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  • फिटनेस प्रमाणन बिना 8 उड़ानें एअर इंडिया पर DGCA की कड़ी कार्रवाई लगभग 1 करोड़ रुपये का जुर्माना

    फिटनेस प्रमाणन बिना 8 उड़ानें एअर इंडिया पर DGCA की कड़ी कार्रवाई लगभग 1 करोड़ रुपये का जुर्माना


    नई दिल्ली। भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्रवाई सामने आई है। देश के विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय ने एअर इंडिया पर लगभग 1.10 लाख डॉलर यानी करीब एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह दंड उस मामले में लगाया गया है जिसमें एयरलाइन के एक Airbus A320neo विमान को वैध एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट के बिना आठ व्यावसायिक उड़ानों में संचालित किया गया। नियामक ने इसे सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन माना है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित विमान का फिटनेस प्रमाणन समाप्त हो चुका था फिर भी उसे 24 और 25 नवंबर 2025 को राजस्व सेवाओं में लगाया गया। उड्डयन नियमों के तहत किसी भी विमान का एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट उसकी तकनीकी स्थिति और सुरक्षित संचालन की अनिवार्य शर्त होता है। प्रमाणन की वैधता समाप्त होने के बावजूद विमान का संचालन नियामकीय प्रक्रियाओं में गंभीर चूक की ओर संकेत करता है।

    मामले की जानकारी एयरलाइन ने स्वयं नियामक को दी थी जिसके बाद 2 दिसंबर को औपचारिक जांच प्रारंभ की गई। विस्तृत समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि प्रमाणन की अवधि समाप्त होने के बाद भी आवश्यक तकनीकी सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया कि परिचालन स्तर पर निगरानी और अनुपालन तंत्र में कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।

    नागर विमानन महानिदेशालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लापरवाही से यात्री सुरक्षा और नियामकीय विश्वसनीयता दोनों प्रभावित होती हैं। विमानन उद्योग में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है और किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक चूक को हल्के में नहीं लिया जा सकता। नियामक ने कहा कि दंडात्मक कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है।

    एअर इंडिया ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा है कि घटना की सूचना समय रहते नियामक को दे दी गई थी और आंतरिक समीक्षा के माध्यम से पहचानी गई कमियों को दूर कर दिया गया है। कंपनी के अनुसार परिचालन प्रक्रियाओं की निगरानी को और सुदृढ़ किया गया है तथा अनुपालन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त नियंत्रण उपाय लागू किए गए हैं। इन सुधारात्मक कदमों की विस्तृत रिपोर्ट नियामक को सौंप दी गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक विमानन उद्योग में एयरवर्थनेस और अनुपालन संबंधी प्रक्रियाएं अत्यंत कठोर होती हैं क्योंकि यात्रियों की सुरक्षा सीधे इन पर निर्भर करती है। ऐसे मामलों में त्वरित रिपोर्टिंग और पारदर्शिता सकारात्मक पहलू माने जाते हैं लेकिन परिचालन चूक पर नियामकीय कार्रवाई अनिवार्य होती है।

    यह प्रकरण एक बार फिर संकेत देता है कि भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है। भविष्य में एयरलाइनों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि प्रमाणन और तकनीकी अनुमोदन जैसी मूलभूत आवश्यकताओं में किसी भी प्रकार की ढिलाई महंगी साबित हो सकती है।

  • पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल और प्रियंका गांधी बोले- राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई

    पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल और प्रियंका गांधी बोले- राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई


    नई दिल्ली।
    पप्पू यादव (Pappu Yadav) के समर्थन में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) भी उतर पड़े हैं। राहुल गांधी ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी केवल राजनीतिक प्रतिशोध (Political vendetta) की भावना से की गई है। उन्होंने कहा कि NEET छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है और अब डराया धमकाया जा रहा है। शुक्रवार को देर रात पटना पुलिस ने 31 साल पुराने एक मामले में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार किया है।

    राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”पटना में नीट की आकांक्षी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद की पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर व्यवस्था की गहरी सड़ांध को उजागर कर दिया है।” उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार ने जब निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की, तो वही पुराना भाजपा-राजग मॉडल सामने आ गया कि मामले को भटकाओ, परिजनों को प्रताड़ित करो और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण दो।

    राहुल ने कहा, ‘इस बेटी के लिए न्याय की आवाज़ बनकर साथी सांसद पप्पू यादव जी मजबूती से खड़े हुए। उनकी गिरफ़्तारी साफ़ तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध है ताकि जवाबदेही मांगने वाली हर आवाज़ को डराया और दबाया जा सके।’

    उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह घटना किसी एक मामले तक सीमित नहीं दिखती। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ”यह एक भयावह साजिश एवं खतरनाक चलन की ओर इशारा करती है, जहां और भी बेटियां शिकार बन रही हैं और सत्ता इस खौफ़नाक सच्चाई से आंखें मूंदकर बैठी है। यह राजनीति नहीं, इंसाफ़ का सवाल है। यह बिहार की बेटी की इज़्ज़त और सुरक्षा का सवाल है।”


    प्रियंका गांधी बोलीं- अत्याचार के साथ खड़ी बीजेपी

    पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी पप्पू यादव के प्रति एकजुटता प्रकट की और आरोप लगाया कि भाजपा एवं उसके सहयोगी दल अत्याचार के साथ खड़े हुए हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया,”पटना के हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ बलात्कार और हत्या का मामला झकझोर देने वाला है। यह मामला सामने आने के बाद सरकार का रवैया उससे भी ज्यादा खौफनाक है।’ प्रियंका ने कहा, ‘प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर जांच और कार्रवाई तक सबकुछ संदिग्ध बना दिया गया है। यह सब किसे बचाने के लिए किया जा रहा है?’

    उन्होंने कहा कि हाथरस, उन्नाव से लेकर अंकिता भंडारी और पटना तक- जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, भाजपा की सरकारें पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपियों के साथ खड़ी हो जाती हैं। प्रियंका ने आरोप लगाया कि इस मामले में आवाज उठा रहे सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी इसी असंवेदनशील रवैये की एक और कड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगियों का एजेंडा स्पष्ट है कि वे अन्याय और अत्याचार के साथ खड़े हैं।

  • पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार

    पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार


    पुणे।
    मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) (Military Engineering Services – MES) में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे के खड़की क्षेत्र से दो अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। सीबीआई ने यह कार्रवाई 5 फरवरी को सुनियोजित ट्रैप के जरिए की, जिसमें जूनियर इंजीनियर को शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया गया। रिश्वत की पूरी रकम उनके कार्यालय से बरामद कर ली गई है, जबकि असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर को भी इस साजिश में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।

    सीबीआई के अनुसार, दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है। एजेंसी ने बताया कि यह केस 3 फरवरी को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता एक निजी कंपनी का पावर ऑफ अटॉर्नी धारक है, जिसने आरोप लगाया था कि कार्य पूरा होने और जरूरी प्रमाणपत्र जमा करने के बावजूद भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा था, ताकि रिश्वत की मांग की जा सके।

    शिकायत में यह भी सामने आया कि शुरुआत में दोनों अधिकारियों ने भुगतान जारी करने के बदले 6 लाख रुपये की मांग की थी। बाद में बातचीत के बाद यह सौदा पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये पर तय हुआ। रिश्वत की मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने सीबीआई से संपर्क किया, जिसके बाद एजेंसी ने जाल बिछाया और आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।


    छापेमारी में मिला अतिरिक्त कैश

    ट्रैप के तुरंत बाद सीबीआई ने दोनों अधिकारियों के आवासीय और कार्यालय परिसरों पर छापेमारी की। इस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ 1 लाख 88 हजार 500 रुपये की अनएक्सप्लेन्ड नकदी भी बरामद की गई। एजेंसी का कहना है कि यह रकम उनकी ज्ञात वैध आय से अधिक प्रतीत होती है और इसकी जांच की जा रही है।

    प्राथमिक जांच में यह मामला सिर्फ एक रिश्वत लेनदेन तक सीमित नहीं दिख रहा है, बल्कि इसे एक संगठित प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें ठेकेदारों को भुगतान के लिए दबाव बनाकर अवैध वसूली की जाती थी। ऐसे कृत्य न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि रक्षा से जुड़े संवेदनशील विभागों में भरोसे को भी कमजोर करते हैं।

    सीबीआई ने कहा है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है और अतिरिक्त सबूत जुटाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाइयां न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मददगार होती हैं, बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही और विश्वास को भी मजबूत करती हैं।

  • शालीमार गार्डन हिंसा: पिंकी चौधरी और बेटे सहित 12 आरोपियों पर कार्रवाई तेज

    शालीमार गार्डन हिंसा: पिंकी चौधरी और बेटे सहित 12 आरोपियों पर कार्रवाई तेज


    गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां हिंदू रक्षा दल के लोगों द्वारा तलवारों का वितरण और शक्ति प्रदर्शन का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने सख्त कदम उठाया। शालीमार गार्डन थाने की पुलिस ने इस मामले में हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी और उनके बेटे हर्ष चौधरी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि कुछ दिन पहले दोनों ने स्थानीय लोगों में तलवारें बांटी और कहा कि “
    जिहादियों से सुरक्षा के लिए इसे अपने घर में रखें और अगर कोई बहन या बेटी पर बुरी नजर डाले तो इसका प्रयोग करें।

