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  • उज्जैन में दो मंजिला मकान भरभराकर ढहा, मलबे में दबकर किशोर की मौत; पांच गंभीर, निर्माण कार्य पर उठे सवाल

    उज्जैन में दो मंजिला मकान भरभराकर ढहा, मलबे में दबकर किशोर की मौत; पांच गंभीर, निर्माण कार्य पर उठे सवाल

     मध्य प्रदेश:  के उज्जैन जिले में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। शहर के जीवाजीगंज थाना क्षेत्र स्थित हम्मालवाड़ी इलाके में एक दो मंजिला रिहायशी मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान गिरते ही आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे में एक 15 वर्षीय किशोर की मलबे में दबने से मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह का समय होने के कारण मकान के भीतर कई लोग मौजूद थे। अचानक तेज आवाज के साथ पूरी इमारत जमींदोज हो गई। मकान के गिरते ही आसपास रहने वाले लोगों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय नागरिकों ने मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया और प्रशासन को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस और राहत दल भी मौके पर पहुंच गए।

    जानकारी के अनुसार हादसे के समय मकान के भीतर कुल आठ लोग मौजूद थे। मकान के ढहने से सभी लोग मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे में 15 वर्षीय अरशान कुरैशी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं खुर्शीद बी, इकलाश, फरान नाज, शेर मोहम्मद और परवीन बी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। आसपास के लोगों का कहना है कि मकान के गिरने की घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। तेज धमाके जैसी आवाज सुनकर लोग घरों से बाहर निकल आए और मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य में जुट गए। कई घंटों तक इलाके में लोगों की आवाजाही प्रभावित रही और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया।

    प्रारंभिक जांच में मकान ढहने के पीछे पड़ोस में चल रहे निर्माण कार्य को संभावित कारण माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार समीप स्थित एक भवन का निर्माण कार्य जारी था, जिसके कारण प्रभावित मकान की नींव पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हादसे के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा। विशेषज्ञों की टीम को भी घटनास्थल का निरीक्षण करने के लिए लगाया गया है।

    पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटाई है। आसपास के अन्य मकानों की स्थिति का भी आकलन किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी संभावित खतरे को रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    उज्जैन में हुए इस हादसे ने एक बार फिर पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा, निर्माण कार्यों की निगरानी तथा शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण संबंधी नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन राहत कार्य, घायलों के उपचार और घटना के कारणों की जांच पर प्राथमिकता से काम कर रहा है।

  • ओंकारेश्वर झूला पुल पर बढ़ा सुरक्षा संकट, लोडिंग तार की कड़ी टूटने के बाद आवागमन पूरी तरह बंद, तीन दिन तक जारी रह सकता है मरम्मत कार्य

    ओंकारेश्वर झूला पुल पर बढ़ा सुरक्षा संकट, लोडिंग तार की कड़ी टूटने के बाद आवागमन पूरी तरह बंद, तीन दिन तक जारी रह सकता है मरम्मत कार्य

     मध्य प्रदेश:  के खंडवा जिले स्थित ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में उस समय प्रशासनिक सतर्कता बढ़ गई जब ओंकारेश्वर और ममलेश्वर को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण झूला पुल के लोडिंग तार की एक कड़ी क्षतिग्रस्त पाई गई। तकनीकी खराबी सामने आने के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा कदम उठाते हुए पुल पर सभी प्रकार की आवाजाही को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुल के दोनों ओर स्थित प्रवेश द्वारों पर ताले लगा दिए गए हैं तथा किसी भी व्यक्ति को पुल पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

    यह झूला पुल नर्मदा नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क माध्यम माना जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और पर्यटक इस पुल का उपयोग करते हैं। ऐसे में पुल के तार में आई तकनीकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए तत्काल प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पुल की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना उसे दोबारा चालू नहीं किया जाएगा।

    घटना की जानकारी मिलते ही तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पुल का विस्तृत निरीक्षण शुरू कर दिया। प्रारंभिक जांच में लोडिंग तार की एक कड़ी टूटने की पुष्टि हुई है। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सुधार की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मरम्मत कार्य और सुरक्षा परीक्षण में लगभग तीन दिन का समय लग सकता है। इस दौरान पुल पूरी तरह बंद रहेगा।

