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  • पीएम मोदी की विदेश यात्रा पर RJD विधायक का तंज, “बाल न बच्चा, नींद पड़े अच्छा” बयान से सियासत गरमाई

    पीएम मोदी की विदेश यात्रा पर RJD विधायक का तंज, “बाल न बच्चा, नींद पड़े अच्छा” बयान से सियासत गरमाई


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्रा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर विपक्षी दल आरजेडी के विधायक भाई वीरेंद्र ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और उनके उद्देश्यों पर टिप्पणी की, जिसके बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है।

    भाई वीरेंद्र ने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि प्रधानमंत्री जब विदेश जाते हैं तो देश के लिए क्या लेकर आते हैं और किस तरह के समझौते या परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कथनी और करनी में संतुलन होना चाहिए और जो बातें देश के भीतर कही जाती हैं, उनका पालन व्यवहार में भी दिखना चाहिए। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में सरकार पर सीधा हमला माना जा रहा है।

    विधायक ने अपने बयान में एक लोक कहावत का इस्तेमाल करते हुए कहा कि “बाल न बच्चा, नींद पड़े अच्छा”, जिससे उनका संकेत सरकार की नीतियों और विदेश यात्राओं की उपयोगिता पर सवाल उठाने की ओर था। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेश दौरों के दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा होती है, उनका लाभ आम जनता तक स्पष्ट रूप से नहीं पहुंचता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश में महंगाई और अन्य आर्थिक मुद्दे चिंता का विषय हैं, जिन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

    भाई वीरेंद्र ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर कई घटनाएं और तनावपूर्ण स्थितियां बनी हुई हैं, और ऐसे समय में देश के भीतर की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह देशहित को प्राथमिकता दे और विदेश यात्राओं का उद्देश्य स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखे।

    दूसरी ओर, सत्तापक्ष की ओर से इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा गया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएं केवल औपचारिक नहीं होतीं, बल्कि इनसे देश के लिए महत्वपूर्ण समझौते और आर्थिक अवसर सामने आते हैं। उनका कहना है कि हर दौरे का उद्देश्य भारत के हितों को मजबूत करना होता है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बेहतर बनाना होता है।

    इस पूरे बयान के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है और दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को और अधिक तीव्र बना सकते हैं।

  • 800 फीट ऊंचे टावर पर पति-पत्नी और बेटी, पुलिस-एनडीआरएफ रेस्क्यू में जुटी

    800 फीट ऊंचे टावर पर पति-पत्नी और बेटी, पुलिस-एनडीआरएफ रेस्क्यू में जुटी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Sagar जिले में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक पति-पत्नी अपनी बेटी के साथ BSNL टावर पर चढ़ गए। यह घटना कैंट थाना क्षेत्र के पीली कोठी के पीछे टेकरी इलाके की बताई जा रही है तीनों लोग करीब 600 फीट (सूत्रों के अनुसार 800 फीट तक) ऊंचे टावर पर बैठ गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

     पुलिस मौके पर, बातचीत से मनाने की कोशिश
    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और परिवार को नीचे उतरने के लिए समझाने की कोशिश की। लेकिन परिवार किसी भी हालत में नीचे उतरने को तैयार नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि परिवार पुलिस की किसी कार्रवाई से नाराज और परेशान है, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।

     NDRF टीम को किया गया तैनात
    स्थिति को गंभीर देखते हुए प्रशासन ने NDRF टीम को मौके पर बुलाया है। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है ताकि परिवार को सुरक्षित नीचे उतारा जा सके।

     इलाके में भारी भीड़, सुरक्षा कड़ी
    घटना के बाद आसपास के इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई है। पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर लोगों को टावर के पास जाने से रोक दिया है ताकि किसी तरह की अनहोनी न हो।

    स्थिति तनावपूर्ण, रेस्क्यू जारी
    फिलहाल टावर पर बैठे परिवार से लगातार बातचीत की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता तीनों को सुरक्षित नीचे उतारना है। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और हर किसी की नजर रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी है।

  • UN में बड़ा सत्ता संग्राम: भारत की स्थायी सीट पर अटका ‘वैश्विक वीटो’ का खेल

    UN में बड़ा सत्ता संग्राम: भारत की स्थायी सीट पर अटका ‘वैश्विक वीटो’ का खेल

    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में लंबे समय से चले आ रहे सुधारों को लेकर एक बार फिर वैश्विक बहस तेज हो गई है। भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील जैसे देशों के समूह G4 ने परिषद के ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 11 करने और परिषद को 25-26 सदस्यों का विस्तार देने की बात कही गई है।

