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  • ग्रीन पटाखों में बैरियम नाइट्रेट पर बढ़ा विवाद, केंद्र की दो एजेंसियों के मतभेद पर सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

    ग्रीन पटाखों में बैरियम नाइट्रेट पर बढ़ा विवाद, केंद्र की दो एजेंसियों के मतभेद पर सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

    नई दिल्ली । दिवाली के दौरान कम प्रदूषण वाले विकल्प के रूप में प्रचारित किए गए ग्रीन पटाखों की पर्यावरणीय सुरक्षा पर नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार से जुड़े दो प्रमुख वैज्ञानिक और नियामक संस्थानों के बीच ग्रीन पटाखों में प्रयुक्त बैरियम नाइट्रेट को लेकर मतभेद सामने आने के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दोनों पक्षों के अलग-अलग निष्कर्षों को देखते हुए अदालत से इस विषय पर अंतिम निर्णय देने का अनुरोध किया है।

    ग्रीन पटाखों को पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने वाला विकल्प माना गया था। इन्हें विकसित करने का उद्देश्य वायु प्रदूषण और ठोस अपशिष्ट को कम करना था, ताकि त्योहारों के दौरान पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को सीमित किया जा सके। इसी लक्ष्य के तहत वैज्ञानिक संस्थानों ने नए फॉर्मूलेशन तैयार किए थे और उनके आधार पर व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति भी दी गई थी।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ग्रीन पटाखों में प्रयुक्त बैरियम नाइट्रेट पर गंभीर आपत्ति दर्ज की। बोर्ड का मानना है कि बैरियम यौगिक प्रदूषण फैलाने वाले प्रमुख तत्वों में शामिल हैं और पटाखों में इनका उपयोग पर्यावरणीय दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। बोर्ड ने यह भी कहा कि इस विषय पर पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों के अनुरूप बैरियम साल्ट के उपयोग पर स्पष्ट प्रतिबंध की व्याख्या की जानी चाहिए और किसी भी मात्रा में इसका इस्तेमाल अदालत की भावना के विपरीत माना जा सकता है।

    दूसरी ओर, सीएसआईआर-नीरी का कहना है कि उसने केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप ऐसे ग्रीन पटाखों का फॉर्मूलेशन विकसित किया था, जिनसे पारंपरिक पटाखों की तुलना में प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आती है। संस्थान के परीक्षणों के अनुसार इन पटाखों से पीएम10 और पीएम2.5 जैसे सूक्ष्म कणों के उत्सर्जन में 40 से 60 प्रतिशत तक कमी देखी गई। इसी आधार पर कई प्रकार के प्रकाश आधारित ग्रीन पटाखों के उत्पादन की सिफारिश की गई थी।

    इसी वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर उद्योग से जुड़े संगठनों ने संशोधित फॉर्मूलेशन तैयार किए, जिनमें बैरियम नाइट्रेट की मात्रा कम रखते हुए अन्य ऑक्सीडाइजर का उपयोग किया गया। आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा प्रक्रियाओं के बाद संबंधित प्राधिकरणों से स्वीकृति मिलने पर पिछले कुछ वर्षों से ऐसे ग्रीन पटाखों का उत्पादन और बिक्री भी होती रही है। इन्हें दिवाली सहित अन्य अवसरों पर कम प्रदूषण वाले विकल्प के रूप में बाजार में उपलब्ध कराया गया।

    हालांकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि ग्रीन पटाखों के प्रदूषण संबंधी दावों की तुलना पूरी तरह बैरियम-रहित विकल्पों से नहीं की गई है। बोर्ड का तर्क है कि उपलब्ध अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि वर्तमान ग्रीन पटाखे वास्तव में सबसे सुरक्षित और कम प्रदूषण फैलाने वाले विकल्प हैं। इसलिए इस विषय पर और स्पष्ट वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता है।

    दोनों संस्थाओं के परस्पर विरोधी दृष्टिकोण को देखते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर यह स्पष्ट किया है कि ग्रीन पटाखों के व्यावसायिक उत्पादन और उनके उपयोग को लेकर अंतिम निर्णय अदालत ही करे। अब न्यायालय के फैसले पर यह निर्भर करेगा कि आने वाले समय में ग्रीन पटाखों के मौजूदा फॉर्मूलेशन को जारी रखा जाएगा, उनमें संशोधन होगा या उनके उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश लागू किए जाएंगे। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पटाखा उद्योग तीनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • रिकॉर्ड EV बिक्री के बीच सिर्फ वाहन निर्माता नहीं, पूरी EV वैल्यू चेन की कंपनियां बन सकती हैं निवेशकों की बड़ी पसंद

