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  • NEET-UG री-एग्जाम 2026: कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा आज, भोपाल-इंदौर समेत प्रदेशभर में हाई अलर्ट

    NEET-UG री-एग्जाम 2026: कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा आज, भोपाल-इंदौर समेत प्रदेशभर में हाई अलर्ट


    मध्यप्रदेश । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के री-एग्जाम को लेकर रविवार को मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा आयोजित की जा रही है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सतना, खंडवा और अन्य जिलों में हजारों अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

    भोपाल में 32 परीक्षा केंद्रों पर करीब 13,774 अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे हैं, जबकि इंदौर में 14 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। ग्वालियर में लगभग 5 हजार, जबलपुर में 10 हजार, छिंदवाड़ा में 4,303, गुना में 1,839, विदिशा में 1,709, नर्मदापुरम में 1,283 और अशोकनगर में 865 अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने की संभावना जताई गई है।

    इस बार परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। परीक्षा सामग्री ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है तथा सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की निगरानी में सामग्री केंद्रों तक पहुंचाई गई। सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। अभ्यर्थियों का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा है और इसके लिए अतिरिक्त मशीनों तथा कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

    परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्रों पर सुबह 11 बजे से रिपोर्टिंग, बायोमेट्रिक जांच और फ्रिस्किंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित होगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों को निर्धारित समय से अतिरिक्त 65 मिनट का समय भी प्रदान किया जाएगा।

    परीक्षा को लेकर ड्रेस कोड का भी सख्ती से पालन कराया जा रहा है। छात्रों को हल्के रंग के साधारण कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर, ईयरफोन, बेल्ट, आभूषण, पर्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। धार्मिक या पारंपरिक पोशाक पहनकर आने वाले अभ्यर्थियों को अतिरिक्त जांच प्रक्रिया के कारण समय से पहले पहुंचने की सलाह दी गई है।

    री-एग्जाम के लिए आने वाले छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भोपाल, विदिशा, नर्मदापुरम, गुना और अशोकनगर रेलवे स्टेशनों पर विशेष हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं। यहां छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने, परिवहन सुविधाओं और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

    हालांकि कुछ अभ्यर्थियों को अंतिम समय में परीक्षा केंद्र बदलने जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ा। मुरैना के एक छात्र का केंद्र ग्वालियर से बदलकर भोपाल कर दिया गया, जिससे उसे अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ी। वहीं कई छात्रों ने पिछले डेढ़ महीने को तनाव और अनिश्चितता से भरा बताया। उनका कहना है कि परीक्षा से जुड़े विवादों ने मानसिक दबाव बढ़ाया, लेकिन अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने पहुंचे हैं।

    प्रदेशभर में प्रशासन, पुलिस और परीक्षा एजेंसियों की निगरानी में परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के प्रयास जारी हैं। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परीक्षा पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

  • सकट योग भंग होते ही बनता है मुकुट योग! जानें कैसे दिलाता है सत्ता, सम्मान और सफलता

    सकट योग भंग होते ही बनता है मुकुट योग! जानें कैसे दिलाता है सत्ता, सम्मान और सफलता


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में कई ऐसे योग बताए गए हैं जो व्यक्ति के जीवन की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं। इन्हीं में से एक है मुकुट योग, जिसे सम्मान, अधिकार, नेतृत्व और सफलता का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह योग तब बनता है जब कुंडली में मौजूद सकट योग विशेष परिस्थितियों में भंग हो जाता है। माना जाता है कि जिन लोगों की जन्म कुंडली में मुकुट योग प्रभावी होता है, वे जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बाद उच्च पद, प्रतिष्ठा और प्रभाव हासिल करते हैं।

    सकट योग सामान्यतः गुरु और चंद्रमा के द्विद्वादश (2-12) या षडाष्टक (6-8) संबंध से बनता है। यह योग व्यक्ति के जीवन में आर्थिक उतार-चढ़ाव, मानसिक तनाव और संघर्ष की स्थितियां पैदा कर सकता है। लेकिन जब चंद्रमा पर मंगल की सप्तम दृष्टि पड़ती है और केंद्र में स्थित शनि भी चंद्रमा को देखता है, तब सकट योग का प्रभाव समाप्त होकर मुकुट योग का निर्माण होता है। यही स्थिति व्यक्ति के भाग्य को नई दिशा देने वाली मानी जाती है।

