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  • टाइगर श्रॉफ, एल्विश यादव और अभिषेक बनर्जी पहली बार एक साथ आएंगे नजर, रेमो डिसूजा करेंगे एक्शन फिल्म का निर्देशन

    टाइगर श्रॉफ, एल्विश यादव और अभिषेक बनर्जी पहली बार एक साथ आएंगे नजर, रेमो डिसूजा करेंगे एक्शन फिल्म का निर्देशन

    नई दिल्ली । अभिनेता टाइगर श्रॉफ एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक्शन अवतार में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार हैं। उनकी आगामी फिल्म को लेकर आधिकारिक घोषणा हो चुकी है, जिसमें उनके साथ पहली बार डिजिटल क्रिएटर एल्विश यादव और अभिनेता अभिषेक बनर्जी भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्मकार और कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा करेंगे, जबकि फिल्म का निर्माण विकी जैन अपने प्रोडक्शन बैनर के तहत करेंगे। कलाकारों और निर्माण टीम की घोषणा के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है।

    यह फिल्म कई मायनों में खास मानी जा रही है। पहली बार टाइगर श्रॉफ और एल्विश यादव किसी फीचर फिल्म में एक साथ स्क्रीन साझा करेंगे। वहीं अपनी अलग अभिनय शैली के लिए पहचाने जाने वाले अभिषेक बनर्जी भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। तीनों कलाकारों की अलग-अलग पृष्ठभूमि और लोकप्रियता को देखते हुए फिल्म से एक नया सिनेमाई अनुभव मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। निर्माता और निर्देशक का मानना है कि यह संयोजन दर्शकों के लिए मनोरंजन और एक्शन का नया मिश्रण पेश करेगा।

    निर्माता के रूप में यह विकी जैन की पहली फिल्म होगी। लंबे समय से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा रखने वाले विकी जैन ने इसी प्रोजेक्ट के साथ अपने प्रोडक्शन सफर की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सिनेमा हमेशा से उनके लिए प्रेरणा का माध्यम रहा है और पहली ही फिल्म में अनुभवी कलाकारों तथा मजबूत रचनात्मक टीम के साथ काम करना उनके लिए उत्साह का विषय है। उनका विश्वास है कि यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी।

    निर्देशक रेमो डिसूजा ने भी इस प्रोजेक्ट को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जाएगा और इसमें एक्शन के साथ मनोरंजन का संतुलित मेल देखने को मिलेगा। रेमो के अनुसार टाइगर श्रॉफ की एक्शन क्षमता, अभिषेक बनर्जी की अभिनय प्रतिभा और एल्विश यादव की लोकप्रियता फिल्म को अलग पहचान देने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि फिल्म की कहानी और प्रस्तुति को आधुनिक दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

    फिल्म का आधिकारिक शीर्षक अभी सामने नहीं आया है, लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार यह हाई-ऑक्टेन एक्शन पर आधारित होगी। निर्माण टीम जल्द ही शूटिंग शेड्यूल, अन्य कलाकारों और रिलीज से जुड़ी जानकारियां साझा कर सकती है। फिलहाल फिल्म की स्टार कास्ट की घोषणा ने मनोरंजन जगत में चर्चा तेज कर दी है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    टाइगर श्रॉफ के लिए यह प्रोजेक्ट विशेष महत्व रखता है। पिछले कुछ समय में उनकी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है, ऐसे में यह नई एक्शन फिल्म उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। दूसरी ओर, एल्विश यादव के लिए भी यह बड़े पर्दे पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का अहम कदम होगा। वहीं अभिषेक बनर्जी अपने अलग अंदाज के अभिनय से फिल्म को और मजबूत बनाने की कोशिश करेंगे।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि लोकप्रिय कलाकारों, अनुभवी निर्देशक और एक्शन प्रधान कहानी का यह संयोजन दर्शकों के बीच अच्छी उत्सुकता पैदा कर चुका है। यदि निर्माण और प्रस्तुति उम्मीदों के अनुरूप रही, तो यह फिल्म आने वाले समय की चर्चित एक्शन फिल्मों में अपनी जगह बना सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें फिल्म के शीर्षक, शूटिंग की शुरुआत और रिलीज से जुड़ी अगली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं।

  • जुलाई की तेज बारिश भी नहीं कर पाई भरपाई, एमपी के ज्यादातर डैम आधे खाली, 43 जिलों में कम बारिश

    जुलाई की तेज बारिश भी नहीं कर पाई भरपाई, एमपी के ज्यादातर डैम आधे खाली, 43 जिलों में कम बारिश


