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  • अफगानिस्तान का पाकिस्तान में ड्रोन हमला, ISIS-K ठिकानों को बनाया निशाना

    अफगानिस्तान का पाकिस्तान में ड्रोन हमला, ISIS-K ठिकानों को बनाया निशाना


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार तनाव एक बार फिर गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर आतंकी संगठन ISIS-K के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। तालिबान के अनुसार, यह कार्रवाई उन ठिकानों के खिलाफ की गई है जहां से अफगानिस्तान में नागरिकों पर हमलों की साजिश रची जा रही थी।

    यह घटनाक्रम पाकिस्तान द्वारा हाल ही में किए गए हवाई हमलों के दो दिन बाद सामने आया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हमले का दावा
    तालिबान का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में की गई। अफगानिस्तान के मीडिया संस्थान ‘टोलो न्यूज’ ने भी इस दावे की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन हमलों के जरिए उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जहां ISIS-K के आतंकी छिपे हुए थे।

    खैबर पख्तूनख्वा के सरान क्षेत्र में एक स्कूल को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है, जिसे कथित तौर पर आतंकियों द्वारा गुप्त ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। तालिबान ने दावा किया है कि इस कार्रवाई में कई आतंकी मारे गए हैं, जबकि किसी भी आम नागरिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    पाकिस्तान के हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई का दावा
    तालिबान के इस हमले को पाकिस्तान की हालिया सैन्य कार्रवाई के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। दो दिन पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा के भीतर हवाई हमले किए थे।

    संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट (UNAMA) के अनुसार, उस कार्रवाई में कम से कम 28 नागरिकों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। वहीं, अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने मृतकों की संख्या 38 बताई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

    भारत की प्रतिक्रिया भी सामने आई
    इस घटनाक्रम पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी देश की सीमा में घुसकर हमला करना उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है और इससे क्षेत्रीय शांति प्रभावित होती है।

    भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक असफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए अक्सर ऐसे कदम उठाता है, जिससे पड़ोसी देशों में अस्थिरता बढ़ती है।

    दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा
    फिलहाल पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान आतंकवादी संगठनों को पनाह देता है, जबकि तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान में आतंकवाद उसकी अपनी आंतरिक नीतिगत विफलताओं का परिणाम है। ताजा एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है तथा हालात आगे और गंभीर रूप लेने की आशंका जताई जा रही है।

  • अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक, हमलों में 34 नागरिकों की मौत, सीमा पर बढ़ा तनाव

    अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक, हमलों में 34 नागरिकों की मौत, सीमा पर बढ़ा तनाव


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अफगान मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने रविवार रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें 34 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में सभी आम नागरिक होने का दावा किया गया है।

    स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पाकतिका प्रांत के गयान जिले और पाकतिया प्रांत के समकानी जिले में हवाई हमले किए। इन हमलों में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा कुनार प्रांत के कुछ क्षेत्रों पर भी हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    रिहायशी इलाकों को बनाया गया निशाना
    पाकतिया पुलिस कमांड के प्रवक्ता मुनीब जादरान ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि समकानी जिले में 35 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 40 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। उनके अनुसार, हमला समकानी जिले के मांडोखेल इलाके में बिस्मिल्लाह जान नामक एक नागरिक के घर पर किया गया। आरोप है कि पहले हमले के बाद जब स्थानीय लोग मलबे में फंसे लोगों को बचाने पहुंचे, तभी उसी स्थान पर दूसरा हवाई हमला किया गया, जिससे राहत कार्य में जुटे लोग भी इसकी चपेट में आ गए।

    स्थानीय लोगों का दावा- इलाके में नहीं था कोई सैन्य ठिकाना
    समकानी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों और घायलों का कहना है कि हमले पूरी तरह रिहायशी इलाकों पर हुए। उनका दावा है कि आसपास कोई सैन्य ठिकाना या सैनिक मौजूद नहीं थे, इसके बावजूद घरों को निशाना बनाया गया, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए।