    रिकॉर्ड EV बिक्री के बीच सिर्फ वाहन निर्माता नहीं, पूरी EV वैल्यू चेन की कंपनियां बन सकती हैं निवेशकों की बड़ी पसंद

    नई दिल्ली । भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार लगातार विस्तार की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ ही निवेशकों की रुचि भी इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ी है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इलेक्ट्रिक कार या दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों में निवेश करना पर्याप्त नहीं है। EV उद्योग की वास्तविक मजबूती उन कंपनियों में भी दिखाई देती है जो इस पूरे इकोसिस्टम को आवश्यक तकनीक, उपकरण और पुर्जे उपलब्ध कराती हैं। ऐसे में निवेश का दायरा वाहन निर्माताओं से आगे बढ़कर पूरी EV वैल्यू चेन तक फैलता नजर आ रहा है।

    हाल के समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ती ईंधन कीमतों, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं ने EV को तेजी से लोकप्रिय बनाया है। यही कारण है कि इस क्षेत्र से जुड़ी अनेक कंपनियों के कारोबार में भी विस्तार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में EV उद्योग का विकास केवल वाहन निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े हर स्तर के उद्योग को इसका लाभ मिलेगा।

    EV वैल्यू चेन में बैटरी निर्माण, मोटर, कंट्रोल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग सेवाएं और चार्जिंग से जुड़े पावर उपकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियां वाहन निर्माताओं को जरूरी तकनीक और उत्पाद उपलब्ध कराती हैं। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन बढ़ेगा, इन कंपनियों की मांग भी समान गति से बढ़ने की संभावना है। यही वजह है कि निवेशकों का ध्यान अब पूरे इकोसिस्टम की ओर केंद्रित हो रहा है।

    बाजार विश्लेषकों ने इस क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है। इनमें ऑटो कंपोनेंट, बैटरी, इंजीनियरिंग, पावर उपकरण और विशेष रसायन बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। ऐसे व्यवसाय EV उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं क्योंकि इनके बिना बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव नहीं है। यदि इलेक्ट्रिक वाहन बाजार अपेक्षित गति से आगे बढ़ता है, तो इन कंपनियों के राजस्व और ऑर्डर बुक पर भी इसका अनुकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल किसी एक प्रमुख वाहन निर्माता पर निर्भर रहने के बजाय विविधीकृत रणनीति अपनानी चाहिए। EV उद्योग कई स्तरों पर अवसर प्रदान करता है और अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियां अपने-अपने हिस्से का लाभ अर्जित कर सकती हैं। इस कारण बैटरी, मोटर, ऑटो कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग समाधान उपलब्ध कराने वाली कंपनियां भी दीर्घकालिक निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं का मूल्यांकन करना आवश्यक है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक होता है और किसी भी क्षेत्र में निवेश जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं होता। इसके बावजूद भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बढ़ते दायरे और सरकार के स्वच्छ ऊर्जा पर बढ़ते जोर को देखते हुए EV वैल्यू चेन आने वाले वर्षों में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसरों वाला क्षेत्र बन सकती है। इसी वजह से अब बाजार की नजर केवल इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों पर नहीं, बल्कि पूरे EV इकोसिस्टम को मजबूत करने वाले उद्योगों पर भी बनी हुई है।

  • सराफा दुकान में चोरी की बड़ी साजिश नाकाम गैस कटर लेकर पहुंचे बदमाश गिरफ्तार गिरोह का सरगना अब भी फरार

    सराफा दुकान में चोरी की बड़ी साजिश नाकाम गैस कटर लेकर पहुंचे बदमाश गिरफ्तार गिरोह का सरगना अब भी फरार