    कुंडली में कैसे बनता है मुकुट योग?
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मुकुट योग बनने के लिए केवल सकट योग का भंग होना ही पर्याप्त नहीं है। लग्न, दशम भाव और नवम भाव का मजबूत होना भी आवश्यक माना जाता है। यदि इन भावों के स्वामी ग्रह बलवान स्थिति में हों और उन पर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो, तो मुकुट योग और अधिक प्रभावी हो जाता है। सूर्य, गुरु और चंद्रमा जैसे प्रभावशाली ग्रह यदि केंद्र या त्रिकोण भावों में स्थित हों, तो व्यक्ति को समाज में विशेष पहचान और सम्मान प्राप्त हो सकता है। हालांकि किसी भी योग का सही प्रभाव जानने के लिए पूरी जन्म कुंडली का गहन अध्ययन जरूरी माना जाता है। केवल एक योग के आधार पर भविष्यवाणी करना उचित नहीं माना जाता।

    मुकुट योग से मिलने वाले लाभ
    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार मुकुट योग व्यक्ति को कई विशेष गुण और अवसर प्रदान कर सकता है। ऐसे लोग नेतृत्व क्षमता से भरपूर होते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की योग्यता रखते हैं। समाज में उन्हें सम्मान और प्रतिष्ठा मिलती है। प्रशासन, राजनीति, व्यवसाय, शिक्षा, सामाजिक सेवा और कॉर्पोरेट क्षेत्र में वे उच्च पदों तक पहुंच सकते हैं। ऐसे लोगों का व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है और वे दूसरों का विश्वास आसानी से जीत लेते हैं। उनकी निर्णय क्षमता और संगठन कौशल उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिलाते हैं।

    क्या हमेशा शुभ फल देता है मुकुट योग?
    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी योग का परिणाम ग्रहों की शक्ति, दशा-अंतर्दशा, गोचर और अन्य ग्रह स्थितियों पर निर्भर करता है। यदि मुकुट योग बनाने वाले ग्रह कमजोर हों या पाप ग्रहों के प्रभाव में हों, तो इसके शुभ फल कम हो सकते हैं। इसलिए केवल योग की मौजूदगी को सफलता की गारंटी नहीं माना जा सकता।

    आधुनिक समय में मुकुट योग को केवल राजसत्ता या राजनीतिक सफलता तक सीमित नहीं देखा जाता। इसे किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व, प्रभाव और उपलब्धि प्राप्त करने की क्षमता का संकेत माना जाता है। यही कारण है कि यह योग आज भी ज्योतिष प्रेमियों के बीच विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • भारत की बढ़ी नॉकआउट उम्मीदें, पाकिस्तान और नीदरलैंड के बाहर होने से बदला समीकरण

    भारत की बढ़ी नॉकआउट उम्मीदें, पाकिस्तान और नीदरलैंड के बाहर होने से बदला समीकरण


    नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में लीग चरण के मुकाबले जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे सेमीफाइनल की तस्वीर भी साफ होने लगी है। टूर्नामेंट के बीच पाकिस्तान और नीदरलैंड की टीमों का सफर आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। लगातार तीन-तीन मैच हारने के बाद दोनों टीमें सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई हैं। दूसरी ओर भारतीय महिला टीम शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रुप-ए में दूसरे स्थान पर पहुंच गई है और उसके नॉकआउट चरण में पहुंचने की संभावनाएं काफी मजबूत दिखाई दे रही हैं।

    शनिवार को खेले गए मुकाबलों ने ग्रुप-ए की अंकतालिका को पूरी तरह बदल दिया। ऑस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड को 98 रनों के बड़े अंतर से हराकर अपनी लगातार तीसरी जीत दर्ज की। इसके बाद बांग्लादेश ने पाकिस्तान को हराकर उसे टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इन नतीजों के बाद पाकिस्तान और नीदरलैंड दोनों के खाते में तीन-तीन हार दर्ज हो चुकी हैं और अब वे शेष मैच जीतकर भी सेमीफाइनल की दौड़ में वापसी नहीं कर सकतीं।

    ग्रुप-ए में ऑस्ट्रेलिया 6 अंकों के साथ शीर्ष पर है। टीम ने अपने तीनों मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में लगभग जगह पक्की कर ली है। भारतीय टीम ने अब तक खेले गए दोनों मुकाबले जीते हैं और 4 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर काबिज है। भारत का नेट रन रेट भी शानदार है, जो उसे अन्य टीमों पर बढ़त दिला रहा है। बांग्लादेश भी 4 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है, लेकिन नेट रन रेट के मामले में वह भारत से पीछे है। दक्षिण अफ्रीका 2 अंकों के साथ चौथे स्थान पर बनी हुई है।

