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  • दतिया उपचुनाव में भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा सीएम मोहन यादव ने संभाला कहा घर घर जाकर आशुतोष तिवारी को जिताऊंगा

    दतिया उपचुनाव में भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा सीएम मोहन यादव ने संभाला कहा घर घर जाकर आशुतोष तिवारी को जिताऊंगा


    मध्य प्रदेश। दतिया विधानसभा उपचुनाव की सियासी सरगर्मियों के बीच भाजपा की नामांकन रैली उस समय भावनात्मक मोड़ पर पहुंच गई जब पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा मंच से संबोधन करते हुए भावुक हो गए। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में आयोजित जनसभा में अपने भाषण के अंतिम चरण में उनकी आंखें नम हो गईं और वे हाथ जोड़कर कार्यकर्ताओं के सामने खड़े रहे। मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उनके कंधे पर हाथ रखकर उनका हौसला बढ़ाया जबकि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी उन्हें संभाला। इस घटनाक्रम ने रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं को भी भावुक कर दिया।

    अपने संबोधन में नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि वह 16 जुलाई से दतिया में ही डेरा डालेंगे और कार्यकर्ताओं के साथ गांव गांव तथा घर घर जाकर भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में जनसंपर्क करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मतदाता के दरवाजे पर जाकर आशीर्वाद मांगेंगे और पूरी ताकत के साथ चुनाव अभियान को आगे बढ़ाएंगे। उनके इस संकल्प पर सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं ने जोरदार समर्थन जताया।

    रैली के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर भी तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के उस बयान का जवाब दिया जिसमें भाजपा की हार को अहंकार से जोड़ा गया था। मिश्रा ने कहा कि यदि कुछ हजार वोटों से हारने वाले अहंकारी कहलाते हैं तो बड़े अंतर से हारने वालों के लिए क्या कहा जाएगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता ही लोकतंत्र में अंतिम फैसला करती है और वही सही मूल्यांकन करती है।

    उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें दम है तो दतिया उपचुनाव मैदान में उतरकर भाजपा प्रत्याशी का सामना करें। उनका कहना था कि चुनावी मैदान ही तय करेगा कि जनता किसे स्वीकार करती है और किसे नकारती है। इस बयान के बाद रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया।

    नरोत्तम मिश्रा ने अपने भाषण में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए उन्हें समर्पित कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि आशुतोष तिवारी ने संगठन के लिए लंबे समय तक जमीन पर काम किया है और पार्टी के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारा है। उन्होंने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता पद और प्रतिष्ठा से नहीं बल्कि सेवा और समर्पण से पहचान बनाता है। यही कारण है कि संगठन ने एक कर्मठ कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाया है।

    सभा के दौरान उन्होंने दतिया उपचुनाव को केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं बल्कि विचारधारा और कार्यकर्ता संस्कृति की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि एक ओर राजनीतिक विरासत का दावा करने वाले लोग हैं तो दूसरी ओर संगठन और समाज सेवा के बल पर आगे बढ़ने वाले कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पूरी ऊर्जा और एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरें और भाजपा प्रत्याशी को रिकॉर्ड मतों से विजयी बनाएं।

    दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है और शीर्ष नेतृत्व लगातार चुनाव प्रचार में सक्रिय दिखाई दे रहा है। नामांकन रैली में उमड़ी भीड़ और मंच पर दिखाई दिया भावनात्मक दृश्य इस चुनाव को और अधिक चर्चा का विषय बना गया है।

  • 24.90 लाख की लूट में तीन सिपाही गिरफ्तार, झांसी लाकर पूछताछ, छह लोगों पर दर्ज हुई FIR

    24.90 लाख की लूट में तीन सिपाही गिरफ्तार, झांसी लाकर पूछताछ, छह लोगों पर दर्ज हुई FIR


    झांसी। सूरत के एक ड्राई फ्रूट कारोबारी के मुंशी से 24.90 लाख रुपये की कथित लूट के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। शनिवार देर रात जालौन में दबिश देकर तीनों को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद रविवार शाम उन्हें पूछताछ के लिए झांसी लाया गया।

