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  • सलमान खान और संजय दत्त की जोड़ी फिर मचाएगी धूम, ‘7 डॉग्स’ के ट्रेलर में दिखा इंटरनेशनल एक्शन का अंदाज

    सलमान खान और संजय दत्त की जोड़ी फिर मचाएगी धूम, ‘7 डॉग्स’ के ट्रेलर में दिखा इंटरनेशनल एक्शन का अंदाज

    नई दिल्ली । सलमान खान और संजय दत्त की जोड़ी एक बार फिर दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। दोनों कलाकारों की खास मौजूदगी वाली ग्लोबल एक्शन थ्रिलर ‘7 डॉग्स’ का ट्रेलर भारत में रिलीज हो गया है। ट्रेलर सामने आने के साथ ही फिल्म को लेकर प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है।

    सलमान खान और संजय दत्त इससे पहले भी अलग-अलग फिल्मों में साथ नजर आ चुके हैं और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को दर्शकों ने पसंद किया है। ऐसे में एक अंतरराष्ट्रीय एक्शन प्रोजेक्ट में दोनों कलाकारों की मौजूदगी फिल्म के भारतीय दर्शकों के लिए खास आकर्षण बन गई है।

    सलमान खान ने भी फिल्म का ट्रेलर सोशल मीडिया पर साझा किया है। हालांकि फिल्म में दोनों कलाकारों की भूमिकाओं को लेकर फिलहाल पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन ट्रेलर में उनका स्पेशल एक्शन अपीयरेंस दिखाई देता है। दोनों की झलक ने फिल्म की चर्चा को और बढ़ा दिया है।

    ‘7 डॉग्स’ की कहानी में मिस्र के अभिनेता करीम अब्देल अजीज और अहमद एज प्रमुख भूमिकाओं में नजर आते हैं। फिल्म में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की बड़ी टीम शामिल है। भारत से सलमान खान और संजय दत्त के अलावा हॉलीवुड और यूरोप के कई चर्चित कलाकार भी इसका हिस्सा हैं।

    फिल्म की स्टारकास्ट में मोनिका बेलुची, जियानकार्लो एस्पोसिटो और मार्टिन लॉरेंस जैसे नाम शामिल हैं। इनके साथ तारा इमाद, नासिर अल-कसाबी और मैक्स हुआंग भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। अलग-अलग देशों के कलाकारों की मौजूदगी इसे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट के रूप में पेश करती है।

    ट्रेलर की शुरुआत से ही तेज रफ्तार एक्शन और थ्रिलर वाला माहौल देखने को मिलता है। कहानी के केंद्र में करीम अब्देल अजीज और अहमद एज नजर आते हैं, जबकि अन्य कलाकारों को भी महत्वपूर्ण दृश्यों में दिखाया गया है। बड़े स्तर पर फिल्माए गए एक्शन सीक्वेंस, स्टंट और पीछा करने वाले दृश्य ट्रेलर की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।

    सलमान खान और संजय दत्त की एंट्री ट्रेलर में खास आकर्षण पैदा करती है। दोनों कलाकारों की मौजूदगी कहानी के अंतरराष्ट्रीय स्तर को भारतीय दर्शकों से जोड़ने का काम करती दिखाई देती है। हालांकि उनके किरदारों की पूरी भूमिका फिल्म की रिलीज के बाद ही स्पष्ट होगी।

    ‘7 डॉग्स’ का निर्देशन आदिल एल अरबी और बिलाल फलाह ने किया है। यह निर्देशक जोड़ी इससे पहले हॉलीवुड की चर्चित ‘बैड बॉयज’ फ्रेंचाइजी की ‘बैड बॉयज फॉर लाइफ’ और ‘बैड बॉयज: राइड और डाइ’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुकी है। ऐसे में नई फिल्म से भी बड़े स्तर के एक्शन और थ्रिल की उम्मीद की जा रही है।

    फिल्म का निर्माण सेला स्टूडियोज ने किया है। ‘7 डॉग्स’ भारतीय सिनेमाघरों में 21 अगस्त को रिलीज होने वाली है। रिलीज से पहले ट्रेलर में सलमान खान और संजय दत्त की मौजूदगी ने फिल्म को लेकर भारतीय दर्शकों के बीच खास दिलचस्पी पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि सिनेमाघरों में यह अंतरराष्ट्रीय एक्शन प्रोजेक्ट दर्शकों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।

