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  • 15 साल की सबसे गर्म शुरुआत: फरवरी की ‘सर्द-गर्म’ से सावधान! इन 7 आसान उपायों से बचें फ्लू और बुखार से

    15 साल की सबसे गर्म शुरुआत: फरवरी की ‘सर्द-गर्म’ से सावधान! इन 7 आसान उपायों से बचें फ्लू और बुखार से


    नई दिल्ली। फरवरी का मौसम इस बार बेहद असामान्य है। जनवरी के बाद फरवरी की शुरुआत भी पिछले 15 सालों में सबसे गर्म रिकॉर्ड तोड़ रही है। दिन में तेज धूप और शाम को ठंडी हवा—इस ‘सर्द-गर्म’ के कारण शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है और लोग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि धूप से लौटते ही पंखा/एसी चलाना या तुरंत ठंडा पानी पीना सर्द-गर्म का मुख्य कारण बन सकता है।

    फ्लू और सर्दी-जुकाम से बचने के लिए साफ-सफाई सबसे बड़ा हथियार है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाथों को साबुन से धोना, खांसते/छींकते समय रुमाल का उपयोग और बार-बार नाक-आंख छूने से बचना जरूरी है। साथ ही घर का बना ताजा भोजन, हल्दी वाला दूध, गुनगुना पानी, और सही पहनावा इस मौसम में सेहत बनाए रखने में मददगार है।

    बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम में ज्यादा प्रभावित होते हैं। अगर दो दिन से अधिक बुखार, कफ या कमजोरी बनी रहे तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।

  • Vijaya Ekadashi 2026: इस व्रत से मिलती है शत्रुओं पर जीत और सफलता, फरवरी में जानें शुभ मुहूर्त व पारण का सही समय

    Vijaya Ekadashi 2026: इस व्रत से मिलती है शत्रुओं पर जीत और सफलता, फरवरी में जानें शुभ मुहूर्त व पारण का सही समय

    नई दिल्ली। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘विजया एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी साधक को कठिन परिस्थितियों, शत्रुओं और मानसिक बाधाओं पर विजय दिलाने वाली मानी गई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन भगवान विष्णु की पूरी श्रद्धा के साथ उपासना करता है, उसे कार्यों में सिद्धि और अटके हुए कामों में सफलता प्राप्त होती है।

    विजया एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीराम से जुड़ा है। कहा जाता है कि जब प्रभु श्रीराम माता सीता की खोज में समुद्र तट पर पहुँचे और लंका पर चढ़ाई की चुनौती सामने थी, तब मुनि वकदालभ्य के निर्देश पर उन्होंने अपनी सेना सहित विजया एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के पुण्य प्रताप से ही उन्हें समुद्र पार करने और रावण पर विजय पाने में सफलता मिली। तभी से इसे ‘जीत’ का आशीर्वाद देने वाली एकादशी कहा जाता है।

    विजया एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष एकादशी तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहेगी, लेकिन उदयातिथि की प्रधानता के कारण व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।

    एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे।

    एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दोपहर 02:25 बजे।

    व्रत की तारीख: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)।

    पूजा के विशेष मुहूर्त:

    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:18 से 06:10 बजे तक।

    अमृत काल (सर्वोत्तम): सुबह 09:08 से 10:54 बजे तक।

    विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:11 बजे तक।

    पारण का समय और नियम
    एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब इसका पारण (व्रत खोलना) शुभ समय और विधि के साथ किया जाए। विजया एकादशी का पारण 14 फरवरी 2026 को होगा।

    पारण समय: सुबह 07:00 बजे से 09:14 बजे तक।

    विशेष सावधानी: चूंकि हरि वासर सुबह 08:20 बजे समाप्त हो रहा है, इसलिए पारण के लिए सुबह 08:21 से 09:14 के बीच का समय सबसे उत्तम रहेगा।

    इस दिन साधक को पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। व्रत के दौरान सात्विकता बनाए रखें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें।

