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  • महाकाल की भस्म आरती में अद्भुत नजारा, शनिवार को उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

    महाकाल की भस्म आरती में अद्भुत नजारा, शनिवार को उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

    उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भस्म आरती के दौरान अलौकिक और दिव्य वातावरण देखने को मिला। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया और धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई।

    पंचामृत अभिषेक और वैदिक विधि से पूजन
    इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर “हरि ओम” के उच्चारण के साथ आरती की शुरुआत हुई, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।

    रजत मुकुट और दिव्य श्रृंगार से सजा बाबा महाकाल का स्वरू
    भगवान महाकाल को रजत ॐ, बिल्वपत्र मुकुट, रुद्राक्ष माला, मुण्डमाल और सुगंधित पुष्पों से भव्य रूप से श्रृंगारित किया गया। मस्तक पर त्रिपुण्ड, त्रिशूल, डमरू और शेषनाग स्वरूप रजत मुकुट ने बाबा के स्वरूप को अत्यंत दिव्य बना दिया। श्रृंगार के बाद बाबा का अलौकिक रूप भक्तों को मंत्रमुग्ध करता रहा और पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

    चिता भस्म अर्पण से संपन्न हुई भस्म आरती
    आरती के अंतिम चरण में भगवान महाकाल को चिता भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से यह भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके साथ ही कपूर आरती के बाद भस्म आरती विधिवत संपन्न हुई।

     श्रद्धालुओं की भारी भीड़, गूंजे जयकारे
    भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में मौजूद रहे और बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बन गया।

    उज्जैन की यह भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और दिव्यता का अद्भुत संगम है। पंचामृत अभिषेक से लेकर चिता भस्म तक की यह प्रक्रिया भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और विश्वास से भर देती है।

  • उज्जैन में टीम इंडिया की जीत का जश्न, नंदी के कान में मांगी मनोकामना

    उज्जैन में टीम इंडिया की जीत का जश्न, नंदी के कान में मांगी मनोकामना

    उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार सुबह आस्था और खेल का अनोखा संगम देखने को मिला, जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाई। टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और कोच सहित पूरी टीम तड़के करीब 3 बजे मंदिर पहुंची और भस्म आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया।

    भस्म आरती में दो घंटे तक डूबी रही टीम, श्रद्धा और भावनाओं का दृश्य
    महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित भस्म आरती के दौरान खिलाड़ी पूरी तरह भक्ति भाव में नजर आईं। करीब दो घंटे तक टीम आरती में शामिल रही और मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल के दर्शन किए। इस दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

    नंदी हॉल में विशेष पूजा, नंदी के कान में कही मनोकामना
    आरती के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर, कोच और अन्य खिलाड़ियों ने नंदी हॉल में पहुंचकर पूजन-अभिषेक किया। परंपरा के अनुसार खिलाड़ियों ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना भी कही और इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    टीम का भव्य स्वागत, मंदिर समिति ने किया सम्मान
    मंदिर में मौजूद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम का स्वागत और सम्मान किया। इस दौरान टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ भी मौजूद रहे, जिन्होंने धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया।

    आस्था और खेल का संगम बना महाकाल धाम
    इस अवसर पर महाकाल मंदिर में आस्था और खेल का अद्भुत संगम देखने को मिला। खिलाड़ियों की मौजूदगी ने मंदिर परिसर को और अधिक विशेष बना दिया, जहां भक्ति और श्रद्धा का वातावरण पूरे समय बना रहा।

    महाकालेश्वर धाम में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह उपस्थिति न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रही, बल्कि यह भी दिखाती है कि खेल जगत के दिग्गज भी आध्यात्मिक ऊर्जा से प्रेरणा लेते हैं। बाबा महाकाल के दरबार में यह क्षण हमेशा यादगार बन गया।

  • भक्ति और संगीत का संगम: वृंदावन में गूंजा “बम लहरी”, प्रेमानंद महाराज हुए भावविभोर

    भक्ति और संगीत का संगम: वृंदावन में गूंजा “बम लहरी”, प्रेमानंद महाराज हुए भावविभोर



    नई दिल्ली। वृंदावन में भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला जब प्रसिद्ध सूफी एवं भजन गायक Kailash Kher ने केलीकुंज आश्रम में संत Premanand Maharaj से भेंट की। इस मुलाकात के दौरान पूरा वातावरण भक्ति भाव और आनंद से भर गया। कैलाश खेर ने महाराज का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और उन्हें मोरपंखी हार पहनाकर सम्मान प्रकट किया।

