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  • मध्य प्रदेश में 32 IAS अधिकारियों के तबादले, जिला पंचायत CEO से नगर निगम आयुक्त तक बदली प्रशासनिक जिम्मेदारियां

    मध्य प्रदेश में 32 IAS अधिकारियों के तबादले, जिला पंचायत CEO से नगर निगम आयुक्त तक बदली प्रशासनिक जिम्मेदारियां

    मध्य प्रदेश :  में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के 32 अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में मंत्रालय से लेकर जिलों के मैदानी प्रशासन तक कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। इस फेरबदल में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, नगर निगम आयुक्तों, अपर कलेक्टरों और अनुविभागीय अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है।

    नए आदेश के तहत नगर निगम और विकास प्राधिकरण के स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। धार जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक चौधरी को ग्वालियर नगर निगम का आयुक्त बनाया गया है। दतिया जिला पंचायत के सीईओ अक्षय कुमार तेम्रवाल को भोपाल नगर निगम में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है।

    सतना नगर निगम के आयुक्त पद पर डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा को पदस्थ किया गया है। उन्हें सतना स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। वहीं विवेक के.व्ही. को जबलपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    जिला पंचायत स्तर पर भी व्यापक बदलाव किया गया है। ग्वालियर नगर निगम आयुक्त रहे संघ प्रिय को सिंगरौली जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। सिंगरौली के सीईओ जगदीश कुमार गोमे को सागर जिला पंचायत की जिम्मेदारी दी गई है। देवास जिला पंचायत के सीईओ पद पर नवीत कुमार धुर्वे की पदस्थापना की गई है।

    खंडवा में अपर कलेक्टर रहीं सृष्टि देशमुख गौड़ा को रीवा जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। अभिषेक सराफ को सीधी, सौम्या आनंद को खंडवा, ऐश्वर्य वर्मा को श्योपुर और आशीष को टीकमगढ़ जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया है। इसके अलावा अर्पित गुप्ता को बड़वानी और तनुश्री मीणा को बालाघाट जिला पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    प्रशासनिक फेरबदल का असर मंत्रालय स्तर पर भी दिखाई दिया है। संजना जैन को जल संसाधन विभाग में उप सचिव, ज्योति शर्मा को मध्य प्रदेश शासन में उप सचिव, अंजली जोसेफ जोनाथन को लोक निर्माण विभाग में उप सचिव और अनिल कुमार डामोर को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव पद पर पदस्थ किया गया है। कार्तिकेय जायसवाल, विशाल धाकड़ और सोनाली देव को भी उप सचिव, मध्य प्रदेश शासन की जिम्मेदारी दी गई है।

    मैदानी प्रशासन में भी कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं। काजल जावला को राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल में अपर मिशन संचालक बनाया गया है। श्रद्धा शुक्ला को खंडवा का अपर कलेक्टर पद सौंपा गया है। इसके अलावा विभिन्न जिलों में राजस्व एसडीओ के पदों पर भी नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

    आशीष कुमार को बीना, अनिकेत शांडिल्य को बैहर, आकाश अग्रवाल को मझौली और पाटिल आशीष अशोक को कुक्षी का एसडीओ राजस्व बनाया गया है। सुशिर श्रीकृष्ण श्रीराम को देवसर, कुलदीप पटेल को बिछिया, जामदार फरहान इरफान को शहपुरा, ठाकरे ऋषिकेष विजय को बिजावर और नवकिरण कौर को डबरा का एसडीओ राजस्व नियुक्त किया गया है।

    राज्य सरकार के आदेश के अनुसार सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी नई पदस्थापना पर शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक फेरबदल को जिलों और स्थानीय निकायों में कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने तथा विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों को नए सिरे से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

  • खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    मध्य प्रदेश: के खंडवा जिले में नगर निगम द्वारा संचालित श्वान बधियाकरण कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अनोखा प्रदर्शन करने वाले एक युवक ने अब अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान डॉग मास्क पहनकर पहुंचे इस युवक का वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था। प्रदर्शन के इस चर्चित तरीके के बाद अब पीड़ित युवक अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा होने की बात कह रहा है।

    पूरा मामला खंडवा नगर निगम में कथित तौर पर हुए लाखों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। आरोप है कि श्वान बधियाकरण केंद्र के संचालन और आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए विपक्षी जनप्रतिनिधि उस युवक को कलेक्ट्रेट में अधिकारियों की टेबल तक ले गए थे। हालांकि इस मामले पर नगर निगम प्रशासन ने अपना स्पष्टीकरण जारी करते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है और ई-टेंडरिंग के जरिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होने का दावा किया है।

