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  • मोबाइल फोन से शुरू की ब्रांडिंग, हेयर स्टार्टअप को बनाया करोड़ों का बिजनेस; पारुल गुलाटी की प्रेरक सफलता की कहानी

    मोबाइल फोन से शुरू की ब्रांडिंग, हेयर स्टार्टअप को बनाया करोड़ों का बिजनेस; पारुल गुलाटी की प्रेरक सफलता की कहानी

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री और उद्यमी पारुल गुलाटी ने यह साबित किया है कि सफल कारोबार की नींव केवल बड़ी पूंजी पर नहीं, बल्कि सही विचार, लगातार मेहनत और ग्राहकों की जरूरत को समझने पर टिकती है। महज ₹5,000 के शुरुआती निवेश से शुरू हुआ उनका हेयर एक्सटेंशन स्टार्टअप आज करीब 50 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंच चुका है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने व्यवसाय को जिस तरह आगे बढ़ाया, वह नए उद्यमियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

    पारुल गुलाटी ने अभिनय के साथ-साथ उद्यमिता की राह तब चुनी, जब उन्होंने महसूस किया कि कई लोग बाल झड़ने और बाल पतले होने जैसी समस्याओं का सामना तो करते हैं, लेकिन इस विषय पर खुलकर बात नहीं करते। उस समय हेयर एक्सटेंशन को लेकर भी लोगों के मन में कई तरह की झिझक और गलत धारणाएं थीं। उन्होंने इसी समस्या को अवसर में बदलने का निर्णय लिया और वर्ष 2017 में अपने स्टार्टअप की शुरुआत की।

    शुरुआती दौर में उनके पास न तो बड़ा निवेश था और न ही महंगी मार्केटिंग का बजट। ऐसे में उन्होंने सोशल मीडिया को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। उन्होंने अपने मोबाइल फोन से ही वीडियो बनाकर लोगों को हेयर एक्सटेंशन के उपयोग, गुणवत्ता और फायदे समझाने शुरू किए। वह स्वयं अपने ब्रांड का चेहरा बनीं और नियमित रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री साझा करती रहीं। इससे धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और उनके उत्पाद की पहचान बनने लगी।

    व्यवसाय के शुरुआती दिनों में पारुल खुद अपने हाथों से हेयर एक्सटेंशन तैयार करती थीं। ग्राहक जुटाना सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने अलग तरीका अपनाया। विभिन्न कार्यक्रमों, ऑडिशन और सार्वजनिक आयोजनों में वह अपने उत्पाद का उपयोग करतीं, जिससे लोगों की जिज्ञासा बढ़ती। इसके बाद संभावित ग्राहक उनके उत्पाद के बारे में जानकारी लेने लगे और धीरे-धीरे ऑर्डर मिलने शुरू हो गए।

    ऑनलाइन लोकप्रियता मिलने से पहले पारुल अलग-अलग शहरों में आयोजित फ्ली मार्केट और प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाकर सीधे ग्राहकों से संवाद करती थीं। वह लोगों को उत्पाद का अनुभव करातीं और उन्हें तस्वीरें लेने के लिए प्रेरित करतीं। कई ग्राहक तत्काल खरीदारी नहीं करते थे, लेकिन बाद में सोशल मीडिया या तस्वीरों के माध्यम से दोबारा संपर्क कर उत्पाद खरीदते थे। इस रणनीति ने उनके व्यवसाय को शुरुआती गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    बाद में पारुल गुलाटी ने लोकप्रिय बिजनेस रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया में भी हिस्सा लिया। इस अनुभव को उन्होंने अपने उद्यमी जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उनके अनुसार, इस मंच ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि किसी भी स्टार्टअप की सफलता के लिए केवल अच्छा उत्पाद ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि वित्तीय योजना, व्यावसायिक रणनीति और निवेशकों की सोच को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

    आज उनका स्टार्टअप देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है और हेयर एक्सटेंशन श्रेणी में प्रमुख ब्रांडों में गिना जाता है। पारुल की यात्रा यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि किसी समस्या का व्यावहारिक समाधान तैयार किया जाए और उसे सही तरीके से ग्राहकों तक पहुंचाया जाए, तो छोटा निवेश भी बड़े व्यवसाय में बदल सकता है। उनकी सफलता नए उद्यमियों को नवाचार, धैर्य और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग की दिशा में प्रेरित करती है।