    भारतीय टीम के लिए सबसे अहम मुकाबला अब बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होगा। यदि टीम इंडिया अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखती है तो उसका सेमीफाइनल में पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। कप्तान और टीम प्रबंधन भी खिलाड़ियों के मौजूदा फॉर्म से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।

    ग्रुप-बी की बात करें तो मेजबान इंग्लैंड ने अपने तीनों मुकाबले जीतकर शीर्ष स्थान पर कब्जा जमा रखा है। वेस्टइंडीज 4 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। न्यूजीलैंड, स्कॉटलैंड और श्रीलंका की टीमें अभी भी सेमीफाइनल की दौड़ में बनी हुई हैं। वहीं आयरलैंड लगातार तीन हार के बाद लगभग टूर्नामेंट से बाहर हो चुका है, हालांकि गणितीय रूप से उसकी उम्मीदें अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

    महिला टी20 विश्व कप 2026 में अब हर मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। भारतीय टीम की नजर लगातार जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह सुनिश्चित करने पर होगी, जबकि अन्य टीमें भी अंतिम चार में पहुंचने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं। आने वाले दिनों में टूर्नामेंट का रोमांच और भी बढ़ने वाला है।

  • देवदास: एक प्रेम कहानी जिसने दर्द को अमर बना दिया, 16 साल तक लिखने से डरते रहे लेखक

    देवदास: एक प्रेम कहानी जिसने दर्द को अमर बना दिया, 16 साल तक लिखने से डरते रहे लेखक


    नई दिल्ली। भारतीय साहित्य और सिनेमा के इतिहास में कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जो समय की सीमाओं को पार कर लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है ‘देवदास’। एक ऐसा किरदार, जिसके दर्द को दर्शकों ने अपना दर्द समझा, जिसकी अधूरी मोहब्बत ने लाखों दिलों को छुआ और जिसकी त्रासदी ने उसे अमर बना दिया।

    देवदास का जन्म वर्ष 1901 में महान साहित्यकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की कल्पना में हुआ था। कहा जाता है कि यह कहानी कहीं न कहीं उनके अपने जीवन के अनुभवों और भावनाओं से प्रेरित थी। लेकिन लेखक को इस किरदार को लेकर एक डर था। उन्हें लगता था कि उनका नायक आदर्शवादी नहीं है। वह प्रेम में असफल होता है, शराब का सहारा लेता है और अंततः दुखद मृत्यु को प्राप्त होता है। शायद इसी वजह से शरत चंद्र ने इस रचना को करीब 16 वर्षों तक प्रकाशित नहीं किया।

    आखिरकार 1917 में जब ‘देवदास’ उपन्यास प्रकाशित हुआ, तो उसने साहित्य जगत में तहलका मचा दिया। लोगों को इस कहानी में अपना दर्द दिखाई देने लगा। देवदास की अधूरी प्रेम कहानी, पारो के प्रति उसका समर्पण और समाज की बंदिशों के आगे उसकी हार ने पाठकों को भावुक कर दिया।

    साहित्य से निकलकर जब देवदास सिनेमा के पर्दे पर पहुंचा, तो उसकी लोकप्रियता कई गुना बढ़ गई। वर्ष 1928 में इस पर पहली मूक फिल्म बनी। इसके बाद 1936 में महान गायक-अभिनेता के.एल. सहगल ने देवदास को पर्दे पर जीवंत कर दिया। लेकिन 1955 में दिलीप कुमार ने जिस गहराई और संवेदनशीलता से इस किरदार को निभाया, उसने देवदास को भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर बना दिया।

    साल 2002 में निर्देशक संजय लीला भंसाली ने इस क्लासिक कहानी को भव्य अंदाज में पेश किया। फिल्म में शाहरुख खान ने देवदास, ऐश्वर्या राय ने पारो और माधुरी दीक्षित ने चंद्रमुखी का किरदार निभाया। फिल्म के भावनात्मक दृश्यों और भव्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद 2009 में अनुराग कश्यप ने आधुनिक अंदाज में ‘देव डी’ बनाकर इस कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाया।

    आज तक ‘देवदास’ पर 14 से अधिक फिल्में और रूपांतरण बन चुके हैं। शायद यही उसकी सबसे बड़ी सफलता है कि एक सदी से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह किरदार लोगों के दिलों में जिंदा है। प्रेम, विरह, त्याग और आत्मसंघर्ष का यह प्रतीक भारतीय साहित्य और सिनेमा की सबसे अमर धरोहरों में गिना जाता है।

