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  • पुलिस हिरासत और मीडिया की अफवाहों पर छलका राज कुंद्रा का दर्द, शिल्पा शेट्टी से जुड़े कई राज किए उजागर

    पुलिस हिरासत और मीडिया की अफवाहों पर छलका राज कुंद्रा का दर्द, शिल्पा शेट्टी से जुड़े कई राज किए उजागर


    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और व्यवसायी राज कुंद्रा ने साल 2021 में हुई अपनी गिरफ्तारी और उसके बाद जेल में बिताए कठिन समय से जुड़े कई नए पहलुओं को उजागर किया है। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया कि किस प्रकार कानूनी कानूनी समस्याओं के साथ-साथ उन्हें व्यक्तिगत जीवन में भी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। जब वे सलाखों के पीछे थे, तब उनके पास कई तरह की भ्रामक खबरें पहुंच रही थीं, जिसने उन्हें मानसिक रूप से बेहद तोड़ दिया था।

    राज कुंद्रा ने खुलासा किया कि उन्हें अपनी गिरफ्तारी की जानकारी भी काफी नाटकीय ढंग से मिली थी। वे पुलिस स्टेशन केवल पूछताछ में शामिल होने के लिए गए थे, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस बारे में जब उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से सवाल किया, तो उन्हें बताया गया कि उच्च अधिकारियों के आदेश के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी उनके परिवार और पत्नी शिल्पा शेट्टी को भी मीडिया माध्यमों के जरिए ही मिल सकी थी।

    जेल में बिताए दिनों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि व्यावसायिक स्तर पर भी उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। उनके भारतीय व्यवसाय में हजारों लोग कार्यरत थे, और उनके अचानक हिरासत में जाने से पूरा काम ठप हो गया। इस दौरान उनकी पत्नी शिल्पा शेट्टी ने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के बजाय तुरंत बंद करने का कठिन फैसला लिया, क्योंकि अनिश्चितता के माहौल में प्रबंधन संभालना लगभग असंभव हो गया था। एक ही झटके में सब कुछ बदल जाने से वे गहरा सदमा महसूस कर रहे थे।

    सबसे अधिक निराशाजनक स्थिति तब पैदा हुई जब जेल के भीतर उन तक यह खबर पहुंची कि उनकी पत्नी उनसे अलग हो रही हैं और तलाक की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। राज कुंद्रा के अनुसार, इस एक अफवाह ने उन्हें अंदर से पूरी तरह झकझोर दिया था। उस समय उन्हें लगा कि जीवन का कोई अर्थ नहीं बचा है, क्योंकि उनके लिए उनका परिवार ही सबसे पहली प्राथमिकता था। मानसिक तनाव इस कदर बढ़ गया था कि वे रातों को सो नहीं पाते थे और उनके मन में बेहद नकारात्मक विचार आने लगे थे।

    हालांकि, बाद में सच्चाई सामने आने और परिवार के स्पष्ट रुख से उन्हें संबल मिला। शिल्पा शेट्टी ने हर परिस्थिति में अपने पति का समर्थन करने का फैसला किया, जिससे उन्हें इस कठिन दौर से बाहर निकलने में मदद मिली। रिहाई के बाद राज कुंद्रा ने अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने का प्रयास शुरू किया और एक नई शुरुआत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जांच में पूरा सहयोग दे रहे हैं और यदि किसी भी अदालत में वे दोषी पाए जाते हैं, तो वे हर प्रकार की सजा भुगतने के लिए तैयार हैं।

    इस मामले के तार देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े हुए थे, जहां जांच एजेंसियों ने कई राज्यों में फैली डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल की थी। कानूनी जानकारों और मध्य प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों के विश्लेषकों का मानना है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में मीडिया रिपोर्ट्स का व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। फिलहाल राज कुंद्रा अपने व्यापारिक उपक्रमों को फिर से स्थापित करने और अपनी छवि को सुधारने में जुटे हुए हैं।

  • आईएसआई समर्थित नेटवर्क की दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हमले की साजिश पंजाब पुलिस ने विफल की।

    आईएसआई समर्थित नेटवर्क की दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हमले की साजिश पंजाब पुलिस ने विफल की।