  • कार्य परिषद का सख्त फैसला, उत्पीड़न मामले में डॉ. नईम पर गिरी गाज; प्रशासनिक अधिकारी की वेतनवृद्धि भी रोकी गई

    कार्य परिषद का सख्त फैसला, उत्पीड़न मामले में डॉ. नईम पर गिरी गाज; प्रशासनिक अधिकारी की वेतनवृद्धि भी रोकी गई


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शोधार्थियों के उत्पीड़न के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद समाज कार्य विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को मंजूरी दे दी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार जांच में लगाए गए आरोप सही पाए गए, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने के मामले में एक प्रशासनिक अधिकारी के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

    विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्य परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान महिला और पुरुष शोधार्थियों द्वारा डॉ. मोहम्मद नईम के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित जांच रिपोर्ट परिषद के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसके अलावा शिक्षक आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े मामले की रिपोर्ट पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    कार्य परिषद ने उपलब्ध तथ्यों और जांच समिति की रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद मामले को गंभीर मानते हुए डॉ. नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकृति प्रदान की। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान में सुरक्षित, पारदर्शी और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या उत्पीड़न के मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    बैठक में विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से संबंधित एक अन्य जांच रिपोर्ट भी रखी गई। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी पुष्पा गौतम के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी एक वर्ष की वेतनवृद्धि पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। परिषद ने माना कि संस्थान की गरिमा और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाना जरूरी है।

    कार्य परिषद की बैठक में आगामी दीक्षांत समारोह से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। परिषद ने 13 अगस्त को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में प्रसिद्ध चित्रकार दिनेश सोनी को मानद डी.लिट. उपाधि प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए कुलाधिपति के पास भेजा जाएगा।

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और जांच रिपोर्ट के आधार पर लिए गए हैं। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने बताया कि कार्य परिषद के समक्ष प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में डॉ. मोहम्मद नईम के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर विचार करने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकार किया गया। वहीं प्रशासनिक अधिकारी के मामले में भी जांच रिपोर्ट के आधार पर वेतनवृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया।

    विश्वविद्यालय का कहना है कि संस्थान में छात्रों और शोधार्थियों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन ने संकेत दिया कि भविष्य में भी किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। इस निर्णय को विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन, जवाबदेही और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर FBI का बड़ा शिकंजा, ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत 50 से ज्यादा जगह पर की छापेमारी

    लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर FBI का बड़ा शिकंजा, ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत 50 से ज्यादा जगह पर की छापेमारी


    नई दिल्ली। लॉरेंस बिश्नोई गैंग और उससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ अमेरिका की जांच एजेंसी FBI ने बड़ा अभियान शुरू किया है। FBI और उसकी सहयोगी एजेंसियों ने 7 जुलाई को अमेरिका के कैलिफोर्निया समेत कई स्थानों पर कार्रवाई करते हुए कम से कम 20 लोगों को हिरासत में लिया। इस दौरान प्रतिबंधित सामान, हथियार और ड्रग्स बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के नाम से चलाया गया अभियान
    FBI ने अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट के खिलाफ की गई इस कार्रवाई को ‘Operation Hard Ball’ नाम दिया है। एजेंसी के अधिकारियों और सहयोगी टीमों ने अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 50 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित सामान और ड्रग्स जब्त किए गए।

    गोल्डी बरार और जग्गू भगवानपुरिया नेटवर्क पर भी फोकस
    FBI की इस कार्रवाई का निशाना लॉरेंस बिश्नोई गैंग के साथ-साथ उसके सहयोगियों गोल्डी बरार और जग्गू भगवानपुरिया से जुड़े नेटवर्क भी रहे। जांच एजेंसियों के अनुसार, गैंग से जुड़े कई वांटेड सदस्य अमेरिका, कनाडा और यूरोप में रहकर भारत में अपनी आपराधिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। आरोप है कि ये लोग विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों को भी निशाना बनाकर रंगदारी वसूलने जैसे अपराधों में शामिल रहे हैं।

    कनाडा ने घोषित किया था आतंकी संगठन
    लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर कनाडा सरकार ने पिछले साल इसे आतंकी संगठन घोषित किया था। वहीं, लॉरेंस बिश्नोई का भाई अनमोल बिश्नोई भी लंबे समय तक अमेरिका में रहने की बात सामने आई थी। आरोप है कि अमेरिका में रहते हुए उसने मुंबई में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या और अभिनेता सलमान खान के घर पर फायरिंग से जुड़े मामलों में भूमिका निभाई थी। बाद में अनमोल बिश्नोई को भारत डिपोर्ट किया गया।

