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  • भारत में बढ़ती तंबाकू और शराब की लत: NFHS-6 रिपोर्ट ने खोली स्वास्थ्य संकट की पोल

    भारत में बढ़ती तंबाकू और शराब की लत: NFHS-6 रिपोर्ट ने खोली स्वास्थ्य संकट की पोल


    नई दिल्ली।  भारत में तंबाकू और शराब का बढ़ता चलन अब केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि देश के सामने खड़ा सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज’ (IIPS) द्वारा तैयार की गई नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट ने इस भयावह जमीनी हकीकत से पर्दा उठा दिया है। इस विस्तृत अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि देश की एक बहुत बड़ी आबादी नशे की गिरफ्त में आ चुकी है, जिसके चलते कैंसर, लिवर और दिल की गंभीर बीमारियों का ग्राफ तेजी से ऊपर भाग रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 30.4 प्रतिशत पुरुष किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं, जबकि लगभग 14.9 प्रतिशत पुरुष आबादी शराब की आदी हो चुकी है।

    यह आंकड़े राष्ट्रीय औसत को दर्शाते हैं, लेकिन अगर राज्यों के स्तर पर देखें तो स्थिति और भी ज्यादा डरावनी नजर आती है। पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में तंबाकू का सेवन करने वालों की संख्या खतरनाक स्तर पर है, वहीं पंजाब, गोवा और सिक्किम जैसे राज्यों में शराब के शौकीनों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार के सर्वे में शहरी इलाकों में नशे की लत ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले काफी अधिक दर्ज की गई है। कामकाजी और सबसे उत्पादक माने जाने वाले 25 से 54 वर्ष के आयु वर्ग के लोग इस लत से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जो देश के आर्थिक भविष्य के लिए भी एक बड़ा झटका है।

    तनाव और खराब जीवनशैली बनी वजह; इलाज के आर्थिक बोझ तले दब रहे परिवार
    चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि आधुनिक दौर में बढ़ता मानसिक तनाव, काम का दबाव, बदलती और बेहद खराब जीवनशैली के साथ-साथ जागरूकता का अभाव इस समस्या की सबसे प्रमुख वजहें हैं। लोग अक्सर शुरुआत में तनाव कम करने या दोस्तों के दबाव में आकर शौक के तौर पर नशा शुरू करते हैं, जो धीरे-धीरे एक गंभीर लत में तब्दील हो जाता है। तंबाकू और शराब का यह अनियंत्रित और लगातार सेवन सीधे तौर पर मानव शरीर को खोखला कर रहा है। इसके कारण मुंह और फेफड़ों का कैंसर, लिवर सिरोसिस, दिल का दौरा पड़ना और फेफड़ों की गंभीर बीमारी सीओपीडब्ल्यू (COPD) जैसी जानलेवा बीमारियों के मामले अस्पतालों में बाढ़ की तरह आ रहे हैं। रिपोर्ट आगाह करती है कि देश में हर साल लाखों लोगों की असमय मौत का कारण यही नशा बन रहा है, जिससे न सिर्फ कीमती जानें जा रही हैं, बल्कि इलाज के भारी-भरकम खर्च के कारण लाखों परिवार कर्ज और गरीबी के दलदल में धंसते जा रहे हैं।

    समय रहते संभलना जरूरी; सख्त नियमों और जागरूकता से ही निकलेगा समाधान
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस उभरते संकट से निपटने के लिए कुछ अत्यंत जरूरी और कड़े कदम उठाने की वकालत की है। उनके अनुसार, अब समय आ गया है जब सरकार को स्कूल और कॉलेजों के स्तर पर व्यापक रूप से नशामुक्ति और जागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि देश की भावी पीढ़ी को इस जहर से बचाया जा सके। इसके साथ ही तंबाकू और शराब की बिक्री, विज्ञापनों और उपलब्धता पर बेहद सख्त कानूनी नियम लागू करने की दरकार है। मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए काउंसलिंग केंद्रों की संख्या बढ़ानी होगी ताकि लोग तनाव से निपटने के लिए नशे का सहारा न लें। कुल मिलाकर, NFHS-6 की यह रिपोर्ट देश के नीति-निर्माताओं के लिए एक गंभीर चेतावनी की तरह है। यदि अब भी सामूहिक प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या देश के चिकित्सा तंत्र को ध्वस्त कर देगी। इस संकट से पार पाने के लिए सरकार, नागरिक समाज और खुद आम जनता को मिलकर एक बड़ी जंग छेड़नी होगी।

  • अदाणी पावर और एईएसएल में निवेश के लिए बुलिश संकेत, क्षमता विस्तार और मजबूत पीपीए की वजह