    विजया एकादशी 2026 का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। यह व्रत शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। भगवान राम ने भी लंका विजय के लिए यह व्रत किया था। 14 फरवरी की सुबह 07:00 से 09:14 के बीच व्रत का पारण करना शुभ रहेगा।

  • फरवरी की 'सर्द-गर्म' से रहें सावधान: 15 सालों में सबसे गर्म शुरुआत, बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स

    फरवरी की 'सर्द-गर्म' से रहें सावधान: 15 सालों में सबसे गर्म शुरुआत, बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स


    नई दिल्ली। फरवरी का महीना आते ही प्रकृति करवट बदलने लगती है। इस साल मौसम का मिजाज कुछ ज्यादा ही हैरान करने वाला है; जहाँ जनवरी पिछले छह सालों में सबसे गर्म रहा, वहीं फरवरी की शुरुआत ने भी पिछले 15 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दिन में चुभती धूप और शाम होते ही सर्द हवाओं का यह ‘डबल अटैक’ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पर सीधा हमला करता है। ऐसे में थोड़ी सी भी लापरवाही आपको अस्पताल पहुँचा सकती है।

    धूप से आकर तुरंत न चलाएं पंखा दोपहर के वक्त बाहर से आने पर अक्सर शरीर का तापमान बढ़ जाता है और हम तुरंत पंखा चला लेते हैं या एसी की तलाश करते हैं। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि ऐसा करना ‘सर्द-गर्म’ का मुख्य कारण बनता है। जब आप बाहर से आएं, तो कम से कम 10-15 मिनट शांति से बैठें ताकि शरीर का तापमान प्राकृतिक रूप से सामान्य हो जाए। इसी तरह, तेज धूप से लौटकर तुरंत ठंडा पानी पीना गले के संक्रमण और तेज बुखार को न्योता देना है।

    साफ-सफाई: फ्लू से बचने का सबसे बड़ा हथियार बदलते मौसम में वायरस और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण से बचने के लिए हाथों की स्वच्छता (Hand Hygiene) सबसे महत्वपूर्ण है। अपनी हथेलियों, उंगलियों और नाखूनों को नियमित रूप से साबुन से धोएं। खांसते या छींकते समय रुमाल का प्रयोग करें और हाथों से बार-बार नाक या आंखों को छूने से बचें।

    सेहत बनाए रखने के अचूक उपाय: इस संक्रमण काल में खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपनी दिनचर्या में ये छोटे बदलाव जरूर करें:
    बाहर के खुले या जंक फूड से परहेज करें और घर का बना ताजा भोजन ही लें।
    रात को सोने से पहले एक गिलास हल्दी वाला दूध पिएं, यह प्राकृतिक एंटीबायोटिक का काम करता है।कफ या गले में खराश महसूस होने पर केवल गुनगुना पानी ही पिएं।

     सुबह और शाम की ठंड को हल्के में न लें; पूरी बाजू के कपड़े पहनें। पैरों में संक्रमण से बचने के लिए अब बंद जूतों की जगह खुली चप्पलों का चुनाव किया जा सकता है।

    डॉक्टर की सलाह कब लें? बदलते मौसम में बच्चे और बुजुर्ग सबसे जल्दी संक्रमण की चपेट में आते हैं। यदि आपको या परिवार में किसी को भी दो दिन से अधिक समय तक बुखार, लगातार कफ या शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो इसे ‘मौसमी असर’ मानकर नजरअंदाज न करें। तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर से परामर्श लें ताकि समय रहते सही उपचार शुरू हो सके।

    फरवरी में दिन की गर्मी और रात की ठंड के कारण ‘सर्द-गर्म’ की समस्या बढ़ रही है। 15 साल की सबसे गर्म शुरुआत के बीच सर्दी-जुकाम और फ्लू का खतरा है। बचाव के लिए धूप से आकर तुरंत ठंडा पानी न पिएं, स्वच्छता का ध्यान रखें और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हल्दी वाले दूध का सेवन करें।

  • रिक्शा चालक पिता की बेटी से अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टार तक, अनुराधा देवी थोकचोम की संघर्ष और स्वर्णिम सफलता की कहानी