  • नीट विवाद के बाद परीक्षा सुधार की बड़ी पहल, छह विशेषज्ञों की टास्क फोर्स करेगी प्रवेश परीक्षा प्रणाली की समीक्षा

    नीट विवाद के बाद परीक्षा सुधार की बड़ी पहल, छह विशेषज्ञों की टास्क फोर्स करेगी प्रवेश परीक्षा प्रणाली की समीक्षा

    नई दिल्ली । देश की प्रवेश परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नीट परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय परीक्षा सुधार टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी करेंगे। टास्क फोर्स का उद्देश्य सरकारी प्रवेश परीक्षाओं में संरचनात्मक और तकनीकी सुधारों के लिए व्यापक सुझाव तैयार करना है, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और लीक-रोधी बनाया जा सके।

    सरकार का मानना है कि बढ़ती तकनीकी चुनौतियों और बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को देखते हुए मौजूदा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से गठित यह समिति विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को एक मंच पर लेकर आई है। इसमें तकनीक, शिक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष विज्ञान, प्रशासन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं, जो परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया का अध्ययन कर सुधार संबंधी सुझाव देंगे।

    समिति के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी को बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने और सुरक्षित तकनीकी ढांचे तैयार करने का व्यापक अनुभव है। उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे डिजिटल पहचान, डेटा सुरक्षा और आधुनिक तकनीकी समाधान के आधार पर परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में सुझाव देंगे। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान और परीक्षा संचालन के प्रत्येक चरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

    टास्क फोर्स में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी को भी शामिल किया गया है। कंप्यूटर विज्ञान, सूचना सुरक्षा और उन्नत तकनीकी प्रणालियों में उनका अनुभव समिति को तकनीकी दृष्टि से मजबूत सुझाव देने में सहायक माना जा रहा है। परीक्षा से जुड़े डिजिटल ढांचे को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने में उनकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    समिति में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अनीता करवाल को भी स्थान दिया गया है। शिक्षा नीति और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें शामिल किया गया है। इसके अलावा पूर्व खुफिया प्रमुख तपन डेका भी इस समिति का हिस्सा हैं। सुरक्षा और संवेदनशील मामलों से जुड़े उनके अनुभव के आधार पर परीक्षा प्रक्रिया में गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ को बड़े वैज्ञानिक और तकनीकी मिशनों के संचालन का अनुभव है। जटिल परियोजनाओं के सफल प्रबंधन और तकनीकी संस्थानों के संचालन में उनकी विशेषज्ञता परीक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण में उपयोगी मानी जा रही है। वहीं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमृत लाल मीणा को प्रशासनिक और लॉजिस्टिक प्रबंधन के अनुभव के आधार पर समिति में शामिल किया गया है, जिससे देशभर में बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षाओं के संचालन संबंधी व्यावहारिक सुझाव मिल सकें।

    सरकार का कहना है कि यह उच्चस्तरीय टास्क फोर्स राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली का व्यापक मूल्यांकन करेगी और ऐसे उपाय सुझाएगी, जिनसे भविष्य में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों का संचालन, डिजिटल निगरानी, अभ्यर्थियों की सत्यापन प्रक्रिया तथा परीक्षा प्रबंधन के सभी चरण अधिक प्रभावी बन सकें। समिति की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार लागू किए जाने की संभावना है, जिससे देशभर के लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास और मजबूत किया जा सके।

  • PoK चुनाव में PML-N और PPP आमने-सामने, JAAC के बहिष्कार और विरोध प्रदर्शनों के बीच आज पहले चरण का मतदान

    PoK चुनाव में PML-N और PPP आमने-सामने, JAAC के बहिष्कार और विरोध प्रदर्शनों के बीच आज पहले चरण का मतदान

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के साथ राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 45 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान तीन चरणों में कराया जा रहा है। चुनाव ऐसे समय हो रहे हैं जब क्षेत्र में पिछले कई महीनों से विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक असंतोष और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं। चुनावी प्रक्रिया के केंद्र में 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को लेकर विवाद है, जिसने स्थानीय राजनीति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