    नई दिल्ली । पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से सीमा पार संचालित एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े दो अलग-अलग आतंकी मॉड्यूल को निष्क्रय करते हुए राजधानी दिल्ली में एक संभावित भीषण हमले की योजना को समय रहते नाकाम कर दिया गया है। जांच अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार यह नेटवर्क काफी समय से देश के विभिन्न संवेदनशील हिस्सों में समानांतर गतिविधियां चलाने का प्रयास कर रहा था।

    प्रारंभिक तफ्तीश में इस बात की पुष्टि हुई है कि इस साजिश का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर क्षेत्र में एकत्रित हुए छात्र आंदोलनकारियों को निशाना बनाना था। आतंकियों की मंशा भीड़भाड़ वाले इलाके में अफरा-तफरी और अशांति फैलाकर व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने की थी। सुरक्षा बलों द्वारा सही समय पर की गई त्वरित और सटीक कार्रवाई के चलते किसी भी तरह की अनहोनी घटना को होने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

    कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस सिलसिले में विभिन्न स्थानों से कुल नौ संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपियों में चार नाबालिग भी शामिल पाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल आकाओं द्वारा मोहरे के रूप में किया जा रहा था। तलाशी अभियान के दौरान संदिग्धों के कब्जे से कई अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद और आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की गई हैं। पूछताछ में सामने आया है कि इन सभी को सरहद पार बैठे हैंडलरों के माध्यम से लगातार दिशा-निर्देश प्राप्त हो रहे थे।

    सुरक्षा तंत्र के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मॉड्यूल के कुछ सदस्यों ने पहले ही जंतर-मंतर पहुंचकर वहां का जायजा ले लिया था। उन्हें इस गतिविधि को अंजाम देने के लिए जरूरी संसाधन और सहायता मुहैया कराई जा रही थी। हालांकि, निरंतर निगरानी और खुफिया जानकारी के सटीक विश्लेषण के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर ली गई। इस घटनाक्रम के उपरांत दिल्ली समेत देश के अन्य संवेदनशील राज्यों में सुरक्षा ढांचा और मजबूत किया जा रहा है।

    जांच में यह पहलू भी उजागर हुआ है कि गिरोह के सदस्यों को विभिन्न रणनीतिक स्थानों और सुरक्षा बलों के काफिलों की गतिविधियों की रेकी करने का जिम्मा सौंपा गया था। वे अपने डिजिटल उपकरणों से गोपनीय वीडियो तैयार कर विदेशी हैंडलरों को भेज रहे थे। इस नेटवर्क का उद्देश्य केवल एक तात्कालिक हमला करना नहीं, बल्कि लंबे समय तक देश में अस्थिरता का माहौल बनाए रखना था, जिसके चलते अब जांच का दायरा कई अन्य राज्यों तक विस्तृत कर दिया गया है।

    मामले में नाबालिगों की मौजूदगी ने सुरक्षा विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है। गिरोह के सरगना युवाओं और किशोरों को भड़काकर तथा पैसों का लालच देकर गैरकानूनी गतिविधियों में धकेल रहे थे। इसके अलावा, अवैध बैंकिंग मार्गों और हवाला के माध्यम से पैसों के लेन-देन की बात भी सामने आई है। वित्तीय जांच एजेंसियां इस पूरे फंडिंग नेटवर्क की तह तक जाने के लिए बैंक खातों और विदेशी संपर्कों की सूक्ष्म पड़ताल में जुटी हुई हैं।

    पुलिस और जांच एजेंसियां वर्तमान में गिरफ्तार किए गए सभी नौ आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर विस्तृत पूछताछ कर रही हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि अंतर-राज्यीय और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के कारण इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का समय पर पर्दाफाश संभव हो सका है। आने वाले दिनों में इस मामले की विस्तृत जांच के आधार पर कई अन्य महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां और नए तथ्य सामने आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

  • दहेज प्रताड़ना केस में 8 साल बाद गिरफ्तारी, कार्यक्रम के कार्ड ने खोल दिया फरार पिता-पुत्र का राज

    दहेज प्रताड़ना केस में 8 साल बाद गिरफ्तारी, कार्यक्रम के कार्ड ने खोल दिया फरार पिता-पुत्र का राज