    रिक्शा चालक पिता की बेटी से अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टार तक, अनुराधा देवी थोकचोम की संघर्ष और स्वर्णिम सफलता की कहानी

    नई दिल्ली। मणिपुर बीते कुछ वर्षों में भारतीय खेल जगत का मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। इस छोटे से राज्य ने देश को कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने अपने जज्बे और मेहनत से भारत का नाम रोशन किया। इन्हीं नामों में एक है अनुराधा देवी थोकचोम, जिन्होंने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय महिला हॉकी में अपनी अलग पहचान बनाई। अनुराधा न सिर्फ एक बेहतरीन खिलाड़ी रहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।

    गरीबी से निकला हौसले का सफर
    अनुराधा देवी थोकचोम का जन्म 2 फरवरी 1989 को मणिपुर के तौबुल गांव में हुआ। उनके पिता थोकचोम चुरामणि पेशे से रिक्शा चालक थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण थी। खेती और मछली पालन से जुड़े इस परिवार में तीन बच्चे थे। बड़े भाई फुटबॉल खेलते थे और खेल का माहौल घर में पहले से मौजूद था। हालांकि मणिपुर में फुटबॉल ज्यादा लोकप्रिय रहा है, लेकिन अनुराधा ने बहुत कम उम्र में हॉकी को अपना सपना बना लिया।

    हॉकी स्टिक से बदली किस्मत
    भाई-बहनों के मार्गदर्शन और अपने जिद्दी इरादों के चलते अनुराधा ने हॉकी स्टिक थामी। उन्होंने तोबुल यूथ क्लब से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में इम्फाल स्थित पोस्टीरियर हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण लिया। संसाधनों की कमी के बावजूद उनका अनुशासन और मेहनत जल्द ही रंग लाने लगी और वे राज्य स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गईं।

    अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकी अनुराधा
    2006 में महिला हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के जरिए अनुराधा ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी में पदार्पण किया। फॉरवर्ड के रूप में खेलते हुए उन्होंने भारतीय टीम के लिए 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। 2014-15 महिला हॉकी वर्ल्ड लीग में उनके शानदार प्रदर्शन की खूब सराहना हुई, जहां भारत ने पांचवां स्थान हासिल कर रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। 2016 के रियो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम की 36 साल बाद वापसी में भी अनुराधा टीम का अहम हिस्सा रहीं।

    एशिया में पदक, करियर का स्वर्णिम अध्याय
    अनुराधा 2013 क्वालालंपुर एशिया कप में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहीं। इसके बाद 2016 में सिंगापुर में आयोजित एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाली टीम में शामिल होकर उन्होंने अपने करियर को यादगार बना दिया। इसी ऐतिहासिक जीत के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास ले लिया।

    खेल के बाद नई जिम्मेदारी
    हॉकी को अलविदा कहने के बाद अनुराधा देवी थोकचोम वर्तमान में भारतीय रेलवे के लिपिक विभाग में कार्यरत हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो गरीबी भी प्रतिभा की राह नहीं रोक सकती। अनुराधा आज भी मणिपुर और देश की युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।

  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट, वित्त मंत्री ने 40,000 करोड़ की स्कीम और ISM 2.0 का किया ऐलान

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट, वित्त मंत्री ने 40,000 करोड़ की स्कीम और ISM 2.0 का किया ऐलान

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का ऐलान किया है। इसके जरिए सरकार की कोशिश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उभरते अवसरों का फायदा उठाना है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का परिव्यय बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए कर दिया है।

    वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने इसके लिए 40,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। इसके जरिए कोशिश इंडस्ट्री के नेतृत्व में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रिसर्च और ट्रेनिंग सेक्टर को आने बढ़ाना है।

    बजट भाषण में वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “भारत के सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 ने देश की सेमीकंडक्टर क्षमताओं का विस्तार किया है। इसी आधार पर सरकार उपकरण और सामग्री उत्पादन, पूर्ण-स्टैक भारतीय बौद्धिक संपदा (आईपी) विकास और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए आईएसएम 2.0 की शुरुआत करेगी। भारत के सेमीकंडक्टर विकास की गति का लाभ उठाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम काे परिव्यय को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए किया है।”

    वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “हम प्रौद्योगिकी और कुशल कार्यबल के विकास के लिए उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे। अप्रैल 2025 में 22,999 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ शुरू की गई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (आईएसएम) को पहले ही लक्ष्य से दोगुने निवेश की प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं।”

    इसके अलावा, केंद्रीय बजट 2026-27 में लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपए के एक समर्पित कोष की शुरुआत का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उद्देश्य भविष्य में रोजगार सृजित करना और चुनिंदा मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहन देना है।

    श्रम प्रधान वस्त्र क्षेत्र के लिए वित्त मंत्री ने पांच प्रमुख घटकों वाले एक एकीकृत कार्यक्रम का प्रस्तावित किया गया है। पहला घटक – नेशनल फाइबर स्कीम है, जिसका लक्ष्य रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर्स के साथ-साथ मानव निर्मित और नए औद्योगिक युग के फाइबर्स में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।

    दूसरा घटक- वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना, जिसका उद्देश्य मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और साझा परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्रों के लिए पूंजीगत सहायता प्रदान करके पारंपरिक क्लस्टरों का आधुनिकीकरण करना है।

    तीसरा घटक राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम (एनएचएचपी) है, जिसे बुनकरों और कारीगरों के लिए लक्षित समर्थन सुनिश्चित करते हुए मौजूदा योजनाओं को एकीकृत और मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है।

  • विंटर ओलंपिक 2026 की शुरुआत से पहले कर्लिंग टाइटल रेस में ब्रिटेन, कनाडा और स्वीडन आगे

    विंटर ओलंपिक 2026 की शुरुआत से पहले कर्लिंग टाइटल रेस में ब्रिटेन, कनाडा और स्वीडन आगे

    नई दिल्ली। मिलान-कॉर्टिना 2026 विंटर ओलंपिक में कर्लिंग प्रतियोगिताएं 4 फरवरी से शुरू होकर 22 फरवरी तक चलेंगी। इस दौरान मिश्रित डबल्स, पुरुष टीम और महिला टीम—तीनों वर्गों में गोल्ड मेडल के लिए जबरदस्त मुकाबले देखने को मिलेंगे। प्रतियोगिताओं का आयोजन डोलोमिटिक आल्प्स में बसे उत्तरी इटली के खूबसूरत शहर कॉर्टिना डी’एम्पेजो के ऐतिहासिक कॉर्टिना ओलंपिक स्टेडियम में किया जाएगा, जिसे 1956 विंटर ओलंपिक के लिए बनाया गया था। पुरुष और महिला टीम इवेंट्स की शुरुआत 11 फरवरी से होगी, जहां पहले ही दिन से राउंड-रॉबिन मुकाबलों के जरिए टीमें अपनी दावेदारी पेश करेंगी।

    मेजबान इटली को घरेलू मैदान का फायदा
    मेजबान देश होने के कारण इटली ने तीनों इवेंट्स के लिए सीधे क्वालिफिकेशन हासिल कर लिया है। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा ओलंपिक मिश्रित डबल्स चैंपियन स्टेफानिया कॉन्स्टेंटिनी और अमोस मोसानर की जोड़ी एक बार फिर खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही है। घरेलू दर्शकों का समर्थन और पिछले अनुभव इटली को इस वर्ग में मजबूत बना सकता है।

    पुरुष वर्ग में दिग्गजों की टक्कर
    पुरुष टीम इवेंट में स्वीडन, ब्रिटेन और कनाडा को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इन तीनों देशों की कर्लिंग परंपरा बेहद समृद्ध रही है और पिछले ओलंपिक व विश्व चैंपियनशिप में इनका प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा है। तकनीकी सटीकता, रणनीतिक खेल और अनुभव के दम पर ये टीमें एक-दूसरे को कड़ी चुनौती देने वाली हैं।

