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  • बॉलीवुड vs साउथ: बॉक्स ऑफिस क्लैश में किसने मारा बाज़ी और किसे झेला नुकसान

    बॉलीवुड vs साउथ: बॉक्स ऑफिस क्लैश में किसने मारा बाज़ी और किसे झेला नुकसान


    नई दिल्ली । बॉक्स ऑफिस पर साउथ और बॉलीवुड फिल्मों की टक्कर साल दर साल चर्चा का विषय बनी रहती है। कभी किसी फिल्म को भारी नुकसान उठाना पड़ा तो कभी साउथ फिल्म ने बॉलीवुड स्टार की धाक को झटका दे दिया। 2024 और पिछले कुछ वर्षों में कई मौके आए जब हिंदी और साउथ फिल्में आमने-सामने आईं और दर्शक उत्सुक रहते हैं कि इस टक्कर में बाज़ी किसकी हुई।

    सबसे पहले बात करें अक्षय कुमार की सरफिरा और कमल हासन स्टार इंडियन 2 की। 12 जुलाई 2024 को रिलीज़ हुई ये दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। इंडियन 2 जिसका बजट लगभग 250 करोड़ था पूरी तरह डिजास्टर साबित हुई और अक्षय की फिल्म भी फ्लॉप रही।

    इसके बाद 15 अगस्त 2024 को राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की स्त्री 2 और तमिल फिल्म थंगालान ने क्लैश किया। इस टक्कर में स्त्री 2 ने शानदार कमाई की और बॉक्स ऑफिस पर जीत दर्ज की जबकि थंगालान फ्लॉप साबित हुई।

    सनी देओल की गदर 2 और रजनीकांत की जेलर के बीच भी मुकाबला देखने को मिला। जेलर 10 अगस्त और गदर 2 11 अगस्त 2024 को रिलीज़ हुई। दोनों ही फिल्में ब्लॉकबस्टर साबित हुईं और दर्शकों ने दोनों को पसंद किया।

    शाहरुख खान की हिंदी फिल्म जीरो और कन्नड़ स्टार यश की KGF का क्लैश भी यादगार रहा। दोनों फिल्में 21 दिसंबर 2018 को रिलीज़ हुईं। जीरो KGF के मुकाबले पूरी तरह फ्लॉप रही जबकि KGF ने बॉक्स ऑफिस पर बाज़ी मारी और दर्शकों का प्यार बटोर लिया।

    इसी तरह शाहरुख की डंकी और प्रभास स्टारर सालार ने भी क्लैश किया। डंकी 21 दिसंबर और सालार 22 दिसंबर 2023 को रिलीज़ हुई। दोनों फिल्में कमर्शियल हिट रही लेकिन डायरेक्टर प्रशांत नील ने माना कि शाहरुख के साथ रिलीज़ होने से नुकसान हुआ।

    इन उदाहरणों से साफ है कि बॉलीवुड और साउथ फिल्मों का क्लैश हमेशा रोमांचक रहता है। कभी साउथ फिल्में बाज़ी मारती हैं कभी बॉलीवुड की पकड़ मजबूत होती है। रिलीज़ डेट कंटेंट की ताकत और स्टार पावर तय करती है कि किसका पलड़ा भारी रहेगा।

  • 19 मार्च की जंग: ‘धुरंधर 2’ से नहीं हटेंगे यश, ‘टॉक्सिक’ की रिलीज पर अडिग रहने के पीछे बड़ा कारण

    19 मार्च की जंग: ‘धुरंधर 2’ से नहीं हटेंगे यश, ‘टॉक्सिक’ की रिलीज पर अडिग रहने के पीछे बड़ा कारण


    नई दिल्ली । बॉक्स ऑफिस पर 19 मार्च को इस साल की सबसे बड़ी भिड़ंत देखने को मिल सकती है। एक ओर है बहुप्रतीक्षित सीक्वल धुरंधर 2 तो दूसरी तरफ सुपरस्टार यश की मेगा बजट फिल्म टॉक्सिक । दोनों फिल्मों की रिलीज डेट एक ही दिन तय होने से इंडस्ट्री में हलचल तेज है। जहां कयास लगाए जा रहे थे कि टॉक्सिक की रिलीज आगे बढ़ सकती है वहीं ताजा रिपोर्ट्स ने साफ कर दिया है कि यश अपनी फिल्म की तारीख बदलने के मूड में नहीं हैं।