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने भी इस सुधार की खुलकर वकालत करते हुए कहा है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाएं अब बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुसार प्रभावी नहीं रह गई हैं। उन्होंने साफ कहा कि UNSC में बदलाव “अनिवार्य” है, क्योंकि यह संस्था अब पुरानी हो चुकी शक्ति संरचना पर आधारित है।

    G4 का नया प्रस्ताव: वीटो पर अस्थायी रोक का सुझाव
    G4 Nations ने इस बार एक नया और व्यावहारिक प्रस्ताव रखा है। इसके अनुसार, नए स्थायी सदस्यों को पहले 15 वर्षों तक वीटो पावर नहीं दी जाएगी। इस दौरान वे केवल जिम्मेदारी निभाएंगे लेकिन वीटो अधिकार सीमित रहेगा।

    भारत के प्रतिनिधि हारिश परवाथनेनी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि ठोस निर्णय लेने का समय आ गया है। उनका कहना है कि मौजूदा ढांचा वैश्विक भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता।

    सबसे बड़ा विवाद: वीटो पावर और स्थायी सदस्यता
    UNSC में अभी 5 स्थायी सदस्य हैं—
    United States, United Kingdom, France, Russia और China।

    इन सभी के पास वीटो पावर है, जो किसी भी बड़े वैश्विक निर्णय को रोक सकती है। यही कारण है कि सुधार प्रक्रिया दशकों से अटकी हुई है।

     भारत की राह में सबसे बड़ी रुकावट कौन?
    भारत और G4 के प्रस्तावों का सबसे मजबूत विरोध चीन कर रहा है। चीन का कहना है कि एशिया में पहले से ही उसका प्रतिनिधित्व है और नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने से शक्ति संतुलन बिगड़ जाएगा।साथ ही Pakistan Government भी भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर विरोध कर रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इससे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ेगा।

    विश्लेषकों के अनुसार, चीन और पाकिस्तान का संयुक्त विरोध ही भारत की UNSC स्थायी सीट की सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

     वैश्विक राजनीति में भारत की चुनौती
    भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के बावजूद अब तक UNSC में स्थायी सदस्य नहीं बन पाया है। G4 देशों का मानना है कि वैश्विक शक्ति संतुलन अब पुराने ढांचे से मेल नहीं खाता।

    हालांकि, यूरोप, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देश सुधार के पक्ष में हैं, लेकिन सहमति की कमी के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

    UNSC सुधार अब केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की लड़ाई बन चुका है। G4 देशों का दबाव और महासचिव का समर्थन भारत के लिए उम्मीद जरूर बढ़ाता है, लेकिन चीन-पाकिस्तान का विरोध इस राह में सबसे बड़ी दीवार बना हुआ है।

  • US–Cuba टकराव: होर्मुज के बाद नई वैश्विक टेंशन, भारत पर क्यों बन सकता है दबाव?

    US–Cuba टकराव: होर्मुज के बाद नई वैश्विक टेंशन, भारत पर क्यों बन सकता है दबाव?




    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के मोड़ पर दिख रही है। United States और Cuba के बीच बढ़ता तनाव दुनिया के कई हिस्सों में नई अनिश्चितता पैदा कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में अपने लक्ष्यों में पूरी तरह सफल न होने के बाद अमेरिकी नेतृत्व अब कैरेबियन क्षेत्र में अपनी रणनीति को आक्रामक रूप दे सकता है।

    क्यूबा पर अमेरिका का बढ़ता दबाव
    सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका ने हाल ही में क्यूबा के खिलाफ कूटनीतिक और सैन्य दबाव बढ़ाने के संकेत दिए हैं। इसमें शामिल हैं—

    कैरेबियन सागर में नौसैनिक तैनाती

    आर्थिक प्रतिबंधों का विस्तार

    राजनीतिक दबाव की रणनीति

    United States की दक्षिणी कमांड (Southern Command) ने क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी की पुष्टि भी की है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।

    कैरेबियन में सैन्य गतिविधि और वैश्विक चिंता
    अमेरिका की नौसेना द्वारा कैरेबियन क्षेत्र में युद्ध क्षमता का प्रदर्शन किया जा रहा है। इस क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य तनाव का असर केवल क्षेत्रीय नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक समुद्री व्यापार को भी प्रभावित कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव बढ़ा तो शिपिंग रूट प्रभावित हो सकते हैं