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद के अनुरूप नहीं रही है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई तेज बारिश के बावजूद जून में हुई कमी की भरपाई नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका सबसे बड़ा असर जलाशयों और बांधों पर दिखाई दे रहा है, जहां अधिकांश बड़े डैम आधे भी नहीं भर पाए हैं। यदि अगस्त में अच्छी बारिश नहीं हुई तो प्रदेश के कई हिस्सों में जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।

    भारतीय मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 15.7 इंच बारिश दर्ज हुई है, जबकि इस अवधि तक सामान्य वर्षा 18.1 इंच होनी चाहिए थी। यानी करीब 2.4 इंच की कमी बनी हुई है। प्रदेश के 55 जिलों में से 43 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि पांच जिलों में तो 10 इंच से भी कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। सबसे कम बारिश मुरैना में केवल 6.3 इंच दर्ज हुई है।

    कम बारिश का असर प्रदेश के प्रमुख जलाशयों पर साफ दिखाई दे रहा है। कोलार, बाणसागर, बरना, कुंडालिया, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, गांधीसागर और तिघरा जैसे बड़े बांध अभी तक आधे भी नहीं भर पाए हैं। पिछले वर्ष जुलाई के अंत तक अधिकांश जलाशय लगभग भर चुके थे और कई डैमों के गेट भी खोलने पड़े थे, लेकिन इस बार केवल बैतूल स्थित सतपुड़ा डैम के सात गेट ही खोले गए हैं। जलाशयों में पानी कम होने के कारण कई शहरों में नियमित जलापूर्ति भी प्रभावित होने लगी है।

    कृषि क्षेत्र पर भी मानसून की स्थिति का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। शाजापुर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एस.एस. धाकड़ के अनुसार वर्तमान मौसम सोयाबीन की फसल के लिए अनुकूल है क्योंकि अभी हल्की और मध्यम बारिश फसल के विकास में मददगार है। हालांकि दाना बनने के समय अधिक पानी की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर खंडवा, खरगोन और बड़वानी जैसे जिलों में भारी बारिश के कारण खेतों में जलभराव हुआ है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं धान की खेती के लिए अब भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है।

    इस वर्ष मानसून भी प्रदेश में सामान्य से नौ दिन देरी से पहुंचा था। 24 जून को इसकी एंट्री हुई और अगले नौ दिनों में पूरे प्रदेश को कवर किया। शुरुआती देरी के कारण जून में वर्षा 30 प्रतिशत तक कम रही। जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति सुधरी और औसत वर्षा सामान्य से आठ प्रतिशत अधिक हो गई थी, लेकिन दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ गया। तीसरे और चौथे सप्ताह में तेज बारिश जरूर हुई, फिर भी शुरुआती कमी पूरी नहीं हो सकी।

    प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा बालाघाट जिले में करीब 24 इंच दर्ज की गई है, जबकि वर्षा प्रतिशत के लिहाज से बुरहानपुर सबसे आगे है, जहां सामान्य कोटे का लगभग 77 प्रतिशत पानी बरस चुका है। सीहोर, देवास, डिंडौरी और सिवनी जैसे जिलों में भी 20 इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड हुई है। दूसरी ओर मुरैना, दतिया, श्योपुर, रीवा और अलीराजपुर जैसे जिलों में बारिश का आंकड़ा 10 इंच से भी नीचे बना हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त के पहले सप्ताह में भारी बारिश का दौर कुछ समय के लिए थमा है, लेकिन अगले सप्ताह से प्रदेश में फिर सक्रिय मानसून की संभावना है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो जलाशयों में पानी बढ़ने के साथ किसानों और आम लोगों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल प्रदेश की नजरें अगस्त की बारिश पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही आने वाले महीनों में पेयजल उपलब्धता, सिंचाई और खरीफ फसलों की स्थिति तय करेगी।

  • हरियाली तीज 2026 की तिथि को लेकर दूर हुआ भ्रम, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत और होगी शिव-पार्वती की पूजा

    हरियाली तीज 2026 की तिथि को लेकर दूर हुआ भ्रम, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत और होगी शिव-पार्वती की पूजा

    नई दिल्ली । सावन मास के प्रमुख पर्वों में शामिल हरियाली तीज वर्ष 2026 में 15 अगस्त, शनिवार को मनाई जाएगी। इस पर्व को लेकर तृतीया तिथि दो दिनों में पड़ने के कारण कई लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि हिंदू पंचांग के अनुसार उदया तिथि के आधार पर 15 अगस्त को ही हरियाली तीज का व्रत और पूजा करना शास्त्रसम्मत माना गया है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करेंगी, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।

    पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 को शाम 6 बजकर 46 मिनट पर आरंभ होगी और 15 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि 15 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदया तिथि के नियम के अनुसार इसी दिन हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में अधिकांश व्रत और त्योहार सूर्योदय के समय प्रभावी तिथि के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं, इसलिए इस वर्ष भी 15 अगस्त की तिथि को अंतिम मान्यता प्राप्त है।