    बताया जा रहा है कि यह फैसला किसी प्रतिस्पर्धा या अहंकार का नहीं बल्कि अपने प्रोजेक्ट पर गहरे विश्वास का परिणाम है। सूत्रों के मुताबिक यश को अपनी फिल्म के कंटेंट और प्रस्तुति पर पूरा भरोसा है। वह केवल ओपनिंग वीकेंड के आंकड़ों पर नहीं बल्कि लंबी रेस के प्रदर्शन पर ध्यान दे रहे हैं। उनका मानना है कि अगर फिल्म में दम है तो क्लैश के बावजूद दर्शक उसे सराहेंगे और थिएटर तक पहुंचेंगे। यही वजह है कि 19 मार्च की तारीख पर वह अडिग हैं।

    टॉक्सिक की घोषणा दिसंबर 2023 में ही कर दी गई थी और रिलीज डेट भी पहले से तय थी। यश के प्रशंसक लंबे समय से उन्हें बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे हैं। करीब 600 करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म उनके करियर की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिनी जा रही है। दक्षिण भारत में यश की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है ऐसे में ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिल्म को वहां से मजबूत ओपनिंग मिल सकती है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार यश धुरंधर 2 के मेकर्स से इस बात को लेकर नाराज भी हैं कि उनकी फिल्म की घोषित रिलीज डेट के बावजूद उसी दिन दूसरी बड़ी फिल्म लाने की योजना बनाई गई। इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में बड़े प्रोजेक्ट्स की रिलीज डेट तय करते समय आपसी संवाद और समन्वय की परंपरा आम है। लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह का कम्युनिकेशन हमेशा देखने को नहीं मिलता। माना जा रहा है कि अगर औपचारिक बातचीत होती तो शायद स्थिति अलग हो सकती थी।

    दूसरी ओर धुरंधर 2 को लेकर भी जबरदस्त बज बना हुआ है। पहली फिल्म की सफलता के बाद इसके सीक्वल से बड़ी उम्मीदें हैं। खासकर हिंदी बेल्ट में इस फिल्म को लेकर उत्साह चरम पर है। ऐसे में 19 मार्च का दिन दोनों फिल्मों के लिए परीक्षा की घड़ी साबित हो सकता है।

    ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि यह क्लैश जोखिम के साथ अवसर भी लेकर आता है। यदि दोनों फिल्मों का कंटेंट दर्शकों को पसंद आता है तो वे समानांतर रूप से अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। फिलहाल यश का रुख साफ है वह पीछे हटने के बजाय मुकाबले के लिए तैयार हैं। अब दर्शकों का फैसला ही तय करेगा कि इस महाटक्कर में किसका पलड़ा भारी रहता है।

  • 9 गेंदों में फिफ्टी, रिकॉर्ड चकनाचूर: नेपाल की ऐतिहासिक जीत के नायक बने दीपेंद्र सिंह ऐरी

    9 गेंदों में फिफ्टी, रिकॉर्ड चकनाचूर: नेपाल की ऐतिहासिक जीत के नायक बने दीपेंद्र सिंह ऐरी


    नई दिल्ली । नेपाल क्रिकेट के इतिहास में एक नई सुबह तब दर्ज हुई जब टीम ने टी20 वर्ल्ड कप में स्कॉटलैंड को 7 विकेट से हराकर पहली जीत हासिल की। 12 सालों से बड़े मंच पर जीत का इंतजार कर रही नेपाल की टीम के लिए यह पल बेहद खास था और इस ऐतिहासिक जीत के केंद्र में रहे युवा ऑलराउंडर दीपेंद्र सिंह ऐरी। 171 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए ऐरी ने महज 23 गेंदों में नाबाद 50 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 4 चौके और 3 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। जब दबाव चरम पर था तब उनके बल्ले से निकली यह विस्फोटक पारी नेपाल की जीत की गारंटी बन गई। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

    24 जनवरी 2000 को जन्मे दीपेंद्र सिंह ऐरी नेपाल क्रिकेट की नई पीढ़ी के प्रतीक माने जाते हैं। अगस्त 2018 में उन्होंने नीदरलैंड के खिलाफ नेपाल के पहले वनडे मुकाबले में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और उपयोगी ऑफ-स्पिन गेंदबाजी से टीम में अहम जगह बना ली। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी असली पहचान तब बनी जब उन्होंने एशियाई खेलों में विश्व रिकॉर्ड कायम किया।

    चीन के हांग्जो में आयोजित एशियाई खेल 2022 के दौरान मंगोलिया के खिलाफ मुकाबले में ऐरी ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सबसे तेज अर्धशतक जड़ दिया। उन्होंने सिर्फ 9 गेंदों में फिफ्टी पूरी कर दुनिया को चौंका दिया। इस पारी में उन्होंने 10 गेंदों पर 8 छक्कों की मदद से 52 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 500 से भी अधिक रहा। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय दिग्गज युवराज सिंह का 16 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। युवराज ने आईसीसी टी20 विश्व कप 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ 12 गेंदों पर अर्धशतक बनाया था जो लंबे समय तक विश्व रिकॉर्ड रहा। ऐरी ने उस ऐतिहासिक उपलब्धि को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया।

