Blog

  • ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी… अमेरिका ने पिटुफिक स्पेस बेस पर भेजा मिलिट्री एयरक्राफ्ट

    ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी… अमेरिका ने पिटुफिक स्पेस बेस पर भेजा मिलिट्री एयरक्राफ्ट


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की ग्रीनलैंड पर (Occupation of Greenland) कब्जा करने की धमकियों के बीच अब अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया जिससे तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका ने हाल ही में ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस (Pitufik Space Base) पर एक नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) विमान की तैनाती कर दी है। मिलिट्री एयरक्राफ्ट की तैनाती को लेकर अमेरिका का कहना है कि यह विमान अपने पुराने लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। अमेरिका ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई डेनमार्क और ग्रीनलैंड को बताकर की गई है।

    बता दें कि पिटुफिक स्पेस बेस एक अहम अमेरिकी मिलिट्री इंस्टॉलेशन और कम्युनिकेशन हब है। यहां एक मिसाइल वॉर्निंग सिस्टम भी है जो उत्तर अमेरिका की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। वहीं हाई आर्कटिक में इसकी लोकेशन को वजह से इस क्षेत्र में इसका अहम रणनीतिक महत्व है।

    अमेरिका से पहले डेनमार्क ने भी ग्रीनलैंड में अपनी मिलिट्री मौजूदगी बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को कई डेनिश सैनिकों और मिलिट्री उपकरणों को ले जाने वाले कई विमान द्वीप पर उतारे गए हैं। डेनिश रक्षा बलों ने बताया है कि देश की सेना प्रमुख के साथ सैनिकों की एक बड़ी टुकड़ी को नुक और कांगेरलुसुआक में तैनात किया गया है। इससे पहले यहां डेनिश सुरक्षा बलों के नेतृत्व में एक मल्टीनेशनल मिलिट्री एक्सरसाइज भी हुआ था।

    ट्रंप ने लगाया 10 फीसदी टैरिफ
    इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन पर 10 फीसदी अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। ट्रंप ने इन देशों द्वारा ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में ‘ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस’ नाम के एक सैन्य अभ्यास के तहत सैनिक तैनात करने के बाद यह कदम उठाया।

    नाटो देशों का कहना है कि यह तैनाती ग्रीनलैंड की स्वायत्तता के समर्थन के लिए की गई थी, खासकर उन रिपोर्टों के बाद, जिनमें दावा किया गया था कि ट्रंप प्रशासन संसाधन-समृद्ध इस आर्कटिक द्वीप को “राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों” से अपने अधीन करना चाहता है। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि यह आयात शुल्क एक फरवरी से लागू होगा और एक जून से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह शुल्क तब तक लागू रहेगा जब तक ग्रीनलैंड की पूर्ण और सम्पूर्ण खरीद को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता।

    यूरोपीय नेताओं ने प्रस्तावित आयात शुल्क की कड़ी निंदा की है और चेतावनी दी कि इस तरह के कदम अटलांटिक पार संबंधों को कमजोर कर सकते हैं और एक खतरनाक गिरावट के चक्र को जन्म दे सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेनमार्क के नेतृत्व वाला सैन्य अभ्यास आवश्यक सुरक्षा जरूरतों के जवाब में है और इससे किसी को कोई खतरा नहीं है।

  • भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत

    भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत


    नई दिल्ली।
    रूसी तेल (Russian oil), वेनेजुएला (Venezuela), ईरान में प्रदर्शन (Iran protests) और ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा हर थोड़े समय बाद इन मुद्दों से शेयर बाजार (Stock market) सहमे हैं। इन सबके बीच भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिल रही। हालांकि कुछ सेक्टर में गिरावट है, स्मॉल कैप और मिड कैप में मुनाफावसूली चल रही है लेकिन सूचकांक इस गिरावट को दर्शा नहीं रहे हैं। इस संबंध में बाजार विशेषज्ञ अनुज गुप्ता से सवाल किए गए। पेश हैं उनके जवाब-

    विदेशियों की तेज बिकवाली से भी बाजार क्यों नहीं टूटा?
    अब भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं है। घरेलू संस्थागत निवेशक-जैसे म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और ईपीएफओ लगातार खरीदारी कर रहे हैं। एसआईपी के जरिए बढ़ती रिटेल भागीदारी से हर महीने आने वाला स्थायी निवेश विदेशी बिकवाली की भरपाई कर देता है।