    पहले चरण में मीरपुर डिवीजन की सीटों पर मतदान हो रहा है, जबकि दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद डिवीजन के साथ 12 शरणार्थी सीटों पर मतदान निर्धारित है। अंतिम चरण में पुंछ डिवीजन की सीटों पर चुनाव होंगे। प्रशासन ने सभी चरणों के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के साथ चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की तैयारी की है।

    क्षेत्र में जारी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। संगठन ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए अपने समर्थकों से मतदान में हिस्सा नहीं लेने की अपील की है। संगठन का आरोप है कि मौजूदा चुनावी व्यवस्था स्थानीय जनता के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करती है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कराए जा रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखना आवश्यक है।

    चुनाव से पहले कई स्थानों पर प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। कई इलाकों में यातायात बाधित रहा, जबकि कुछ स्थानों पर संचार सेवाओं और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर देखने को मिला। सीमावर्ती क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी प्रभाव पड़ने की जानकारी सामने आई है।

    इस चुनाव का सबसे बड़ा विवाद विधानसभा की 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को लेकर है। ये सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं, जो भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान जाकर बसे थे। सरकार इन सीटों को ऐतिहासिक और संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा मानती है। वहीं, JAAC का दावा है कि इस व्यवस्था से स्थानीय मतदाताओं की राजनीतिक भूमिका सीमित होती है और चुनावी संतुलन प्रभावित होता है। संगठन का यह भी आरोप है कि इन सीटों का राजनीतिक लाभ अक्सर पाकिस्तान की प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों को मिलता है।

    चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। दोनों दलों के शीर्ष नेताओं ने क्षेत्र में जनसभाएं कर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने चुनाव प्रचार के दौरान क्षेत्र को अपना दूसरा घर बताते हुए कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह विकास कार्यों की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभाना चाहेंगे। दूसरी ओर, PPP नेतृत्व ने भी विकास, प्रशासनिक सुधार और क्षेत्रीय मुद्दों को चुनावी अभियान का प्रमुख विषय बनाया।

    दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी मानी जाने वाली PML-N और PPP इस चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय राजनीतिक रणनीति पर भी प्रभाव डाल सकते हैं। अब सभी की नजर पहले चरण के मतदान, आगामी चरणों की प्रक्रिया और चुनाव परिणामों पर बनी हुई है, जिनसे क्षेत्र की राजनीतिक दिशा तय होने की उम्मीद है।

  • CJP ने सरकार को दिया नया अल्टीमेटम, प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई रोकने और रिहाई की दोहराई मांग

    CJP ने सरकार को दिया नया अल्टीमेटम, प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई रोकने और रिहाई की दोहराई मांग

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से एक बार फिर अपनी मांगें दोहराई हैं। पार्टी ने कहा है कि जिन आश्वासनों के आधार पर विरोध प्रदर्शन स्थगित किए गए थे, उनका समयबद्ध पालन किया जाना चाहिए। संगठन ने विशेष रूप से छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई रोकने और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

    पार्टी के अनुसार उसे अलग-अलग राज्यों से ऐसी रिपोर्टें प्राप्त हो रही हैं जिनमें प्रदर्शन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है। CJP ने विशेष रूप से असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने की खबरों पर गंभीर चिंता है। संगठन का कहना है कि यदि ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो संबंधित मामलों पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

    CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने बयान में कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा तथा उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने की मांग पहले भी उठाई गई थी। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय सरकार की ओर से मिले आश्वासनों पर विश्वास करते हुए लिया गया था। ऐसे में अब उन आश्वासनों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

    पार्टी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि देश के किसी भी हिस्से में शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना नागरिकों का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

    CJP ने यह भी कहा कि उसकी कानूनी टीम हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। पार्टी का दावा है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को न्यायिक प्रक्रिया में हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। संगठन ने प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखने की भी अपील की है।