    कोतवाली थाना पुलिस ने इस मामले में तीन सिपाहियों समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप सामने आने के बाद जालौन के पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने तीनों सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

    झांसी के तीन युवकों की भी तलाश
    जांच में झांसी के तीन युवकों की कथित संलिप्तता भी सामने आई है। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, लूटी गई रकम का बड़ा हिस्सा इन्हीं के पास होने की आशंका जताई जा रही है।

    कारोबारी के मुंशी का किया था अपहरण
    पुलिस के मुताबिक, सूरत निवासी ड्राई फ्रूट कारोबारी जितेंद्र पटेल के मुंशी किशन पांचाल (30) का गुरुवार शाम काले रंग की क्रेटा कार में आए आरोपियों ने कथित रूप से अपहरण कर लिया था। आरोप है कि तीन सिपाहियों ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर रुपये से भरा बैग लूट लिया और बाद में किशन पांचाल को कानपुर बाईपास के पास छोड़कर फरार हो गए।

    CCTV फुटेज से हुई पहचान
    घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में तीन पुलिसकर्मी वर्दी में दिखाई दिए। उनकी पहचान राघवेंद्र राजपूत, नीरज राजपूत और मनोज के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद तीनों झांसी-कानपुर हाईवे से उरई की ओर भाग गए थे।

    लोकेशन ट्रैक कर हुई गिरफ्तारी
    मामले के खुलासे के लिए स्वॉट टीम सहित चार पुलिस टीमें गठित की गई थीं। तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने शनिवार देर रात उरई में दबिश देकर तीनों आरोपियों को हिरासत में लिया। रविवार शाम उन्हें झांसी लाकर क्राइम ब्रांच कार्यालय में पूछताछ की गई। पुलिस अब पूछताछ के आधार पर पूरी साजिश और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

    झांसी में हुई थी तीनों की दोस्ती
    जांच में सामने आया है कि मनोज, राघवेंद्र और नीरज पिछले तीन वर्षों से जालौन पुलिस लाइन में तैनात थे। इससे पहले तीनों पीएसी के माध्यम से झांसी पुलिस लाइन में साथ कार्य कर चुके थे, जहां उनकी आपस में दोस्ती हुई थी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को पहले से जानकारी थी कि मुंशी किशन पांचाल बड़ी नकदी लेकर आने वाला है। वारदात वाले दिन राघवेंद्र और मनोज बिना सूचना झांसी पहुंचे थे, जबकि नीरज छुट्टी लेकर आया था।

    लूटी गई रकम की बरामदगी के प्रयास जारी
    पुलिस झांसी के तीन अन्य संदिग्ध युवकों की तलाश के साथ-साथ 24.90 लाख रुपये की लूटी गई रकम बरामद करने का प्रयास भी कर रही है। झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि तीनों गिरफ्तार सिपाहियों से पूछताछ जारी है। साथ ही मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और लूटी गई राशि की बरामदगी के लिए पुलिस टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

  • बजट की कमी से थमी 'ड्रोन दीदी' योजना की रफ्तार, प्रशिक्षण के एक साल बाद भी नहीं मिले कृषि ड्रोन

    बजट की कमी से थमी 'ड्रोन दीदी' योजना की रफ्तार, प्रशिक्षण के एक साल बाद भी नहीं मिले कृषि ड्रोन

    झांसी। महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना झांसी में बजट के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रही है। बड़ागांव ब्लॉक की तीन महिला किसानों ने एक वर्ष पहले लखनऊ में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण पूरा किया था, लेकिन अब तक उन्हें कृषि ड्रोन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के बावजूद वे स्वरोजगार की शुरुआत नहीं कर सकी हैं।

    प्रशिक्षण पूरा, लेकिन संसाधनों का इंतजार
    योजना के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का चयन कर उन्हें ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद कृषि कार्यों के लिए ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है, ताकि महिलाएं खेतों में उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव जैसी सेवाएं देकर आय अर्जित कर सकें।