    विदेशों में फैले नेटवर्क पर एजेंसियों की नजर
    भारतीय जांच एजेंसियां भी समय-समय पर यह जानकारी देती रही हैं कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नेटवर्क अमेरिका, कनाडा और यूरोप तक फैला हुआ है। एजेंसियों के मुताबिक, भारत से फरार होकर कई गैंग सदस्य इन देशों में ठिकाने बनाकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं। FBI का ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ अभी जारी है और लॉरेंस बिश्नोई गैंग तथा उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।

  • फिल्म 'कोलोनी' में कलाकारों या स्टंटमैन ने नहीं, बल्कि ग्रुप डांसर्स ने निभाए रोंगटे खड़े कर देने वाले खूंखार एक्शन सीन्स

    फिल्म 'कोलोनी' में कलाकारों या स्टंटमैन ने नहीं, बल्कि ग्रुप डांसर्स ने निभाए रोंगटे खड़े कर देने वाले खूंखार एक्शन सीन्स

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में जब भी किसी फिल्म में खतरनाक और हैरतअंगेज एक्शन दृश्यों को फिल्माना होता है, तो आमतौर पर मुख्य अभिनेता खुद कमान संभालते हैं या फिर जोखिम भरे दृश्यों के लिए पेशेवर स्टंटमैन और बॉडी डबल की सेवाएं ली जाती हैं। लेकिन मनोरंजन जगत में हाल ही में एक ऐसा अनोखा प्रयोग देखने को मिला है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। साल 2026 में प्रदर्शित हुई एक नई फिल्म में बेहद पेचीदा और डरावने एक्शन सीक्वेंस को पूरा करने के लिए किसी स्टंटमैन को नहीं, बल्कि पेशेवर डांसर्स को अनुबंधित किया गया। इस अनूठे फैसले के पीछे की वजह फिल्म की बेहद अलग और जटिल पटकथा थी, जिसे सामान्य एक्शन कलाकारों के लिए कर पाना मुमकिन नहीं था।

    यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई चर्चित जॉम्बी थ्रिलर फिल्म ‘कोलोनी’ से जुड़ा हुआ है। यह फिल्म अपनी अनूठी कहानी के कारण पारंपरिक जॉम्बी फिल्मों से काफी अलग है। फिल्म की पटकथा के अनुसार, इसमें दिखाया गया वायरस इंसानी शरीर में प्रवेश करने के बाद एक अलग तरह का म्यूटेशन पैदा करता है, जिसे ‘हाइपर कोलिनेटेड’ कहा जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि वायरस से संक्रमित होने वाले सभी लोग अलग-अलग व्यवहार करने के बजाय एक सामूहिक मस्तिष्क यानी ‘कलेक्टिव माइंड’ की तरह काम करते हैं। यदि किसी एक संक्रमित को कोई जानकारी मिलती है, तो वह संदेश तुरंत एक ही पल में बाकी सभी जॉम्बीज तक पहुंच जाता है।

    इसी सामूहिक अवधारणा को स्क्रीन पर जीवंत करने के लिए निर्देशक को बेहद बारीकी से कोरियोग्राफ किए गए दृश्यों की आवश्यकता थी। फिल्म में कई दृश्य ऐसे थे जहां दर्जनों जॉम्बीज को एक साथ मिलकर बेहद पेचीदा शारीरिक गतिविधियां और एक समान स्टंट करने थे। इन दृश्यों में जरा सी भी चूक पूरे तालमेल को बिगाड़ सकती थी। किसी सामान्य स्टंटमैन के लिए शरीर को इस हद तक लचीला बनाना और सामूहिक रूप से एक ही समय पर सटीक शारीरिक मुद्राएं प्रदर्शित करना काफी कठिन काम था। इस चुनौती से निपटने के लिए निर्माण टीम को ग्रुप डांसर्स की आवश्यकता महसूस हुई, जो न केवल चेहरे पर सटीक भाव ला सकें, बल्कि सामूहिक टाइमिंग और मूवमेंट में भी पूरी तरह निपुण हों।

