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  • MP: दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को दी चेतावनी… बोले- अपने पास दर्जनभर विभाग रखोगे तो फंस जाओगे

    MP: दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को दी चेतावनी… बोले- अपने पास दर्जनभर विभाग रखोगे तो फंस जाओगे


    भोपाल।
    कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Senior leader Digvijaya Singh) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें दर्जनभर विभाग अपने पास नहीं रखने चाहिए, नहीं तो किसी दिन फंस जाएंगे।

    उन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री यादव एक मिल मजदूर के बेटे हैं लेकिन वह अगर गड़बड़ी करेंगे तो उन्हें बख्शा भी नहीं जाएगा। कांग्रेस ने एक खबर का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री यादव पर उज्जैन में कथित तौर पर जमीन घोटाले का आरोप लगाया है। पार्टी ने इसे ‘महाकाल’ की जमीन की लूट’ करार दिया था और मुख्यमंत्री यादव के इस्तीफे और आरोपों की न्यायिक जांच की मांग की है।

    इसी मुद्दे पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मोहन यादव जी, आपने 12-12 विभाग अपने पास रख रखे हैं। बहुत गलती कर रहे हो। फंस जाओगे। गलती करेगा अधिकारी, पैसा खाएगा अधिकारी और फंसोगे आप। मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास वर्तमान में सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय, एवं ऐसे अन्य समस्त विभाग हैं जो किसी अन्य मंत्री को न सौंपा गया है।

    सिंह ने कहा कि वह भी 10 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं लेकिन कभी उन पर कोई आरोप नहीं लगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान (केंद्रीय कृषि मंत्री) ने एक-एक फाइल ढूंढी लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा, मोहन यादव जी आप भी उसकी जांच कर लें, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि मेरे पास कोई विभाग ही नहीं था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि इसमें इनकी कौन-कौन सी कंपनियां हैं और कौन-कौन लोग इनके इस कथित भूमि घोटाले में शामिल हैं।


    दिग्विजय सिंह बोले- हम बख्शेंगे नहीं

    उन्होंने आगे कहा,मैं तो मोहन यादव जी को राय-मशविरा देने के लिए आया हूं। ऐसा मत करो! आप एक मिल मजदूर के बेटे हो। मुख्यमंत्री बने हो, नाम कमाओ! पैसा जो कमा रहे हो न, जिसका हिसाब पता नहीं किस-किस को देना पड़ रहा है आपको। हमारी सहानुभूति है इस मामले में। दिग्विजय सिंह ने कहा, मुख्यमंत्री पर यदि आरोप लगते हैं तो हम लोग आपको बख्शेंगे नहीं।

    उन्होंने कहा, यह मत समझना कि हमको आप खरीद लोगे। हम कोई बिकाऊ माल नहीं हैं, हम टिकाऊ माल हैं। बिकाऊ माल जो था, गया भाजपा में। ये सब कांग्रेसी जो यहां बैठे हैं, सब टिकाऊ माल हैं। लड़ाई लड़ने के लिए हम तैयार हैं और लड़ाई लड़ेंगे।

  • Snan Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ आज 108 कलशों से स्‍नान के बाद होंगे बीमार… फिर 15 दिन का आराम

    Snan Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ आज 108 कलशों से स्‍नान के बाद होंगे बीमार… फिर 15 दिन का आराम


    पुरी।
    भगवान जगन्‍नाथ (Lord Jagannath) की रथ यात्रा (Rath Yatra) से पहले एक महत्‍वपूर्ण अनुष्‍ठान किया जाता है, जिसे स्‍नान यात्रा कहा जाता है. ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा (Jagannath Snana Purnima) के दिन महाप्रभु जगन्‍नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा का विशेष स्‍नान होता है, जिस कारण इस दिन को स्‍नान पूर्णिमा और इस परंपरा को स्‍नान यात्रा कहा जाता है।

