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  • 14 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया, एयरस्ट्राइक के जवाब में अफगानिस्तान का बड़ा दावा

    14 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया, एयरस्ट्राइक के जवाब में अफगानिस्तान का बड़ा दावा

    काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव हाल ही में और तेज हो गया है। पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF) ने अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांतों जैसे नंगरहार, पक्तिका और खोस्त में हवाई हमले किए, जिनका उद्देश्य पाकिस्तानी तालिबान (TTP) और ISIS-K के आतंकी कैंपों को निशाना बनाना था। अफगानिस्तान के अधिकारियों का दावा है कि इन हमलों में महिलाएं और बच्चे मारे गए, साथ ही हज के लिए ईंधन डिपो को भी नुकसान पहुंचा। इन हमलों के जवाब में अफगानिस्तान की रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तानी सेना की स्थिति पर जवाबी कार्रवाई शुरू की। यह संघर्ष दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों, खासकर तालिबान की ओर से पाकिस्तानी आतंकियों को शरण देने के आरोपों का नतीजा है।

    अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि कुनार और नंगरहार प्रांतों में ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया। अफगान बलों ने दावा किया कि इस कार्रवाई में 14 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, 11 घायल हुए, एक आर्मर्ड टैंक और एक इंटरनेशनल वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया। अफगानिस्तान ने इसे पाकिस्तानी सेना की ओर से किए गए अपराधों के जवाब में जरूरी कदम बताया। इस बीच, स्थानीय रिपोर्टों में एक परिवार के चार सदस्यों के मारे जाने और तीन के घायल होने की बात कही गई है, जो सीमा पर गोलीबारी से जुड़ी है। दोनों पक्षों के दावों में काफी अंतर है और स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है।

    पाकिस्तान के दावे अलग

    पाकिस्तान ने इन आरोपों का खंडन किया है और जवाबी कार्रवाई में अफगानिस्तान के कई क्षेत्रों जैसे काबुल, कंधार और पक्तिया में हवाई हमले किए। पाकिस्तान ने ऑपरेशन गजब लिल हक शुरू किया, जिसमें अफगान सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि उनके हमलों में सैकड़ों अफगान लड़ाके मारे गए, जबकि अपनी तरफ कम नुकसान हुआ। यह तनाव फरवरी 2026 से शुरू हुए संघर्ष का हिस्सा है, जहां दोनों देश ओपन वॉर की स्थिति तक पहुंच गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन, रूस, कतर आदि देशों ने डी-एस्केलेशन की अपील की है।

    यह घटनाक्रम डूरंड लाइन विवाद और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों की गहरी असहमति को उजागर करता है। अफगानिस्तान पाकिस्तान पर हमलों का आरोप लगाता है, जबकि पाकिस्तान अफगानिस्तान को आतंकियों की सुरक्षित जगह बताता है। अगर यह जारी रहा तो क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिसमें नागरिकों की जान जोखिम में है। दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की जरूरत है, वरना स्थिति और बिगड़ सकती है।

  • एयरस्ट्राइक के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव तेज

    एयरस्ट्राइक के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव तेज

    नई दिल्ली। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव तेजी से बढ़ गया है। पाकिस्तान द्वारा कथित तौर पर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर की गई एयरस्ट्राइक के बाद अब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू करने का दावा किया है।
    पिछले करीब 48 घंटों से जारी छिटपुट गोलीबारी अब भारी हथियारों के इस्तेमाल तक पहुंच गई है।

    तालिबान का जवाबी कार्रवाई का दावा
    तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि नागरिकों की मौत के जवाब में अफगान बलों ने पाकिस्तानी सैन्य चौकियों और ठिकानों को निशाना बनाया। उनके अनुसार, कार्रवाई में मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर, टैंक, आर्टिलरी और मोर्टार जैसे भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया।