    प्रदर्शन के बाद से युवक इस कदर भयभीत है कि वह अपना चेहरा और पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहता। युवक का मानना है कि जिन लोगों के खिलाफ यह आवाज उठाई गई है, वे उसे या उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि उसे इस बात का भरोसा भी है कि इस अनोखे कदम के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले का संज्ञान लिया जाएगा, निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    इस अनूठे प्रदर्शन को लेकर स्थानीय राजनीति भी गरमा गई है। सत्ता पक्ष ने इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया करार दिया है, जबकि अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसे आधुनिक दौर यानी ‘जेन-जी’ शैली का विरोध प्रदर्शन बताते हुए इसका बचाव किया है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला पूरे देश में चर्चा और बहस का केंद्र बन गया है, जिसमें आवारा कुत्तों की समस्या और पशु अधिकारों को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार जिले में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। खंडवा के शासकीय अस्पताल के रेबीज नियंत्रण विभाग के मुताबिक बीते महीनों में सैकड़ों मामले दर्ज किए गए हैं, हालांकि सरकारी रेबीज नियंत्रण कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के चलते पिछले कुछ वर्षों में किसी भी मरीज की जान जाने की खबर नहीं है और पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया गया है।

    खंडवा में हुए इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नागरिकों की सुरक्षा के सवाल को एक बार फिर सामने ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रदर्शनकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • भोपाल के पनिया गांव में स्वतंत्रता दिवस पर कीचड़ भरे रास्ते से तिरंगा लेकर स्कूल पहुंचे बच्चे, जर्जर भवन से गिरा प्लास्टर

    भोपाल के पनिया गांव में स्वतंत्रता दिवस पर कीचड़ भरे रास्ते से तिरंगा लेकर स्कूल पहुंचे बच्चे, जर्जर भवन से गिरा प्लास्टर

    भोपाल। देश भर में स्वतंत्रता दिवस का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। इस राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर शैक्षणिक संस्थानों में ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। हालांकि, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे एक ग्रामीण क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों ने प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था और तटीय व ग्रामीण बुनियादी ढांचे की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोपाल जिले की बैरसिया तहसील के पनिया गांव में स्कूली छात्र हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे अत्यंत कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए विद्यालय पहुंचे। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण स्कूल तक पहुंचने वाला मार्ग पूरी तरह से कीचड़ और जलभराव में तब्दील हो चुका था। छोटे-छोटे बच्चों को इसी दुर्गम रास्ते से गुजरकर ध्वजारोहण समारोह में भाग लेने के लिए जाना पड़ा।

    परेशानियों का सिलसिला केवल खराब रास्ते तक ही सीमित नहीं रहा। जब छात्र विद्यालय परिसर में पहुंचे, तो वहां जर्जर भवन की खतरनाक स्थिति सामने आई। विद्यालय के एक कमरे की छत का प्लास्टर टूटकर जमीन पर गिर गया, जिससे वहां उपस्थित लोगों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। इस प्रकार की स्थिति में दैनिक रूप से पठन-पाठन कार्य संचालित होना बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम माना जा रहा है।

    तमाम विपरीत परिस्थितियों और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के बावजूद विद्यार्थियों के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिली। छात्रों ने अनुशासित रूप से पंक्तिबद्ध होकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगान का गायन किया। बच्चों के चेहरे पर देशभक्ति का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था, जबकि पृष्ठभूमि में जर्जर इमारत और कीचड़युक्त परिसर व्यवस्थागत कमियों को उजागर कर रहा था।

    मध्य प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून के मौसम के दौरान इस प्रकार की समस्याएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ग्रामीण इलाकों में पक्के संपर्कों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पनिया गांव की यह घटना यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर मूलभूत सुविधाओं का विकास अभी भी एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बना हुआ है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तरीय वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनाक्रम पर संज्ञान लेने की बात कही है। जिला कलेक्टर ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और आश्वस्त किया है कि संबंधित विभाग के माध्यम से विद्यालय भवन की मरम्मत तथा पहुंच मार्ग को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय निवासियों ने भी प्रशासन से शीघ्र अति शीघ्र नए भवन और पक्की सड़क की मांग की है।

    स्थानीय समुदाय का मानना है कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और सुरक्षा के लिए सुरक्षित कक्षाएं, पेयजल और पक्के पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जर्जर इमारतों की समय पर मरम्मत न होने से कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