    समुद्री बीमा की लागत बढ़ेगी

    वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव आएगा

    भारत पर क्यों पड़ सकता है अप्रत्यक्ष असर?
    भारत पहले से ही Strait of Hormuz जैसे रणनीतिक मार्गों में अस्थिरता से जूझ रहा है। अब अगर कैरेबियन क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका असर मल्टी-रीजनल ट्रेड सिस्टम पर पड़ेगा।

    भारत पर संभावित असर—

    1. तेल और शिपिंग लागत में बढ़ोतरी
    वैश्विक अस्थिरता बढ़ने पर भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है।

    2. समुद्री बीमा महंगा
    जोखिम बढ़ने से शिपिंग कंपनियां प्रीमियम बढ़ा सकती हैं।

    3. वैश्विक व्यापार पर असर
    लॉजिस्टिक्स बाधित होने से एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर असर पड़ सकता है।

    भारत की कूटनीतिक स्थिति
    भारत के संबंध दोनों देशों से अलग-अलग स्तर पर महत्वपूर्ण हैं।

    United States के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी मजबूत है

    वहीं Cuba के साथ भारत के ऐतिहासिक और गुटनिरपेक्ष संबंध रहे हैं

    ऐसे में भारत को हमेशा संतुलित कूटनीति अपनानी पड़ती है ताकि किसी भी पक्ष के साथ रिश्ते प्रभावित न हों।

    बड़ा सवाल: क्या अमेरिका का फोकस बदल रहा है?
    विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका कैरेबियन में ज्यादा सैन्य संसाधन लगाता है, तो इसका असर उसके अन्य क्षेत्रों जैसे इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी पड़ सकता है। इससे वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव संभव है।

    United States और Cuba के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार और रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए यह सीधा खतरा नहीं, लेकिन ऊर्जा, शिपिंग और कूटनीति के स्तर पर एक “अप्रत्यक्ष दबाव” जरूर बन सकता है।

  • होर्मुज पर नया गेमप्लान: ईरान-ओमान डील से बदल सकती है वैश्विक तेल राजनीति

    होर्मुज पर नया गेमप्लान: ईरान-ओमान डील से बदल सकती है वैश्विक तेल राजनीति



    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। ईरान ने इस अहम जलमार्ग की निगरानी और संचालन के लिए ओमान के साथ मिलकर नई व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत जहाजों की आवाजाही पर निगरानी, सुरक्षा और संभावित “टोल सिस्टम” जैसी व्यवस्था लागू करने की बात सामने आ रही है, जिससे ईरान को आर्थिक लाभ और क्षेत्रीय नियंत्रण दोनों मजबूत करने का मौका मिल सकता है।

    ईरान का नया दांव: सुरक्षा के नाम पर कमाई का मॉडल
    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान का कहना है कि वह इस जलमार्ग में एक स्थायी सुरक्षा ढांचा तैयार करना चाहता है, जिसमें अन्य तटीय देश भी शामिल हों। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने संकेत दिया है कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए साझा प्रोटोकॉल बनाया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रस्ताव के पीछे सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक हित भी छिपे हैं। ईरान पहले से ही “पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” जैसी व्यवस्था के जरिए जहाजों की निगरानी और शुल्क वसूली का मॉडल विकसित कर चुका है।

    दुनिया की ऊर्जा लाइफलाइन पर दबाव
    Strait of Hormuz से दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल का परिवहन होता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा या टोल व्यवस्था सीधे वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है।

    अगर ईरान की यह योजना लागू होती है, तो इससे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है, क्योंकि कंपनियों को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है। पहले भी तनाव के दौरान इस मार्ग पर अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार को हिला दिया था।

    ओमान की भूमिका क्यों अहम?
    ईरान ने पहले भी ओमान के सामने इस तरह की संयुक्त व्यवस्था का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उस समय इसे ठुकरा दिया गया था। अब एक बार फिर ईरान ओमान के साथ साझेदारी की कोशिश कर रहा है।

    Oman इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत संतुलित और तटस्थ भूमिका निभाता है, इसलिए उसकी भागीदारी किसी भी नए मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक स्वीकार्य बना सकती है। हालांकि ओमान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह किसी एक देश के नियंत्रण या एकतरफा टोल व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनेगा।

