Blog

  • TMC के विद्रोह में मुस्लिम MLA भी पीछे नहीं…. मुर्शिदाबाद के 9 में से 8 ने छोड़ा ममता का साथ

    TMC के विद्रोह में मुस्लिम MLA भी पीछे नहीं…. मुर्शिदाबाद के 9 में से 8 ने छोड़ा ममता का साथ


    कोलकाता।
    तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) में हुए विद्रोह में टीएमसी (TMC) के अल्पसंख्यक विधायक (Minority MLA) भी पीछे नहीं हैं. इन विधायकों ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee .) की बजाय ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) के साथ जाना ज्यादा बेहतर समझा है. मुर्शिदाबाद में TMC के जो 9 विधायक जीते थे उनमें से 8 ने ममता का साथ छोड़ दिया है और ऋतब्रत बनर्जी का दामन थाम लिया है।

    इस सूची में तृणमूल कांग्रेस के लंबे समय से विश्वसनीय और वरिष्ठ नेता जावेद खान के साथ-साथ काजल शेख जैसे प्रभावशाली नेता भी शामिल हैं। बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने इन मुस्लिम विधायकों को बगावत का भरपूर इनाम दिया है. बागियों में शामिल जावेद खान को विधानसभा में विपक्ष का उपनेता बनाया गया है. वहीं दूसरी ओर अखुरुज्जमां को चीफ व्हिप बनाया गया है।


    तृणमूल की ‘टूट’ बीजेपी के लिए बंगाल से ज्यादा दिल्ली में फायदेमंद

    एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले मंत्रिमंडल के चार अल्पसंख्यक मंत्री भी आंदोलनकारी विधायकों के इस समूह में शामिल हैं. ये विधायक हैं- जावेद खान, सबीना यास्मीन, गुलाम रब्बानी और अखरूजमां।

    तृणमूल के आंदोलनकारी खेमे के जिन अल्पसंख्यक विधायकों के नाम अब तक सामने आए हैं, वे इस प्रकार हैं – जावेद खान, अखरूजमां, काजल शेख, गुलाम रब्बानी, डॉ. मोशर्रफ हुसैन, इमानी बिस्वास, नियामत शेख, रेयात हुसैन, गुलशन मल्लिक, तौसीफुर रहमान, मुस्तफिजुर रहमान, बहारुल इस्लाम।

    लेकिन कुल आंकड़ा कही ज्यादा है. रिपोर्ट के अनुसार तृणमूल के टिकट पर चुनाव जीतने वाले 34 मुस्लिम विधायकों में से 17 बागी खेमे में शामिल हो गए हैं।

    सबसे खास बात यह है कि मुर्शिदाबाद के 9 अल्पसंख्यक विधायकों में से 8 ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल हो गए हैं. अखरुजमां कहते हैं, ‘मुर्शिदाबाद जिले के 9 विधायकों में से 8 ने हमारा समर्थन किया है. हमने पार्टी के बहुमत के साथ खड़े रहने का फैसला किया है.’ केवल नव निर्वाचित विधायक और शिक्षाविद बाबर अली (जलंगी विधायक) ने ही पार्टी नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।

    रघुनाथगंज के विधायक अख्रुज्जमां को इस ‘विद्रोह’ के सूत्रधारों में से एक माना जा रहा है. अखरूजमां ने 2018 में कांग्रेस छोड़ दी थी और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे, तब शुभेंदु अधिकारी मुर्शिदाबाद जिले में तृणमूल कांग्रेस के पर्यवेक्षक थे. इस बार वे ऋतब्रता के साथ आए हैं. जिले के दूसरे विधायकों शमशेरगंज के नूर आलम, सुती विधायक इमानी बिस्वास, लालगोला के अब्दुल अजीज, भगवानगोला के रियात हुसैन सरकार और हरिहरपारा के नियामत शेख तथा भरतपुर के विधायकों मुस्तफिजुर रहमान।

    आंकड़ों के अनुसार 2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने मुर्शिदाबाद जिले की 22 सीटों में से 20 सीटें जीती थीं. तृणमूल कांग्रेस के सुनहरे दिनों में जब अभिषेक बनर्जी या ममता बनर्जी कोलकाता में बैठक बुलाते थे तो मुर्शिदाबाद जिले से बुलाए गए सभी विधायक लगभग एक दिन पहले ही कोलकाता में होटल बुक कर लेते थे, ताकि वे समय पर बैठक में पहुंच सकें और पीछे की पंक्ति में न बैठना पड़े. लेकिन इस विधानसभा चुनाव के बाद स्थिति बदल गई है।