    यह मामला पहले भी चर्चा में रहा था। पुलिस ने इस घटना की सूचना मिलने के बाद जांच शुरू की और अब तक कुल 12 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हथियार वितरण और शक्ति प्रदर्शन की यह घटना कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

    इस मामले पर विपक्ष भी सख्त है। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने प्रदेश सरकार को कानून व्यवस्था में चूक के लिए कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि आज देश में क्या हो रहा है, तलवारें बांटी जा रही हैं, एक संप्रदाय के खिलाफ भावनात्मक नारे लगाकर हिंसा की कोशिश की जा रही है, लेकिन सरकार को दिखाई नहीं दे रहा।

    उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना।

    पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि शालीमार गार्डन और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। इस घटना ने यह सवाल उठाया है कि समाज में हथियारों का वितरण और युवा वर्ग को हिंसा के लिए उकसाना कितनी गंभीर समस्या बन सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घटनाक्रम न केवल समाज में भय और असुरक्षा पैदा करते हैं, बल्कि कानून व्यवस्था और सामुदायिक शांति पर भी गंभीर असर डालते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत स्थानीय थाने को दें और कानून का पालन सुनिश्चित करें।

    शालीमार गार्डन मामला यह भी दर्शाता है कि हथियारों का गलत तरीके से वितरण और सामूहिक शक्ति प्रदर्शन केवल राजनीतिक या सामाजिक तनाव ही नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। इसलिए अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी घटना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे मामले ने राज्य में राजनीतिक हलकों और आम जनता के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। विपक्षी दलों के आरोपों और पुलिस की सक्रिय कार्रवाई ने इसे अब तक के सबसे बड़े हथियार वितरण मामलों में शामिल कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि किसी भी व्यक्ति को हथियार लेकर सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा नहीं होने दिया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस प्रकार गाजियाबाद की शालीमार गार्डन घटना ने यह संदेश दिया है कि हथियारों का वितरण और सामूहिक हिंसा किसी भी समाज के लिए गंभीर खतरा है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल कार्रवाई अनिवार्य है।

  • ग्वालियर निजी स्कूलों पर फीस स्ट्रक्चर अपलोड न करने पर होगी कार्रवाई

    ग्वालियर निजी स्कूलों पर फीस स्ट्रक्चर अपलोड न करने पर होगी कार्रवाई


    ग्वालियर । ग्वालियर के निजी स्कूलों में फीस को लेकर हो रही मनमानी पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक सख्त कदम उठाया है। अब सभी प्राइवेट स्कूलों को फीस स्ट्रक्चर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है और इस जानकारी की हार्ड कॉपी जिला शिक्षा विभाग में भी जमा करानी होगी। 31 दिसंबर तक सभी स्कूलों को यह काम पूरा करना था लेकिन अब भी कई स्कूलों ने समय सीमा का पालन नहीं किया है। शिक्षा विभाग ने कहा कि जिन स्कूलों ने यह जानकारी अपलोड नहीं की उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    इस बार विभाग ने एक बड़ा बदलाव किया है। पहले केवल पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना आवश्यक था लेकिन अब पहली बार यह आदेश दिया गया है कि हर स्कूल को पोर्टल के साथ-साथ हार्ड कॉपी भी जमा करनी होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी स्कूल अपनी फीस संरचना को छुपाने या उसे बदलने की कोशिश न कर सके। सभी प्राइवेट स्कूलों को विभाग के पोर्टल पर फीस संरचना 31 दिसंबर तक अपलोड करना था। अब विभाग तीन-चार दिन के भीतर इन आंकड़ों का मिलान करेगा। जिन स्कूलों ने यह जानकारी अपलोड नहीं की है या हार्ड कॉपी जमा नहीं की है उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    इस वर्ष कई स्कूलों ने पोर्टल पर फीस जानकारी तो अपलोड की लेकिन हार्ड कॉपी जमा करने में लापरवाही बरती। अब विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि हर स्कूल को पूर्ण जानकारी देनी होगी। शिक्षा विभाग ने यह भी बताया कि जिन स्कूलों के अपने पोर्टल हैं उन्हें भी अपनी फीस संरचना वहां दिखानी होगी ताकि अभिभावकों को सही और स्पष्ट जानकारी मिल सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह कदम बच्चों के अभिभावकों को सही जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि स्कूलों द्वारा फीस की अवैध वृद्धि नहीं की जा सके और पारदर्शिता बनी रहे।

  • MP: IAS संतोष वर्मा पर एक्शन…. सीएम के निर्देश पर पदों से हटाया, बर्खास्तगी की तैयारी