    ईरान का लक्ष्य: राजस्व + रणनीतिक नियंत्रण
    विश्लेषकों के अनुसार ईरान का यह कदम दो बड़े उद्देश्यों की ओर इशारा करता है

    युद्ध और प्रतिबंधों से प्रभावित अर्थव्यवस्था के लिए नया राजस्व स्रोत

    Strait of Hormuz पर रणनीतिक पकड़ मजबूत करना

    इससे ईरान भविष्य में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बनाने की स्थिति में भी रह सकता है।
    भारत को कैसे मिल सकता है फायदा?
    भारत के लिए यह जलमार्ग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी रूट से आता है। अगर ईरान-ओमान के बीच कोई स्थिर और पारदर्शी व्यवस्था बनती है, तो इससे भारत को तीन बड़े फायदे मिल सकते हैं

    1. तेल आपूर्ति में स्थिरता
    अनिश्चितता कम होने से सप्लाई चेन ज्यादा सुरक्षित हो सकती है।

    2. कीमतों में उतार-चढ़ाव कम
    यदि टोल सिस्टम नियंत्रित और स्थिर रहा, तो अचानक तेल महंगा होने का जोखिम घट सकता है।

    3. रणनीतिक साझेदारी का लाभ
    Oman के साथ भारत के मजबूत रिश्ते इस पूरे सिस्टम में भारत के हितों को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत कर सकते हैं।

    Strait of Hormuz पर ईरान का नया प्रस्ताव सिर्फ एक सुरक्षा मॉडल नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर ओमान इस व्यवस्था का हिस्सा बनता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए राहत और चुनौती—दोनों ला सकता है।

  • इबोला पर भारत अलर्ट: एयरपोर्ट्स पर बढ़ी निगरानी,सरकार ने कहा-लक्षण दिखें तो तुरंत रिपोर्ट करें

    इबोला पर भारत अलर्ट: एयरपोर्ट्स पर बढ़ी निगरानी,सरकार ने कहा-लक्षण दिखें तो तुरंत रिपोर्ट करें




    नई दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। खासकर उन यात्रियों पर निगरानी बढ़ाई गई है जो हाई-रिस्क देशों जैसे DR कांगो, युगांडा और साउथ सूडान से यात्रा करके भारत पहुंच रहे हैं।एयरपोर्ट्स पर स्वास्थ्य जांच टीमों को अलर्ट मोड में रखा गया है ताकि किसी भी संदिग्ध मामले की तुरंत पहचान की जा सके।

    किन लक्षणों पर तुरंत अलर्ट जरूरी?
    सरकारी एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि यदि किसी यात्री में निम्न लक्षण दिखते हैं तो तुरंत एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर को जानकारी देना अनिवार्य होगा:

    तेज बुखार

    सिरदर्द और कमजोरी

    उल्टी या दस्त

    गले में खराश

    शरीर से खून निकलने के संकेत

    इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति संक्रमित मरीज के खून या शरीर के तरल पदार्थ (body fluids) के संपर्क में आया है, तो उसकी भी विशेष निगरानी की जाएगी।

    21 दिन तक निगरानी का निर्देश
    स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत आने के बाद यदि किसी यात्री में 21 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना होगा और अपनी ट्रैवल हिस्ट्री साझा करनी होगी। यह समय सीमा इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इबोला वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड इसी अवधि के आसपास होता है।

    सरकार की तैयारी और निगरानी व्यवस्था
    राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम और अन्य एजेंसियों ने स्थिति की समीक्षा की है। सभी विभागों को अलर्ट मोड में रखते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारत में इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है और देश के लिए जोखिम बहुत कम है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ाई गई है।

    एयरपोर्ट्स पर सख्त स्क्रीनिंग
    एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन यात्रियों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया पर लगातार नजर रख रहा है। संदिग्ध मामलों को तुरंत आइसोलेट करने और आगे की जांच के लिए मेडिकल टीमों को तैयार रखा गया है।सरकार ने यात्रियों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य जांच में पूरा सहयोग करें और किसी भी लक्षण को छिपाने से बचें।

    इबोला जैसी गंभीर बीमारी को देखते हुए भारत ने समय रहते एहतियाती कदम उठाए हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा को ध्यान में रखते हुए सतर्कता को प्राथमिकता दी जा रही है।

  • लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि



    लखनऊ । लखनऊ में प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और आगामी धार्मिक व प्रशासनिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। शहर में 60 दिनों के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, जो 19 जुलाई तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान कई तरह की गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध रहेंगे और बिना अनुमति किसी भी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय बकरीद, बड़ा मंगल, मोहर्रम जैसे धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ आने वाली प्रवेश परीक्षाओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है।

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: प्रशासन का बड़ा फैसला
    लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत यह निषेधाज्ञा लागू की गई है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि किसी भी तरह की भीड़, जुलूस या धरना-प्रदर्शन अब बिना अनुमति संभव नहीं होगा। शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

    5 से अधिक लोगों की सभा पर रोक, अनुमति जरूरी
    आदेश के अनुसार, बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों का एकत्र होना, समूह बनाना, जुलूस निकालना या किसी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना प्रतिबंधित रहेगा। धार्मिक कार्यक्रमों जैसे भंडारा, मजलिस, जुलूस, चल समारोह या सांस्कृतिक आयोजन के लिए पहले से प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के उपयोग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

    संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रतिबंध
    निषेधाज्ञा के तहत विधानसभा भवन और उसके आसपास के क्षेत्रों में ट्रैक्टर-ट्रॉली, घोड़ा गाड़ी, ज्वलनशील पदार्थ और हथियार लेकर प्रवेश पर रोक रहेगी। इसके अलावा लालबत्ती चौराहा, पार्क रोड, सिविल अस्पताल, अटल चौक, बंदरिया बाग, गोल्फ क्लब और कैसरबाग जैसे इलाकों में धरना या विरोध प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    ड्रोन, शूटिंग और सोशल मीडिया पर भी नजर
    लखनऊ में सरकारी भवनों जैसे लोकभवन, मुख्यमंत्री आवास और विधान भवन के आसपास ड्रोन उड़ाने या शूटिंग करने पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट, अफवाह या सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले कंटेंट पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साइबर सेल को ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    डिलीवरी स्टाफ और किरायेदारों की जांच अनिवार्य
    ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं जैसे जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। साइबर कैफे संचालकों को ग्राहकों का पूरा रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मकान मालिकों को भी बिना किरायेदार सत्यापन के मकान न देने की सख्त हिदायत दी गई है।

    सख्त संदेश: नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई
    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि यह कदम शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी है।

  • धर्मेंद्र की याद में टूटे बॉबी देओल, कहा-उनके जाने के बाद जिंदगी में खालीपन रह गया, हर बात आज भी याद आती है

    धर्मेंद्र की याद में टूटे बॉबी देओल, कहा-उनके जाने के बाद जिंदगी में खालीपन रह गया, हर बात आज भी याद आती है

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल एक बातचीत के दौरान उस समय भावुक हो गए जब उन्होंने अपने दिवंगत पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को याद किया। एक चर्चित कार्यक्रम में शामिल हुए बॉबी देओल ने अपने पिता के साथ जुड़ी यादों और उनके व्यक्तित्व को साझा करते हुए कहा कि धर्मेंद्र केवल एक बड़े कलाकार ही नहीं बल्कि उनके लिए जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा थे। बातचीत के दौरान कई बार उनका भावुक होना साफ दिखाई दिया, जिससे माहौल भी गंभीर और संवेदनशील हो गया।

    बॉबी देओल ने कहा कि उनके पिता धर्मेंद्र का व्यक्तित्व इतना सरल, स्नेहपूर्ण और प्रभावशाली था कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति उन्हें दिल से पसंद करता था। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र के जाने के बाद परिवार ही नहीं बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के जीवन में भी एक गहरा खालीपन आ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। बॉबी ने कहा कि उनके लिए उनके पिता का हर पहलू खास था, चाहे वह उनका प्यार हो, उनका व्यवहार हो या फिर उनका गुस्सा, जो भी उन्हें मिला वह हमेशा अपनापन ही महसूस कराता था।

    कार्यक्रम के दौरान जब उनसे उनकी पहचान के बारे में सवाल किया गया तो बॉबी देओल ने बेहद सादगी से जवाब दिया कि उनके लिए सबसे बड़ी पहचान उनका नाम या स्टारडम नहीं बल्कि यह है कि वे धर्मेंद्र के बेटे हैं। इस जवाब ने वहां मौजूद माहौल को और भी भावनात्मक बना दिया। उन्होंने कहा कि यह पहचान उनके लिए गर्व की बात है और जीवनभर रहेगी, क्योंकि उनके पिता ने उन्हें केवल अभिनय ही नहीं बल्कि इंसानियत और विनम्रता भी सिखाई है।