    पाकिस्तान की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
    इस घटना पर पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। वहीं अफगानिस्तान की ओर से इन हमलों की कड़ी निंदा की गई है और इसे आम नागरिकों पर सीधा हमला बताया गया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में कराची में हुए हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था। इसी पृष्ठभूमि में इन ताजा हवाई हमलों की खबर सामने आई है, जिससे सीमा पर हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं।

  • ‘टीम इंडिया के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है’: डेब्यू सीरीज में चमके गुरनूर बरार, सफलता का बताया राज

    ‘टीम इंडिया के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है’: डेब्यू सीरीज में चमके गुरनूर बरार, सफलता का बताया राज


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट को एक और उभरता हुआ तेज गेंदबाज मिल गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने अपने पहले दोनों वनडे मुकाबलों में तीन-तीन विकेट लेकर यह साबित कर दिया कि वह भविष्य में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

    लखनऊ में खेले गए मुकाबले के बाद गुरनूर बरार ने अपनी सफलता के पीछे घरेलू क्रिकेट और इंडिया ए टीम में मिले अनुभव को सबसे बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि इंडिया ए का मंच उनके लिए सीखने और खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुआ है।

    गुरनूर ने कहा कि जब उन्हें इंडिया ए टीम में चुना गया था, तब वह बेहद उत्साहित थे। उनके अनुसार, इंडिया ए में खेलते समय उन्होंने वही रणनीति अपनाई जो वह रणजी ट्रॉफी में इस्तेमाल करते थे। हार्ड लेंथ पर लगातार तेज गेंदबाजी करना और गेंद को स्विंग कराना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने बताया कि इंडिया ए में मिले अनुभव ने उन्हें यह विश्वास दिया कि वह बड़े स्तर पर भी उसी आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर सकते हैं।

    युवा तेज गेंदबाज ने कहा कि उन्होंने भारतीय टीम के लिए खेलते समय भी अपनी स्वाभाविक गेंदबाजी पर भरोसा रखा। उन्होंने किसी तरह का अतिरिक्त दबाव नहीं लिया और अपनी मजबूत पक्षों पर ध्यान केंद्रित किया। बरार का मानना है कि अभी भी उनके प्रदर्शन में और सुधार की काफी गुंजाइश है और आने वाले मैचों में वह और बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं।

    उन्होंने टीम प्रबंधन और गेंदबाजी कोच की भी जमकर तारीफ की। गुरनूर ने कहा कि उन्हें कोचिंग स्टाफ से पूरा समर्थन मिला है। टीम प्रबंधन ने उन्हें कोई नई तकनीक अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि उनकी मौजूदा क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए अपनी ताकत के अनुसार गेंदबाजी करने की सलाह दी। यही भरोसा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मददगार साबित हुआ।

    गुरनूर बरार ने कहा कि वह भगवान के आभारी हैं कि उन्हें भारतीय टीम के लिए खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और वह आने वाले वर्षों में टीम इंडिया के लिए बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य केवल टीम में जगह बनाना नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की सफलताओं में महत्वपूर्ण योगदान देना है।

    आईपीएल 2026 में गुरनूर बरार गुजरात टाइटंस का हिस्सा रहे। हालांकि उन्हें अधिक मैच खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन टीम के साथ बिताया गया समय उनके लिए बेहद मूल्यवान रहा। उन्होंने बताया कि गुजरात टाइटंस के ड्रेसिंग रूम में अनुभवी खिलाड़ियों और कोचों से बहुत कुछ सीखने को मिला।

    बरार ने कहा कि टीम में मुख्य कोच आशीष नेहरा के अलावा कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और इशांत शर्मा जैसे अनुभवी गेंदबाज मौजूद थे। उनके साथ समय बिताने और बातचीत करने से उन्हें गेंदबाजी के कई तकनीकी और मानसिक पहलुओं को समझने का मौका मिला।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार शुरुआत के बाद अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें गुरनूर बरार पर टिकी हैं। यदि वह इसी तरह निरंतर प्रदर्शन करते रहे, तो भारतीय तेज गेंदबाजी को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प मिल सकता है।