    MP: IAS संतोष वर्मा पर एक्शन…. सीएम के निर्देश पर पदों से हटाया, बर्खास्तगी की तैयारी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने ‘मर्यादाविहीन’ टिप्पणियों (‘Indecent’ comments.) से चर्चा में आए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी संतोष वर्मा (IAS Santosh Verma) पर ‘डबल ऐक्शन’ लिया है। राज्य सरकार ने एक ओर जहां संतोष वर्मा को कृषि विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी पद से हटा (Removed post Deputy Secretary Agriculture Department) दिया है। वहीं, केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजकर संतोष वर्मा को आईएएस सेवा से बर्खास्त करने की भी सिफारिश की है। उन पर फर्जी तरीके से आईएएस में प्रमोशन पाने का आरोप है।

    एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इसके साथ ही मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग (जीडीए) ने संतोष वर्मा को कृषि विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी पद से हटाकर बिना विभाग और बिना कार्य के जीडीए से ‘अटैच’ कर दिया है।


    क्या है विवाद

    दरअसल, संतोष वर्मा ने 23 नवंबर को भोपाल में एक कार्यक्रम में एक विवादित बयान देते हुए कहा था, ‘‘जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान न कर दे तब तक आरक्षण मिलना चाहिए।’’ उनके इस बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ और फिर ब्राह्मण समाज में आक्रोश फैल गया। वर्मा की इस टिप्पणी के बाद से प्रदेश ही नहीं देशभर में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही थी।

    यही नहीं, संतोष वर्मा की टिप्पणी से आक्रोशित 65 ब्राह्मण संगठन एकजुट हो गए और उन्होंने शुक्रवार को मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन करने और 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का ऐलान कर दिया और साथ ही कहा कि इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश बंद की तैयारी की जाएगी।


    हाईकोर्ट पर भी थी टिप्पणी

    इस बीच, संतोष वर्मा की एक और टिप्पणी ने उस वक्त आग में घी डालने का काम किया जब उन्होंने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह कहा कि ‘‘एसटी वर्ग के बच्चों को सिविल जज कोई और नहीं, बल्कि हाईकोर्ट नहीं बनने दे रहा है… यही हाईकोर्ट है, जिससे हम संविधान के पालन की गारंटी मांगते हैं।’’

    उनकी इस टिप्पणी से जुड़ा वीडियो सामने आते ही विवाद और भड़क गया और सरकार पर दबाव बढ़ा। इसके बाद एक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संतोष वर्मा प्रकरण का संज्ञान लेते हुए जीएडी को सख्त कारवाई के निर्देश दिए। बयान में कहा गया कि संतोष वर्मा ने राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए प्रमोशन फर्जी और जाली आदेश तैयार कर लिया और उनके खिलाफ विभिन्न अदालतों में आपराधिक प्रकरण लंबित है।

    बयान में कहा गया, “फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी के आधार पर ली गई आईएएस की पदोन्नति गलत है। अतः आईएएस से बर्खास्त करने का प्रस्ताव केन्द्र शासन को प्रेषित किया जा रहा है।” इसके कुछ देर बाद ही सरकार ने गुरुवार को केंद्र को यह प्रस्ताव भेज दिया। सरकार ने कहा कि वर्मा के विरुद्ध जाली और फर्जी दस्तावेज के आधार पर संनिष्ठा प्रमाण पत्र प्राप्त करने के आरोप के लिए विभागीय जांच अंतिम स्तर पर है और वर्तमान प्रकरण में उनके द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र का प्रस्तुत जबाव संतोषजनक नहीं है।

    सरकार ने कहा कि उनके द्वारा सतत मर्यादा विहीन बयान जारी किए जा रहे हैं, अतः उन्हें ‘चार्जशीट’ जारी करने का निर्णय लिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड तो कर सकती हैं, लेकिन उन्हें बर्खास्त नहीं कर सकती क्योंकि यह शक्ति केन्द्र सरकार के पास होती है, जो राष्ट्रपति के द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के बाद लागू होती है।

    अधिकारियों का कहना है, “MP सरकार ने MP कैडर के IAS अधिकारी संतोष वर्मा को एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के डिप्टी सेक्रेटरी के पद से हटा दिया है, क्योंकि यह पाया गया कि वह धोखाधड़ी से IAS अधिकारी बने थे।” “संतोष वर्मा के खिलाफ जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर कथित तौर पर इंटीग्रिटी सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए डिपार्टमेंटल जांच अपने आखिरी स्टेज में है।”

    “मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी मध्य प्रदेश के IAS अधिकारी संतोष वर्मा के ब्राह्मण समुदाय की बेटियों के बारे में दिए गए विवादित बयान पर संज्ञान लिया। उन्होंने GAD को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।”