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  • फिल्म 'कोलोनी' में कलाकारों या स्टंटमैन ने नहीं, बल्कि ग्रुप डांसर्स ने निभाए रोंगटे खड़े कर देने वाले खूंखार एक्शन सीन्स

    फिल्म 'कोलोनी' में कलाकारों या स्टंटमैन ने नहीं, बल्कि ग्रुप डांसर्स ने निभाए रोंगटे खड़े कर देने वाले खूंखार एक्शन सीन्स

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में जब भी किसी फिल्म में खतरनाक और हैरतअंगेज एक्शन दृश्यों को फिल्माना होता है, तो आमतौर पर मुख्य अभिनेता खुद कमान संभालते हैं या फिर जोखिम भरे दृश्यों के लिए पेशेवर स्टंटमैन और बॉडी डबल की सेवाएं ली जाती हैं। लेकिन मनोरंजन जगत में हाल ही में एक ऐसा अनोखा प्रयोग देखने को मिला है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। साल 2026 में प्रदर्शित हुई एक नई फिल्म में बेहद पेचीदा और डरावने एक्शन सीक्वेंस को पूरा करने के लिए किसी स्टंटमैन को नहीं, बल्कि पेशेवर डांसर्स को अनुबंधित किया गया। इस अनूठे फैसले के पीछे की वजह फिल्म की बेहद अलग और जटिल पटकथा थी, जिसे सामान्य एक्शन कलाकारों के लिए कर पाना मुमकिन नहीं था।

    यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई चर्चित जॉम्बी थ्रिलर फिल्म ‘कोलोनी’ से जुड़ा हुआ है। यह फिल्म अपनी अनूठी कहानी के कारण पारंपरिक जॉम्बी फिल्मों से काफी अलग है। फिल्म की पटकथा के अनुसार, इसमें दिखाया गया वायरस इंसानी शरीर में प्रवेश करने के बाद एक अलग तरह का म्यूटेशन पैदा करता है, जिसे ‘हाइपर कोलिनेटेड’ कहा जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि वायरस से संक्रमित होने वाले सभी लोग अलग-अलग व्यवहार करने के बजाय एक सामूहिक मस्तिष्क यानी ‘कलेक्टिव माइंड’ की तरह काम करते हैं। यदि किसी एक संक्रमित को कोई जानकारी मिलती है, तो वह संदेश तुरंत एक ही पल में बाकी सभी जॉम्बीज तक पहुंच जाता है।

    इसी सामूहिक अवधारणा को स्क्रीन पर जीवंत करने के लिए निर्देशक को बेहद बारीकी से कोरियोग्राफ किए गए दृश्यों की आवश्यकता थी। फिल्म में कई दृश्य ऐसे थे जहां दर्जनों जॉम्बीज को एक साथ मिलकर बेहद पेचीदा शारीरिक गतिविधियां और एक समान स्टंट करने थे। इन दृश्यों में जरा सी भी चूक पूरे तालमेल को बिगाड़ सकती थी। किसी सामान्य स्टंटमैन के लिए शरीर को इस हद तक लचीला बनाना और सामूहिक रूप से एक ही समय पर सटीक शारीरिक मुद्राएं प्रदर्शित करना काफी कठिन काम था। इस चुनौती से निपटने के लिए निर्माण टीम को ग्रुप डांसर्स की आवश्यकता महसूस हुई, जो न केवल चेहरे पर सटीक भाव ला सकें, बल्कि सामूहिक टाइमिंग और मूवमेंट में भी पूरी तरह निपुण हों।

    यही कारण था कि फिल्म के निर्माताओं ने इस काम के लिए करीब 20 अनुभवी डांसर्स की एक विशेष टीम को काम पर रखा। दर्शकों को थिएटर्स में जिन दृश्यों को देखकर यह लग रहा है कि वे अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स (VFX) या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए हैं, वे असल में इन डांसर्स की कड़ी मेहनत और शारीरिक दक्षता का नतीजा हैं। इन कलाकारों ने बिना किसी तकनीक के सहारा लिए स्क्रीन पर एक साथ सटीक मूव्स दिखाकर दृश्यों को बेहद डरावना और वास्तविक बना दिया है।