    इतना ही नहीं अप्रैल 2024 में ACC प्रीमियर कप के दौरान कतर के खिलाफ उन्होंने एक ओवर में लगातार छह छक्के जड़ दिए और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा करने वाले दुनिया के तीसरे खिलाड़ी बने। उस मुकाबले में उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी की बदौलत नेपाल ने 20 ओवर में 300 रन का आंकड़ा पार किया जो अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

    आज दीपेंद्र सिंह ऐरी को नेपाल के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में गिना जाता है। वह आईसीसी टी20आई ऑलराउंडर रैंकिंग में भी शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हैं। उनकी खासियत है बड़े मंच पर निडर होकर खेलना और दबाव में टीम को जीत दिलाना। स्कॉटलैंड के खिलाफ उनकी नाबाद 50 रन की पारी ने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी नहीं बल्कि मैच जिताने वाले सितारे हैं। नेपाल क्रिकेट के लिए ऐरी नई उम्मीद नया आत्मविश्वास और नई पहचान बन चुके हैं। अगर उनका यही फॉर्म जारी रहा तो आने वाले समय में वे विश्व क्रिकेट के सबसे चर्चित ऑलराउंडरों में शामिल हो सकते हैं।

  • टेक्सास में 90 फीट ‘अभय हनुमान’ प्रतिमा पर विवाद: धार्मिक स्वतंत्रता बनाम अभिव्यक्ति की आज़ादी की बहस तेज

    टेक्सास में 90 फीट ‘अभय हनुमान’ प्रतिमा पर विवाद: धार्मिक स्वतंत्रता बनाम अभिव्यक्ति की आज़ादी की बहस तेज


    नई दिल्ली। अमेरिका के टेक्सास राज्य के शुगर लैंड शहर में स्थापित 90 फीट ऊंची अभय हनुमान प्रतिमा को लेकर विवाद गहरा गया है। पंचलोहा से निर्मित यह भव्य प्रतिमा उत्तर अमेरिका की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमाओं में से एक मानी जा रही है। अगस्त 2024 में विस्तृत धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इसका लोकार्पण किया गया था। निजी भूमि पर स्थापित यह प्रतिमा स्थानीय हिंदू समुदाय के लिए आस्था शक्ति और शांति का प्रतीक बन चुकी है लेकिन हाल के दिनों में इसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब टेक्सास स्थित एक रिपब्लिकन कार्यकर्ता कार्लोस टुर्सियोस ने सोशल मीडिया पर प्रतिमा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी साझा की। पोस्ट में नस्लीय और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और यह आरोप लगाया गया कि प्रवासी समुदाय अमेरिका में “धीरे-धीरे कब्जा” कर रहा है। उनके कुछ समर्थकों ने भी आपत्तिजनक और आप्रवासी-विरोधी नारे लगाए जिससे मामला और तूल पकड़ गया।

    इस बयान के बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय और कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि प्रतिमा निजी संपत्ति पर स्थापित है और अमेरिकी संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत आती है। समुदाय के प्रतिनिधियों का तर्क है कि किसी भी धार्मिक प्रतीक को नस्लीय या सांस्कृतिक आधार पर निशाना बनाना न केवल असंवेदनशील है बल्कि असंवैधानिक भावना को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की बहुसांस्कृतिक पहचान में विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान मूलभूत सिद्धांत है।

    यह पहली बार नहीं है जब इस मंदिर परिसर की प्रतिमा विवाद में आई हो। इससे पहले भी कुछ समूहों ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया था। उस समय भी स्थानीय प्रशासन और सामुदायिक नेताओं ने संयम और संवाद की अपील की थी। हालांकि इस बार सोशल मीडिया की तीव्रता ने विवाद को राष्ट्रीय बहस का रूप दे दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल एक प्रतिमा तक सीमित नहीं है बल्कि अमेरिका में धार्मिक विविधता आप्रवासन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे व्यापक विषयों से जुड़ा हुआ है। एक पक्ष इसे धार्मिक और नस्लीय असहिष्णुता का उदाहरण मान रहा है तो दूसरा पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में देख रहा है। संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है लेकिन यह अधिकार घृणा या हिंसा को बढ़ावा देने का औचित्य नहीं बन सकता।