    प्रशासन ने पुल के दोनों छोर पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी कर दी है ताकि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न कर सके। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को वैकल्पिक मार्गों के उपयोग की सलाह दी गई है। नर्मदा नदी पार करने के लिए पुराने पुल तथा नाव सेवा का उपयोग किया जा सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना सभी के हित में है।

    ओंकारेश्वर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। विशेष अवसरों और धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां आने वाले लोगों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में झूला पुल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह दोनों धार्मिक स्थलों के बीच सुगम संपर्क उपलब्ध कराता है। पुल के अस्थायी रूप से बंद होने से यात्रियों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

    गौरतलब है कि नर्मदा नदी पर निर्मित यह झूला पुल वर्ष 2004 में लगभग 7.20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। पिछले दो दशकों में यह पुल ओंकारेश्वर और ममलेश्वर के बीच आवागमन का प्रमुख साधन बन चुका है। इससे पहले वर्ष 2023 में भी पुल के एक तार में खराबी सामने आई थी, जिसके बाद आवश्यक मरम्मत कर इसे पुनः चालू किया गया था।

    वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद पुल की व्यापक तकनीकी जांच की जाएगी। सभी सुरक्षा मानकों पर संतोषजनक रिपोर्ट मिलने के बाद ही इसे आम लोगों के लिए दोबारा खोला जाएगा। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता पुल की संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करना और किसी भी संभावित जोखिम को पूरी तरह समाप्त करना है।

  • PoK में उबाल बरकरार, मौतों और कार्रवाई के बावजूद नहीं थमा आंदोलन; सीमाओं पर राशन ट्रकों की रोक से बढ़ा विवाद

    PoK में उबाल बरकरार, मौतों और कार्रवाई के बावजूद नहीं थमा आंदोलन; सीमाओं पर राशन ट्रकों की रोक से बढ़ा विवाद


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी जनआंदोलन लगातार व्यापक रूप लेता दिखाई दे रहा है। क्षेत्र में विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हजारों लोग अब भी आंदोलन स्थलों पर डटे हुए हैं। रावलकोट सहित कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों की बड़ी मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि प्रशासनिक दबाव और सुरक्षा कार्रवाइयों के बावजूद आंदोलन की तीव्रता कम नहीं हुई है।

    स्थानीय स्तर पर सक्रिय संगठनों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि क्षेत्र में लोगों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित की जा रही है। उनका दावा है कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों से आटा, चावल, फल, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री लेकर आने वाले कई ट्रकों को विभिन्न प्रवेश बिंदुओं पर रोका गया है। आरोप है कि इन वाहनों को क्षेत्र के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे स्थानीय आबादी के बीच चिंता बढ़ रही है।

    बताया जा रहा है कि विभिन्न सीमावर्ती मार्गों पर बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन कई दिनों से खड़े हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित रहती है तो इसका असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ सकता है। हालांकि इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    क्षेत्र में जारी आंदोलन की पृष्ठभूमि पिछले कुछ सप्ताह की घटनाओं से जुड़ी हुई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन से जुड़े कई लोगों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा कठोर कार्रवाई की गई, जिसके बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। विभिन्न स्थानों पर हुई झड़पों और गोलीबारी की घटनाओं को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की खबरों ने पूरे क्षेत्र में असंतोष को और बढ़ा दिया है।

    रावलकोट में आयोजित मुख्य प्रदर्शन स्थल आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। लगातार बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में लोग वहां मौजूद हैं। महिलाओं, युवाओं और स्थानीय समुदायों की भागीदारी ने आंदोलन को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया है। प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों और मांगों को लेकर लगातार नारेबाजी और सभाएं आयोजित कर रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही आर्थिक, प्रशासनिक और प्रतिनिधित्व संबंधी शिकायतों ने मौजूदा आंदोलन को गति दी है। यदि संवाद और समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और जटिल हो सकती है। ऐसे आंदोलनों में जनभागीदारी बढ़ने पर प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ जनभावनाओं को समझने की चुनौती भी खड़ी हो जाती है।

    दूसरी ओर, क्षेत्र की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है। मानवाधिकार, नागरिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दे ऐसे हालात में प्रमुख चर्चा का विषय बन जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तनावग्रस्त क्षेत्र में स्थायी समाधान के लिए संवाद, पारदर्शिता और नागरिक हितों को प्राथमिकता देना आवश्यक होता है।

