Tag: Akhilesh Yadav

  • यूपी में गो माता पूरी तरह सुरक्षित: केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चेताया

    यूपी में गो माता पूरी तरह सुरक्षित: केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चेताया



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में कहीं भी गोहत्या नहीं हो रही है और किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि गो माता को खरोंच तक पहुंचा सके। उन्होंने यह बात सोमवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। मौर्य ने कहा कि सरकार गो संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में पहले भी व्यापक आंदोलन किए गए हैं।

    यह बयान Keshav Prasad Maurya ने उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गोहत्या होने के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया, जो स्वामी Avimukteshwaranand द्वारा लगाए गए थे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी Avimukteshwaranand को कहीं भी आने-जाने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, और सरकार उनके सम्मान की पूरी सुरक्षा करती है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सब समझती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिनके शासनकाल में शिव भक्तों, राम भक्तों और गो भक्तों पर अत्याचार हुए, वे आज गो रक्षा की बात कर रहे हैं।

    राज्य सरकार ने लगातार गो संरक्षण को प्राथमिकता दी है। गौशालाओं और गो रक्षा समितियों के माध्यम से गो माता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, और कानूनी प्रावधानों के तहत गोहत्या और हिंसा के मामलों पर सख्त कार्रवाई होती है। इस दिशा में सरकार ने पुलिस और वन विभाग के साथ मिलकर नियमित निगरानी प्रणाली लागू की है।

    Keshav Prasad Maurya का यह बयान प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या संगठन कानून का उल्लंघन करते हुए गो माता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    इस प्रकार के राजनीतिक और धार्मिक बयान समाज में चर्चा का विषय बनते हैं, लेकिन उपमुख्यमंत्री ने इसे संतुलित और शांतिपूर्ण तरीके से पेश किया है, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि गो माता की सुरक्षा और कानून की पालना दोनों सुनिश्चित हों।

  • सेवढ़ा में पुरानी रंजिश के चलते युवक की हत्या, मुख्य आरोपी रवि बघेल गिरफ्तार

    सेवढ़ा में पुरानी रंजिश के चलते युवक की हत्या, मुख्य आरोपी रवि बघेल गिरफ्तार


    दतिया/ सेवढ़ा। अंगद सरकार मंदिर के पास स्थित व्यस्त बस स्टैंड क्षेत्र में हुई एक सनसनीखेज हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। 17 फरवरी की यह वारदात पुरानी रंजिश का नतीजा बताई जा रही है। हत्या के मुख्य आरोपी रवि बघेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच में यह सामने आया है कि आरोपी ने अखलेश यादव पर हमला करने के लिए मौका देख कर पत्थर से हमला कर उसकी हत्या कर दी।

    घटना के समय क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई थी। वारदात का तरीका और स्थान यह संकेत दे रहे थे कि हत्या पूरी तरह से सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी। मंदिर परिसर के पास हत्या के दृश्य को देखकर स्थानीय लोगों में डर और दहशत फैल गई थी। पुलिस ने तुरंत ही क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

    पुलिस अधीक्षक के अनुसार, घटना स्थल और साक्ष्यों को देखकर हमें शक हुआ कि यह किसी व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा है। आरोपी की पहचान और उसके इरादों का पता लगाने के लिए तकनीकी और फील्ड साक्ष्यों का उपयोग किया गया। पुलिस ने लगातार दबिश दी और 25 फरवरी को पुख्ता सूचना मिलने पर रवि बघेल को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया।

    पूछताछ में आरोपी ने बताया कि यह हत्या पुरानी दुश्मनी के चलते की गई थी। उसने स्पष्ट किया कि उसका मकसद अखलेश यादव को रास्ते से हटाना था और मौका मिलते ही उसने पत्थर से हमला कर हत्या को अंजाम दिया। इस खुलासे के बाद इलाके में कुछ हद तक राहत महसूस की गई, क्योंकि मुख्य आरोपी अब पकड़ में आ चुका है।

    पुलिस फिलहाल यह भी जांच कर रही है कि इस हत्या में और कौन-कौन शामिल थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रवि बघेल के अलावा अन्य किसी की भूमिका है या नहीं, इसे लेकर छानबीन जारी है। सभी पहलुओं पर ध्यान देकर हम सुनिश्चित करेंगे कि न्याय के मार्ग में कोई बाधा न आए।

    गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे मामले से संबंधित किसी भी संदिग्ध जानकारी को साझा करें ताकि जांच में तेजी लाई जा सके। यह हत्या मामले ने एक बार फिर इस बात को स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत रंजिश कभी-कभी जानलेवा हो सकती है। 

  • संजय निषाद ने अखिलेश यादव के 100 विधायक ऑफर पर साधा निशाना, कहा- भाड़े के पहलवानों से अखाड़ा नहीं जीत सकते

    संजय निषाद ने अखिलेश यादव के 100 विधायक ऑफर पर साधा निशाना, कहा- भाड़े के पहलवानों से अखाड़ा नहीं जीत सकते