    साल 2026 में स्‍नान यात्रा आज 29 जून 2026, सोमवार को है. वहीं रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी. रथ यात्रा से पहले भगवान का सुन कुएं के पवित्र जल से स्‍नान होता है. इसके बाद वे 15 दिनों के बीमार पड़ते हैं और आराम के लिए एकांतवास में चले जाते हैं।


    108 स्‍वर्ण कलशों से भगवान का स्‍नान

    स्‍नान यात्रा उत्‍सव मशहूर रथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत होता है. इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है. यह जल एक खास पवित्र कुएं का होता है, जिसे साल में एक बार ही खोला जाता है. इस जल में खास जड़ी-बूटियां, इत्र आदि मिलाकर 3 देवी-देवताओं का स्‍नान कराया जाता है।

    भगवान का विशेष श्रृंगार होता है. भगवान जगन्‍नाथ गजवेश धारण करते हैं. यानी कि उनका मुख गजानन के रूप में सजाया जाता है. इससे जुड़ी एक कथा है कि भगवान गणेश के एक भक्‍त ने जब जगन्‍नाथ भगवान के दर्शन करने की इच्‍छा की तो उसे भगवान जगन्‍नाथ ने गजानन रूप में दर्शन दिए थे. आज भी उसी परंपरा का पालन करते हुए हर साल स्‍नान यात्रा के दिन भगवान गज वेश धारण करते हैं।


    15 दिन नहीं होंगे दर्शन

    इस महास्‍नान के बाद महाप्रभु जगन्‍नाथ 15 दिन के लिए प्रतीकात्‍मक रूप से बीमार होते हैं और एकांतवास में रहते हैं. इस दौरान श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन नहीं होते हैं. पुजारी भगवान को तरह-तरह के काढ़े का भोग लगाते हैं।

    यह परंपरा बताती है कि भगवान भी इंसान की तरह बीमार होते हैं. उन्‍हें औषधियां दी जाती हैं. 15 दिन के अनवसर काल में के बाद भगवान स्‍वस्‍थ होकर नवयौवन रूप में भक्‍तों को दर्शन देते हैं।

    …फिर निकलती है रथ यात्रा
    इसके बाद कई धार्मिक अनुष्‍ठान प्रारंभ होते हैं और फिर भगवान जगन्‍नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा 3 दिव्‍य और भव्‍य रथों में सवार होकर गुंडिचा मंदिर के लिए निकलते हैं. इन रथों की रस्सियां खींचने के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालु पहुंचते हैं. (संबंधित खबर: कौन थीं गुंडिचा, जिनके मंदिर में हर साल जाते हैं भगवान जगन्नाथ?)

    मान्‍यता है कि जो भक्‍त रथ की रस्सियों को छू भी ले उसे जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है और वह मोक्ष प्राप्‍त करता है. वहीं इस रथ यात्रा के दर्शन करने से पाप नष्‍ट होते हैं और सारे तीर्थ करने का पुण्‍य प्राप्‍त होता है।

  • US: ट्रंप फेमिली को 1.6 अरब डालर की डील में हुआ बंपर मुनाफा…. वित्त मंत्री का नाम भी शामिल

    US: ट्रंप फेमिली को 1.6 अरब डालर की डील में हुआ बंपर मुनाफा…. वित्त मंत्री का नाम भी शामिल


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को लेकर एक नया बवाल शुरू हो गया है। हाल ही में हुए एक बड़े खुलासे के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने हाल ही में एक ऐसी डील (Deel) की है जिससे ट्रंप के बेटे को अरबों का फायदा होने जा रहा है। वहीं इस प्रॉफिट वाली डील में ट्रंप के परिवार के साथ साथ अमेरिका के वित्त मंत्री हावर्ड लुटनिक (Finance Minister Howard Lutnick) का नाम भी है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन की अमेरिका फर्स्ट की नीति को लेकर सवाल उठने शुरू हो हुए हैं।