    15 चौकियों पर कब्जे का दावा
    तालिबान प्रवक्ता ने दावा किया कि नंगरहार-खैबर और कुनार-बाजौर सीमाई इलाकों में हमले कर पाकिस्तान की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है।
    बताया गया कि नंगरहार सीमा के पास दो, गोश्ता क्षेत्र के आसपास तीन और कुनार सीमा पर दो चौकियों पर अफगान बलों की मौजूदगी है। हालांकि इन दावों की पाकिस्तान की ओर से स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
    22 फरवरी की एयरस्ट्राइक से बढ़ा विवाद
    तनाव की शुरुआत 22 फरवरी को हुई, जब पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने नंगरहार प्रांत के खोग्यानी और गनी खेल जिलों तथा पक्तिका के बेरमल और अर्गुन क्षेत्रों में हवाई हमले किए।

    स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इन हमलों में एक ही परिवार के 16 नागरिकों की मौत हुई।

    पाकिस्तान का कहना था कि कार्रवाई आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ की गई, जबकि तालिबान प्रशासन ने इसे नागरिकों पर हमला बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

    क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

    दोनों देशों के बीच सीमा पार गतिविधियों और उग्रवादी संगठनों को लेकर पहले भी आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। मौजूदा सैन्य टकराव ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो यह संघर्ष व्यापक रूप ले सकता है।

  • किन मुस्लिम देशों में नहीं खेली जाती होली? रंग दिखने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा

    किन मुस्लिम देशों में नहीं खेली जाती होली? रंग दिखने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा


    नई दिल्ली । होली भारत का वह त्योहार है जो खुशियों हंसी मजाक और रंगों से भरा होता है. यह त्योहार गिले शिकवे भूलकर आपसी रिश्तों में मिठास घोलने पुराने मतभेद मिटाने और जीवन में नए उत्साह को लाने का प्रतीक माना जाता है. भारत में होली को खुले मैदानों गलियों और सड़कों पर मनाया जाता है जहां बड़े बड़े जुलूस रंगों का उत्सव और पारंपरिक मिठाइयों के साथ धूमधाम होती है लेकिन जब हम सीमाओं के पार झांकते हैं खासकर उन देशों में जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं तो होली का रंग और उत्साह कई तरह से बदल जाता है.

    कई इस्लामिक देशों में धार्मिक और सामाजिक नियम इतने सख्त हैं कि होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है. कुछ जगहों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है और रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है.

    किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है

    अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद धार्मिक नियम बहुत सख्त हो गए हैं. हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है इसलिए होली अब सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती है. रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है. त्योहार सिर्फ घर या मंदिर के भीतर ही सीमित है. प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है लेकिन खुले मैदानों पर कोई उत्सव नहीं होता है. इसलिए अफगानिस्तान में होली का रंग फीका नहीं बल्कि दबा हुआ है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है.

    इसके अलावा सऊदी अरब में गैर इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय तक सख्ती रही है. भारतीय प्रवासी भी सिर्फ निजी परिसरों या दूतावास में ही होली मना सकते हैं. वहीं अन्य खाड़ी देश जैसे कतर और ओमान मे धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है. सार्वजनिक रूप से रंग खेलना नहीं होता है सिर्फ प्रशासन की अनुमति से निजी कार्यक्रम हो सकते हैं. इन देशों में होली का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित या बहुत सीमित है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो उसे कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

    रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है

    कुछ इस्लामिक देशों में होली में रंग खेलना या सार्वजनिक रूप से मनाना कानूनी अपराध माना जाता है और इसके लिए सजा काफी कड़ी हो सकती है. सजा की सीमा देश के कानून और स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करती है. जैसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से होली के रंग खेलना या जुलूस निकालना गैरकानूनी है. उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

    विशेष रूप से तालिबानी शासन के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी सार्वजनिक आयोजन कठोर रूप से रोका जाता है. वहीं सऊदी अरब में रंग खेलते पकड़े जाने पर अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ मामलों में जेल या प्रत्यर्पण तक हो सकता है. वहीं कतर और ओमान में सार्वजनिक रूप से होली मनाना भी प्रतिबंधित है. उल्लंघन करने पर जुर्माना प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं.