    नई दिल्ली । भदोही से जारी राजनीतिक बयानबाजी में यूपी के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के 100 विधायक लाकर मुख्यमंत्री बनने के ऑफर पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि सपा नेतृत्व खुद को कमजोर मान रहा है और दूसरों के सहारे सत्ता में आने का सपना देख रहा है। संजय निषाद ने तंज कसते हुए कहा “भाड़े के पहलवानों से अखाड़ा नहीं जीत सकते।

    भदोही में निषाद पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान मीडिया से बात करते हुए संजय निषाद ने साफ किया कि सपा का यह बयान ही साबित करता है कि उनके पास सरकार बनाने की ताकत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि PDA संकट में है और यदि यह स्थिति बनी रही तो 2027 के चुनाव में सपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा। संजय निषाद ने सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि वे असली पहलवान तैयार करते थे और संगठन को जमीन पर खड़ा करते थे जबकि आज अखिलेश यादव केवल ‘भाड़े के पहलवानों’ के सहारे सत्ता हासिल करना चाहते हैं।

    संजय निषाद ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पूरे सनातन समाज के पूज्यनीय हैं और उनके साथ किसी भी तरह का अनुचित व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने न्याय प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि कानून अपना काम करेगा और निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आएगी। साथ ही उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई की भी मांग की।

    संजय निषाद की यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। उनका कहना है कि सपा का यह ऑफर केवल हवा में बातें करने जैसा है और सत्ता हासिल करने के लिए असली संगठन और जमीन पर संघर्ष जरूरी है। उनका निशाना स्पष्ट रूप से यह दिखाता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और गठबंधन की ताकत पर सवाल उठ रहे हैं।

    उल्लेखनीय है कि इस बयान के बीच शंकराचार्य विवाद भी गर्म बना हुआ है जिसमें बालकों की शिखा खींचने और गिरफ्तारी का मुद्दा शामिल है। संजय निषाद ने कहा कि इस घटना से समाज आहत है लेकिन कानून सच्चाई सामने लाएगा और जिम्मेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित होगी। यूपी की सियासी हलचल में यह बयान और विवाद दोनों ही चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सियासत तेज, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सियासत तेज, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इस घटनाक्रम के बाद मामला धार्मिक दायरे से निकलकर सियासी अखाड़े में पहुंच गया है। विपक्षी दलों ने इसे गंभीर विषय बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।

    अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा हमला

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सच्चे संतों का अपमान कर भाजपा ने अपनी कार्यशैली उजागर कर दी है। उनके मुताबिक जो भी व्यक्ति या संत सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है उसे झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की जाती है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा का मकसद सत्ता के जरिए धन अर्जित करना है और इसके लिए वह किसी भी स्तर तक जा सकती है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के भीतर भी आपसी मतभेद हैं जिनकी आहट समय-समय पर सुनाई देती रहती है।

    कार्रवाई उन पर होनी चाहिए थी जिन्होंने रोका
    अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि जिस धार्मिक आयोजन में अविमुक्तेश्वरानंद शामिल होना चाहते थे उस दौरान प्रशासन को उनके तय मार्ग पर आपत्ति थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी ने उन्हें स्नान से रोका तो कार्रवाई उन लोगों पर होनी चाहिए थी न कि संत पर।उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक भगवाधारी संत के साथ ऐसा व्यवहार तब हो रहा है जब राज्य में खुद भगवाधारी मुख्यमंत्री सत्ता में हैं।

    भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार

    फिलहाल इस मामले में भाजपा की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है। धार्मिक आस्था कानून और राजनीति के बीच खिंची इस रेखा ने उत्तर प्रदेश की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। अब नजर इस बात पर है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आरोपों की सच्चाई क्या सामने आती है। वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास बता रहा है तो सत्ता पक्ष कानून की प्रक्रिया का हवाला दे रहा है।

  • कांग्रेस सांसद थरूर फोन पर बात करते हुए संसद की सीढ़ियों पर लड़खड़ाकर गिरे… अखिलेश यादव ने संभाला

    कांग्रेस सांसद थरूर फोन पर बात करते हुए संसद की सीढ़ियों पर लड़खड़ाकर गिरे… अखिलेश यादव ने संभाला

    नई दिल्ली। संसद (Parliament) के बजट सत्र (Budget Session) में इन दिनों हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच बुधवार को एक दिलचस्प घटना घटी, जिसने सोशल मीडिया पर सुर्खियाँ बटोरीं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) संसद भवन की सीढ़ियों पर फोन पर बात करते हुए लड़खड़ा गए और गिरते हुए नजर आए। हालांकि, इस दौरान समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तुरंत उनकी मदद की और उन्हें सहारा देकर गिरने से बचाया।