    महिला वर्ग में भी कांटे की लड़ाई
    महिला टीम इवेंट में ब्रिटेन मौजूदा ओलंपिक चैंपियन के रूप में उतरेगा, जबकि कनाडा ने 2025 वर्ल्ड कर्लिंग चैंपियनशिप में अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया था। इसके अलावा स्विट्जरलैंड, स्वीडन और दक्षिण कोरिया की टीमें भी मजबूत चुनौती पेश करने को तैयार हैं। इन टीमों के मुकाबले अक्सर बेहद कम अंतर से तय होते हैं, जिससे रोमांच अपने चरम पर रहता है।

    चीन की नजरें ऐतिहासिक प्रदर्शन पर
    चीन पुरुष और महिला दोनों वर्गों में टीमें उतार रहा है। स्किप शू जियाओमिंग और वांग रुई तीसरी बार ओलंपिक में जगह बनाने की कोशिश में हैं, जिससे उनके अनुभव और नेतृत्व की बड़ी परीक्षा होगी। 41 वर्षीय जू वैंकूवर 2010 में हिस्सा ले चुके हैं और सोची 2014 में चीन को चौथे स्थान तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं, जो अब तक पुरुष कर्लिंग में चीन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। वहीं 30 वर्षीय वांग को टीम का आध्यात्मिक लीडर माना जाता है, जिनका अनुभव टीम को मजबूती दे सकता है।

    रोमांच से भरपूर होगी कर्लिंग की जंग
    कुल मिलाकर, विंटर ओलंपिक 2026 में कर्लिंग प्रतियोगिताएं अनुभव बनाम युवा जोश, रणनीति बनाम आक्रामकता और परंपरा बनाम नए दावेदारों की दिलचस्प कहानी बुनने जा रही हैं। दर्शकों को हर दिन हाई-वोल्टेज मुकाबले देखने को मिलेंगे।

  • ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल को लेकर बड़ा खुलासा, ईशान-अर्शदीप किसे बनाना चाहते हैं चैंपियन

    ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल को लेकर बड़ा खुलासा, ईशान-अर्शदीप किसे बनाना चाहते हैं चैंपियन

    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 का पुरुष एकल फाइनल टेनिस प्रेमियों के लिए किसी महायुद्ध से कम नहीं है। रविवार को मेलबर्न पार्क में 24 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता सर्बिया के दिग्गज नोवाक जोकोविच और स्पेन के युवा स्टार कार्लोस अल्काराज आमने-सामने होंगे। यह मुकाबला न सिर्फ खिताब का फैसला करेगा, बल्कि टेनिस इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत भी कर सकता है। एक ओर जहां जोकोविच अपने 25वें ग्रैंड स्लैम खिताब की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अल्काराज करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने के बेहद करीब हैं।

    ईशान किशन को पसंद आया अल्काराज का आक्रामक अंदाज
    भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने इस फाइनल में कार्लोस अल्काराज को समर्थन दिया है। बीसीसीआई द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए वीडियो में ईशान ने कहा कि अल्काराज का खेलने का अंदाज उन्हें खासा पसंद है। उनके मुताबिक, “अल्काराज जिस तरह से खेलते हैं, वह हमारे क्रिकेट खेलने के तरीके जैसा है। वह तेज खेलते हैं, गैप मिलते ही शॉट मारते हैं और ज्यादा इंतजार नहीं करते।” किशन का मानना है कि यही आक्रामकता और मौके भुनाने की क्षमता बड़े मैचों में अल्काराज को खतरनाक बनाती है।

    पहले ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब की तलाश में अल्काराज
    ईशान किशन ने यह भी कहा कि अल्काराज अपना पहला ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीतने की कोशिश में हैं और इसी वजह से वह उनके पक्ष में हैं। 22 वर्षीय अल्काराज पहले ही फ्रेंच ओपन, विंबलडन और यूएस ओपन जीत चुके हैं। अगर वह मेलबर्न में खिताब जीतते हैं, तो सबसे कम उम्र में करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। अब तक यह रिकॉर्ड स्पेन के ही दिग्गज राफेल नडाल के नाम है, जिन्होंने 24 साल की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी।