    होली भारत का वह त्योहार है जो खुशियों हंसी मजाक और रंगों से भरा होता है. यह त्योहार गिले शिकवे भूलकर आपसी रिश्तों में मिठास घोलने पुराने मतभेद मिटाने और जीवन में नए उत्साह को लाने का प्रतीक माना जाता है. भारत में होली को खुले मैदानों गलियों और सड़कों पर मनाया जाता है जहां बड़े बड़े जुलूस रंगों का उत्सव और पारंपरिक मिठाइयों के साथ धूमधाम होती है लेकिन जब हम सीमाओं के पार झांकते हैं खासकर उन देशों में जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं तो होली का रंग और उत्साह कई तरह से बदल जाता है.

    कई इस्लामिक देशों में धार्मिक और सामाजिक नियम इतने सख्त हैं कि होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है. कुछ जगहों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है और रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है.

    किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है

    अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद धार्मिक नियम बहुत सख्त हो गए हैं. हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है इसलिए होली अब सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती है. रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है. त्योहार सिर्फ घर या मंदिर के भीतर ही सीमित है. प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है लेकिन खुले मैदानों पर कोई उत्सव नहीं होता है. इसलिए अफगानिस्तान में होली का रंग फीका नहीं बल्कि दबा हुआ है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है.

    इसके अलावा सऊदी अरब में गैर इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय तक सख्ती रही है. भारतीय प्रवासी भी सिर्फ निजी परिसरों या दूतावास में ही होली मना सकते हैं. वहीं अन्य खाड़ी देश जैसे कतर और ओमान मे धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है. सार्वजनिक रूप से रंग खेलना नहीं होता है सिर्फ प्रशासन की अनुमति से निजी कार्यक्रम हो सकते हैं. इन देशों में होली का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित या बहुत सीमित है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो उसे कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

    रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है

    कुछ इस्लामिक देशों में होली में रंग खेलना या सार्वजनिक रूप से मनाना कानूनी अपराध माना जाता है और इसके लिए सजा काफी कड़ी हो सकती है. सजा की सीमा देश के कानून और स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करती है. जैसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से होली के रंग खेलना या जुलूस निकालना गैरकानूनी है. उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

    विशेष रूप से तालिबानी शासन के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी सार्वजनिक आयोजन कठोर रूप से रोका जाता है. वहीं सऊदी अरब में रंग खेलते पकड़े जाने पर अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ मामलों में जेल या प्रत्यर्पण तक हो सकता है. वहीं कतर और ओमान में सार्वजनिक रूप से होली मनाना भी प्रतिबंधित है. उल्लंघन करने पर जुर्माना प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं.

  • अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में सैन्य ठिकानों को किया ध्‍वस्‍त, दी सख्त चेतावनी

    अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में सैन्य ठिकानों को किया ध्‍वस्‍त, दी सख्त चेतावनी


    नई दिल्ली। दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अब गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस कदम ने दोनों देशों के बीच तनाव को संभावित पूर्ण युद्ध की स्थिति में खड़ा कर दिया है।

    हवाई हमले का विवरण

    अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार हमला शुक्रवार सुबह लगभग 11:00 बजे किया गया। तालिबानी लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर गहरी पैठ बनाते हुए राजधानी इस्लामाबाद के पास फैजाबाद के सैन्य शिविर नौशेरा के सैन्य मुख्यालय जम़रुद की सैन्य टाउनशिप और एबटाबाद के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। प्रवक्ता इनायतुल्ला ख्वारज्मी ने कहा ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। हमने पाकिस्तान सेना के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्रों और सुविधाओं को ध्वस्त किया।तालिबान प्रशासन ने इस हमले को प्रतिशोध बताया। अफगान अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने हाल ही में अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था और यह कार्रवाई उसी का जवाब है।

    सख्त चेतावनी

    अफगान सेना के प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि यदि कोई भी सैन्य गतिविधि दोबारा हुई तो जवाब और भी भयानक होगा। उन्होंने कहा हम किसी भी आक्रामकता का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेंगे। अगर हमला दोहराया गया तो इस्लामाबाद समेत अन्य प्रमुख शहर भी निशाने पर होंगे।”