    फिलहाल शुगर लैंड की अभय हनुमान प्रतिमा आस्था के साथ-साथ सामाजिक विमर्श का केंद्र बन चुकी है। यह विवाद इस बात की याद दिलाता है कि बहुसांस्कृतिक समाजों में संवाद संवेदनशीलता और पारस्परिक सम्मान कितने आवश्यक हैं। अमेरिका जैसे विविधतापूर्ण देश में धार्मिक प्रतीकों को लेकर उठने वाले प्रश्न केवल स्थानीय नहीं रहते बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान अधिकार और सहअस्तित्व की बहस को जन्म देते हैं।

  • ग्रहण के बाद अग्नि पंचक का प्रकोप, अगले चार दिन मेष, सिंह और वृश्चिक राशि वालों के लिए भारी

    ग्रहण के बाद अग्नि पंचक का प्रकोप, अगले चार दिन मेष, सिंह और वृश्चिक राशि वालों के लिए भारी


    नई दिल्ली । सूर्य ग्रहण भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसका प्रभाव अभी थमा नहीं है। वजह है अग्नि पंचक, जो ग्रहण के साथ ही शुरू हुआ और अब अगले चार दिनों तक असर दिखाएगा। पंचक के पांच दिन सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए वर्जित माने जाते हैं, लेकिन जब यह अग्नि पंचक हो तो इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। मान्यता है कि अग्नि पंचक के दौरान आगजनी, दुर्घटनाएं, तनाव, राजनीतिक उथल-पुथल और अचानक होने वाली घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यह समय लापरवाही नहीं बल्कि अतिरिक्त सावधानी की मांग करता है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार 17 फरवरी को लगा सूर्य ग्रहण अग्नि पंचक में ही हुआ, जिससे इसकी नकारात्मकता और प्रबल मानी जा रही है। कहा जाता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जब यह अग्नि तत्व से जुड़े पंचक में हो तो दुर्घटनाओं और विवादों की आशंका अधिक हो जाती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इस अवधि में धैर्य और संयम बरतने की सलाह दे रहे हैं।

    अग्नि पंचक के दौरान ज्वलनशील वस्तुओं की खरीदारी से बचने को कहा गया है। गैस सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल, लकड़ी या अन्य ईंधन जैसी चीजें खरीदना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसी वस्तुएं इस समय जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा यात्रा भी टालने की सलाह दी गई है, विशेष रूप से दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने को कहा गया है। इस दौरान किए गए शुभ कार्य अपेक्षित परिणाम नहीं देते और कभी-कभी विपरीत फल भी मिल सकता है।

    इस बार सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगा। उस समय कुंभ राशि में सूर्य, बुध, मंगल और राहु का चतुर्ग्रही योग बना हुआ था, जिसका प्रभाव अभी भी जारी है। यह योग तनाव और अस्थिरता को बढ़ाने वाला माना जाता है। ऐसे में तीन राशियों के लिए यह समय विशेष सावधानी का है।

    मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं, जो अग्नि तत्व के ग्रह माने जाते हैं। इस कारण इन राशि के जातकों में गुस्सा और आवेग बढ़ सकता है। छोटी बात पर बड़ा विवाद हो सकता है, जिससे निजी और पेशेवर जीवन प्रभावित हो सकता है। इन्हें सलाह दी जाती है कि वाणी पर संयम रखें और किसी भी तरह के टकराव से दूर रहें। अनावश्यक यात्रा से भी बचें।

    वहीं सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं और वर्तमान में सूर्य राहु के प्रभाव में माने जा रहे हैं। ऐसे में सिंह राशि के लोगों को कार्यस्थल पर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। वरिष्ठ अधिकारियों से विवाद की स्थिति बन सकती है। निवेश संबंधी निर्णय फिलहाल टालना बेहतर होगा। साथ ही स्वास्थ्य को लेकर भी सतर्क रहें, क्योंकि मानसिक तनाव शारीरिक परेशानी में बदल सकता है।

    कुल मिलाकर, ग्रहण के बाद के ये चार दिन धैर्य, सावधानी और आत्मनियंत्रण के हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए यह समय सतर्क रहकर संभावित जोखिमों को टालने का है, ताकि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य बनी रहे।

  • SC का ऐहितासिक फैसला, कहा- सलवार का नाड़ा खोलना महज 'छेड़छाड़' नहीं, बल्कि सीधे 'रेप का प्रयास'

    SC का ऐहितासिक फैसला, कहा- सलवार का नाड़ा खोलना महज 'छेड़छाड़' नहीं, बल्कि सीधे 'रेप का प्रयास'


    नई दिल्ली।
    यौन अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता (Sensitivity) और कानूनी व्याख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक ऐतिहासिक और नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के एक बेहद विवादित फैसले को पलटते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी महिला को गलत नीयत से पकड़ना और उसकी सलवार का नाड़ा खोलना महज ‘छेड़छाड़’ या ‘रेप की तैयारी’ नहीं, बल्कि सीधे तौर पर ‘रेप का प्रयास’ (Attempt) है।

    अदालत ने कहा कि ऐसे कृत्य को कम गंभीर अपराध मानकर आरोपी को हल्की सजा देना न्याय की भावना के खिलाफ है। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मार्च 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कोर्ट ने इसे केवल महिला की लज्जा भंग करने का मामला माना था।


    क्या है पूरा मामला?