    अर्शदीप सिंह का भरोसा ‘आइसमैन’ जोकोविच पर
    वहीं भारतीय टीम के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह की पसंद ईशान से बिल्कुल अलग है। अर्शदीप ने नोवाक जोकोविच को अपना फेवरेट बताया है। उन्होंने साफ कहा, “मैं आइसमैन यानी जोकोविच को सपोर्ट कर रहा हूं।” जोकोविच का अनुभव, मानसिक मजबूती और बड़े मैचों में दबदबा उन्हें इस मुकाबले में बेहद खतरनाक बनाता है।

    दो पीढ़ियों की ऐतिहासिक जंग
    ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 का यह फाइनल दो पीढ़ियों के बीच टकराव का प्रतीक है। एक तरफ अनुभव और रिकॉर्ड्स से सजे जोकोविच हैं, तो दूसरी ओर युवा जोश और आक्रामक खेल के पर्याय अल्काराज। अगर जोकोविच जीतते हैं, तो वह 25 ग्रैंड स्लैम के साथ टेनिस इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ी बन जाएंगे। वहीं अल्काराज की जीत उन्हें भविष्य का निर्विवाद सुपरस्टार बना देगी। ऐसे में फैंस को एक यादगार और रोमांचक फाइनल की पूरी उम्मीद है।

  • सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एम्स जोधपुर में हुई विशेषज्ञ जांच, मेडिकल रिपोर्ट तलब

    सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एम्स जोधपुर में हुई विशेषज्ञ जांच, मेडिकल रिपोर्ट तलब


    नई दिल्ली । जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद सोनम वांगचुक की तबीयत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट के निर्देश पर शनिवार सुबह कड़ी पुलिस सुरक्षा में सोनम वांगचुक को एम्स जोधपुर ले जाया गया, जहां गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में उनकी करीब डेढ़ घंटे तक विस्तृत चिकित्सकीय जांच की गई। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से पेट दर्द, गैस और गैस्ट्रो से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं और सामान्य इलाज से उनकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो रहा है।

    सोनम वांगचुक 27 सितंबर 2025 से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि जेल में उपलब्ध खराब गुणवत्ता वाले पानी के कारण उनके मुवक्किल की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि वांगचुक को लगातार पेट से जुड़ी परेशानियां हो रही हैं और जेल में दिया जा रहा सामान्य इलाज उनकी बीमारी के लिए पर्याप्त नहीं है।

    इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए थे कि सोनम वांगचुक को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर, विशेष रूप से गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट को दिखाया जाए। इसी आदेश के तहत शनिवार को उन्हें एम्स जोधपुर ले जाया गया। एम्स सूत्रों के अनुसार, डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया और जरूरी मेडिकल टेस्ट किए। जांच के बाद उन्हें वापस जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

    गौरतलब है कि सोनम वांगचुक को शुक्रवार को भी मेडिकल जांच के लिए एम्स जोधपुर लाया गया था। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति पर नजर रखते हुए आवश्यक जांचें की थीं। अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट 2 फरवरी तक अदालत में पेश की जाए, ताकि आगे की कार्रवाई उसी रिपोर्ट के आधार पर तय की जा सके।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की पत्नी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि वांगचुक की सेहत लगातार गिरती जा रही है और जेल की मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाएं उनकी बीमारी के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कैदियों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता और जरूरत पड़ने पर उन्हें विशेषज्ञ इलाज उपलब्ध कराना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है।

    इससे पहले हुई सुनवाई में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने जेल अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया था कि सोनम वांगचुक की जांच गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट से कराई जाए। राजस्थान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कोर्ट को बताया था कि पिछले चार महीनों में जेल के डॉक्टरों द्वारा सोनम वांगचुक की 21 बार जांच की जा चुकी है और 26 जनवरी को भी उनकी मेडिकल जांच हुई थी। हालांकि कपिल सिब्बल ने इस दलील पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि सामान्य जांच पर्याप्त नहीं है क्योंकि समस्या की जड़ जेल का खराब पानी है। अब सभी की निगाहें सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा और जिसके आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