    फिलहाल रावलकोट और आसपास के क्षेत्रों में आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्षों के बीच किसी संवाद प्रक्रिया की शुरुआत होती है या नहीं, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियां क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।

  • आईएएस अवि प्रसाद की तीसरी शादी चर्चा में, प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अंकिता धाकरे संग बंधे विवाह बंधन में, पहली दो पत्नियां भी हैं वरिष्ठ अफसर

    आईएएस अवि प्रसाद की तीसरी शादी चर्चा में, प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अंकिता धाकरे संग बंधे विवाह बंधन में, पहली दो पत्नियां भी हैं वरिष्ठ अफसर

    मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अवि प्रसाद एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। प्रशासनिक सेवा में अपनी कार्यशैली और विभिन्न जिम्मेदारियों के लिए पहचाने जाने वाले अवि प्रसाद ने हाल ही में प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अंकिता धाकरे के साथ विवाह किया है। यह उनकी तीसरी शादी है, जिसके बाद उनका नाम एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।

    अवि प्रसाद वर्तमान में मध्य प्रदेश रोजगार गारंटी परिषद में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। प्रशासनिक सेवा में उनके अनुभव और विभिन्न जिलों में निभाई गई जिम्मेदारियों ने उन्हें राज्य के प्रमुख अधिकारियों में शामिल किया है। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले अवि प्रसाद ने सिविल सेवा में आने से पहले भी महत्वपूर्ण पेशेवर जिम्मेदारियां संभाली थीं और बाद में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया।

    उनकी निजी जिंदगी का सफर भी उतना ही चर्चित रहा है जितना उनका प्रशासनिक करियर। उनकी पहली शादी 2014 बैच की आईएएस अधिकारी रिजु बाफना से हुई थी। हालांकि यह वैवाहिक संबंध अधिक समय तक नहीं चल सका और दोनों ने बाद में अलग होने का निर्णय लिया। प्रशासनिक सेवा में कार्यरत दोनों अधिकारियों ने अपने-अपने पेशेवर जीवन को आगे बढ़ाया और अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं।

    पहले वैवाहिक संबंध के समाप्त होने के बाद अवि प्रसाद ने दूसरी शादी आईएएस अधिकारी मिशा सिंह से की। यह विवाह भी प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों के बीच हुआ था और कुछ वर्षों तक दोनों साथ रहे। बताया जाता है कि इस दौरान मिशा सिंह ने अपना कैडर परिवर्तन कर मध्य प्रदेश में सेवाएं देना शुरू किया था। हालांकि समय के साथ यह संबंध भी आगे नहीं बढ़ सका और दोनों के रास्ते अलग हो गए।

    हाल ही में अवि प्रसाद ने तीसरी बार विवाह किया है। इस बार उनकी जीवनसंगिनी प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अंकिता धाकरे बनी हैं। अंकिता धाकरे राज्य मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हैं और प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। दोनों का विवाह फरवरी 2026 में आयोजित एक निजी समारोह में संपन्न हुआ। विवाह की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में इस संबंध को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

    अवि प्रसाद की पेशेवर यात्रा भी काफी उल्लेखनीय मानी जाती है। सिविल सेवा में आने से पहले उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर पहले पुलिस सेवा में स्थान प्राप्त किया। बाद में बेहतर रैंक हासिल करने के बाद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्य करते हुए अपनी पहचान बनाई।

    प्रशासनिक सेवा में कार्यरत अधिकारियों की निजी जिंदगी सामान्यतः सार्वजनिक चर्चा से दूर रहती है, लेकिन जब किसी अधिकारी का व्यक्तिगत जीवन असाधारण परिस्थितियों के कारण सुर्खियों में आता है तो लोगों की दिलचस्पी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। अवि प्रसाद के मामले में भी ऐसा ही देखने को मिला है, जहां उनके प्रशासनिक करियर के साथ-साथ उनके वैवाहिक जीवन को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा बनी हुई है।

    फिलहाल अवि प्रसाद और अंकिता धाकरे अपने-अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। वहीं उनकी यह नई वैवाहिक शुरुआत प्रशासनिक सेवा से जुड़े लोगों और आम नागरिकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।