    आश्रम में बातचीत के दौरान प्रेमानंद महाराज ने सबसे पहले कैलाश खेर का हाल-चाल पूछा, जिस पर गायक ने सहज भाव से कहा कि वे पूरी तरह “मस्त” हैं। इसके बाद कैलाश खेर ने माइक लेकर अपने प्रसिद्ध भजन “बम लहरी” का गायन शुरू किया। अपने खास अंदाज में उन्होंने न केवल भजन प्रस्तुत किया बल्कि भावपूर्ण नृत्य भी किया, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालु और संतगण भी भावविभोर हो उठे। यह भजन लगभग डेढ़ मिनट तक चला, लेकिन इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

    भजन समाप्त होते ही Premanand Maharaj मुस्कुराए और उन्होंने कैलाश खेर की प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बहुत सुंदर और अत्यंत प्रभावशाली था। उनके चेहरे की मुस्कान ने वहां मौजूद सभी लोगों को और भी उत्साहित कर दिया। इसके बाद कैलाश खेर ने एक और भजन प्रस्तुत करने की इच्छा जताई, जिस पर महाराज ने सहमति दी।

    इसके बाद उन्होंने “5 वर्ष की मीरा लाडली हो…” और “सखियां में खेला जाए री…” जैसे भावपूर्ण भजन अपनी विशेष शैली में सुनाए। इन भजनों ने आश्रम के वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। प्रेमानंद महाराज ने उनकी आवाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी गायकी अत्यंत प्रभावशाली है और इसमें भक्ति का गहरा भाव झलकता है।

    इससे पहले कैलाश खेर ने वृंदावन स्थित Banke Bihari Temple में भगवान श्री बांके बिहारी जी के दर्शन किए। मंदिर में उन्होंने लगभग 30 मिनट बिताए और फूल बंगले में विराजमान भगवान की छवि को एकटक निहारते रहे। उन्होंने मंदिर की देहरी पर इत्र भी अर्पित किया और श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। इस दौरान सेवायत मोहित गोस्वामी ने उन्हें भगवान का प्रसाद और अंगवस्त्र भेंट किया।

    कैलाश खेर के आगमन से वृंदावन में भक्ति का माहौल और अधिक गहरा हो गया। उनके भजन और प्रेमानंद महाराज के साथ संवाद ने यह संदेश दिया कि संगीत और आध्यात्मिकता एक-दूसरे के पूरक हैं। इस पूरे आयोजन ने श्रद्धालुओं को भक्ति के नए अनुभव से जोड़ा और वातावरण को दिव्यता से भर दिया।

  • त्रिवेणी शनि मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब, सुबह से शिप्रा स्नान जारी

    त्रिवेणी शनि मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब, सुबह से शिप्रा स्नान जारी

      उज्जैन। मध्य प्रदेश के धार्मिक नगरी उज्जैन में शनिवार को आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब 13 साल बाद शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या का विशेष महासंयोग बना। इस अवसर पर त्रिवेणी स्थित प्राचीन शनि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देशभर से आए भक्तों ने शिप्रा नदी में स्नान कर शनिदेव के दर्शन किए और तेल, काले तिल, नारियल तथा काले वस्त्र अर्पित कर पूजा-अर्चना की।

      शिप्रा स्नान के लिए विशेष इंतजाम, फव्वारों से स्नान कर रहे श्रद्धालु

      श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर विशेष व्यवस्था की है। नदी में जल स्तर कम होने के कारण नर्मदा जल से फव्वारे लगाए गए हैं, जिससे श्रद्धालु स्नान कर सकें।

      सुबह से ही भक्त स्नान कर शुद्धि प्राप्त कर मंदिर पहुंच रहे हैं और शनिदेव के दर्शन कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस, होमगार्ड और SDRF की टीमें तैनात की गई हैं।

      मंदिर में विशेष अनुष्ठान, 24 घंटे तेल अभिषेक जारी
      त्रिवेणी शनि मंदिर में सुबह तड़के ही पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजा के साथ दिन की शुरुआत हुई। मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से भव्य रूप दिया गया है। महंत राकेश बैरागी के अनुसार गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं की एंट्री बंद रखी गई है, जबकि शनि प्रतिमा पर 24 घंटे तक तिल के तेल का अभिषेक जारी रहेगा।

      श्रद्धालुओं की आस्था, दान और परंपराओं का पालन
      श्रद्धालु शिप्रा स्नान के बाद पुराने वस्त्र और जूते-चप्पल मंदिर परिसर में दान कर रहे हैं। भक्त अपने साथ लाए काले तिल, नारियल और तेल शनिदेव को अर्पित कर रहे हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

