Blog

  • दतिया में बीजेपी की अग्निपरीक्षा नरोत्तम समर्थकों की नाराजगी और जातीय समीकरणों के बीच फंसा उपचुनाव

    दतिया में बीजेपी की अग्निपरीक्षा नरोत्तम समर्थकों की नाराजगी और जातीय समीकरणों के बीच फंसा उपचुनाव


    दतिया । दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं बल्कि बदले हुए राजनीतिक समीकरण बन गए हैं। पूर्व गृह मंत्री और लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद चुनावी माहौल बदलता नजर आ रहा है। पार्टी ने उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है लेकिन जमीन पर नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव और समर्थकों की भावनाएं अब भी चुनावी चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।

    ग्रामीण इलाकों में कई मतदाता आज भी नरोत्तम मिश्रा को दादा के नाम से याद करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में उनकी सक्रिय भूमिका रहती थी। ऐसे में टिकट बदलने के फैसले के बाद कुछ समर्थकों में नाराजगी दिखाई दे रही है। हालांकि पार्टी इसे पूरी तरह नियंत्रित करने का दावा कर रही है।

    पिछले करीब 18 वर्षों में दतिया बीजेपी संगठन में नरोत्तम मिश्रा का मजबूत प्रभाव रहा। इस दौरान उनका समर्थक नेटवर्क बूथ स्तर तक सक्रिय रहा और चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी भी काफी हद तक इसी टीम के पास रही। अब नए उम्मीदवार के साथ पार्टी को बूथ स्तर पर संगठन को फिर से सक्रिय करना पड़ रहा है। पुराने कार्यकर्ता दोबारा मैदान में जरूर उतरे हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर उनका जनसंपर्क पहले जैसा मजबूत नहीं माना जा रहा।

    इसी चुनौती को देखते हुए बीजेपी ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। अब तक आठ मंत्री क्षेत्र में प्रचार कर चुके हैं जबकि 20 विधायकों को अलग अलग शक्ति केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी भी लगातार मतदाताओं तक पहुंचने में जुटे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि व्यापक संगठनात्मक अभियान से संभावित नुकसान की भरपाई की जा सकेगी।

    नरोत्तम मिश्रा भी चुनावी अभियान से पूरी तरह दूर नहीं हैं। उन्हें चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है और उनके फोटो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रचार सामग्री में प्रमुखता से लगाए गए हैं। हालांकि उनका प्रचार करने का तरीका अलग है। वे उम्मीदवार के साथ मंच साझा करने के बजाय स्वयं घर घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं।

    नरोत्तम मिश्रा ने समर्थकों की नाराजगी के सवाल पर कहा कि अब पार्टी में कोई असंतुष्ट नहीं है और सभी कार्यकर्ता भाजपा की जीत के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने उन्हें लंबे समय तक विधायक और मंत्री बनने का अवसर दिया और अब वे केवल एक कार्यकर्ता के रूप में संगठन की जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस उपचुनाव में जातीय समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। खासकर ब्राह्मण मतदाताओं का रुझान चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में दतिया का उपचुनाव केवल उम्मीदवारों की लड़ाई नहीं बल्कि संगठन की मजबूती स्थानीय नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।

  • गेहूं उत्पादन के बाद अब भंडारण में भी एमपी का दम 35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के साथ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल

    गेहूं उत्पादन के बाद अब भंडारण में भी एमपी का दम 35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के साथ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल


    नई दिल्ली । देश में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के लिए पहचान बना चुका मध्य प्रदेश अब सरकारी खाद्यान्न भंडारण क्षमता के मामले में भी नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 34.94 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इस उपलब्धि के साथ मध्य प्रदेश देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हो गया है और पंजाब हरियाणा राजस्थान गुजरात तमिलनाडु तेलंगाना तथा ओडिशा जैसे कई बड़े कृषि राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।

    राज्यसभा में उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से दिए गए लिखित उत्तर में यह जानकारी सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 3493.80 हजार मीट्रिक टन यानी लगभग 34.94 लाख मीट्रिक टन सरकारी खाद्यान्न भंडारण क्षमता उपलब्ध है। यह क्षमता प्रदेश में खरीदे गए गेहूं धान और अन्य खाद्यान्नों के सुरक्षित भंडारण तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    केंद्र सरकार के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय खाद्य निगम राज्य एजेंसियों और अन्य व्यवस्थाओं को मिलाकर देशभर में कुल 55493.76 हजार मीट्रिक टन यानी लगभग 5.55 करोड़ मीट्रिक टन खाद्यान्न भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इसमें अकेले मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 6.3 प्रतिशत है। यह दर्शाता है कि देश के खाद्य सुरक्षा तंत्र में मध्य प्रदेश की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