    क्या भारतीय शेयर बाजार अब घरेलू निवेशकों से चल रहा है?
    हां, काफी हद तक। पहले बाजार विदेश निवेशकों के मूड पर निर्भर रहता था, लेकिन अब घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ गई है। यही वजह है कि विदेशी बिकवाली का असर सीमित दिखता है। भारतीय बाजार का ढांचा बदल रहा है- देसी संस्थानों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड पर है, एसआईपी से रिटेल निवेश साल-दर-साल बढ़ रहा, बाजार में लंबी अवधि का पैसा ज्यादा आ रहा है।

    ज्यादातर शेयर गिर रहे हैं, फिर भी निफ्टी-सेंसेक्स क्यों टिके हैं?
    निफ्टी और सेंसेक्स कुछ बड़ी कंपनियों पर आधारित हैं। इन बड़े शेयरों का अधिमान इतना ज्यादा होता है कि अगर वे स्थिर रहें, तो सूचकांक भी स्थिर रहते हैं, चाहे बाकी शेयर गिर रहे हों। सूचकांकों की हकीकत यह है कि निफ्टी के शीर्ष 10 शेयरों का अधिमान 60% है, इसमें बैंक और आईटी सेक्टर का दबदबा है और छोटे शेयरों का असर सीमित है।

    सूचकांक में गड़बड़ी हो रही है?
    नहीं, इसे सूचकांक प्रबंधन कहना सही नहीं है। यह सूचकांकों की बनावट का असर है। कुछ गिने-चुने बड़े शेयर पूरे सूचकांकों की दिशा तय करते हैं। यह ‘खेल’ संभव नहीं है क्योंकि सूचकांकों के नियम तय और पारदर्शी होते हैं, उनका अधिमान पहले से निर्धारित है, कोई रोज इनके उतार-चढ़ाव को नियंत्रित नहीं कर सकता।

    तो क्या बाजार की असली हालत सूचकांक इंडेक्स नहीं दिखा रहे?
    पूरी तरह नहीं। सूचकांक दिशा दिखाते हैं, लेकिन अंदरूनी हालात नहीं। इस समय गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों से ज्यादा है, यानी बाजार के भीतर करेक्शन चल रहा है।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर ज्यादा क्यों टूट रहे हैं?
    इन शेयरों में पहले बहुत तेज तेजी आई थी। मूल्याकंन महंगे हो गए थे, इसलिए निवेशक अब मुनाफावसूली कर रहे हैं। साथ ही जोखिम से बचने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।

    खुदरा निवेशकों की भूमिका कितनी अहम है?
    बहुत अहम। करोड़ों रिटेल निवेशक एसआईपी के जरिए हर महीने निवेश कर रहे हैं। यह पैसा बाजार को स्थिरता देता है।

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम में स्नान से नहीं…. वाहन से जाने से रोका,,,प्रशासन ने दी सफाई

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम में स्नान से नहीं…. वाहन से जाने से रोका,,,प्रशासन ने दी सफाई


    प्रयागराज।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के प्रयागराज (Prayagraj) में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Avimukteshwaranand) को संगम जाने से रोके जाने को लेकर अब प्रशासन ने सफाई दी है। मेला प्राधिकरण के आईसीसीसी सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में अफसरों ने स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से नहीं रोका गया था, यह भ्रम फैलाया जा रहा है। उनसे वाहन से उतरकर स्नान के लिए पैदल जाने का अनुरोध किया गया था। तीन घंटे तक लगातार आग्रह करने के बाद भी वह अपनी जिद पर अड़े रहे। बिना अनुमति के मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) जैसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व की व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास किया।

    मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि मौनी अमावस्या से एक दिन पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दो वाहनों की अनुमति मांगी थी लेकिन मेला प्रशासन ने अत्यधिक भीड़ व सुरक्षा का हवाला देते हुए मना कर दिया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ पालकी पर सवार होकर संगम नोज के करीब तक पहुंच गए। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बताया कि पीपा पुल नंबर दो को एक दिन पहले से बंद रखा गया था। एएसपी कल्पवासी थाना प्रभारी ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों ने बैरिकेड तोड़ दिया। सीसीटीवी फुटेज के साक्ष्य के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। साधु-संतों की पिटाई के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी जांच कराई जाएगी।

    मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि मौनी स्नान पर्व पर किसी तरह के वाहन का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई थी। वहीं, डीएम मनीष वर्मा ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा प्राथमिकता थी। इसी कड़ी में अविमुक्तेश्वरानंद को वाहन लेकर संगम नोज तक जाने से रोका गया था। ताकि किसी तरह की भगदड़ की स्थिति उत्पन्न न हो सके।


