Tag: administration

  • आईएएस अवि प्रसाद की तीसरी शादी चर्चा में, प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अंकिता धाकरे संग बंधे विवाह बंधन में, पहली दो पत्नियां भी हैं वरिष्ठ अफसर

    आईएएस अवि प्रसाद की तीसरी शादी चर्चा में, प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अंकिता धाकरे संग बंधे विवाह बंधन में, पहली दो पत्नियां भी हैं वरिष्ठ अफसर

    मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अवि प्रसाद एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। प्रशासनिक सेवा में अपनी कार्यशैली और विभिन्न जिम्मेदारियों के लिए पहचाने जाने वाले अवि प्रसाद ने हाल ही में प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अंकिता धाकरे के साथ विवाह किया है। यह उनकी तीसरी शादी है, जिसके बाद उनका नाम एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।

    अवि प्रसाद वर्तमान में मध्य प्रदेश रोजगार गारंटी परिषद में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। प्रशासनिक सेवा में उनके अनुभव और विभिन्न जिलों में निभाई गई जिम्मेदारियों ने उन्हें राज्य के प्रमुख अधिकारियों में शामिल किया है। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले अवि प्रसाद ने सिविल सेवा में आने से पहले भी महत्वपूर्ण पेशेवर जिम्मेदारियां संभाली थीं और बाद में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया।

    उनकी निजी जिंदगी का सफर भी उतना ही चर्चित रहा है जितना उनका प्रशासनिक करियर। उनकी पहली शादी 2014 बैच की आईएएस अधिकारी रिजु बाफना से हुई थी। हालांकि यह वैवाहिक संबंध अधिक समय तक नहीं चल सका और दोनों ने बाद में अलग होने का निर्णय लिया। प्रशासनिक सेवा में कार्यरत दोनों अधिकारियों ने अपने-अपने पेशेवर जीवन को आगे बढ़ाया और अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं।

    पहले वैवाहिक संबंध के समाप्त होने के बाद अवि प्रसाद ने दूसरी शादी आईएएस अधिकारी मिशा सिंह से की। यह विवाह भी प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों के बीच हुआ था और कुछ वर्षों तक दोनों साथ रहे। बताया जाता है कि इस दौरान मिशा सिंह ने अपना कैडर परिवर्तन कर मध्य प्रदेश में सेवाएं देना शुरू किया था। हालांकि समय के साथ यह संबंध भी आगे नहीं बढ़ सका और दोनों के रास्ते अलग हो गए।

    हाल ही में अवि प्रसाद ने तीसरी बार विवाह किया है। इस बार उनकी जीवनसंगिनी प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अंकिता धाकरे बनी हैं। अंकिता धाकरे राज्य मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हैं और प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। दोनों का विवाह फरवरी 2026 में आयोजित एक निजी समारोह में संपन्न हुआ। विवाह की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में इस संबंध को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

    अवि प्रसाद की पेशेवर यात्रा भी काफी उल्लेखनीय मानी जाती है। सिविल सेवा में आने से पहले उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर पहले पुलिस सेवा में स्थान प्राप्त किया। बाद में बेहतर रैंक हासिल करने के बाद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्य करते हुए अपनी पहचान बनाई।

    प्रशासनिक सेवा में कार्यरत अधिकारियों की निजी जिंदगी सामान्यतः सार्वजनिक चर्चा से दूर रहती है, लेकिन जब किसी अधिकारी का व्यक्तिगत जीवन असाधारण परिस्थितियों के कारण सुर्खियों में आता है तो लोगों की दिलचस्पी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। अवि प्रसाद के मामले में भी ऐसा ही देखने को मिला है, जहां उनके प्रशासनिक करियर के साथ-साथ उनके वैवाहिक जीवन को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा बनी हुई है।

    फिलहाल अवि प्रसाद और अंकिता धाकरे अपने-अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। वहीं उनकी यह नई वैवाहिक शुरुआत प्रशासनिक सेवा से जुड़े लोगों और आम नागरिकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।

  • श्योपुर में हड़कंप, दुकान विवाद में न्याय न मिलने पर बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट में की आत्मघाती कदम

    श्योपुर में हड़कंप, दुकान विवाद में न्याय न मिलने पर बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट में की आत्मघाती कदम

    श्योपुर । श्योपुर कलेक्ट्रेट में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां शिकायतों से परेशान एक बुजुर्ग ने सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली। गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    मृतक की पहचान देवेंद्र गोयल के रूप में हुई है, जो सब्जी मंडी क्षेत्र में दुकान के मालिक थे। बताया जा रहा है कि उनकी दुकान पर उनके ही परिवार के कुछ सदस्यों द्वारा कब्जा कर लिया गया था। इस मामले को लेकर वह लंबे समय से न्याय की गुहार लगा रहे थे।