    मामला काफी गंभीर था, जिसमें आरोपियों ने महिला के साथ न केवल अश्लील हरकतें कीं बल्कि उसके कपड़े उतारने का प्रयास भी किया। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में एक अजीबोगरीब तर्क देते हुए इसे ‘रेप का प्रयास’ मानने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट का मानना था कि यह कृत्य ‘रेप की तैयारी’ के अंतर्गत आता है, जिसके लिए सजा कम होती है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आक्रोश फैल गया था। महिला अधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी।


    सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

    हाईकोर्ट के इस विवादास्पद फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। यह कदम एनजीओ ‘वी द वुमन’ की संस्थापक और वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता द्वारा लिखे गए एक पत्र के बाद उठाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के साथ-साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई की।


    SC की तीखी टिप्पणी और फैसला

    सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सिरे से खारिज करते हुए आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत ‘रेप के प्रयास’ के मूल और सख्त आरोपों को बहाल कर दिया है। फैसला सुनाते हुए CJI सूर्यकांत ने न्यायिक संवेदनशीलता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि जब कोई न्यायाधीश यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा हो, तो उसे मामले की तथ्यात्मक हकीकत और पीड़िता की कमजोरियों के प्रति विचारशील होना चाहिए।

    बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा, “कोई भी जज या किसी भी अदालत का फैसला तब तक पूर्ण न्याय नहीं कर सकता, जब तक कि वह मुकदमे के तथ्यों की वास्तविकताओं और अदालत का रुख करने वाली पीड़िता की कमजोरियों के प्रति विचारशील न हो।” अदालत ने यह भी साफ किया कि न्यायाधीशों का प्रयास न केवल संवैधानिक और कानूनी सिद्धांतों के ठोस अनुप्रयोग पर आधारित होना चाहिए, बल्कि उसमें करुणा और सहानुभूति का भाव भी होना चाहिए। इन स्तंभों के अभाव में न्यायिक संस्थान अपने महत्वपूर्ण कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं कर पाएंगे।

    सुप्रीम कोर्ट ने केवल इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि भविष्य के लिए एक व्यापक सुधार का खाका भी खींचा है। कोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों के मामलों में जजों को अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है। इसके लिए, सर्वोच्च न्यायालय ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के निदेशक और पूर्व जस्टिस अनिरुद्ध बोस से विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का अनुरोध किया है। यह समिति यौन अपराधों और अन्य संवेदनशील मामलों में न्यायाधीशों के लिए ‘संवेदनशीलता और करुणा’ विकसित करने हेतु दिशा-निर्देश तैयार करेगी। अदालत ने यह विशेष निर्देश दिया कि ये दिशा-निर्देश सरल भाषा में होने चाहिए, न कि विदेशी अदालतों के जटिल कानूनी शब्दों से भरे हुए।

  • UP की अर्थव्यवस्था का बड़ा पावरहाउस बना अयोध्या का भव्य राम मंदिर… बदली आर्थिक तस्वीर

    UP की अर्थव्यवस्था का बड़ा पावरहाउस बना अयोध्या का भव्य राम मंदिर… बदली आर्थिक तस्वीर


    लखनऊ।
    अयोध्या (Ayodhya) में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर (Lord Shri Ram Magnificent Temple ) के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद न केवल धार्मिक आस्था का सैलाब उमड़ा है, बल्कि इस पावन नगरी की आर्थिक तस्वीर भी पूरी तरह बदल गई है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ (Indian Institute of Management (IIM) Lucknow) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट ‘इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या’ (अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण) में चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, अयोध्या अब केवल एक धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा पावरहाउस (Uttar Pradesh’s Economy Major Powerhouse) बनकर उभरा है। मंदिर उद्घाटन के बाद शहर में पर्यटन, विदेशी निवेश, स्थानीय कारोबार और रोजगार के अवसरों में ऐसी वृद्धि हुई है जिसकी कल्पना कुछ वर्षों पहले तक असंभव थी।