    इस अनोखे प्रयोग और बेहतरीन तकनीकी काम की बदौलत फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की तरफ से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) पर भी इस फिल्म को 7 के करीब रेटिंग हासिल हुई है, जो इस जॉनर की फिल्मों के लिए काफी बेहतर मानी जाती है। जो सिनेमाप्रेमी इस फिल्म को घर बैठे देखने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें अभी थोड़ा और धैर्य रखना होगा। चालू वर्ष में रिलीज होने के कारण यह फिल्म फिलहाल किसी भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं कराई गई है और इसका आनंद अभी केवल सिनेमाघरों में ही लिया जा सकता है।

  • UP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस का एक्शन, आरोपियों के घरों पर मारे छापे

    UP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस का एक्शन, आरोपियों के घरों पर मारे छापे


    लखनऊ।
    अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले (Ram Mandir offering theft case) में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. इस केस की जांच कर रही टीमों ने रविवार को अयोध्या में रहने वाले सभी आरोपियों के घरों पर छापेमारी की है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अपनी जांच में तेजी ला रही है, ताकि इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों का पूरी तरह खुलासा हो सके. पुलिस इस मामले के हर एक पहलू को गहराई से देख रही है, जिससे सच्चाई सामने आ सके।

    जांच टीम ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए अयोध्या में रहने वाले आरोपियों के घरों पर कार्रवाई की है. पुलिस की अलग-अलग टीमें अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, करुणेश पांडे और रमा शंकर मिश्रा के घर पहुंचीं. इन सभी ठिकानों पर पुलिस पूरी बारीकी से तलाशी ले रही है, ताकि केस से जुड़े अहम सबूत जुटाए जा सकें. जांच टीमें एक-एक घर के कोने खंगाल रही हैं ताकि कोई भी सबूत छूटने न पाए।


    दो नाम छोड़कर बाकी सभी के परिवारों से पूछताछ

    कार्रवाई के दौरान लोकल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस इन आरोपियों के परिवार के सदस्यों से कड़ी पूछताछ कर रही है. हालांकि, जांच टीम सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और प्रतापगढ़ के रहने वाले अविनाश शुक्ला को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों के परिजनों से सवाल-जवाब करने में जुटी है. साथ ही पुलिस आस-पड़ोस में रहने वाले लोगों से भी इन आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है. पुलिस यह जानना चाहती है कि इन लोगों की गतिविधियां पिछले कुछ समय में कैसी रही हैं।

    इस मामले की गहराई से जांच कर रही टीमें सिर्फ चोरी की कड़ियों को ही नहीं जोड़ रहीं, बल्कि आरोपियों की कमाई के जरियों का भी पता लगा रही हैं. अपराध के जरिए जो पैसा या संपत्ति जुटाई गई है, उसके सोर्स को ट्रेस किया जा रहा है. आरोपियों के पास मौजूद संपत्तियां कहां से आईं और उनके पास फंड कहां से आ रहा था, इसकी पूरी हिस्ट्री निकाली जा रही है. पुलिस बैंकों के खातों और लेन-देन की भी जांच कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि पैसे को कहां-कहां भेजा गया या किस काम में इस्तेमाल किया गया।

    इस मामले में गिरफ्तार किए गए ये सभी आरोपी राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और कैश को गिनने के काम से जुड़े हुए थे. जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि इन्होंने वहीं से पैसों का हेरफेर किया. जांच टीमों ने अब तक इस मामले में करीब 79 लाख 85 हजार रुपये बरामद कर लिए हैं. इस मामले में पुलिस ने चोरी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया है।

    यह बड़ी कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई तीन सदस्यों की SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद शुरू हुई है. कोर्ट ने दो दिन पहले ही सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक के लिए जेल भेजा था. पुलिस सोमवार को इन सभी आरोपियों को दोबारा कोर्ट में पेश करेगी. मामले की कड़ियों को जोड़ने और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस अदालत से इन सभी की कस्टडी रिमांड मांगेगी, ताकि बाकी की रकम और संपत्ति का भी पता लगाया जा सके।

  • बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर

    बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद नई बीजेपी सरकार (New BJP Government) ने तेज और आक्रामक शुरुआत की है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Shubhendu Adhikari) की पहली कैबिनेट बैठक में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) शासनकाल के कई फैसलों पर CM अधिकारी की कलम तेजी से चली. ममता सरकार द्वारा नियुक्त कई रिटायर्ड IAS-IPS अधिकारियों को सरकारी दफ्तरों से बाहर करने का फैसला लिया गया, जबकि पुरानी नीतियों को पलटते हुए नई दिशा दी गई।