    फिलहाल, इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। देखना होगा कि प्रशासनिक आश्वासन के बाद पनिया गांव के इस प्राथमिक विद्यालय का जीर्णोद्धार कब तक पूरा हो पाता है और छात्रों को एक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण कब उपलब्ध कराया जाता है।

  • महाकाल परिसर के नागचंद्रेश्वर मंदिर में अचानक मची अफरातफरी, दो श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती, स्थिति संभालने में जुटा प्रशासन

    महाकाल परिसर के नागचंद्रेश्वर मंदिर में अचानक मची अफरातफरी, दो श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती, स्थिति संभालने में जुटा प्रशासन

    मध्य प्रदेश। के उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में सोमवार को श्रद्धालुओं के बीच अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया और कई श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लोगों के बीच फैली अफवाह को इस स्थिति की वजह बताया जा रहा है।

    घटना महाकाल परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में उस समय हुई, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए मौजूद थे। अचानक कुछ लोगों के बीच अफवाह फैलने के बाद भीड़ में हलचल बढ़ गई। देखते ही देखते श्रद्धालुओं में आगे निकलने और सुरक्षित स्थान की ओर जाने की कोशिश शुरू हो गई, जिससे स्थिति बिगड़ गई।

    भगदड़ जैसी स्थिति बनने के दौरान कई श्रद्धालु गिर गए और उन्हें चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलते ही मंदिर प्रबंधन और प्रशासन भी सक्रिय हो गया तथा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई।

    उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि महाकालेश्वर नागचंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बनने के बाद लोगों के घायल होने की खबर है। उन्होंने बताया कि दो लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस और प्रशासन की ओर से घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    प्रारंभिक तौर पर अफवाह को घटना की वजह माना जा रहा है, हालांकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। भीड़ के बीच किसी भी तरह की अफवाह तेजी से फैलने पर ऐसी परिस्थितियां गंभीर रूप ले सकती हैं। इसी वजह से मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं को संयम बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था के निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया जा रहा है।

    घटना के बाद महाकाल परिसर में प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सतर्कता बढ़ा दी है। भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की प्राथमिकता घायलों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ परिसर में सामान्य स्थिति बनाए रखना है।

    नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के महाकाल परिसर का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान भीड़ प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी अफवाह या अचानक पैदा हुई स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और सुरक्षा कर्मचारियों को लगातार निगरानी रखनी पड़ती है।

    फिलहाल घटना में घायल श्रद्धालुओं की स्थिति और घायलों की कुल संख्या को लेकर विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। प्रशासन की ओर से घटना के कारणों और पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। जैसे-जैसे आधिकारिक स्तर पर और तथ्य सामने आएंगे, घटना की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

    इस घटना ने धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और अफवाहों पर तत्काल नियंत्रण की आवश्यकता को एक बार फिर सामने ला दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की ओर से परिसर में निगरानी और व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • मप्र में प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह को मिला तीन अहम विभागों का अतिरिक्त प्रभार

    मप्र में प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह को मिला तीन अहम विभागों का अतिरिक्त प्रभार

    भोपाल, 24 जुलाई। मध्य प्रदेश शासन ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह (बैच 1997) को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपते हुए बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश के अनुसार, सुखबीर सिंह को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ आगामी आदेश तक लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग तथा आयुक्त, खाद्य सुरक्षा, मध्यप्रदेश का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

    आदेश के मुताबिक, सुखबीर सिंह वर्तमान में प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग के रूप में कार्यरत हैं। अब वे अपने मौजूदा दायित्वों के साथ इन तीन महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार भी संभालेंगे। यह व्यवस्था आगामी आदेश जारी होने तक प्रभावी रहेगी। वर्तमान में प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह लोक निर्माण विभाग संभाल रहे हैं।
  • जनता दर्शन में सीएम योगी का बड़ा संदेश, इलाज से लेकर शिकायतों तक हर समस्या के समाधान का दिया भरोसा

    जनता दर्शन में सीएम योगी का बड़ा संदेश, इलाज से लेकर शिकायतों तक हर समस्या के समाधान का दिया भरोसा

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जन समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक नागरिक की समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और प्रशासन को पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता तथा तत्परता के साथ कार्य करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को न्याय और राहत समय पर मिल सके।

    गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों से मुलाकात की। उन्होंने एक-एक कर लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी पीड़ित व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और हर मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर समाधान किया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से राजस्व और पुलिस विभाग से जुड़े मामलों पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि लोगों की शिकायतें अनावश्यक रूप से लंबित न रहें। पारिवारिक विवादों के मामलों में उन्होंने पहले आपसी संवाद और समझौते के प्रयास करने तथा आवश्यकता पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया अपनाने की बात कही। उनका कहना था कि हर शिकायत का समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे संबंधित व्यक्ति पूरी तरह संतुष्ट महसूस करे।

    जनता दर्शन में कई ऐसे लोग भी पहुंचे जिन्होंने गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें भरोसा दिलाया कि आर्थिक अभाव के कारण किसी भी जरूरतमंद का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र मरीजों के इलाज का अनुमानित खर्च जल्द तैयार कर शासन को भेजा जाए, ताकि आवश्यक धनराशि समय पर उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार गंभीर बीमारियों के उपचार में हरसंभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि सभी पात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड समय पर बनाए जाएं, जिससे जरूरत पड़ने पर उन्हें सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी मामलों में किसी भी जरूरतमंद को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए और प्रशासन को इस दिशा में पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करना चाहिए।

    गोरखपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने सुबह गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरखनाथ का दर्शन और पूजन किया तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गोशाला पहुंचे, जहां उन्होंने गायों और गोवंश को गुड़ खिलाया तथा उनकी देखभाल कर रहे कर्मचारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने गोवंश के बेहतर संरक्षण और देखभाल के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

    मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही या उदासीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा।

  • जब सड़कें और पुल बह गए तो हाथियों ने संभाली जिम्मेदारी, अरुणाचल के बाढ़ प्रभावित गांवों तक राहत पहुंचाने की बनी अनोखी जीवनरेखा

    जब सड़कें और पुल बह गए तो हाथियों ने संभाली जिम्मेदारी, अरुणाचल के बाढ़ प्रभावित गांवों तक राहत पहुंचाने की बनी अनोखी जीवनरेखा

    नई दिल्ली । अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। लगातार बारिश और फ्लैश फ्लड के कारण कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह टूट गया। ऐसे हालात में प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने राहत पहुंचाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया है, जिसने संकट की घड़ी में मानव और प्रकृति के सहयोग की मिसाल पेश की है। दुर्गम इलाकों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए हाथियों की मदद ली जा रही है।

    बाढ़ का सबसे अधिक असर नारी-कोयू विधानसभा क्षेत्र के कोयू सर्कल के गांवों पर पड़ा है। यहां सड़क संपर्क टूटने के कारण सामान्य वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। कई गांवों तक न तो खाद्यान्न पहुंच पा रहा था और न ही दवाइयों तथा ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति संभव हो रही थी। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों का संकट गहराने लगा।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने स्थानीय समुदाय के सहयोग से हाथियों के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की। हाथियों की पीठ पर राशन, दवाइयां, ईंधन और अन्य जरूरी सामान लादकर उन रास्तों से भेजा जा रहा है, जहां वाहन तो दूर, कई स्थानों पर पैदल पहुंचना भी बेहद कठिन है। पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप चलने की उनकी क्षमता राहत कार्यों में बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

    यह अभियान आसान नहीं है। हाथियों को तेज बहाव वाली नदियों, कीचड़ से भरे रास्तों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी मार्गों और बड़े-बड़े पत्थरों के बीच कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। इसके बावजूद राहत कार्य लगातार जारी है। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी गांव में आवश्यक वस्तुओं की कमी न होने पाए और सभी प्रभावित परिवारों तक समय पर मदद पहुंच सके।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाथियों की सहायता नहीं ली जाती तो कई गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता। कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह बह चुकी हैं और अस्थायी रास्ते भी सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में हाथी ही एकमात्र भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरे हैं, जिनकी मदद से लगातार राहत सामग्री गांवों तक पहुंच रही है। इससे सैकड़ों लोगों को भोजन, दवा और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं।

    प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वैकल्पिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग किस तरह राहत कार्यों को गति दे सकता है, इसका यह उदाहरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के साथ ग्रामीणों की भागीदारी और प्रशिक्षित हाथियों का सहयोग राहत अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकता है।

    अरुणाचल प्रदेश में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत की दिशा में भी काम शुरू किया गया है, ताकि जल्द से जल्द गांवों का संपर्क फिर से स्थापित हो सके। तब तक हाथियों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने का यह अभियान प्रभावित लोगों के लिए उम्मीद की सबसे मजबूत कड़ी बना हुआ है। यह पहल केवल राहत वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि कठिन समय में मानव, स्थानीय समुदाय और प्रकृति के बीच सहयोग की प्रेरक मिसाल भी प्रस्तुत करती है।

