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  • भोपाल में चलती बाइक पर दोस्त की गोली मारकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार; पिस्टल देने वालों की तलाश तेज

    भोपाल में चलती बाइक पर दोस्त की गोली मारकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार; पिस्टल देने वालों की तलाश तेज

    भोपाल: के निशातपुरा थाना क्षेत्र की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में चलती बाइक पर गोली मारकर की गई हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी अलीम उर्फ अल्लू को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर अपने दोस्त तासी उर्फ इकलास की देशी पिस्टल से गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। पुलिस ने उसे घटना के करीब 12 घंटे के भीतर जिला रायसेन से गिरफ्तार किया।

    पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई देशी पिस्टल भी बरामद कर जब्त कर ली है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने हत्या के पीछे पुरानी रंजिश को वजह बताया है। मामले में पुलिस आरोपी से घटना से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर पूछताछ कर रही है।

    पूछताछ में अलीम ने बताया कि करीब एक साल पहले मृतक तासी उर्फ इकलास का उसके दोस्त ताहिर उर्फ अय्यू से विवाद हुआ था। उस समय अलीम ने अपने दोस्त ताहिर की मदद की थी। इसी विवाद के बाद तासी आरोपी अलीम से भी रंजिश रखने लगा था। आरोपी के अनुसार, मृतक की ओर से उसे धमकी भी दी जाती थी।

    करीब 15 दिन पहले दोनों के बीच एक बार फिर विवाद हुआ था। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि लगातार बनी रंजिश के चलते उसने तासी की हत्या करने की योजना बनाई। इसके बाद वह गंजबासौदा में रहने वाले अपने रिश्तेदार आसिफ के पास पहुंचा।

    आरोपी के अनुसार, वहीं से उसे देशी पिस्टल मिली। हथियार हासिल करने के बाद वह भोपाल आया और तासी की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी के बताए स्थान और उसकी निशानदेही के आधार पर घटना में इस्तेमाल की गई पिस्टल बरामद कर ली है।

    घटना 20 सितंबर रविवार की बताई गई है। तासी अपने एक दोस्त के साथ सुबह मछली पकड़ने के लिए निकला था। इसी दौरान अलीम भी उनके साथ लिफ्ट लेकर बाइक पर पीछे बैठ गया। चलती बाइक के दौरान आरोपी ने तासी को गोली मार दी।

    गोली लगने के बाद तासी की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी की तलाश तेज कर दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसे रायसेन जिले से पकड़ लिया। गिरफ्तारी के साथ ही हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया गया है।

    मामले में अब पुलिस का फोकस हथियार उपलब्ध कराने वाले लोगों तक पहुंचने पर है। पुलिस के अनुसार, घटना में हथियार उपलब्ध कराने वाले साहन और आसिफ की तलाश की जा रही है। दोनों की भूमिका को लेकर भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस आरोपी से हत्या की योजना, हथियार हासिल करने की प्रक्रिया और वारदात से जुड़े अन्य तथ्यों के बारे में पूछताछ कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हत्या से पहले आरोपी ने किस तरह तैयारी की और वारदात को अंजाम देने के बाद वह रायसेन कैसे पहुंचा।

    पुलिस की शुरुआती जांच में पुरानी रंजिश हत्या की प्रमुख वजह के तौर पर सामने आई है। हालांकि, मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। हथियार उपलब्ध कराने के आरोपों की पुष्टि और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका सामने आने के बाद जांच की तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।

  • नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी पर सियासत तेज, हिमंत सरमा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

    नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी पर सियासत तेज, हिमंत सरमा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कांग्रेस नेता ने प्रत्याशी की गिरफ्तारी को लोकतंत्र की हत्या बताया था।

    हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी का बचाव करते हुए कहा कि पुलिस ने अपना कर्तव्य निभाया है। उन्होंने दावा किया कि मिलन प्रधान के खिलाफ करीब 19 साल पुराने मामले लंबित थे और इन्हीं मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की है।

    असम के मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए उनके बयानों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जिस व्यक्ति को चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया है, उसके खिलाफ पुराने आपराधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2007 में मिलन प्रधान के खिलाफ हत्या से जुड़े दो या तीन मामले दर्ज किए गए थे।