    शंकराचार्य का प्रोटोकॉल देने पर है रोक: मेलाधिकारी

    मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्तूबर 2022 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के तहत प्रोटोकॉल देने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए मेला में उन्हें शंकराचार्य ज्योतिषपीठ नहीं बल्कि बद्रिका आश्रम सेवा शिविर के नाम पर जमीन आवंटित की गई है। प्रेसवार्ता के दौरान अफसर अविमुक्तेश्वरानंद को स्वामी के नाम से ही संबोधित करते रहे।

  • अवैध प्रवासन बनी चुनौती.. 5 साल में 81 देशों ने एक लाख से ज्यादा भारतीयों को किया डिपोर्ट

    अवैध प्रवासन बनी चुनौती.. 5 साल में 81 देशों ने एक लाख से ज्यादा भारतीयों को किया डिपोर्ट


    नई दिल्ली।
    अवैध प्रवासन (Illegal Migration) सभी देशों के लिए चुनौती बनी हुई है। कई देशों में यह राजनीतिक मुद्दा भी बना है। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के आंकड़े बताते हैं कि विदेशों में भारतीयों के अवैध रुप से प्रवासन (Illegal Migration of Indians) के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले पांच सालों के दौरान 81 देशों से एक लाख से भी ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट (Deport-वापस भेजना) किया गया है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। मौजूदा समय में औसतन 25 हजार भारतीय हर साल डिपोर्ट होकर आ रहे हैं। जबकि, पांच साल पहले तक यह संख्या 14-15 हजार के बीच होती थी।

    विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार दुनिया के तमाम छोटे बड़े देशों से भारतीयों को डिपोर्ट किया जा रहा है। यहां तक की बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, कंबोडिया से भी सैकड़ों भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है। 2021-2025 के दौरान करीब 1.05 लाख भारतीय वापस भेजे गए हैं।


    विदेशों से वापस भेजने के दो प्रमुख कारण

    विदेश मंत्रालय के अनुसार दो प्रमुख कारणों से डिपोर्ट किया जाता है। एक वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद अवैध रुप से रहने के कारण। दूसरे, बिना वर्क वीजा के किसी दूसरे देश में रोजगार करना। कुछ मामलों में छोटे-मोटे आपराधिक कृत्यों के कारण भी डिपोर्ट कर दिया जाता है। मंत्रालय के अनुसार पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा 68258 भारतीयों को सऊदी अरब से डिपोर्ट किया गया है। दूसरे नंबर पर अमेरिका से 7824 तथा मलेशिया से 6553 लोगों को डिपोर्ट किया गया।

    कुछ देशों से डिपोर्ट होने वालों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। 2021 में अमेरिका से 808 लोग डिपोर्ट हुए थे लेकिन 2025 में यह संख्या 3812 हो गई। यूएई से तब 358 डिपोर्ट हुए थे लेकिन 2025 में यह 1467 पहुंच गई। इसी प्रकार म्यांमार से डिपोर्ट होने वालों की संख्या 338 से बढ़कर 1591 हो गई। बहरीन से वापस भेजे गए भारतीय 273 से बढ़कर 764 तक हो गए। बांग्लादेश से 64 से 156, थाइलैंड से 256 से 481, मालदीव से 16 से 127, कंबोडिया से 44 से 305, कनाडा से 27 से 188 लोग भारत भेजे गए हैं।


    अमेरिका और खाड़ी देशों से सबसे अधिक भारतीय भेजे गए

    आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका, खाड़ी देशों के साथ-साथ यूरोप के छोटे देशों से भी बड़े पैमाने पर लोग डिपोर्ट होकर भारत आ रहे हैं। इनमें जार्जिया से 133, पनामा से 188, पोलेंड से 127, यूके से 578, म्यांमार से 2165, चीन से 1000, बांग्लादेश से 478, श्रीलंका से 1866 भारतीय पिछले पांच सालों में वापस भेजे गए हैं।

    अवैध प्रवासन चुनौती
    हालांकि सभी देश इस प्रकार के आंकड़ों को साझा नहीं करते हैं। विदेश मंत्रालय के ये आंकड़े अपने दूतावासों से मिले हैं। लेकिन डिपोर्ट होने वाले नागरिक चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका सभी के हैं। दरअसल, ज्यादातर मामले रोजगार से जुड़े हैं जिसके चलते में लोग गलत वीजा पर रोजगार करते हैं या वीजा खत्म होने के बाद भी काम करते रहते हैं।


    कैसे होते हैं डिपोर्ट

    यदि कोई भारतीय डिपोर्ट किया जाता है तो संबंधित देश भारत के दूतावास से संपर्क करता है। दूतावास उसकी नागरिकता की पुष्टि होने के बाद उसे भारत भेजने की अनुमति देता है। इसके लिए जरूरी दस्तावेज जारी किया जाता है।