    देवदास सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि एक ऐसी भावना है, जो हर उस इंसान को छूती है जिसने कभी प्रेम किया हो, खोया हो या दर्द को करीब से महसूस किया हो।

  • किशोर कुमार का सबसे विवादित गाना: 8 महिला गायिकाओं के बीच अकेले गाया गीत, अश्लीलता के आरोप में हुआ था बैन

    किशोर कुमार का सबसे विवादित गाना: 8 महिला गायिकाओं के बीच अकेले गाया गीत, अश्लीलता के आरोप में हुआ था बैन


    नई दिल्ली। हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कई ऐसे गीत हैं, जिन्होंने अपनी लोकप्रियता के साथ-साथ विवादों के कारण भी खास पहचान बनाई। ऐसा ही एक गीत था फिल्म ‘विधाता’ का ‘सात सहेलियां खड़ी-खड़ी, फरियाद सुनाए घड़ी-घड़ी’, जिसे महान गायक किशोर कुमार ने आठ महिला गायिकाओं के साथ मिलकर गाया था। यह गीत अपने समय में इतना चर्चित हुआ कि इसके कुछ बोलों को लेकर विवाद खड़ा हो गया और बाद में इसे दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

    वर्ष 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘विधाता’ उस दौर की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार, संजीव कुमार, शम्मी कपूर, संजय दत्त और अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे जैसे सितारे नजर आए थे। प्रसिद्ध फिल्मकार सुभाष घई द्वारा निर्देशित इस फिल्म का संगीत भी दर्शकों को खूब पसंद आया। फिल्म के सभी गीत सुपरहिट रहे, लेकिन ‘सात सहेलियां खड़ी-खड़ी’ ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरीं।

    इस गीत की खास बात यह थी कि इसमें किशोर कुमार अकेले पुरुष गायक थे, जबकि उनके साथ आठ महिला गायिकाओं ने अपनी आवाज दी थी। इनमें हेमलता, कंचन, अनुराधा पौडवाल, साधना सरगम, अलका याज्ञनिक, पद्मिनी कोल्हापुरे, उनकी बहन शिवांगी कोल्हापुरे और शक्ति कपूर की पत्नी शिवांगी कपूर शामिल थीं। बताया जाता है कि जब किशोर कुमार रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचे और वहां एक साथ इतनी महिला गायिकाओं को देखा तो वे चौंक गए। मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा कि वे तो फंस गए हैं। हालांकि संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी और अभिनेता शम्मी कपूर के समझाने पर उन्होंने यह गीत रिकॉर्ड किया।

    गीत के बोल प्रसिद्ध गीतकार आनंद बक्शी ने लिखे थे। रिकॉर्डिंग के बाद इसे फिल्माया गया और दर्शकों के सामने पेश किया गया। लेकिन रिलीज के बाद गीत के कुछ अंतरों को लेकर आपत्ति जताई गई। आलोचकों ने इसे अश्लील बताया और इसके प्रसारण पर सवाल उठाए। विवाद इतना बढ़ा कि ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन ने इस गीत के प्रसारण पर रोक लगा दी। हालांकि फिल्म की लोकप्रियता पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा।

    दिलचस्प बात यह रही कि जिस गीत को कभी अश्लील बताकर बैन किया गया था, वही समय के साथ हिंदी फिल्म संगीत की चर्चित धरोहर बन गया। आज भी संगीत प्रेमी इस गीत को याद करते हैं और इसे किशोर कुमार के सबसे अनोखे और दुर्लभ गीतों में गिना जाता है। यह गीत न केवल अपनी धुन और प्रस्तुति के लिए बल्कि एक साथ इतनी महिला गायिकाओं के साथ रिकॉर्ड होने के कारण भी संगीत इतिहास में विशेष स्थान रखता है।

  • Khatron Ke Khiladi 15: टॉप-2 फाइनलिस्ट के नाम लीक! करण वाही और फरहाना भट्ट के बीच होगी खिताबी जंग?

    Khatron Ke Khiladi 15: टॉप-2 फाइनलिस्ट के नाम लीक! करण वाही और फरहाना भट्ट के बीच होगी खिताबी जंग?