    पिछले वर्ष बड़ागांव ब्लॉक की तीन महिलाओं को लखनऊ में प्रशिक्षण दिलाया गया था। हालांकि, प्रशिक्षण पूरा हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बजट जारी न होने के कारण उन्हें अब तक ड्रोन नहीं मिल पाए हैं। इससे वे सीखी गई तकनीक का व्यावहारिक उपयोग नहीं कर पा रही हैं।

    एक ड्रोन की लागत करीब 10 लाख रुपये
    एनआरएलएम के तहत चयनित महिलाओं को लगभग 10 लाख रुपये लागत का कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है। इन ड्रोन की मदद से वे किसानों के खेतों में उर्वरक, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव कर नियमित आय अर्जित कर सकती हैं।

    पहले चयनित महिलाओं ने पेश की मिसाल
    योजना के सफल परिणाम भी सामने आ चुके हैं। करीब दो वर्ष पहले बड़ागांव क्षेत्र के गड़मऊ गांव की रानी देवी और हेमवती को हैदराबाद में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद दोनों को ड्रोन उपलब्ध कराए गए और वर्तमान में वे किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से छिड़काव कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि नई चयनित महिलाओं को भी समय पर ड्रोन उपलब्ध करा दिए जाएं तो वे भी इसी तरह अपना स्वरोजगार स्थापित कर सकेंगी।

    क्या है ड्रोन दीदी योजना?
    ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ना है। इसके तहत महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है और बाद में कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है। इन ड्रोन की मदद से कम समय में उर्वरक, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा सकता है। इससे किसानों का समय और लागत दोनों बचते हैं, जबकि प्रशिक्षित महिलाओं के लिए आय का नया स्रोत तैयार होता है।

    बजट मिलते ही दिए जाएंगे ड्रोन
    एनआरएलएम, झांसी के प्रभारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि बजट उपलब्ध होते ही ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित महिला किसानों को कृषि ड्रोन उपलब्ध करा दिए जाएंगे, ताकि वे जल्द से जल्द कृषि सेवाएं शुरू कर सकें।

  • मुंह के छालों से हैं परेशान तो अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय दर्द जलन और खाने की तकलीफ से मिलेगी राहत

    मुंह के छालों से हैं परेशान तो अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय दर्द जलन और खाने की तकलीफ से मिलेगी राहत


    नई दिल्ली । मुंह के छाले देखने में छोटे होते हैं लेकिन इनकी वजह से होने वाली तकलीफ काफी बड़ी हो सकती है। छाले होने पर खाना खाना पानी पीना और यहां तक कि सामान्य बातचीत करना भी दर्दनाक हो जाता है। कई बार यह समस्या कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है लेकिन इस दौरान जलन और दर्द व्यक्ति की दिनचर्या को प्रभावित कर देते हैं। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं। हालांकि यदि छाले लंबे समय तक बने रहें या बार बार होने लगें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    विशेषज्ञों के अनुसार मुंह के छालों के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में विटामिन बी 12 आयरन या फोलिक एसिड की कमी तनाव हार्मोनल बदलाव मुंह के अंदर चोट लगना या रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। कई बार अत्यधिक मसालेदार भोजन या दांतों की तेज धार भी छालों की वजह बन सकती है। इसलिए केवल घरेलू उपचार ही नहीं बल्कि सही खानपान और संतुलित जीवनशैली भी जरूरी है।

    मुंह के छालों में सबसे आसान और प्रभावी घरेलू उपाय नमक वाले गुनगुने पानी से कुल्ला करना माना जाता है। नमक में मौजूद प्राकृतिक गुण मुंह के बैक्टीरिया को कम करने में मदद करते हैं और सूजन को घटाने में सहायक होते हैं। नियमित कुल्ला करने से छाले वाली जगह साफ रहती है और संक्रमण का खतरा भी कम हो सकता है।