  • श्योपुर में हड़कंप, दुकान विवाद में न्याय न मिलने पर बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट में की आत्मघाती कदम

    श्योपुर में हड़कंप, दुकान विवाद में न्याय न मिलने पर बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट में की आत्मघाती कदम

    श्योपुर । श्योपुर कलेक्ट्रेट में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां शिकायतों से परेशान एक बुजुर्ग ने सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली। गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    मृतक की पहचान देवेंद्र गोयल के रूप में हुई है, जो सब्जी मंडी क्षेत्र में दुकान के मालिक थे। बताया जा रहा है कि उनकी दुकान पर उनके ही परिवार के कुछ सदस्यों द्वारा कब्जा कर लिया गया था। इस मामले को लेकर वह लंबे समय से न्याय की गुहार लगा रहे थे।

    परिजनों और जानकारी के अनुसार, देवेंद्र गोयल ने 28 फरवरी को दुकान पर कब्जे की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद उन्होंने 2 मार्च से लेकर 26 मई तक कई बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन आरोप है कि उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे वे लगातार परेशान चल रहे थे।

    मंगलवार को वह अपनी समस्या लेकर श्योपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां जनसुनवाई चल रही थी। उस समय कलेक्टर शीला दाहिमा मौजूद नहीं थीं। डेप्युटी कलेक्टर देवेंद्र मीणा ने उनका आवेदन लिया। इसके बाद बाहर निकलते ही बुजुर्ग ने सल्फास खा लिया और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।

    घटना के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वह तीन बार जनसुनवाई में आ चुके हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई।

    बताया जा रहा है कि पहले उन्होंने पुलिस में भी शिकायत दी थी, लेकिन मामला राजस्व विभाग से जुड़ा होने के कारण उन्हें वहां भेज दिया गया था। इसके बाद से वह लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। इस घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

  • लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर जारी विवाद

    लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर जारी विवाद



    नई दिल्ली। एक बार फिर तनाव का कारण बन गया है। स्थानीय स्तर पर इस स्थल को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिनकी वजह से इलाके में सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता बढ़ गई है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन सख्त कदम उठाते हुए किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन पर रोक लगा दी है और पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, मंगलवार को कुछ संगठनों ने इस विवादित स्थल पर सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा के आयोजन का ऐलान किया था। वहीं दूसरी ओर, इसी क्षेत्र में बकरीद की नमाज को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बन गई थी। दोनों ही पक्षों की गतिविधियों को देखते हुए प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई और तत्काल प्रभाव से दोनों धार्मिक कार्यक्रमों को अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

    स्थानीय स्तर पर यह विवाद काफी पुराना बताया जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि यह स्थान ऐतिहासिक रूप से एक प्राचीन किले का हिस्सा रहा है, जिसे बाद में धार्मिक स्थल के रूप में उपयोग किया गया। वहीं दूसरी ओर कुछ समुदायों का दावा है कि यह स्थल लंबे समय से धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इन्हीं विरोधाभासी दावों के कारण यहां समय-समय पर तनाव की स्थिति उत्पन्न होती रही है।

    पिछले दिनों इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पासी समुदाय से जुड़े कुछ लोगों ने इसे महाराजा कंस पासी का प्राचीन किला बताते हुए ऐतिहासिक पहचान से जोड़ने की बात कही। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में पुराने गजेटियर और स्थानीय परंपराओं का भी हवाला दिया। इसके बाद क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों और प्रतीकात्मक आयोजनों को लेकर माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया।

    इसी विवाद के चलते पुलिस ने ‘लाखन आर्मी’ नामक संगठन के कुछ सदस्यों पर मामला दर्ज किया था, जिसके बाद संगठन ने विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी दी थी। संगठन के प्रमुख ने आरोप लगाया है कि उनके समुदाय की ऐतिहासिक पहचान को नजरअंदाज किया जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे हैं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और खुफिया इकाइयों को सक्रिय कर दिया है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी तरह की भीड़ जुटने पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बनाए रखना है और किसी भी तरह की भड़काऊ गतिविधि को रोकना है। साथ ही दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश भी की जा रही है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी अफवाह या भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