    ग्वालियर । ग्वालियर पुलिस ने दहेज प्रताड़ना के एक बहुचर्चित मामले में आठ वर्षों से फरार चल रहे पिता-पुत्र को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बचने के लिए गुजरात के अलग-अलग शहरों में अपनी पहचान और ठिकाने बदल-बदलकर रह रहे थे। लगातार की जा रही तलाश के बावजूद पुलिस उनके करीब नहीं पहुंच पा रही थी लेकिन एक पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड ऐसा सुराग बना जिसने उनकी फरारी का अंत कर दिया।

    महिला सुरक्षा डीएसपी शिखा सोनी के अनुसार नवविवाहिता की शिकायत पर महिला थाने में उसके पति मंगल सिंह उर्फ पुतुआ राजावत और ससुर सुरेश सिंह राजावत के खिलाफ दहेज प्रताड़ना सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि विवाह के बाद दोनों ने कार और नकदी की मांग करते हुए महिला पर लगातार दबाव बनाया और प्रताड़ित कर उसे घर से निकाल दिया।

    मामला दर्ज होने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था लेकिन जमानत मिलने के बाद वे फरार हो गए। इसके बाद से पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी रही। संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी गई लेकिन दोनों हर बार पुलिस को चकमा देकर स्थान बदल लेते थे।

    आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए महिला थाना प्रभारी रश्मि भदौरिया के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी। टीम पिछले चार दिनों से गुजरात में संभावित ठिकानों पर लगातार कार्रवाई कर रही थी। दो दिन पहले पुलिस एक ऐसे ठिकाने पर पहुंची जहां आरोपी कुछ समय पहले तक रह रहे थे लेकिन वहां से वे निकल चुके थे। तलाशी के दौरान पुलिस को एक पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड मिला जिसमें भिंड का पता दर्ज था। यही कार्ड जांच का सबसे अहम सुराग साबित हुआ।

    पुलिस ने तुरंत रणनीति बदलते हुए भिंड में निगरानी शुरू की और सोमवार रात कार्यक्रम स्थल पर दबिश दी। वहां दोनों आरोपी मौजूद मिले जिन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे गिरफ्तारी से बचने के लिए हर कुछ महीनों में अपना ठिकाना बदल लेते थे और वर्षों बाद पहली बार किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने अपने गांव पहुंचे थे। इसी चूक की वजह से वे पुलिस के हत्थे चढ़ गए।

    अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान किन लोगों ने दोनों आरोपियों को शरण दी और उन्हें पुलिस से बचाने में मदद की। यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पूरी कार्रवाई में एएसआई संतपाल सिंह, वीर सिंह राजावत, प्रधान आरक्षक असीम कृष्ण यादव, मुकेश यादव, आरक्षक अंकुर शर्मा, राजदीप जाट और महिला आरक्षक काजल जादौन की अहम भूमिका रही। पुलिस मंगलवार को दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी। यह कार्रवाई लंबे समय से लंबित मामले में बड़ी सफलता मानी जा रही है और फरार आरोपियों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई का अहम उदाहरण भी है।

  • नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली । नीट परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर देश भर में जारी उथल-पुथल के बीच राज्य सरकारों का रुख बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि आंदोलन में भाग लेने वाले सामान्य और निर्दोष छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कठोर प्रशासनिक कदम नहीं उठाया जाएगा। हालांकि राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक रुख में यह भी साफ कर दिया गया है कि आपराधिक इतिहास रखने वाले या हिंसा में संलिप्त लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

    राज्य सरकार द्वारा जारी औपचारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि नीट परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रमों और छात्र असंतोष पर काफी गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया है। गहन समीक्षा के बाद प्रशासन ने यह तय किया है कि जो युवा या विद्यार्थी केवल अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे थे, उनके खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और न ही उन्हें बेवजह परेशान किया जाएगा। लेकिन इस सुरक्षा का दायरा केवल निर्दोष विद्यार्थियों तक ही सीमित रहेगा और पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले तत्वों पर कानून का शिकंजा कसता रहेगा।