  • केंद्रीय बजट 2026: इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, प्रक्रिया होगी और आसान

    केंद्रीय बजट 2026: इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, प्रक्रिया होगी और आसान

    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा और अपने कार्यकाल का लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। बजट 2026-27 में आम करदाताओं को लेकर सबसे बड़ा ऐलान यही रहा कि इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष किए गए बड़े टैक्स सुधारों के बाद फिलहाल टैक्स स्ट्रक्चर को स्थिर रखना सरकार की प्राथमिकता है। इसका मतलब यह है कि करदाता जिस टैक्स सिस्टम के तहत अभी टैक्स चुका रहे हैं, वही व्यवस्था आगे भी लागू रहेगी।

    टैक्स सिस्टम स्थिर, लेकिन राहत पर जोर

    हालांकि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन बजट में टैक्स भरने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और करदाताओं के अनुकूल बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। सरकार का फोकस टैक्स कंप्लायंस को आसान बनाना और अनावश्यक परेशानियों को कम करना रहा।

    रिटर्न संशोधन की समयसीमा बढ़ी

    वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स रिटर्न में संशोधन (रिवाइज्ड रिटर्न) करने की अंतिम तारीख को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केवल मामूली शुल्क देना होगा। इससे उन करदाताओं को राहत मिलेगी, जिनसे रिटर्न दाखिल करते समय अनजाने में कोई गलती हो जाती है।

    अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग समयसीमा

    बजट में रिटर्न फाइलिंग की तारीखों को भी वर्गों के अनुसार स्पष्ट किया गया है। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 भरने वाले करदाता पहले की तरह 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। वहीं जिन कारोबारों का ऑडिट नहीं होता और ट्रस्ट्स को 31 अगस्त तक का समय दिया गया है।

    ब्याज और एनआरआई को बड़ी राहत

    टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने घोषणा की कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाला ब्याज अब इनकम टैक्स के दायरे से बाहर रहेगा और इस पर टीडीएस भी नहीं काटा जाएगा। इसके अलावा भारत की कंपनियों को पूंजीगत सामान देने वाले एनआरआई को पांच साल तक इनकम टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।

    टीसीएस दरों में कटौती

    बजट में स्रोत पर टैक्स वसूली (TCS) को लेकर भी बड़े बदलाव किए गए हैं। विदेश यात्रा पैकेज पर लगने वाला टीसीएस 5 और 20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है और अब इसमें न्यूनतम राशि की कोई शर्त नहीं होगी। वहीं लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश में पढ़ाई और इलाज पर लगने वाला टीसीएस भी 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है।

    छोटे करदाताओं के लिए ऑटोमैटिक सिस्टम

    छोटे टैक्सपेयर्स के लिए सरकार एक नया ऑटोमैटिक सिस्टम लाने जा रही है। इसके तहत कम या शून्य टैक्स कटौती का सर्टिफिकेट लेने के लिए अब टैक्स अधिकारी के पास आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही शेयरधारक अब फॉर्म 15G और 15H सीधे डिपॉजिटरी में जमा कर सकेंगे।

    शेयर बाजार लेनदेन महंगे

    हालांकि बजट में शेयर बाजार से जुड़े लेनदेन पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.01 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है।

    कुल मिलाकर बजट 2026 में टैक्स स्लैब को स्थिर रखते हुए प्रक्रिया को सरल बनाने और लक्षित राहत देने पर सरकार का खास फोकस देखने को मिला।

  • आपके लिए खतरनाक हो सकता है फरवरी का महीना, बदलते मौसम में ऐसे रखें अपना खयाल

    आपके लिए खतरनाक हो सकता है फरवरी का महीना, बदलते मौसम में ऐसे रखें अपना खयाल


    नई दिल्ली । फरवरी आते ही मौसम काफी तेजी में बदलने लगता है. दिन में हल्की गर्मी होती है तो रात के वक्त ठंडी हवा चलती है. ऐसे में जो लोग दोपर के वक्त बाहर से आते हैं उन्हें अचानक से गर्मी लगने लगती है. इस बदलते मौसम में अक्सर लोग बीमार पड़ जाते हैं. इसके कारण सर्द-गर्म जैसा एहसास होता है.