    दरअसल यह खुलासा द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में हुआ है। इसके मुताबिक कजाकिस्तान (Kazakhstan) के साथ दुनिया के सबसे बड़े दुर्लभ खनिज ‘टंगस्टन’ के भंडार को विकसित करने के लिए अमेरिका ने हाल ही में 1.6 अरब डॉलर यानी करीब 13,500 करोड़ रुपये की सरकारी डील की है। इस डील से सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के बेटों और उनके वाणिज्य मंत्री के परिवार को तगड़ा वित्तीय मुनाफा होने जा रहा है।

    बेहद अहम है ये डील
    कजाकिस्तान के साथ हुआ यह सौदा अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। फिलहाल वैश्विक टंगस्टन बाजार पर पूरी तरह चीन का कब्जा है। चीन लगातार इस दुर्लभ खनिज के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध बढ़ा रहा है। बता दें कि टंगस्टन का इस्तेमाल मिसाइल वॉरहेड्स, फाइटर जेट्स, सेमीकंडक्टर्स और कई एडवांस सैन्य तकनीकों में होता है। अमेरिका इस डील के जरिए चीन पर अपनी निर्भरता खत्म करना चाहता है। हालांकि अब टंगस्टन से ज्यादा अब चर्चा उन चेहरों की हो रही है, जिनकी तिजोरियां इस सरकारी सौदे से भरने वाली हैं।

    तय हुई डील, पीछे-पीछे बेटों ने लगा दिए पैसे
    दस्तावेजों के मुताबिक, जैसे-जैसे सरकारी स्तर पर इस डील की बातचीत आगे बढ़ रही थी, ठीक उसी समय ट्रंप और उनके करीबी मंत्रियों के परिवारों की कंपनियां इस सौदे में अपनी हिस्सेदारी खरीद रही थीं। सितंबर 2025 में न्यूयॉर्क के सेंट रेजिस होटल में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव के बीच बैठक हुई। इसी बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद फोन कॉल के जरिए कजाकिस्तान के राष्ट्रपति को इस प्रोजेक्ट के लिए राजी किया।

    इस बैठक के ठीक कुछ हफ्तों बाद, ‘डोमिनारी सिक्योरिटीज’ नाम की एक इन्वेस्टमेंट फर्म ने इस कजाकिस्तान माइनिंग प्रोजेक्ट से जुड़ी मुख्य कंपनी में शेयर खरीद लिए। यह कंपनी ट्रंप टावर से चलती है और इसमें डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप की 20% हिस्सेदारी है। दूसरी तरफ, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के बेटों ब्रैंडन और काइल की एक कंपनी इन्वेस्टमेंट बैंक ‘कैंटर फिट्जगेराल्ड’ ने इस प्रोजेक्ट में निवेश के लिए 210 मिलियन डॉलर का फंड जुटाया।

    सरकारी तिजोरी से $8.9 अरब पाने की होड़
    यह कोई इकलौता मामला नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और लुटनिक परिवारों से जुड़ी कंपनियां कम से कम 14 ऐसी माइनिंग प्रोजेक्ट्स में हित रखती हैं, जिन्हें अमेरिकी सरकार का समर्थन प्राप्त है। ये कंपनियां अमेरिकी सरकार से लगभग 8.9 अरब डॉलर की फेडरल फंडिंग, लोन या रेगुलेटरी मंजूरी पाने की रेस में सबसे आगे हैं।