    श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि

    आईआईएम की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या की स्थिति बेहद अलग थी। तब सालाना करीब 1.7 लाख श्रद्धालु ही अयोध्या पहुंचते थे और स्थानीय बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर था। लेकिन जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद तस्वीर जादुई रूप से बदली है। आंकड़ों के मुताबिक, पहले छह महीनों में ही 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। अब अनुमान है कि हर साल पांच से छह करोड़ आगंतुक स्थायी रूप से अयोध्या आएंगे। पर्यटकों की इस भारी संख्या से प्रदेश सरकार को मिलने वाले कर राजस्व में 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये की भारी बढ़त होने की संभावना जताई गई है।


    आतिथ्य क्षेत्र और एमएसएमई (MSME) का विस्तार

    प्रतिदिन औसतन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन ने आतिथ्य (Hospitality) और सेवा क्षेत्र को नई संजीवनी दी है। रिपोर्ट बताती है कि अयोध्या में 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे शुरू हुए हैं। दुनिया भर के दिग्गज होटल समूहों जैसे ताज और मैरियट ने अयोध्या में अपनी विस्तार योजनाएं धरातल पर उतार दी हैं। इसके साथ ही, लगभग 6,000 नए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) स्थापित हुए हैं। अध्ययन का अनुमान है कि अगले चार-पांच वर्षों में अयोध्या में 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जो स्थानीय युवाओं के लिए वरदान साबित होंगे।


    स्थानीय दुकानदारों और प्रॉपर्टी की कीमतों में उछाल

    इस आर्थिक क्रांति का सबसे सीधा लाभ अयोध्या के छोटे व्यापारियों को मिला है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन दुकानदारों की औसत कमाई पहले मात्र 400 से 500 रुपये प्रतिदिन थी, वह अब बढ़कर 2,500 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई है। इसके अलावा, मंदिर के आसपास की संपत्तियों (Real Estate) की कीमतों में 5 से 10 गुना तक का जबरदस्त उछाल आया है। कनेक्टिविटी बेहतर होने और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनने से निवेश की गति और तेज हो गई है। आईआईएम की यह स्टडी स्पष्ट करती है कि अयोध्या का मॉडल अब देश के अन्य धार्मिक शहरों के लिए ‘इकॉनमिक ब्लूप्रिंट’ का काम करेगा।

  • ट्रंप की टैरिफ नीति के उल्टे परिणाम, दावा विदेशी कंपनियों पर बोझ डालने का था….भुगत रहे US के लोग

    ट्रंप की टैरिफ नीति के उल्टे परिणाम, दावा विदेशी कंपनियों पर बोझ डालने का था….भुगत रहे US के लोग


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की बहुचर्चित टैरिफ नीति (Tariff policy) पर एक नई रिपोर्ट ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दावा किया गया था कि आयात शुल्क (Import Duty) का बोझ विदेशी कंपनियों और सरकारों पर पड़ेगा, लेकिन ताजा अध्ययन में सामने आया है कि इन शुल्कों का करीब 90 प्रतिशत खर्च अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों ने ही उठाया। यह निष्कर्ष फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयार्क (Federal Reserve Bank of New York) से जुड़े अर्थशास्त्रियों के विश्लेषण में सामने आया है।

    यूएसए टुडे ने बताया कि छह फरवरी को जारी एक नामी टैक्स फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक अनुमान है कि 2025 में हर अमेरिकी परिवार पर 1000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा, वहीं 2026 में यह बोझ बढ़कर 1300 डॉलर होने का अनुमान है।

    रिपोर्ट के मुताबिक आयातित वस्तुओं पर लगाए गए शुल्क का अधिकांश हिस्सा कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में अमेरिकी बाजार में ही खपा दिया गया। विदेशी निर्यातकों ने अपने दामों में सीमित कटौती की, जिससे लागत का बोझ घरेलू कंपनियों और आम उपभोक्ताओं तक पहुंच गया। ऐसे में यह अध्ययन न केवल ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापार नीति पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि संरक्षणवादी कदमों का वास्तविक असर अक्सर घरेलू अर्थव्यवस्था पर ही पड़ता है।


    अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ा सीधा असर

    रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन के दौरान चीन सहित कई देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए। ट्रंप ने दावा किया था कि इन शुल्कों का भुगतान विदेशी कंपनियां और सरकारें करेंगी। हालांकि अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि वास्तविकता इससे अलग रही। विश्लेषण के अनुसार, आयातित वस्तुओं पर लगाए गए शुल्क का अधिकांश हिस्सा अमेरिकी आयातकों ने चुकाया, जिसने आगे चलकर कीमतों में वृद्धि के रूप में उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर बोझ डाला। यानी टैरिफ एक तरह से घरेलू कर (टैक्स) की तरह काम करता रहा, जिसका प्रभाव रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ा।