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले की बैराड़ पुलिस ने सराफा दुकान में चोरी की कोशिश करने वाले अंतरजिला गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई टाटा नेक्सॉन कार 315 बोर का एक देशी कट्टा और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। मामले में गिरोह का सरगना समेत अन्य फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    थाना प्रभारी सुरेश शर्मा ने बताया कि बैराड़ स्थित प्रिंस ज्वेलर्स के संचालक जगदीश प्रसाद गुप्ता ने 22 जुलाई को चोरी के प्रयास की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार 21 जुलाई की रात दुकान बंद कर घर जाने के बाद करीब 1 बजकर 20 मिनट पर पुलिस ने दुकान के बाहर आग जैसी स्थिति होने की सूचना दी। जब मौके पर पहुंचकर देखा गया तो पता चला कि बदमाश गैस कटर की मदद से दुकान का ताला काटकर अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस की आहट मिलते ही आरोपी मौके से फरार हो गए।

    घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर तीन संदिग्ध बदमाश गैस कटर से ताला काटते दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों मुखबिरों की सूचना और फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू की। जांच में रिंकू उर्फ योगेश कुशवाह निवासी जौरा राकेश कुशवाह और उनके साथियों की संलिप्तता सामने आई।

    पुलिस को 26 जुलाई को सूचना मिली कि गिरोह के सदस्य टाटा नेक्सॉन कार से पहाड़गढ़ की ओर आने वाले हैं। सूचना के आधार पर सहसराम पहाड़गढ़ मार्ग पर घेराबंदी की गई और संदिग्ध कार को रोक लिया गया। कार में सवार सौरभ कुशवाह निवासी भूराडाढ़ा जिला मुरैना और आकाश रावत निवासी भूपतपुरा जौरा को गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान सौरभ के पास से 315 बोर का देशी कट्टा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए।

    पूछताछ में सौरभ ने खुलासा किया कि उसका जीजा रिंकू उर्फ योगेश कुशवाह पूरे गिरोह का सरगना है। उसने राकेश कुशवाह देवेंद्र उर्फ देवू उर्फ चुटिया सविता और अन्य साथियों के साथ मिलकर बैराड़ की सराफा दुकानों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। योजना के तहत रिंकू गैस कटर लेकर आया था जबकि सौरभ और देवू हथियारों के साथ पहुंचे थे। वहीं आकाश नशे की हालत में कार में ही सो गया था। इसी दौरान पुलिस की भनक लगने पर सभी आरोपी बिना चोरी किए मौके से फरार हो गए।

    पूछताछ में यह भी सामने आया कि सौरभ और रिंकू पहले भी धौलपुर भिंड और आगरा में चोरी के मामलों में जेल जा चुके हैं। पुलिस के अनुसार रिंकू पर विभिन्न जिलों में चोरी के कई मामले दर्ज हैं और वही पूरे गिरोह का संचालन करता है। फिलहाल पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल नेक्सॉन कार हथियार और कारतूस जब्त कर लिए हैं। फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया जाएगा।

  • आरबीआई की विशेष योजना से विदेशी मुद्रा प्रवाह मजबूत, एफसीएनआर (बी) जमा में सार्वजनिक बैंकों की अहम भूमिका

    आरबीआई की विशेष योजना से विदेशी मुद्रा प्रवाह मजबूत, एफसीएनआर (बी) जमा में सार्वजनिक बैंकों की अहम भूमिका

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष जमा योजना के तहत विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है। हालिया आकलनों के अनुसार, केवल 45 दिनों के भीतर इन जमाओं का स्तर वर्ष 2013 में दर्ज 26 अरब डॉलर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पार कर चुका है। मौजूदा रुझानों को देखते हुए सितंबर के अंत तक एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट 65 से 70 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जबकि कुल जमा 80 से 85 अरब डॉलर के दायरे में रह सकती है।

    17 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लगभग 20 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया है। इसमें 17.4 अरब डॉलर का योगदान केवल एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट से आया है। यह संकेत देता है कि विशेष योजना को प्रवासी भारतीयों और विदेशी मुद्रा निवेशकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि जमा में आई यह तेजी देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान परिपक्व होने वाली बड़ी संख्या में मौजूदा एफसीएनआर (बी) जमाओं का नवीनीकरण होने की संभावना है। विशेष योजना के तहत उपलब्ध अपेक्षाकृत अधिक ब्याज दरें जमाकर्ताओं को अपनी राशि दोबारा निवेश करने के लिए आकर्षित कर सकती हैं। इससे कुल जमा राशि में और वृद्धि होने की उम्मीद है।

    रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि मौजूदा आधारभूत अनुमान के अतिरिक्त लगभग 10 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूंजी भी देश में आ सकती है। यह अतिरिक्त निवेश मुख्य रूप से उन देशों से आने की संभावना है जहां कर संबंधी रियायतें उपलब्ध हैं और प्रवासी भारतीयों की अच्छी संख्या मौजूद है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो विदेशी मुद्रा प्रवाह अपेक्षा से अधिक मजबूत हो सकता है।

    एफसीएनआर (बी) जमा अभियान को आगे बढ़ाने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन बैंकों ने न केवल अपने व्यापक ग्राहक आधार का लाभ उठाया है, बल्कि विभिन्न देशों में रहने वाले भरोसेमंद और उच्च साख वाले ग्राहकों के साथ लंबे समय से बने संबंधों का भी प्रभावी उपयोग किया है। इसके साथ ही ऑनशोर और ऑफशोर बैंकिंग रणनीतियों के संतुलित उपयोग ने भी पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को गति दी है।

    हालांकि मजबूत पूंजी प्रवाह के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में कुछ सवाल भी बने हुए हैं। वित्तीय बाजारों में यह चर्चा जारी है कि इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने के बाद भी रुपये पर दबाव क्यों बना हुआ है और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की स्थिति पर इसका वास्तविक प्रभाव किस प्रकार दिखाई देगा। यह विषय आने वाले समय में नीति निर्माताओं और बाजार विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

    विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप पूरी तरह नियमित नहीं रहा। इसके बावजूद यह आवश्यक माना गया है कि रुपये की मूलभूत मजबूती को बनाए रखा जाए, ताकि वह वैश्विक आर्थिक झटकों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके और भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर प्रतिकूल असर न पड़े। वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं में बढ़ते तनाव और असंतुलित पूंजी प्रवाह के दौर में विदेशी मुद्रा प्रबंधन और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

  • बिजली संकट से उबल पड़ा शिवपुरी सरपंच सड़क पर लेटे ग्रामीणों ने तीन घंटे किया चक्काजाम अधिकारियों के आश्वासन के बाद खुला रास्ता

    बिजली संकट से उबल पड़ा शिवपुरी सरपंच सड़क पर लेटे ग्रामीणों ने तीन घंटे किया चक्काजाम अधिकारियों के आश्वासन के बाद खुला रास्ता


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के अमोला थाना क्षेत्र के सिरसौद गांव में लगातार हो रही बिजली कटौती के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। रविवार सुबह सरपंच अतर सिंह लोधी के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने सिरसौद पिछोर मार्ग पर चक्काजाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान सरपंच खुद सड़क पर लेट गए और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने मानवता का परिचय देते हुए एम्बुलेंस को बिना किसी बाधा के गुजरने दिया। सुबह करीब नौ बजे बिजली विभाग के अधिकारियों के मौके पर पहुंचकर समाधान का भरोसा देने के बाद चक्काजाम समाप्त हुआ।

    ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से लोड सेटिंग के नाम पर रोजाना 10 से 12 घंटे तक बिजली की आपूर्ति बाधित की जा रही है। सबसे अधिक परेशानी रात के समय होने वाली कटौती से हो रही है। लगातार बिजली गुल रहने के कारण लोग भीषण गर्मी और उमस में रातभर जागने को मजबूर हैं। घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि अंधेरे के कारण हाल ही में एक महिला छत से गिरकर घायल भी हो गई थी जिससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया।

    चक्काजाम की सूचना मिलते ही अमोला थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सेंगर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन प्रदर्शनकारी बिजली विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद विभाग के अधिकारी घटनास्थल पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।

    सरपंच अतर सिंह लोधी ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में एक घंटे बिजली देने के बाद अगले घंटे फिर कटौती कर दी जाती है जिससे सिरसौद सहित आसपास के करीब 15 गांवों के लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत दी गई लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि करैरा कस्बे में लोड सेटिंग के नाम पर बिजली कटौती नहीं की जाती जबकि ग्रामीण इलाकों में घंटों बिजली बंद रखी जाती है जिससे लोगों में भेदभाव की भावना पैदा हो रही है।

    ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और लोड सेटिंग के नाम पर घंटों कटौती जारी रही तो वे दोबारा सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है बल्कि कुछ महीने पहले भी इसी समस्या को लेकर प्रदर्शन किया जा चुका है लेकिन हालात अब तक नहीं बदले। ऐसे में अब वे स्थायी समाधान मिलने तक अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।

  • महाकाल की भोर हुई दिव्य आराधना से आलोकित भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप ने मोहा मन भांग चंदन और पुष्पों से हुआ राजसी श्रृंगार

    महाकाल की भोर हुई दिव्य आराधना से आलोकित भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप ने मोहा मन भांग चंदन और पुष्पों से हुआ राजसी श्रृंगार


    मध्य प्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दिव्य और भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट खुलते ही वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के बीच पूजन की शुरुआत हुई। सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत अर्पित कर विशेष स्नान कराया गया। प्रथम घंटाल बजने के साथ हरि ओम का जल अर्पित किया गया और पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण छा गया।

    कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को जटाधारी स्वरूप में अलंकृत किया गया। उनके मस्तक पर रजत चंद्र सुशोभित किया गया तथा भांग और चंदन अर्पित कर दिव्य तिलक लगाया गया। गुलाब की सुगंधित मालाओं से भगवान का श्रृंगार किया गया। रजत मुकुट और त्रिपुंड से सजे बाबा महाकाल का स्वरूप भक्तों को मंत्रमुग्ध करता रहा। इसके बाद परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से संपन्न होने वाली यह प्राचीन परंपरा महाकाल मंदिर की सबसे विशेष धार्मिक विधियों में मानी जाती है।

    भस्म अर्पित करने के उपरांत भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें भांग ड्रायफ्रूट सुगंधित पुष्प और आकर्षक आभूषण अर्पित किए गए। शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और रंग बिरंगी पुष्पमालाओं से बाबा महाकाल का अलौकिक स्वरूप सजाया गया। अंत में फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर आरती संपन्न हुई।

    भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु तड़के ही मंदिर पहुंच गए थे। जैसे ही आरती शुरू हुई पूरा मंदिर हर हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख समृद्धि और मंगल की कामना की। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

    उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है और यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। सोमवार की इस दिव्य आराधना ने एक बार फिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति से सराबोर कर दिया।

  • अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, वैश्विक बाजार में ब्रेंट और WTI करीब 5% टूटे

    अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, वैश्विक बाजार में ब्रेंट और WTI करीब 5% टूटे


    नई दिल्ली । 
    अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव में फिलहाल नरमी आने के संकेतों का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत देखने को मिला। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख तेल बेंचमार्क लगभग पांच प्रतिशत तक टूट गए। निवेशकों ने तनाव कम होने की संभावना के बीच मुनाफावसूली की, जिससे पिछले कुछ सप्ताह की तेज बढ़त के बाद बाजार में दबाव बढ़ गया।

    कारोबार के शुरुआती घंटों में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4.8 प्रतिशत गिरकर लगभग 87.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल भी करीब 5.09 प्रतिशत टूटकर लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। एक ही कारोबारी सत्र में आई यह गिरावट हाल के समय की बड़ी गिरावटों में शामिल रही।

    बाजार में नरमी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों में विराम की संभावना रही। ईरान की ओर से यह संकेत दिए गए कि यदि अमेरिका सैन्य अभियान आगे नहीं बढ़ाता है तो वह भी जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा। इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों को लगा कि पश्चिम एशिया में तनाव फिलहाल और नहीं बढ़ेगा, जिससे तेल आपूर्ति पर तत्काल संकट की आशंका कुछ कम हुई है।

    हालांकि मौजूदा गिरावट के बावजूद ऊर्जा बाजार पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं पहुंचा है। पिछले तीन सप्ताह के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया था। उस दौरान ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। बाजार को आशंका थी कि संघर्ष बढ़ने पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जलमार्ग जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ता।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ताजा गिरावट के बावजूद भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। हाल के दिनों में लाल सागर क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी गतिविधियों ने बाजार की चिंता को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है। यदि क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में दोबारा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जुलाई महीने के दौरान आई तेज गिरावट के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें अभी भी महीने की शुरुआत की तुलना में काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि आपूर्ति से जुड़े जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सामान्य आवाजाही अभी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। इसलिए निवेशकों की नजर अब भी पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बनी हुई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर विदेशी मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दिया। सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में 41 पैसे की मजबूती के साथ 96.15 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका सकारात्मक प्रभाव तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति पर भी पड़ सकता है।

    आने वाले दिनों में वैश्विक निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और प्रमुख समुद्री मार्गों पर तेल आपूर्ति की सामान्य स्थिति पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर ही कच्चे तेल की कीमतों की अगली दिशा तय होने की संभावना है।

  • सुहागरात के दिन ही नकदी-जेवर लेकर फरार हो गई दुल्हन!