    परिजनों और जानकारी के अनुसार, देवेंद्र गोयल ने 28 फरवरी को दुकान पर कब्जे की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद उन्होंने 2 मार्च से लेकर 26 मई तक कई बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन आरोप है कि उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे वे लगातार परेशान चल रहे थे।

    मंगलवार को वह अपनी समस्या लेकर श्योपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां जनसुनवाई चल रही थी। उस समय कलेक्टर शीला दाहिमा मौजूद नहीं थीं। डेप्युटी कलेक्टर देवेंद्र मीणा ने उनका आवेदन लिया। इसके बाद बाहर निकलते ही बुजुर्ग ने सल्फास खा लिया और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।

    घटना के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वह तीन बार जनसुनवाई में आ चुके हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई।

    बताया जा रहा है कि पहले उन्होंने पुलिस में भी शिकायत दी थी, लेकिन मामला राजस्व विभाग से जुड़ा होने के कारण उन्हें वहां भेज दिया गया था। इसके बाद से वह लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। इस घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

  • लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर जारी विवाद

    लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर जारी विवाद



    नई दिल्ली। एक बार फिर तनाव का कारण बन गया है। स्थानीय स्तर पर इस स्थल को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिनकी वजह से इलाके में सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता बढ़ गई है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन सख्त कदम उठाते हुए किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन पर रोक लगा दी है और पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, मंगलवार को कुछ संगठनों ने इस विवादित स्थल पर सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा के आयोजन का ऐलान किया था। वहीं दूसरी ओर, इसी क्षेत्र में बकरीद की नमाज को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बन गई थी। दोनों ही पक्षों की गतिविधियों को देखते हुए प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई और तत्काल प्रभाव से दोनों धार्मिक कार्यक्रमों को अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

    स्थानीय स्तर पर यह विवाद काफी पुराना बताया जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि यह स्थान ऐतिहासिक रूप से एक प्राचीन किले का हिस्सा रहा है, जिसे बाद में धार्मिक स्थल के रूप में उपयोग किया गया। वहीं दूसरी ओर कुछ समुदायों का दावा है कि यह स्थल लंबे समय से धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इन्हीं विरोधाभासी दावों के कारण यहां समय-समय पर तनाव की स्थिति उत्पन्न होती रही है।

    पिछले दिनों इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पासी समुदाय से जुड़े कुछ लोगों ने इसे महाराजा कंस पासी का प्राचीन किला बताते हुए ऐतिहासिक पहचान से जोड़ने की बात कही। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में पुराने गजेटियर और स्थानीय परंपराओं का भी हवाला दिया। इसके बाद क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों और प्रतीकात्मक आयोजनों को लेकर माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया।

    इसी विवाद के चलते पुलिस ने ‘लाखन आर्मी’ नामक संगठन के कुछ सदस्यों पर मामला दर्ज किया था, जिसके बाद संगठन ने विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी दी थी। संगठन के प्रमुख ने आरोप लगाया है कि उनके समुदाय की ऐतिहासिक पहचान को नजरअंदाज किया जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे हैं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और खुफिया इकाइयों को सक्रिय कर दिया है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी तरह की भीड़ जुटने पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बनाए रखना है और किसी भी तरह की भड़काऊ गतिविधि को रोकना है। साथ ही दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश भी की जा रही है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी अफवाह या भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

    कसमंडी कला का यह मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद न रहकर संवेदनशील सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर प्रशासन की नजर लगातार बनी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह तनाव और बढ़ सकता है, इसलिए एहतियाती कदम उठाना जरूरी था।

  • झांसी: नयागांव में राशन दुकान आवंटन पर विवाद, धांधली के आरोप, निरस्त करने की मांग

    झांसी: नयागांव में राशन दुकान आवंटन पर विवाद, धांधली के आरोप, निरस्त करने की मांग



    झांसी। मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत नयागांव में सरकारी राशन दुकान के आवंटन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत सदस्यों और ग्रामीणों ने आवंटन प्रक्रिया में धांधली और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी सहित मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आवंटन को निरस्त करने की मांग की है।

    जल्दबाजी में बैठक का आरोप
    ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मुनादी होने के महज दूसरे ही दिन जल्दबाजी में राशन दुकान आवंटन के लिए खुली बैठक आयोजित कर दी गई। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई और नियमों की अनदेखी की गई।