  • US-भारत ट्रेड डील पर रोड़ा बन सकती है दाल… इंपोर्ट ड्यूटी लगाने से अमेरिका को लगी मिर्ची

    US-भारत ट्रेड डील पर रोड़ा बन सकती है दाल… इंपोर्ट ड्यूटी लगाने से अमेरिका को लगी मिर्ची


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और भारत (America and India) के बीच ट्रेड डील (Trade deal) एक बार फिर अटकती नजर आ रही है। इस बार इस डील के रास्ते में रोड़ा बनी है दाल। दो अमेरिकी सांसदों ने इसको लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को पत्र लिखा है। इसमें ट्रंप से कहा गया है कि वो भारत पर दबाव बनाएं कि अमेरिकी दालों (American pulses) के आयात से 30 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी (30 Percent Import Duty) हटाई जाए। अमेरिकी सांसदों ने भारत द्वारा लगाई गई इंपोर्ट ड्यूटी को गैर-जरूरी बताया गया है। साथ ही इनका यह भी कहना है कि इसकी वजह से अमेरिकी उत्पादकों को काफी नुकसान हो रहा है। बता दें कि भारत ने यह आयात शुल्क अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद लगाया है। आशंका है कि इसके चलते अमेरिका-भारत के बीच चल रही ट्रेड डील फिर पटरी से उतर सकती है।


    सांसदों के लेटर में क्या कहा गया

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह पत्र रिपब्लिकन सीनेटरों ने लिखे हैं। इनमें से एक हैं मोंटाना से स्टीव डेन्स और दूसरे हैं उत्तरी डकोटा से केविन क्रेमर। पत्र में कहा गया है कि उनके राज्य दो बड़े दाल उत्पादकों में से हैं, जिसमें मटर भी शामिल है। भारत इनका सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो विश्व का 27 फीसदी है। इसके मुताबिक भारत में लेंटिल्स, चिकपीज, सूखी दालों और मटर की सबसे ज्यादा खपत है। लेकिन भारत ने इन श्रेणियों में अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ लगा रखा है। अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत ने पिछले साल 30 अक्टूबर को पीली दाल पर भी 30 फीसदी टैरिफ लगा दिया।


    पीएम मोदी से बात करने की सलाह

    अमेरिकी सांसदों ने भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ को अनफेयर बताते हुए अमेरिकी दाल उत्पादकों को नुकसान होने की बात कही है। साथ ही अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को सलाह दी है कि वह दाल पर भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर पीएम मोदी से बात करें। ताकि दोनों देशों के बीच एक सहयोग बने, जिससे अमेरिकी उत्पादकों और भारतीय उपभोक्ताओं दोनों को फायदा मिल सके। दोनों सीनेटरों ने अपने राज्यों में बेहतर कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का शुक्रिया भी अदा किया।


    लंबे समय से तनाव

    बता दें कि टैरिफ के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव कायम है। इसकी शुरुआत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगाने के बाद हुई। इस टैरिफ में रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। इन तनावों के बीच अमेरिकी अधिकारियों द्वारा भारत के प्रति गलत टिप्पणियां माहौल को और खराब कर रही हैं। कुछ दिन पहले ही वाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि अमेरिका के नागरिक भारत में कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए भुगतान क्यों कर रहे हैं?

  • भारत दौरे पर आए UAE के राष्ट्रपति, PM मोदी ने गिफ्ट किया शाही झूला… साथ झूलते भी दिखे

    भारत दौरे पर आए UAE के राष्ट्रपति, PM मोदी ने गिफ्ट किया शाही झूला… साथ झूलते भी दिखे


    नई दिल्ली।
    एक दिन के भारत दौरे (India visit) पर आए यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान (UAE President Mohammed bin Zayed Al Nahyan) का एयरपोर्ट पर ही शानदार स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) प्रोटोकॉल तोड़कर उनकी अगुवाई करने दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे थे। दोनों नेता बेहद गर्मजोशी के साथ गले मिले। मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पारंपरिक तोहफे भी दिए।

    प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को शाही नक्काशीदार एक झूला गिफ्ट किया। इसमें गुजराती हस्तशिल्प की कलाकारी दिखाई देती है। इसके अलावा झूला अच्छे संबंधों और सहजता का प्रतीक है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चांदी की एक संदूक में पश्मीना शॉल भी नाहयान को गिफ्ट किया। यह चांदी का ब़क्स तेलंगाना में बनाया गया है। दोनों गिफ्ट एक साथ देकर भारत की साझी विरासत और परंपरा को दिखाने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नाहयान साथ में झूले पर बैठे भी नजर आए।