    नई दिल्ली। रोहित शेट्टी का लोकप्रिय स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। शो का प्रसारण अभी शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में इससे जुड़े कई बड़े अपडेट सामने आने लगे हैं। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार शो के टॉप-2 फाइनलिस्ट के नाम भी लीक हो गए हैं, जिसने फैंस की उत्सुकता और बढ़ा दी है।

    करण वाही और फरहाना भट्ट पहुंचे फाइनल में!
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सीजन के टॉप-2 फाइनलिस्ट करण वाही और फरहाना भट्ट बताए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि दोनों कंटेस्टेंट्स ने पूरे सीजन में शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल तक अपनी जगह बनाने में सफल रहे। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अभिनेता अविनाश मिश्रा फाइनल की रेस में मजबूती से बने हुए थे, लेकिन अंतिम चरण में वह जगह नहीं बना सके। यदि ये दावे सही साबित होते हैं तो ट्रॉफी के लिए सीधी टक्कर करण वाही और फरहाना भट्ट के बीच देखने को मिल सकती है।

    फिनाले भारत में होने की चर्चा
    एक और बड़ा अपडेट यह सामने आया है कि इस बार शो का ग्रैंड फिनाले दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में नहीं बल्कि भारत में आयोजित किया जा सकता है। हालांकि शो की शूटिंग फिलहाल केप टाउन में ही चल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार विजेता की घोषणा शो के टेलीविजन प्रसारण के अंतिम चरण में भारत में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान की जाएगी।

    पहले हफ्ते में नहीं होगा एलिमिनेशन!
    सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार शो के पहले सप्ताह में किसी भी कंटेस्टेंट का एलिमिनेशन नहीं होगा। वहीं दूसरे सप्ताह में सोशल मीडिया स्टार ओरी (ओरहान अवात्रामणि) के बाहर होने की चर्चा है। हालांकि चैनल या मेकर्स की ओर से अभी तक इन खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    कौन-कौन हैं इस बार प्रतियोगी?
    इस सीजन में कई लोकप्रिय टीवी सितारे और सोशल मीडिया हस्तियां हिस्सा ले रही हैं। प्रतियोगियों की सूची में गौरव खन्ना, रुबीना दिलैक, करण वाही, अविनाश मिश्रा, फरहाना भट्ट, जैस्मिन भसीन, रित्विक धनजानी, अविका गौर, विशाल आदित्य सिंह, हर्ष गुजराल, ओरी, शगुन शर्मा और रुहानिका धवन जैसे नाम शामिल हैं।

  • 21 जून का राशिफल: किस राशि को मिलेगा भाग्य का साथ और किसे बरतनी होगी आर्थिक सावधानी, जानें पूरे दिन का ज्योतिषीय संकेत

    21 जून का राशिफल: किस राशि को मिलेगा भाग्य का साथ और किसे बरतनी होगी आर्थिक सावधानी, जानें पूरे दिन का ज्योतिषीय संकेत


    नई दिल्ली । 21 जून 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार विभिन्न राशियों के लिए अलग-अलग परिणाम लेकर आने वाला है। कुछ राशि के जातकों को करियर और कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं, जबकि कुछ को आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम बढ़ाने की आवश्यकता होगी। पारिवारिक जीवन, स्वास्थ्य, निवेश और सामाजिक संबंधों पर भी ग्रहों का प्रभाव देखने को मिल सकता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और पुराने प्रयासों का लाभ प्राप्त हो सकता है। मित्रों और परिवार का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा। व्यापारिक गतिविधियों में भी अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। महत्वपूर्ण कार्यों को समय पर पूरा करने का प्रयास सफलता दिला सकता है।

    वृष राशि वालों के लिए दिन धीरे-धीरे बेहतर परिणाम देने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय से अटके कार्यों में प्रगति के संकेत हैं। प्रशासनिक और सरकारी मामलों में राहत मिल सकती है। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने से पेशेवर जीवन में मजबूती आएगी। आर्थिक स्थिति में भी सुधार की संभावना है।

    मिथुन राशि के जातकों को कार्यस्थल पर सक्रियता बनाए रखनी होगी। समय पर लिए गए निर्णय भविष्य में लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। नौकरी और व्यवसाय से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं। सहयोगियों के साथ बेहतर तालमेल कार्यक्षमता बढ़ा सकता है।

    कर्क राशि वालों के लिए अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन लाभकारी रहेगा। पारिवारिक वातावरण संतुलित रहेगा और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में सुधार दिखाई दे सकता है। करियर में नई संभावनाएं बन सकती हैं, हालांकि जोखिम भरे निर्णय लेने से पहले पूरी समीक्षा करना आवश्यक रहेगा।