    भंडारण क्षमता के मामले में प्रदेश से आगे केवल उत्तर प्रदेश बिहार महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश का स्थान आता है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रदेश पिछले कुछ वर्षों में गेहूं उत्पादन और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद में भी लगातार अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। अब पर्याप्त भंडारण क्षमता उपलब्ध होने से खरीदे गए अनाज के सुरक्षित संरक्षण और समय पर वितरण में भी आसानी होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक गोदामों और वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं के विस्तार से अनाज की बर्बादी कम होगी और किसानों से खरीदी गई उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी और जरूरत के समय विभिन्न राज्यों तक खाद्यान्न की आपूर्ति भी सुचारु रूप से की जा सकेगी।

    मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि राज्य के कृषि और खाद्य प्रबंधन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। उत्पादन के साथ साथ भंडारण क्षमता में हुई यह बढ़ोतरी प्रदेश को देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का और अधिक मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

  • वीकेंड पर क्या देखें यहां है इस हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्मों की पूरी लिस्ट एक्शन कॉमेडी रोमांस और फैमिली ड्रामा सब कुछ मिलेगा

    वीकेंड पर क्या देखें यहां है इस हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्मों की पूरी लिस्ट एक्शन कॉमेडी रोमांस और फैमिली ड्रामा सब कुछ मिलेगा

    नई दिल्ली । अगर आप वीकेंड पर परिवार या दोस्तों के साथ थिएटर में नई फिल्म देखने की योजना बना रहे हैं तो यह सप्ताह आपके लिए शानदार रहने वाला है। 27 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बड़े पर्दे पर एक्शन सुपरहीरो कॉमेडी फैमिली ड्रामा और रोमांस से भरपूर कई फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक अलग अलग जॉनर की फिल्मों के साथ दर्शकों को मनोरंजन का भरपूर मौका मिलेगा।

    स्पाइडर मैन ब्रांड न्यू डे
    रिलीज डेट – 30 जुलाई
    इस सप्ताह की सबसे बड़ी रिलीज हॉलीवुड की सुपरहीरो फिल्म स्पाइडर मैन ब्रांड न्यू डे है। फिल्म में पीटर पार्कर अपनी सुपरहीरो पहचान से दूर एक सामान्य कॉलेज छात्र की जिंदगी जीने की कोशिश करता है। लेकिन जब उसके करीबियों पर नया खतरा मंडराता है तो उसे फिर से स्पाइडर मैन बनकर दुनिया की रक्षा के लिए मैदान में उतरना पड़ता है। एक्शन और सुपरहीरो फिल्मों के प्रशंसकों के लिए यह फिल्म खास आकर्षण होगी।

    भाई तेरा स्टार है
    रिलीज डेट – 30 जुलाई
    राघव जुयाल अभिनीत यह फिल्म कॉमेडी और फैमिली ड्रामा का अनोखा मिश्रण है। कहानी एक ऐसे अभिनेता की है जो क्रिकेट सट्टेबाजी के कारण कर्ज में फंस जाता है। मुश्किलों से निकलने की कोशिश में बोला गया एक झूठ उसे और उसके परिवार को हास्यास्पद और रोमांचक घटनाओं के बीच पहुंचा देता है। राघव जुयाल की कॉमिक टाइमिंग इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है।

    ओह माय डॉग
    नई रिलीज डेट – 7 अगस्त
    यह फिल्म पहले 31 जुलाई को रिलीज होने वाली थी लेकिन निर्माताओं ने इसकी रिलीज टाल दी है। अब यह 7 अगस्त को सिनेमाघरों में आएगी। फिल्म एक छोटे बच्चे और एक बेघर कुत्ते के बीच बने भावनात्मक रिश्ते की कहानी है। पेट लवर्स और पारिवारिक दर्शकों के लिए यह एक भावुक और प्रेरणादायक फिल्म मानी जा रही है।