    एक अहम फैसले में अधिकारी सरकार ने BSF को बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 600 एकड़ जमीन तुरंत ट्रांसफर करने का फैसला किया है. इसके अलावा सरकार ने जनगणना शुरू करने, ममता काल की IAS-IPS ट्रेनिंग नीति को बदलने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) को तुरंत लागू करने जैसे बड़े फैसले लिए।

    नए CM शुभेंदु अधिकारी ने साफ संदेश दिया कि अफसरों को ‘येस मैन’ बनने की जरूरत नहीं है और वहीं करें जो ‘राष्ट्र और राज्य हित’ के लिए सर्वोपरि हो. दरअसल ममता राज के ‘मोहरों’ पर चल रही CM अधिकारी की कलम अब बदलाव की नई इबारत लिख रही है।

    मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सुशासन, सुरक्षा और डबल इंजन सरकार का नया सफर देश भर के दूसरे BJP शासित राज्यों में चले विकास के उसी रास्ते पर आगे बढ़ेगा।


    बंगाल सरकार ने सोमवार को पहली कैबिनेट में क्या क्या फैसले लिए.

    1. बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी. इसके साथ ही कई अन्य केंद्रीय कल्याणकारी परियोजनाएं भी इसमें शामिल होंगी. जैसे पीएम जन आरोग्य योजना, किसानों के लिए फसल बीमा देने वाली पीएम फसल बीमा योजना, सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करने के लिए पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम एसएचआरआई) योजना, कारीगरों और शिल्पकारों की मदद करने वाली पीएम विश्वकर्मा योजना, महिलाओं की शिक्षा और सशक्तीकरण के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना और सब्सिडी वाले रसोई गैस कनेक्शन के लिए उज्ज्वला 3.0 योजना. ममता बनर्जी ने इन योजनाओं को राज्य में लागू नहीं किया था।

    2. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था।

    3. भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए केंद्र को जमीन का ट्रांसफर प्रोसेस तुरंत शुरू होगा. कैबिनेट ने चीफ सेक्रेटरी और राज्य के लैंड और लैंड रेवेन्यू डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी को अगले 45 दिनों के अंदर प्रोसेस पूरा करने का अधिकार दिया है.”

    4. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बीजेपी का दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई।

    5.पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य सरकार के अधीन गैर-सांविधिक निकायों, बोर्डों, संगठनों और सार्वजनिक उपक्रमों में नियुक्त सभी मनोनीत सदस्यों, निदेशकों और अध्यक्षों के कार्यकाल को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्देश जारी किया. इसके साथ ही राज्य सरकार ने 60 वर्ष की सामान्य सेवानिवृत्ति आयु के बाद एक्सटेंशन या री-अपॉइंटमेंट पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।

    6. विधानसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर रहे मनोज अग्रवाल को शुभेंदु अधिकारी की BJP सरकार में राज्य का नया चीफ सेक्रेटरी बनाया गया है. सोमवार को जारी एक ऑफिशियल ऑर्डर के मुताबिक वर्तमान चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नरियाला को नई दिल्ली में प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर नियुक्त किया गया है. इसके अलावा एडमिनिस्ट्रेटिव सुधारों के तहत, राज्य के IAS अधिकारी अब दूसरे राज्यों की तरह केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेंगे।

    7. पश्चिम बंगाल सरकार ने 1 जून से बसों में महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा की शुरुआत की है. ये बीजेपी के चुनावी वादे का हिस्सा था।

    8. CM शुभेंदु ने सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए ऊपरी उम्र सीमा में पांच साल की छूट की घोषणा की है. इस घोषणा से अब जनरल कैटेगरी के आवेदकों को मौजूदा उम्र सीमा 40 से 45 साल तक की छूट मिलेगी, और SC, ST और OBC कैटेगरी के लोग मौजूदा उम्र सीमा 43 से 48 साल तक नौकरियों के लिए अप्लाई कर सकेंगे।

    9. अधिकारी सरकार ने पश्चिम बंगाल में तुरंत जनगणना शुरू करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार जनगणना प्रक्रिया के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के 16 जून, 2025 के निर्देश को लागू करने में नाकाम रही थी. मौजूदा सरकार ने पेंडिंग एडमिनिस्ट्रेटिव सर्कुलर को तुरंत लागू कर दिया है।