    अदाणी पावर और एईएसएल में निवेश के लिए बुलिश संकेत, क्षमता विस्तार और मजबूत पीपीए की वजह

    अहमदाबाद । ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अदाणी ग्रुप की तीन प्रमुख कंपनियों – अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड, अदाणी पावर लिमिटेड और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड – पर बुलिश रुख अपनाया है। जेफरीज का कहना है कि इन कंपनियों में क्षमता में तेज विस्तार, मजबूत क्रियान्वयन और बढ़ती मांग की वजह से निवेश के लिए आकर्षक अवसर मौजूद हैं।

    अदाणी ग्रीन एनर्जी को जेफरीज ने “बाय” रेटिंग के साथ 1,435 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार कंपनी वित्त वर्ष 2026 में 19.3 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता से वित्त वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है। इसमें 5 गीगावाट की पंप स्टोरेज परियोजना और बैटरी स्टोरेज सिस्टम में 10 गीगावाट से अधिक की वृद्धि शामिल है। गुजरात के खावड़ा में 30 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता का निर्माण चल रहा है, जो ग्रोथ का प्रमुख ड्राइवर है।

    अदाणी पावर पर जेफरीज ने अपनी “बाय” रेटिंग बनाए रखते हुए 255 रुपये का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। कंपनी वित्त वर्ष 2032 तक अपनी क्षमता 42 गीगावॉट तक बढ़ाने की योजना रखती है। इसके अलावा दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों (PPA) की मजबूत पाइपलाइन से आय में सुधार की संभावना है। वर्तमान में आगामी क्षमता का लगभग 56 प्रतिशत पीपीए पहले से ही सुनिश्चित किया जा चुका है।

    अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) के लिए जेफरीज ने 1,665 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ “बाय” रेटिंग बरकरार रखी है। एईएसएल भारत की एकमात्र सूचीबद्ध प्योर प्ले ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी है। कंपनी वर्तमान में 718 अरब रुपये के ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स क्रियान्वित कर रही है और स्मार्ट मीटरिंग व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 तक 11 मिलियन से अधिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।

    जेफरीज का अनुमान है कि मध्यम अवधि में एबिटा और कर के बाद मुनाफे में मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि होगी। यह क्रियान्वयन की गति, डेटा सेंटर, वाणिज्यिक और औद्योगिक ऊर्जा समाधानों में बढ़ते अवसरों और स्मार्ट मीटरिंग के व्यापक विस्तार से प्रेरित होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अदाणी ग्रुप की ये कंपनियां भारत में बढ़ती ऊर्जा मांग और ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से बढ़ते निवेश का लाभ उठा रही हैं। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि ग्रुप की लंबी अवधि की रणनीति और क्षमता विस्तार योजनाएं उनके पोर्टफोलियो के लिए आकर्षक साबित हो सकती हैं।

  • 27 साल बाद फिर गूंज सकती है ‘ताल’ की धुन, सुभाष घई ने ‘ताल-2’ को लेकर फैंस से मांगी राय

    27 साल बाद फिर गूंज सकती है ‘ताल’ की धुन, सुभाष घई ने ‘ताल-2’ को लेकर फैंस से मांगी राय


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा की चर्चित म्यूजिकल फिल्मों में शामिल ‘ताल’ एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। फिल्म के निर्माता-निर्देशक Subhash Ghai ने इसके संभावित सीक्वल को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिससे फिल्म प्रेमियों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने प्रशंसकों से सीधा सवाल पूछा कि क्या उन्हें ‘ताल-2’ का निर्माण करना चाहिए। इस सवाल के सामने आते ही फिल्म के सीक्वल को लेकर उत्साह बढ़ गया है।

    सुभाष घई ने अपने पोस्ट में फिल्म ‘ताल’ से जुड़ी एक खास याद साझा की। उन्होंने बताया कि उन्हें इस फिल्म के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली थी। उन्होंने उस अवसर को याद किया जब प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक Roger Ebert ने फिल्म की प्रशंसा की थी। घई ने बताया कि एक विशेष फिल्म समारोह में ‘ताल’ के प्रदर्शन के दौरान फिल्म को संगीत, प्रस्तुति और अभिनय के लिए काफी सराहा गया था।

    निर्देशक के अनुसार, फिल्म को उस दौर में भारतीय सिनेमा की एक अलग पहचान के रूप में देखा गया था। इसकी कहानी, भावनात्मक प्रस्तुति और संगीत ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का भी ध्यान आकर्षित किया था। यही वजह है कि वर्षों बाद भी यह फिल्म दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में गिनी जाती है।

    अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सुभाष घई ने यह भी संकेत दिया कि यदि ‘ताल-2’ बनती है तो इसमें नई पीढ़ी के कलाकारों और एक युवा निर्देशक को अवसर दिया जा सकता है। उन्होंने सीधे तौर पर फैंस से राय मांगी कि क्या दर्शक इस क्लासिक फिल्म की नई कहानी को बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं। इस सवाल के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म प्रेमियों की प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आने लगी हैं।

    साल 1999 में रिलीज हुई Taal उस दौर की सबसे सफल और चर्चित फिल्मों में शामिल रही थी। फिल्म में Aishwarya Rai, Anil Kapoor और Akshaye Khanna ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसके गीत और संगीत भी जबरदस्त लोकप्रिय हुए थे। आज भी इसके कई गाने श्रोताओं की पसंदीदा सूची में शामिल हैं।

    फिल्म की सफलता का एक बड़ा कारण इसका संगीत भी माना जाता है। शानदार गीतों, आकर्षक लोकेशनों और प्रभावशाली अभिनय ने इसे उस समय की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया था। बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करने के साथ-साथ फिल्म ने कई पुरस्कार भी अपने नाम किए थे।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्लासिक फिल्मों के सीक्वल और रीबूट को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला है। ऐसे में यदि ‘ताल-2’ का निर्माण होता है तो यह नई पीढ़ी के दर्शकों को पुराने दौर की लोकप्रिय फिल्म से जोड़ने का अवसर भी बन सकता है। हालांकि, फिलहाल सीक्वल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सुभाष घई के सवाल ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि इस दिशा में संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

  • घंटों शूटिंग, मिनटों में डायलॉग याद और बदलते इमोशन्स, नेहा हरसोरा ने बताया डेली सोप का असली संघर्ष

    घंटों शूटिंग, मिनटों में डायलॉग याद और बदलते इमोशन्स, नेहा हरसोरा ने बताया डेली सोप का असली संघर्ष

    नई दिल्ली । टेलीविजन इंडस्ट्री की चमक-दमक और लोकप्रियता के पीछे कलाकारों की कड़ी मेहनत और निरंतर संघर्ष छिपा होता है। दर्शकों तक रोजाना नए एपिसोड पहुंचाने के लिए कलाकारों और पूरी टीम को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। इसी विषय पर अभिनेत्री नेहा हरसोरा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि डेली सोप में काम करना आसान नहीं है, लेकिन यही चुनौतियां उन्हें लगातार बेहतर बनने की प्रेरणा देती हैं।

    नेहा हरसोरा का कहना है कि डेली सोप की दुनिया बाहर से जितनी आकर्षक दिखाई देती है, वास्तविकता में उतनी ही मेहनत और समर्पण की मांग करती है। कलाकारों को कई बार लगातार घंटों तक शूटिंग करनी पड़ती है और सीमित समय में अपने किरदार के अनुरूप प्रदर्शन देना होता है। उनके अनुसार, अभिनय का यह क्षेत्र मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर कलाकारों की परीक्षा लेता है।

    उन्होंने बताया कि कई बार कलाकारों को शूटिंग शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही संवाद दिए जाते हैं। ऐसे में उन्हें तुरंत याद करना और कैमरे के सामने बिना किसी गलती के प्रस्तुत करना बड़ी चुनौती होती है। इसके अलावा, एक ही दिन में अलग-अलग भावनात्मक दृश्यों की शूटिंग करनी पड़ती है। कभी कलाकार को भावुक दृश्य निभाना होता है तो कुछ ही समय बाद हल्के-फुल्के या खुशमिजाज दृश्य में नजर आना पड़ता है। इस तरह तेजी से भावनाओं में बदलाव करना आसान नहीं होता।

    अभिनेत्री का मानना है कि डेली सोप का व्यस्त शेड्यूल कलाकारों की व्यक्तिगत जिंदगी को भी प्रभावित करता है। सुबह से देर रात तक चलने वाली शूटिंग के कारण कलाकारों को परिवार के साथ पर्याप्त समय बिताने का अवसर नहीं मिल पाता। हालांकि, उन्होंने कहा कि जो लोग अभिनय को अपना करियर चुनते हैं, उन्हें इन चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

    नेहा ने स्पष्ट किया कि कठिनाइयों के बावजूद उन्हें अपने काम से बेहद लगाव है। उनके अनुसार, कैमरे के सामने खड़े होकर किरदार को जीवंत बनाना, संवादों को आत्मसात करना और दर्शकों तक भावनाओं को पहुंचाना उन्हें संतुष्टि देता है। अभिनय उनके लिए केवल पेशा नहीं बल्कि एक जुनून है, जिसे वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाती हैं।