    पिछले रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर पर हुई तृणमूल कांग्रेस विधायक दल की बैठक में ये विधायक नजर नहीं आए. 2011 से ही मुस्लिम बड़ी संख्या में तृणमूल को वोट देते आ रहे हैं. ममता बनर्जी को लगता था कि मुस्लिम उनके स्थायी वोट बैंक रहेंगे. लेकिन इस चुनाव में पूरी तस्वीर बदल गई है।

  • प्रोड्यूसर का दावा- जान से मारने और सिर काटने की धमकी मिली

    प्रोड्यूसर का दावा- जान से मारने और सिर काटने की धमकी मिली


    नई दिल्ली। सलमान खान के चर्चित काला हिरण शिकार मामले पर आधारित फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल ऑफ लीगेसी’ रिलीज से पहले ही बड़े विवाद में घिर गई है। फिल्म के निर्माता अमित जानी ने दावा किया है कि उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग उन्हें मुंबई आने पर सिर धड़ से अलग करने तक की धमकी दे रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने फिल्म और उससे जुड़े विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

    दरअसल, हाल ही में सलमान खान की कानूनी टीम ने फिल्म के निर्माताओं को नोटिस भेजकर फिल्म के निर्माण और प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की मांग की थी। नोटिस में फिल्म से जुड़े पक्षों से लिखित माफी मांगने को भी कहा गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इसके बाद अमित जानी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें वह कथित तौर पर नोटिस को फाड़ते नजर आए। वीडियो में उन्होंने कहा कि लोग उनसे पूछ रहे हैं कि वह नोटिस का क्या जवाब देंगे, लेकिन जब उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं तो वे किसे जवाब दें। उनका कहना है कि हजारों लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां और धमकियां दी जा रही हैं।

    अमित जानी ने आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित प्रशंसक और असामाजिक तत्व उनके परिवार को भी निशाना बनाने की बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डराने-धमकाने की कोशिशों के बावजूद वह पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपने प्रोजेक्ट पर काम जारी रखेंगे।

    गौरतलब है कि ‘काला हिरण: द बैटल ऑफ लीगेसी’ का कथानक 1998 के बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित बताया जा रहा है, जिसमें सलमान खान का नाम सामने आया था। इसी वजह से फिल्म की घोषणा के बाद से ही यह परियोजना विवादों के केंद्र में बनी हुई है।

    फिलहाल मामले को लेकर कानूनी और सार्वजनिक बहस दोनों जारी हैं। एक ओर फिल्म के निर्माता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सलमान खान की कानूनी टीम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठा रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • लेबनान सैन्य अभियान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू को लगाई थी कड़ी फटकार, इजरायली पीएम ने बताया आपसी पारिवारिक विवाद

    लेबनान सैन्य अभियान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू को लगाई थी कड़ी फटकार, इजरायली पीएम ने बताया आपसी पारिवारिक विवाद

    नई दिल्ली । वैश्विक कूटनीति के पटल पर अमेरिका और इजरायल के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुआ हालिया विवाद अब पूरी दुनिया के सामने आ चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक फोन कॉल के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कड़ी फटकार लगाए जाने की खबरों के बाद अब इस पर यरूशलम की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस तनाव को पूरी तरह से सामान्य बताते हुए कूटनीतिक संबंधों में किसी भी तरह की दरार आने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।

    इस पूरे घटनाक्रम पर एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट को दिए साक्षात्कार में बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अपने मतभेदों की तुलना एक पारंपरिक परिवार से की है। उन्होंने कहा कि एक परिवार के भीतर वैचारिक और रणनीतिक स्तर पर इस तरह के उतार-चढ़ाव होना बेहद स्वाभाविक है। इजरायली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कूटनीति में इस प्रकार के तनावों के बावजूद वाशिंगटन और यरूशलम के द्विपक्षीय संबंध हमेशा की तरह दृढ़ और अपरिवर्तित बने हुए हैं।