  • उज्जैन में दो मंजिला मकान भरभराकर ढहा, मलबे में दबकर किशोर की मौत; पांच गंभीर, निर्माण कार्य पर उठे सवाल

    उज्जैन में दो मंजिला मकान भरभराकर ढहा, मलबे में दबकर किशोर की मौत; पांच गंभीर, निर्माण कार्य पर उठे सवाल

     मध्य प्रदेश:  के उज्जैन जिले में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। शहर के जीवाजीगंज थाना क्षेत्र स्थित हम्मालवाड़ी इलाके में एक दो मंजिला रिहायशी मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान गिरते ही आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे में एक 15 वर्षीय किशोर की मलबे में दबने से मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह का समय होने के कारण मकान के भीतर कई लोग मौजूद थे। अचानक तेज आवाज के साथ पूरी इमारत जमींदोज हो गई। मकान के गिरते ही आसपास रहने वाले लोगों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय नागरिकों ने मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया और प्रशासन को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस और राहत दल भी मौके पर पहुंच गए।

    जानकारी के अनुसार हादसे के समय मकान के भीतर कुल आठ लोग मौजूद थे। मकान के ढहने से सभी लोग मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे में 15 वर्षीय अरशान कुरैशी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं खुर्शीद बी, इकलाश, फरान नाज, शेर मोहम्मद और परवीन बी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। आसपास के लोगों का कहना है कि मकान के गिरने की घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। तेज धमाके जैसी आवाज सुनकर लोग घरों से बाहर निकल आए और मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य में जुट गए। कई घंटों तक इलाके में लोगों की आवाजाही प्रभावित रही और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया।

    प्रारंभिक जांच में मकान ढहने के पीछे पड़ोस में चल रहे निर्माण कार्य को संभावित कारण माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार समीप स्थित एक भवन का निर्माण कार्य जारी था, जिसके कारण प्रभावित मकान की नींव पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हादसे के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा। विशेषज्ञों की टीम को भी घटनास्थल का निरीक्षण करने के लिए लगाया गया है।

    पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटाई है। आसपास के अन्य मकानों की स्थिति का भी आकलन किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी संभावित खतरे को रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    उज्जैन में हुए इस हादसे ने एक बार फिर पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा, निर्माण कार्यों की निगरानी तथा शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण संबंधी नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन राहत कार्य, घायलों के उपचार और घटना के कारणों की जांच पर प्राथमिकता से काम कर रहा है।

  • ओंकारेश्वर झूला पुल पर बढ़ा सुरक्षा संकट, लोडिंग तार की कड़ी टूटने के बाद आवागमन पूरी तरह बंद, तीन दिन तक जारी रह सकता है मरम्मत कार्य

    ओंकारेश्वर झूला पुल पर बढ़ा सुरक्षा संकट, लोडिंग तार की कड़ी टूटने के बाद आवागमन पूरी तरह बंद, तीन दिन तक जारी रह सकता है मरम्मत कार्य

     मध्य प्रदेश:  के खंडवा जिले स्थित ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में उस समय प्रशासनिक सतर्कता बढ़ गई जब ओंकारेश्वर और ममलेश्वर को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण झूला पुल के लोडिंग तार की एक कड़ी क्षतिग्रस्त पाई गई। तकनीकी खराबी सामने आने के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा कदम उठाते हुए पुल पर सभी प्रकार की आवाजाही को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुल के दोनों ओर स्थित प्रवेश द्वारों पर ताले लगा दिए गए हैं तथा किसी भी व्यक्ति को पुल पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

    यह झूला पुल नर्मदा नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क माध्यम माना जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और पर्यटक इस पुल का उपयोग करते हैं। ऐसे में पुल के तार में आई तकनीकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए तत्काल प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पुल की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना उसे दोबारा चालू नहीं किया जाएगा।

    घटना की जानकारी मिलते ही तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पुल का विस्तृत निरीक्षण शुरू कर दिया। प्रारंभिक जांच में लोडिंग तार की एक कड़ी टूटने की पुष्टि हुई है। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सुधार की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मरम्मत कार्य और सुरक्षा परीक्षण में लगभग तीन दिन का समय लग सकता है। इस दौरान पुल पूरी तरह बंद रहेगा।