    सुहागरात के दिन ही नकदी-जेवर लेकर फरार हो गई दुल्हन!


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से शादी के नाम पर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हरियाणा के एक युवक से धूमधाम से शादी कराने के बाद दुल्हन कुछ ही घंटों में नकदी और आभूषण लेकर फरार हो गई। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो महिला बिचौलियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि फरार दुल्हन की तलाश जारी है।
    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के दौरान पूरे गिरोह का खुलासा होने की संभावना है।

    शादी का झांसा देकर वसूले 1.10 लाख रुपये

    पुलिस के अनुसार, हरियाणा के सोनीपत जिले के खरखौदा थाना क्षेत्र के सिसाना गांव निवासी रविंद्र कुमार सिंह को देवरिया में शादी कराने का भरोसा दिलाया गया था। इसके लिए बिचौलियों ने उससे 1.10 लाख रुपये लिए। 24 जुलाई की रात भलुअनी कस्बे के एक मैरिज हॉल में गोल्डी यादव नाम की युवती के साथ उसकी शादी कराई गई। सभी वैवाहिक रस्में पूरी हुईं और सात फेरे भी लिए गए।

    सुहागरात से पहले ही लेकर भागी नकदी और जेवर

    शादी के कुछ ही घंटों बाद दुल्हन अचानक गायब हो गई। आरोप है कि वह अपने साथ 1.10 लाख रुपये नकद और शादी के दौरान मिले आभूषण भी ले गई।

    काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला तो पीड़ित दूल्हे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस ने दो महिला बिचौलियों को दबोचा

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान शादी कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाली मीना देवी और गीता देवी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उनके पास से बिचौलिये के तौर पर लिए गए 40 हजार रुपये भी बरामद किए हैं।

    फरार दुल्हन की तलाश जारी

    पुलिस के मुताबिक, फरार दुल्हन गोरखपुर जिले के बड़हलगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

    अधिकारियों का कहना है कि जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं यह शादी के नाम पर ठगी करने वाले किसी संगठित गिरोह का हिस्सा तो नहीं है।

    पुलिस का क्या कहना है?

    बरहज क्षेत्राधिकारी (सीओ) राजेश कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि शादी के बाद दुल्हन के नकदी और आभूषण लेकर फरार होने की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और फरार दुल्हन की तलाश जारी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा और पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

  • देवास में गूंजा वीरों के शौर्य का जयघोष कारगिल योद्धाओं का सम्मान पूर्व सैनिकों और जनप्रतिनिधियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    देवास में गूंजा वीरों के शौर्य का जयघोष कारगिल योद्धाओं का सम्मान पूर्व सैनिकों और जनप्रतिनिधियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि


    देवास । कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देवास में रविवार शाम शौर्य सम्मान और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत भव्य समारोह का आयोजन किया गया। सनातन विचार मंच की ओर से मल्हार स्मृति सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान कारगिल के अमर शहीदों और देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरा सभागृह देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया और उपस्थित लोगों ने वीर सैनिकों के सम्मान में जोरदार तालियां बजाकर उनका अभिनंदन किया।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक सेवारत सैनिक समाजसेवी और नागरिक मौजूद रहे। समारोह में भाजपा जिला अध्यक्ष राय सिंह सेंधव पूर्व मंत्री दीपक जोशी तथा कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाले वीर सैनिक विशेष रूप से शामिल हुए। सभी अतिथियों ने मंच से कारगिल युद्ध के इतिहास को याद करते हुए देश की सीमाओं की रक्षा में जवानों के अदम्य साहस पर गर्व व्यक्त किया।