    शीर्ष नेताओं के बीच उपजे इस कड़े कूटनीतिक विवाद के पीछे मुख्य कारण इजरायल द्वारा लेबनान में शुरू किया गया नया सैन्य अभियान बताया जा रहा है। इजरायली रक्षा बलों द्वारा हाल ही में घोषित युद्धविराम की शर्तों को दरकिनार करते हुए बेरुत पर व्यापक हवाई हमले शुरू कर दिए गए थे। इजरायल के इस सैन्य कदम से नाराज होकर ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही द्विपक्षीय वार्ता को बीच में ही स्थगित करने का फैसला कर लिया, जिससे कूटनीतिक समझौता पूरा होने से पहले ही खटाई में पड़ गया।

    ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता विफल होने का सीधा असर अमेरिकी राष्ट्रपति की नाराजगी के रूप में सामने आया, जिसका सामना बेंजामिन नेतन्याहू को करना पड़ा। अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारियों और कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फोन कॉल पर इजरायली प्रधानमंत्री के प्रति बेहद आक्रामक रुख अपनाया था। दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत कूटनीतिक शिष्टाचार के स्तर पर अत्यंत तनावपूर्ण और अप्रत्याशित रही।

    वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस फोन वार्ता के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के सैन्य फैसलों को पूरी तरह अतार्किक बताया और कहा कि इस तरह के कदमों के कारण वैश्विक स्तर पर इजरायल की छवि को भारी नुकसान पहुंच रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि उनके प्रशासनिक सहयोग के बिना इजरायली नेतृत्व के लिए आंतरिक और बाहरी सुरक्षा चुनौतियां संभालना बेहद कठिन हो जाता। हालांकि बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस तीखे रुख पर थोड़ी नरमी दिखाते हुए कहा कि वह गुस्से में नहीं थे, बल्कि मध्य पूर्व की बिगड़ती परिस्थितियों को लेकर चिंतित थे।

    इस कड़े प्रहार के बाद भी इजरायली कूटनीति ने अमेरिकी प्रशासन के प्रति अपने नरम और सहयोगात्मक रवैये को बनाए रखने का प्रयास किया है। बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच सुबह रणनीतिक असहमति हो सकती है, लेकिन दोपहर तक आपसी बातचीत से समाधान खोज लिया जाता है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल का सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ मित्र बताते हुए दावा किया कि दोनों नेता निरंतर कूटनीतिक संपर्क में हैं।

  • “फिल्मों के बड़े बजट सिर्फ PR का हिस्सा हैं” – मनोज बाजपेयी का बड़ा बयान, रामायण और वाराणसी पर फिर छिड़ी बहस

    “फिल्मों के बड़े बजट सिर्फ PR का हिस्सा हैं” – मनोज बाजपेयी का बड़ा बयान, रामायण और वाराणसी पर फिर छिड़ी बहस


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में इन दिनों दो बड़ी फिल्मों-Ranbir Kapoor की ‘रामायण’ और Priyanka Chopra की फिल्म ‘वाराणसी’-को लेकर जबरदस्त चर्चा है। दोनों फिल्मों के कथित बजट को लेकर सोशल मीडिया से लेकर इंडस्ट्री तक लगातार बहस चल रही है। इसी बीच मनोज बाजपेयी ने इन चर्चाओं को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि फिल्मों के बड़े बजट की बातें अक्सर “पीआर का जरिया” बन जाती हैं और पिछले कई वर्षों से यह ट्रेंड लगातार बढ़ा है। उनका कहना है कि दर्शकों को इस बात से ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि किसी फिल्म का बजट कितना है, बल्कि यह देखना चाहिए कि फिल्म उन्हें पसंद आई या नहीं।

    “दर्शकों को सिर्फ फिल्म से मतलब होना चाहिए”
    मनोज बाजपेयी ने कहा कि आजकल दर्शक एयरपोर्ट या सार्वजनिक जगहों पर उनसे फिल्मों के बॉक्स ऑफिस नंबर तक पूछते हैं। इस पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि वे कई बार लोगों को डांट भी देते हैं। उनके अनुसार, “अगर बॉक्स ऑफिस का पैसा दर्शकों के बैंक अकाउंट में नहीं जा रहा, तो उन्हें इसकी चिंता क्यों करनी चाहिए?” उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से प्रोड्यूसर्स और मेकर्स का मामला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दर्शकों का फिल्म से सिर्फ इतना संबंध होना चाहिए कि उन्हें फिल्म पसंद आई या नहीं।

    4000 करोड़ और 1400 करोड़ के बजट पर चर्चा
    इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा ‘रामायण’ के बजट की हो रही है, जिसे लगभग 4000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। यह फिल्म दो भागों में बनाई जा रही है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। वहीं ‘वाराणसी’ का बजट करीब 1400 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जिससे यह भी बड़े पैमाने की फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है। इन आंकड़ों ने फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दे दिया है-क्या इतने बड़े बजट वास्तव में जरूरी हैं या यह सिर्फ प्रचार का हिस्सा हैं?