    सिंह राशि के जातकों के लिए दिन उपलब्धियों वाला रह सकता है। रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर पाएंगे। परिवार का सहयोग मिलेगा और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि हो सकती है। अनुशासन बनाए रखना सफलता की कुंजी रहेगा।

    कन्या राशि वालों को वित्तीय मामलों में विशेष सतर्कता रखने की आवश्यकता होगी। खर्चों पर नियंत्रण और बजट प्रबंधन पर ध्यान देना लाभकारी रहेगा। कार्यक्षेत्र में सामान्य प्रगति बनी रहेगी, लेकिन मेहनत का उचित परिणाम मिलने की संभावना है। विरोधियों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखना उचित रहेगा।

    तुला राशि के लिए व्यापार और करियर के क्षेत्र में अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। प्रतिस्पर्धी माहौल में बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा। नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आ सकती है और आर्थिक मामलों में सकारात्मक गति बनी रह सकती है।

    वृश्चिक राशि वालों के लिए दिन सफलता और उत्साह से भरा रहने के संकेत दे रहा है। व्यापारिक योजनाओं को गति मिल सकती है। परिवार और मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। सकारात्मक सोच और संतुलित व्यवहार महत्वपूर्ण उपलब्धियां दिला सकता है।

    धनु राशि के जातकों को भाग्य का सहयोग मिलने की संभावना है। दीर्घकालिक योजनाओं में प्रगति होगी और आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं। परिवार में सुखद वातावरण बना रहेगा। भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचना अधिक लाभकारी रहेगा।

    मकर राशि वालों को निवेश और लेन-देन से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। जल्दबाजी में किसी अनुबंध या आर्थिक निर्णय से बचना चाहिए। स्वास्थ्य और निजी संबंधों पर ध्यान देना आवश्यक रहेगा। शाम के बाद परिस्थितियां अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती हैं।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए साझेदारी और व्यवसाय से जुड़े नए अवसर सामने आ सकते हैं। सहयोगियों के साथ संबंध मजबूत होंगे। हालांकि दिन के उत्तरार्ध में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं, इसलिए महत्वपूर्ण कार्य पहले ही निपटाना बेहतर रहेगा।

    मीन राशि वालों के लिए दिन मेहनत और धैर्य के बल पर सफलता दिलाने वाला साबित हो सकता है। रुके हुए कार्यों में गति आएगी और पेशेवर जीवन में स्थिरता बनी रहेगी। बातचीत और समझौते के मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी मामलों में लापरवाही से बचना आवश्यक होगा।

    कुल मिलाकर 21 जून का दिन अधिकांश राशियों के लिए अवसरों और सावधानियों का संतुलित मिश्रण लेकर आ रहा है। सोच-समझकर लिए गए निर्णय, संयमित व्यवहार और सकारात्मक दृष्टिकोण दिन को अधिक सफल और लाभकारी बना सकते हैं।

  • क्रिस्पी और चीजी पराठा चिली गार्लिक फ्लेवर, से भरपूर आसान रेसिपी

    क्रिस्पी और चीजी पराठा चिली गार्लिक फ्लेवर, से भरपूर आसान रेसिपी


    नई दिल्ली । सुबह के नाश्ते में अगर रोजाना के सादे पराठों से बोरियत हो गई है तो चिली चीज गार्लिक पराठा एक बेहतरीन और टेस्टी विकल्प हो सकता है। यह पराठा अपने तीखे स्वाद लहसुन की खुशबू और चीज के मेल से इतना स्वादिष्ट बनता है कि इसे बच्चे हों या बड़े सभी बहुत पसंद करते हैं। खासकर सुबह के समय इसे झटपट बनाकर परिवार के लिए एक खास ब्रेकफास्ट तैयार किया जा सकता है।

    इस पराठे को बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं का आटा लेकर उसमें नमक और थोड़ा सा घी मिलाकर अच्छे से गूंथ लें। पानी की मदद से नरम आटा तैयार करें और इसे दस से पंद्रह मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि यह अच्छी तरह सेट हो जाए। इस बीच पराठे का स्वाद बढ़ाने के लिए दो अलग अलग मिश्रण तैयार किए जाते हैं।