    सीमा पर तैयारियाँ

    सिर्फ हवाई हमले तक सीमित नहीं अफगान सेना ने सीमावर्ती इलाकों में टैंक और भारी हथियार तैनात कर दिए हैं। किसी भी संभावित जवाबी हमले के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। सुरक्षा विश्लेषक अब्दुल सादिक हामिदजोय का कहना है कि तालिबान पिछले चार दशकों से युद्धरत रहे हैं और उनके पास आधुनिक सैन्य क्षमताओं से निपटने का अनुभव है।

    बढ़ता क्षेत्रीय संकट

    काबुल और इस्लामाबाद की इस भिड़ंत ने वैश्विक समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। दोनों देश एक-दूसरे पर आतंकवाद को पनाह देने और जवाबी हमलों के आरोप लगाते रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यह संघर्ष तुरंत नियंत्रित नहीं हुआ तो यह पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है। फिलहाल पाकिस्तान की ओर से हमले के नुकसान को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं।

  • पाकिस्तान ने फिर अफगानिस्तान में घुसकर की सैन्य कार्रवाई, 7 आतंकी ठिकानों पर दागी मिसाइल

    पाकिस्तान ने फिर अफगानिस्तान में घुसकर की सैन्य कार्रवाई, 7 आतंकी ठिकानों पर दागी मिसाइल


    इस्लामाबाद/काबुल।
    पाकिस्तान (Pakistan) ने एक बार फिर अफगानिस्तान (Afghanistan.) के भीतर घुसकर सैन्य कार्रवाई (Military Action) की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि सीमा पार सात आतंकी कैंप और ठिकानों को निशाना बनाया गया।

    इस्लामाबाद का कहना है कि ये ठिकाने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और इस्लामिक स्टेट-खोरासान (ISKP) से जुड़े लोगों के थे. पाकिस्तान सरकार TTP को ‘फितना अल खवारिज’ कहती है. बयान में कहा गया कि हाल के आत्मघाती हमलों, जिनमें इस्लामाबाद की इमाम बारगाह, बाजौर और बन्नू में धमाके शामिल हैं, के बाद यह जवाबी कार्रवाई की गई. रमजान के महीने में हुए ताजा हमले को भी इसका कारण बताया गया. पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके पास पक्के सबूत हैं कि ये हमले अफगानिस्तान में बैठे नेतृत्व और संचालकों के इशारे पर कराए गए. बयान में कहा गया कि जिम्मेदारी भी अफगानिस्तान में मौजूद टीटीपी और ISKP ने ली थी. पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर चुने हुए ठिकानों पर की गई. इस हमले पर तालिबान ने कहा है कि अब वह सही समय पर जवाब देगा।

    बलूच एक्टिविस्ट मीर यार बलोच ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान की कायर सेना ने एक बार फिर अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया और पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में ड्रोन और हवाई हमले किए. उनके मुताबिक इन हमलों में एक धार्मिक मदरसे को निशाना बनाया गया, जहां मौजूद कुरान की प्रतियां भी नष्ट हो गईं. मीर यार बलोच ने इसे ‘दमनकारी सैन्य कार्रवाई’ करार दिया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्र में अस्थिरता और नफरत को और बढ़ाएगी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने रमजान से पहले कार्रवाई की धमकी दी थी।


    तालिबान के प्रवक्ता ने क्या कहा?

    अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बीती रात पाकिस्तानी सेना ने अफगान क्षेत्र में घुसकर नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में बमबारी की. उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में महिलाएं और बच्चे भी मारे गए और कई लोग घायल हुए हैं. मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा नाकामियों को छिपाने के लिए अफगान जमीन को निशाना बना रहा है और ऐसे कदम क्षेत्र में हालात और बिगाड़ेंगे।