    वीडियो में देखा जा सकता है कि शशि थरूर जैसे ही बैलेंस खोते हैं, अखिलेश यादव पास खड़े होते हुए तेजी से उनकी ओर बढ़ते हैं और उन्हें सहारा देते हैं। साथ ही एक महिला सुरक्षा अधिकारी भी तुरंत मदद के लिए पहुंची। अखिलेश ने शशि थरूर को कुछ समय तक सहारा दिया और फिर उन्हें कुछ सीढ़ियाँ नीचे उतारा।

    https://twitter.com/ShashiTharoor/status/2019102516416479508
    इस घटना के बाद शशि थरूर ने ट्विटर (अब एक्स) पर एक शायराना अंदाज में पोस्ट किया, “जिस दिए को, तूफां में जलना होगा, उसे संभल संभल कर चलना होगा। मैं ठीक हूं।” सोशल मीडिया पर इस सजीव और संवेदनशील मदद की काफी सराहना हो रही है, और लोग अखिलेश यादव की सहज शिष्टाचार की तारीफ कर रहे हैं।

    इससे पहले, शशि थरूर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया था। उन्होंने यह आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर अतिशयोक्तिपूर्ण प्रतिक्रिया दी, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

  • UP SIR के इन आंकड़ों ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन! इस वजह से अब कर रहे फॉर्म 7 का जिक्र

    UP SIR के इन आंकड़ों ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन! इस वजह से अब कर रहे फॉर्म 7 का जिक्र


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के प्रमुख और कन्नौज के सांसद अखिलेश यादव ने चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR के दौरान फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे गैर-कानूनी तरीके से वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन कर रहे हैं.

    1 फरवरी और 2 फरवरी को जारी बयानों में कन्नौज सांसद ने आरोप लगाया कि PDA और अल्पसंख्यक वोटरों के नाम हटाने के लिए नकली दस्तखत के साथ फॉर्म-7 के आवेदन जमा किए जा रहे हैं. उन्होंने इस मुद्दे को एक बड़ा धोखा बताया, न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की और वोटर्स से मतदाता लिस्ट में अपने नाम वेरिफाई करने को कहा. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों से भी संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई करने की अपील की.अखिलेश ने कहा कि नामों को गलत तरीके से हटाने में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए. लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी को इस मुद्दे पर मिला अखिलेश यादव का साथ, जमकर हुआ हंगामा

    किस ओर इशारा कर रहे यूपी एसआईआर के आंकड़े?

    इन आरोपों के बीच, 6 जनवरी से 31 जनवरी 2026 के बीच फॉर्म-7 जमा करने का दिन-वार डेटा दिखाता है कि पूरे महीने में नाम हटाने और आपत्ति के आवेदनों में कैसे बढ़ोतरी हुई. 6, 7, और 8 जनवरी को कोई फॉर्म दर्ज नहीं किया गया. 9 जनवरी को 175 आवेदनों के साथ शुरू हुई, जबकि 10 जनवरी को कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं हुई. 11 जनवरी को 2,236 नए आवेदनों के साथ इसमें अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके बाद 12 जनवरी (677), 13 जनवरी (734), 14 जनवरी (736), 15 जनवरी (889), और 16 जनवरी (906) फॉर्म जमा हुए.

    महीने के दूसरे आधे हिस्से में यह गति और तेज हो गई. 17 जनवरी को 1,970 नए आवेदन दाखिल किए गए, इसके बाद 18 जनवरी को 3,865 आवेदन आए. 19 जनवरी से रोज़ाना के आंकड़े ज़्यादा रहे: 19 जनवरी (2,674), 20 जनवरी (2,670), 21 जनवरी (2,848), 22 जनवरी (2,787), 23 जनवरी (2,318), 24 जनवरी (2,861), 25 जनवरी (2,797), और 26 जनवरी (2,947). आखिरी दिनों में और बढ़ोतरी देखी गई-27 जनवरी (3,317), 28 जनवरी (3,424), 29 जनवरी (3,551), 30 जनवरी (4,288), और 31 जनवरी (8,503), जो एक दिन में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी थी. 31 जनवरी तक कुल मिलाकर 57,173 फॉर्म-7 एप्लीकेशन जमा हो चुके थे.

    क्या है फॉर्म 7?

    फॉर्म 7 भारत के चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराया गया आवेदन पत्र है जिसका इस्तेमाल वोटर लिस्ट से किसी का नाम हटाने या वोटर लिस्ट में किसी का नाम शामिल करने पर आपत्ति जताने के लिए किया जाता है. इसे तब भरा जाता है जब अमुक लगता है कि किसी मतदाता का नाम लिस्ट में नहीं होना चाहिए. ऐसा तब हो सकता है जब मतदाता की मौत हो गई हो, वह हमेशा के लिए दूसरी जगह चला गया हो, उसका नाम दो बार दर्ज हो, या वह किसी और वजह से बतौर मतदाता पंजीकृत होने के योग्य न हो. कोई मतदाता, सूची से अपना नाम हटवाने के लिए भी फॉर्म 7 का इस्तेमाल कर सकता है.