    सम्मान समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक जीत का प्रतीक नहीं बल्कि उन वीर सपूतों के अद्वितीय साहस त्याग और राष्ट्रभक्ति को नमन करने का अवसर है जिन्होंने दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मनों का सामना करते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि देश आज सुरक्षित है तो उसके पीछे हमारे सैनिकों का अथक परिश्रम समर्पण और सर्वोच्च बलिदान है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

    कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण उस समय देखने को मिला जब पूर्व मंत्री दीपक जोशी देशभक्ति गीतों की धुन पर वीर सैनिकों के साथ उत्साहपूर्वक झूमते नजर आए। सभागृह में मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। देशभक्ति गीतों और राष्ट्रगान से पूरा वातावरण राष्ट्रप्रेम की भावना से सराबोर हो गया।

    वक्ताओं ने अपने संबोधन में युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों का अनुशासन समर्पण और देशप्रेम हर नागरिक के लिए प्रेरणा है। युवाओं को उनके आदर्शों से सीख लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। कार्यक्रम के दौरान कारगिल युद्ध के वीरों के संघर्ष और बलिदान से जुड़े प्रसंगों का भी उल्लेख किया गया जिससे उपस्थित लोग भावुक हो उठे।

    समारोह के अंत में सभी ने एक स्वर में भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष लगाए। देशभक्ति के नारों से पूरा सभागृह गूंज उठा और कारगिल के वीर शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। यह आयोजन न केवल वीर सैनिकों के सम्मान का अवसर बना बल्कि नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति और देश सेवा की भावना को मजबूत करने का भी संदेश दे गया।

  • दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट, जिसका रकबा मुंबई से भी ज्यादा; कई छोटे देशों से है विशाल

    दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट, जिसका रकबा मुंबई से भी ज्यादा; कई छोटे देशों से है विशाल


    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट की बात आते ही ज्यादातर लोग सबसे व्यस्त या सबसे ज्यादा यात्रियों वाले हवाई अड्डे के बारे में सोचते हैं। लेकिन यदि पैमाना जमीन का क्षेत्रफल हो, तो यह रिकॉर्ड सऊदी अरब के नाम दर्ज है। यहां स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट (King Fahd International Airport) अपने विशाल क्षेत्रफल के कारण दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट माना जाता है।

    776 वर्ग किलोमीटर में फैला है एयरपोर्ट

    सऊदी अरब के दम्माम शहर के पास स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लगभग 776 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह क्षेत्रफल कई देशों और बड़े शहरों से भी अधिक है। हालांकि, इस पूरे इलाके का उपयोग वर्तमान में एयरपोर्ट संचालन के लिए नहीं किया जाता। इसका बड़ा हिस्सा भविष्य में विस्तार (एक्सपेंशन) की योजनाओं के लिए सुरक्षित रखा गया है।

    कई छोटे देशों से भी बड़ा

    इस एयरपोर्ट का कुल क्षेत्रफल दुनिया के कई छोटे देशों से अधिक है। उदाहरण के लिए:

    सिंगापुर का क्षेत्रफल लगभग 735 वर्ग किलोमीटर है।
    बहरीन का क्षेत्रफल करीब 786 वर्ग किलोमीटर है, यानी एयरपोर्ट उसके लगभग बराबर है।
    वेटिकन सिटी और मालदीव जैसे देशों की तुलना में भी यह कई गुना बड़ा है।
    भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई का क्षेत्रफल करीब 603 वर्ग किलोमीटर है, जो इस एयरपोर्ट से काफी छोटा है।
    आकार के लिए मशहूर, भीड़ के लिए नहीं

    किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स में शामिल नहीं है। इसकी पहचान मुख्य रूप से इसके विशाल भूमि क्षेत्र के कारण है। एयरपोर्ट का बड़ा हिस्सा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आरक्षित रखा गया है, जिससे आने वाले वर्षों में इसका विस्तार आसानी से किया जा सके।

    दम्माम क्षेत्र का प्रमुख एविएशन हब

    यह एयरपोर्ट सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में स्थित दम्माम और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हवाई केंद्र है। यहां से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों का संचालन होता है और यह देश के प्रमुख रणनीतिक एयरपोर्ट्स में गिना जाता है।

    दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट का खिताब यात्रियों की संख्या से नहीं, बल्कि उसके विशाल भू-भाग से तय होता है और इस मामले में किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट आज भी शीर्ष पर कायम है।