    यह उपहार वर्ष 2026 को संयुक्त अरब अमीरात द्वारा ‘परिवार का वर्ष’ घोषित किए जाने के संदर्भ में भी विशेष रूप से सार्थक है। प्रधानमंत्री ने उन्हें एक सुसज्जित चांदी के बॉक्स में पश्मीना शॉल भी भेंट की। यह पश्मीना शाल कश्मीर की है और अत्यंत महीन ऊन से हाथ से बनाई जाती है, जिससे यह मुलायम, हल्की और गर्म होती है। शाल को तेलंगाना में निर्मित एक सजावटी चांदी के बॉक्स में रखा गया है। ये दोनों उपहार मिलकर भारत की समृद्ध हथकरघा और हस्तशिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

    इसी प्रकार, सुसज्जित चांदी के बॉक्स में रखी गई पश्मीना शाल शेखा फातिमा बिंत मुबारक अल केतबी को भी भेंट की गई। उन्हें चांदी के बॉक्स में कश्मीरी केसर भी उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। कश्मीर घाटी में उगाया जाने वाला केसर अपने गहरे लाल रेशों और तीव्र सुगंध के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध और विशेष माना जाता है।

  • त्योहारों पर हवाई किराए में भारी वृद्धि को SC ने बताया 'शोषण', DGCA से मांगा जवाब

    त्योहारों पर हवाई किराए में भारी वृद्धि को SC ने बताया 'शोषण', DGCA से मांगा जवाब


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने त्योहारों के दौरान हवाई किराए (Airfares) में होने वाली अत्यधिक वृद्धि पर चिंता जताते हुए सोमवार को कहा कि वह इस संबंध में ‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’ को लेकर हस्तक्षेप करेगा। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए विमानन कंपनियों (Aviation companies) द्वारा हवाई किराए (Airfares) में अत्यधिक वृद्धि को ‘शोषण’ करार दिया और केंद्र सरकार तथा नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से अपना जवाब दाखिल करने को कहा। याचिका में निजी विमानन कंपनियों के हवाई किराए और अन्य शुल्कों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाध्यकारी नियामक दिशानिर्देशों का अनुरोध किया गया है।

    पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक से कहा, ‘हम निश्चित रूप से हस्तक्षेप करेंगे। कुंभ और अन्य त्योहारों के दौरान यात्रियों के शोषण को ही देख लीजिए। दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर के किराए पर नजर डालिए।’ न्यायमूर्ति मेहता ने अदालत में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि हो सकता है अहमदाबाद के हवाई किराए में वृद्धि न हुई हो, लेकिन जोधपुर जैसे अन्य गंतव्यों के लिए किराए में भारी वृद्धि हुई है।

    केंद्र की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए कौशिक द्वारा समय मांगे जाने के अनुरोध के बाद, शीर्ष अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 23 फरवरी की तारीख तय की।

    पिछले साल 17 नवंबर को, शीर्ष अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा था, जिन्होंने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक की स्थापना का अनुरोध किया। न्यायालय ने केंद्र सरकार, डीजीसीए और भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा है।

    याचिका में दावा किया गया कि सभी निजी विमानन कंपनियों ने बिना किसी ठोस वजह के ‘इकोनॉमी क्लास’ के यात्रियों के लिए मुफ्त ‘चेक-इन बैगेज’ 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दिया है, ‘जिससे पहले जो टिकट सेवा का हिस्सा था, उसे राजस्व के एक नए स्रोत में बदल दिया गया है।’ इसमें कहा गया है कि ‘चेक-इन के लिए केवल एक ही सामान की अनुमति देने की नई नीति और चेक-इन बैगेज का लाभ न उठाने वाले यात्रियों को किसी भी प्रकार की छूट, मुआवजा या लाभ न देना इस उपाय की मनमानी और भेदभावपूर्ण प्रकृति को दर्शाता है।’

    याचिका में दावा किया गया कि वर्तमान में, किसी भी प्राधिकरण के पास हवाई किराए या अन्य सहायक शुल्कों की समीक्षा करने या उन पर अंकुश लगाने की शक्ति नहीं है, जिससे विमानन कंपनियों को छिपे हुए शुल्कों और अप्रत्याशित मूल्य निर्धारण के माध्यम से उपभोक्ताओं का शोषण करने की अनुमति मिलती है। इसमें कहा गया है कि नियामकीय नियंत्रण के अभाव के कारण मनमाने ढंग से किराए में बढ़ोतरी होती है, खासकर त्योहारों या विशेष स्थिति में, जिससे गरीब और अंतिम समय में यात्रा का कार्यक्रम बनाने वाले यात्रियों को नुकसान होता है।