    10. सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार ममता शासन की किसी भी योजना को बंद नहीं करेगी. हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि हम उन लोगों की पहचान करेंगे और उन्हें हटाएंगे जो इस देश के लोगों के लिए बनी वेलफेयर मदद पाने के हकदार नहीं हैं, जैसे मरे हुए लोग और गैर-भारतीय।

    सीएम अधिकारी ने कहा कि यह सरकार घमंड पर नहीं चलेगी, बल्कि यह सरकार सिद्धांतों पर चलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “डर बाहर, भरोसा अंदर” के संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नई सरकार पश्चिम बंगाल के लोगों की सुरक्षा, भरोसा और विकास पक्का करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरानी फायरिंग के बाद ऐक्शन में भारत…

    हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरानी फायरिंग के बाद ऐक्शन में भारत…


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps.- IRGC) के सैनिकों द्वारा की गई गोलीबारी की घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। यह घटना 18 अप्रैल को हुई थी। सरकार ने तत्काल कूटनीतिक कदम उठाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया और इस घटना पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। अभी भी हॉर्मुज में करीब 14 भारतीय जहाज फंसे हैं जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भारत ने प्रयास तेज कर दिए हैं। दूसरी ओर भारतीय नौसेना ने 7 युद्धपोत तैनात कर जहाजों को एस्कॉर्ट करना शुरू कर दिया है।


    कूटनीतिक प्रतिक्रिया और भारत का रुख

    गोलीबारी की घटना के बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूत से मुलाकात कर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से इस क्षेत्र से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि भारत ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से तेजी से कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा- हम भारतीय जहाजों की सुरक्षा के संबंध में ईरानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और उन्हें सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।

    यह फायरिंग ईरानी अधिकारियों और स्थानीय IRGC यूनिट के बीच ‘संचार की कमी’ का नतीजा प्रतीत होती है। राहत की बात ये है कि जहाजों को कोई बड़ा ढांचागत नुकसान नहीं पहुंचा है। घटना के दौरान जहाजों के कुछ हिस्सों में शीशे (कांच) टूटने की सूचना मिली है।


    UKMTO की रिपोर्ट और हमलों का विवरण

    यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी अपनी रिपोर्ट में इस घटना का जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल को कुल तीन जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनमें से दो भारतीय थे।

    पहली घटना: एक भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकर के पास दो ईरानी सैन्य गनबोट (हथियारबंद नावें) आईं और बिना किसी पूर्व चेतावनी या रेडियो संपर्क के फायरिंग शुरू कर दी। गनीमत रही कि चालक दल पूरी तरह सुरक्षित बच गया।

    दूसरी घटना: इसके कुछ ही समय बाद, ओमान के तट के पास एक अन्य भारतीय सुपरटैंकर को निशाना बनाया गया। इस जहाज पर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल (गोला/मिसाइल) टकराने की खबर है, जिससे इस अहम समुद्री मार्ग में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

    इस गंभीर घटना के बीच, भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में 7 युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। फंसे जहाजों को लारक आइलैंड से दूर रहने और केवल अनुमति मिलने पर आगे बढ़ने की एडवाइजरी जारी की गई है। नौसेना जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है।


    वर्तमान स्थिति और भारतीय जहाजों की मौजूदगी

    इस समय स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। हॉर्मुज स्ट्रेट में कम से कम 14 भारतीय ध्वज वाले जहाज अभी भी लंगर डाले हुए हैं, जिनमें तीन बड़े तेल टैंकर और एक एलपीजी (LPG) कैरियर शामिल हैं। 28 फरवरी को मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद से भारत पहले ही 10 भारतीय एलपीजी और तेल टैंकरों को इस क्षेत्र से सुरक्षित निकाल चुका है। अब बाकी बचे 14 जहाजों की सुरक्षित वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं। ईरान में भारी संख्या में भारतीय नागरिक भी मौजूद हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना नई दिल्ली की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत लगातार ईरान पर कूटनीतिक दबाव बना रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो और भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी मिल सके।

  • 230 अधिकारियों की कार्रवाई बेअसर! हटाए गए कब्जे के बाद फिर बस गई टपरियां, वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण

    230 अधिकारियों की कार्रवाई बेअसर! हटाए गए कब्जे के बाद फिर बस गई टपरियां, वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण


    नई दिल्ली। तीन साल से जारी अतिक्रमण के खिलाफ 27 फरवरी को प्रशासन ने 230 कर्मचारियों की मौजूदगी में कार्रवाई कर टपरियां हटाईं और जमीन पर गड्ढे खोदे थे। बावजूद इसके, कुछ ही दिनों में फिर से उसी जगह पर टपरियां बनाकर दोबारा कब्जा कर लिया गया।

    तीन साल से वन भूमि पर जारी अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने 27 फरवरी को बड़ी कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश देने की कोशिश की थी, लेकिन हालात फिर वहीं के वहीं नजर आ रहे हैं। वन विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने उस दिन मौके पर पहुंचकर कब्जा हटाया था। कार्रवाई में वन विभाग के एसडीओ अनिल विश्वकर्मा, तहसीलदार कीर्ति प्रधान, एसडीओपी महेंद्र चौहान और थाना प्रभारी सुधाकर बारस्कर मौजूद रहे। करीब 230 वनकर्मी, पुलिस जवान और राजस्व अमले ने मिलकर अवैध कब्जे हटाए थे।

    कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों द्वारा बनाई गई अस्थायी टपरियों को तोड़ा गया और जमीन को दोबारा खेती या कब्जे से बचाने के लिए बड़े-बड़े गड्ढे भी खोदे गए थे। प्रशासन का मकसद साफ था—वन भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर भविष्य में दोबारा कब्जा न होने देना। उस समय अधिकारियों ने दावा किया था कि अब दोबारा यहां कब्जा नहीं होने दिया जाएगा और क्षेत्र की नियमित निगरानी की जाएगी।

    लेकिन कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद तस्वीर बदलती दिख रही है। उसी जमीन पर फिर से टपरियां खड़ी कर दी गई हैं। इससे साफ है कि अतिक्रमणकारियों के हौसले अब भी बुलंद हैं और प्रशासनिक सख्ती का असर लंबे समय तक नहीं टिक पाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर लगातार निगरानी और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वन भूमि पर कब्जे का सिलसिला फिर से बढ़ सकता है।

    यह सवाल भी उठ रहा है कि जब इतनी बड़ी संयुक्त कार्रवाई की गई थी, तो उसके बाद क्षेत्र की निगरानी क्यों कमजोर पड़ गई। वन भूमि पर बार-बार कब्जा होना न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन दोबारा सख्ती दिखाता है या अतिक्रमण का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

  • जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित

    जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित



    नई दिल्ली। जबलपुर प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2026 से जिले में किसी भी एलपीजी से संचालित वाहन में स्कूली बच्चे सफर नहीं कर सकेंगे। इस आदेश का उद्देश्य स्कूल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है।

    कलेक्टर ने स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिकों को निर्देश दिए हैं कि वे 1 अप्रैल से पहले अपने वाहनों की व्यवस्था वैकल्पिक और कानूनी रूप से मान्य वाहनों के माध्यम से करें। यदि तय समय के बाद भी कोई एलपीजी वाहन बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत वाहन मालिक, स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

    जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निगरानी और पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) को आदेशित किया गया है कि वे स्कूल वाहनों का सत्यापन करें और एलपीजी वाहन संचालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके साथ ही सभी एसडीएमों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि जिले में कोई भी एलपीजी वाहन बच्चों को ले जाने के लिए इस्तेमाल न हो।

    पुलिस अधिकारियों को स्कूल समय के दौरान आकस्मिक निरीक्षण करने और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन इसकी अनदेखी नहीं करेगा।

    जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के माध्यम से सभी स्कूल प्रबंधन को इस आदेश की जानकारी दी जाएगी। स्कूल संचालकों से कहा गया है कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और अपने वाहन संचालन की व्यवस्था तुरंत बदलें। डीईओ को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे स्कूलों में इस नियम के पालन की निगरानी करें और किसी भी तरह की लापरवाही की स्थिति में कड़ी कार्रवाई करें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि गैस लीक, आग और तकनीकी खामियों के कारण हादसों की संभावना बढ़ जाती है। इस आदेश के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय किए जाएं।

    कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ नियम बनाना नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। सभी स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक 1 अप्रैल तक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।”