    यही कारण था कि फिल्म के निर्माताओं ने इस काम के लिए करीब 20 अनुभवी डांसर्स की एक विशेष टीम को काम पर रखा। दर्शकों को थिएटर्स में जिन दृश्यों को देखकर यह लग रहा है कि वे अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स (VFX) या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए हैं, वे असल में इन डांसर्स की कड़ी मेहनत और शारीरिक दक्षता का नतीजा हैं। इन कलाकारों ने बिना किसी तकनीक के सहारा लिए स्क्रीन पर एक साथ सटीक मूव्स दिखाकर दृश्यों को बेहद डरावना और वास्तविक बना दिया है।

    इस अनोखे प्रयोग और बेहतरीन तकनीकी काम की बदौलत फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की तरफ से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) पर भी इस फिल्म को 7 के करीब रेटिंग हासिल हुई है, जो इस जॉनर की फिल्मों के लिए काफी बेहतर मानी जाती है। जो सिनेमाप्रेमी इस फिल्म को घर बैठे देखने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें अभी थोड़ा और धैर्य रखना होगा। चालू वर्ष में रिलीज होने के कारण यह फिल्म फिलहाल किसी भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं कराई गई है और इसका आनंद अभी केवल सिनेमाघरों में ही लिया जा सकता है।

  • UP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस का एक्शन, आरोपियों के घरों पर मारे छापे

    UP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस का एक्शन, आरोपियों के घरों पर मारे छापे


    लखनऊ।
    अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले (Ram Mandir offering theft case) में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. इस केस की जांच कर रही टीमों ने रविवार को अयोध्या में रहने वाले सभी आरोपियों के घरों पर छापेमारी की है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अपनी जांच में तेजी ला रही है, ताकि इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों का पूरी तरह खुलासा हो सके. पुलिस इस मामले के हर एक पहलू को गहराई से देख रही है, जिससे सच्चाई सामने आ सके।

    जांच टीम ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए अयोध्या में रहने वाले आरोपियों के घरों पर कार्रवाई की है. पुलिस की अलग-अलग टीमें अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, करुणेश पांडे और रमा शंकर मिश्रा के घर पहुंचीं. इन सभी ठिकानों पर पुलिस पूरी बारीकी से तलाशी ले रही है, ताकि केस से जुड़े अहम सबूत जुटाए जा सकें. जांच टीमें एक-एक घर के कोने खंगाल रही हैं ताकि कोई भी सबूत छूटने न पाए।


    दो नाम छोड़कर बाकी सभी के परिवारों से पूछताछ

    कार्रवाई के दौरान लोकल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस इन आरोपियों के परिवार के सदस्यों से कड़ी पूछताछ कर रही है. हालांकि, जांच टीम सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और प्रतापगढ़ के रहने वाले अविनाश शुक्ला को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों के परिजनों से सवाल-जवाब करने में जुटी है. साथ ही पुलिस आस-पड़ोस में रहने वाले लोगों से भी इन आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है. पुलिस यह जानना चाहती है कि इन लोगों की गतिविधियां पिछले कुछ समय में कैसी रही हैं।

    इस मामले की गहराई से जांच कर रही टीमें सिर्फ चोरी की कड़ियों को ही नहीं जोड़ रहीं, बल्कि आरोपियों की कमाई के जरियों का भी पता लगा रही हैं. अपराध के जरिए जो पैसा या संपत्ति जुटाई गई है, उसके सोर्स को ट्रेस किया जा रहा है. आरोपियों के पास मौजूद संपत्तियां कहां से आईं और उनके पास फंड कहां से आ रहा था, इसकी पूरी हिस्ट्री निकाली जा रही है. पुलिस बैंकों के खातों और लेन-देन की भी जांच कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि पैसे को कहां-कहां भेजा गया या किस काम में इस्तेमाल किया गया।

    इस मामले में गिरफ्तार किए गए ये सभी आरोपी राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और कैश को गिनने के काम से जुड़े हुए थे. जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि इन्होंने वहीं से पैसों का हेरफेर किया. जांच टीमों ने अब तक इस मामले में करीब 79 लाख 85 हजार रुपये बरामद कर लिए हैं. इस मामले में पुलिस ने चोरी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया है।

    यह बड़ी कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई तीन सदस्यों की SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद शुरू हुई है. कोर्ट ने दो दिन पहले ही सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक के लिए जेल भेजा था. पुलिस सोमवार को इन सभी आरोपियों को दोबारा कोर्ट में पेश करेगी. मामले की कड़ियों को जोड़ने और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस अदालत से इन सभी की कस्टडी रिमांड मांगेगी, ताकि बाकी की रकम और संपत्ति का भी पता लगाया जा सके।

  • बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर

    बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद नई बीजेपी सरकार (New BJP Government) ने तेज और आक्रामक शुरुआत की है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Shubhendu Adhikari) की पहली कैबिनेट बैठक में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) शासनकाल के कई फैसलों पर CM अधिकारी की कलम तेजी से चली. ममता सरकार द्वारा नियुक्त कई रिटायर्ड IAS-IPS अधिकारियों को सरकारी दफ्तरों से बाहर करने का फैसला लिया गया, जबकि पुरानी नीतियों को पलटते हुए नई दिशा दी गई।

    एक अहम फैसले में अधिकारी सरकार ने BSF को बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 600 एकड़ जमीन तुरंत ट्रांसफर करने का फैसला किया है. इसके अलावा सरकार ने जनगणना शुरू करने, ममता काल की IAS-IPS ट्रेनिंग नीति को बदलने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) को तुरंत लागू करने जैसे बड़े फैसले लिए।

    नए CM शुभेंदु अधिकारी ने साफ संदेश दिया कि अफसरों को ‘येस मैन’ बनने की जरूरत नहीं है और वहीं करें जो ‘राष्ट्र और राज्य हित’ के लिए सर्वोपरि हो. दरअसल ममता राज के ‘मोहरों’ पर चल रही CM अधिकारी की कलम अब बदलाव की नई इबारत लिख रही है।

    मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सुशासन, सुरक्षा और डबल इंजन सरकार का नया सफर देश भर के दूसरे BJP शासित राज्यों में चले विकास के उसी रास्ते पर आगे बढ़ेगा।


    बंगाल सरकार ने सोमवार को पहली कैबिनेट में क्या क्या फैसले लिए.

    1. बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी. इसके साथ ही कई अन्य केंद्रीय कल्याणकारी परियोजनाएं भी इसमें शामिल होंगी. जैसे पीएम जन आरोग्य योजना, किसानों के लिए फसल बीमा देने वाली पीएम फसल बीमा योजना, सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करने के लिए पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम एसएचआरआई) योजना, कारीगरों और शिल्पकारों की मदद करने वाली पीएम विश्वकर्मा योजना, महिलाओं की शिक्षा और सशक्तीकरण के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना और सब्सिडी वाले रसोई गैस कनेक्शन के लिए उज्ज्वला 3.0 योजना. ममता बनर्जी ने इन योजनाओं को राज्य में लागू नहीं किया था।

    2. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था।

    3. भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए केंद्र को जमीन का ट्रांसफर प्रोसेस तुरंत शुरू होगा. कैबिनेट ने चीफ सेक्रेटरी और राज्य के लैंड और लैंड रेवेन्यू डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी को अगले 45 दिनों के अंदर प्रोसेस पूरा करने का अधिकार दिया है.”

    4. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बीजेपी का दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई।

    5.पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य सरकार के अधीन गैर-सांविधिक निकायों, बोर्डों, संगठनों और सार्वजनिक उपक्रमों में नियुक्त सभी मनोनीत सदस्यों, निदेशकों और अध्यक्षों के कार्यकाल को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्देश जारी किया. इसके साथ ही राज्य सरकार ने 60 वर्ष की सामान्य सेवानिवृत्ति आयु के बाद एक्सटेंशन या री-अपॉइंटमेंट पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।

    6. विधानसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर रहे मनोज अग्रवाल को शुभेंदु अधिकारी की BJP सरकार में राज्य का नया चीफ सेक्रेटरी बनाया गया है. सोमवार को जारी एक ऑफिशियल ऑर्डर के मुताबिक वर्तमान चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नरियाला को नई दिल्ली में प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर नियुक्त किया गया है. इसके अलावा एडमिनिस्ट्रेटिव सुधारों के तहत, राज्य के IAS अधिकारी अब दूसरे राज्यों की तरह केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेंगे।

    7. पश्चिम बंगाल सरकार ने 1 जून से बसों में महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा की शुरुआत की है. ये बीजेपी के चुनावी वादे का हिस्सा था।

    8. CM शुभेंदु ने सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए ऊपरी उम्र सीमा में पांच साल की छूट की घोषणा की है. इस घोषणा से अब जनरल कैटेगरी के आवेदकों को मौजूदा उम्र सीमा 40 से 45 साल तक की छूट मिलेगी, और SC, ST और OBC कैटेगरी के लोग मौजूदा उम्र सीमा 43 से 48 साल तक नौकरियों के लिए अप्लाई कर सकेंगे।