    पहले मिश्रण में पिघला हुआ मक्खन बारीक कटा हुआ लहसुन और हरा धनिया मिलाया जाता है जिससे एक फ्लेवरफुल गार्लिक बटर तैयार होता है। दूसरे मिश्रण में कद्दूकस किया हुआ मोजेरेला चीज बारीक कटी हरी मिर्च चिली फ्लेक्स और हरा धनिया मिलाकर स्टफिंग तैयार की जाती है। यह स्टफिंग पराठे को स्पाइसी और चीजी स्वाद देती है।

    अब गूंथे हुए आटे से छोटी लोई बनाकर उसे सूखे आटे की मदद से गोल बेल लें। बेली हुई रोटी पर पहले तैयार किया गया गार्लिक बटर चारों तरफ अच्छे से लगा दें। इसके बाद बीच में तैयार की गई चीज और मिर्च की स्टफिंग भर दें। अब रोटी के किनारों को उठाकर बीच में लाकर पोटली की तरह बंद कर दें ताकि स्टफिंग बाहर न निकले।

    इसके बाद इस पोटली को हल्के हाथों से फिर से बेलकर पराठे का आकार दें। अब तवा गर्म करें और इस पर बेली हुई रोटी डालें। मध्यम आंच पर पराठे को दोनों तरफ से सेकें। जब एक तरफ हल्का सुनहरा रंग आ जाए तो उसे पलट दें और दोनों तरफ मक्खन लगाकर अच्छे से क्रिस्पी होने तक सेकें।

    पराठा जब गोल्डन ब्राउन और क्रिस्पी हो जाए तो इसे तवे से उतार लें। आपका चिली चीज गार्लिक पराठा अब पूरी तरह तैयार है। इसे गर्मागर्म हरी चटनी दही या सॉस के साथ परोसा जा सकता है। इसका तीखा और चीजी स्वाद सुबह के नाश्ते को खास बना देता है और पूरे परिवार को पसंद आता है।

  • धरती का सबसे लंबा दिन ,21 जून के पीछे खगोलीय और धार्मिक महत्व

    धरती का सबसे लंबा दिन ,21 जून के पीछे खगोलीय और धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली । हर साल 21 जून को पृथ्वी पर सबसे लंबा दिन माना जाता है और इस दिन सूर्य सबसे अधिक समय तक आकाश में दिखाई देता है। यह केवल एक सामान्य खगोलीय घटना नहीं है बल्कि इसके पीछे पृथ्वी की गति और उसकी संरचना से जुड़ा गहरा वैज्ञानिक कारण है। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में दिन सबसे लंबा होता है जबकि दक्षिणी गोलार्ध में साल की सबसे लंबी रात दर्ज की जाती है। भारत समेत कई देशों में इस दिन को ग्रीष्म संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है और साथ ही अपनी धुरी पर भी घूमती रहती है। लेकिन पृथ्वी अपनी धुरी पर सीधी नहीं बल्कि लगभग साढ़े तेईस डिग्री झुकी हुई है। इसी झुकाव के कारण वर्षभर दिन और रात की लंबाई में बदलाव होता रहता है और ऋतुओं का निर्माण होता है। जब पृथ्वी अपने परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ते हुए 21 जून के आसपास की स्थिति में आती है तब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अधिकतम झुकाव पर होता है।

    इस स्थिति में सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लगभग नब्बे डिग्री के कोण पर पड़ती हैं जिसके कारण उत्तरी गोलार्ध को अधिक समय तक सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता है। इसी वजह से भारत अमेरिका यूरोप और एशिया के कई हिस्सों में दिन की अवधि सामान्य दिनों की तुलना में काफी लंबी हो जाती है और रात सबसे छोटी हो जाती है। इस दिन सूर्य लगभग चौदह घंटे तक आकाश में दिखाई देता है जिससे इसे वर्ष का सबसे लंबा दिन कहा जाता है।

    21 जून से जुड़ी एक और रोचक घटना भी सामने आती है जिसे जीरो शैडो डे कहा जाता है। इस दिन दोपहर के समय कुछ स्थानों पर सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है जिससे वस्तुओं की परछाई लगभग गायब हो जाती है या बहुत छोटी दिखाई देती है। यह घटना पृथ्वी के अक्षीय झुकाव और सूर्य की स्थिति के कारण होती है और इसे खगोलीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    दूसरी ओर इसी समय दक्षिणी गोलार्ध में पूरी तरह विपरीत स्थिति होती है। वहां सूर्य की रोशनी सबसे कम समय के लिए मिलती है और रात सबसे लंबी होती है। इस समय वहां सर्दियों की शुरुआत मानी जाती है जबकि उत्तरी गोलार्ध में गर्मी अपने चरम पर होती है।