    हिमंत सरमा ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी वारंट लंबित हैं, तो पुलिस के लिए कार्रवाई करना उसके कर्तव्य का हिस्सा है। उन्होंने इसी आधार पर नंदीग्राम से कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी को उचित ठहराया।

    राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए हिमंत सरमा ने बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने राहुल गांधी को पागल व्यक्ति बताया और उनके अलग-अलग सार्वजनिक रूपों का जिक्र करते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा कि कभी राहुल गांधी दाढ़ी के साथ दिखाई देते हैं, कभी बिना दाढ़ी के और कभी विदेश में तो कभी भारत में नजर आते हैं।

    इस पूरे विवाद की शुरुआत मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद हुई। राहुल गांधी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर देखा था। इसके बाद हिमंत सरमा ने राहुल गांधी के बयान का जवाब देते हुए गिरफ्तारी के पीछे लंबित मामलों और पुलिस की कार्रवाई का उल्लेख किया।

    पश्चिम बंगाल पुलिस के अनुसार, मिलन प्रधान को चार लंबित मामलों में जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक ये वारंट गैर-जमानती मामलों में कथित संलिप्तता से जुड़े हैं। इन मामलों का संबंध वर्ष 2007 में नंदीग्राम में हुए भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज घटनाओं से बताया गया है।

    पुलिस के अनुसार, लंबित मामलों में दंगा, हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आपराधिक धमकी जैसे आरोपों से जुड़े प्रकरण शामिल हैं। गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच पुलिस ने इन्हीं लंबित मामलों और वारंट को कार्रवाई का आधार बताया है।

    नंदीग्राम उपचुनाव के मद्देनजर मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर कांग्रेस की तरफ से गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर हिमंत सरमा ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है। फिलहाल विवाद का केंद्र प्रत्याशी की गिरफ्तारी, पुराने मामलों में जारी वारंट और इस कार्रवाई को लेकर सामने आए राजनीतिक बयानों पर बना हुआ है।

  • जबलपुर में बिना नंबर की कार से अंग्रेजी शराब की तस्करी का खुलासा, पुलिस ने 251 बोतलों के साथ दो आरोपियों को पकड़ा

    जबलपुर में बिना नंबर की कार से अंग्रेजी शराब की तस्करी का खुलासा, पुलिस ने 251 बोतलों के साथ दो आरोपियों को पकड़ा

    जबलपुर: के माढ़ोताल थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बिना नंबर की कार से बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब बरामद की है। मंगलवार रात मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने ग्राम बसा क्षेत्र में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से दो युवकों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 251 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद हुई, जबकि शराब और वाहन की कीमत लाखों रुपये बताई गई है।

    माढ़ोताल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पवार के अनुसार पुलिस को मंगलवार रात सूचना मिली थी कि ग्राम बसा इलाके में प्रियांश अग्निहोत्री के घर के सामने सड़क पर खड़ी बिना नंबर की कार में अवैध रूप से बड़ी मात्रा में शराब रखी गई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने बताए गए स्थान पर पहुंचकर घेराबंदी की और कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस टीम को अपने पास आता देखकर दो संदिग्ध युवक कार के पास से भागने की कोशिश में थे। पुलिसकर्मियों ने दोनों को घेर लिया और मौके पर ही पकड़ लिया। पूछताछ में उनकी पहचान प्रियांश अग्निहोत्री निवासी ग्राम बसा और आशुतोष उर्फ चुंगा यादव निवासी ग्राम मड़ई, रांझी के रूप में हुई।

    इसके बाद पुलिस ने मौके पर मौजूद बिना नंबर की सफेद रंग की सुजुकी फ्रोन्स कार की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से 19 कार्टून बरामद किए गए। इन कार्टूनों को खोलने पर कुल 251 बोतल अंग्रेजी शराब मिली। पुलिस ने शराब को जब्त कर वाहन को भी अपने कब्जे में ले लिया।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस को प्रियांश के घर के पोर्च में रखा एक बड़ा काला थैला भी मिला। इसमें भी शराब भरी हुई थी। पुलिस के अनुसार आरोपी इस शराब को कार में लोड करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों को पकड़ लिया।

    पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया कि करीब 10 दिन पहले बिक्री के लिए ग्वारीघाट निवासी अर्जुन केवट से 25 पेटी अंग्रेजी शराब मंगाई गई थी। उनके अनुसार आशुतोष उर्फ चुंगा यादव शराब को अर्जुन केवट की बिना नंबर वाली सफेद कार से प्रियांश के घर लेकर आया था।

    आरोपियों ने पुलिस को यह भी बताया कि पुलिस की गश्त और लगातार निगरानी के कारण वे शराब को किसी दूसरे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान माढ़ोताल पुलिस को इसकी सूचना मिल गई और टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर दी।

    पुलिस ने बरामद शराब और वाहन को जब्त करने के साथ दोनों आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब मामले की आगे जांच कर रही है। पूछताछ के आधार पर अवैध शराब की आपूर्ति और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी तलाश की जा रही है।

    इस कार्रवाई के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 25 पेटी शराब कहां से लाई गई थी और इसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस जांच के आधार पर अवैध शराब के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

  • सतना में अवैध शराब कारोबारियों का CCTV नेटवर्क उजागर, गलियों में कैमरे लगाकर पुलिस और आबकारी टीम पर रखते थे नजर

    सतना में अवैध शराब कारोबारियों का CCTV नेटवर्क उजागर, गलियों में कैमरे लगाकर पुलिस और आबकारी टीम पर रखते थे नजर

    मध्य प्रदेश: के सतना में अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई के दौरान पुलिस और आबकारी अमले को चौंकाने वाली जानकारी मिली है। कबाड़ी टोला इलाके में अवैध शराब की फुटकर बिक्री के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान पता चला कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने मोहल्ले में आने-जाने वाले रास्तों पर CCTV कैमरे लगा रखे थे। इन कैमरों के जरिए पुलिस और आबकारी विभाग की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी।

    अधिकारियों के मुताबिक सोमवार दोपहर मुखबिर से अवैध शराब की बिक्री की सूचना मिली थी। इसके बाद सतना सर्किल क्रमांक-1 की टीम ने कबाड़ी टोला में घेराबंदी कर कार्रवाई की। टीम ने 24 वर्षीय राजेश उर्फ नंगा लोधी को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 113 पाव अंग्रेजी और देशी शराब बरामद की गई। जब्त शराब की कीमत 15 हजार 123 रुपये बताई गई है।

    कार्रवाई के बाद आरोपी से पूछताछ की गई। पूछताछ में अवैध शराब के कारोबार में उसके साथ जुड़े अन्य लोगों और कथित सरपरस्तों से संबंधित जानकारी सामने आने की बात कही गई है। अधिकारियों ने इस जानकारी की तस्दीक शुरू कर दी है और संबंधित ठिकानों पर आगे छापेमारी की जा रही है।

    मामले की जांच के दौरान CCTV कैमरों का नेटवर्क सामने आना कार्रवाई का अहम हिस्सा रहा। जानकारी के मुताबिक राजेश लोधी और उसके सहयोगियों ने कबाड़ी टोला में मोहल्ले के प्रवेश मार्गों पर गोपनीय तरीके से कैमरे लगाए थे। इन कैमरों की लाइव फीड राजेश के घर में लगी टीवी स्क्रीन पर देखी जाती थी।

    इस व्यवस्था का इस्तेमाल पुलिस और आबकारी अमले की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता था। जब भी टीम के इलाके में पहुंचने की जानकारी कैमरों के जरिए मिलती थी, आरोपी और उसके साथी कथित तौर पर शराब को छिपाकर वहां से निकल जाते थे। इस तरह वे कार्रवाई से बचने की कोशिश करते थे।

    आबकारी टीम ने कार्रवाई के दौरान CCTV कैमरों के साथ उनका DVR भी जब्त कर लिया है। अब जब्त उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि कैमरों और DVR से अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों तथा उसकी निगरानी व्यवस्था के बारे में और जानकारी मिल सकती है।