  • वीरेंद्र सहवाग की बड़ी भविष्यवाणी: रोहित शर्मा के वनडे संन्यास के बाद यशस्वी जायसवाल बनेंगे टीम इंडिया के नियमित ओपनर

    वीरेंद्र सहवाग की बड़ी भविष्यवाणी: रोहित शर्मा के वनडे संन्यास के बाद यशस्वी जायसवाल बनेंगे टीम इंडिया के नियमित ओपनर

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने युवा सनसनी यशस्वी जायसवाल के वनडे और सीमित ओवरों के करियर को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी भविष्यवाणी की है। वर्तमान में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे श्रृंखला के दौरान टीम संयोजन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सहवाग का यह बयान सामने आया है। आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले के दौरान स्टार बल्लेबाज विराट कोहली के हैमस्ट्रिंग की चोट का शिकार होने के बाद यशस्वी जायसवाल को बैकअप के रूप में भारतीय टीम में शामिल किया गया है।

    मुख्य रूप से शीर्ष क्रम और ओपनिंग स्लॉट में बल्लेबाजी करने वाले यशस्वी जायसवाल के लिए इस समय भारतीय वनडे टीम के अंतिम ग्यारह खिलाड़ियों में जगह बनाना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में चुने जाने के बावजूद उन्हें बेंच पर बैठना पड़ रहा है। इस स्थिति पर क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच लगातार बहस चल रही है कि क्या इतने प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अंतिम एकादश से बाहर रखना सही है। इसी विषय पर अपनी बेबाक राय रखते हुए पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने जायसवाल के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक और दूरदर्शी खाका खींचा है।

    वीरेंद्र सहवाग ने स्पष्ट रूप से माना कि इस समय भारतीय वनडे टीम के शीर्ष क्रम में जगह बनाना किसी भी नए खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन है। उन्होंने मौजूदा टीम समीकरण का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में शुभमन गिल टीम के कप्तान की भूमिका निभा रहे हैं और रोहित शर्मा जैसा अनुभवी और दिग्गज खिलाड़ी भी बतौर ओपनर टीम की पहली पसंद बना हुआ है। ऐसी मजबूत और स्थापित ओपनिंग जोड़ी के रहते यशस्वी जायसवाल को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना टीम प्रबंधन के लिए आसान नहीं है, क्योंकि वे मध्यक्रम के बल्लेबाज नहीं हैं और शीर्ष क्रम में कोई जगह खाली नहीं है।

    पूर्व सलामी बल्लेबाज ने जायसवाल के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा जताते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी को निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि उनका समय जल्द ही आने वाला है। सहवाग के अनुसार, जैसे ही सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट को अलविदा कहेंगे और अपने संन्यास की घोषणा करेंगे, वैसे ही यशस्वी जायसवाल के लिए भारतीय वनडे और व्हाइट-बॉल क्रिकेट के दरवाजे पूरी तरह से खुल जाएंगे। रोहित के हटने के बाद जायसवाल को राष्ट्रीय टीम में लगातार और नियमित रूप से खेलने के मौके मिलने शुरू हो जाएंगे, जो उनके करियर को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

    इस आगामी रेस में चुनौतियों का जिक्र करते हुए सहवाग ने यह भी जोड़ा कि यशस्वी जायसवाल को टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए ऋतुराज गायकवाड़ जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। गायकवाड़ भी लगातार घरेलू क्रिकेट और मिले हुए मौकों पर शानदार प्रदर्शन कर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। हालांकि, सहवाग का मानना है कि यदि भारतीय चयनकर्ता और टीम प्रबंधन भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों के लिए अपनी टीम में तीन मुख्य ओपनर बल्लेबाजों का चयन करते हैं, तो यशस्वी जायसवाल निश्चित रूप से उन शीर्ष विकल्पों में शामिल होंगे।