    दिल दीवाना हो गया
    रिलीज डेट – 31 जुलाई
    रोमांस और फैमिली ड्रामा से भरपूर यह फिल्म राहुल नैना और राज की जिंदगी के इर्द गिर्द घूमती है। प्यार विश्वास त्याग और रिश्तों की खूबसूरती को दर्शाती यह म्यूजिकल फिल्म पूरे परिवार के साथ देखने के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। साफ सुथरी कहानी और पारिवारिक भावनाओं के कारण यह फिल्म हर आयु वर्ग के दर्शकों को पसंद आ सकती है।

    इस सप्ताह सिनेमाघरों में हर वर्ग के दर्शकों के लिए कुछ न कुछ खास मौजूद है। जहां सुपरहीरो फिल्मों के प्रशंसकों के लिए स्पाइडर मैन सबसे बड़ा आकर्षण रहेगा वहीं कॉमेडी पसंद करने वालों के लिए भाई तेरा स्टार है और पारिवारिक दर्शकों के लिए दिल दीवाना हो गया अच्छी पसंद साबित हो सकती है। हालांकि ओह माय डॉग देखने के लिए दर्शकों को अब 7 अगस्त तक इंतजार करना होगा।

  • रावण बनने के लिए यश का अनोखा तरीका बड़े स्पीकर्स पर बजाते थे शिव भक्ति के गाने सेट पर बात करना भी हो जाता था मुश्किल

    रावण बनने के लिए यश का अनोखा तरीका बड़े स्पीकर्स पर बजाते थे शिव भक्ति के गाने सेट पर बात करना भी हो जाता था मुश्किल


    नई दिल्ली । फिल्म रामायण के बहुप्रतीक्षित ट्रेलर लॉन्च के दौरान अभिनेता यश ने शूटिंग से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा किया। रावण का किरदार निभा रहे यश ने बताया कि वह सेट पर बड़े स्पीकर्स लेकर आते थे और तेज आवाज में शिव भक्ति के गीत बजाते थे। उन्होंने हंसते हुए कहा कि उनकी इस आदत से पूरे सेट का माहौल बदल जाता था और कई बार लोगों को बातचीत करने में भी दिक्कत होती थी।

    सैन डिएगो कॉमिक कॉन में फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर निर्देशक नितेश तिवारी निर्माता नमित मल्होत्रा और यश मौजूद रहे। बातचीत के दौरान जब यश से पूछा गया कि वह हर दिन खुद को रावण के किरदार में कैसे ढालते थे तो उन्होंने बताया कि जैसे ही वह रावण का विशाल मुकुट पहनते थे वह अपने किरदार के भाव में पहुंच जाते थे। इसके साथ ही संगीत भी उनके लिए इस तैयारी का अहम हिस्सा था।

    इसी दौरान निर्देशक नितेश तिवारी ने यश को उनके तेज म्यूजिक की याद दिलाई। इस पर यश ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्होंने एक तरह से पूरे सेट का माहौल बदल दिया था। वह बड़े स्पीकर्स पर पूरी आवाज में गाने चलाते थे ताकि अपने किरदार की मानसिक स्थिति में बने रह सकें।

    यश ने बताया कि वह खास तौर पर भगवान शिव की भक्ति से जुड़े गीत सुनते थे। उनके अनुसार रावण भगवान शिव का परम भक्त था इसलिए वह उसी भक्ति और ऊर्जा को महसूस करना चाहते थे। उनका मानना था कि इस तरह का माहौल उन्हें अपने अभिनय में गहराई लाने में मदद करता था। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि तेज संगीत के कारण सेट पर मौजूद अन्य लोगों को बातचीत करने में परेशानी होती थी।

    रणबीर कपूर ने भी इस दौरान यश की तारीफ करते हुए कहा कि भले ही पहले भाग में उनके और यश के साथ कोई दृश्य नहीं है लेकिन जिन कलाकारों ने यश के साथ काम किया उन्होंने बताया कि उनका व्यक्तित्व और उनकी तैयारी पूरे सेट की ऊर्जा बदल देती थी। रणबीर ने कहा कि यश का प्रभाव इतना मजबूत था कि उनके किरदार की झलक शूटिंग के माहौल में भी महसूस होती थी।