    इस आदेश से जबलपुर जिले के स्कूल परिवहन में एक बड़ा बदलाव आएगा और यह बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए राहत का संदेश लेकर आएगा। जिले में सभी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।

  • भोपाल में यूनिफॉर्म और बुक खरीद पर स्कूलों को नहीं होगा दबाव, 8 SDM करेंगे कार्रवाई

    भोपाल में यूनिफॉर्म और बुक खरीद पर स्कूलों को नहीं होगा दबाव, 8 SDM करेंगे कार्रवाई


    नई दिल्ली। भोपाल जिला प्रशासन ने नए शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले प्राइवेट स्कूलों में यूनिफॉर्म और किताबों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने का बड़ा फैसला किया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश जारी कर 8 एसडीएम को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे सुनिश्चित करें कि पेरेंट्स पर किसी भी प्रकार का दबाव न डाला जाए।

    आदेश के मुताबिक, प्राइवेट स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य बच्चों के माता-पिता को यूनिफॉर्म, जूते, टाई, किताबें या स्टेशनरी खरीदने के लिए निर्धारित दुकानों पर मजबूर नहीं कर सकते। इस कदम के पीछे यह वजह है कि वर्तमान में कई स्कूल पेरेंट्स को केवल कुछ चुनिंदा दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए बाध्य करते हैं।

    कलेक्टर ने हर अनुभाग में 5 सदस्यीय टीम गठित की है। टीम में संबंधित एसडीएम, तहसीलदार और सरकारी स्कूल के प्राचार्य शामिल हैं। इन टीमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नए सत्र में किसी भी स्कूल द्वारा पेरेंट्स पर दबाव न डाला जाए।

    स्कूलों की स्थिति और टाइमलाइन:
    अभी स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं, जो मार्च तक जारी रहेंगी। अप्रैल में स्कूल फिर से खुलेंगे और इस दौरान अक्सर पेरेंट्स पर यूनिफॉर्म और बुक्स खरीदने का दबाव बनाया जाता है। पिछले साल भी कलेक्टर ने इसी प्रकार का आदेश जारी किया था, ताकि पेरेंट्स की परेशानियों को कम किया जा सके।

    जिम्मेदार टीमों के विवरण:

    एमपी नगर: एसडीएम एलके खरे, तहसीलदार दीपक कुमार द्विवेदी, प्राचार्य एसके खांडेकर, वंदना शुक्ला, नूतन सक्सेना।

    टीटी नगर: एसडीएम अर्चना शर्मा, तहसीलदार कुणाल राउत, प्राचार्य अभिषेक बैंस, सरला कश्यप, मनोज रोहतास।

    कोलार: एसडीएम पीसी पांडेय, तहसीलदार एनएस परमार, प्राचार्य आरके यादव, शीला मौर्य, बीआरसी रूपाली रिछारिया।

    शहर वृत्त: एसडीएम दीपक पांडेय, तहसीलदार रामप्रकाश पांडे, प्राचार्य एसके उपाध्याय, एसएस सिसौदिया, बीआरसी अमित श्रीवास्तव।

    बैरागढ़: एसडीएम रविशंकर राय, तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह, प्राचार्य अनामिका खरे, नीलम बसानिया, वेरोनिका मंडल।

    गोविंदपुरा: एसडीएम भुवन गुप्ता, तहसीलदार सौरभ वर्मा, प्राचार्य विनोद राजोरिया, स्मिता मेश्राम, चक्रेश कुमार जैन।

    हुजूर: एसडीएम विनोद सोनकिया, तहसीलदार आलोक पारे, प्राचार्य सुनीता जैन, रचना श्रीवास्तव, अमिता शर्मा।

    बैरसिया: एसडीएम आशुतोष शर्मा, तहसीलदार दिलीप चौरसिया, बीईओ आरएन श्रीवास्त्री, प्राचार्य गीता जोशी, बृजेंद्र कुमार कटारे।

    कलेक्टर ने इन टीमों को निर्देश दिए हैं कि जैसे ही किसी पेरेंट्स की शिकायत मिले, तुरंत कार्रवाई करें। स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में देरी न हो।

    इस आदेश का उद्देश्य है कि नए शिक्षा सत्र में पेरेंट्स पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए, और बच्चों की पढ़ाई और स्कूली माहौल सुचारू रूप से चले। जिला प्रशासन का यह कदम पेरेंट्स की राहत और शिक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