    हरियाली तीज के दिन कई शुभ योग और पूजा के अनुकूल मुहूर्त भी बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 50 मिनट से 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जिसे पूजा और साधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से 1 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से 3 बजकर 42 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 6 मिनट से 7 बजकर 29 मिनट तक तथा अमृत काल रात 8 बजकर 18 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इन शुभ समयों में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करना विशेष फलदायी माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज का व्रत अत्यंत कठिन और पुण्यदायी माना जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करती हैं। सामान्यतः हरे और लाल रंग को इस पर्व के लिए शुभ माना जाता है, जबकि काले, सफेद और भूरे रंग के वस्त्र पहनने से बचने की परंपरा है। पूजा के दौरान शिव-पार्वती का विधिवत पूजन, सुहाग सामग्री का अर्पण, कथा श्रवण और व्रत का संकल्प किया जाता है। कई परंपराओं में निर्जला व्रत का भी विधान बताया गया है और निर्धारित समय से पहले व्रत का पारण नहीं किया जाता।

    हरियाली तीज केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और सामाजिक संबंधों का भी महत्वपूर्ण पर्व है। इस अवसर पर विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, झूला झूलती हैं और सावन के पारंपरिक गीत गाकर उत्सव मनाती हैं। कई क्षेत्रों में मायके से विवाहित बेटियों के लिए सिंधारा भेजने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे स्नेह, सम्मान और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।

    धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इसी कारण हरियाली तीज का व्रत वैवाहिक सुख, प्रेम, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा, नियम और विधि-विधान के साथ किया गया यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है तथा सावन मास के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में इसकी विशेष धार्मिक मान्यता है।

  • रक्षाबंधन 2026 की तिथि को लेकर दूर हुआ भ्रम, 28 अगस्त को शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा भाई-बहन का पावन पर्व

    रक्षाबंधन 2026 की तिथि को लेकर दूर हुआ भ्रम, 28 अगस्त को शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा भाई-बहन का पावन पर्व

    नई दिल्ली । भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आजीवन सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व वर्ष 2026 में 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। सावन पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस महत्वपूर्ण सनातन पर्व को लेकर इस बार तिथि और भद्रा काल के कारण लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि पंचांग के अनुसार उदया तिथि के आधार पर 28 अगस्त को ही रक्षाबंधन मनाना शास्त्रसम्मत और शुभ माना गया है। यही कारण है कि ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य भी इसी दिन पर्व मनाने की सलाह दे रहे हैं।

    हिंदू पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 9 मिनट पर होगा और इसका समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर होगा। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए धार्मिक परंपरा के अनुसार इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। सनातन धर्म में अधिकांश प्रमुख पर्व उदया तिथि के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं, इसलिए इस वर्ष भी 28 अगस्त को ही मान्यता दी गई है।

    रक्षाबंधन पर शुभ मुहूर्त में राखी बांधने का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार बहनें 28 अगस्त को सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं। यह अवधि अत्यंत शुभ मानी गई है। इस दौरान पूजा-अर्चना, तिलक, आरती और रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा का पालन करना मंगलकारी माना जाता है। जो लोग किसी कारणवश इस समय में राखी नहीं बांध पाते, उनके लिए अभिजीत मुहूर्त भी उपलब्ध रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, जिसे भी शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।

    रक्षाबंधन पर भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान रक्षा सूत्र बांधना उचित नहीं माना जाता। वर्ष 2026 में 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। यही कारण है कि इस दिन राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है। राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को भद्रा का प्रभाव समाप्त हो चुका होगा, जिससे पूरे विधि-विधान और शुभ मुहूर्त में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकेगा।

    रक्षाबंधन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में पारिवारिक मूल्यों, विश्वास और स्नेह का भी प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों की हर परिस्थिति में रक्षा करने और जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लेते हैं। यही भावनात्मक रिश्ता इस पर्व को भारतीय समाज में विशेष महत्व प्रदान करता है।

    रक्षाबंधन से जुड़ी कई धार्मिक और ऐतिहासिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध प्रसंग महाभारत काल का माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण की उंगली घायल होने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। द्रौपदी के इस स्नेह और समर्पण से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया और बाद में संकट की घड़ी में उस वचन को निभाया। यही प्रसंग भाई-बहन के अटूट विश्वास, प्रेम और सुरक्षा के भाव का प्रतीक माना जाता है। इसी संदेश के साथ रक्षाबंधन का पर्व आज भी पूरे देश में श्रद्धा, उल्लास और पारिवारिक एकता के वातावरण में मनाया जाता है।