    उन्होंने फिल्मों और वेब सीरीज की कार्यप्रणाली की तुलना भी की। नेहा के अनुसार, फिल्मों और वेब सीरीज में कलाकारों को अपने किरदार को समझने, तैयारी करने और भाषा या व्यवहार पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। कई प्रोजेक्ट्स में कलाकारों के लिए विशेष वर्कशॉप भी आयोजित की जाती हैं। इसके विपरीत, डेली सोप में काम की गति काफी तेज होती है और कलाकारों को सीमित समय में ही सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना पड़ता है।

    उन्होंने कहा कि यही तेज रफ्तार और निरंतर चुनौतियां डेली सोप को अन्य माध्यमों से अलग बनाती हैं। हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने का अवसर मिलता है। उनके मुताबिक, संघर्ष और मेहनत से मिली सफलता का आनंद भी अलग होता है और यही बात उन्हें इस क्षेत्र से जोड़े रखती है।

  • कम उम्र में बड़ा सपना, वैभव सूर्यवंशी बोले- लंबे समय तक क्रिकेट पर राज करना चाहता हूं

    कम उम्र में बड़ा सपना, वैभव सूर्यवंशी बोले- लंबे समय तक क्रिकेट पर राज करना चाहता हूं


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में अपने बल्ले से धमाल मचाने वाले 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के नए सितारे बनकर उभरे हैं। शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के साथ-साथ एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह मिली है। चयन के बाद वैभव ने अपने भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ क्रिकेट खेलना नहीं, बल्कि लंबे समय तक इस खेल में अपना दबदबा बनाए रखना है।

    राजस्थान रॉयल्स द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक इंटरव्यू में वैभव ने अपने क्रिकेट करियर को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह ऐसा खिलाड़ी बनना चाहते हैं, जिसे क्रिकेट प्रेमी वर्षों तक याद रखें। वैभव का मानना है कि एक महान खिलाड़ी वही होता है जो अपने दम पर मैच का रुख बदल दे और टीम को जीत दिलाए।

    युवा बल्लेबाज ने कहा कि उन्होंने अपने करियर को लेकर स्पष्ट लक्ष्य तय कर रखा है। उनका सपना है कि जब भी लोग उनके खेल को देखें या भविष्य में उनके बारे में चर्चा करें तो यह महसूस करें कि वह ऐसा बल्लेबाज था जो अकेले दम पर मुकाबले का नतीजा बदल सकता था। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ वह लगातार मेहनत कर रहे हैं और अपने खेल को बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं।

    वैभव ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कुछ साल क्रिकेट खेलकर संतुष्ट हो जाना नहीं है। वह चाहते हैं कि अगले 10 से 20 वर्षों तक उनके प्रदर्शन की चर्चा हो और उनका प्रभाव क्रिकेट जगत में बना रहे। उन्होंने कहा कि क्रिकेट उनके लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम है। इसी कारण वह पूरी जिंदगी इस खेल का आनंद लेते हुए लगातार बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं।

    भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने भी वैभव की प्रतिभा की सराहना की है। चयन समिति का मानना है कि युवा बल्लेबाज ने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया और टीम में जगह पाने का मजबूत दावा पेश किया। आईपीएल 2026 में उनकी बल्लेबाजी ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि विशेषज्ञों को भी प्रभावित किया।

    राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए वैभव सूर्यवंशी ने पूरे सीजन में शानदार निरंतरता दिखाई। उन्होंने 16 पारियों में विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए 237 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए। इस प्रदर्शन के दम पर उन्होंने ऑरेंज कैप अपने नाम की और यह उपलब्धि हासिल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। इसके अलावा उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 72 छक्के जड़कर टी20 क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

    अब क्रिकेट प्रेमियों की नजरें वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय सफर पर टिकी हैं। कम उम्र में मिली सफलता ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जाना शुरू कर दिया है। आने वाले महीनों में आयरलैंड, इंग्लैंड और एशियन गेम्स के मंच पर उनके प्रदर्शन से यह तय होगा कि वह घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट की सफलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी मजबूती से आगे बढ़ा पाते हैं।

  • गिल-राहुल के दमदार शतक, भारतीय बल्लेबाजों ने गेंदबाजों के लिए तैयार किया मजबूत मंच

    गिल-राहुल के दमदार शतक, भारतीय बल्लेबाजों ने गेंदबाजों के लिए तैयार किया मजबूत मंच


    नई दिल्ली। मुल्लांपुर स्थित महाराजा यादवेंद्र सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मैच में भारतीय बल्लेबाजों ने दूसरे दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए मेहमान टीम के गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। मजबूत बल्लेबाजी के दम पर भारत ने अपनी पहली पारी 8 विकेट पर 564 रन बनाकर घोषित की और मुकाबले में मजबूत स्थिति हासिल कर ली।