      धार्मिक अनुष्ठानों और उपायों का महत्व
      पंडितों के अनुसार शनि जयंती के दिन पीपल वृक्ष पर जल अर्पण, काले तिल चढ़ाना और तेल का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। शनि स्तोत्र, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी शनि दोष शांति के लिए लाभकारी बताया गया है। इसके साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है।

      उज्जैन में बना यह दुर्लभ संयोग न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि आस्था और परंपरा के अद्भुत संगम का प्रतीक भी बन गया। त्रिवेणी शनि मंदिर में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि शनिदेव के प्रति श्रद्धा जनमानस में गहराई से स्थापित है।
  • गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास, CM योगी बोले– यूपी अब विकास का मॉडल बन चुका है

    गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास, CM योगी बोले– यूपी अब विकास का मॉडल बन चुका है



    गोरखपुर। गोरखपुर में शनिवार को इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का भव्य शिलान्यास किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी मौजूद रहे। करीब 393 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम CM योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जिसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

    “उत्तर प्रदेश अब सिर्फ संभावनाओं का नहीं, परिणामों का राज्य है” – हरदीप पुरी
    केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में जिस तरह विकास कार्यों ने रफ्तार पकड़ी है, वह देश के लिए उदाहरण बन गया है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार से निवेश बढ़ा है और गोरखपुर का यह स्टेडियम युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगा।

    18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य, अंतरराष्ट्रीय मैच की उम्मीद
    मंत्री पुरी ने दावा किया कि स्टेडियम का निर्माण तेजी से पूरा होगा और 18 महीने के भीतर इसे तैयार करने की कोशिश होगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में यहां IPL और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच आयोजित किए जा सकेंगे, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश को नई पहचान मिलेगी।

    VIP कारपूल से पहुंचे रवि किशन, नेताओं ने दिखाई एकजुटता
    शिलान्यास समारोह में सांसद रवि किशन केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान और अन्य नेताओं के साथ कारपूल करके पहुंचे। इस दौरान गोरखपुर में खेल सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण स्तर पर स्टेडियम विकसित करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।

    स्टेडियम से बदल जाएगी गोरखपुर की पहचान
    केंद्रीय राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि प्रदेश के हर जिले में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि गोरखपुर का यह स्टेडियम भविष्य में कई बड़े क्रिकेट सितारे तैयार करेगा और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती देगा।

  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जबलपुर में अवैध शिकार और खनन पर जताई चिंता

    हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जबलपुर में अवैध शिकार और खनन पर जताई चिंता

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रहे अवैध रेत खनन और राज्य मछली महाशीर के अवैध शिकार को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश देते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले में मछुआरा कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग, कलेक्टर, एसपी, ईओडब्ल्यू और जिला खनिज अधिकारी सहित कई विभागों को नोटिस जारी किए हैं।

    जनहित याचिका से सामने आया गंभीर मामला
    यह मामला जबलपुर निवासी अभिषेक कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नर्मदा नदी के खिरहनी घाट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन और महाशीर मछली का शिकार लगातार जारी है। अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि महाशीर को वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश की राज्य मछली का दर्जा दिया गया था, लेकिन इसके संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।

    ब्रीडिंग सीजन में भी जारी शिकार, विलुप्ति का खतरा
    याचिका में कहा गया है कि विशेष रूप से प्रजनन काल के दौरान महाशीर मछली का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद अवैध मत्स्याखेट जारी है। इसके कारण यह दुर्लभ प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही है। इसके साथ ही नर्मदा नदी में चल रहे अवैध रेत खनन को भी पर्यावरण और जलजीवों के लिए बड़ा खतरा बताया गया है।

    रेत खनन और धमकी के आरोप भी पहुंचे कोर्ट
    याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि खिरहनी घाट पर पहले भी प्रशासन ने अवैध रेत भंडारण और मशीनें जब्त की थीं, लेकिन उसके बाद भी अवैध गतिविधियां नहीं रुकीं। आरोप है कि जब्त रेत को लेकर उपसरपंच को धमकाया गया और बाद में वह सामग्री चोरी कर ली गई। शिकायत दर्ज होने के बावजूद पुलिस और खनन विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