    शहद भी मुंह के छालों में राहत देने वाला प्राकृतिक उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुण छाले पर सुरक्षात्मक परत बनाते हैं जिससे जलन कम महसूस होती है। इसके अलावा शहद घाव भरने की प्रक्रिया को भी तेज करने में मदद कर सकता है। दिन में दो से तीन बार साफ उंगली या कॉटन की सहायता से शहद लगाने से आराम मिल सकता है।

    नारियल तेल भी इस समस्या में उपयोगी माना जाता है। इसमें पाया जाने वाला लॉरिक एसिड बैक्टीरिया और सूजन से लड़ने में सहायक होता है। यह छाले वाली जगह को नम बनाए रखता है जिससे दर्द और जलन कम महसूस होती है। हालांकि यदि किसी व्यक्ति को नारियल तेल से एलर्जी हो या लगाने के बाद परेशानी बढ़े तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।

    बेकिंग सोडा का उपयोग भी कई लोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं। यह मुंह के अम्लीय वातावरण को संतुलित करने में मदद करता है जिससे जलन कम हो सकती है। इसके अलावा ठंडा पानी पीना या बर्फ की हल्की सिकाई भी कुछ समय के लिए दर्द से राहत देती है लेकिन बर्फ को सीधे लंबे समय तक छाले पर नहीं रखना चाहिए।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि छाले दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें बार बार निकलें तेज दर्द हो बुखार आए या खून निकलने जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। साथ ही पर्याप्त पानी पीना हरी सब्जियां फल और विटामिन युक्त भोजन लेना तथा तनाव कम करना भी इस समस्या से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही देखभाल और समय पर उपचार से मुंह के छालों की परेशानी से जल्दी राहत पाई जा सकती है।

  • 'लखनऊ अब सिर्फ तहजीब का नहीं, मिसाइल निर्माण का भी शहर', दीक्षांत समारोह में बोले डिप्टी CM ब्रजेश पाठक

    'लखनऊ अब सिर्फ तहजीब का नहीं, मिसाइल निर्माण का भी शहर', दीक्षांत समारोह में बोले डिप्टी CM ब्रजेश पाठक

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि लखनऊ अब केवल अपनी तहजीब और मुस्कुराहट के लिए ही नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयासों से शहर में मिसाइलों का निर्माण हो रहा है, जिससे देश की रक्षा क्षमता को मजबूती मिल रही है।

    किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा, “पहले कहा जाता था, मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं। अब यहां मिसाइलें बन रही हैं। जो गड़बड़ी करेगा, उसे मुस्कुराने का मौका नहीं मिलेगा।” उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक की मदद से सटीक लक्ष्य भेदा जा सकता है।

    1701 छात्रों को मिली उपाधि, 54 मेधावियों का सम्मान
    अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने समारोह में 1701 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं, जिनमें 975 छात्र और 726 छात्राएं शामिल रहीं। इसके अलावा विभिन्न पाठ्यक्रमों के 20 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 54 पदकों से सम्मानित किया गया।

    KGMU के नाम को लेकर भ्रम की बात
    समारोह में स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के नाम को लेकर लोगों में अक्सर भ्रम रहता है, जबकि इसके निर्माण में किंग जॉर्ज का कोई आर्थिक योगदान नहीं था।

    डॉ. एम. श्रीनिवास को मानद डीएससी
    इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास को चिकित्सा प्रशासन और स्वास्थ्य नीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डीएससी (Doctor of Science) की उपाधि प्रदान की गई। वहीं विश्वविद्यालय के कई चिकित्सकों को कुलपति एवं फैकल्टी अप्रिसिएशन अवार्ड से सम्मानित किया गया।

    दीप्ति शर्मा ने जीते सबसे अधिक पदक
    एमबीबीएस की छात्रा दीप्ति शर्मा समारोह की सबसे सफल छात्रा रहीं। उन्होंने 16 पदक अपने नाम किए। उनके अलावा निधि सिंह, अभिलाषा घोष, अनिकेत चंद्रा सहित कुल 20 मेधावी विद्यार्थियों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

  • मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोका, पार्टी ने पुलिस पर लगाए आरोप

    मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोका, पार्टी ने पुलिस पर लगाए आरोप

    मेरठ। मेरठ छात्रा हत्याकांड को लेकर पीड़ित परिवार की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) तक पहुंचाने जा रहे कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को सोमवार को मेरठ-दिल्ली हाईवे स्थित काशी टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मौके पर विरोध प्रदर्शन करते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

    काशी टोल प्लाजा पर रोका गया काफिला
    कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल एसएसपी कार्यालय जाने के लिए मेरठ पहुंच रहा था। इसी दौरान पुलिस ने काशी टोल प्लाजा पर उनके काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    कांग्रेस ने पुलिस पर लगाए आरोप
    कांग्रेस नेताओं का कहना था कि वे केवल पीड़ित परिवार की शिकायत लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मिलने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन रोक दिया। उनका आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है और इससे प्रदेश का माहौल प्रभावित होता है।

    प्रदेश सरकार पर भी साधा निशाना
    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार की भी आलोचना की। उनका आरोप था कि पुलिस को सरकार का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण आम लोगों के साथ मनमानी की जा रही है। नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इस पर नाराजगी जताई।

    प्रतिनिधिमंडल में ये नेता रहे शामिल
    कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा, उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र गौतम, सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और बाराबंकी से सांसद तनुज पूनिया सहित अन्य नेता शामिल थे।

  • राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन

    राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन


    अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया तेज कर दी है। ट्रस्ट की ओर से चयनित सीईओ को वेतन और आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पद पूरी तरह ट्रस्ट के अधीन होगा और नियुक्त अधिकारी वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में मंदिर के प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    18 जुलाई तक किए जा सकेंगे आवेदन
    सीईओ चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने पात्रता के मानक तय कर दिए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 18 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। इस पद के लिए उम्मीदवार का स्नातक (Graduation) होना अनिवार्य है। साथ ही प्रशासन या वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। आवेदन करने वाले व्यक्ति का हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी आवश्यक शर्त रखी गई है। चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति तीन वर्ष के लिए की जाएगी।

    22 जुलाई की बैठक से पहले हो सकता है चयन
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक से पहले ही नए सीईओ के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। नई दिल्ली में आयोजित चयन समिति की बैठक में नियुक्ति प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावरे शामिल हैं।

    चढ़ावा चोरी मामले के बाद तेज हुई प्रक्रिया
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।

    जांच में सामने आए नए खुलासे
    एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला ने राम मंदिर में नौकरी के दौरान कथित तौर पर करीब 20 लाख रुपये खर्च कर मकान बनवाया। इसके अलावा उसने अपने भाई के नाम पर एक ब्रेज़ा कार खरीदी और अपनी गर्लफ्रेंड को एक आईफोन तथा दो लाख रुपये भी दिए। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रतापगढ़ निवासी अविनाश शुक्ला राम मंदिर में नौकरी मिलने से पहले पीने का पानी बेचने का काम करता था। मामले की जांच अभी जारी है।

  • योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले से यूपी की नौकरशाही में मचा हलचल

    योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले से यूपी की नौकरशाही में मचा हलचल


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एक साथ 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। देर रात जारी तबादला सूची के साथ ही प्रदेश की नौकरशाही में व्यापक फेरबदल देखने को मिला। इस निर्णय के तहत कई जिलों में उप जिलाधिकारी बदले गए हैं जबकि विकास प्राधिकरणों नगर निगमों आवास एवं विकास परिषद और राजस्व परिषद सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में भी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक गतिशील बनाना और जिलों में बेहतर प्रशासनिक समन्वय स्थापित करना बताया जा रहा है। व्यापक तबादला सूची में बड़ी संख्या में एसडीएम स्तर के अधिकारियों को नई तैनाती दी गई है जिससे कई जिलों में प्रशासनिक नेतृत्व पूरी तरह बदल गया है।