    दूसरे दिन भारतीय टीम ने शुभमन गिल और ऋषभ पंत के साथ अपनी पारी को आगे बढ़ाया। दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही सकारात्मक रवैया अपनाया और अफगान गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। कप्तान शुभमन गिल ने जिम्मेदारी भरी पारी खेलते हुए 177 गेंदों में 126 रन बनाए। उनकी पारी में 15 चौके और एक छक्का शामिल रहा। गिल ने एक बार फिर साबित किया कि वह लंबी पारियां खेलने की क्षमता रखते हैं और टीम के शीर्ष क्रम की सबसे मजबूत कड़ी बन चुके हैं।

    दूसरी ओर ऋषभ पंत ने अपनी आक्रामक शैली में बल्लेबाजी करते हुए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। उन्होंने 81 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली, जिसमें छह चौके और तीन शानदार छक्के शामिल थे। हालांकि वह शतक से चूक गए, लेकिन उनकी तेजतर्रार बल्लेबाजी ने भारत की रन गति को लगातार बनाए रखा। गिल और पंत की साझेदारी ने भारतीय टीम को विशाल स्कोर की दिशा में मजबूती प्रदान की।

    ध्रुव जुरेल से भी बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन वह 19 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद वॉशिंगटन सुंदर और टेस्ट पदार्पण कर रहे मानव सुथार ने पारी को संभाला। दोनों खिलाड़ियों ने सातवें विकेट के लिए उपयोगी साझेदारी कर टीम को और मजबूत स्थिति में पहुंचाया। मानव सुथार ने अपने पहले टेस्ट मैच में 28 रन का योगदान देकर सकारात्मक संकेत दिए।

    वॉशिंगटन सुंदर ने निचले क्रम में शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद अर्धशतक जमाया। उन्होंने 68 गेंदों में 52 रन बनाए और अंत तक क्रीज पर डटे रहे। उनकी पारी में पांच चौके और एक छक्का शामिल था। सुंदर ने मोहम्मद सिराज के साथ तेज साझेदारी कर टीम के स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाया। सिराज ने भी बल्लेबाजी में हाथ दिखाते हुए केवल 12 गेंदों में 22 रन बनाए, जिसमें चार चौके और एक छक्का शामिल रहा। कुलदीप यादव 9 रन बनाकर नाबाद लौटे।

    भारतीय पारी की नींव पहले दिन ही मजबूत हो चुकी थी। यशस्वी जायसवाल ने 24 रन का योगदान दिया, जबकि केएल राहुल ने बेहतरीन शतक जड़ा। राहुल ने 165 गेंदों में 100 रन बनाकर अपनी तकनीक और धैर्य का शानदार प्रदर्शन किया। वहीं साई सुदर्शन ने 81 रन की आकर्षक पारी खेलकर शीर्ष क्रम को मजबूती प्रदान की।

    अफगानिस्तान की ओर से गेंदबाजी में मोहम्मद सलीम सफी सबसे सफल रहे। उन्होंने छह विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजों को चुनौती देने की कोशिश की। जियाउर रहमान और हशमतुल्लाह शाहिदी को एक-एक सफलता मिली। हालांकि भारतीय बल्लेबाजों के सामने अफगान गेंदबाजी काफी हद तक बेअसर नजर आई।

    564 रन का विशाल स्कोर भारत की बल्लेबाजी गहराई और मौजूदा फॉर्म को दर्शाता है। यह अफगानिस्तान के खिलाफ किसी भी टीम द्वारा बनाए गए सबसे बड़े स्कोरों में से एक है। अब भारतीय गेंदबाजों की नजर अफगानिस्तान को जल्द समेटकर मैच पर पूरी पकड़ बनाने पर होगी।

  • फैंस का बढ़ता प्यार हमारी ताकत: टी20 विश्व कप से पहले हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान

    फैंस का बढ़ता प्यार हमारी ताकत: टी20 विश्व कप से पहले हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान


    नई दिल्ली। इंग्लैंड में आयोजित होने वाले टी20 विश्व कप 2026 से पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम आत्मविश्वास से भरपूर नजर आ रही है। पिछले वर्ष वनडे विश्व कप में ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के बाद अब टीम की नजरें टी20 विश्व कप के खिताब पर टिकी हैं। इस बीच भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम की तैयारियों, बढ़ती उम्मीदों और महिला क्रिकेट को मिल रहे अभूतपूर्व समर्थन को लेकर अपने विचार साझा किए हैं।