    ग्राम पंचायत सदस्यों में नाराजगी
    ग्राम पंचायत सदस्यों ने भी आवंटन प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें गांव के लोगों की सहमति नहीं ली गई और न ही उचित प्रक्रिया का पालन किया गया।

    जांच की मांग
    ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में राशन दुकान का आवंटन निरस्त कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की बात कही जा रही है
    ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा।

  • झांसी में एंबुलेंस संचालकों की मनमानी: 30 किमी शव ले जाने के लिए मांगे 6000 रुपए, परिजनों ने DM से लगाई गुहार

    झांसी में एंबुलेंस संचालकों की मनमानी: 30 किमी शव ले जाने के लिए मांगे 6000 रुपए, परिजनों ने DM से लगाई गुहार



    झांसी। मेडिकल कॉलेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस के बाहर एंबुलेंस संचालकों की मनमानी का गंभीर मामला सामने आया है। एक गरीब परिवार से मात्र 30 किलोमीटर दूर शव ले जाने के लिए 6000 रुपए की मांग की गई, जबकि दूसरी एंबुलेंस 1200 से 1500 रुपए में जाने को तैयार थी।

    परिजनों ने 4000 रुपए देने की बात कही, लेकिन एंबुलेंस चालक 6000 रुपए पर अड़ा रहा। अंततः परिजनों ने डीएम ऑफिस में फोन कर अपनी पीड़ा बताई, जिसके बाद मामला 4000 रुपए में तय हुआ और शव को रवाना किया गया।

    ट्रेन के बाथरूम में मिला शव
    मृतक महेंद्र सिंह (47), बबीना क्षेत्र के ठकरास मोहल्ले के रहने वाले थे और अहमदाबाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। वे अहमदाबाद से साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन से घर लौट रहे थे। यात्रा के दौरान ट्रेन के बाथरूम में उनकी तबीयत बिगड़ गई और वहीं उनकी मौत हो गई।ट्रेन जब झांसी स्टेशन पहुंची तो जीआरपी ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया।

    बबीना ले जाने को लेकर विवाद
    पोस्टमार्टम के बाद शव को बबीना ले जाने को लेकर एंबुलेंस संचालकों में मनमानी वसूली का आरोप लगा। परिजनों का कहना है कि बाहर खड़ी एंबुलेंस 1200–1500 रुपए में जाने को तैयार थी, लेकिन अंदर मौजूद संचालक अधिक पैसे की मांग पर अड़े रहे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    गरीब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
    मृतक के परिवार में पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी हैं। सभी अभी अविवाहित हैं। पिता की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर बताई जा रही है।

    प्रशासन पर उठे सवाल
    यह कोई पहला मामला नहीं है जब पोस्टमार्टम हाउस के बाहर एंबुलेंस संचालकों पर मनमानी वसूली के आरोप लगे हों। दूर-दराज से आने वाले परिजनों से कई गुना अधिक किराया वसूलने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन व्यवस्था सुधारने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

  • उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती

    उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Ujjain में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच प्रशासन ने ईंधन बचत की दिशा में एक अनोखी और अनुकरणीय पहल शुरू की है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचत अपील और मुख्यमंत्री Mohan Yadav के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
    अब सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारी अलग-अलग वाहनों की बजाय एक ही ट्रैवलर बस में यात्रा कर रहे हैं। बुधवार को संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त सहित करीब 15 अधिकारी एक साथ बस में बैठकर 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र के निरीक्षण के लिए पहुंचे।
    पहले स्थिति यह थी कि हर दिन विभिन्न विभागों के अधिकारी 15 अलग-अलग इनोवा वाहनों से निरीक्षण के लिए निकलते थे, जिससे भारी मात्रा में ईंधन खर्च होता था। अनुमान के अनुसार, केवल एक दिन के निरीक्षण में लगभग 6750 रुपये तक का ईंधन खर्च हो जाता था।
    नई व्यवस्था के तहत अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा कर रहे हैं, जिससे खर्च में भारी कमी आई है। ट्रैवलर बस के उपयोग से यह पूरा सफर अब लगभग 250 रुपये के डीजल खर्च में पूरा हो रहा है, हालांकि बस का दैनिक किराया करीब 4100 रुपये है।
    प्रशासन का कहना है कि इस पहल से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था पर भी दबाव घटेगा। पहले कई वाहनों के काफिले से सड़कों पर जाम जैसी स्थिति बन जाती थी, अब एक ही वाहन से यात्रा होने पर यह समस्या कम हो गई है।
    निरीक्षण के दौरान अधिकारी सुबह 6 बजे से घाटों और प्रस्तावित एप्रोच रोड का जायजा लेते हैं और कई किलोमीटर पैदल भी चलते हैं। इस दौरान निर्माण कार्यों की समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
    सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि यह निर्णय न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे टीम भावना भी मजबूत होगी। सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे तो समन्वय बेहतर होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी आसान होगी।
    कलेक्टर ने इसे एक अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था आगे चलकर अन्य जिलों के लिए भी मिसाल बन सकती है।