    वर्तमान समय में यशस्वी जायसवाल ने टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से गहरी छाप छोड़ी है। सहवाग जैसे महान खिलाड़ी की इस भविष्यवाणी से साफ है कि भविष्य की भारतीय वनडे टीम के निर्माण में जायसवाल को एक मुख्य स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है। भले ही अफगानिस्तान के खिलाफ श्रृंखला में वे अंतिम एकादश का हिस्सा न बन पा रहे हों, लेकिन रोहित शर्मा के युग के बाद भारतीय क्रिकेट के सीमित ओवरों के प्रारूप में यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल की जोड़ी को भविष्य की सलामी जोड़ी के रूप में तैयार किया जा रहा है।

  • अफगानिस्तान में तालिबान का नया फैमिली लॉ, लड़की की चुप्पी को माना जाएगा शादी की सहमति, विवाद बढ़ा

    अफगानिस्तान में तालिबान का नया फैमिली लॉ, लड़की की चुप्पी को माना जाएगा शादी की सहमति, विवाद बढ़ा



    नई दिल्‍ली । अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने एक नया ‘फैमिली लॉ’ लागू किया है, जिसे लेकर विवाद हो रहा है। नए कानून में शादी, तलाक और बाल विवाह से जुड़े कई नियम तय किए गए हैं। दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ता और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इन नए नियमों की आलोचना कर रहे हैं।

    अफगान मीडिया आउटलेट ‘अमू टीवी’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए कानून का नाम ‘पति-पत्नी के बीच अलगाव के सिद्धांत’ रखा गया है। 31 अनुच्छेदों (आर्टिकल्स) वाले इस पूरे मसौदे को तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने अपनी मंजूरी दी है।

    हाल ही में सरकार के आधिकारिक गजट में भी नए कानून को प्रकाशित किया गया था। इस नए रेगुलेशन में बाल विवाह, लापता पति, अडल्ट्री के आरोप, धर्म परिवर्तन (इस्लाम छोड़ना) और जबरन अलगाव जैसे मामलों को शामिल किया गया है।

    चुप्पी को माना जाएगा शादी की सहमति
    इस कानून एक नियम की सबसे ज्यादा आलोचना हो रही है। दरअसल नए प्रावधान के मुताबिक, अगर कोई ‘कुंवारी लड़की’ बालिग (प्यूबर्टी) होने के बाद अपनी शादी पर चुप रहती है, तो उसकी इस चुप्पी को शादी के लिए उसकी रजामंदी माना जाएगा। खास बात ये है कि कानून में ये भी साफ किया गया है कि किसी लड़के या पहले से शादीशुदा महिला की चुप्पी को उनकी सहमति के तौर पर नहीं देखा जाएगा।

    बाल विवाह पर पिता-दादा को बड़े अधिकार
    इस कानून में ‘खियार अल-बुलूग’ का भी जिक्र है। इसके तहत बचपन में ब्याहे गए लोगों को बालिग होने पर शादी रद्द करने की मांग करने का हक मिलता है। कानून के अनुच्छेद 5 के मुताबिक, अगर पिता या दादा के अलावा किसी दूसरे रिश्तेदार ने नाबालिग की शादी तय की है, तो भी वो शादी तब तक मान्य रहेगी जब तक कि जीवनसाथी सामाजिक रूप से योग्य हो। हालांकि, किसी भी शादी को खत्म करने के लिए तालिबान की अदालत से मंजूरी लेना जरूरी होगा।

    नए नियमों के तहत पिता और दादा को बाल विवाह के मामलों में कई अधिकार दिए गए हैं। हालांकि, अगर गार्जियन हिंसक या अनैतिक पाए जाते हैं, तो ऐसी शादियों को अमान्य किया जा सकता है। इसके अलावा, एडल्ट्री के आरोपों, धर्म परिवर्तन और लंबे समय से लापता पतियों से जुड़े मामलों में फैसला लेने के लिए तालिबान के जजों को खुली छूट दी गई है।