    फिल्मों के बिजनेस पर भी उठे सवाल
    मनोज बाजपेयी ने यह भी कहा कि 500-600 करोड़ या हजारों करोड़ रुपये के आंकड़ों पर दर्शकों को ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। उनके अनुसार, फिल्म के बिजनेस का असर केवल प्रोड्यूसर्स और निवेशकों पर पड़ता है, आम दर्शकों पर नहीं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आजकल फिल्मों के बजट और कमाई के आंकड़े कई बार चर्चा बढ़ाने और फिल्म को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं।

    दिवाली और 2027 में रिलीज की तैयारी
    ‘रामायण’ का पहला भाग इस साल दिवाली पर रिलीज होने की संभावना है, जिसे डायरेक्टर Nitesh Tiwari निर्देशित कर रहे हैं। वहीं ‘वाराणसी’ फिल्म 2027 में रिलीज होने की उम्मीद है, जिसका निर्देशन S. S. Rajamouli कर रहे हैं। दोनों फिल्मों को लेकर पहले से ही दर्शकों में भारी उत्साह है और अब बजट विवाद ने इन प्रोजेक्ट्स को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।

    मनोज बाजपेयी का बयान एक बार फिर इस बहस को हवा दे गया है कि क्या भारतीय सिनेमा में बढ़ते बजट वाकई गुणवत्ता का संकेत हैं या सिर्फ मार्केटिंग रणनीति। फिलहाल, दर्शक इन बड़ी फिल्मों की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं।

  • BJD से BJP तक का सफर, कौन हैं देबाशीष सामंतराय जिन्हें मिला राज्यसभा टिकट

    BJD से BJP तक का सफर, कौन हैं देबाशीष सामंतराय जिन्हें मिला राज्यसभा टिकट


    नई दिल्ली। ओडिशा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर सामने आया है। बीजू जनता दल (BJD) से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद देबाशीष सामंतराय को पार्टी ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। खास बात यह है कि उन्होंने BJP की सदस्यता महज 10 दिन पहले ही ली थी और अब उन्हें सीधे उच्च सदन की जिम्मेदारी मिलने जा रही है। सामंतराय पहले भी तीन बार विधायक रह चुके हैं और फरवरी 2024 में उन्हें BJD की ओर से राज्यसभा भेजा गया था। उनका कार्यकाल वर्ष 2030 तक तय था, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही 25 मई को पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

    इस्तीफे के पीछे क्या रही वजह?
    देबाशीष सामंतराय ने BJD छोड़ने की वजह पार्टी के भीतर बढ़ती उपेक्षा को बताया है। उनका कहना है कि उन्हें लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से दूर रखा जा रहा था और वे अपने राजनीतिक गुरु तथा BJD प्रमुख नवीन पटनायक से भी मुलाकात नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने पार्टी के भीतर नौकरशाह से नेता बने वी. के. पांडियन की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि संगठन में उनके प्रभाव के कारण कई पुराने नेताओं को किनारे किया जा रहा है। BJD छोड़ने के तुरंत बाद उन्होंने BJP का दामन थाम लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा “विकसित भारत” के विजन से प्रेरित होकर नई राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही।

    BJP की रणनीति या सियासी संदेश? 
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP का यह कदम केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। इससे पहले भी पार्टी ने BJD के कई नेताओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें अहम जिम्मेदारियां दी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सामंतराय को उम्मीदवार बनाना इस बात का संकेत है कि BJP ओडिशा में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है, खासकर राज्यसभा जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर।

    उपचुनाव में जीत लगभग तय?
    चुनाव आयोग ने ओडिशा राज्यसभा उपचुनाव का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। 147 सदस्यों वाली विधानसभा में BJP के पास स्पष्ट बहुमत है, ऐसे में देबाशीष सामंतराय की जीत लगभग तय मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य विपक्षी दल BJD और कांग्रेस इस उपचुनाव में उम्मीदवार उतारने से भी बच सकती हैं, जिससे मुकाबला और आसान हो जाएगा।

    ओडिशा की राजनीति में नया मोड़
    इस घटनाक्रम ने ओडिशा की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ इसे BJP की मजबूत रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फैसला राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।