    याचिका में कहा गया है कि अमीर लोग पहले से योजना बना सकते हैं और टिकट बुक कर सकते हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को अत्यधिक कीमत पर टिकट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

  • सर्दी के मौसम में बारिश का अलर्ट… अगले तीन दिन इन राज्यों में गिर सकता है पानी

    सर्दी के मौसम में बारिश का अलर्ट… अगले तीन दिन इन राज्यों में गिर सकता है पानी

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir), पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) जैसे उत्तरी राज्यों (Northern States) में शीतलहर (Cold Wave) का प्रकोप जारी है। इस बीच कश्मीर, राजस्थान और कुछ अन्य क्षेत्रों में तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) में आज सुबह धुंध छाई है। राजस्थान में तापमान में वृद्धि होने लगी है और अब अधिकतर शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। राज्य की राजधानी जयपुर में न्यूनतम तापमान 13.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कश्मीर घाटी में भीषण ठंड की 40 दिनों की अवधि चिल्लई कलां के बीच न्यूनतम तापमान में कुछ डिग्री की वृद्धि होने से लोगों को थोड़ी राहत मिली। शोपियां और पुलवामा शहरों में न्यूनतम तापमान क्रमशः शून्य से 4.7 डिग्री कम और शून्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया।

    जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 20 से 21 जनवरी तक छिटपुट बारिश/बर्फबारी की संभावना है। हिमालयी क्षेत्र में 22 से 24 जनवरी तक भारी वर्षा और बर्फबारी होने की उम्मीद है, जो 25 जनवरी को कम तीव्र होगी। कश्मीर घाटी में 22-23 जनवरी, हिमाचल के ऊंचे इलाकों में 23 जनवरी को अलग-अलग स्थानों पर भारी बर्फबारी हो सकती है। पंजाब में 22 से 25 जनवरी तक छिटपुट से मध्यम वर्षा संभावित है। हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 22-25 जनवरी, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 23-24 जनवरी और राजस्थान में 22-23 जनवरी को छिटपुट वर्षा की संभावना है। 22-23 जनवरी को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में 30-40 किमी/घंटा की हवाएं चल सकती हैं।


    तापमान में कितना आएगा बदलाव

    उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 3 दिनों तक न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, उसके बाद 2 दिनों में 2-4°C की वृद्धि और फिर 2 दिनों में 2-3°C की गिरावट संभावित है। महाराष्ट्र में अगले 3 दिनों में न्यूनतम तापमान 2-4°C बढ़ सकता है, उसके बाद कोई खास बदलाव नहीं होगा। देश के अन्य हिस्सों में न्यूनतम तापमान स्थिर रहेगा। 20 जनवरी तक पंजाब के कुछ इलाकों में सुबह-रात बहुत घना कोहरा छाएगा, 21 जनवरी को घना कोहरा रहेगा। हरियाणा, चंडीगढ़, बिहार में 21 जनवरी तक और उत्तर प्रदेश में 20 जनवरी तक घना कोहरा संभावित है। हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में 20-21 जनवरी को शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी।


    पंजाब और हरियाणा में कैसा है मौसम

    पंजाब और हरियाणा के भी कई स्थानों पर शीतलहर का प्रकोप है। अमृतसर सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री कम है। फरीदकोट में न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस, लुधियाना में 4.6 डिग्री, पठानकोट में 4.7 डिग्री, फिरोजपुर में 5.7 डिग्री, होशियारपुर में 5.9 डिग्री, पटियाला में 6.5 डिग्री और गुरदासपुर में 6.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हरियाणा में भिवानी सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान तीन डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गुरुग्राम में न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री, नारनौल में 6 डिग्री, करनाल में 6.4 डिग्री और अंबाला में 7.8 डिग्री सेल्सियस रहा। दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में भी रात ठंडी रही और न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री कम है।

    शिमला स्थित मौसम केंद्र ने हिमाचल प्रदेश में शीतलहर की स्थिति बनी रहने की संभावना जताई है। मौसम केंद्र ने मंगलवार के लिए 5 जिलों (कांगड़ा, मंडी, ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर) के अलग-अलग इलाकों में भीषण ठंड का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार तक मौसम शुष्क बना रहेगा, लेकिन एक और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के जल्दी आने के कारण गुरुवार से शनिवार के बीच राज्य में फिर से बर्फबारी और बारिश का नया दौर देखने को मिल सकता है। इस पश्चिमी विक्षोभ के बुधवार से ही उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना है। विभाग ने गुरुवार और शुक्रवार के लिए कई जिलों में यलो अलर्ट भी जारी किया है, जिसमें राज्य के अलग-अलग स्थानों पर भारी बर्फबारी और बारिश की चेतावनी दी गई है।