  • US रिपोर्ट में दावा: ट्रंप प्रशासन के लिए ‘रेड फ्लैग’ हो सकते हैं जनरल मुनीर, ईरान से करीबी रिश्तों पर सवाल

    US रिपोर्ट में दावा: ट्रंप प्रशासन के लिए ‘रेड फ्लैग’ हो सकते हैं जनरल मुनीर, ईरान से करीबी रिश्तों पर सवाल


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को लेकर अमेरिकी खुफिया तंत्र में चिंता जताई गई है।
    एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके ईरान के सैन्य नेतृत्व से पुराने संबंध डोनाल्ड ट्रंप के संभावित प्रशासन के लिए जोखिम बन सकते हैं। यह दावा Fox News की रिपोर्ट और अमेरिकी एजेंसियों के आकलन में सामने आया है।

    ईरान से गहरे संबंधों पर चिंता

    रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल मुनीर के ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों से लंबे समय से व्यक्तिगत रिश्ते रहे हैं। इनमें कासिम सुलेमानी और होसैन सलामी जैसे नाम शामिल बताए गए हैं। इन संबंधों को अमेरिकी हितों के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है।

    ‘बैकडोर डिप्लोमेसी’ में भूमिका

    बताया जा रहा है कि मौजूदा हालात में मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पर्दे के पीछे मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। उनका प्रयास दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और बातचीत को आगे बढ़ाने का बताया गया है।

    ट्रंप की तारीफ, एजेंसियों की चिंता

    रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर मुनीर की तारीफ करते हुए उन्हें अपना ‘पसंदीदा फील्ड मार्शल’ कहा है। हालांकि, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि उनकी यह दोहरी भूमिका भविष्य में अमेरिकी रणनीतिक हितों को प्रभावित कर सकती है।

    पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड पर सवाल

    रिपोर्ट में पाकिस्तान के पिछले रिकॉर्ड को लेकर भी चिंता जताई गई है, खासकर अफगानिस्तान में उसकी भूमिका को लेकर।

    विश्लेषकों का कहना है कि इस्लामाबाद का इतिहास उसे पूरी तरह भरोसेमंद सहयोगी के रूप में स्थापित नहीं करता।

    विशेषज्ञों की चेतावनी

    विशेषज्ञ बिल रोगियो ने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान पर आंख बंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि मुनीर के ईरानी सैन्य ढांचे से संबंध भविष्य में रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव बना हुआ है और पाकिस्तान की भूमिका पर नई बहस छिड़ गई है।

  • चंबल राजघाट में अवैध रेत उत्खनन पर वन विभाग और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग, टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा

    चंबल राजघाट में अवैध रेत उत्खनन पर वन विभाग और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग, टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा


    चंबल।  अवैध रेत उत्खनन की लगातार शिकायतों के बीच चंबल के राजघाट क्षेत्र में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने अचानक पेट्रोलिंग की। टीम का मकसद रेत माफियाओं को रंगे हाथों पकड़ना था, लेकिन मौके पर कोई भी ट्रैक्टर-ट्रॉली या लोडर मशीन नहीं मिली, जिससे टीम को बैरंग लौटना पड़ा।

    जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों और प्रशासनिक शिकायतों के आधार पर वन विभाग और पुलिस ने राजघाट क्षेत्र में छापामार कार्रवाई और पेट्रोलिंग की योजना बनाई थी। हालांकि, पूरी टीम के पहुंचने पर इलाका सुनसान मिला और रेत से जुड़े किसी भी वाहन या गतिविधि के प्रमाण नहीं मिले।

    माफियाओं को पहले ही मिली भनक
    देवरी घड़ियाल सेंचुरी के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि टीम ने राजघाट और चंबल किनारे पेट्रोलिंग की, लेकिन वहाँ कोई अवैध रेत लदे वाहन या मशीन नहीं मिली। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कार्रवाई की सूचना पहले ही रेत माफियाओं तक पहुंच गई थी, जिसके कारण मौके पर कोई भी वाहन नहीं मिला।

    अधिकारियों का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन रोकने के लिए नियमित पेट्रोलिंग और निगरानी जारी रहेगी। हालांकि, इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि माफिया प्रशासन की छापामारी और निगरानी के प्रति सतर्क हैं।