    जारी आदेश के अनुसार प्रशांत कुमार को उन्नाव से बहराइच भेजा गया है जबकि ध्रुव शुक्ला को गाजीपुर का नया एसडीएम बनाया गया है। कुमार संजय को जालौन अभय कुमार सिंह को राजस्व परिषद में विशेष कार्याधिकारी मनोज प्रकाश को जालौन अरविंद कुमार सिंह को मैनपुरी और पुष्पेंद्र पटेल को अंबेडकरनगर में नई जिम्मेदारी दी गई है। योगेश कुमार गौड़ को सहारनपुर तथा ज्योति शर्मा को कानपुर नगर में एसडीएम बनाया गया है।

    इसके अलावा कई महिला अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। दीपिका मेहर को शामली सुरभि शर्मा को बागपत प्रतिभा मिश्रा को कानपुर देहात प्रीति तिवारी को बांदा आकांक्षा सिंह को चंदौली मधुमिता सिंह को अंबेडकरनगर रत्निका श्रीवास्तव को रामपुर और वंदना पांडेय को अयोध्या में एसडीएम के रूप में तैनाती मिली है। वहीं कई अधिकारियों को नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में विशेष कार्याधिकारी तथा सहायक नगर आयुक्त के पदों पर नियुक्त किया गया है।

    सरकार ने प्रयागराज कानपुर नगर लखनऊ नोएडा ग्रेटर नोएडा अलीगढ़ और अन्य विकास प्राधिकरणों में भी प्रशासनिक बदलाव किए हैं। कई अधिकारियों को औद्योगिक विकास प्राधिकरणों नगर निगमों और स्थानीय निकाय निदेशालय में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं जिससे शहरी प्रशासन को और मजबूत बनाने की तैयारी दिखाई दे रही है।

    तबादला सूची में बहराइच मैनपुरी गाजीपुर बाराबंकी उन्नाव जौनपुर मथुरा प्रयागराज बांदा बागपत लखीमपुर खीरी रायबरेली गोरखपुर अयोध्या देवरिया बिजनौर हरदोई बुलंदशहर गोंडा झांसी वाराणसी कुशीनगर सोनभद्र चित्रकूट और फर्रुखाबाद सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों को शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने सीमित फेरबदल के बजाय व्यापक प्रशासनिक पुनर्संरचना का फैसला किया है।

    प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर किए गए तबादलों का उद्देश्य शासन की योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारना और कानून व्यवस्था के साथ विकास कार्यों में नई गति लाना है। नए अधिकारियों के कार्यभार संभालने के बाद जिलों में प्रशासनिक कार्यशैली और योजनाओं के क्रियान्वयन में बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में सभी अधिकारी अपनी नई तैनाती वाले जिलों और विभागों में कार्यभार ग्रहण करेंगे जिसके बाद प्रशासनिक गतिविधियां नए सिरे से गति पकड़ेंगी।

  • सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर

    सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर


    नई दिल्ली । भारत की आंतरिक सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल माने जाने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ के 88वें स्थापना दिवस को इस वर्ष विशेष अंदाज में मनाया जाएगा। भारत सरकार ने इस अवसर पर देशभर के नागरिकों को सीआरपीएफ के शौर्य समर्पण और सेवा भावना को सम्मान देने के लिए विभिन्न ऑनलाइन प्रतियोगिताओं और जनभागीदारी अभियानों से जोड़ने का फैसला किया है। सरकार ने सभी आयु वर्ग के लोगों से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें और देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करें।

    भारत सरकार के नागरिक सहभागिता मंच माई जीओवी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस विशेष अभियान की घोषणा करते हुए नागरिकों को सेवा और निष्ठा की गौरवशाली विरासत विषय पर आधारित पेंटिंग प्रतियोगिता क्विज शॉर्ट वीडियो प्रतियोगिता और नागरिक प्रतिज्ञा अभियान में भाग लेने का निमंत्रण दिया है। इच्छुक प्रतिभागी माई जीओवी पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण कर इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं।