    प्रशासनिक स्तर पर यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के हालिया दिशानिर्देशों और न्यायिक टिप्पणियों के अनुरूप उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने भी हाल ही में विभिन्न याचिकाओं पर विचार करते हुए साफ कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए, जबकि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर जांच एजेंसियां नियमानुसार कार्रवाई जारी रख सकती हैं। इसी के तहत राज्य के गृह विभाग ने अपने पुलिस बलों को निर्देश दिए हैं कि वे पुराने दर्ज मामलों की समीक्षा करें और छात्रों की पहचान सुनिश्चित करके ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाएं।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों और अव्यवस्था के सिलसिले में पुलिस में मामला दर्ज किया गया था। इस दर्ज मुकदमे की कड़ी में जांच एजेंसियों ने व्यापक छानबीन की है और अब तक कई संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने या पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर हमला करने का प्रयास किया था।

    उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल से पहले पूर्वोत्तर राज्य असम और पड़ोसी राज्य बिहार की सरकारों ने भी इसी तरह का उदार रुख अपनाया था। दोनों राज्यों ने घोषणा की थी कि परीक्षा में धांधली के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों और आम नागरिकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकारों का मानना है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किए गए प्रदर्शनों पर दंडात्मक रुख अपनाना उचित नहीं है, बशर्ते उसमें किसी असामाजिक तत्व की साजिश शामिल न हो।

    देशव्यापी स्तर पर नीट परीक्षा को लेकर मचा बवाल जुलाई के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय स्तर पर हुए बड़े घटनाक्रमों के बाद थमता नजर आया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद त्यागने के बाद विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के दो दौर की सकारात्मक बातचीत हुई थी। उस वार्ता के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों ने यह सहमति व्यक्त की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को निरस्त किया जाएगा, पुलिसिया उत्पीड़न रोका जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कानून लाया जाएगा। अब राज्य सरकारें उसी समझौते और न्यायिक आदेशों का क्रियान्वयन कर रही हैं।

  • कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं

    कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई से जुड़ा एक अलग तरह का मामला सामने आया है। आमतौर पर महिलाओं और छात्राओं के साथ छेड़छाड़ या उत्पीड़न की शिकायतों पर कार्रवाई करने वाली एंटी रोमियो टीम ने इस बार दो युवतियों को पुरुषों से कथित छेड़छाड़, अभद्र टिप्पणियां और अश्लील इशारे करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    यह घटना वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र की बताई गई है। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब पांच बजे चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर के नीचे दो युवतियों के राह चलते पुरुषों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों राहगीरों की ओर अश्लील टिप्पणियां कर रही थीं और आपत्तिजनक इशारे कर रही थीं। सूचना मिलते ही एंटी रोमियो स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों महिलाओं को हिरासत में ले लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मौके पर पहुंचने पर दोनों युवतियों ने अपना चेहरा ढका हुआ था। प्रारंभिक पूछताछ और मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी लेने के बाद उन्हें थाने लाया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर कथित अश्लील हरकतों और अभद्र व्यवहार से जुड़े आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

    जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि गिरफ्तार की गई दोनों महिलाएं बिहार की रहने वाली हैं। हालांकि उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एंटी रोमियो स्क्वॉड का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, अभद्रता या उत्पीड़न की घटनाओं को रोकना है। कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है और शिकायत मिलने पर आरोपी के महिला या पुरुष होने के आधार पर कार्रवाई में कोई भेदभाव नहीं किया जाता। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार या किसी व्यक्ति को असहज करने वाली गतिविधियों के मामलों में निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।

    वाराणसी की यह घटना इसलिए चर्चा में है क्योंकि एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई इस बार महिलाओं के खिलाफ हुई है। हालांकि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में लगाए गए आरोपों की जांच विधिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। प्रशासन ने लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित व्यवहार बनाए रखने और किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की है, ताकि सभी नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

  • शादी का वादा कर बनाया शारीरिक संबंध, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करता रहा आरोपी गिरफ्तार

    शादी का वादा कर बनाया शारीरिक संबंध, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करता रहा आरोपी गिरफ्तार


    इंदौर  इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म और बाद में आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक कथित शोषण करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    हीरानगर थाना पुलिस के अनुसार 27 वर्षीय युवती ने गौरी नगर निवासी हर्ष उर्फ राज चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में युवती ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले दोनों की पहचान हुई थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया।

    पीड़िता का आरोप है कि 7 मार्च 2023 को आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह उसे अपने एक परिचित के घर भी ले गया, जहां भी उसके साथ संबंध बनाए गए। युवती का कहना है कि वह शादी के भरोसे आरोपी पर विश्वास करती रही।