    अपने बयान में CJP ने केंद्रीय नेतृत्व से पूर्व में दिए गए आश्वासनों का सम्मान करने का आग्रह किया है। पार्टी का कहना है कि सरकार को 28 जुलाई तक इस संबंध में लिखित रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि प्रदर्शनकारियों और छात्रों के बीच उत्पन्न अनिश्चितता समाप्त हो सके। संगठन का मानना है कि स्पष्ट और औपचारिक आश्वासन से तनाव कम करने में मदद मिलेगी और संवाद का वातावरण मजबूत होगा।

    फिलहाल सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार का रुख और संभावित कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ता है तो स्थिति सामान्य होने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि मांगों और सरकारी रुख के बीच मतभेद बने रहते हैं तो यह विषय राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

  • भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व

    भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है और देश के पदकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वेटलिफ्टिंग में भारत को एक और बड़ी सफलता तब मिली जब तमिलनाडु के प्रतिभाशाली वेटलिफ्टर राजा मुथुपंडी ने पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम कर लिया। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी शानदार सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

    राजा मुथुपंडी ने पूरे मुकाबले के दौरान दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल 286 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 126 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 160 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में बेहद संतुलित और प्रभावशाली रहा। हालांकि स्वर्ण पदक मलेशिया के अजनील बिदिन ने जीता जिन्होंने रिकॉर्ड 299 किलोग्राम वजन उठाकर पहला स्थान हासिल किया लेकिन राजा मुथुपंडी का रजत पदक भारत के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए राजा मुथुपंडी को बधाई दी और कहा कि पुरुषों के 65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग वर्ग में रजत पदक जीतकर उन्होंने पूरे देश का सम्मान बढ़ाया है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को उनकी उपलब्धि पर गर्व है और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजा मुथुपंडी की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग से भारत के लिए एक और पदक आना बेहद गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राजा की सफलता से हर भारतीय खुश है और उनका प्रदर्शन देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा। प्रधानमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी प्रतियोगिताओं में और बड़ी सफलताओं की कामना भी की।

    राजा मुथुपंडी का यह पदक भारत के लिए बेहद अहम साबित हुआ क्योंकि इससे पहले भारतीय वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीत चुके थे जबकि स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। मीराबाई ने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया है।

    भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। शुरुआती दिनों में ही वेटलिफ्टिंग में मिले इन पदकों ने भारत की पदक तालिका को मजबूत किया है और अन्य खिलाड़ियों का भी मनोबल बढ़ाया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही लय बरकरार रही तो भारत इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर नतीजे हासिल कर सकता है।

    भारत के खिलाड़ियों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह साबित कर रहा है कि वर्षों की मेहनत आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाओं का सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने लगा है। राजा मुथुपंडी का रजत पदक भी इसी सफलता की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है जिसने देशवासियों को एक और गर्व का अवसर दिया है।

  • रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से प्रेरित आर्मी मेस का नया आकर्षण, राकेश बेदी ने किया उद्घाटन और कराया दौरा

    रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से प्रेरित आर्मी मेस का नया आकर्षण, राकेश बेदी ने किया उद्घाटन और कराया दौरा

    नई दिल्ली । श्रीनगर स्थित एक आर्मी मेस में फिल्म ‘धुरंधर’ से प्रेरित विशेष थीम वाले ‘धुरंधर बार’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर फिल्म का हिस्सा रहे अभिनेता राकेश बेदी मौजूद रहे और उन्होंने इस विशेष कॉर्नर का उद्घाटन करने के साथ-साथ उसके अंदर की सजावट का परिचय भी कराया। सुरक्षा कारणों से मेस का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इस पहल ने फिल्म और भारतीय सेना के बीच बने सांस्कृतिक जुड़ाव को नई पहचान दी है।

    राकेश बेदी ने अपने सोशल मीडिया माध्यम से साझा किए गए वीडियो में बताया कि उन्हें श्रीनगर स्थित एक आर्मी मेस में आमंत्रित किया गया था, जहां सैनिक लंबे समय से ‘धुरंधर बार’ के उद्घाटन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस विशेष अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है। उद्घाटन के दौरान उन्होंने रिबन काटकर इस थीम आधारित बार को औपचारिक रूप से शुरू किया।