    संसद में उठे सवाल, वाइट हाउस ने खारिज किए आरोप
    अमेरिकी सांसद मैक्सिन डेक्सटर ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, “संसद को यह सुनिश्चित करना होगा कि टैक्सपेयर्स के पैसों का इस्तेमाल देश के हित में हो, न कि ट्रंप प्रशासन के करीबी लोगों और उनके परिवार के सदस्यों की जेबें भरने के लिए।” वहीं हितों के टकराव के आरोपों पर अब वाइट हाउस ने अपनी सफाई जारी की है। वाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “ट्रंप प्रशासन के फैसलों के पीछे सिर्फ और सिर्फ अमेरिकी जनता का हित है। अमेरिका की क्रिटिकल सप्लाई चेन को सुरक्षित करना राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकता है।” इधर वाणिज्य विभाग ने कहा है कि मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने अपनी पुरानी कंपनी ‘कैंटर फिट्जगेराल्ड’ में अपनी हिस्सेदारी पहले ही बेच दी है और उनका इस लोन या फंडिंग फैसलों से कोई लेना-देना नहीं है।

  • Earthquake : पड़ोसी देश चीन के सिचुआन प्रांत में आया भूकंप… 5.5 रही तीव्रता

    Earthquake : पड़ोसी देश चीन के सिचुआन प्रांत में आया भूकंप… 5.5 रही तीव्रता


    बीजिंग।
    वेनेजुएला (Venezuela) में भूकंप (Earthquake) की तबाही से दुनिया अब तक गमगीन है. वेनेजुएला के बाद जापान और अमेरिका में भूकंप आया. भारत और अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस हुए. अब भूकंप की आहट भारत के पड़ोस में सुनाई दी है. जी हां, भारत के पड़ोस यानी चीन (China) में भूकंप आया है. दक्षिण-पश्चिम चीन (Southwest China) के सिचुआन प्रांत (Sichuan Province) में 5.5 तीव्रता का तेज भूकंप आया है. स्थानीय समयानुसार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए. इससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

    दरअसल, दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के यिबिन शहर में देर रात 5.5 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया. इस भूकंप के झटके चेंगदू और चोंगकिंग जैसे बड़े क्षेत्रीय केंद्रों तक महसूस किए गए. इस भूकंप से लोगों में खौफ का माहौल है. आधी रात को लोग अपने घरों से बाहर की ओर भागते दिखे. भूकंप का केंद्र गाओक्सियन काउंटी में जमीन से महज 6 किलोमीटर की गहराई पर था।

    अभी तक की जानकारी के मुताबिक, इस भूकंप से केंद्र के पास की कुछ इमारतों की दीवारों को मामूली नुकसान पहुंचा है और आपातकालीन टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं. अभी किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. बता दें इससे दो दिन पहले यानी शनिवार को अफगानिस्तान में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था. इस भूकंप के कारण दिल्ली-एनसीआर के अलावा जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा तथा चंडीगढ़ सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में तेज झटके महसूस किए गए थे।


    संडे को जापान में भूकंप

    इसके बाद रविवार को जापान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था. इवाते प्रांत के तट के पास रविवार को स्थानीय समयानुसार सुबह सात बजकर 25 मिनट पर भूकंप आया. इसका केंद्र करीब 40 किलोमीटर (25 मील) की गहराई में था. भूकंप के झटके आओमोरी प्रांत और आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी महसूस किए गए. राहत की बात यह थी कि इसमें किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं आई।


    वेनेजुएला में भूकंप की तबाही

    वहीं, वेनेज़ुएला में आए भूकंप के झटकों से मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. वेनेजुएला में अब तक 1500 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी. इस सबके बीच लोगों में हताशा बढ़ती जा रही है. वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे।

  • यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस में तेल संकट गहराया, दो रिफाइनरियों पर हमला, पुतिन ने पहली बार मानी ईंधन की कमी

    यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस में तेल संकट गहराया, दो रिफाइनरियों पर हमला, पुतिन ने पहली बार मानी ईंधन की कमी


    कीव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों ने हालात और तनावपूर्ण कर दिए हैं। यूक्रेन ने रूस की दो प्रमुख तेल रिफाइनरियों को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है, जिसके बाद वहां आग लगने और नुकसान की खबरें सामने आई हैं। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार स्वीकार किया है कि देश में ईंधन की कमी की स्थिति बन रही है।