    शिकायत के अनुसार जब युवती ने शादी की बात दोहराई तो आरोपी का व्यवहार बदल गया। उसने कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी लगातार उसका शोषण करता रहा।

    युवती ने पुलिस को बताया कि इस वर्ष जनवरी में शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके दौरान आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भी वह कथित रूप से फोन कर धमकियां देता रहा और मिलने के लिए दबाव बनाता रहा।

    लगातार मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से परेशान होकर युवती ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के साथ वह हीरानगर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की भी जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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    Indore, Crime, RapeCase, MadhyaPradesh, Police, Arrest, Hiranagar, CrimeNewsइंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म और बाद में आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक कथित शोषण करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    हीरानगर थाना पुलिस के अनुसार 27 वर्षीय युवती ने गौरी नगर निवासी हर्ष उर्फ राज चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में युवती ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले दोनों की पहचान हुई थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया।

    पीड़िता का आरोप है कि 7 मार्च 2023 को आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह उसे अपने एक परिचित के घर भी ले गया, जहां भी उसके साथ संबंध बनाए गए। युवती का कहना है कि वह शादी के भरोसे आरोपी पर विश्वास करती रही।

    शिकायत के अनुसार जब युवती ने शादी की बात दोहराई तो आरोपी का व्यवहार बदल गया। उसने कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी लगातार उसका शोषण करता रहा।

    युवती ने पुलिस को बताया कि इस वर्ष जनवरी में शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके दौरान आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भी वह कथित रूप से फोन कर धमकियां देता रहा और मिलने के लिए दबाव बनाता रहा।

    लगातार मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से परेशान होकर युवती ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के साथ वह हीरानगर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की भी जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी पर मप्र में प्रदर्शन, विधानसभा में धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक

    दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी पर मप्र में प्रदर्शन, विधानसभा में धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक


    भोपाल।
    दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में मंगलवार को मध्य प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। प्रदेशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच विधानसभा में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर कांग्रेस विधायक देर रात तक धरने पर बैठे हुए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी उनके साथ धरने में शामिल हैं।

    मंगलवार को जीतू पटवारी लोकभवन के सामने धरने पर बैठे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को वहां से हटाकर वाहन में बैठा लिया। कुछ देर बाद वे सीधे विधानसभा पहुंचे और धरना दे रहे विधायकों का समर्थन किया।

    दरअसल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया था। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसी के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी प्रदेश में प्रदर्शन किया।

    विधानसभा में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना जारी

    मंगलवार को शाम तक विधानसभा की कार्यवाही के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। कुछ विधायक विरोध जताने के लिए फर्श पर भी लेट गए। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने धरना खत्म कराने की कोशिश की लेकिन विधायक नहीं माने। बाद में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी बातचीत के लिए पहुंचे। इस दौरान उनकी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से तीखी बहस हुई और कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की।

    भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, कटनी, खंडवा, हरदा, शाजापुर, टीकमगढ़, रतलाम, डबरा और खरगोन समेत कई जिलों में कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन, रैली और नारेबाजी की। कुछ जगह चक्काजाम और पुलिस से धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। देर रात तक अधिकांश जिलों में प्रदर्शन समाप्त हो गए, जबकि विधानसभा में कांग्रेस विधायकों का धरना जारी है।

  • सीतापुर में रिश्तों का खौफनाक अंत, शराब के विवाद में 65 वर्षीय मां की हत्या, आरोपी बेटा गिरफ्तार

    सीतापुर में रिश्तों का खौफनाक अंत, शराब के विवाद में 65 वर्षीय मां की हत्या, आरोपी बेटा गिरफ्तार

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। इमलिया सुल्तानपुर थाना क्षेत्र के बेनियापुर गांव में शराब पीने के लिए पैसे नहीं मिलने पर एक बेटे पर अपनी 65 वर्षीय मां की हत्या करने का आरोप लगा है। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने पहले मां के साथ मारपीट की और फिर उनका सिर दीवार से टकरा दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी पूरी रात घर में शव के पास बैठा रहा और सुबह स्वयं ग्राम प्रधान को फोन कर मां की मौत की सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान सावित्री देवी के रूप में हुई है, जो अपने बेटे त्रिभुवन के साथ रहती थीं। उनके पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। ग्रामीणों के मुताबिक त्रिभुवन लंबे समय से शराब का आदी था और इसी वजह से करीब दस वर्ष पहले उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई थी। बताया जा रहा है कि घटना वाली रात वह नशे की हालत में घर पहुंचा और मां से शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगा। सावित्री देवी द्वारा पैसे देने से इनकार किए जाने पर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठा।