    हरमनप्रीत कौर का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में महिला क्रिकेट के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है और इसका सकारात्मक प्रभाव खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्रशंसक खिलाड़ियों और मैचों से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं, तो इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होते हैं। उनके अनुसार, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में महिला क्रिकेट को पहले की तुलना में कहीं अधिक पहचान और चर्चा मिल रही है, जो खेल के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

    टी20 विश्व कप में भारतीय टीम को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। हालांकि हरमनप्रीत का कहना है कि वह बाहरी दबाव या उम्मीदों के बारे में ज्यादा नहीं सोचतीं। उनके अनुसार, किसी भी बड़े टूर्नामेंट में सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार तैयारी और वर्तमान पर ध्यान केंद्रित रखना होता है। उन्होंने कहा कि वर्षों के अनुभव ने उन्हें यह सिखाया है कि उम्मीदें हमेशा रहेंगी, लेकिन खिलाड़ी को अपने खेल और प्रक्रिया पर ही ध्यान देना चाहिए।

    कप्तान ने बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हुए प्रशिक्षण शिविर को टीम की तैयारी का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कैंप खिलाड़ियों के बीच तालमेल बढ़ाने, आत्मविश्वास मजबूत करने और रणनीतिक रूप से टीम को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। युवा खिलाड़ियों को अनुभवी क्रिकेटरों के साथ समय बिताने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी समझ और प्रदर्शन दोनों में सुधार होता है। उन्होंने बताया कि टीम प्रबंधन ने प्रत्येक खिलाड़ी की भूमिका स्पष्ट करने पर विशेष ध्यान दिया है, जो टी20 जैसे तेज प्रारूप में बेहद जरूरी है।

    अपनी बल्लेबाजी शैली में आए बदलाव पर हरमनप्रीत ने कहा कि आधुनिक टी20 क्रिकेट लगातार विकसित हो रही है और खिलाड़ियों को भी समय के साथ खुद को ढालना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आक्रामक क्रिकेट खेलने का अर्थ अपनी प्राकृतिक शैली को बदलना नहीं है, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार सही समय पर जोखिम उठाना और विपक्षी टीम पर दबाव बनाना है। उन्होंने माना कि कोचिंग स्टाफ के साथ हुई चर्चाओं ने उन्हें अपनी बल्लेबाजी में नए आयाम जोड़ने में मदद की है।

    फील्डिंग को लेकर भी हरमनप्रीत उतनी ही उत्साहित नजर आईं। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी जहां व्यक्तिगत संतुष्टि देती है, वहीं फील्डिंग टीम के लिए अतिरिक्त योगदान देने का अवसर प्रदान करती है। उनके अनुसार, मैदान पर डाइव लगाना, रन बचाना या शानदार कैच लेना न केवल मैच का रुख बदल सकता है, बल्कि टीम के अन्य खिलाड़ियों को भी प्रेरित करता है।

    भारतीय कप्तान का मानना है कि महिला क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता खेल के भविष्य के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि जब लोग मैचों, खिलाड़ियों और प्रदर्शन को लेकर चर्चा करते हैं, तो इससे खेल मुख्यधारा की क्रिकेट संस्कृति का हिस्सा बनता है। यही बढ़ता जुड़ाव और समर्थन भारतीय महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • कभी थे टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज, अब कप्तानी और स्थान दोनों पर सवाल

    कभी थे टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज, अब कप्तानी और स्थान दोनों पर सवाल


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में नेतृत्व परिवर्तन हमेशा चर्चा का विषय रहा है और इस बार भी टी20 टीम की कप्तानी को लेकर लिए गए फैसले ने क्रिकेट जगत में बहस छेड़ दी है। हाल के घटनाक्रमों के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर किन कारणों से भारतीय टी20 टीम की कमान में बदलाव किया गया और क्यों नए नेतृत्व की ओर बढ़ने का निर्णय लिया गया। क्रिकेट विशेषज्ञों और विभिन्न रिपोर्टों में इसके पीछे तीन प्रमुख कारणों की चर्चा की जा रही है।

    सबसे पहले बात बल्लेबाजी प्रदर्शन की करें तो माना जा रहा है कि हाल के समय में कप्तान के रूप में टीम को सफलताएं मिलने के बावजूद बल्लेबाज के तौर पर अपेक्षित निरंतरता नहीं दिखी। टी20 क्रिकेट में शीर्ष क्रम के बल्लेबाज से तेज रन गति और बड़ी पारियों की अपेक्षा रहती है। विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय में रन बनाने की गति और औसत दोनों में गिरावट देखने को मिली, जिससे टीम के मध्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। यही कारण रहा कि चयनकर्ताओं ने प्रदर्शन को प्रमुख आधार मानते हुए बदलाव पर विचार किया।

    दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भविष्य की रणनीति से जुड़ा बताया जा रहा है। भारतीय क्रिकेट प्रबंधन आने वाले वर्षों में होने वाले बड़े टूर्नामेंटों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि चयनकर्ता ऐसे खिलाड़ियों को नेतृत्व की भूमिका में देखना चाहते हैं जो अगले कई वर्षों तक टीम का हिस्सा बने रहें और आगामी वैश्विक प्रतियोगिताओं में टीम का नेतृत्व कर सकें। इसी दृष्टिकोण से युवा और मध्य आयु वर्ग के खिलाड़ियों को अधिक अवसर देने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।

    तीसरा कारण नए नेतृत्व विकल्पों का मजबूत दावा माना जा रहा है। विशेष रूप से Shreyas Iyer ने पिछले कुछ वर्षों में बल्लेबाजी और कप्तानी दोनों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में उनकी कप्तानी क्षमता की लगातार सराहना हुई है। साथ ही बल्ले से भी उन्होंने निरंतर रन बनाकर अपनी दावेदारी मजबूत की। ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने नेतृत्व परिवर्तन का विकल्प पहले की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई दिया।

    दूसरी ओर, Suryakumar Yadav भारतीय टी20 क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में से एक रहे हैं और उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने कई मौकों पर टीम को जीत दिलाई है। हालांकि हालिया प्रदर्शन को लेकर उठे सवालों ने उनकी स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक क्रिकेट में कप्तानी और व्यक्तिगत प्रदर्शन दोनों का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है।

    टीम प्रबंधन और चयन समिति की ओर से लिए गए ऐसे फैसले आमतौर पर केवल एक कारण पर आधारित नहीं होते, बल्कि कई खेल, रणनीतिक और भविष्यगत पहलुओं को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। इसलिए नेतृत्व परिवर्तन को केवल किसी एक खिलाड़ी की असफलता के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की दीर्घकालिक योजना के हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है।

    आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नया नेतृत्व भारतीय टीम को किस दिशा में ले जाता है और अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका टीम की भविष्य की योजनाओं में किस तरह तय होती है।

  • 🇮🇳 सैफ विमेंस चैंपियनशिप जीतने पर भारतीय टीम को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की बधाई

    🇮🇳 सैफ विमेंस चैंपियनशिप जीतने पर भारतीय टीम को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की बधाई


    नई दिल्ली। भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने साउथ एशियाई फुटबॉल के मंच पर एक बार फिर अपना दबदबा साबित करते हुए सैफ विमेंस चैंपियनशिप 2026 का खिताब जीत लिया है। शनिवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने बांग्लादेश को 3-1 से हराकर ट्रॉफी अपने नाम की और सात वर्षों के लंबे इंतजार के बाद दोबारा चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद देशभर में खुशी की लहर दौड़ गई और शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं ने टीम की उपलब्धि की सराहना की।

    भारत की इस शानदार सफलता पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारतीय महिला फुटबॉल टीम को बधाई देते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट कौशल, दृढ़ संकल्प और शानदार टीम भावना का प्रदर्शन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि टीम की यह उपलब्धि देश की लाखों युवा लड़कियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी। राष्ट्रपति ने खिलाड़ियों के संघर्ष और समर्पण को भारतीय खेल जगत के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

    उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी भारतीय टीम की उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह जीत भारत में महिला फुटबॉल की लगातार बढ़ती ताकत और लोकप्रियता का प्रतीक है। उनके अनुसार, टीम की सफलता आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी और महिला फुटबॉल को नई पहचान दिलाने में मदद करेगी।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारतीय महिला टीम को बधाई देते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह जीत देश की नई पीढ़ी को फुटबॉल की ओर आकर्षित करेगी और महिला खेलों को और मजबूती प्रदान करेगी। वहीं केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने भारतीय महिला टीम को ‘ब्लू टाइग्रेस’ बताते हुए उनकी उपलब्धि को भारतीय फुटबॉल के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

    टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन शुरुआत से ही प्रभावशाली रहा। खिलाड़ियों ने हर मुकाबले में अनुशासन, आक्रामकता और सामूहिक खेल का शानदार प्रदर्शन किया। फाइनल मुकाबले में भी भारतीय टीम ने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और बांग्लादेश के खिलाफ शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाया। टीम ने तीन गोल दागकर मैच पर नियंत्रण बनाए रखा और अंततः 3-1 की जीत के साथ खिताब अपने नाम कर लिया।