    एयर स्ट्राइक से पहले दहला पाकिस्तान

    इस हमले से पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में एक आत्मघाती हमला हुआ था. पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR के अनुसार, एक खुफिया अभियान के दौरान सेना के काफिले को निशाना बनाया गया. हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सिपाही की मौत हो गई. सेना ने कहा कि पांच आतंकियों को मार गिराया गया, लेकिन एक विस्फोटक वाहन सेना की गाड़ी से टकरा गया, जिससे भारी नुकसान हुआ. इससे पहले 16 फरवरी को बाजौर में भी एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था. उसमें 11 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई थी. एक बच्ची की भी जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे. पाकिस्तान ने कहा कि हमलावर अफगान तालिबान की विशेष इकाई से जुड़ा था और टीटीपी ने हमले की जिम्मेदारी ली थी।


    पाकिस्तान का क्या है आरोप?

    पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि अफगान तालिबान सरकार अपनी जमीन से टीटीपी को काम करने से रोकने में नाकाम रही है. बयान में कहा गया कि कई बार चेतावनी देने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए. पाकिस्तान ने दोहा समझौते का हवाला देते हुए कहा कि अफगान अंतरिम सरकार को अपनी जमीन किसी दूसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए।


    पहले भी किया है हमला

    यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने सीमा पार हमला किया हो. पिछले साल भी अफगानिस्तान के खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमलों की खबर आई थी. उस समय काबुल ने पाकिस्तान पर बमबारी का आरोप लगाया था, हालांकि इस्लामाबाद ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी. दोनों देशों के रिश्ते 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद से लगातार बिगड़ते रहे हैं. सीमा पर झड़पें आम हो चुकी हैं।

  • बंगाल में CAA लागू करने के लिए मोदी सरकार ने बनाई विशेष समिति, विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम

    बंगाल में CAA लागू करने के लिए मोदी सरकार ने बनाई विशेष समिति, विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम



    कोलकाता। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह कदम 2024 में अधिसूचित CAA नियमों के तहत बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    समिति का काम अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के नागरिकता आवेदन की जांच और मंजूरी देना है। यह सुनिश्चित करेगी कि सभी आवेदन पूरी तरह से सही हों और आवेदक नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6B के अनुसार पात्र हों।

    समिति में शामिल अधिकारी
    केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार समिति का गठन इस प्रकार हुआ है:
    अध्यक्ष: डिप्टी रजिस्ट्रार जनरल, जनगणना कार्य निदेशालय, पश्चिम बंगाल

    प्रमुख सदस्य:
    सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) का उप सचिव स्तर का अधिकारी
    क्षेत्रीय विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRRO) द्वारा नामित अवर सचिव स्तर का अधिकारी
    राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), पश्चिम बंगाल का अवर सचिव स्तर का अधिकारी
    पश्चिम बंगाल के पोस्ट मास्टर जनरल या उनके द्वारा नामित डाक अधिकारी

    विशेष आमंत्रित सदस्य:
    पश्चिम बंगाल सरकार का प्रमुख सचिव (गृह) या अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) कार्यालय का प्रतिनिधि
    रेलवे के क्षेत्रीय मंडल रेल प्रबंधक (DRM) का प्रतिनिधि

    नागरिकता पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
    नियम 11A के तहत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के लोग जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे, नागरिकता के लिए पात्र हैं। इन आवेदकों को अपना आवेदन इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा करना होगा।

    राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और मतुआ समुदाय
    यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति में संवेदनशील है।

    मतुआ समुदाय: बांग्लादेश से आए लाखों मतुआ और बंगाली हिंदू लंबे समय से भारतीय नागरिकता की प्रतीक्षा कर रहे हैं और यह उनका बड़ा वोट बैंक है।

    टीएमसी का रुख: सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि CAA लागू होने से मतुआ समुदाय के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने समुदाय से CAA शिविरों से दूर रहने की अपील की है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि वह बंगाल में CAA लागू नहीं होने देंगी।

    गृह मंत्रालय का उद्देश्य इस सशक्त समिति के माध्यम से पश्चिम बंगाल में CAA से जुड़ी भ्रम और लंबित आवेदनों के गतिरोध को दूर करना है।