    फिल्म रामायण का पहला भाग इस साल दिवाली पर रिलीज होने वाला है। पहले भाग में राम और रावण आमने सामने नहीं दिखाई देंगे जबकि दोनों के बीच महायुद्ध दूसरे भाग में दिखाया जाएगा जो वर्ष 2027 में रिलीज होगा। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में और यश रावण के किरदार में नजर आएंगे। इसके अलावा साई पल्लवी सीता सनी देओल हनुमान काजल अग्रवाल मंदोदरी रवि दुबे लक्ष्मण अरुण गोविल दशरथ और लारा दत्ता कैकेयी सहित कई कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

  • टीम इंडिया का अगला मिशन श्रीलंका 15 अगस्त से शुरू होगी टेस्ट सीरीज अक्टूबर तक का पूरा कार्यक्रम आया सामने

    टीम इंडिया का अगला मिशन श्रीलंका 15 अगस्त से शुरू होगी टेस्ट सीरीज अक्टूबर तक का पूरा कार्यक्रम आया सामने


    नई दिल्ली । जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार 3-0 की जीत दर्ज करने के बाद अब भारतीय क्रिकेट टीम की नजर अगले विदेशी दौरे पर है। करीब 15 दिन के ब्रेक के बाद टीम इंडिया श्रीलंका का दौरा करेगी जहां उसे दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है। इस दौरे के साथ भारतीय टीम एक बार फिर लाल गेंद के क्रिकेट में मैदान पर उतरेगी। माना जा रहा है कि इस सीरीज के लिए टीम का ऐलान 28 जुलाई को किया जा सकता है।

    आईपीएल 2026 के बाद भारतीय टीम लगातार विदेशी दौरों पर व्यस्त रही है। सबसे पहले टीम ने आयरलैंड का दौरा किया जहां उसे सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी भारत वनडे और टी20 दोनों सीरीज जीतने में सफल नहीं रहा। हालांकि जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम इंडिया ने टी20 सीरीज 3-0 से अपने नाम कर आत्मविश्वास हासिल किया है।

    अब भारतीय टीम का अगला मुकाबला श्रीलंका से होगा। दोनों देशों के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 15 अगस्त से गॉल में शुरू होगा जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। श्रीलंका की घरेलू परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजी बड़ी भूमिका निभाती है इसलिए यह दौरा भारतीय टीम के लिए आसान नहीं माना जा रहा।

    श्रीलंका दौरे के बाद भारतीय खिलाड़ियों को लगभग एक महीने का आराम मिलेगा। इसके बाद सितंबर के आखिर में वेस्टइंडीज की टीम भारत दौरे पर आएगी। इस दौरे में तीन वनडे और पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जाएंगे। घरेलू मैदान पर होने वाली इस सीरीज में भारतीय टीम मजबूत प्रदर्शन के इरादे से उतरेगी।

    अक्टूबर तक टीम इंडिया का शेड्यूल
    15 अगस्त 2026 -पहला टेस्ट, श्रीलंका बनाम भारत, गॉल, सुबह 10 बजे
    23 अगस्त 2026 -दूसरा टेस्ट, श्रीलंका बनाम भारत, कोलंबो (SSC), सुबह 10 बजे

    वेस्टइंडीज का भारत दौर
    27 सितंबर 2026 -पहला वनडे, तिरुवनंतपुरम, दोपहर 2 बजे
    30 सितंबर 2026 -दूसरा वनडे, गुवाहाटी, दोपहर 2 बजे
    3 अक्टूबर 2026 -तीसरा वनडे, न्यू चंडीगढ़, दोपहर 2 बजे

    टी20 सीरी
    6 अक्टूबर 2026 -पहला टी20, लखनऊ, शाम 7 बजे
    9 अक्टूबर 2026  -दूसरा टी20, रांची, शाम 7 बजे
    11 अक्टूबर 2026  -तीसरा टी20, इंदौर, शाम 7 बजे
    14 अक्टूबर 2026 -चौथा टी20, हैदराबाद, शाम 7 बजे
    17 अक्टूबर 2026 -पांचवां टी20, बेंगलुरु, शाम 7 बजे

    भारतीय टीम के सामने अब लगातार चुनौतीपूर्ण मुकाबलों का सिलसिला है। श्रीलंका में टेस्ट सीरीज जीतने के बाद टीम घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ सीमित ओवरों की सीरीज खेलेगी। ऐसे में आने वाले महीनों में क्रिकेट प्रशंसकों को लगातार रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे।