    रिफाइनरी पर हमला, आग और नुकसान

    रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को यूक्रेन ने रूस के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र के स्लाव्यांस्क-ना-कुबानी स्थित इस रिफाइनरी में हमले के बाद एक व्यक्ति की मौत और एक अन्य के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।

    यह रिफाइनरी हर साल लगभग 40 लाख टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण करती है और काला सागर के बंदरगाहों के जरिए पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करती है।

    यूक्रेन का दावा- दो रिफाइनरियां निशाने पर

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया कि उनके देश के ड्रोन हमलों में रूस की दो तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया है। उनका कहना है कि हर सफल हमला रूस की सैन्य और आर्थिक क्षमता को कमजोर कर रहा है और शांति की दिशा में एक कदम है। हालांकि रूसी अधिकारियों ने यारोस्लाव क्षेत्र की दूसरी रिफाइनरी पर हमले की पुष्टि नहीं की है।

    रूस में ईंधन संकट के संकेत

    यूक्रेन द्वारा लगातार ऊर्जा ठिकानों पर किए जा रहे हमलों का असर अब रूस के भीतर दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की कमी की स्थिति बन गई है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और कुछ इलाकों में ईंधन की बिक्री पर सीमा तय कर दी गई है।

    साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में एक सरकारी तेल कंपनी के पंप पर एक वाहन को प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर ईंधन देने का नियम लागू किया गया है। वहीं रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए ईंधन निर्यात समझौतों की समीक्षा की जा रही है।

    पुतिन का बयान और सैन्य स्थिति

    राष्ट्रपति पुतिन ने स्वीकार किया कि देश में ईंधन की कमी की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार तेल संयंत्रों की सुरक्षा बढ़ाएगी, उत्पादन तेज करेगी और जरूरत पड़ने पर आयात पर भी विचार किया जाएगा।

    हालांकि पुतिन ने यह भी दावा किया कि यूक्रेन के हमलों का मोर्चे पर चल रही लड़ाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन का उद्देश्य रूस के भीतर अस्थिरता पैदा करना है।

    दोनों ओर से हमले जारी

    युद्ध के बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हवाई हमले जारी रखे हैं। रूस ने यूक्रेन के जापोरिज्जिया शहर पर बमबारी की, जिसमें दो लोगों की मौत और 16 लोग घायल हुए, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।

    रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने एक रात में 213 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। वहीं यूक्रेन की वायुसेना का कहना है कि रूस ने 142 ड्रोन और 8 मिसाइलें दागीं, जिनमें से अधिकांश को नष्ट कर दिया गया।

  • कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर, जानें क्यों नहीं मिल रही राहत

    कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर, जानें क्यों नहीं मिल रही राहत


    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत जहां युद्ध के दौरान करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, वहीं अब यह घटकर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। इसके बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों में कोई बड़ी कटौती देखने को नहीं मिल रही है, जबकि पाकिस्तान, भूटान, म्यांमार और नेपाल जैसे देशों में हाल ही में पेट्रोल-डीजल सस्ता हुआ है।

    पड़ोसी देशों में घटे दाम, भारत में स्थिरता

    रिपोर्ट्स के अनुसार, भूटान में पेट्रोल की कीमत लगभग 109.73 रुपये से घटकर 99.94 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पाकिस्तान में पेट्रोल 130.82 रुपये से घटकर 101.91 रुपये प्रति लीटर तक आ गया है। वहीं म्यांमार, चीन, नेपाल और श्रीलंका में भी पेट्रोल की कीमतों में कमी दर्ज की गई है।

    डीजल के मामले में भी यही रुझान देखा गया है। पाकिस्तान और चीन में डीजल के दामों में बड़ी गिरावट आई है, जबकि भारत में औसत डीजल कीमत लगभग 98 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है।

    भारत में क्यों नहीं घट रहे दाम?