    9. अधिकारी सरकार ने पश्चिम बंगाल में तुरंत जनगणना शुरू करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार जनगणना प्रक्रिया के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के 16 जून, 2025 के निर्देश को लागू करने में नाकाम रही थी. मौजूदा सरकार ने पेंडिंग एडमिनिस्ट्रेटिव सर्कुलर को तुरंत लागू कर दिया है।

    10. सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार ममता शासन की किसी भी योजना को बंद नहीं करेगी. हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि हम उन लोगों की पहचान करेंगे और उन्हें हटाएंगे जो इस देश के लोगों के लिए बनी वेलफेयर मदद पाने के हकदार नहीं हैं, जैसे मरे हुए लोग और गैर-भारतीय।

    सीएम अधिकारी ने कहा कि यह सरकार घमंड पर नहीं चलेगी, बल्कि यह सरकार सिद्धांतों पर चलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “डर बाहर, भरोसा अंदर” के संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नई सरकार पश्चिम बंगाल के लोगों की सुरक्षा, भरोसा और विकास पक्का करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरानी फायरिंग के बाद ऐक्शन में भारत…

    हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरानी फायरिंग के बाद ऐक्शन में भारत…


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps.- IRGC) के सैनिकों द्वारा की गई गोलीबारी की घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। यह घटना 18 अप्रैल को हुई थी। सरकार ने तत्काल कूटनीतिक कदम उठाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया और इस घटना पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। अभी भी हॉर्मुज में करीब 14 भारतीय जहाज फंसे हैं जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भारत ने प्रयास तेज कर दिए हैं। दूसरी ओर भारतीय नौसेना ने 7 युद्धपोत तैनात कर जहाजों को एस्कॉर्ट करना शुरू कर दिया है।


    कूटनीतिक प्रतिक्रिया और भारत का रुख

    गोलीबारी की घटना के बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूत से मुलाकात कर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से इस क्षेत्र से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि भारत ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से तेजी से कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा- हम भारतीय जहाजों की सुरक्षा के संबंध में ईरानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और उन्हें सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।

    यह फायरिंग ईरानी अधिकारियों और स्थानीय IRGC यूनिट के बीच ‘संचार की कमी’ का नतीजा प्रतीत होती है। राहत की बात ये है कि जहाजों को कोई बड़ा ढांचागत नुकसान नहीं पहुंचा है। घटना के दौरान जहाजों के कुछ हिस्सों में शीशे (कांच) टूटने की सूचना मिली है।


    UKMTO की रिपोर्ट और हमलों का विवरण

    यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी अपनी रिपोर्ट में इस घटना का जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल को कुल तीन जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनमें से दो भारतीय थे।

    पहली घटना: एक भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकर के पास दो ईरानी सैन्य गनबोट (हथियारबंद नावें) आईं और बिना किसी पूर्व चेतावनी या रेडियो संपर्क के फायरिंग शुरू कर दी। गनीमत रही कि चालक दल पूरी तरह सुरक्षित बच गया।

    दूसरी घटना: इसके कुछ ही समय बाद, ओमान के तट के पास एक अन्य भारतीय सुपरटैंकर को निशाना बनाया गया। इस जहाज पर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल (गोला/मिसाइल) टकराने की खबर है, जिससे इस अहम समुद्री मार्ग में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

    इस गंभीर घटना के बीच, भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में 7 युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। फंसे जहाजों को लारक आइलैंड से दूर रहने और केवल अनुमति मिलने पर आगे बढ़ने की एडवाइजरी जारी की गई है। नौसेना जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है।


    वर्तमान स्थिति और भारतीय जहाजों की मौजूदगी

    इस समय स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। हॉर्मुज स्ट्रेट में कम से कम 14 भारतीय ध्वज वाले जहाज अभी भी लंगर डाले हुए हैं, जिनमें तीन बड़े तेल टैंकर और एक एलपीजी (LPG) कैरियर शामिल हैं। 28 फरवरी को मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद से भारत पहले ही 10 भारतीय एलपीजी और तेल टैंकरों को इस क्षेत्र से सुरक्षित निकाल चुका है। अब बाकी बचे 14 जहाजों की सुरक्षित वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं। ईरान में भारी संख्या में भारतीय नागरिक भी मौजूद हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना नई दिल्ली की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत लगातार ईरान पर कूटनीतिक दबाव बना रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो और भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी मिल सके।