  • MP: भोजशाला में बसंत पंचमी की तैयारियां तेज…कमिश्नर-आईजी पहुंचे धार, दोनों पक्षों से की बात

    MP: भोजशाला में बसंत पंचमी की तैयारियां तेज…कमिश्नर-आईजी पहुंचे धार, दोनों पक्षों से की बात


    धार।
    आगामी बसंत पंचमी (Basant Panchami) को लेकर मध्य प्रदेश के धार के भोजशाला (Bhojshala, Dhar) क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इंदौर कमिश्नर और आईजी (Commissioner and IG) ने हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों के साथ बैठक की। बताया जाता है कि इंदौर कमिश्नर डॉ. सुदामा खंडे और आईजी इंदौर अनुराग सिंह सोमवार को धार पहुंचे और सर्किट हाउस में हिन्दू-मुस्लिम समाज (Hindu-Muslim society) के प्रतिनिधि मंडलों से अलग-अलग बंद कमरे में चर्चा की।


    दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ बात

    बताया जाता है कि बैठक में हिंदू समाज की ओर से गोपाल शर्मा और अशोक जैन मौजूद रहे जबकि मुस्लिम समाज की ओर से शहर काजी वकार सादिक, हाजी मुजीब कुरेशी, सोहेल निसार, जावेद अंजुम साहब एवं सदर अब्दुल समद समेत कुल 8 प्रतिनिधि मौजूद रहे।


    क्या बोला हिन्दू पक्ष?

    भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने बताया कि प्रशासन के साथ उनकी बातचीत बेहद सकारात्मक रही। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि मां सरस्वती की पूजा सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड रूप से होगी। उनके पास पूर्व का आदेश मौजूद है जिसे ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को सौंप दिया गया है। बाद में जोड़े गए सप्लीमेंट्री आदेश से उनका कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूजा के समय मंदिर और परिसर पूरी तरह खाली रखा जाना चाहिए।


    मुस्लिम पक्ष ने क्या कहा?

    वहीं इस बैठक के बाद मुस्लिम समाज सदर अब्दुल समद ने संवाददाताओं से कहा कि पहले भी मुस्लिम समाज ने प्रशासन का सहयोग किया है। मुस्लिम समाज का रुख साफ है कि नमाज पढ़ी जाएगी लेकिन वह सांकेतिक और सीमित संख्या में होगी। सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने शांति बनाए रखने और भ्रामक गतिविधियों पर रोक लगाने की अपील की।


    क्या बोले आईजी?

    आईजी अनुराग सिंह ने दोनों पक्षों के साथ बैठक के बाद कहा कि बातचीत बहुत शांतिपूर्ण और सुखद माहौल में हुई है। प्रशासन दोनों पक्षों द्वारा रखे गए सुझावों पर गंभीरता से विचार करके ही अगला कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि किसी भी हाल में शहर का माहौल बिगड़ने नहीं दिया जाएगा और सुरक्षा के लिए हर जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। वर्तमान में प्रशासन और समाज के लोग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के आने वाले नए आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

  • Dolly Bindra Birthday: 18 साल की उम्र में किया डॉली बिंद्रा ने डेब्यू, विवादों से रहा है गहरा नाता

    Dolly Bindra Birthday: 18 साल की उम्र में किया डॉली बिंद्रा ने डेब्यू, विवादों से रहा है गहरा नाता


    नई दिल्ली। बॉलीवुड और टेलीविजन में अक्सर विलेन की भूमिका पुरुष कलाकार निभाते नजर आते हैं लेकिन कुछ अभिनेत्रियां ऐसी भी हैं जिन्होंने नेगेटिव किरदारों से खास पहचान बनाई। इन्हीं में एक नाम है डॉली बिंद्रा। अपनी तेज आवाज दमदार अंदाज और बेबाक बयानों के लिए मशहूर डॉली बिंद्रा का जन्म 20 जनवरी 1970 को पंजाब में हुआ था। इस साल वह अपना 56वां जन्मदिन मना रही हैं।डॉली बिंद्रा ने महज 18 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने कई फिल्मों और टेलीविजन सीरियल्स में काम किया। भले ही उन्हें ज्यादातर साइड रोल या निगेटिव किरदार मिले लेकिन अपनी दमदार अदाकारी से उन्होंने इंडस्ट्री में अलग पहचान बना ली। फिल्मों और टीवी से ज्यादा डॉली अपने विवादित बयानों और झगड़ों को लेकर सुर्खियों में रहीं।