  • बादाम के तेल से निखरेगी त्वचा की प्राकृतिक चमक जानिए कैसे पाएं बेदाग मुलायम और जवां स्किन का राज

    बादाम के तेल से निखरेगी त्वचा की प्राकृतिक चमक जानिए कैसे पाएं बेदाग मुलायम और जवां स्किन का राज


    नई दिल्ली । त्वचा की खूबसूरती बनाए रखने के लिए लोग तरह तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार महंगे उत्पाद भी उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं दे पाते। ऐसे में प्राकृतिक उपाय हमेशा बेहतर विकल्प माने जाते हैं। बादाम का तेल उन्हीं प्राकृतिक उपायों में से एक है जो सदियों से त्वचा की देखभाल के लिए उपयोग किया जाता रहा है। इसमें मौजूद विटामिन ई विटामिन ए ओमेगा फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को अंदर से पोषण देकर उसे स्वस्थ चमकदार और मुलायम बनाने में मदद करते हैं।

    बादाम का तेल त्वचा को गहराई तक नमी प्रदान करता है। जिन लोगों की त्वचा रूखी रहती है उनके लिए यह किसी प्राकृतिक मॉइस्चराइजर से कम नहीं है। नियमित रूप से रात में चेहरे पर हल्के हाथों से बादाम के तेल की मालिश करने से त्वचा लंबे समय तक हाइड्रेट रहती है और उसकी प्राकृतिक चमक भी बढ़ने लगती है। यह त्वचा को मुलायम बनाने के साथ उसकी लोच बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है।

    अगर चेहरे पर हल्के दाग धब्बे या पिगमेंटेशन की समस्या है तो बादाम का तेल धीरे धीरे त्वचा की रंगत को समान बनाने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद विटामिन ई त्वचा की कोशिकाओं को पोषण देता है और नई कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। लगातार और सही तरीके से उपयोग करने पर चेहरा अधिक साफ और दमकता हुआ नजर आने लगता है।

    आंखों के नीचे काले घेरे और सूजन की समस्या से परेशान लोगों के लिए भी बादाम का तेल फायदेमंद माना जाता है। रात में सोने से पहले आंखों के आसपास इसकी कुछ बूंदों से हल्की मालिश करने से त्वचा को पोषण मिलता है और धीरे धीरे डार्क सर्कल्स कम होने लगते हैं। हालांकि इसका असर व्यक्ति की जीवनशैली और नींद पर भी निर्भर करता है इसलिए पर्याप्त आराम करना भी जरूरी है।

    बादाम के तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। इससे समय से पहले झुर्रियां और फाइन लाइंस आने की संभावना कम हो सकती है। बढ़ती उम्र के साथ त्वचा की कसावट बनाए रखने के लिए भी इसका नियमित उपयोग लाभकारी माना जाता है।

    अगर त्वचा धूप के कारण बेजान हो गई है तो बादाम का तेल उसे पोषण देकर उसकी चमक लौटाने में मदद कर सकता है। यह त्वचा को शांत करने के साथ हल्की जलन और रूखेपन को भी कम करने में सहायक होता है। कई लोग इसे फेस मसाज ऑयल के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं जिससे रक्त संचार बेहतर होता है और त्वचा अधिक स्वस्थ दिखाई देती है।

    हालांकि बादाम का तेल पूरी तरह प्राकृतिक है फिर भी इसे पहली बार इस्तेमाल करने से पहले त्वचा पर पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है। जिन लोगों को नट्स से एलर्जी है उन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका उपयोग करना चाहिए। साथ ही संतुलित आहार पर्याप्त पानी और अच्छी नींद के साथ बादाम के तेल का उपयोग किया जाए तो त्वचा की खूबसूरती लंबे समय तक बरकरार रखी जा सकती है। प्राकृतिक देखभाल अपनाकर बिना महंगे उत्पादों के भी स्वस्थ चमकदार और आकर्षक त्वचा पाना संभव है।

  • भगवान शिव को कैसे करें प्रसन्न जानिए पूजा के सही नियम अभिषेक की विधि और वे उपाय जिनसे दूर होती हैं जीवन की हर बाधाएं

    भगवान शिव को कैसे करें प्रसन्न जानिए पूजा के सही नियम अभिषेक की विधि और वे उपाय जिनसे दूर होती हैं जीवन की हर बाधाएं