    जिसके चलते आपको बुखार भी महसूस हो सकता है. इसलिए इस मौसम जब भी बाहर जाए या आएं तो गर्मी महसूस हो तो पंखा न चलाएं बल्कि कुछ देर ऐसे ही आराम से बैठे. कुछ देर रिलैक्स होकर बैठने से आपके शरीर का टेंपरेचर खुद नॉर्मल हो जाएगा. दिन में इतनी तेज धूप हो रही है कि जैकेट,स्वेटर पहनना मुश्किल हो चुका है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फरवरी में सर्द-गर्म शरीर के लिए कितना खतरनाक है. आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे.

    साफ-सफाई का रखें खास ध्यान

    सर्दी-जुकाम के साथ-साथ फ्लू जैसी गंभीर बीमारियों से बचने के लिए खुद के साफ-सफाई का खास ध्यान रखें. जो लोग हमेशा गंदा रहते हैं या जो लोग खांसते या छींकते या पूरे टाइम नाक को हाथों से पोंछते हैं. ऐसे लोग जल्दी बीमारी पड़ते हैं. जो लोग अपने हाथों को साबुन से साफ नहीं करते हैं वो बार-बार बीमार पड़ते हैं. डॉक्टर का मानना है कि हथेली, उंगली और हाथों के पीछे का हिस्सा और नाखून को साबुन से धोएं.

    गर्मी की शुरूआत

    फरवरी महीने की शुरूआत को अभी सिर्फ दो दिन ही बीता है. लेकिन गर्मी जैसे अप्रैल का एहसास दिला रहा है. दिन के वक्त धूप इतनी तेज हो रही है कि आम इंसान धूप से आने के तुरंत बाद ठंडा पानी पी रहा है, जो नुकसान कर जा रहा है. क्या आप जानते हैं कि फरवरी में ठंडी-गर्मी के कारण शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है. आज हम आपको बताएंगे कि आप कैसे सर्द-गर्म मौसम में खुद को सुरक्षित रख सकते हैं.

    जनवरी भी था गर्म महीना?

    बता दें कि इस साल 2025 में जनवरी का महीना भी गर्म था. जी हां, जनवरी का महीना बीते छह सालों में सबसे गर्म रहा है, वहीं फरवरी की शुरुआत भी 15 सालों में सबसे गर्म रही है. हालांकि अभी मौसम बदलने का अनुमान है. लेकिन सुबह के वक्त थोड़ी ठंडी और दिन के वक्त गर्मी का शरीर पर बुरा असर पड़ता है.

    ऐसे रखें सेहत का ख्याल

    ऐसे मौसम में खाना खाने से पहले हाथ अच्छे से धोना चाहिए.
    वहीं दिन में गर्मी और रात में ठंडी में से आकर तुरंत पानी मत पिएं.
    इस मौसम में बाहरी फूड ना खाएं, घर का बना भोजन ही करें.
    गर्मी बढ़ने के साथ खुली चप्पल पहनना चाहिए, जिससे पैरों में संक्रमण नहीं फैलेगा.
    इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए रोज रात हल्दी वाला दूध पीना चाहिए.
    इस मौसम में कफ होने पर गुनगुना पानी पीना चाहिए.
    वहीं सुबह के वक्त एक दम खुली ठंडी हवा में नहीं जाना चाहिए.

    डॉक्टर से संपर्क

    ठंड-गर्म के कारण इस मौसम में कई बार खासकर के बच्चे और बूढ़ें संक्रमित होते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक इस इस मौसम में अगर दो दिन से अधिक तक बुखार,कफ या अन्य कोई संक्रमण का खतरा महसूस होता है, तो तुरंत अपने निजी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, इस दौरान अपनी सारी समस्याओं के बारे में बताना चाहिए, जिससे उचित समय पर परामर्श मिल सके.