  • 'जय भीम' के उद्घोष के साथ अमेरिका से भारत के लिए हुए रवाना, दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी

    'जय भीम' के उद्घोष के साथ अमेरिका से भारत के लिए हुए रवाना, दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर कौतूहल का विषय बनी कॉकरोच जनता पार्टी अब वास्तविक धरातल पर राजनीतिक विरोध प्रदर्शन की तैयारी में है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके अमेरिका से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं और शनिवार सुबह देश की राजधानी दिल्ली में कदम रखेंगे। उनका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर एक विशाल जनसभा और विरोध प्रदर्शन आयोजित करना है, जिसके केंद्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।

    अभिजीत दीपके ने भारत यात्रा पर निकलने से पहले सोशल मीडिया पर एक भावुक और वैचारिक संदेश साझा किया। उन्होंने अपने पोस्ट में ‘जय भीम’ के नारे का उल्लेख करते हुए लिखा कि वह भारत के लिए प्रस्थान कर चुके हैं और अब अपना भाग्य पूरी तरह से देश के संविधान के हाथों में सौंपते हैं। इस डिजिटल घोषणा के बाद उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है, हालांकि सुरक्षा कारणों से उनकी फ्लाइट और लैंडिंग के समय को पूरी तरह गुप्त रखा गया है।

    इस पूरे विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी प्रशासनिक अड़चन यह है कि संगठन ने दिल्ली पुलिस से इस प्रदर्शन के लिए अब तक कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली है। रणनीतिक रूप से अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद वह सीधे जंतर-मंतर जाने के बजाय पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने का रुख करेंगे। वहां पहुंचकर वह प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की लिखित अनुमति मांगेंगे।

    अभिजीत दीपके और उनके संगठन का दावा है कि इस प्रदर्शन में देश भर से भारी संख्या में युवा और छात्र शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने किसी सटीक आंकड़े की पुष्टि तो नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल होंगे। उन्होंने अपनी बात को मजबूती देने के लिए संगठन की वेबसाइट का हवाला देते हुए कहा कि उनकी इस वर्चुअल पार्टी से 11 लाख से अधिक पंजीकृत सदस्य जुड़ चुके हैं, जिन्होंने दिल्ली पहुंचने की प्रतिबद्धता जताई है।

    इस अचानक उपजे विरोध प्रदर्शन का मुख्य एजेंडा देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में उपजी विसंगतियां हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि वे नीट परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक मामले और सीबीएसई के परीक्षा परिणामों में सामने आईं गड़बड़ियों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। संगठन की मांग है कि इन गंभीर प्रशासनिक विफलताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

    दिलचस्प बात यह है कि इस आंदोलन की पृष्ठभूमि पूरी तरह से डिजिटल और तात्कालिक है। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक कथित टिप्पणी के बाद, जिसमें उन्होंने कुछ बेरोजगार युवाओं के संदर्भ में एक तुलनात्मक टिप्पणी की थी, इंटरनेट पर विरोध स्वरूप ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया हैंडल बनाया गया था। महज चार दिनों के भीतर इस डिजिटल हैंडल के फॉलोअर्स की संख्या देश की स्थापित बड़ी राजनीतिक पार्टियों से भी आगे निकल गई, जिसने अब एक वास्तविक आंदोलन का रूप ले लिया है।

  • श्रेयस अय्यर बनेंगे नए टी20 कप्तान, आईपीएल स्टार 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को सीनियर टीम में जगह मिलने के संकेत

    श्रेयस अय्यर बनेंगे नए टी20 कप्तान, आईपीएल स्टार 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को सीनियर टीम में जगह मिलने के संकेत


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम में आगामी दौरों को लेकर बड़े प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बीसीसीआई शनिवार को आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए राष्ट्रीय टीम की घोषणा करने जा रही है। ईएसपीएनक्रिकइन्फो की रिपोर्ट के अनुसार, चयनकर्ता न केवल नए खिलाड़ियों को आजमाने के मूड में हैं, बल्कि टी20 टीम के नेतृत्व में भी बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर चुके हैं।

    मौजूदा टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव की कप्तानी पर इस समय खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। हाल ही में मार्च में उनकी कप्तानी में भारत ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया था, लेकिन इसके बावजूद चयनकर्ता उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त करने का मन बना रहे हैं। उनकी जगह मध्यक्रम के अनुभवी बल्लेबाज श्रेयस अय्यर को भारतीय टी20 टीम का नया कप्तान नियुक्त किया जा सकता है।