    बार के अंदर की सजावट पूरी तरह फिल्म ‘धुरंधर’ की थीम पर तैयार की गई है। प्रवेश द्वार पर ‘धुरंधर बार, स्थापना 2026’ का साइन बोर्ड लगाया गया है, जो इस स्थान की अलग पहचान बनाता है। दीवारों पर फिल्म के प्रमुख किरदारों के पोस्टर और कलात्मक चित्र लगाए गए हैं, जिनमें कई लोकप्रिय संवाद भी शामिल किए गए हैं। इन कलाकृतियों को इस तरह तैयार किया गया है कि वे फिल्म के माहौल और उसके किरदारों की झलक प्रस्तुत करें।

    राकेश बेदी ने अपने वीडियो में बार का विस्तृत दौरा कराते हुए वहां मौजूद विभिन्न सजावटी तत्वों को भी दिखाया। उन्होंने बताया कि एक ओर फिल्म के कलाकार गौरव गेरा के किरदार का पोस्टर लगाया गया है, जिसमें उनका चर्चित दृश्य और संवाद दर्शाया गया है। वहीं दूसरी ओर स्वयं राकेश बेदी के किरदार से जुड़ा पोस्टर भी लगाया गया है। इसके अलावा मुख्य आकर्षण के रूप में अभिनेता रणवीर सिंह की बड़ी कलात्मक तस्वीर स्थापित की गई है, जिसे विशेष डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। सामने की दीवार पर फिल्म में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका निभाने वाले आर. माधवन के किरदार की आर्टवर्क भी लगाई गई है।

    राकेश बेदी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से वह आर्मी मेस की सटीक लोकेशन साझा नहीं कर सकते। उन्होंने सैनिकों द्वारा फिल्म के प्रति दिखाई गई सराहना और इस विशेष थीम कॉर्नर के निर्माण को सम्मानजनक पहल बताया। उनके अनुसार सेना के जवानों ने फिल्म के कई किरदारों और दृश्यों को यादगार तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे यह स्थान उनके लिए भी एक अलग आकर्षण बन गया है।

    ‘धुरंधर’ फिल्म श्रृंखला अपनी कहानी और प्रस्तुतिकरण के कारण दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रही। फिल्म की कथा एक भारतीय जासूस के मिशन पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियान को प्रमुखता से दिखाया गया है। फिल्म में रणवीर सिंह के साथ अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन, गौरव गेरा और राकेश बेदी सहित कई कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। श्रृंखला की दोनों फिल्मों को दर्शकों का व्यापक समर्थन मिला और उन्होंने वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय व्यावसायिक सफलता भी हासिल की। अब श्रीनगर के इस आर्मी मेस में फिल्म की थीम पर तैयार किया गया ‘धुरंधर बार’ उस लोकप्रियता का एक नया उदाहरण माना जा रहा है, जिसने सैनिकों और फिल्म प्रेमियों के बीच विशेष चर्चा का विषय बना दिया है।

  • गडकरी ने कहा- E20 और एथेनॉल ब्लेंडिंग से मेरा कोई संबंध नहीं, फर्जी AI वीडियो पर मेटा, एक्स और गूगल के खिलाफ करेंगे मुकदमा

    गडकरी ने कहा- E20 और एथेनॉल ब्लेंडिंग से मेरा कोई संबंध नहीं, फर्जी AI वीडियो पर मेटा, एक्स और गूगल के खिलाफ करेंगे मुकदमा

    नई दिल्ली । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे कथित एआई-जनित डीपफेक वीडियो से स्वयं को पूरी तरह अलग बताते हुए स्पष्ट किया है कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम और ई20 पहल से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र का विषय है और इस नीति के क्रियान्वयन में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

    इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने गडकरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दे दी है। अदालत की मंजूरी के बाद अब वह मेटा, एक्स और गूगल के विरुद्ध सिविल मुकदमा दायर कर सकते हैं। गडकरी का आरोप है कि विभिन्न डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित कई वीडियो में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से उनकी छवि और आवाज का उपयोग कर भ्रामक सामग्री तैयार की गई, जिससे जनता के बीच गलत संदेश फैलाने का प्रयास किया गया।