    आरोप है कि विवाद के दौरान त्रिभुवन ने अपनी मां के साथ बेरहमी से मारपीट की और उनका सिर दीवार से टकरा दिया। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी ने किसी को सूचना नहीं दी और पूरी रात घर में ही मौजूद रहा। अगले दिन सुबह उसने गांव के प्रधान को फोन कर बताया कि उसकी मां की मौत हो गई है और अंतिम संस्कार कराने की बात कही।

    ग्राम प्रधान जब मौके पर पहुंचे तो उन्होंने सावित्री देवी का शव आंगन में पड़ा देखा। शव के सिर के पास खून के निशान थे, जिससे मामला संदिग्ध लगा। इसके बाद प्रधान ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और घर की दीवार पर भी खून के निशान पाए, जिससे यह आशंका और मजबूत हुई कि महिला का सिर दीवार से टकराया गया था।

    प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी शराब के नशे में अपनी मां के साथ मारपीट करता था। पुलिस को जानकारी मिली है कि घटना से दो दिन पहले भी उसने कथित रूप से सावित्री देवी के साथ हिंसा की थी। महिला के शरीर पर पुराने चोटों के निशान मिलने की बात भी सामने आई है, जिनकी पुष्टि पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय जांच के आधार पर की जाएगी।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपी त्रिभुवन को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि होगी। साथ ही घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, फोरेंसिक जांच और आरोपी से पूछताछ के आधार पर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • लपीएल के छठे सीजन के आगाज से पहले क्रिकेट जगत में मची खलबली, खेल भ्रष्टाचार मामले में विशेष जांच इकाई की बड़ी कार्रवाई

    लपीएल के छठे सीजन के आगाज से पहले क्रिकेट जगत में मची खलबली, खेल भ्रष्टाचार मामले में विशेष जांच इकाई की बड़ी कार्रवाई

    नई दिल्ली । लंका प्रीमियर लीग (एलपीएल) 2026 के छठे सीजन के आधिकारिक आगाज से ठीक पहले क्रिकेट जगत को झकझोर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रतियोगिता की वर्तमान चैंपियन टीम जाफना किंग्स के सह-मालिक को कथित मैच फिक्सिंग और भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों के तहत पुलिस विभाग द्वारा हिरासत में लिया गया है। इस सनसनीखेज कार्रवाई को खेल संबंधी अपराधों की रोकथाम के लिए गठित विशेष जांच इकाई ने अंजाम दिया है। इस बड़ी गिरफ्तारी के कारण टी20 लीग की शुचिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसने उद्घाटन समारोह के ठीक पहले पूरे टूर्नामेंट के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।

    श्रीलंका पुलिस विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, जाफना किंग्स फ्रेंचाइजी के प्रबंधकीय ढांचे से जुड़े एक प्रमुख साझीदार को खेलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है। विशेष जांच दल इस वित्तीय और प्रशासनिक हेराफेरी के नेटवर्क की विस्तृत पड़ताल कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस मामले के तार अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी और खेल को अवैध रूप से प्रभावित करने वाले बड़े सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस जांच के दायरे में कुछ अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और संदिग्धों के आने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है, जिससे इस रैकेट का पूर्ण भंडाफोड़ हो सके।

    यह संपूर्ण विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब टूर्नामेंट का पहला उद्घाटन मुकाबला कोलंबो के ऐतिहासिक सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब ग्राउंड पर खेला जाना निर्धारित था। यह मैच पूर्व चैंपियन जाफना किंग्स और गॉल गैलेंट्स के बीच खेला जाना था, जो पिछले सीजन के फाइनल मुकाबले का पुनरावृत्ति भी है। आयोजकों और स्थानीय क्रिकेट बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस प्रशासनिक विवाद और पुलिस कार्रवाई के बावजूद पूर्व निर्धारित खेल कार्यक्रम में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा और सभी मैच योजना के अनुसार ही आयोजित होंगे। हालांकि, मैदान के बाहर हुई इस कानूनी कार्रवाई ने खेल प्रेमियों और प्रायोजकों के बीच एक अनिश्चितता का माहौल अवश्य निर्मित कर दिया है।