    डॉली बिंद्रा पर कई बार गाली-गलौज और बदसलूकी के आरोप लगे हैं। साल 2014 में मुंबई के मलाड इलाके में रहने के दौरान सोसाइटी के लोगों ने उन पर अपशब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं एक जिम कर्मचारी को धमकाने और उसके साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप भी सामने आए थे जिसने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया।डॉली बिंद्रा का नाम राधे मां विवाद से भी जुड़ा रहा है। एक समय वह राधे मां के बेहद करीब मानी जाती थीं और उनके सत्संगों में अक्सर नजर आती थीं। लेकिन साल 2015 में डॉली ने राधे मां पर गंभीर आरोप लगाए। डॉली का कहना था कि उनसे एक अजनबी के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया था। उस समय डॉली ने #MeToo मूवमेंट का जिक्र करते हुए अपने अनुभव को सार्वजनिक किया था जिसने काफी हलचल मचा दी थी।

    डॉली बिंद्रा को सबसे ज्यादा पहचान मिली टेलीविजन के चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस 4 से। वह शो में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट बनकर आई थीं लेकिन थोड़े ही समय में अपनी आक्रामक भाषा और झगड़ों के कारण लाइमलाइट में आ गईं। घर के अंदर उनका कई कंटेस्टेंट्स से विवाद हुआ लेकिन सबसे बड़ा टकराव भोजपुरी अभिनेता और नेता मनोज तिवारी के साथ देखने को मिला। दोनों के बीच हुई तीखी बहस आज भी बिग बॉस के यादगार पलों में गिनी जाती है।

    डॉली बिंद्रा का करियर जितना रंगीन रहा उतना ही विवादों से भरा भी रहा। वह भले ही आज फिल्मों और टीवी से दूर हों लेकिन अपने पुराने बयानों और किस्सों की वजह से अक्सर चर्चा में बनी रहती हैं।बॉलीवुड और टेलीविजन में अक्सर विलेन की भूमिका पुरुष कलाकार निभाते नजर आते हैं लेकिन कुछ अभिनेत्रियां ऐसी भी हैं जिन्होंने नेगेटिव किरदारों से खास पहचान बनाई। इन्हीं में एक नाम है डॉली बिंद्रा। अपनी तेज आवाज दमदार अंदाज और बेबाक बयानों के लिए मशहूर डॉली बिंद्रा का जन्म 20 जनवरी 1970 को पंजाब में हुआ था। इस साल वह अपना 56वां जन्मदिन मना रही हैं।

    डॉली बिंद्रा ने महज 18 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने कई फिल्मों और टेलीविजन सीरियल्स में काम किया। भले ही उन्हें ज्यादातर साइड रोल या निगेटिव किरदार मिले लेकिन अपनी दमदार अदाकारी से उन्होंने इंडस्ट्री में अलग पहचान बना ली। फिल्मों और टीवी से ज्यादा डॉली अपने विवादित बयानों और झगड़ों को लेकर सुर्खियों में रहीं।डॉली बिंद्रा पर कई बार गाली-गलौज और बदसलूकी के आरोप लगे हैं। साल 2014 में मुंबई के मलाड इलाके में रहने के दौरान सोसाइटी के लोगों ने उन पर अपशब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं एक जिम कर्मचारी को धमकाने और उसके साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप भी सामने आए थे जिसने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया।

    डॉली बिंद्रा का नाम राधे मां विवाद से भी जुड़ा रहा है। एक समय वह राधे मां के बेहद करीब मानी जाती थीं और उनके सत्संगों में अक्सर नजर आती थीं। लेकिन साल 2015 में डॉली ने राधे मां पर गंभीर आरोप लगाए। डॉली का कहना था कि उनसे एक अजनबी के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया था। उस समय डॉली ने #MeToo मूवमेंट का जिक्र करते हुए अपने अनुभव को सार्वजनिक किया था जिसने काफी हलचल मचा दी थी।

    डॉली बिंद्रा को सबसे ज्यादा पहचान मिली टेलीविजन के चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस 4 से। वह शो में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट बनकर आई थीं लेकिन थोड़े ही समय में अपनी आक्रामक भाषा और झगड़ों के कारण लाइमलाइट में आ गईं। घर के अंदर उनका कई कंटेस्टेंट्स से विवाद हुआ लेकिन सबसे बड़ा टकराव भोजपुरी अभिनेता और नेता मनोज तिवारी के साथ देखने को मिला। दोनों के बीच हुई तीखी बहस आज भी बिग बॉस के यादगार पलों में गिनी जाती है।डॉली बिंद्रा का करियर जितना रंगीन रहा उतना ही विवादों से भरा भी रहा। वह भले ही आज फिल्मों और टीवी से दूर हों लेकिन अपने पुराने बयानों और किस्सों की वजह से अक्सर चर्चा में बनी रहती हैं।