    नेतृत्व परिवर्तन का यह सिलसिला केवल कप्तानी तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। टीम के उप-कप्तान अक्षर पटेल को भी इस जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है, और उनकी जगह युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा को नया उप-कप्तान बनाया जा सकता है। चयनकर्ताओं का यह कड़ा रुख भविष्य की योजनाओं, विशेषकर 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक और उसी वर्ष होने वाले अगले टी20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है।

    सूर्यकुमार यादव के लिए यह बदलाव दोहरा झटका साबित हो सकता है क्योंकि उन्हें न सिर्फ कप्तानी से हाथ धोना पड़ सकता है, बल्कि खराब फॉर्म के चलते पूरी टीम से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। टी20 वर्ल्ड कप की नौ पारियों में उनका स्ट्राइक रेट तो ठीक था, लेकिन वे केवल 242 रन बना सके। इसके बाद आईपीएल 2026 के सीजन में उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, जहां उन्होंने 13 पारियों में सिर्फ 20.76 के औसत से 270 रन बनाए।

    दूसरी ओर, नए कप्तान के रूप में उभर रहे 31 वर्षीय श्रेयस अय्यर ने दिसंबर 2023 के बाद से कोई टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। उस समय सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा की मध्यक्रम में मौजूदगी के कारण अय्यर को टीम संयोजन में जगह नहीं मिल पा रही थी। इसी साल जनवरी में न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के दौरान उन्हें चोटिल खिलाड़ी के विकल्प के रूप में शामिल जरूर किया गया था, लेकिन मैच खेलने का मौका नहीं मिला क्योंकि प्रबंधन तब वर्ल्ड कप की कोर टीम को आजमाना चाहता था।

    भारतीय चयनकर्ताओं द्वारा कप्तानों को बदलने का यह लगातार दूसरा बड़ा फैसला है। इससे पहले साल 2025 में भी ऐसा ही देखने को मिला था, जब रोहित शर्मा ने मार्च में भारत को चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जिताया था, लेकिन अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले चयनकर्ताओं ने उन्हें वनडे टीम की कप्तानी से हटा दिया था, हालांकि रोहित टीम में बने रहे थे।

    इस आगामी चयन में सबसे बड़ा आकर्षण 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी हो सकते हैं। आईपीएल 2026 के एक धमाकेदार सीजन में 237.30 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाने वाले सूर्यवंशी को पहली बार सीनियर टीम में शामिल किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो वह 1980 के दशक के उत्तरार्ध में सचिन तेंदुलकर के डेब्यू के बाद भारत की सीनियर पुरुष टीम में चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन जाएंगे।

    राष्ट्रीय टीम के दौरों से ठीक पहले, सूर्यवंशी 9 से 21 जून तक श्रीलंका में होने वाली इंडिया ए की ट्राई-सीरीज का हिस्सा होंगे, जिसमें अफगानिस्तान की टीम भी शामिल है। इसके ठीक बाद सीनियर भारतीय टीम को 26 और 28 जून को बेलफास्ट में आयरलैंड के खिलाफ दो टी20 मैच खेलने हैं। इसके बाद भारतीय टीम 1 से 11 जुलाई तक इंग्लैंड के लंबे दौरे पर रहेगी, जहां पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज खेली जानी है।

  • शेयर बाजार जून अपडेट: ग्लोबल संकेतों के बीच उतार-चढ़ाव, निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी

    शेयर बाजार जून अपडेट: ग्लोबल संकेतों के बीच उतार-चढ़ाव, निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी


    नई दिल्ली । 5 जून को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत मिलाजुली और अस्थिर (Volatile) रहने की संभावना जताई जा रही है। ग्लोबल मार्केट के संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों के चलते बाजार में दिनभर हलचल देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सीमित दायरे में रह सकते हैं, जहां तेजी और गिरावट दोनों ही स्थितियां देखने को मिलेंगी। शुरुआती ट्रेडिंग में निवेशकों की नजरें वैश्विक बाजारों और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर टिकी रहेंगी।

    ग्लोबल संकेत तय करेंगे बाजार की दिशा
    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हो रहे बदलाव भारतीय बाजार पर सीधा असर डाल सकते हैं। अमेरिकी और एशियाई बाजारों के रुख के आधार पर आज सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय होगी। अगर वैश्विक बाजार सकारात्मक रहते हैं तो भारतीय बाजार को समर्थन मिल सकता है, वहीं कमजोरी की स्थिति में दबाव देखने को मिल सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी या गिरावट भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगा। तेल महंगा होने पर महंगाई की आशंका बढ़ती है, जिसका असर ऑटो और पेंट जैसे सेक्टरों पर पड़ सकता है।