    उल्लेखनीय है कि खेल अपराधों और भ्रष्टाचार को रोकने के मामले में श्रीलंका के पास वैश्विक स्तर पर सबसे कठोर और सख्त कानूनी ढांचा मौजूद है। देश में खेल से संबंधित अपराधों की रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग और किसी भी प्रकार की अनैतिक हेराफेरी को एक गैर-जमानती और गंभीर श्रेणी के अपराध के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो दोषियों के लिए भारी आर्थिक दंड के साथ-साथ दीर्घकालिक कारावास की सजा का स्पष्ट प्रावधान है। इस सख्त कानून के कारण ही विशेष जांच इकाई को इस स्तर पर त्वरित कार्रवाई करने के अधिकार प्राप्त हुए हैं।

    इस अभूतपूर्व घटनाक्रम ने न केवल लंका प्रीमियर लीग बल्कि संपूर्ण टी20 फ्रेंचाइजी क्रिकेट की साख को एक बड़ा झटका दिया है। जिस वैश्विक प्रतियोगिता की शुरुआत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उच्च स्तरीय खेल प्रतिस्पर्धा के रूप में होनी चाहिए थी, वह अब कानूनी और आपराधिक जांच के घेरे में आ चुकी है। खेल विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मामले में ठोस साक्ष्य सामने आते हैं और आरोप सही साबित होते हैं, तो यह वैश्विक मंच पर लीग की विश्वसनीयता, ब्रांड वैल्यू और भविष्य के निवेश को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित कर सकता है। फिलहाल देश की सर्वोच्च खेल जांच एजेंसी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है।

  • फर्जी पहचान, शादी और करोड़ों के सपनों का जाल! खुद को IAS बताने वाली महिला पर ठगी और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    फर्जी पहचान, शादी और करोड़ों के सपनों का जाल! खुद को IAS बताने वाली महिला पर ठगी और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से कथित फर्जी पहचान के जरिए शादी करने का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला ने स्वयं को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बताकर युवक से विवाह किया। बाद में जब उसके दावों की सत्यता पर सवाल उठे तो पति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार, युवक और महिला की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। बातचीत के दौरान महिला ने स्वयं को IAS अधिकारी बताया और दावा किया कि एक न्यायिक मामले के कारण उसकी नियुक्ति लंबित है। युवक का आरोप है कि महिला और उसके परिजनों ने भी इसी बात की पुष्टि करते हुए भरोसा दिलाया कि मामला समाप्त होते ही वह प्रशासनिक सेवा में कार्यभार संभाल लेगी। इन दावों पर विश्वास करने के बाद दोनों ने विवाह कर लिया।

    शिकायत में कहा गया है कि विवाह के शुरुआती दिनों के बाद महिला का व्यवहार बदलने लगा। पति का आरोप है कि उसने परिवार के बहुमूल्य आभूषण और अन्य कीमती सामान अपने कब्जे में ले लिया। आरोप यह भी है कि बाद में परिवार पर बड़ी धनराशि की मांग का दबाव बनाया गया और आर्थिक लाभ के लिए जमीन बेचने का सुझाव दिया गया। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो कथित रूप से झूठे मुकदमों में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

    पति ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि एक रात महिला ने कथित रूप से उसका गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया। उसने तत्काल पुलिस सहायता ली, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर मामले को सुलझाने का प्रयास भी किया गया। हालांकि विवाद समाप्त नहीं हुआ और बाद में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।

    मामले में दर्ज प्राथमिकी में महिला के साथ उसके पिता, भाई और एक अन्य रिश्तेदार को भी नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सभी ने मिलकर महिला की पहचान और नौकरी को लेकर गलत जानकारी देकर विवाह कराया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं और क्या अन्य लोगों के साथ भी इसी प्रकार की घटनाएं हुई हैं।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच और दर्ज मुकदमे के आधार पर महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य प्रमाण जुटाए जा रहे हैं। साथ ही नामजद अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन पहचान और वैवाहिक संबंधों में तथ्यों के सत्यापन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से बनने वाले संबंधों में व्यक्तिगत और पेशेवर दावों की पुष्टि करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों और धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम किया जा सके। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।