    चौतरफा घिरी तालिबान सरकार
    इस नए कानून ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को और नाराज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक फहीमा मोहम्मद ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह में कभी भी सहमति शामिल नहीं हो सकती। लड़की की चुप्पी को उसकी मंजूरी मान लेना असल में लड़कियों की आवाज और उनकी आजादी को पूरी तरह से छीनने जैसा है।

    बता दें कि साल 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से ही तालिबान अफगान महिलाओं और लड़कियों पर लगातार पाबंदियां लगा रहा है। महिलाओं की हाई एजुकेशन पर रोक, नौकरियों पर पाबंदी और सार्वजनिक जीवन में उनकी हिस्सेदारी को खत्म करने को लेकर तालिबान पहले से ही आलोचना झेल रहा है।

  • पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज

    पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और Afghanistan के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। Pakistan ने साफ कर दिया है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई सीजफायर लागू नहीं है, जिससे क्षेत्र में नई सैन्य कार्रवाई की आशंका तेज हो गई है।

    इससे पहले मार्च में ईद से ठीक पहले दोनों देशों ने अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि वह सिर्फ सीमित अवधि के लिए था और अब खत्म हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सीमा पर हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    दरअसल, हालिया टकराव की शुरुआत तब हुई जब Taliban से जुड़ी ताकतों ने सीमा पार हमले किए, जिन्हें पाकिस्तान ने अपने हवाई हमलों का जवाब बताया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक भारी सैन्य झड़पें हुईं, जिन्हें दशकों का सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीजफायर के बावजूद अफगानिस्तान की तरफ से हमले जारी रहे, जिनमें दर्जनों नागरिकों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। इस्लामाबाद लगातार यह आरोप भी दोहरा रहा है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) जैसे आतंकी संगठनों द्वारा किया जा रहा है, हालांकि काबुल और नई दिल्ली दोनों ही इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिया है कि हालात फिर से सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकते हैं। पाकिस्तान के सख्त रुख के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में सीमा पर फिर बड़े स्तर पर कार्रवाई देखने को मिलेगी।

  • पाकिस्तान को अल कायदा की सीधी धमकी, अफगानिस्तान मुद्दे पर आर्मी चीफ आसिम मुनीर निशाने पर

    पाकिस्तान को अल कायदा की सीधी धमकी, अफगानिस्तान मुद्दे पर आर्मी चीफ आसिम मुनीर निशाने पर


    नई दिल्ली ।
    आतंकवाद को लेकर लंबे समय से आलोचना झेल रहे पाकिस्तान के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। दुनिया के कुख्यात आतंकी संगठन अल कायदा ने पाकिस्तान की नेतृत्व व्यवस्था पर सीधा हमला बोलते हुए खुली चेतावनी दी है। संगठन ने खास तौर पर अफगानिस्तान के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान के रुख की कड़ी आलोचना की है और तालिबान के समर्थन का ऐलान किया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अल कायदा की केंद्रीय नेतृत्व की ओर से जारी यह संदेश शाहदा न्यूज एजेंसी के माध्यम से उसके मीडिया विंग ‘अस-सहब’ द्वारा गुप्त प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब इस्लामाबाद और काबुल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

    अपने बयान में संगठन ने पाकिस्तान की सिविल-मिलिट्री व्यवस्था को निशाना बनाते हुए आरोप लगाया कि वह अफगानिस्तान के हितों के खिलाफ काम कर रही है और पश्चिमी देशों के साथ गठजोड़ कर रही है। साथ ही, अल कायदा ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वह अफगानिस्तान से दूरी बनाए रखे, वरना परिणाम गंभीर होंगे।