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुसार नहीं बदलते। इसका एक बड़ा कारण यह है कि जब वैश्विक बाजार में कच्चा तेल महंगा हुआ था, तब सरकारी तेल कंपनियों ने लंबे समय तक कीमतों में वृद्धि नहीं की थी। इस दौरान कंपनियों को भारी नुकसान हुआ, जिसका अनुमान लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक लगाया जा रहा है।

    अब जब कच्चे तेल की कीमतें नीचे आई हैं, तो तेल कंपनियां पहले अपने पुराने घाटे की भरपाई कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया में दो से तीन महीने का समय लग सकता है, जिसके बाद ही कीमतों में कटौती की संभावना बन सकती है।

    सरकारी नीति और टैक्स का असर

    जानकारों के मुताबिक, कीमतें स्थिर रहने की एक वजह सरकार की कर नीति भी है। चुनावी अवधि के दौरान केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में प्रति लीटर 10 रुपये की कटौती की थी, जिससे आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली थी।

    हालांकि, इससे सरकार के राजस्व पर भी असर पड़ा और अनुमान के मुताबिक करीब एक लाख करोड़ रुपये तक की आय में कमी आई। इसी कारण फिलहाल कीमतों में बड़ी कटौती की संभावना सीमित मानी जा रही है।

    तुरंत राहत की उम्मीद कम

    विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक तेल कंपनियों का पिछला नुकसान पूरी तरह से कवर नहीं हो जाता और वैश्विक बाजार में कीमतें स्थिर नहीं रहतीं, तब तक पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है। ऐसे में आम उपभोक्ताओं को फिलहाल कीमतों में राहत के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

  • विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि, गगन तकनीक से जेट विमान की हुई सफल लैंडिंग

    विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि, गगन तकनीक से जेट विमान की हुई सफल लैंडिंग


    नई दिल्ली। भारत ने विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की निगरानी में पहली बार जेट इंजन वाले विमान की सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली के जरिए सफल लैंडिंग कराई गई। उदयपुर हवाई अड्डे पर इंडिगो के एयरबस A320 विमान ने इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा विकसित गगन (GPS Aided GEO Augmented Navigation) प्रणाली का उपयोग करते हुए सफलतापूर्वक लैंडिंग की।

    छोटे हवाई अड्डों के लिए साबित होगी वरदान

    इससे पहले टर्बोप्रॉप एटीआर विमान इस तकनीक का उपयोग कर चुके हैं, लेकिन जेट विमान में पहली बार इसका सफल इस्तेमाल किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सैटेलाइट आधारित लैंडिंग प्रणाली उन छोटे हवाई अड्डों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जहां पारंपरिक और महंगे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) उपलब्ध नहीं हैं। इससे खराब मौसम में भी सुरक्षित लैंडिंग की क्षमता बढ़ेगी।

    भारत बना चुनिंदा देशों में शामिल

    गगन प्रणाली का विकास इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से किया है। यह प्रणाली विमान संचालन के लिए लोकलाइजर परफॉर्मेंस विद वर्टिकल गाइडेंस (LPV) जैसी उन्नत लैंडिंग प्रक्रियाओं को आवश्यक सटीकता और कवरेज उपलब्ध कराती है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी स्वदेशी सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन प्रणाली मौजूद है।

    सैटेलाइट नेविगेशन में नई उड़ान

    उदयपुर के लिए संचालित इंडिगो की उड़ान ने वर्टिकल गाइडेंस के साथ लोकलाइजर परफॉर्मेंस अप्रोच (LPV) को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसे भारत में सैटेलाइट आधारित विमानन नेविगेशन प्रणाली के विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    इंडिगो कर रही तकनीक का विस्तार