    नई दिल्ली । भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और निष्कपट भक्ति से बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरे विश्वास और पवित्र मन से भगवान शिव की आराधना करता है उसके जीवन से दुख संकट और बाधाएं धीरे धीरे दूर होने लगती हैं। विशेष रूप से श्रावण मास सोमवार प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इन दिनों विधि विधान से की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मिलता है।

    शिव जी को प्रसन्न करने के लिए सबसे पहले मन और तन दोनों की शुद्धता आवश्यक मानी गई है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ रखें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद दूध दही घी शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करना शुभ माना जाता है। अंत में पुनः स्वच्छ जल चढ़ाकर भगवान शिव का श्रृंगार करें और दीपक तथा धूप जलाकर पूजा आरंभ करें।

    भगवान शिव को बेलपत्र सबसे अधिक प्रिय हैं। पूजा में तीन पत्तियों वाले ताजे और साफ बेलपत्र अर्पित करें। इसके साथ धतूरा भांग आक के फूल सफेद पुष्प चंदन और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। मान्यता है कि बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। शिव पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना गया है। शिव चालीसा रुद्राष्टक और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी विशेष पुण्य प्रदान करता है।

    भगवान शिव की पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते केतकी का फूल और हल्दी अर्पित नहीं करनी चाहिए। पूजा के दौरान क्रोध अहंकार ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए क्योंकि भगवान शिव भाव और भक्ति के प्रतीक हैं। केवल दिखावे के लिए की गई पूजा से अधिक महत्व सच्ची श्रद्धा और निष्कपट मन का होता है।

    महादेव को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी माना जाता है। गरीबों को अन्न वस्त्र और आवश्यक सामग्री का दान करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। गौ सेवा वृक्षारोपण और जल संरक्षण जैसे पुण्य कार्य भी शिव आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माने गए हैं। यदि संभव हो तो सोमवार का व्रत रखें और शाम के समय शिव मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान शिव की आरती करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा सुख शांति और समृद्धि का वास होता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान शिव की नियमित पूजा करने से चंद्रमा शनि राहु और केतु से जुड़े दोषों का प्रभाव भी कम हो सकता है। मानसिक तनाव भय रोग आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक समस्याओं से राहत पाने के लिए भी शिव उपासना को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि जो भक्त सच्चे मन से महादेव का स्मरण करता है उस पर भगवान शिव अपनी असीम कृपा बरसाते हैं और उसके जीवन को सुख समृद्धि सफलता तथा आध्यात्मिक उन्नति से भर देते हैं। इसलिए पूजा में सबसे बड़ा नियम केवल एक है सच्ची आस्था पवित्र मन और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास।

  • भगवान नहीं ओरछा के असली राजा हैं श्रीराम जानिए क्यों इस अनोखे मंदिर में हर दिन पुलिस देती है गार्ड ऑफ ऑनर

    भगवान नहीं ओरछा के असली राजा हैं श्रीराम जानिए क्यों इस अनोखे मंदिर में हर दिन पुलिस देती है गार्ड ऑफ ऑनर


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित ऐतिहासिक नगरी ओरछा अपनी भव्य विरासत और धार्मिक आस्था के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां स्थित राम राजा सरकार मंदिर भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां भगवान श्रीराम को केवल ईश्वर नहीं बल्कि ओरछा के वास्तविक राजा के रूप में पूजा जाता है। यही वजह है कि यहां आज भी मध्य प्रदेश पुलिस प्रतिदिन भगवान श्रीराम को गार्ड ऑफ ऑनर देकर राजकीय सम्मान प्रदान करती है। यह अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है और देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    राम राजा सरकार का मंदिर किसी पारंपरिक मंदिर की तरह नहीं बल्कि एक राजमहल जैसा दिखाई देता है। यहां भगवान श्रीराम राजा की तरह सिंहासन पर विराजमान रहते हैं। सुबह की मंगला आरती से लेकर रात्रि के शयन तक सभी धार्मिक अनुष्ठान राजशाही परंपरा के अनुसार संपन्न होते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भी भगवान के दर्शन किसी देवालय में नहीं बल्कि अपने राजा के दरबार में उपस्थित होने की भावना से करते हैं।

    इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा रोजाना होने वाला गार्ड ऑफ ऑनर है। मध्य प्रदेश पुलिस के जवान निर्धारित समय पर मंदिर परिसर में पहुंचकर शस्त्रों के साथ भगवान श्रीराम को सलामी देते हैं। यह सम्मान उसी प्रकार दिया जाता है जैसा किसी राष्ट्राध्यक्ष या राज्य के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति को दिया जाता है। इस अद्भुत परंपरा को देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर पहुंचते हैं।

    राम राजा सरकार मंदिर की स्थापना के पीछे एक प्रसिद्ध धार्मिक कथा भी जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार ओरछा की महारानी कुंवरि गणेश भगवान श्रीराम की परम भक्त थीं। उन्होंने अयोध्या जाकर सरयू नदी के तट पर कठोर तपस्या की और भगवान श्रीराम से ओरछा चलने की प्रार्थना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम बाल स्वरूप में उनके साथ ओरछा आने के लिए तैयार हो गए।

    कहा जाता है कि ओरछा आने से पहले भगवान श्रीराम ने महारानी के सामने दो शर्तें रखीं। पहली यह कि ओरछा में वे राजा के रूप में ही विराजमान रहेंगे और दूसरी यह कि जहां पहली बार उन्हें स्थापित किया जाएगा वहां से वे कभी दूसरी जगह नहीं जाएंगे। महारानी ने दोनों शर्तें स्वीकार कर लीं।

    ओरछा पहुंचने पर महारानी ने भगवान श्रीराम को सबसे पहले अपने राजमहल के रसोईघर में विराजमान कराया। भगवान श्रीराम वहीं स्थायी रूप से स्थापित हो गए और समय के साथ वही स्थान विश्व प्रसिद्ध राम राजा सरकार मंदिर बन गया। तभी से ओरछा में भगवान श्रीराम को राजा का दर्जा प्राप्त है और आज भी पूरा नगर उन्हें अपना वास्तविक शासक मानता है।

    राम राजा सरकार मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी अद्भुत प्रतीक है। यहां निभाई जाने वाली राजशाही परंपराएं और भगवान श्रीराम को दिया जाने वाला राजकीय सम्मान इस मंदिर को देश के अन्य सभी राम मंदिरों से अलग पहचान दिलाता है।

  • खेलों में सफलता की राह आसान बना सकती हैं घर की ये 3 दिशाएं, वास्तु संतुलन से बढ़ सकता है आत्मविश्वास और प्रदर्शन

    खेलों में सफलता की राह आसान बना सकती हैं घर की ये 3 दिशाएं, वास्तु संतुलन से बढ़ सकता है आत्मविश्वास और प्रदर्शन

    नई दिल्ली । खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन केवल प्रतिभा, कड़ी मेहनत और नियमित अभ्यास पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि कई लोग मानते हैं कि सकारात्मक वातावरण और ऊर्जा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर या प्रशिक्षण स्थल की दिशाओं का संतुलन व्यक्ति के आत्मविश्वास, मानसिक शक्ति और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से खेल जगत से जुड़े लोगों के लिए दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-दक्षिण-पूर्व और दक्षिण दिशा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार ये तीनों दिशाएं मिलकर अग्नि तत्व का क्षेत्र बनाती हैं। अग्नि तत्व को ऊर्जा, उत्साह, साहस और सक्रियता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यदि यह क्षेत्र संतुलित और दोषमुक्त हो तो खिलाड़ी के भीतर प्रतिस्पर्धा की भावना मजबूत होती है और वह अपने लक्ष्य पर अधिक एकाग्रता के साथ काम कर पाता है। इससे मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास में भी सकारात्मक वृद्धि हो सकती है।

    दक्षिण-दक्षिण-पूर्व दिशा को विशेष रूप से साहस और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इस दिशा का संतुलित होना खिलाड़ी को कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखने और बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है। कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में बैठकर भोजन करना भी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की बात कही जाती है।

    दक्षिण दिशा को यश, सम्मान और पहचान की दिशा माना जाता है। वास्तु मान्यता के अनुसार यदि इस दिशा में किसी प्रकार का दोष हो तो व्यक्ति को अपनी मेहनत के अनुरूप सफलता या पहचान मिलने में कठिनाई आ सकती है। वहीं यदि यह दिशा संतुलित रहे तो खेल के क्षेत्र में उपलब्धियों के साथ सामाजिक सम्मान और पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ने की बात कही जाती है। हालांकि सफलता के लिए निरंतर अभ्यास और प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण आधार बने रहते हैं।