  • T20 वर्ल्ड कप 2026: अफगानिस्तान, आयरलैंड और यूएसए की सुपर 8 की उम्मीदें घटीं, जानें भारत की स्थिति

    T20 वर्ल्ड कप 2026: अफगानिस्तान, आयरलैंड और यूएसए की सुपर 8 की उम्मीदें घटीं, जानें भारत की स्थिति


    नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सुपर 8 की दौड़ अब कुछ टीमों के लिए मुश्किल होती जा रही है। पिछली बार की सेमीफाइनलिस्ट अफगानिस्तान अपने पहले दो मैचों में न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका से हार चुकी है, जिससे उसका सुपर 8 में पहुंचना मुश्किल लग रहा है।

    अफगानिस्तान के साथ-साथ आयरलैंड और यूएसए भी लीग फेज में 2-2 हार के साथ मुश्किल में हैं। आधिकारिक तौर पर अभी कोई टीम बाहर नहीं हुई है, लेकिन इन तीनों टीमों के लिए सुपर 8 की राह लगभग बंद होती नजर आ रही है। कारण यह है कि ग्रुप में आगे बढ़ने के लिए कम से कम 3 जीत जरूरी हैं। अफगानिस्तान के लिए बुधवार का मुकाबला साउथ अफ्रीका से “करो या मरो” था, जो डबल सुपर ओवर तक गया लेकिन टीम हार गई।

    ग्रुप A में पाकिस्तान शानदार शुरुआत कर रहा है और अपने पहले दो मैच जीतकर 4 अंकों के साथ टॉप पर है। भारत दूसरे स्थान पर है, जिसने अपने पहले मैच में यूएसए को हराया। नीदरलैंड तीसरे नंबर पर है, जिसने 2 में से एक मैच जीत रखा है, जबकि नामीबिया एक मैच हार चुकी है। इस ग्रुप में यूएसए का हाल सबसे खराब है, जिसने अपने पहले दो मुकाबले गंवा दिए हैं।

    ग्रुप B में ऑस्ट्रेलिया नंबर एक की पोजिशन पर है, जिसने अपने पहले मैच में आयरलैंड को हराकर दम दिखाया। जिम्बाब्वे दूसरे स्थान पर है, जिसने ओमान को हराया, जबकि श्रीलंका तीसरे नंबर पर है, जिसने आयरलैंड को मात दी। ग्रुप में आयरलैंड दो मैच हारकर चौथे नंबर पर खिसक गया है और ओमान ने अब तक खेला गया एक मैच गंवाया है।

    ग्रुप C में वेस्टइंडीज ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है और दोनों मैच जीतकर 4 अंकों के साथ ग्रुप में टॉप पर है। स्कॉटलैंड और इंग्लैंड दोनों ने अपने दो मैचों में से एक-एक मैच जीता है और क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। नेपाल और इटली का ग्रुप में प्रदर्शन कमजोर रहा है; नेपाल एक मैच हार चुका है और इटली ने भी खेला गया एक मैच गंवा दिया है।

    ग्रुप D में न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका दोनों ने अपने पहले दो मैच जीतकर क्रमशः टॉप और दूसरे नंबर पर जगह बनाई है। अफगानिस्तान दो मैच हारकर तीसरे नंबर पर खिसक गया है, जबकि UAE ने खेला गया एक मैच गंवाया है और कनाडा भी अपने पहले मैच में हार का सामना कर चुकी है। इस ग्रुप में टॉप 2 टीमें ही सुपर 8 में जाएंगी।

  • बूंद-बूंद पानी को तरसेगा पाकिस्तान…! अफगानिस्तान से पंगा लेना पड़ा भारी, $4.5 अरब का नुकसान

    बूंद-बूंद पानी को तरसेगा पाकिस्तान…! अफगानिस्तान से पंगा लेना पड़ा भारी, $4.5 अरब का नुकसान