    विदेशी निर्यातकों ने नहीं घटाए दाम

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विदेशी निर्यातकों ने अपने उत्पादों के दाम में बहुत कम कटौती की। इसका अर्थ यह है कि वे टैरिफ का बोझ खुद वहन करने के बजाय अमेरिकी खरीदारों पर डालने में सफल रहे। परिणामस्वरूप, आयातित सामान महंगे हुए और अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ी।


    महंगाई पर प्रभाव

    अध्ययन में यह संकेत भी दिया गया है कि टैरिफ का प्रभाव महंगाई दर पर पड़ा। जब कंपनियों की लागत बढ़ती है, तो वे अपने उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी करती हैं। इससे व्यापक स्तर पर मूल्य वृद्धि देखने को मिलती है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि टैरिफ को अक्सर व्यापार घाटा कम करने या घरेलू उद्योगों की रक्षा के उपाय के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन यदि उसका भार मुख्य रूप से घरेलू अर्थव्यवस्था पर ही पड़े तो नीति के लाभ सीमित हो सकते हैं।


    आगे की राह

    विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार नीति बनाते समय उसके व्यापक आर्थिक प्रभावों का आकलन जरूरी है। यदि टैरिफ का अधिकांश भार घरेलू अर्थव्यवस्था पर ही पड़ता है, तो इससे उपभोक्ता खर्च, निवेश और प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक असर हो सकता है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक व्यापार की जटिलताओं के बीच किसी भी देश द्वारा उठाया गया संरक्षणवादी कदम अंततः उसके अपने बाजार को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में भविष्य की व्यापार नीतियों को संतुलित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ तैयार करने की जरूरत है।

  • कुछ व्यक्तियों को बनाया गया निशाना… SC ने हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं को बताया एकतरफा

    कुछ व्यक्तियों को बनाया गया निशाना… SC ने हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं को बताया एकतरफा


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को 12 ‘प्रतिष्ठित’ व्यक्तियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका कथित हेट स्पीच (Hate Speech) के लिए केवल भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों (BJP Ruled States Chief Ministers) को निशाना बना रही है, जबकि अन्य दलों के नेताओं को छोड़ दिया गया है।


    मामला क्या है?

    याचिकाकर्ताओं ने संवैधानिक नैतिकता के उल्लंघन को रोकने के लिए संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्तियों और नौकरशाहों के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ से कहा कि देश का माहौल जहरीला हो गया है और केवल सुप्रीम कोर्ट ही इसे सुधार सकता है। हालांकि, पीठ ने तुरंत यह इशारा किया कि याचिका में समस्या को उजागर करते समय चुनिंदा रूप से केवल कुछ व्यक्तियों का नाम लिया गया है।


    सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां

    अदालत ने याचिका के एकतरफा होने पर सवाल उठाए और कहा- यह याचिका निश्चित रूप से कुछ व्यक्तियों को निशाना बना रही है, जबकि उन अन्य लोगों को छोड़ दिया गया है जो नियमित रूप से ऐसे हेट स्पीच देते हैं। याचिकाकर्ताओं को यह आभास नहीं देना चाहिए कि वे केवल कुछ व्यक्तियों को टारगेट कर रहे हैं।

    CJI ने कहा कि एक निष्पक्ष और तटस्थ याचिका के साथ आएं। यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। अंततः, सभी पक्षों की ओर से बोलने में संयम होना चाहिए। हम यह कहना चाहेंगे कि सभी राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों को संवैधानिक नैतिकता का ध्यान रखना चाहिए और अपने भाषणों में संयम बरतना चाहिए। कोई भी दिशानिर्देश सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

    पीठ ने कहा कि कई राजनीतिक दल अपनी सांप्रदायिक विचारधारा के आधार पर बेशर्मी से भाषण देते हैं और खुलेआम नफरत फैलाते हैं। कोर्ट ने सिब्बल से कहा- आपने दूसरे पक्ष का एक भी उदाहरण पेश नहीं किया है।


    याचिका में किनका नाम था?