  • एमपी में कलेक्टरों की होगी ग्राउंड रिपोर्ट, शिकायतों के समाधान से लेकर विकास तक हर पैमाने पर होगी रैंकिंग

    एमपी में कलेक्टरों की होगी ग्राउंड रिपोर्ट, शिकायतों के समाधान से लेकर विकास तक हर पैमाने पर होगी रैंकिंग


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। 7 अगस्त से शुरू होने वाला मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान केवल जनता की समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रदेश के सभी 55 कलेक्टरों के प्रदर्शन की असली परीक्षा भी बनेगा। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि इस अभियान के दौरान तैयार होने वाली जिलों की रैंकिंग भविष्य में कलेक्टरों की पोस्टिंग, बड़े जिलों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक महत्व तय करने का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

    मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने हाल ही में सभी कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर अभियान की रूपरेखा स्पष्ट की। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। यह अभियान 7 अगस्त से शुरू होकर 8 जनवरी तक चलेगा और इस दौरान प्रशासन की कार्यशैली का व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि कलेक्टरों का मूल्यांकन केवल शिकायतों के निपटारे की संख्या के आधार पर नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि शिविरों, जनसंवाद कार्यक्रमों और फील्ड विजिट के बाद संबंधित क्षेत्र में लंबित शिकायतों में वास्तव में कितनी कमी आई। इसके साथ ही यह भी परखा जाएगा कि आम नागरिकों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ और जिले में आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए प्रशासन ने कितना प्रभावी काम किया।

    मूल्यांकन के प्रमुख पैमानों में लोक सेवा प्रदाय व्यवस्था, शिकायतों के त्वरित समाधान, विभागीय समन्वय, आर्थिक विकास की रफ्तार और जनता के बीच प्रशासन की स्वीकार्यता शामिल रहेगी। सरकार कलेक्टरों की संवेदनशीलता और आम लोगों के साथ उनके व्यवहार को भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएगी। यानी केवल फाइलों में उपलब्ध आंकड़े ही नहीं, बल्कि जमीनी असर भी परखा जाएगा।

    अभियान के दौरान प्रत्येक शुक्रवार को विकासखंड और क्लस्टर स्तर तक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार रोस्टर तैयार होगा और जनसंवाद शिविरों में मिलने वाले नए आवेदनों का पंजीयन कर अगली यात्रा से पहले उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। यदि कोई मामला जिला स्तर पर हल नहीं हो सकता तो उसे संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या विभागाध्यक्ष के साथ समन्वय स्थापित कर समयबद्ध तरीके से निपटाया जाएगा।

    सरकार ने विभाग प्रमुखों को भी सक्रिय भूमिका सौंपी है। सभी विभागाध्यक्ष अपने-अपने विभागों की संस्थाओं के निरीक्षण के लिए मानक प्रारूप तैयार करेंगे, जबकि संभागायुक्त नियमित रूप से जिलों का दौरा कर अभियान की निगरानी करेंगे। साथ ही विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी जिलों में पहुंचकर निरीक्षण, समीक्षा और जनसंवाद कार्यक्रमों में भाग लेंगे। जहां मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव स्वयं दौरा करेंगे, वहां पूरे जिले की व्यापक समीक्षा के साथ ऑनलाइन समाधान कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

    जनविश्वास अभियान के तहत उद्योग और रोजगार को भी प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय कुटीर उद्योगों, एमएसएमई इकाइयों और उद्यमियों के साथ संवाद कर लाइसेंस, एनओसी, लोक सेवा गारंटी और अन्य प्रशासनिक अड़चनों का समाधान किया जाएगा, ताकि आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके।

    राज्य सरकार का उद्देश्य केवल प्रशासनिक निगरानी करना नहीं, बल्कि ऐसा प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार करना है, जिसमें प्रत्येक जिला बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रयास करे। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो मध्य प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और जनसेवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। जनविश्वास अभियान इस लिहाज से प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल साबित हो सकता है।

  • मस्जिद में नौकरी का सपना टूटा, 40 कमरों के टॉयलेट साफ कराए, भारतीय दूतावास ने कराई वतन वापसी

    मस्जिद में नौकरी का सपना टूटा, 40 कमरों के टॉयलेट साफ कराए, भारतीय दूतावास ने कराई वतन वापसी


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के दीवानगंज निवासी मोहम्मद फैजान बेहतर भविष्य और धार्मिक सेवा का सपना लेकर ओमान गए थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी एक दर्दनाक संघर्ष में बदल गई। मस्जिद में इमामत कराने का वादा करने वाले एजेंट ने उन्हें विदेश तो भेज दिया, लेकिन वहां उनसे धार्मिक कार्य की जगह 30 से 40 कमरों वाले सरकारी कार्यालय में टॉयलेट साफ कराने, बर्तन धुलवाने और सफाई का काम कराया गया। कई दिनों तक भूखे रहकर 14 से 15 घंटे मजदूरी करने को मजबूर फैजान आखिरकार भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की मदद से करीब ढाई महीने बाद अपने घर लौट सके।