    आतंकी संगठन ने पाकिस्तानी जनता और सेना को भी भड़काने की कोशिश की। उसने लोगों से सरकार के आदेशों का पालन न करने और अपने एजेंडे के समर्थन की अपील की। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संदेशों के जरिए संगठन पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करना चाहता है और जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर लगातार अफगान तालिबान को चेतावनी देते रहे हैं। वहीं, तालिबान और पाकिस्तान के बीच हाल के महीनों में तनाव बढ़ा है।

    दरअसल, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर कई बार हवाई हमले किए हैं, जबकि तालिबान ने जवाबी कार्रवाई में डूरंड लाइन के पास पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को निशाना बनाया है। अफगानिस्तान डूरंड लाइन को मान्यता नहीं देता, जबकि पाकिस्तान वहां बाड़बंदी कर घुसपैठ रोकने की कोशिश कर रहा है।

  • Afghanistan में एक ही दिन में दो बार आया भूकंप… 4.5 और 4.6 रही तीव्रता

    Afghanistan में एक ही दिन में दो बार आया भूकंप… 4.5 और 4.6 रही तीव्रता


    काबुल।
    अफगानिस्तान (Afghanistan) में शनिवार देर रात 4.6 तीव्रता (Magnitude 4.6) का भूकंप (Earthquake) दर्ज किया गया। यह जानकारी नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (National Centre for Seismology- NCS) ने दी है। एजेंसी के अनुसार, यह भूकंप रात 10:43 बजे (भारतीय समयानुसार) आया और इसकी गहराई करीब 82 किलोमीटर दर्ज की गई। भूकंप (Earthquake) का केंद्र देश के उत्तरी-पूर्वी हिस्से में स्थित था।


    एक ही दिन में दूसरा झटका

    इससे पहले शनिवार सुबह भी 4.5 तीव्रता का एक और भूकंप आया था। उस झटके की गहराई लगभग 130 किलोमीटर बताई गई थी। लगातार आ रहे झटकों से क्षेत्र में सतर्कता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के अनुसार, अफगानिस्तान भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है। लंबे समय से संघर्ष और सीमित संसाधनों के कारण यहां की आबादी इन आपदाओं से उबरने में कठिनाइयों का सामना करती है।


    क्यों आता है भूकंप?

    पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।


    जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

    भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।


    कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

    भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

  • ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिक नहीं भेजेंगे: ट्रंप का यू-टर्न, बोले-‘कहीं भी सेना तैनात नहीं कर रहा’

    ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिक नहीं भेजेंगे: ट्रंप का यू-टर्न, बोले-‘कहीं भी सेना तैनात नहीं कर रहा’


    वॉशिंगटन। अमेरिका 
    राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी जमीनी सैनिक नहीं भेजेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब युद्ध चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और अमेरिका की भूमिका को लेकर अटकलें तेज थीं।

    व्हाइट हाउस में Sanae Takaichi के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं… और अगर भेज भी रहा होता, तो आपको नहीं बताता। लेकिन स्पष्ट कर दूं—हम वहां सैनिक नहीं भेज रहे।”

    गौरतलब है कि युद्ध की शुरुआत के कुछ दिन बाद ट्रंप ने जमीनी सेना भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया था, लेकिन अब उनका रुख बदलता नजर आ रहा है।

    ‘जरूरत पड़ी तो कार्रवाई करेंगे’
    हालांकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका पूरी तरह पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि हालात के मुताबिक जो जरूरी होगा, वह किया जाएगा। ट्रंप लंबे समय से विदेशी जमीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने के आलोचक रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने Afghanistan से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया शुरू की थी।

    ईरान को बताया बड़ा खतरा
    ट्रंप ने Iran को वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि “जब यह अभियान खत्म होगा, तो दुनिया पहले से ज्यादा सुरक्षित होगी।”

    उन्होंने अमेरिकी सेना की ताकत का जिक्र करते हुए दावा किया कि हालिया हमलों में दागे गए 114 रॉकेट्स को एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया।