    जैव विविधता संरक्षण पर बड़ा सवाल
    हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा है कि नर्मदा नदी की जैव विविधता और पर्यावरण की सुरक्षा बेहद जरूरी है। महाशीर जैसी दुर्लभ प्रजाति का संरक्षण न केवल पर्यावरण बल्कि पारिस्थितिक संतुलन के लिए भी अहम है।

    जबलपुर हाईकोर्ट का यह फैसला नर्मदा नदी और उसकी जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और अवैध गतिविधियों पर कितनी प्रभावी रोक लगती है।

  • प्रतीक यादव की अस्थियां लेकर हरिद्वार रवाना हुआ परिवार, अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से पहुंचीं गंगा घाट

    प्रतीक यादव की अस्थियां लेकर हरिद्वार रवाना हुआ परिवार, अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से पहुंचीं गंगा घाट



    लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की अस्थियां आज हरिद्वार में गंगा में विसर्जित की जाएंगी। इसके लिए पत्नी अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से अस्थि कलश लेकर परिवार के साथ लखनऊ से रवाना हुईं। इस दौरान उनके साथ शिवपाल यादव के सांसद पुत्र आदित्य यादव, बेटियां प्रथमा और पद्मजा, पिता अरविंद बिष्ट और भाई अमन भी मौजूद रहे।

    अमौसी एयरपोर्ट से लेकर जॉलीग्रांट एयरपोर्ट तक पूरे सफर में परिवार के सदस्य अस्थि कलश के साथ रहे। इसके बाद सड़क मार्ग से हरिद्वार पहुंचकर जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर और स्वामी अवधेशानंद गिरि की मौजूदगी में गंगा तट पर विधिवत अस्थि विसर्जन किया जाएगा। सुरक्षा और निजीता को देखते हुए पूरा कार्यक्रम बेहद सीमित और वीवीआईपी स्तर पर आयोजित किया गया है।

    निजी जीवन और अंतिम विदाई की प्रक्रिया
    प्रतीक यादव का 13 मई को 38 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था, जिसके बाद 14 मई को लखनऊ में उनका अंतिम संस्कार किया गया था। उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने मुखाग्नि दी थी। प्रतीक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे और राजनीति से दूर रहते हुए रियल एस्टेट और फिटनेस व्यवसाय से जुड़े थे।

    पत्नी अपर्णा यादव, जो वर्तमान में भाजपा नेता और यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं, पूरे परिवार के साथ इस अंतिम यात्रा का हिस्सा बनीं। अपर्णा के पैतृक गांव उत्तराखंड में भी शोक का माहौल है, जहां लोग दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

  • जबलपुर में धर्मांतरण का आरोप, स्कूल पर नौकरी से निकालने का मामला

    जबलपुर में धर्मांतरण का आरोप, स्कूल पर नौकरी से निकालने का मामला


    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में सेंट एलायसिस स्कूल को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यहां काम कर रही महिला सफाई कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया और इनकार करने पर नौकरी से निकाल दिया गया। मामला सामने आने के बाद शहर में तनाव का माहौल बन गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    नौकरी के बदले धर्म परिवर्तन का आरोप, महिलाओं ने लगाए गंभीर आरोप
    पीड़ित महिला कर्मचारियों का कहना है कि स्कूल प्रशासन की ओर से उन पर चर्च जाने और ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि कहा गया “अगर यहां काम करना है तो धर्म बदलना होगा, वरना नौकरी छोड़नी पड़ेगी। महिलाओं ने बताया कि दबाव मानने से इनकार करने पर उन्हें काम से हटा दिया गया। इसके बाद पीड़ित महिलाएं पुलिस के पास पहुंचीं और कार्रवाई की मांग की।

    2024 से काम कर रही थीं महिलाएं, फादर बदलने के बाद बढ़ा दबाव
    शिकायतकर्ता दीपा पटेल के अनुसार वह वर्ष 2024 से स्कूल में सफाई कर्मचारी के रूप में काम कर रही थीं और पहले स्थिति सामान्य थी। उनके अनुसार पहले फादर वाल्टर के समय कोई समस्या नहीं थी, लेकिन नए फादर सोमी जैकब के आने के बाद दबाव बढ़ गया। दीपा का आरोप है कि उन्हें और अन्य महिला कर्मचारियों को चर्च जाने के लिए कहा गया, और मना करने पर नौकरी से निकाल दिया गया।

    12 साल की नौकरी, फिर अचानक निकाला गया: एक और आरोप
    एक अन्य कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसने स्कूल में 12 साल तक काम किया, लेकिन छोटी छुट्टी लेने के बाद उसे वापस काम पर नहीं आने दिया गया। आरोप है कि उनसे भी धर्म परिवर्तन की बात कही गई और विरोध करने पर नौकरी समाप्त कर दी गई।