    बॉबी देओल ने यह भी साझा किया कि पिता के जाने के बाद भी उनकी यादें उनके हर दिन का हिस्सा बनी रहती हैं और जीवन के हर महत्वपूर्ण क्षण में उन्हें उनकी कमी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि समय भले ही आगे बढ़ रहा हो लेकिन पिता की मौजूदगी का एहसास आज भी उतना ही मजबूत है। इस दौरान उनकी आंखों में भावुकता साफ झलक रही थी और उनके शब्दों में एक बेटे का दर्द और प्रेम दोनों दिखाई दे रहे थे।

    फिल्मी करियर की बात करें तो बॉबी देओल इन दिनों अपनी आगामी परियोजनाओं को लेकर भी चर्चा में हैं, लेकिन इस बातचीत में उनका पूरा ध्यान अपने निजी जीवन और पिता की यादों पर ही केंद्रित रहा। यह बातचीत दर्शाती है कि एक सफल कलाकार होने के बावजूद उनके भीतर एक बेटे का भावनात्मक पक्ष आज भी उतना ही गहरा और संवेदनशील है।

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    बॉबी देओल अपने पिता धर्मेंद्र को याद करते हुए भावुक हो गए और कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी पहचान “धर्मेंद्र का बेटा होना” है।

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  • यूपी का ‘धुरंधर’ लउआ गांव: 32 साल तक जिस गांव के पास रही विधायकी

    यूपी का ‘धुरंधर’ लउआ गांव: 32 साल तक जिस गांव के पास रही विधायकी

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का लउआ गांव अपनी अनोखी राजनीतिक विरासत के लिए जाना जाता है। इस गांव से निकले दो नेताओं हृदय नारायण दीक्षित और उदय राज यादव ने पुरवा विधानसभा सीट पर दशकों तक दबदबा बनाए रखा और मिलकर आठ बार जीत दर्ज की।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में उन्नाव जिले का एक छोटा-सा गांव लउआ किसी राजनीतिक ‘हॉटस्पॉट’ से कम नहीं रहा है। पुरवा विधानसभा क्षेत्र के इस गांव ने पिछले कई दशकों में ऐसी राजनीतिक कहानी लिखी है, जिसे राज्य की चुनावी इतिहास में एक अलग पहचान मिली है। वर्ष 1985 से लेकर 2012 तक इस गांव के दो नेताओं ने बारी-बारी से विधानसभा सीट पर कब्जा जमाए रखा और कुल मिलाकर 32 वर्षों तक इस क्षेत्र की राजनीति पर प्रभाव बनाए रखा।

    इस गांव से निकलकर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले दो प्रमुख नाम हैं—भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पद्मश्री से सम्मानित हृदय नारायण दीक्षित और समाजवादी पार्टी के नेता उदय राज यादव। दोनों नेताओं ने अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव लड़कर पुरवा विधानसभा में लगातार सफलता हासिल की और अपने क्षेत्र को राजनीतिक नक्शे पर खास स्थान दिलाया।

    हृदय नारायण दीक्षित ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में की और पहली ही बार में जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने 1989 में जनता दल, 1991 में जनता पार्टी और 1993 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लगातार जीत दर्ज की। इस तरह उन्होंने पुरवा विधानसभा से चार बार विधायक बनकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की। बाद में 2017 में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर भगवंतनगर सीट से भी जीत दर्ज की और विधानसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचे।

    दूसरी ओर, लउआ गांव के ही उदय राज यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर पुरवा विधानसभा में लगातार चार बार—1996, 2002, 2007 और 2012—जीत हासिल की। उनकी लोकप्रियता का आधार उनका मजबूत जनसंपर्क और गांव-गांव तक सीधा जुड़ाव रहा। हालांकि 2017 और 2022 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन लंबे समय तक उनका प्रभाव क्षेत्र की राजनीति में बना रहा।

    पुरवा विधानसभा का चुनावी इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1952 से 2022 तक इस सीट पर कुल 18 विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें से 8 बार जीत लउआ गांव के इन दोनों नेताओं के खाते में गई। यह आंकड़ा अपने आप में इस गांव के राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।