    इस्लामाबाद।
    पिछले दिनों अफगानिस्तान और पाकिस्तान (Pakistan-Afghanistan) के बीच तनावपूर्ण माहौल हो गया था। दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति भी आ गई, जहां पाकिस्तान ने तालिबान के शासन वाले अफगानिस्तान (Afghanistan) में कई हवाई हमले भी किए। इसके बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से होने वाले सीमा व्यापार को भी बंद कर दिया। पाकिस्तान को लगा था कि इस कदम से तालिबान को आर्थिक झटका लगेगा, लेकिन अब उलटा हो गया। व्यापार को बंद करने से पाकिस्तान (Pakistan) को साढ़े चार अरब डॉलर का नुकसान (Loss of $4.5 billion) हुआ है। इससे शहबाज शरीफ के देश की कमर टूट गई है।

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान जॉइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PAJCCI) का कहना है, ”बॉर्डर बंद होने से अब तक पाकिस्तान के व्यापार को $4.5 बिलियन से ज़्यादा का नुकसान हुआ है।” पाकिस्तानी मीडिया ने चैंबर के हवाले से बताया कि खेती और कंस्ट्रक्शन के पीक टाइम में रोजाना एक्सपोर्ट $50 मिलियन से $60 मिलियन के बीच पहुंच गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो दिसंबर और मार्च के बीच संतरे और आलू जैसे मौसमी एक्सपोर्ट को लगभग $200 मिलियन का और नुकसान हो सकता है।

    बता दें कि पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) के लड़ाके उसके देश में आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं। टीटीपी के कथित हमलों में पाकिस्तानी सेना के कई जवानों की मौत हो चुकी है, जबकि आम नागरिकों की भी जान गई है। इसी के चलते पाकिस्तान ने लगभग दो महीने पहले अफगानिस्तान के साथ सभी व्यापार मार्ग बंद कर दिए थे, जिसके जवाब में अफगान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी।

    अफगानिस्तान ने भी की थी जवाबी कार्रवाई
    इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान (IEA) ने भी पाकिस्तान के साथ व्यापार निलंबित कर दिया और उद्योगपतियों और व्यापारियों से वैकल्पिक व्यापार मार्गों का उपयोग करने का आग्रह किया। अफगान अधिकारियों का कहना है कि व्यापार मार्गों को बार-बार बंद करने और वाणिज्यिक और मानवीय मामलों के राजनीतिकरण के कारण IEA के पास यह कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।


    पाक को उलटा पड़ा अपना कदम

    पाकिस्तान के अखबार ने PAJCCI का हवाला देते हुए बताया कि इस बंद होने की वजह से महत्वपूर्ण व्यापार गलियारे को लगभग खत्म कर दिया, जिसकी कीमत सालाना अरबों डॉलर थी। बंदी से पहले, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग $2-3 बिलियन प्रति वर्ष था, जिसमें पाकिस्तान उच्च मूल्य वाले सामान निर्यात करता था, जबकि अफगानिस्तान आवश्यक वस्तुओं के लिए पाकिस्तान पर निर्भर था और बदले में कृषि उत्पाद निर्यात करता था। पाकिस्तान को अब अपना ही कदम उलटा पड़ गया है। एक तरफ भारत उसे सालों से आर्थिक झटका देता रहा है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान से भी उसे अरबों का नुकसान होने लगा।

    भारत के बाद अफगानिस्तान का बड़ा कदम

    भारत के बाद अब अफगानिस्तान पाकिस्तान का पानी रोकने वाला है। तालिबान सरकार यह योजना बना रही है कि कुनार नदी का बहाव अफगानिस्तान नांगरहार क्षेत्र की तरफ मोड़ दिया जाए। अगर ऐसा होता है कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पानी की भारी किल्लत हो जाएगी। बता दें कि भारत द्वारा सिंधु नदी समझौता रद्द करने के बाद पाकिस्तान पहले ही पानी के लिए मुहाल है। ऐसे में अगर अफगानिस्तान ने भी पानी रोक दिया तो पाकिस्तान के लिए मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ जाएंगी। वहीं, पहले ही पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर जारी तनाव के बीच एक नया मोर्चा भी खुलने का अंदेशा है।