    फैजान ने बताया कि जनवरी 2026 में उनकी मुलाकात एक एजेंट से हुई थी। एजेंट ने भरोसा दिलाया कि ओमान की एक मस्जिद में उन्हें इमाम के रूप में नियुक्त किया जाएगा। शुरुआत में 20 हजार रुपए लिए गए और बाद में मेडिकल व अन्य औपचारिकताओं के नाम पर कुल मिलाकर करीब दो लाख रुपए वसूल लिए गए। परिवार ने बड़ी मुश्किल से यह रकम जुटाई और 4 मई 2026 को फैजान ओमान के मस्कट पहुंच गए।

    मस्कट पहुंचने के बाद उन्हें दो-तीन दिन कंपनी के पास रखा गया, लेकिन जल्द ही सच्चाई सामने आ गई। जिस धार्मिक सेवा के लिए उन्हें भेजा गया था, उसकी जगह उन्हें एक मंत्रालय के कार्यालय में सफाई कर्मचारी बना दिया गया। रोजाना दर्जनों कमरों, टॉयलेट, बाथरूम और बर्तनों की सफाई कराई जाती थी। लंबे समय तक लगातार 14 से 15 घंटे काम लेने के बावजूद न तो उन्हें वेतन दिया गया और न ही भोजन की पर्याप्त व्यवस्था की गई।

    फैजान के मुताबिक जब भी उन्होंने वेतन या खाने के लिए पैसे मांगे तो कंपनी हर बार टालती रही। धीरे-धीरे उनके पास मौजूद सारी रकम खत्म हो गई। कई बार लगातार चार-चार दिन तक उन्हें बिना भोजन के रहना पड़ा। ऐसे कठिन समय में कंपनी ने कोई मदद नहीं की, बल्कि वहां रहने वाले कुछ भारतीय नागरिक उनके सहारा बने। मस्कट में रहने वाले नवाब भाई ने उन्हें खाने के लिए पैसे दिए, जबकि मोहम्मद खलील अहमद ने लगभग डेढ़ महीने तक अपने घर में रखकर भोजन और रहने की व्यवस्था की।

    मदद की उम्मीद में फैजान लगातार उस एजेंट से संपर्क करते रहे जिसने उन्हें विदेश भेजा था। शुरुआत में एजेंट हर बार एक-दो दिन इंतजार करने की बात कहकर उन्हें टालता रहा, लेकिन बाद में उसने उनका नंबर ही ब्लॉक कर दिया। जब फैजान ने कंपनी से भारत लौटने की इच्छा जताई तो उनसे 650 ओमानी रियाल जमा कराने की शर्त रख दी गई। इसी दौरान कंपनी ने उनका पासपोर्ट भी अपने कब्जे में ले लिया, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई।

    18 जुलाई को यह मामला भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन तक पहुंचा। उन्होंने तुरंत भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और भारतीय प्रवासी सहायता केंद्र को शिकायत भेजी। शिकायत मिलने के बाद भारतीय दूतावास ने दस्तावेजों की प्रक्रिया शुरू कराई और लेबर कोर्ट से एग्जिट परमिट दिलवाया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 26 जुलाई को उनकी वापसी की मंजूरी मिली। 28 जुलाई की रात फैजान मुंबई पहुंचे और 30 जुलाई को अपने गृह गांव दीवानगंज लौट आए।

    सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन ने बताया कि उन्होंने अब तक विदेशों में फंसे 1500 से अधिक भारतीयों की सुरक्षित वापसी में मदद की है। उनका कहना है कि यदि पीड़ित समय रहते सही दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराएं तो भारतीय दूतावास अधिकांश मामलों में प्रभावी कार्रवाई करता है। फैजान की आपबीती विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से सावधान रहने और केवल अधिकृत माध्यमों से ही विदेश जाने की अहम सीख भी देती है।

  • कंगना रनौत की टिप्पणी के बाद बढ़ी बहस, आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा पर दिया जोर

    कंगना रनौत की टिप्पणी के बाद बढ़ी बहस, आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा पर दिया जोर

    नई दिल्ली । अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की जेन-जी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद शुरू हुई बहस लगातार तेज होती जा रही है। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच अभिनेता आशुतोष राणा ने भाषा की गरिमा, संवाद की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार अभिव्यक्ति को लेकर अपनी राय साझा की है। उनके बयान को विवाद से इतर संतुलित और विचारशील दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी करने के बजाय भाषा के महत्व पर जोर दिया।