    इस क्षेत्र की राजनीति की खास बात यह रही है कि यहां पार्टी से ज्यादा व्यक्तिगत छवि और जनता से जुड़ाव का असर देखने को मिलता रहा है। लोधी और यादव जाति के मतदाताओं की बड़ी संख्या, साथ ही सवर्ण और मुस्लिम वोटरों की निर्णायक भूमिका ने चुनावी समीकरणों को हमेशा रोचक बनाए रखा।

    दोनों नेताओं की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका निरंतर जनता से संपर्क और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रही। जहां हृदय नारायण दीक्षित अपनी वैचारिक और संगठनात्मक राजनीति के लिए जाने जाते हैं, वहीं उदय राज यादव जनसंपर्क आधारित समाजवादी राजनीति के प्रतीक रहे हैं।

    लउआ गांव की यह राजनीतिक कहानी आज भी यूपी की चुनावी राजनीति में एक मिसाल के रूप में देखी जाती है, जहां एक छोटे से गांव ने दो नेताओं के दम पर दशकों तक सत्ता समीकरणों को प्रभावित किया।

  • हार्दिक पांड्या पर कार्रवाई: धीमी ओवर-रेट के चलते जुर्माना ठोका गया

    हार्दिक पांड्या पर कार्रवाई: धीमी ओवर-रेट के चलते जुर्माना ठोका गया


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में Hardik Pandya पर लीग के आचार संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) के उल्लंघन के लिए बड़ी कार्रवाई की गई है। मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेले गए मुकाबले में उनके व्यवहार को अनुशासनहीन माना गया, जिसके चलते उन पर मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही उनके खाते में एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ दिया गया है।

    मैच के दौरान दूसरी पारी के 10वें ओवर की चौथी गेंद के बाद हार्दिक पांड्या अपने रन-अप की ओर लौट रहे थे, तभी उन्होंने जानबूझकर स्टंप्स की बेल्स को गिरा दिया। इस हरकत को आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.2 का उल्लंघन माना गया, जो क्रिकेट उपकरण या मैदान की संरचना के दुरुपयोग से जुड़ा है। मैच रेफरी ने उन्हें लेवल-1 अपराध का दोषी पाया, जिसके बाद पांड्या ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और जुर्माने को बिना आपत्ति के मान लिया।

     मैदान पर भी नहीं चला पांड्या का प्रदर्शन
    मैच में Mumbai Indians के कप्तान हार्दिक पांड्या का प्रदर्शन भी खास नहीं रहा। उन्होंने गेंदबाजी में सिर्फ 2 ओवर फेंके, जबकि बल्लेबाजी में 27 गेंदों पर 26 रन बनाए। उनकी पारी में 2 चौके और 1 छक्का शामिल रहा, लेकिन टीम को उससे बड़ा फायदा नहीं मिल सका।

     केकेआर के खिलाफ MI की हार
    इस मुकाबले में मुंबई इंडियंस को Kolkata Knight Riders के खिलाफ 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई की शुरुआत बेहद खराब रही।

    रोहित शर्मा 15 रन बनाकर आउट
    रयान रिकेल्टन 6 रन पर पवेलियन
    नमन धीर खाता नहीं खोल सके
    सूर्यकुमार यादव 15 रन पर क्लीन बोल्ड
    तिलक वर्मा 20 रन (32 गेंद)
    हालांकि, अंत में कॉर्बिन बॉश की 18 गेंदों में नाबाद 32 रनों की पारी से टीम 147 रन तक पहुंचने में सफल रही।

     केकेआर की आसान जीत और प्लेऑफ तस्वीर
    लक्ष्य का पीछा करते हुए केकेआर ने 18.5 ओवर में 6 विकेट खोकर जीत दर्ज की। मनीष पांडे ने 33 गेंदों पर 45 रन और रोवमैन पॉवेल ने 30 गेंदों पर 40 रन बनाकर जीत की नींव रखी। गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में संतुलित प्रदर्शन के दम पर केकेआर ने मुकाबला अपने नाम किया। दूसरी ओर मुंबई इंडियंस पहले ही प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी है, जिससे टीम का यह सीजन निराशाजनक बन गया है।

    हार्दिक पांड्या पर लगी यह कार्रवाई मुंबई इंडियंस के लिए एक और झटका है, जो पहले ही खराब प्रदर्शन से जूझ रही थी। अब टीम के सामने अगले सीजन में वापसी की बड़ी चुनौती होगी, जबकि केकेआर ने इस जीत के साथ अपनी प्लेऑफ उम्मीदें मजबूत कर ली हैं।