    इंडिगो ने वर्ष 2022 में अपने एटीआर विमानों में एलपीवी आधारित संचालन की शुरुआत की थी। अब एयरलाइन अपने जेट विमानों सहित पूरे बेड़े में इस स्वदेशी सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन सिस्टम की सुविधा का विस्तार कर रही है। इससे भविष्य में देश के अधिक हवाई अड्डों पर सुरक्षित और आधुनिक लैंडिंग सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

  • 3 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, सफर से पहले जान लें क्या रखें साथ और किन चीजों से करें परहेज

    3 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, सफर से पहले जान लें क्या रखें साथ और किन चीजों से करें परहेज


    नई दिल्ली। बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन के लिए बहुप्रतीक्षित अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होगी, जो 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। हर साल देशभर से लाखों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन आस्था से भरपूर यात्रा में शामिल होते हैं। यदि आप भी इस वर्ष अमरनाथ यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सफर को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए जरूरी सामान और आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखना बेहद जरूरी है।

    यात्रा में ये जरूरी सामान साथ रखें

    जरूरी दवाइयां
    नियमित रूप से ली जाने वाली दवाइयां।
    सिरदर्द, बुखार, उल्टी और सर्दी-जुकाम की दवाएं।
    फर्स्ट एड किट।
    बैंडेज, एंटीसेप्टिक क्रीम और अन्य प्राथमिक उपचार का सामान।

    मौसम के अनुसार कपड़े रखें
    अमरनाथ यात्रा ऊंचाई वाले और ठंडे इलाके में होती है, इसलिए मौसम को ध्यान में रखते हुए सामान पैक करें।
    – गर्म कपड़े।
    – रेनकोट या बरसाती।
    – छाता।
    – वाटरप्रूफ ट्रेकिंग जूते।
    – अतिरिक्त ऊनी मोजे और मौसम के अनुसार कपड़े।

    इन जरूरी चीजों को भी रखें साथ
    – सनस्क्रीन।
    – धूप का चश्मा।
    – हेडलैंप या टॉर्च।
    – ट्रेकिंग स्टिक।
    – मोबाइल के लिए वाटरप्रूफ कवर।
    – बैग के लिए रेन कवर।

    जरूरी दस्तावेज रखना न भूलें
    यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर सुरक्षा जांच होती है। इसलिए अपने साथ सभी आवश्यक दस्तावेज रखें।
    वैध पहचान पत्र।
    यात्रा पंजीकरण से जुड़े सभी दस्तावेज।
    संबंधित विभाग द्वारा बताए गए अन्य जरूरी प्रमाण पत्र।

    क्या साथ नहीं ले जाना चाहिए?
    जरूरत से ज्यादा सामान लेकर यात्रा पर न जाएं।
    बैग हल्का रखें ताकि पैदल यात्रा में परेशानी न हो।
    महंगे गहने या कीमती सामान साथ ले जाने से बचें।
    ऐसी वस्तुएं न रखें जिनके खोने या क्षतिग्रस्त होने का जोखिम हो।

    सही तैयारी और आवश्यक सावधानियों के साथ अमरनाथ यात्रा न केवल सुरक्षित बल्कि अधिक आरामदायक भी बन सकती है।

  • अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक, हमलों में 34 नागरिकों की मौत, सीमा पर बढ़ा तनाव

    अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक, हमलों में 34 नागरिकों की मौत, सीमा पर बढ़ा तनाव


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अफगान मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने रविवार रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें 34 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में सभी आम नागरिक होने का दावा किया गया है।

    स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पाकतिका प्रांत के गयान जिले और पाकतिया प्रांत के समकानी जिले में हवाई हमले किए। इन हमलों में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा कुनार प्रांत के कुछ क्षेत्रों पर भी हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    रिहायशी इलाकों को बनाया गया निशाना
    पाकतिया पुलिस कमांड के प्रवक्ता मुनीब जादरान ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि समकानी जिले में 35 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 40 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। उनके अनुसार, हमला समकानी जिले के मांडोखेल इलाके में बिस्मिल्लाह जान नामक एक नागरिक के घर पर किया गया। आरोप है कि पहले हमले के बाद जब स्थानीय लोग मलबे में फंसे लोगों को बचाने पहुंचे, तभी उसी स्थान पर दूसरा हवाई हमला किया गया, जिससे राहत कार्य में जुटे लोग भी इसकी चपेट में आ गए।