    हाल के दिनों में छात्र विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में कंगना रनौत की जेन-जी से जुड़ी टिप्पणी चर्चा का विषय बनी हुई है। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक बहस छिड़ गई। एक वर्ग ने उनकी भाषा और अभिव्यक्ति पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया। देखते ही देखते यह मुद्दा मनोरंजन जगत से निकलकर सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया।

    इसी क्रम में पटना प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में शब्दों की भूमिका पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व केवल उसके कार्यों से नहीं, बल्कि उसकी भाषा और व्यवहार से भी पहचाना जाता है। उनके अनुसार शब्द व्यक्ति के संस्कार, सोच और दृष्टिकोण का परिचय देते हैं, इसलिए बोलते समय संयम और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

    आशुतोष राणा ने कहा कि भाषा केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज में सम्मान और विश्वास का आधार भी बनती है। उन्होंने कहा कि एक ही शब्द किसी संबंध को मजबूत भी कर सकता है और अनावश्यक विवाद का कारण भी बन सकता है। इसलिए सार्वजनिक मंचों पर बोलने वाले लोगों को अपने शब्दों के प्रभाव और सामाजिक जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    इस विवाद पर मनोरंजन जगत के अन्य कलाकारों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। अभिनेता सोनू सूद ने भी हाल ही में सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को सोच-समझकर अपनी बात रखने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के बयान समाज के बड़े वर्ग को प्रभावित करते हैं, इसलिए संवाद में संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है।

    दूसरी ओर कंगना रनौत ने अपने बयान का बचाव करते हुए सोशल मीडिया पर कई पोस्ट साझा किए। उन्होंने छात्र आंदोलन और वायरल वीडियो से जुड़े संदर्भों का उल्लेख करते हुए अपने विचार दोहराए। साथ ही उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर भी अपनी राय रखी, जिसके बाद यह बहस और अधिक व्यापक हो गई। उनके समर्थक और आलोचक लगातार अपने-अपने पक्ष में तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।

    पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक जिम्मेदारी और भाषा की मर्यादा जैसे विषयों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति व्यक्त करते समय संवाद की गरिमा बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया, राजनीतिक विमर्श और मनोरंजन जगत में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है तथा आने वाले दिनों में भी इस पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

  • भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ की ऐतिहासिक रफ्तार, तीन दिन की रिकॉर्ड कमाई ने बदले हॉलीवुड फिल्मों के मानक

    भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ की ऐतिहासिक रफ्तार, तीन दिन की रिकॉर्ड कमाई ने बदले हॉलीवुड फिल्मों के मानक

    नई दिल्ली । हॉलीवुड सुपरहीरो फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ भारतीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। टॉम हॉलैंड की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म ने रिलीज के पहले तीन दिनों में ही ऐसी कमाई दर्ज की है, जिसने भारत में हॉलीवुड फिल्मों के कारोबार का नया अध्याय लिख दिया है। दर्शकों के बीच फिल्म को मिल रहे उत्साह और बड़े पैमाने पर टिकट बिक्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुपरहीरो शैली की फिल्मों का आकर्षण भारतीय बाजार में अब भी मजबूत बना हुआ है।

    फिल्म ने रिलीज के पहले दिन से ही जबरदस्त शुरुआत करते हुए लगभग 60 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन दर्ज किया। इस प्रदर्शन के साथ यह भारत में हॉलीवुड फिल्मों की सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई। शुरुआती दिन की सफलता ने यह संकेत दे दिया था कि फिल्म आगे भी मजबूत रफ्तार बनाए रख सकती है। दूसरे दिन भी टिकट खिड़की पर इसका प्रदर्शन स्थिर रहा और कुल नेट कारोबार 100 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया, जिससे इसकी मजबूत पकड़ और स्पष्ट हो गई।

    तीसरे दिन फिल्म की कमाई में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। शनिवार को दर्शकों की बढ़ी हुई संख्या का सीधा असर बॉक्स ऑफिस पर दिखाई दिया और फिल्म ने लगभग 66.75 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन दर्ज किया। इसके साथ ही तीन दिनों में इसका कुल भारतीय नेट संग्रह करीब 176.70 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी उपलब्धि के साथ ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ भारत में सबसे तेज 150 करोड़ रुपये का नेट बॉक्स ऑफिस आंकड़ा पार करने वाली हॉलीवुड फिल्म बन गई।

    देशभर में फिल्म को बड़े पैमाने पर स्क्रीन और शो उपलब्ध कराए गए हैं। लगभग 17 हजार शो के साथ रिलीज हुई इस फिल्म को महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी दर्शकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। कई प्रमुख मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघरों में दर्शक उपस्थिति मजबूत रही, जिससे टिकट बिक्री में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। प्रीमियम फॉर्मेट स्क्रीन पर भी फिल्म को अच्छी प्रतिक्रिया मिली, जिसने इसके कुल संग्रह को और मजबूती प्रदान की।