    सरकार ने अपने संदेश में कहा है कि सीआरपीएफ केवल भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ही नहीं बल्कि देश की एकता अखंडता और आंतरिक सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ भी है। वर्ष 1939 में स्थापित इस बल ने सेवा और निष्ठा के अपने मूल मंत्र को निभाते हुए हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की है। चाहे आतंकवाद के खिलाफ अभियान हो वामपंथी उग्रवाद से मुकाबला हो कानून व्यवस्था बनाए रखना हो शांतिपूर्ण चुनाव कराना हो या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य करना हो सीआरपीएफ ने हर मोर्चे पर अपनी दक्षता और बहादुरी का परिचय दिया है।

    सीआरपीएफ की विशेष इकाइयों रैपिड एक्शन फोर्स और कोबरा ने भी समय समय पर कठिन अभियानों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। देश के दुर्गम इलाकों से लेकर संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों तक बल के जवान दिन रात राष्ट्र की सुरक्षा में तैनात रहते हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते हैं।

    इस गौरवशाली यात्रा के दौरान सीआरपीएफ के 2270 से अधिक वीर जवान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। उनका साहस समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सरकार का मानना है कि स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताएं केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति सुरक्षा और सेवा के मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बनेंगी।

    सरकार ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर सीआरपीएफ के वीर जवानों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें। साथ ही अपनी रचनात्मकता और ज्ञान के माध्यम से उस बल के प्रति सम्मान प्रकट करें जिसने दशकों से भारत की एकता संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  • कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा

    कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा


    नई दिल्ली । कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए पूरे देश में एक दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया। भारत सरकार के निर्देश पर सोमवार को नई दिल्ली मुंबई केरल सहित देशभर के उन सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया जहां नियमित रूप से तिरंगा फहराया जाता है। इसके साथ ही राष्ट्रीय शोक के सम्मान में सभी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए गए। भारत और कतर के दशकों पुराने मजबूत संबंधों को देखते हुए इस निर्णय को दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है।

    कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार को निधन हो गया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही भारत सरकार ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पर तिरंगा आधा झुका रहा जबकि मुंबई के मंत्रालय और केरल के विभिन्न सरकारी भवनों पर भी राष्ट्रीय ध्वज सम्मान स्वरूप आधा झुकाया गया। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार पूरे देश में ध्वज संहिता का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए।

    केरल में इस शोक का विशेष महत्व देखने को मिला क्योंकि राज्य का बड़ा प्रवासी समुदाय लंबे समय से कतर और अन्य खाड़ी देशों में कार्यरत है। कतर के साथ केरल के आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध काफी मजबूत माने जाते हैं। राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अपने अधिकार क्षेत्र के प्रत्येक सरकारी कार्यालय और संस्थान में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें और राष्ट्रीय शोक से जुड़े सभी प्रोटोकॉल का पालन कराया जाए।

    विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शोक के दौरान पूरे भारत में उन सभी सरकारी और सार्वजनिक भवनों पर तिरंगा आधा झुका रहेगा जहां नियमित रूप से ध्वज फहराया जाता है। साथ ही इस दिन किसी भी प्रकार के आधिकारिक सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे ताकि दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया जा सके।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शेख हमद दूरदर्शी नेतृत्व वाले ऐसे शासक थे जिन्होंने कतर को विकास समृद्धि और वैश्विक पहचान की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत का सच्चा मित्र बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती मिली और सहयोग के अनेक नए रास्ते खुले।

    जानकारी के अनुसार केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भारत सरकार की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए जल्द ही कतर जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि शेख हमद बिन खलीफा अल थानी ने वर्ष 1995 से 2013 तक कतर का नेतृत्व किया और बाद में सत्ता अपने पुत्र शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी। उनके कार्यकाल को कतर के आधुनिक विकास और वैश्विक प्रभाव के विस्तार का महत्वपूर्ण दौर माना जाता है।