    प्रशासन ने पुल के दोनों छोर पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी कर दी है ताकि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न कर सके। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को वैकल्पिक मार्गों के उपयोग की सलाह दी गई है। नर्मदा नदी पार करने के लिए पुराने पुल तथा नाव सेवा का उपयोग किया जा सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना सभी के हित में है।

    ओंकारेश्वर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। विशेष अवसरों और धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां आने वाले लोगों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में झूला पुल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह दोनों धार्मिक स्थलों के बीच सुगम संपर्क उपलब्ध कराता है। पुल के अस्थायी रूप से बंद होने से यात्रियों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

    गौरतलब है कि नर्मदा नदी पर निर्मित यह झूला पुल वर्ष 2004 में लगभग 7.20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। पिछले दो दशकों में यह पुल ओंकारेश्वर और ममलेश्वर के बीच आवागमन का प्रमुख साधन बन चुका है। इससे पहले वर्ष 2023 में भी पुल के एक तार में खराबी सामने आई थी, जिसके बाद आवश्यक मरम्मत कर इसे पुनः चालू किया गया था।

    वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद पुल की व्यापक तकनीकी जांच की जाएगी। सभी सुरक्षा मानकों पर संतोषजनक रिपोर्ट मिलने के बाद ही इसे आम लोगों के लिए दोबारा खोला जाएगा। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता पुल की संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करना और किसी भी संभावित जोखिम को पूरी तरह समाप्त करना है।

  • PoK में उबाल बरकरार, मौतों और कार्रवाई के बावजूद नहीं थमा आंदोलन; सीमाओं पर राशन ट्रकों की रोक से बढ़ा विवाद

    PoK में उबाल बरकरार, मौतों और कार्रवाई के बावजूद नहीं थमा आंदोलन; सीमाओं पर राशन ट्रकों की रोक से बढ़ा विवाद


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी जनआंदोलन लगातार व्यापक रूप लेता दिखाई दे रहा है। क्षेत्र में विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हजारों लोग अब भी आंदोलन स्थलों पर डटे हुए हैं। रावलकोट सहित कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों की बड़ी मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि प्रशासनिक दबाव और सुरक्षा कार्रवाइयों के बावजूद आंदोलन की तीव्रता कम नहीं हुई है।

    स्थानीय स्तर पर सक्रिय संगठनों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि क्षेत्र में लोगों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित की जा रही है। उनका दावा है कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों से आटा, चावल, फल, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री लेकर आने वाले कई ट्रकों को विभिन्न प्रवेश बिंदुओं पर रोका गया है। आरोप है कि इन वाहनों को क्षेत्र के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे स्थानीय आबादी के बीच चिंता बढ़ रही है।

    बताया जा रहा है कि विभिन्न सीमावर्ती मार्गों पर बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन कई दिनों से खड़े हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित रहती है तो इसका असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ सकता है। हालांकि इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    क्षेत्र में जारी आंदोलन की पृष्ठभूमि पिछले कुछ सप्ताह की घटनाओं से जुड़ी हुई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन से जुड़े कई लोगों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा कठोर कार्रवाई की गई, जिसके बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। विभिन्न स्थानों पर हुई झड़पों और गोलीबारी की घटनाओं को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की खबरों ने पूरे क्षेत्र में असंतोष को और बढ़ा दिया है।

    रावलकोट में आयोजित मुख्य प्रदर्शन स्थल आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। लगातार बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में लोग वहां मौजूद हैं। महिलाओं, युवाओं और स्थानीय समुदायों की भागीदारी ने आंदोलन को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया है। प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों और मांगों को लेकर लगातार नारेबाजी और सभाएं आयोजित कर रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही आर्थिक, प्रशासनिक और प्रतिनिधित्व संबंधी शिकायतों ने मौजूदा आंदोलन को गति दी है। यदि संवाद और समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और जटिल हो सकती है। ऐसे आंदोलनों में जनभागीदारी बढ़ने पर प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ जनभावनाओं को समझने की चुनौती भी खड़ी हो जाती है।

    दूसरी ओर, क्षेत्र की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है। मानवाधिकार, नागरिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दे ऐसे हालात में प्रमुख चर्चा का विषय बन जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तनावग्रस्त क्षेत्र में स्थायी समाधान के लिए संवाद, पारदर्शिता और नागरिक हितों को प्राथमिकता देना आवश्यक होता है।

    फिलहाल रावलकोट और आसपास के क्षेत्रों में आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्षों के बीच किसी संवाद प्रक्रिया की शुरुआत होती है या नहीं, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियां क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।