    स्थानीय लोगों का दावा- इलाके में नहीं था कोई सैन्य ठिकाना
    समकानी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों और घायलों का कहना है कि हमले पूरी तरह रिहायशी इलाकों पर हुए। उनका दावा है कि आसपास कोई सैन्य ठिकाना या सैनिक मौजूद नहीं थे, इसके बावजूद घरों को निशाना बनाया गया, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए।

    पाकिस्तान की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
    इस घटना पर पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। वहीं अफगानिस्तान की ओर से इन हमलों की कड़ी निंदा की गई है और इसे आम नागरिकों पर सीधा हमला बताया गया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में कराची में हुए हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था। इसी पृष्ठभूमि में इन ताजा हवाई हमलों की खबर सामने आई है, जिससे सीमा पर हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं।

  • आज से वक्री हुए बुध, इन 4 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की के रास्ते, धन लाभ और प्रमोशन के बन रहे योग

    आज से वक्री हुए बुध, इन 4 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की के रास्ते, धन लाभ और प्रमोशन के बन रहे योग


    नई दिल्ली। बुद्धि, तर्क, संवाद और व्यापार के कारक ग्रह बुध 29 जून 2026 यानी आज से वक्री हो गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध की चाल में बदलाव का प्रभाव सभी 12 राशियों के साथ-साथ व्यापार, अर्थव्यवस्था और संचार से जुड़े क्षेत्रों पर भी पड़ता है। हालांकि सामान्य तौर पर बुध की वक्री चाल को चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस बार यह परिवर्तन कुछ राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आने वाला है। आइए जानते हैं किन राशियों को इसका विशेष लाभ मिलने की संभावना है।

    मेष राशि (Aries)

    मेष राशि के जातकों के लिए बुध का वक्री होना आर्थिक दृष्टि से लाभकारी माना जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि के संकेत हैं। व्यापारियों के लिए बड़ी डील फाइनल होने के योग बन रहे हैं। लंबे समय से रुका हुआ धन मिलने की संभावना है। निवेश के लिए भी समय अनुकूल माना जा रहा है। आपकी वाणी का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे महत्वपूर्ण कार्य आसानी से पूरे हो सकते हैं।

    मिथुन राशि (Gemini)

    बुध मिथुन राशि के स्वामी ग्रह हैं, इसलिए उनकी वक्री चाल का सकारात्मक प्रभाव इस राशि पर अधिक देखने को मिल सकता है। निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी और नए विचारों पर काम करने के अवसर मिलेंगे। परिवार में चल रहे मतभेद दूर हो सकते हैं और रिश्तों में मधुरता आएगी। अचानक आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं। पैतृक संपत्ति से भी लाभ मिलने की संभावना है।

    सिंह राशि (Leo)

    सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में प्रगति का संकेत दे रहा है। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारी आपके काम की सराहना कर सकते हैं। प्रमोशन या वेतन वृद्धि से जुड़ी संभावनाएं मजबूत होंगी। सामाजिक प्रतिष्ठा और मान-सम्मान में वृद्धि होगी। व्यापार से जुड़े लोगों की यात्राएं भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती हैं।

    तुला राशि (Libra)

    तुला राशि वालों के लिए बुध की वक्री चाल सुख-सुविधाओं और आर्थिक स्थिति में सुधार का संकेत दे रही है। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं। आय के नए स्रोत बनने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। विद्यार्थियों के लिए यह समय पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने वाला माना जा रहा है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में बेहतर परिणाम मिलने की संभावना है।

    नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जीवन में किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।