    याचिकाकर्ताओं में रूप रेखा वर्मा, मोहम्मद अदीब, हर्ष मंदर, नजीब जंग, जॉन दयाल और अशोक कुमार शर्मा शामिल थे। उन्होंने अपनी याचिका में कथित हेट स्पीच के लिए कई भाजपा नेताओं का नाम लिया था:
    – हिमंत बिस्वा सरमा (असम के मुख्यमंत्री)
    – योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री)
    – देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री)
    – पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड के मुख्यमंत्री)
    – अनंत कुमार हेगड़े (पूर्व केंद्रीय मंत्री)
    – गिरिराज सिंह (केंद्रीय मंत्री)
    – इसके अलावा कुछ नौकरशाहों की टिप्पणियों का भी जिक्र था।

    जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘राजनीतिक दलों के नेताओं को भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। अदालतें आदेश पारित कर सकती हैं, लेकिन इसका असली समाधान राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक संस्थानों द्वारा संवैधानिक मूल्यों और नैतिकता के प्रति वफादार रहने में ही है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘भाषण की उत्पत्ति विचार प्रक्रिया से होती है। क्या अदालत के आदेश से किसी व्यक्ति की विचार प्रक्रिया को बदला या प्रतिबंधित किया जा सकता है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या होगा?’

    जस्टिस बागची: उन्होंने सिब्बल से कहा कि यह बहुत ही अस्पष्ट याचिका है। इसे एक लोकलुभावन कवायद बनाने के बजाय, इसे एक रचनात्मक संवैधानिक प्रयास होने दें। राजनीति का शोर-शराबा जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने का आधार नहीं होना चाहिए।

    जब कपिल सिब्बल ने कहा कि वह याचिका से व्यक्तियों के सभी संदर्भ हटा देंगे, तो पीठ ने जवाब दिया कि आवश्यक संशोधन किए जाने के बाद ही वह जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी। सिब्बल ने याचिका में संशोधन के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है।


    याचिकाकर्ताओं की दो मुख्य मांगे हैं:

    यह घोषणा की जाए कि संवैधानिक पदों या सार्वजनिक कार्यालयों में बैठे लोगों के सार्वजनिक भाषण संवैधानिक नैतिकता के अधीन होने चाहिए और वे दूसरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करें। संवैधानिक पदधारियों और नौकरशाहों के सार्वजनिक भाषण को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश बनाए जाएं, ताकि बिना पूर्व प्रतिबंध या सेंसरशिप के संवैधानिक नैतिकता का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

  • सलमान के पिता सलीम खान वेटिंलेटर पर…. लीलाबती अस्पताल में हुई सर्जरी

    सलमान के पिता सलीम खान वेटिंलेटर पर…. लीलाबती अस्पताल में हुई सर्जरी


    मुम्बई।
    फेमस फिल्म एक्टर सलमान खान के पिता सलीम खान (Salim Khan) को वेंटिलेटर (Ventilator) पर रखा गया है। दरअसल, मंगलवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी।फेमस फिल्म एक्टर सलमान खान के पिता सलीम खान (Salim Khan) को वेंटिलेटर (Ventilator) पर रखा गया है। दरअसल, मंगलवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। परिवार के सदस्य जब उन्हें मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल (Lilavati Hospital, Mumbai) में लाए तब डॉक्टर्स ने उन्हें भर्ती किया और आईसीयू में रखा। पहले तो डॉक्टर्स ने सलीम खान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी, लेकिन अब बताया जा रहा है कि उनकी सर्जरी हुई है।


    डॉक्टर ने क्या कहा?

    अभी तक सलीम खान के परिवार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, हॉस्पिटल के डॉ. जलील पारकर ने सलीम खान के बारे में जानकारी जरूरी दी है। डॉ.जलील पारकर ने बताया, ‘सलीम खान की सर्जरी हुई है। अब उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। उनकी हालत अभी स्थिर है। बुधवार सुबह 11 बजे, हम परिवार और रिश्तेदारों की सहमति से एक प्रेस बुलेटिन जारी करेंगे।’


    मिलने पहुंच रहे परिवार के सदस्य

    डॉ. पारकर ने आगे कहा, ‘वह स्थिर हैं, लेकिन उनके क्लिनिकल स्टेटस को लेकर उन पर कड़ी नजर रखी जा रही है।’ बता दें, जब से सलीम खान हॉस्पिटल में भर्ती हुए हैं तब से खान परिवार के सदस्य बारी-बारी उनसे मिलने बांद्रा स्थित मेडिकल फैसिलिटी पहुंच रहे हैं। जावेद अख्तर और संजय दत्त भी हॉस्पिटल के बाहर स्पॉट हुए हैं।


    सलीम खान – द स्क्रीनराइटर

    सलीम खान को हिंदी सिनेमा के इतिहास के सबसे प्रभावशाली स्क्रीनराइटरों में से एक माना जाता है। वह जावेद अख्तर के साथ मिलकर लिखते थे। उनकी जोड़ी को सलीम-जावेद कहा जाता था। उन्होंने 1970 और 1980 के दशक की शुरुआत में मेनस्ट्रीम बॉलीवुड को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने एक या दो नहीं 24 फिल्मों का स्क्रीनप्ले लिखा था और इसमें से 20 फिल्में हिट हुई थीं।