं। उनके लिए यह बेहद कठिन समय था क्योंकि एक तरफ उन्हें अपने असली पिता का दुख था वहीं दूसरी ओर उन्हें अपने सौतेले पिता को भी खोने का गहरा दुख सहन करना पड़ा।

    दीया का ग्लैमरस सफर

    दीया मिर्ज़ा का बॉलीवुड करियर भी काफी सफल रहा। साल 2000 में उन्होंने मिस एशिया पैसिफिक इंटरनेशनल का खिताब जीता और उसी साल प्रियंका चोपड़ा ने मिस वर्ल्ड का टाईटल जीता था। इसके बाद दीया ने मॉडलिंग और बॉलीवुड दोनों में अपनी पहचान बनाई। अपनी फिल्मी यात्रा में उन्होंने विभिन्न शैलियों और किरदारों को निभाया और अपनी खूबसूरती और अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। दीया का ग्लैमरस सफर न केवल उनके अभिनय का बल्कि उनके व्यक्तिगत संघर्षों और धैर्य का भी प्रतीक बन चुका है।

    दीया मिर्ज़ा का जीवन केवल फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान के लिए नहीं जाना जाता बल्कि उनके व्यक्तिगत संघर्ष और परिवार के प्रति उनके प्रेम के लिए भी जाना जाता है। उनके जीवन में एक मुसलमान सौतेले पिता का होना और उनके प्रति सम्मान जताने के लिए मुस्लिम सरनेम अपनाना उनके दिल से जुड़े रिश्तों को दर्शाता है। दीया की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि परिवार और प्रेम का कोई धर्म नहीं होता यह भावनाओं और रिश्तों का एक खूबसूरत रूप है।

  • नीतीश के कायल बने ओवैसी के विधायक, बिहार में AIMIM-जेडीयू की सियासत में फिर गर्मा सकती है हवा

    नीतीश के कायल बने ओवैसी के विधायक, बिहार में AIMIM-जेडीयू की सियासत में फिर गर्मा सकती है हवा

    बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा हो गई है। AIMIM के विधायक मुर्शीद आलम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना राजनीतिक गुरु बताया है। मुर्शीद आलम का कहना है कि 2014 में नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू में राजनीति की राह दिखाई और उन्होंने अपनी सियासी उन्नति में मुख्यमंत्री का योगदान कभी नहीं भुलाया। जोकीहाट सीट से चुने गए इस विधायक ने हाल ही में नीतीश से मुलाकात कर अपने क्षेत्र के लिए दो नए महाविद्यालय और एक अतिरिक्त अंचल की मांग भी रखी।

    सियासी अर्थ और संभावनाएं
    मुर्शीद आलम की तारीफ और उनके नीतीश कुमार के करीब आने से सियासत में अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या AIMIM के विधायक जेडीयू के साथ किसी राजनीतिक समीकरण में शामिल हो सकते हैं। हालांकि AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने मुलाकात को केवल सीमांचल के मुद्दों तक सीमित बताते हुए राजनीतिक अर्थ न निकालने की अपील की। बावजूद इसके, पिछली बार AIMIM के कई विधायक जेडीयू या आरजेडी में शामिल हो चुके हैं, जिससे संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं बढ़ गई हैं।

    जेडीयू और बीजेपी का परिदृश्य
    2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने 85 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि सहयोगी बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या AIMIM के विधायकों को जेडीयू में शामिल कर अपनी संख्या बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

    AIMIM के साथ सियासी समीकरण पर सवाल
    मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र से चुने गए AIMIM के पांचों विधायक – मुर्शीद आलम, अख्तरुल ईमान, गुलाम सर्वर, सरवर आलम और मोहम्मद तौसीफ आलम – की नीतीश कुमार के साथ बढ़ती नजदीकियां बिहार की सियासत में नए समीकरण खड़े कर सकती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या AIMIM और जेडीयू के बीच कोई नया ‘खेला’ सामने आएगा।