    जंग लंबी खिंचने के संकेत
    28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में United States और Israel एक ओर हैं, जबकि दूसरी ओर Iran डटा हुआ है। शुरुआती आकलन था कि ईरान में सत्ता परिवर्तन जल्दी हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हवाई हमलों के जरिए न तो सत्ता परिवर्तन संभव है और न ही ईरान के संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है, क्योंकि इसे गहरे भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित रखा गया है।

    जमीनी युद्ध से क्यों बच रहा अमेरिका?
    विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान में जमीनी युद्ध बेहद महंगा और जोखिम भरा साबित हो सकता है। वहां की भौगोलिक परिस्थितियां और सैन्य ताकत अमेरिकी सेना के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।

    ऐसे में ट्रंप का सैनिक न भेजने का फैसला संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल इस युद्ध को सीमित दायरे में रखकर ही आगे बढ़ना चाहता है, ताकि बड़े और लंबे जमीनी संघर्ष से बचा जा सके।

  • ईद पर थमेगा संघर्ष: पाकिस्तान-अफगानिस्तान ने किया अस्थायी सीजफायर का ऐलान

    ईद पर थमेगा संघर्ष: पाकिस्तान-अफगानिस्तान ने किया अस्थायी सीजफायर का ऐलान

    । ईद-उल-फितर के मौके पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी तनाव को लेकर राहत भरी खबर आई है। दोनों देशों ने सऊदी अरब, तुर्किये और कतर की अपील पर सीमित अवधि के लिए संघर्ष विराम (सीजफायर) लागू करने की घोषणा की है।
    ईद के मद्देनजर लिया गया फैसला
    पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बताया कि उनके देश ने चल रहे सैन्य अभियान ‘गजब-लिल-हक’ के बीच अस्थायी विराम का फैसला किया है। यह निर्णय ईद-उल-फितर को ध्यान में रखते हुए और मित्र इस्लामी देशों के अनुरोध पर लिया गया है।

    कब तक रहेगा सीजफायर लागू
    यह संघर्ष विराम 18/19 मार्च की मध्यरात्रि से शुरू होकर 23/24 मार्च की मध्यरात्रि तक प्रभावी रहेगा। हालांकि पाकिस्तान ने साफ किया है कि अगर इस दौरान सीमा पार से हमला, ड्रोन अटैक या आतंकी गतिविधि होती है, तो कार्रवाई तुरंत फिर शुरू कर दी जाएगी।

    अफगानिस्तान ने भी रोकी सैन्य कार्रवाई
    पाकिस्तान की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद अफगानिस्तान की ओर से भी जवाब आया।

    सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि ईद के अवसर पर सुरक्षा बलों को रक्षात्मक अभियानों को अस्थायी रूप से रोकने का निर्देश दिया गया है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी खतरे की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

    हमलों के बाद बढ़ा तनाव
    यह सीजफायर ऐसे समय में सामने आया है जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल स्थित एक पुनर्वास केंद्र पर हमले का आरोप लगाया है। अफगान अधिकारियों का दावा है कि इस हमले में 400 से अधिक लोगों की मौत और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।

    वहीं पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके हमले केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे और नागरिक हताहतों के आंकड़े भ्रामक हैं।

    सामूहिक अंतिम संस्कार की खबरें
    अफगानिस्तान में हमलों के बाद बड़ी संख्या में मृतकों का सामूहिक अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, भारी मशीनों की मदद से कब्रें खोदकर पीड़ितों को दफनाया गया। हालांकि मृतकों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

    संयुक्त राष्ट्र की कड़ी प्रतिक्रिया
    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (UNHCHR) ने इस घटना पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।

    संगठन ने कहा है कि हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और पीड़ितों को न्याय व मुआवजा मिलना चाहिए।

    ईद के मौके पर घोषित यह अस्थायी सीजफायर भले ही कुछ दिनों की राहत दे, लेकिन दोनों देशों के बीच गहराते अविश्वास और हालिया हमलों ने क्षेत्र में तनाव को गंभीर बना दिया है।