  • फिटनेस प्रमाणन बिना 8 उड़ानें एअर इंडिया पर DGCA की कड़ी कार्रवाई लगभग 1 करोड़ रुपये का जुर्माना

    फिटनेस प्रमाणन बिना 8 उड़ानें एअर इंडिया पर DGCA की कड़ी कार्रवाई लगभग 1 करोड़ रुपये का जुर्माना


    नई दिल्ली। भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्रवाई सामने आई है। देश के विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय ने एअर इंडिया पर लगभग 1.10 लाख डॉलर यानी करीब एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह दंड उस मामले में लगाया गया है जिसमें एयरलाइन के एक Airbus A320neo विमान को वैध एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट के बिना आठ व्यावसायिक उड़ानों में संचालित किया गया। नियामक ने इसे सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन माना है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित विमान का फिटनेस प्रमाणन समाप्त हो चुका था फिर भी उसे 24 और 25 नवंबर 2025 को राजस्व सेवाओं में लगाया गया। उड्डयन नियमों के तहत किसी भी विमान का एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट उसकी तकनीकी स्थिति और सुरक्षित संचालन की अनिवार्य शर्त होता है। प्रमाणन की वैधता समाप्त होने के बावजूद विमान का संचालन नियामकीय प्रक्रियाओं में गंभीर चूक की ओर संकेत करता है।

    मामले की जानकारी एयरलाइन ने स्वयं नियामक को दी थी जिसके बाद 2 दिसंबर को औपचारिक जांच प्रारंभ की गई। विस्तृत समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि प्रमाणन की अवधि समाप्त होने के बाद भी आवश्यक तकनीकी सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया कि परिचालन स्तर पर निगरानी और अनुपालन तंत्र में कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।

    नागर विमानन महानिदेशालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लापरवाही से यात्री सुरक्षा और नियामकीय विश्वसनीयता दोनों प्रभावित होती हैं। विमानन उद्योग में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है और किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक चूक को हल्के में नहीं लिया जा सकता। नियामक ने कहा कि दंडात्मक कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है।

    एअर इंडिया ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा है कि घटना की सूचना समय रहते नियामक को दे दी गई थी और आंतरिक समीक्षा के माध्यम से पहचानी गई कमियों को दूर कर दिया गया है। कंपनी के अनुसार परिचालन प्रक्रियाओं की निगरानी को और सुदृढ़ किया गया है तथा अनुपालन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त नियंत्रण उपाय लागू किए गए हैं। इन सुधारात्मक कदमों की विस्तृत रिपोर्ट नियामक को सौंप दी गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक विमानन उद्योग में एयरवर्थनेस और अनुपालन संबंधी प्रक्रियाएं अत्यंत कठोर होती हैं क्योंकि यात्रियों की सुरक्षा सीधे इन पर निर्भर करती है। ऐसे मामलों में त्वरित रिपोर्टिंग और पारदर्शिता सकारात्मक पहलू माने जाते हैं लेकिन परिचालन चूक पर नियामकीय कार्रवाई अनिवार्य होती है।

    यह प्रकरण एक बार फिर संकेत देता है कि भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है। भविष्य में एयरलाइनों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि प्रमाणन और तकनीकी अनुमोदन जैसी मूलभूत आवश्यकताओं में किसी भी प्रकार की ढिलाई महंगी साबित हो सकती है।

  • पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल और प्रियंका गांधी बोले- राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई

    पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल और प्रियंका गांधी बोले- राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई


    नई दिल्ली।
    पप्पू यादव (Pappu Yadav) के समर्थन में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) भी उतर पड़े हैं। राहुल गांधी ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी केवल राजनीतिक प्रतिशोध (Political vendetta) की भावना से की गई है। उन्होंने कहा कि NEET छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है और अब डराया धमकाया जा रहा है। शुक्रवार को देर रात पटना पुलिस ने 31 साल पुराने एक मामले में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार किया है।

    राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”पटना में नीट की आकांक्षी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद की पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर व्यवस्था की गहरी सड़ांध को उजागर कर दिया है।” उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार ने जब निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की, तो वही पुराना भाजपा-राजग मॉडल सामने आ गया कि मामले को भटकाओ, परिजनों को प्रताड़ित करो और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण दो।