    कसमंडी कला का यह मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद न रहकर संवेदनशील सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर प्रशासन की नजर लगातार बनी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह तनाव और बढ़ सकता है, इसलिए एहतियाती कदम उठाना जरूरी था।

  • झांसी: नयागांव में राशन दुकान आवंटन पर विवाद, धांधली के आरोप, निरस्त करने की मांग

    झांसी: नयागांव में राशन दुकान आवंटन पर विवाद, धांधली के आरोप, निरस्त करने की मांग



    झांसी। मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत नयागांव में सरकारी राशन दुकान के आवंटन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत सदस्यों और ग्रामीणों ने आवंटन प्रक्रिया में धांधली और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी सहित मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आवंटन को निरस्त करने की मांग की है।

    जल्दबाजी में बैठक का आरोप
    ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मुनादी होने के महज दूसरे ही दिन जल्दबाजी में राशन दुकान आवंटन के लिए खुली बैठक आयोजित कर दी गई। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई और नियमों की अनदेखी की गई।

    ग्राम पंचायत सदस्यों में नाराजगी
    ग्राम पंचायत सदस्यों ने भी आवंटन प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें गांव के लोगों की सहमति नहीं ली गई और न ही उचित प्रक्रिया का पालन किया गया।

    जांच की मांग
    ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में राशन दुकान का आवंटन निरस्त कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की बात कही जा रही है
    ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा।

  • झांसी में एंबुलेंस संचालकों की मनमानी: 30 किमी शव ले जाने के लिए मांगे 6000 रुपए, परिजनों ने DM से लगाई गुहार

    झांसी में एंबुलेंस संचालकों की मनमानी: 30 किमी शव ले जाने के लिए मांगे 6000 रुपए, परिजनों ने DM से लगाई गुहार



    झांसी। मेडिकल कॉलेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस के बाहर एंबुलेंस संचालकों की मनमानी का गंभीर मामला सामने आया है। एक गरीब परिवार से मात्र 30 किलोमीटर दूर शव ले जाने के लिए 6000 रुपए की मांग की गई, जबकि दूसरी एंबुलेंस 1200 से 1500 रुपए में जाने को तैयार थी।

    परिजनों ने 4000 रुपए देने की बात कही, लेकिन एंबुलेंस चालक 6000 रुपए पर अड़ा रहा। अंततः परिजनों ने डीएम ऑफिस में फोन कर अपनी पीड़ा बताई, जिसके बाद मामला 4000 रुपए में तय हुआ और शव को रवाना किया गया।

    ट्रेन के बाथरूम में मिला शव
    मृतक महेंद्र सिंह (47), बबीना क्षेत्र के ठकरास मोहल्ले के रहने वाले थे और अहमदाबाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। वे अहमदाबाद से साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन से घर लौट रहे थे। यात्रा के दौरान ट्रेन के बाथरूम में उनकी तबीयत बिगड़ गई और वहीं उनकी मौत हो गई।ट्रेन जब झांसी स्टेशन पहुंची तो जीआरपी ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया।

    बबीना ले जाने को लेकर विवाद
    पोस्टमार्टम के बाद शव को बबीना ले जाने को लेकर एंबुलेंस संचालकों में मनमानी वसूली का आरोप लगा। परिजनों का कहना है कि बाहर खड़ी एंबुलेंस 1200–1500 रुपए में जाने को तैयार थी, लेकिन अंदर मौजूद संचालक अधिक पैसे की मांग पर अड़े रहे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    गरीब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
    मृतक के परिवार में पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी हैं। सभी अभी अविवाहित हैं। पिता की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर बताई जा रही है।

    प्रशासन पर उठे सवाल
    यह कोई पहला मामला नहीं है जब पोस्टमार्टम हाउस के बाहर एंबुलेंस संचालकों पर मनमानी वसूली के आरोप लगे हों। दूर-दराज से आने वाले परिजनों से कई गुना अधिक किराया वसूलने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन व्यवस्था सुधारने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

  • उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती

    उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Ujjain में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच प्रशासन ने ईंधन बचत की दिशा में एक अनोखी और अनुकरणीय पहल शुरू की है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचत अपील और मुख्यमंत्री Mohan Yadav के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
    अब सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारी अलग-अलग वाहनों की बजाय एक ही ट्रैवलर बस में यात्रा कर रहे हैं। बुधवार को संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त सहित करीब 15 अधिकारी एक साथ बस में बैठकर 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र के निरीक्षण के लिए पहुंचे।
    पहले स्थिति यह थी कि हर दिन विभिन्न विभागों के अधिकारी 15 अलग-अलग इनोवा वाहनों से निरीक्षण के लिए निकलते थे, जिससे भारी मात्रा में ईंधन खर्च होता था। अनुमान के अनुसार, केवल एक दिन के निरीक्षण में लगभग 6750 रुपये तक का ईंधन खर्च हो जाता था।
    नई व्यवस्था के तहत अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा कर रहे हैं, जिससे खर्च में भारी कमी आई है। ट्रैवलर बस के उपयोग से यह पूरा सफर अब लगभग 250 रुपये के डीजल खर्च में पूरा हो रहा है, हालांकि बस का दैनिक किराया करीब 4100 रुपये है।
    प्रशासन का कहना है कि इस पहल से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था पर भी दबाव घटेगा। पहले कई वाहनों के काफिले से सड़कों पर जाम जैसी स्थिति बन जाती थी, अब एक ही वाहन से यात्रा होने पर यह समस्या कम हो गई है।
    निरीक्षण के दौरान अधिकारी सुबह 6 बजे से घाटों और प्रस्तावित एप्रोच रोड का जायजा लेते हैं और कई किलोमीटर पैदल भी चलते हैं। इस दौरान निर्माण कार्यों की समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
    सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि यह निर्णय न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे टीम भावना भी मजबूत होगी। सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे तो समन्वय बेहतर होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी आसान होगी।
    कलेक्टर ने इसे एक अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था आगे चलकर अन्य जिलों के लिए भी मिसाल बन सकती है।

  • US रिपोर्ट में दावा: ट्रंप प्रशासन के लिए ‘रेड फ्लैग’ हो सकते हैं जनरल मुनीर, ईरान से करीबी रिश्तों पर सवाल

    US रिपोर्ट में दावा: ट्रंप प्रशासन के लिए ‘रेड फ्लैग’ हो सकते हैं जनरल मुनीर, ईरान से करीबी रिश्तों पर सवाल


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को लेकर अमेरिकी खुफिया तंत्र में चिंता जताई गई है।
    एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके ईरान के सैन्य नेतृत्व से पुराने संबंध डोनाल्ड ट्रंप के संभावित प्रशासन के लिए जोखिम बन सकते हैं। यह दावा Fox News की रिपोर्ट और अमेरिकी एजेंसियों के आकलन में सामने आया है।

    ईरान से गहरे संबंधों पर चिंता

    रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल मुनीर के ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों से लंबे समय से व्यक्तिगत रिश्ते रहे हैं। इनमें कासिम सुलेमानी और होसैन सलामी जैसे नाम शामिल बताए गए हैं। इन संबंधों को अमेरिकी हितों के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है।

    ‘बैकडोर डिप्लोमेसी’ में भूमिका

    बताया जा रहा है कि मौजूदा हालात में मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पर्दे के पीछे मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। उनका प्रयास दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और बातचीत को आगे बढ़ाने का बताया गया है।

    ट्रंप की तारीफ, एजेंसियों की चिंता

    रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर मुनीर की तारीफ करते हुए उन्हें अपना ‘पसंदीदा फील्ड मार्शल’ कहा है। हालांकि, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि उनकी यह दोहरी भूमिका भविष्य में अमेरिकी रणनीतिक हितों को प्रभावित कर सकती है।

    पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड पर सवाल

    रिपोर्ट में पाकिस्तान के पिछले रिकॉर्ड को लेकर भी चिंता जताई गई है, खासकर अफगानिस्तान में उसकी भूमिका को लेकर।

    विश्लेषकों का कहना है कि इस्लामाबाद का इतिहास उसे पूरी तरह भरोसेमंद सहयोगी के रूप में स्थापित नहीं करता।

    विशेषज्ञों की चेतावनी

    विशेषज्ञ बिल रोगियो ने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान पर आंख बंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि मुनीर के ईरानी सैन्य ढांचे से संबंध भविष्य में रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव बना हुआ है और पाकिस्तान की भूमिका पर नई बहस छिड़ गई है।