    भारतीय परंपरा और हिंदू पंचांग के अनुसार 21 जून के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाते हैं। इसे एक आध्यात्मिक परिवर्तन के रूप में भी देखा जाता है। दक्षिणायन की अवधि को योग ध्यान और तपस्या के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना गया है जबकि उत्तरायण को शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ बताया गया है। यह विभाजन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    इसी खगोलीय घटना से जुड़े सांस्कृतिक महत्व के कारण 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इस समय शरीर और मन अधिक संतुलित रहते हैं और ध्यान योग साधना के लिए वातावरण अनुकूल होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी समय भगवान शिव ने सप्तऋषियों को योग का ज्ञान दिया था जिससे उन्हें आदियोगी और आदिगुरु कहा गया। इस प्रकार 21 जून केवल एक लंबा दिन नहीं बल्कि विज्ञान खगोल और संस्कृति का अद्भुत संगम है जो पृथ्वी की गति से लेकर मानव जीवन की परंपराओं तक गहरा प्रभाव डालता है।

  • घंटी बजाने के सही नियम ,से घर में बढ़ती है सकारात्मक ऊर्जा

    घंटी बजाने के सही नियम ,से घर में बढ़ती है सकारात्मक ऊर्जा

    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व माना गया है और घर के मंदिर में नियमित रूप से पूजा करने की परंपरा सदियों पुरानी है। पूजा के दौरान घंटी बजाना एक महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया मानी जाती है। इसे केवल एक परंपरा नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का माध्यम भी माना जाता है। घर के लगभग हर मंदिर में घंटी रखी जाती है और भक्त पूजा आरंभ करते समय भगवान को भोग लगाते समय और आरती के समय इसे बजाते हैं।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार घंटी की ध्वनि से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। ऐसा माना जाता है कि घंटी की आवाज से मन एकाग्र होता है और ध्यान भटकता नहीं है। पूजा के समय मन का स्थिर होना बहुत जरूरी होता है क्योंकि पूजा का उद्देश्य मन को शांति और भक्ति की ओर ले जाना होता है। घंटी की ध्वनि इसे आसान बनाती है और व्यक्ति का ध्यान सीधे भगवान की ओर केंद्रित हो जाता है।

    कई लोग यह जानना चाहते हैं कि घर के मंदिर में घंटी कितनी देर तक बजानी चाहिए। धार्मिक शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार घंटी को लंबे समय तक लगातार बजाने की आवश्यकता नहीं होती है। इसे केवल कुछ क्षणों के लिए बजाना ही पर्याप्त माना गया है। जब भी पूजा आरंभ की जाती है या भगवान को भोग लगाया जाता है तभी घंटी बजानी चाहिए। इसे भक्ति भाव के साथ सीमित समय के लिए बजाना ही सही माना गया है।

    परंपरागत मान्यता के अनुसार घंटी को एक बार या तीन बार या पांच बार बजाना शुभ माना जाता है। इनमें से पांच बार घंटी बजाना सबसे अधिक शुभ माना जाता है। इसका उद्देश्य केवल ध्वनि उत्पन्न करना नहीं बल्कि भक्ति भावना को जागृत करना और वातावरण को पवित्र बनाना होता है। घंटी बजाते समय मन पूरी तरह शांत और श्रद्धा से भरा होना चाहिए ताकि उसका प्रभाव सकारात्मक रूप से वातावरण में फैल सके।

    घंटी बजाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक माना गया है। सबसे पहले यह जरूरी है कि व्यक्ति का मन शांत और स्थिर हो। जल्दबाजी या लापरवाही से घंटी नहीं बजानी चाहिए। इसे बहुत तेज आवाज में या बार बार बजाने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे पूजा का ध्यान भंग हो सकता है।

    घर के मंदिर में पूजा का मुख्य उद्देश्य मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाना होता है। इसलिए घंटी बजाते समय भी इसी भावना को बनाए रखना चाहिए। घंटी की ध्वनि को केवल एक औपचारिकता के रूप में नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक साधन के रूप में देखना चाहिए। इससे घर का वातावरण शांत और पवित्र बना रहता है।

    जो लोग नियमित रूप से घर में पूजा करते हैं उनके लिए घंटी बजाना एक महत्वपूर्ण अभ्यास माना गया है। यह न केवल धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाता है बल्कि मानसिक रूप से भी व्यक्ति को स्थिर और शांत बनाता है। सही विधि से और सही समय पर घंटी बजाने से पूजा का प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाता है और घर में सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास माना जाता है।