    याचिका में कहा गया है कि वायरल किए गए वीडियो में यह झूठा दावा किया गया कि गडकरी और उनका परिवार एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम तथा ई20 पहल से किसी प्रकार का आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। मंत्री ने इन दावों को पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की सामग्री उनकी व्यक्तिगत और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

    मामले में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार मंत्रालय को भी प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कथित फर्जी सामग्री के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई और उसे हटाने की मांग की गई है। गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी याचिका का उद्देश्य किसी सरकारी नीति पर होने वाली सार्वजनिक बहस, आलोचना या लोकतांत्रिक चर्चा को सीमित करना नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को सरकारी नीतियों पर अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर झूठी जानकारी फैलाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    हाल के समय में देश में ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आए हैं। विशेष रूप से वर्ष 2023 से पहले निर्मित कुछ पेट्रोल वाहनों के मालिकों ने माइलेज में कमी, रखरखाव लागत बढ़ने और इंजन के कुछ हिस्सों पर संभावित प्रभाव जैसी चिंताएं व्यक्त की हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर कई भ्रामक वीडियो और दावे भी तेजी से प्रसारित हुए, जिनमें एथेनॉल मिश्रण नीति को लेकर विभिन्न प्रकार की गलत जानकारियां साझा की गईं।

    गडकरी ने अपने पक्ष में दायर याचिका में दोहराया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से संबंधित नीति का संचालन और निर्णय केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन है। उन्होंने कहा कि उनके नाम का उपयोग कर तैयार किए गए एआई-जनित वीडियो तथ्यों से परे हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यमों पर फर्जी सामग्री के प्रसार से न केवल आम लोगों में भ्रम फैलता है, बल्कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

    इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डीपफेक सामग्री, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और ऑनलाइन भ्रामक सूचनाओं की निगरानी जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद संबंधित पक्षों का जवाब और अदालत की आगामी सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामला: SC ने SIT में CA और फोरेंसिक ऑडिटर जोड़ने के दिए निर्देश, दो हफ्ते में मांगी प्रगति रिपोर्ट

    राम मंदिर चढ़ावा मामला: SC ने SIT में CA और फोरेंसिक ऑडिटर जोड़ने के दिए निर्देश, दो हफ्ते में मांगी प्रगति रिपोर्ट


    लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने जांच को लेकर अहम निर्देश जारी किए। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता फिलहाल मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करना है। CJI ने कहा कि अभी ध्यान केवल जांच की गुणवत्ता पर है और अन्य मुद्दों पर बाद में विचार किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने विस्तारित SIT को जांच जारी रखने का निर्देश देते हुए तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा। अदालत का मानना है कि वित्तीय विशेषज्ञों के जुड़ने से चढ़ावे और उससे संबंधित लेनदेन की बारीकी से जांच हो सकेगी और यदि किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो उसके तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।

    कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है। साथ ही निर्देश दिया है कि तब तक SIT जांच की प्रगति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे।

  • यूपी भाजपा में टिकट की दौड़ तेज, देहात सीट पर बढ़े दावेदार, अगस्त-सितंबर में होगा चौथा सर्वे

    यूपी भाजपा में टिकट की दौड़ तेज, देहात सीट पर बढ़े दावेदार, अगस्त-सितंबर में होगा चौथा सर्वे


    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी में टिकट की दावेदारी तेज होती जा रही है। पार्टी अब तक तीन चरणों का सर्वे पूरा कर चुकी है, जिसके बाद कई विधानसभा सीटों पर नए दावेदारों के नाम सामने आने लगे हैं। खासतौर पर मुरादाबाद देहात विधानसभा सीट पर दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पार्टी का अगला यानी चौथा सर्वे अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित है।

    भाजपा ने प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के तहत जनवरी, मार्च और जून में तीन सर्वे कराए थे। इन सर्वेक्षणों के आधार पर जिले की छह विधानसभा सीटों पर करीब 20 नाम प्रमुख दावेदारों के रूप में चर्चा में रहे। नगर, देहात, कुंदरकी और ठाकुरद्वारा सीटों पर तीन-तीन, जबकि कांठ और बिलारी सीट पर चार-चार संभावित उम्मीदवारों के नाम सामने आए थे। इनमें मौजूदा विधायक, पूर्व पदाधिकारी और ब्लॉक प्रमुख जैसे कई नेता शामिल हैं।