    राहुल ने कहा, ‘इस बेटी के लिए न्याय की आवाज़ बनकर साथी सांसद पप्पू यादव जी मजबूती से खड़े हुए। उनकी गिरफ़्तारी साफ़ तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध है ताकि जवाबदेही मांगने वाली हर आवाज़ को डराया और दबाया जा सके।’

    उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह घटना किसी एक मामले तक सीमित नहीं दिखती। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ”यह एक भयावह साजिश एवं खतरनाक चलन की ओर इशारा करती है, जहां और भी बेटियां शिकार बन रही हैं और सत्ता इस खौफ़नाक सच्चाई से आंखें मूंदकर बैठी है। यह राजनीति नहीं, इंसाफ़ का सवाल है। यह बिहार की बेटी की इज़्ज़त और सुरक्षा का सवाल है।”


    प्रियंका गांधी बोलीं- अत्याचार के साथ खड़ी बीजेपी

    पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी पप्पू यादव के प्रति एकजुटता प्रकट की और आरोप लगाया कि भाजपा एवं उसके सहयोगी दल अत्याचार के साथ खड़े हुए हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया,”पटना के हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ बलात्कार और हत्या का मामला झकझोर देने वाला है। यह मामला सामने आने के बाद सरकार का रवैया उससे भी ज्यादा खौफनाक है।’ प्रियंका ने कहा, ‘प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर जांच और कार्रवाई तक सबकुछ संदिग्ध बना दिया गया है। यह सब किसे बचाने के लिए किया जा रहा है?’

    उन्होंने कहा कि हाथरस, उन्नाव से लेकर अंकिता भंडारी और पटना तक- जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, भाजपा की सरकारें पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपियों के साथ खड़ी हो जाती हैं। प्रियंका ने आरोप लगाया कि इस मामले में आवाज उठा रहे सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी इसी असंवेदनशील रवैये की एक और कड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगियों का एजेंडा स्पष्ट है कि वे अन्याय और अत्याचार के साथ खड़े हैं।

  • पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार

    पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार


    पुणे।
    मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) (Military Engineering Services – MES) में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे के खड़की क्षेत्र से दो अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। सीबीआई ने यह कार्रवाई 5 फरवरी को सुनियोजित ट्रैप के जरिए की, जिसमें जूनियर इंजीनियर को शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया गया। रिश्वत की पूरी रकम उनके कार्यालय से बरामद कर ली गई है, जबकि असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर को भी इस साजिश में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।

    सीबीआई के अनुसार, दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है। एजेंसी ने बताया कि यह केस 3 फरवरी को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता एक निजी कंपनी का पावर ऑफ अटॉर्नी धारक है, जिसने आरोप लगाया था कि कार्य पूरा होने और जरूरी प्रमाणपत्र जमा करने के बावजूद भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा था, ताकि रिश्वत की मांग की जा सके।

    शिकायत में यह भी सामने आया कि शुरुआत में दोनों अधिकारियों ने भुगतान जारी करने के बदले 6 लाख रुपये की मांग की थी। बाद में बातचीत के बाद यह सौदा पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये पर तय हुआ। रिश्वत की मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने सीबीआई से संपर्क किया, जिसके बाद एजेंसी ने जाल बिछाया और आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।


    छापेमारी में मिला अतिरिक्त कैश

    ट्रैप के तुरंत बाद सीबीआई ने दोनों अधिकारियों के आवासीय और कार्यालय परिसरों पर छापेमारी की। इस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ 1 लाख 88 हजार 500 रुपये की अनएक्सप्लेन्ड नकदी भी बरामद की गई। एजेंसी का कहना है कि यह रकम उनकी ज्ञात वैध आय से अधिक प्रतीत होती है और इसकी जांच की जा रही है।

    प्राथमिक जांच में यह मामला सिर्फ एक रिश्वत लेनदेन तक सीमित नहीं दिख रहा है, बल्कि इसे एक संगठित प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें ठेकेदारों को भुगतान के लिए दबाव बनाकर अवैध वसूली की जाती थी। ऐसे कृत्य न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि रक्षा से जुड़े संवेदनशील विभागों में भरोसे को भी कमजोर करते हैं।

    सीबीआई ने कहा है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है और अतिरिक्त सबूत जुटाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाइयां न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मददगार होती हैं, बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही और विश्वास को भी मजबूत करती हैं।