    यह जीत इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि भारत ने सात वर्षों बाद सैफ महिला चैंपियनशिप का ताज दोबारा हासिल किया है। लंबे अंतराल के बाद मिली इस सफलता ने भारतीय महिला फुटबॉल को नई पहचान और आत्मविश्वास प्रदान किया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में महिला फुटबॉल के विकास को गति दे सकती है और अधिक युवा खिलाड़ियों को इस खेल से जोड़ने में मददगार साबित होगी।

    भारतीय महिला टीम की इस सफलता ने यह भी साबित कर दिया है कि देश में महिला खेल लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। सैफ चैंपियनशिप की यह ट्रॉफी केवल एक खिताब नहीं, बल्कि भारतीय महिला फुटबॉल के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी है।

  • वर्ल्ड कप में भारतीय बल्लेबाजों का जलवा, इन 5 खिलाड़ियों ने बनाए सबसे ज्यादा रन

    वर्ल्ड कप में भारतीय बल्लेबाजों का जलवा, इन 5 खिलाड़ियों ने बनाए सबसे ज्यादा रन


    नई दिल्ली। महिला टी20 विश्व कप का इतिहास भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कई शानदार उपलब्धियों और यादगार पारियों का गवाह रहा है। अब तक खेले गए नौ संस्करणों में भारतीय टीम भले ही खिताब जीतने से चूक गई हो, लेकिन कई भारतीय बल्लेबाजों ने अपने प्रदर्शन से विश्व क्रिकेट में खास पहचान बनाई है। इनमें कुछ खिलाड़ियों ने लगातार रन बनाकर टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई और विश्व कप के मंच पर अपनी अलग छाप छोड़ी। आइए जानते हैं उन पांच भारतीय खिलाड़ियों के बारे में जिन्होंने महिला टी20 विश्व कप में सबसे ज्यादा रन बनाए हैं।

    इस सूची में सबसे ऊपर भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर और पूर्व कप्तान मिताली राज संयुक्त रूप से मौजूद हैं। हरमनप्रीत कौर ने टी20 विश्व कप के 39 मुकाबलों में 726 रन बनाए हैं। उन्होंने 25.03 की औसत से बल्लेबाजी करते हुए एक शतक और चार अर्धशतक जड़े हैं। हरमनप्रीत की कई पारियां भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में यादगार मानी जाती हैं। लंबे समय से टीम की प्रमुख बल्लेबाज और कप्तान के रूप में उन्होंने बड़े टूर्नामेंटों में लगातार जिम्मेदारी निभाई है।

    उधर, भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे सफल कप्तानों में शामिल मिताली राज ने भी टी20 विश्व कप में 726 रन बनाए हैं। उन्होंने 24 मैचों में 40.33 की शानदार औसत से बल्लेबाजी करते हुए पांच अर्धशतक लगाए। मिताली की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खासियत उनकी निरंतरता रही, जिसने वर्षों तक भारतीय टीम को मजबूती प्रदान की। टी20 विश्व कप में उनके नाम 79 चौके दर्ज हैं, जो उनकी तकनीकी दक्षता और भरोसेमंद बल्लेबाजी को दर्शाते हैं।

    तीसरे स्थान पर भारतीय टीम की स्टार ओपनर स्मृति मंधाना हैं। वर्ष 2014 से टी20 विश्व कप का हिस्सा रहीं मंधाना ने 25 मैचों में 524 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने चार अर्धशतकीय पारियां खेलीं। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी शैली और आकर्षक शॉट्स के लिए प्रसिद्ध मंधाना ने कई मौकों पर भारत को मजबूत शुरुआत दिलाई है। विश्व कप में उनके नाम 65 चौके और 11 छक्के दर्ज हैं।

    चौथे स्थान पर जेमिमा रोड्रिगेज हैं, जिन्होंने अपेक्षाकृत कम समय में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 2018 से 2024 के बीच खेले गए 19 टी20 विश्व कप मुकाबलों में उन्होंने 407 रन बनाए हैं। जेमिमा मध्यक्रम की भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में उभरी हैं और दबाव की परिस्थितियों में उपयोगी पारियां खेलने के लिए जानी जाती हैं। उनकी निरंतर प्रगति भारतीय टीम के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

    इस सूची में पांचवें स्थान पर पूनम राउत का नाम आता है। उन्होंने 2009 से 2014 के बीच 15 मुकाबलों में 375 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से तीन अर्धशतक निकले। पूनम ने उस दौर में भारतीय टीम को मजबूती दी, जब महिला क्रिकेट धीरे-धीरे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा था।

    इन खिलाड़ियों के योगदान ने महिला टी20 विश्व कप में भारत की पहचान मजबूत की है। आने वाले संस्करणों में हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना जैसी खिलाड़ी नए रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ सकती हैं, जबकि युवा बल्लेबाजों से भी भारतीय क्रिकेट को नई उम्मीदें हैं।