    देहात सीट पर बढ़ी दावेदारों की संख्या
    तीन सर्वे में मुरादाबाद देहात सीट से डॉ. केके मिश्रा, पूर्व महानगर महामंत्री श्याम बिहारी मिश्रा और अनुसूचित मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष रजनीकांत जाटव के नाम प्रमुखता से सामने आए थे। अब इनके अलावा कई अन्य नेताओं ने भी दावेदारी की चर्चा तेज कर दी है।

    नए चर्चित नामों में पूर्व महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्रनाथ मिश्रा, पूर्व महानगर मंत्री शशि किरण जाटव, महानगर मंत्री सुनीता शर्मा और वनीता मेहरोत्रा समेत कई अन्य भाजपा पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

    अन्य सीटों पर भी नए चेहरे चर्चा में
    कांठ विधानसभा सीट से धर्मपाल सिंह और जयवर्द्धन सिंह, बिलारी सीट से विश्वास यादव लवली और नरेश यादव, जबकि ठाकुरद्वारा सीट से गौरव चौहान और भानु प्रताप सिंह के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल होकर चर्चा में हैं। फिलहाल मुरादाबाद नगर और कुंदरकी सीटों पर कोई नया नाम प्रमुख रूप से सामने नहीं आया है।

    तीसरे सर्वे में इन नामों की रही थी चर्चा
    मुरादाबाद नगर: विधायक रितेश गुप्ता, पूर्व महानगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता, महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला।
    मुरादाबाद देहात: डॉ. केके मिश्रा, श्याम बिहारी मिश्रा, रजनीकांत जाटव।
    कांठ: पूर्व विधायक राजेश कुमार सिंह चुन्नू, ब्लॉक प्रमुख पूनम चौधरी, जिला पंचायत सदस्य विनोद सैनी और राजपाल सिंह।
    ठाकुरद्वारा: पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह चौहान, अजय प्रताप सिंह और पूर्व सांसद सर्वेश सिंह की पत्नी साधना सिंह।
    बिलारी: परमेश्वर लाल सैनी, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश सैनी, नगर पालिका चेयरमैन रघुराज सिंह यादव और ऋषिपाल चौधरी।
    कुंदरकी: विधायक रामवीर सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह और किसान मोर्चा के क्षेत्रीय महामंत्री दिनेश ठाकुर।

    जिलाध्यक्ष ने क्या कहा?
    भाजपा जिलाध्यक्ष आकाश पाल ने कहा कि पार्टी में टिकट मांगने का अधिकार सभी कार्यकर्ताओं को है। फिलहाल संगठन स्तर पर दावेदारी के लिए आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों के चयन का अंतिम निर्णय प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

  • मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया

    मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को देशभर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उनकी शानदार उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि मीराबाई की मेहनत अनुशासन और संघर्ष करोड़ों भारतीयों विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मीराबाई चानू की विजयी तस्वीर साझा करते हुए उन्हें लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि मीराबाई ने अपनी अटूट मेहनत दृढ़ संकल्प और अनुशासन के दम पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा शान से लहराया है। राहुल ने लिखा कि हर भारतीय को उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व है और उनकी उपलब्धि देश के लाखों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मीराबाई चानू को बधाई देते हुए उनकी उपलब्धि को भारतीय खेल इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम को भी रजत पदक जीतने पर शुभकामनाएं दीं। खड़गे ने कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का सम्मान बढ़ाया है और उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतने का ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। इससे पहले वह 2018 के गोल्ड कोस्ट और 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वहीं 2014 के ग्लासगो खेलों में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई का यह स्वर्ण भारत का पहला गोल्ड मेडल भी बना। दूसरी ओर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता और भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    मीराबाई चानू पिछले कई वर्षों से भारतीय वेटलिफ्टिंग की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रही हैं। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरे स्वर्ण पदक के साथ अपने शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ दी है। उनकी इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण के दम पर भारतीय खिलाड़ी विश्व मंच पर लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर सकते हैं।