    प्रशासन की अगली रणनीति
    वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम अब राजघाट और आसपास के इलाकों में और सघन निगरानी करेगी। अधिकारियों ने कहा कि अगले दौर की कार्रवाई में अवैध रेत लदे वाहनों और मशीनों की त्वरित पहचान के लिए ड्रोन और अन्य तकनीकी साधनों का भी उपयोग किया जाएगा।साथ ही, प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अवैध रेत उत्खनन की सूचना तुरंत पुलिस या वन विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम

    भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम


    इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई 23 मौतों ने प्रशासन और सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। जिस इलाके में कुछ दिन पहले तक मातम पसरा हुआ था वहां अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। ज़मीन के नीचे से लेकर अदालत के गलियारों तक इस त्रासदी का असर साफ दिख रहा है। प्रशासनिक स्तर पर जहां सुधार कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं वहीं न्यायिक मोर्चे पर भी मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अहम सुनवाई प्रस्तावित है।

    भागीरथपुरा की सड़कों पर इन दिनों भारी हलचल है। पुलिस चौकी के सामने की मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी गलियों तक जेसीबी मशीनें लगातार खुदाई में जुटी हैं। कई जगह पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को हटाकर नई पाइप डाली जा रही हैं तो कहीं ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने का काम चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि नर्मदा जल आपूर्ति लाइन और सीवरेज व्यवस्था को पूरी तरह अलग किया जा रहा है ताकि दूषित पानी की समस्या भविष्य में दोबारा न हो।हालांकि इन सुधार कार्यों के चलते स्थानीय लोगों को फिलहाल भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह खुदी सड़कों कीचड़ और अधूरे भराव के कारण आवाजाही मुश्किल हो गई है। दोपहिया वाहन चालकों बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को वैकल्पिक रास्तों से निकलना पड़ रहा है। बावजूद इसके क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह असुविधा उन्हें मंजूर है अगर इससे भविष्य में किसी और परिवार को अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके की पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था वर्षों से बदहाल थी। इसको लेकर कई बार शिकायतें भी की गईं लेकिन समय रहते प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों का कहना है कि यदि पहले ही सुधार कार्य किए गए होते तो शायद 23 निर्दोष लोगों की जान नहीं जाती।स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस त्रासदी की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। अब तक कुल 440 लोग दूषित पानी से बीमार होकर अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से 413 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है जबकि 27 मरीज अब भी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 8 मरीज आईसीयू में हैं और 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इलाके में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि किसी भी नए मामले को समय रहते पकड़ा जा सके।

    न्यायिक स्तर पर भी मामला तूल पकड़ चुका है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दूषित पेयजल से जुड़ी पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने प्रशासन के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए थे कि यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।भागीरथपुरा की यह त्रासदी अब केवल एक स्थानीय हादसा नहीं रही बल्कि यह सिस्टम की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुकी है।

  • इंदौर में बीआरटीएस हटाने में अधिकारी दिखा रहे हैं बहाने, हाई कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी

    इंदौर में बीआरटीएस हटाने में अधिकारी दिखा रहे हैं बहाने, हाई कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी


    इंदौर। इंदौर में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम बीआरटीएस को हटाने के मामले में अधिकारियों की बहानेबाजी पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने यह कहते हुए सख्त चेतावनी दी कि आदेशों को हल्के में मत लीजिए, हमें सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर मत करिए। इस मामले में अब हाई कोर्ट सतत निगरानी करेगा और अधिकारियों के कामकाजी तरीकों पर पैनी नजर रखेगा।

    क्या है मामला

    सोमवार को कोर्ट की सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि बीआरटीएस हटाने के बाद डिवाइडर की जगह एलिवेटेड ब्रिज का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए पीडब्ल्यूडी लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि जिस ब्रिज के नाम पर डिवाइडर का काम रोका जा रहा है उसका कार्य केवल कागजों पर चल रहा है और सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं और यह मामला लगातार लटका हुआ है। कोर्ट ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अधिकारियों का रवैया बिल्कुल असंतोषजनक है और वह कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। कोर्ट ने इस पर सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी, जिससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

    कोर्ट की प्रतिक्रिया

    कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि वह अब मामले की निगरानी करेगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। अदालत ने अधिकारियों से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करने को कहा और कहा कि यदि इस प्रक्रिया में और देरी होती है तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। कोर्ट का यह आदेश अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे न हटें और काम को जल्द पूरा करें। यह मामला बीआरटीएस को हटाने और उसके स्थान पर डिवाइडर और अन्य संरचनाओं के निर्माण से जुड़ा है जो शहर के यातायात सुधार के लिए अहम है। हालांकि प्रशासन द्वारा किए गए विलंब से नगरवासियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।