    FII-DII की चाल से तय होगा मू
    विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीद-बिक्री भी आज के बाजार की दिशा को प्रभावित करेगी। हाल के दिनों में FII की गतिविधियां अस्थिर रही हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अगर FII की ओर से खरीदारी बढ़ती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है, जबकि बिकवाली दबाव बना सकती है। DII की स्थिर खरीदारी बाजार को सपोर्ट देने का काम कर सकती है।

    सेक्टोरल मूवमेंट में दिख सकती है तेजी और कमजोरी
    आज के सत्र में सेक्टोरल मूवमेंट महत्वपूर्ण रहेगा। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में अलग-अलग रुझान देखने को मिल सकते हैं। बैंकिंग सेक्टर में हल्की मजबूती की उम्मीद है, जबकि आईटी सेक्टर ग्लोबल संकेतों पर अधिक निर्भर रहेगा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सावधानी के साथ ट्रेडिंग करने की सलाह दी जा रही है।

    निवेशकों के लिए सलाह
    विशेषज्ञों का कहना है कि आज का दिन शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और स्टॉप लॉस का उपयोग करने की सलाह दी गई है। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह उतार-चढ़ाव अवसर भी प्रदान कर सकता है, लेकिन चयन सोच-समझकर करना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर 5 जून को शेयर बाजार में मिश्रित रुझान और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ग्लोबल संकेतों और निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की पूरी दिशा निर्भर करेगी। सतर्क रणनीति ही आज के दिन सफलता की कुंजी होगी।

  • एलोवेरा से पाएं मजबूत और घने बाल: नेचुरल हेयर केयर का आसान तरीका

    एलोवेरा से पाएं मजबूत और घने बाल: नेचुरल हेयर केयर का आसान तरीका


    नई दिल्ली ।आज के समय में प्रदूषण, तनाव और गलत खानपान का सीधा असर बालों की सेहत पर देखने को मिलता है। बालों का झड़ना, रूखापन और डैंड्रफ जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में महंगे हेयर ट्रीटमेंट और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स के बजाय प्राकृतिक उपायों की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है। इन्हीं में सबसे प्रभावी और आसान उपाय है एलोवेरा, जिसे बालों की देखभाल के लिए एक संपूर्ण प्राकृतिक औषधि माना जाता है।

    एलोवेरा में मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स स्कैल्प को पोषण देते हैं और बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं। यह न केवल बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देता है, बल्कि स्कैल्प को साफ और स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। एलोवेरा जेल का नियमित उपयोग बालों को चमकदार, मुलायम और मजबूत बनाता है।

    डैंड्रफ से राहत दिलाने में असरदार
    एलोवेरा में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो स्कैल्प पर होने वाले डैंड्रफ को कम करने में मदद करते हैं। सिर की खुजली और जलन की समस्या में भी यह काफी राहत देता है। सप्ताह में 2 से 3 बार एलोवेरा जेल को स्कैल्प पर लगाने से डैंड्रफ की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है।

    हेयर फॉल रोकने में मददगार
    बालों के झड़ने की समस्या आज के समय में आम हो चुकी है। एलोवेरा जड़ों को पोषण देकर बालों को मजबूत बनाता है, जिससे हेयर फॉल कम होता है। यह स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करता है, जिससे नए बालों की ग्रोथ भी तेज होती है।

    बालों को बनाता है सॉफ्ट और शाइनी
    एलोवेरा बालों की प्राकृतिक नमी को बनाए रखता है। यह ड्राई और डैमेज बालों को रिपेयर कर उन्हें मुलायम और चमकदार बनाता है। खासकर गर्मी और प्रदूषण के मौसम में इसका उपयोग बालों को सुरक्षा प्रदान करता है।

    कैसे करें एलोवेरा का उपयोग
    ताजा एलोवेरा जेल निकालकर सीधे स्कैल्प और बालों पर लगाएं और हल्के हाथों से मसाज करें। इसे 30–45 मिनट तक छोड़ दें और फिर हल्के शैम्पू से धो लें। चाहें तो एलोवेरा को नारियल तेल या दही के साथ मिलाकर भी हेयर मास्क के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