    फिल्म की सफलता का असर अन्य फिल्मों के प्रदर्शन पर भी दिखाई दे रहा है। इसी दौरान रिलीज हुई कई फिल्मों की तुलना में ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ ने टिकट खिड़की पर स्पष्ट बढ़त बनाए रखी है। लोकप्रिय किरदार, बड़े स्तर का प्रचार, व्यापक रिलीज और सकारात्मक दर्शक प्रतिक्रिया ने इसकी कमाई को लगातार गति दी है। यही कारण है कि शुरुआती सप्ताहांत में फिल्म ने अपेक्षाओं से बेहतर प्रदर्शन किया।

    मार्वल की यह नई पेशकश भारतीय बाजार में हॉलीवुड फिल्मों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। शुरुआती तीन दिनों के आंकड़े संकेत देते हैं कि फिल्म आने वाले दिनों में कई अन्य रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकती है। यदि सप्ताहांत के शेष दिनों में भी दर्शकों का उत्साह इसी तरह बना रहता है, तो इसका कुल बॉक्स ऑफिस संग्रह और अधिक ऊंचाई तक पहुंच सकता है।

    फिल्म कारोबार से जुड़े जानकारों का मानना है कि भारत में अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के लिए बढ़ती दर्शक संख्या, एडवांस बुकिंग का मजबूत रुझान और प्रीमियम सिनेमाघरों में बेहतर प्रदर्शन ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। फिलहाल ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ भारतीय बॉक्स ऑफिस पर सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है और इसकी कमाई के आगामी आंकड़ों पर पूरे फिल्म उद्योग की नजर बनी हुई है।

  • आप सैलरी बताइए, सरकार देगी', एमपी की नई हेल्थ पॉलिसी से ग्रामीण अस्पतालों की बदलेगी तस्वीर

    आप सैलरी बताइए, सरकार देगी', एमपी की नई हेल्थ पॉलिसी से ग्रामीण अस्पतालों की बदलेगी तस्वीर


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा और अनोखा कदम उठाया है। लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों में अब मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत ‘यू कोट, वी पे’ नीति लागू करने की तैयारी की गई है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य विशेषज्ञ डॉक्टरों को गांवों और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए आकर्षित करना है, ताकि गरीब और आदिवासी मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ न लगानी पड़े।

    नई नीति के तहत सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे बातचीत करेगी और उनसे पूछेगी कि ग्रामीण क्षेत्र में सेवाएं देने के लिए वे कितना वेतन चाहते हैं। डॉक्टर अपनी अपेक्षित सैलरी बताएंगे और आपसी सहमति के आधार पर उनका मानदेय तय किया जाएगा। यही वजह है कि इस योजना को ‘यू कोट, वी पे’ यानी ‘आप मांगिए, हम देंगे’ नाम दिया गया है। सरकार का मानना है कि तय वेतन की वजह से जो विशेषज्ञ डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से बचते हैं, वे इस व्यवस्था के बाद वहां सेवाएं देने के लिए तैयार होंगे।

    सरकार ने केवल आकर्षक वेतन तक ही इस योजना को सीमित नहीं रखा है। दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले डॉक्टरों को विशेष दुर्गम क्षेत्र भत्ता, बेहतर आवास और भविष्य में पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) में प्रवेश के दौरान अतिरिक्त लाभ भी मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को पीजी एडमिशन में प्राथमिकता और बोनस अंक दिए जाएंगे, जिससे उनका करियर भी तेजी से आगे बढ़ सके।

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। महिला रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों को सिजेरियन ऑपरेशन और जच्चा-बच्चा की सुरक्षा से जुड़े मामलों में अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाएगा। इससे ग्रामीण अस्पतालों में प्रसव के दौरान होने वाली जटिल परिस्थितियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकेगा और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा।

    ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) और अन्य फील्ड स्टाफ को भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, टीकाकरण, स्वास्थ्य रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज करने और किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रमों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को बोनस दिया जाएगा। इससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।

    डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार सामान्य चिकित्सकों को मल्टी-स्किलिंग प्रशिक्षण भी दे रही है। इस प्रशिक्षण के जरिए एक डॉक्टर प्रसूति सेवाएं, बच्चों का प्राथमिक उपचार और बेसिक एनेस्थीसिया जैसी कई जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम होगा। इससे विशेषज्ञों की कमी के बावजूद मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं होगा।