    जानकारी के मुताबिक इसको लेकर बैठकें भी हो चुकी हैं और फैसले पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है। अफगानिस्तान की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री के आर्थिक आयोग की तकनीकी कमेटी की बैठक में एक प्रस्ताव पास हुआ है। यह प्रस्ताव कुनार नदी के पानी को नांगरहार के दारुंता डैम में ट्रांसफर करने को लेकर है। अब इसे अंतिम फैसले के लिए आर्थिक आयोग के पास भेजा गया है। एक बार यह प्रस्ताव लागू हो गया तो अफगानिस्तान के नांगरहार इलाके में बड़ी संख्या में खेती वाली जमीनों के लिए पानी की समस्या हल हो जाएगा। लेकिन पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में पानी की बेहद कमी हो जाएगी।


    पाकिस्तान कैसे होगा प्रभावित

    कुनार नदी करीब 500 किमी लंबी है। यह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चित्रल जिला स्थित हिंदुकुश पहाड़ी से निकलती है। इसके बाद यह दक्षिणी अफगानिस्तान में कुनार और नांगरहार प्रांतों में बहती है। इसके बाद यह काबुल नदी में जाकर मिल जाती है। इन दोनों नदियों से पेच नदी भी जुड़ती और यह फिर से पूरब की तरफ मुड़ती हुई पाकिस्तान पहुंच जाती है। यहां पर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित अटॉक सिटी में सिंधु नदी से मिलती है।

    इस नदी का पाकिस्तान में बहाव सबसे ज्यादा है। सिंधु नदी की तरह यह वहां पर सिंचाई, पीने के पानी और हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर के इस्तेमाल में आती है। खासतौर पर यह खैबर पख्तूनख्वा इलाके लिए बेहद अहम, जहां अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच भिड़ंत होती है। अब अगर अफगानिस्तान उस जगह पर बांध बना देता है, जहां से कुनार पाकिस्तान में एंट्री करती है तो वहां पर हालात खराब हो जाएंगे। इसके चलते पाकिस्तान में सिंचाई, पीने के पानी और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के लिए पानी मिलना मुहाल हो जाएगा। बता दें कि भारत द्वारा सिंधु नदी जल समझौता रद्द होने के चलते पाकिस्तान के लोग पहले ही परेशान हैं।


    यह भी परेशानी का सबब

    सबसे खास बात यह है कि अफगानिस्तान को रोकने के लिए पाकिस्तान कोई दबाव भी नहीं बना सकता। वजह, भारत के साथ तो पाकिस्तान का सिंधु नदी जल समझौता था, लेकिन अफगानिस्तान के साथ उसका कोई ऐसा समझौता नहीं है।

  • पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी

    पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तालिबान सरकार अब इस्लामाबाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा डिप्लोमैटिक अभियान शुरू करने की तैयारी में है। अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान उसकी सीमा के भीतर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए सैन्य हमले कर रहा है और आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। इसी को लेकर तालिबान प्रशासन दुनिया के अलग-अलग देशों में अपने प्रतिनिधि भेजने की योजना बना रहा है।

    तालिबान की ओर से तैयार किए गए एक विस्तृत डोजियर में पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने, मानवाधिकारों के उल्लंघन और अफगान नागरिकों व शरणार्थियों पर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस डोजियर में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान आर्थिक दबाव और जबरन निर्वासन के जरिए अफगानिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने मिलकर यह दस्तावेज तैयार किया है, जिसे तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा की मंजूरी के बाद प्रभावशाली और पड़ोसी देशों को सौंपा जाएगा। इसमें पाकिस्तान को “आतंकवादियों के लिए सुविधा केंद्र” बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां ISIS और अन्य आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता दे रही हैं।

    अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों का इस्तेमाल अफगानिस्तान, भारत और ईरान जैसे देशों को अस्थिर करने के लिए कर रहा है और उसके पास इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार अफगान तालिबान पर टीटीपी को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा बंद है और हाल के महीनों में तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है।

    इस डिप्लोमैटिक अभियान के जरिए तालिबान का उद्देश्य पाकिस्तान की कथित नीतियों को वैश्विक मंच पर उजागर करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचना बताया जा रहा है।