  • 230 अधिकारियों की कार्रवाई बेअसर! हटाए गए कब्जे के बाद फिर बस गई टपरियां, वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण

    230 अधिकारियों की कार्रवाई बेअसर! हटाए गए कब्जे के बाद फिर बस गई टपरियां, वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण


    नई दिल्ली। तीन साल से जारी अतिक्रमण के खिलाफ 27 फरवरी को प्रशासन ने 230 कर्मचारियों की मौजूदगी में कार्रवाई कर टपरियां हटाईं और जमीन पर गड्ढे खोदे थे। बावजूद इसके, कुछ ही दिनों में फिर से उसी जगह पर टपरियां बनाकर दोबारा कब्जा कर लिया गया।

    तीन साल से वन भूमि पर जारी अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने 27 फरवरी को बड़ी कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश देने की कोशिश की थी, लेकिन हालात फिर वहीं के वहीं नजर आ रहे हैं। वन विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने उस दिन मौके पर पहुंचकर कब्जा हटाया था। कार्रवाई में वन विभाग के एसडीओ अनिल विश्वकर्मा, तहसीलदार कीर्ति प्रधान, एसडीओपी महेंद्र चौहान और थाना प्रभारी सुधाकर बारस्कर मौजूद रहे। करीब 230 वनकर्मी, पुलिस जवान और राजस्व अमले ने मिलकर अवैध कब्जे हटाए थे।

    कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों द्वारा बनाई गई अस्थायी टपरियों को तोड़ा गया और जमीन को दोबारा खेती या कब्जे से बचाने के लिए बड़े-बड़े गड्ढे भी खोदे गए थे। प्रशासन का मकसद साफ था—वन भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर भविष्य में दोबारा कब्जा न होने देना। उस समय अधिकारियों ने दावा किया था कि अब दोबारा यहां कब्जा नहीं होने दिया जाएगा और क्षेत्र की नियमित निगरानी की जाएगी।

    लेकिन कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद तस्वीर बदलती दिख रही है। उसी जमीन पर फिर से टपरियां खड़ी कर दी गई हैं। इससे साफ है कि अतिक्रमणकारियों के हौसले अब भी बुलंद हैं और प्रशासनिक सख्ती का असर लंबे समय तक नहीं टिक पाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर लगातार निगरानी और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वन भूमि पर कब्जे का सिलसिला फिर से बढ़ सकता है।

    यह सवाल भी उठ रहा है कि जब इतनी बड़ी संयुक्त कार्रवाई की गई थी, तो उसके बाद क्षेत्र की निगरानी क्यों कमजोर पड़ गई। वन भूमि पर बार-बार कब्जा होना न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन दोबारा सख्ती दिखाता है या अतिक्रमण का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

  • जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित

    जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित



    नई दिल्ली। जबलपुर प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2026 से जिले में किसी भी एलपीजी से संचालित वाहन में स्कूली बच्चे सफर नहीं कर सकेंगे। इस आदेश का उद्देश्य स्कूल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है।

    कलेक्टर ने स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिकों को निर्देश दिए हैं कि वे 1 अप्रैल से पहले अपने वाहनों की व्यवस्था वैकल्पिक और कानूनी रूप से मान्य वाहनों के माध्यम से करें। यदि तय समय के बाद भी कोई एलपीजी वाहन बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत वाहन मालिक, स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

    जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निगरानी और पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) को आदेशित किया गया है कि वे स्कूल वाहनों का सत्यापन करें और एलपीजी वाहन संचालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके साथ ही सभी एसडीएमों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि जिले में कोई भी एलपीजी वाहन बच्चों को ले जाने के लिए इस्तेमाल न हो।

    पुलिस अधिकारियों को स्कूल समय के दौरान आकस्मिक निरीक्षण करने और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन इसकी अनदेखी नहीं करेगा।

    जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के माध्यम से सभी स्कूल प्रबंधन को इस आदेश की जानकारी दी जाएगी। स्कूल संचालकों से कहा गया है कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और अपने वाहन संचालन की व्यवस्था तुरंत बदलें। डीईओ को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे स्कूलों में इस नियम के पालन की निगरानी करें और किसी भी तरह की लापरवाही की स्थिति में कड़ी कार्रवाई करें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि गैस लीक, आग और तकनीकी खामियों के कारण हादसों की संभावना बढ़ जाती है। इस आदेश के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय किए जाएं।

    कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ नियम बनाना नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। सभी स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक 1 अप्रैल तक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।”

    इस आदेश से जबलपुर जिले के स्कूल परिवहन में एक बड़ा बदलाव आएगा और यह बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए राहत का संदेश लेकर आएगा। जिले में सभी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।

  • भोपाल में यूनिफॉर्म और बुक खरीद पर स्कूलों को नहीं होगा दबाव, 8 SDM करेंगे कार्रवाई

    भोपाल में यूनिफॉर्म और बुक खरीद पर स्कूलों को नहीं होगा दबाव, 8 SDM करेंगे कार्रवाई


    नई दिल्ली। भोपाल जिला प्रशासन ने नए शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले प्राइवेट स्कूलों में यूनिफॉर्म और किताबों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने का बड़ा फैसला किया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश जारी कर 8 एसडीएम को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे सुनिश्चित करें कि पेरेंट्स पर किसी भी प्रकार का दबाव न डाला जाए।

    आदेश के मुताबिक, प्राइवेट स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य बच्चों के माता-पिता को यूनिफॉर्म, जूते, टाई, किताबें या स्टेशनरी खरीदने के लिए निर्धारित दुकानों पर मजबूर नहीं कर सकते। इस कदम के पीछे यह वजह है कि वर्तमान में कई स्कूल पेरेंट्स को केवल कुछ चुनिंदा दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए बाध्य करते हैं।

    कलेक्टर ने हर अनुभाग में 5 सदस्यीय टीम गठित की है। टीम में संबंधित एसडीएम, तहसीलदार और सरकारी स्कूल के प्राचार्य शामिल हैं। इन टीमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नए सत्र में किसी भी स्कूल द्वारा पेरेंट्स पर दबाव न डाला जाए।

    स्कूलों की स्थिति और टाइमलाइन:
    अभी स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं, जो मार्च तक जारी रहेंगी। अप्रैल में स्कूल फिर से खुलेंगे और इस दौरान अक्सर पेरेंट्स पर यूनिफॉर्म और बुक्स खरीदने का दबाव बनाया जाता है। पिछले साल भी कलेक्टर ने इसी प्रकार का आदेश जारी किया था, ताकि पेरेंट्स की परेशानियों को कम किया जा सके।

    जिम्मेदार टीमों के विवरण:

    एमपी नगर: एसडीएम एलके खरे, तहसीलदार दीपक कुमार द्विवेदी, प्राचार्य एसके खांडेकर, वंदना शुक्ला, नूतन सक्सेना।

    टीटी नगर: एसडीएम अर्चना शर्मा, तहसीलदार कुणाल राउत, प्राचार्य अभिषेक बैंस, सरला कश्यप, मनोज रोहतास।

    कोलार: एसडीएम पीसी पांडेय, तहसीलदार एनएस परमार, प्राचार्य आरके यादव, शीला मौर्य, बीआरसी रूपाली रिछारिया।

    शहर वृत्त: एसडीएम दीपक पांडेय, तहसीलदार रामप्रकाश पांडे, प्राचार्य एसके उपाध्याय, एसएस सिसौदिया, बीआरसी अमित श्रीवास्तव।

    बैरागढ़: एसडीएम रविशंकर राय, तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह, प्राचार्य अनामिका खरे, नीलम बसानिया, वेरोनिका मंडल।

    गोविंदपुरा: एसडीएम भुवन गुप्ता, तहसीलदार सौरभ वर्मा, प्राचार्य विनोद राजोरिया, स्मिता मेश्राम, चक्रेश कुमार जैन।

    हुजूर: एसडीएम विनोद सोनकिया, तहसीलदार आलोक पारे, प्राचार्य सुनीता जैन, रचना श्रीवास्तव, अमिता शर्मा।

    बैरसिया: एसडीएम आशुतोष शर्मा, तहसीलदार दिलीप चौरसिया, बीईओ आरएन श्रीवास्त्री, प्राचार्य गीता जोशी, बृजेंद्र कुमार कटारे।

    कलेक्टर ने इन टीमों को निर्देश दिए हैं कि जैसे ही किसी पेरेंट्स की शिकायत मिले, तुरंत कार्रवाई करें। स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में देरी न हो।

    इस आदेश का उद्देश्य है कि नए शिक्षा सत्र में पेरेंट्स पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए, और बच्चों की पढ़ाई और स्कूली माहौल सुचारू रूप से चले। जिला प्रशासन का यह कदम पेरेंट्स की राहत और शिक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।