    एलोवेरा एक प्राकृतिक, सस्ता और असरदार उपाय है जो बालों की लगभग सभी समस्याओं का समाधान करने में मदद करता है। नियमित उपयोग से बाल मजबूत, घने और स्वस्थ बन सकते हैं।

  • महंगी उड़ानों और बढ़ती ईंधन लागत के बावजूद नहीं थमा घूमने का जुनून, घरेलू पर्यटन मांग में जोरदार उछाल

    महंगी उड़ानों और बढ़ती ईंधन लागत के बावजूद नहीं थमा घूमने का जुनून, घरेलू पर्यटन मांग में जोरदार उछाल

    नई दिल्ली । बढ़ती ईंधन कीमतों, महंगे हवाई किरायों और वैश्विक स्तर पर परिचालन चुनौतियों के बावजूद भारतीयों का घूमने-फिरने का उत्साह बरकरार है। गर्मी की छुट्टियों के दौरान देशभर में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है। ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आर्थिक दबावों के बावजूद घरेलू पर्यटन बाजार मजबूत स्थिति में बना हुआ है और लोगों की यात्रा संबंधी प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल रहा है।

    इस वर्ष गर्मी के मौसम में कई प्रमुख हवाई मार्गों पर टिकट कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विमान ईंधन की बढ़ती लागत और कुछ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर एयरस्पेस संबंधी बाधाओं के कारण एयरलाइंस का परिचालन खर्च बढ़ा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग छुट्टियां मनाने के लिए यात्रा पर निकल रहे हैं। हालांकि यात्रियों का एक वर्ग अब अपने बजट के अनुसार गंतव्य और यात्रा के साधनों में बदलाव कर रहा है।

    ट्रैवल उद्योग से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि लोग अब दूरस्थ और महंगे पर्यटन स्थलों के बजाय अपने शहरों के आसपास स्थित आकर्षक स्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। परिवार और मित्रों के साथ समूह में यात्रा करने का चलन भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे निजी वाहनों, टैक्सियों और बस सेवाओं की मांग में उल्लेखनीय उछाल देखा गया है।

    कई लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ दर्ज की गई है। पहाड़ी क्षेत्रों और ठंडे मौसम वाले स्थानों में लंबी वाहन कतारें और यातायात दबाव भी देखने को मिला है। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यह संकेत है कि महंगाई के बावजूद लोगों की प्राथमिकताओं में यात्रा और मनोरंजन अभी भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

    महंगे हवाई सफर का सबसे बड़ा लाभ रेल और सड़क परिवहन क्षेत्र को मिला है। घरेलू यात्राओं के लिए बड़ी संख्या में लोग अब ट्रेन और बस सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। विशेष रूप से हिल स्टेशनों और वीकेंड डेस्टिनेशन के लिए बस बुकिंग में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। इससे परिवहन क्षेत्र को अतिरिक्त कारोबार मिला है।

    अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबी दूरी वाले गंतव्यों की मांग में कुछ नरमी आई है। अमेरिका और पश्चिमी यूरोप जैसे देशों की यात्रा अपेक्षाकृत महंगी हो गई है, जिसका असर बुकिंग पर पड़ा है। रुपये की कमजोरी, बढ़ती यात्रा लागत और लंबी उड़ानों के बढ़ते खर्च ने भी यात्रियों के फैसलों को प्रभावित किया है।

    हालांकि विदेश यात्रा करने वाले भारतीय अब अपेक्षाकृत कम दूरी और बजट अनुकूल देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं। वियतनाम, श्रीलंका, सिंगापुर और थाईलैंड जैसे गंतव्य तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ये देश कम लागत, आसान कनेक्टिविटी और बेहतर पर्यटन सुविधाओं के कारण भारतीय पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।

    होटल उद्योग के लिए भी यह सीजन उत्साहजनक रहा है। कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर होटल ऑक्यूपेंसी 70 से 75 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। जयपुर, गोवा, आगरा और विभिन्न हिल स्टेशनों में होटल बुकिंग मजबूत बनी हुई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू पर्यटन की यह मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता खर्च और सेवा क्षेत्र की सकारात्मक स्थिति को भी दर्शाती है।

    कुल मिलाकर, बढ़ती लागत और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय यात्रियों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि यात्रा और अवकाश अब उनकी जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। यही कारण है कि बदलते हालात के अनुसार योजनाएं और बजट समायोजित करने के बावजूद पर्यटन क्षेत्र में मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।