    लोकसभा में रतलाम-झाबुआ-अलीराजपुर की सांसद अनिता नागरसिंह चौहान द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने भी स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि मध्य प्रदेश में 14 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है, जिनमें छह आदिवासी बहुल जिलों में स्थापित किए जाएंगे। इन मेडिकल कॉलेजों के निर्माण पर होने वाले खर्च का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ‘यू कोट, वी पे’ नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो मध्य प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर हो सकती है। इससे गरीब और आदिवासी परिवारों को अपने जिले में ही बेहतर इलाज मिलेगा, स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा बढ़ेगा और ग्रामीण चिकित्सा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

  • सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण: छह मिनट 23 सेकंड तक दिन में छाएगा अंधेरा

    सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण: छह मिनट 23 सेकंड तक दिन में छाएगा अंधेरा

    नई दिल्ली। 2 अगस्त 2027 को दुनिया एक बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना की गवाह बनेगी। इस दिन 21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा और पृथ्वी के कुछ हिस्सों में दिन के समय करीब 6 मिनट 23 सेकंड तक पूर्ण अंधेरा रहेगा।
    खगोलविद इसे इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण और दुर्लभ खगोलीय घटनाओं में से एक मान रहे हैं।

    क्यों खास है यह सूर्य ग्रहण?
    यह पूर्ण सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर से शुरू होकर दक्षिणी स्पेन, जिब्राल्टर, उत्तरी अफ्रीका और मध्य-पूर्व के कई हिस्सों से गुजरेगा। इसका सबसे लंबा पूर्ण चरण मिस्र के लक्सर के आसपास देखा जाएगा, जहां लगभग 6 मिनट 23 सेकंड तक सूर्य पूरी तरह चंद्रमा से ढका रहेगा।

    इतनी लंबी अवधि का पूर्ण सूर्य ग्रहण जमीन से देखने का अवसर बेहद दुर्लभ होता है। यही वजह है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक, खगोल फोटोग्राफर और लाखों स्काई-वॉचर्स इस घटना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

    इतना लंबा ग्रहण क्यों होगा?

    इस ग्रहण की असाधारण अवधि के पीछे पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की विशेष खगोलीय स्थिति जिम्मेदार होगी।

    ग्रहण के समय चंद्रमा पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब होगा, इसलिए उसका दृश्य आकार बड़ा दिखाई देगा।
    उसी समय पृथ्वी सूर्य से लगभग अपनी अधिकतम दूरी (एपहेलियन) के पास होगी, जिससे सूर्य सामान्य से थोड़ा छोटा दिखाई देगा।
    इन दोनों परिस्थितियों के कारण चंद्रमा सूर्य को अधिक समय तक पूरी तरह ढक सकेगा और पूर्ण ग्रहण की अवधि सामान्य ग्रहणों की तुलना में काफी लंबी होगी।
    किन देशों में दिखाई देगा?

    पूर्ण सूर्य ग्रहण का मार्ग हजारों किलोमीटर लंबा होगा।

    यह इन क्षेत्रों से होकर गुजरेगा।

    अटलांटिक महासागर
    दक्षिणी स्पेन
    जिब्राल्टर
    मोरक्को
    अल्जीरिया
    ट्यूनीशिया
    लीबिया
    मिस्र
    सूडान
    सऊदी अरब
    यमन
    सोमालिया

    मिस्र के लक्सर और न्यू वैली क्षेत्र को ग्रहण देखने के लिए सबसे बेहतरीन स्थान माना जा रहा है।

    भारत में यह पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

    पूर्ण ग्रहण के दौरान क्या-क्या दिखाई देगा?
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    पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ मिनटों के लिए दिन का उजाला शाम जैसा महसूस होगा। इस दौरान कई दुर्लभ खगोलीय दृश्य देखने को मिल सकते हैं-

    सूर्य का बाहरी चमकीला वातावरण कोरोना स्पष्ट दिखाई देगा।
    तापमान में कुछ समय के लिए गिरावट महसूस हो सकती है।

    आकाश में चमकीले ग्रह और कुछ तारे भी नजर आ सकते हैं।
    बेलीज़ बीड्स (Baily’s Beads) प्रभाव दिखाई देगा, जब सूर्य की किरणें चंद्रमा की घाटियों से छनकर आती हैं।
    डायमंड रिंग इफेक्ट (Diamond Ring Effect) भी दिखाई देगा, जो पूर्ण सूर्य ग्रहण के सबसे आकर्षक दृश्यों में गिना जाता है।
    वैज्ञानिकों के लिए क्यों अहम है?

    पूर्ण सूर्य ग्रहण केवल एक सुंदर प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन का भी महत्वपूर्ण अवसर होता है। इस दौरान वैज्ञानिक सूर्य के कोरोना, सौर चुंबकीय गतिविधियों और पृथ्वी के वायुमंडल पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत अध्ययन करते हैं। इसी वजह से 2 अगस्त 2027 का यह ग्रहण खगोल विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।