    हिंदू संगठनों का विरोध, कार्रवाई की मांग
    मामले को लेकर हिंदू धर्म सेना समेत कई संगठनों ने विरोध जताया है। संगठन के नेताओं का कहना है कि शहर में कुछ स्कूलों में नौकरी के नाम पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

    पुलिस जांच शुरू, स्कूल प्रशासन से नहीं मिला जवाब
    मामले की शिकायत पुलिस और एएसपी तक पहुंच चुकी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच विजय नगर थाना प्रभारी को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। स्कूल प्रशासन की ओर से फादर सोमी जैकब का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

    जबलपुर का यह मामला अब सामाजिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। जहां एक ओर पीड़ित कर्मचारी न्याय की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर जांच के बाद ही सच्चाई सामने आने की बात कही जा रही है। फिलहाल मामला पुलिस जांच के दायरे में है।

  • जबलपुर में डिजिटल न्याय पर मंथन, CJI और कानून मंत्री समेत कई दिग्गज पहुंचे

    जबलपुर में डिजिटल न्याय पर मंथन, CJI और कानून मंत्री समेत कई दिग्गज पहुंचे


    जबलपुर। मध्य प्रदेश का जबलपुर शुक्रवार को देश की न्याय व्यवस्था के डिजिटल भविष्य का केंद्र बन गया, जहां ‘फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन: एम्पॉवरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन’ विषय पर उच्चस्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देश की न्यायपालिका, सरकार और कानून व्यवस्था से जुड़े शीर्ष प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे बेहद अहम बना दिया। कार्यक्रम में भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हुए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ जजों और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने भी भाग लिया।

    सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की मौजूदगी, हाईकोर्ट के न्यायाधीश भी शामिल
    सेमिनार में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा, सतीश चंद्र शर्मा, पीबी वराले, एन. कोटेश्वर सिंह, आर. महादेवन, मनमोहन और आलोक आराधे सहित कई न्यायाधीश उपस्थित रहे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा सहित सभी न्यायाधीशों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि देश की न्याय व्यवस्था में तकनीक आधारित बदलाव को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है।

    डिजिटल न्याय प्रणाली पर केंद्रित रहा सेमिनार
    इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका में तकनीक के उपयोग को बढ़ाना और सभी न्यायिक प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना रहा। इसमें ई-कोर्ट सिस्टम, डेटा इंटीग्रेशन, केस मैनेजमेंट और यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस प्लेटफॉर्म जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल न्याय प्रणाली को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम, सीमित काफिला चर्चा में
    कार्यक्रम को देखते हुए जबलपुर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला भी सादगीपूर्ण रहा, जिसमें केवल छह वाहन शामिल थे। प्रशासन ने पूरे आयोजन को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष तैयारी की थी।

    भविष्य की न्याय व्यवस्था की दिशा तय करने की कोशिश
    यह सेमिनार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत की न्याय प्रणाली के भविष्य को डिजिटल रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे देश में न्यायिक प्रक्रियाओं की गति और पारदर्शिता दोनों में सुधार संभव है।

    जबलपुर का यह आयोजन न्यायपालिका और तकनीक के संगम का प्रतीक बनकर उभरा है। शीर्ष न्यायाधीशों और सरकार की एक साथ मौजूदगी ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में भारत की न्याय व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल रूपांतरण की ओर बढ़ सकती है।

  • श्रद्धा और आस्था के साथ बरेली में मनाया गया वट सावित्री पर्व, सुहागिन महिलाओं ने की पूजा-अर्चना

    श्रद्धा और आस्था के साथ बरेली में मनाया गया वट सावित्री पर्व, सुहागिन महिलाओं ने की पूजा-अर्चना




    बरेली । बरेली में शनिवार को वट सावित्री व्रत पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखा और पारंपरिक विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा की। सुबह से ही शहर के मंदिरों और बरगद के पेड़ों के पास महिलाओं की भीड़ देखने को मिली।

    शहर के अलखनाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर, धोपेश्वरनाथ मंदिर और तपेश्वरनाथ मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों पर महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा की। इसके अलावा बन्नूवाल नगर, मॉडल टाउन और अन्य कॉलोनियों में भी सामूहिक रूप से वट सावित्री पूजन किया गया। 16 श्रृंगार में सजी महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर परंपराओं का पालन किया और अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना की।