    दक्षिण-पूर्व दिशा को संसाधनों और आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रशिक्षण, उपकरण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जरूरत होती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा का संतुलन व्यक्ति को संसाधनों के बेहतर उपयोग और आर्थिक सहयोग प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र को व्यवस्थित और सकारात्मक बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    अग्नि कोण में रसोई का होना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह अग्नि तत्व के स्वाभाविक स्वरूप के अनुरूप माना जाता है। वहीं इस क्षेत्र में जल तत्व से जुड़ी वस्तुएं, अत्यधिक नीले या काले रंग का उपयोग तथा अनावश्यक पानी की व्यवस्था करने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यताओं के अनुसार इससे ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

    वास्तु शास्त्र को मानने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि जो युवा या पेशेवर खिलाड़ी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें अपने घर या अभ्यास स्थल की इन दिशाओं को स्वच्छ, व्यवस्थित और वास्तुदोष से मुक्त रखने का प्रयास करना चाहिए। हालांकि यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि खेलों में सफलता का सबसे बड़ा आधार नियमित अभ्यास, अनुशासन, उचित प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प ही है, जबकि वास्तु संबंधी उपाय व्यक्तिगत आस्था और मान्यता का विषय हैं।

  • लड्डू गोपाल को क्या हर दिन चाहिए माखन मिश्री जानें कौन सा भोग है प्रिय और क्या कहते हैं शास्त्रीय नियम

    लड्डू गोपाल को क्या हर दिन चाहिए माखन मिश्री जानें कौन सा भोग है प्रिय और क्या कहते हैं शास्त्रीय नियम


    नई दिल्ली । भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की सेवा सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ और मंगलकारी मानी जाती है। मान्यता है कि जिस घर में श्रद्धा और प्रेम से लड्डू गोपाल की सेवा की जाती है वहां सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। श्रीकृष्ण को माखन और मिश्री सबसे प्रिय भोगों में माना जाता है इसलिए अधिकांश भक्त प्रतिदिन उन्हें माखन मिश्री अर्पित करते हैं। हालांकि कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि किसी दिन माखन मिश्री उपलब्ध न हो या उसका भोग न लगाया जाए तो क्या लड्डू गोपाल नाराज हो जाते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों के प्रेम और सच्ची भावना के भूखे हैं न कि केवल किसी विशेष भोग के। यदि किसी कारणवश प्रतिदिन माखन मिश्री अर्पित करना संभव न हो तो इससे भगवान नाराज नहीं होते। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो भी भोग अर्पित किया जाए वह पूरी श्रद्धा पवित्रता और प्रेम के साथ समर्पित किया जाए। भगवान के लिए भाव सबसे बड़ा होता है।

    यदि माखन मिश्री उपलब्ध न हो तो लड्डू गोपाल को मिश्री दूध दही ताजे मौसमी फल धनिया पंजीरी मखाने की खीर रबड़ी मालपुआ या घर में बना सात्विक भोजन भी भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है। केले आम खरबूजा जैसे मौसमी फल और केसर युक्त गुनगुना दूध भी भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं।

    भोग अर्पित करते समय कुछ धार्मिक नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना गया है। भगवान को जो भी प्रसाद अर्पित करें उसमें तुलसी दल या तुलसी का पत्ता अवश्य रखें क्योंकि बिना तुलसी के श्रीकृष्ण का भोग पूर्ण नहीं माना जाता। जिस प्रकार घर के छोटे बच्चे को समय पर भोजन कराया जाता है उसी भावना से लड्डू गोपाल को भी सुबह दोपहर शाम और रात्रि का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    भोग बनाते समय रसोई की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए और उसमें लहसुन प्याज या तामसिक पदार्थों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। भोग अर्पित करने के बाद उसे कुछ समय तक भगवान के सामने रखा रहने दें और साथ में स्वच्छ जल का पात्र भी अवश्य रखें। इसके बाद प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में श्रद्धापूर्वक बांट देना चाहिए।

    धार्मिक दृष्टि से भगवान श्रीकृष्ण भक्तों के निष्कपट प्रेम और समर्पण से प्रसन्न होते हैं। इसलिए यदि किसी दिन माखन मिश्री उपलब्ध न हो तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सच्चे मन से अर्पित किया गया सात्विक भोग और भक्तिभाव ही भगवान को सबसे अधिक प्रिय माना गया है।