    इस कार्रवाई से यह भी सामने आया कि अवैध शराब की बिक्री में शामिल लोगों ने अपने ठिकाने की निगरानी के लिए तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया था। आमतौर पर सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले CCTV कैमरों का इस्तेमाल यहां कार्रवाई से बचने के लिए किया जा रहा था। आबकारी विभाग अब जब्त किए गए उपकरणों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रहा है।

    आरोपी के खिलाफ अवैध शराब से संबंधित प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पूछताछ में सामने आए अन्य नामों और ठिकानों की भी पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच आगे बढ़ने के साथ इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी सामने आ सकती है।

    कार्रवाई में आबकारी विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही। फिलहाल आरोपी से बरामद 113 पाव शराब, CCTV कैमरों और DVR को जांच का हिस्सा बनाया गया है। विभाग की कार्रवाई का अगला चरण पूछताछ और तकनीकी जांच से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर करेगा।

  • छिंदवाड़ा में गलत इलाज के बाद महिला की मौत, बिना डिग्री इलाज कर रहे दो झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए

    छिंदवाड़ा में गलत इलाज के बाद महिला की मौत, बिना डिग्री इलाज कर रहे दो झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए

    मध्य प्रदेश: के छिंदवाड़ा जिले में गलत इलाज के बाद एक महिला की मौत के मामले में पुलिस ने दो झोलाछाप डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर बिना किसी मान्य चिकित्सा डिग्री और पंजीयन के मरीजों का एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने का आरोप है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों मरीजों को दवाएं देने और इंजेक्शन लगाने का काम कर रहे थे। महिला की मौत के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें दोनों के पास चिकित्सा शिक्षा से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं मिले।

    पुलिस के अनुसार घटना 18 जुलाई 2026 की है। ग्राम बम्होरी निवासी 43 वर्षीय आरती, पत्नी रामभगस साहू, को बुखार आया था। तब उसके परिजन इलाज के लिए महाराजा मार्केट स्थित एक क्लिनिक पर लेकर पहुंचे थे। यहां राजेश सिन्हा नाम का व्यक्ति इलाज करता था। महिला की जांच और उपचार के दौरान उसके भाई ज्योतिप्रकाश मंडल उर्फ काली ने फोन पर राजेश से बातचीत की।

    इसके बाद ज्योतिप्रकाश ने आरती को दो इंजेक्शन लगाए। इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की तबीयत अचानक और बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे तत्काल हर्रई अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकीय उपचार के दौरान आरती की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और उपचार से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई।

    जांच के दौरान पुलिस को राजेश सिन्हा और ज्योतिप्रकाश मंडल के पास चिकित्सा शिक्षा से संबंधित कोई प्रमाण पत्र, डिग्री या डिप्लोमा नहीं मिला। इसके अलावा दोनों के पास मेडिकल रजिस्ट्रेशन भी नहीं था। इसके बावजूद दोनों मरीजों का इलाज कर रहे थे और उन्हें दवाएं तथा इंजेक्शन दे रहे थे। पुलिस ने इसी आधार पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की।

    मामले की जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 3(5) के साथ मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम की धारा 24 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राजेश सिन्हा और ज्योतिप्रकाश मंडल दोनों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस की जांच का मुख्य आधार महिला को दिए गए उपचार, दोनों आरोपियों की चिकित्सा योग्यता और घटना के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने से जुड़े तथ्य रहे।

    मामला बिना वैध चिकित्सा योग्यता के मरीजों का इलाज किए जाने से जुड़ा है। जांच में दोनों आरोपियों के पास इलाज करने के लिए जरूरी डिग्री, डिप्लोमा और मेडिकल रजिस्ट्रेशन नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसके बावजूद वे मरीजों को दवाएं और इंजेक्शन दे रहे थे।

    आरती को बुखार की शिकायत के बाद इलाज के लिए क्लिनिक ले जाया गया था, लेकिन दो इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं और उनके खिलाफ दर्ज प्रकरण के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

  • सागर जहरीली शराब कांड में मुख्य आरोपी रवि लखेरा गिरफ्तार, बरायठा जंगल में पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में लगी गोली

    सागर जहरीली शराब कांड में मुख्य आरोपी रवि लखेरा गिरफ्तार, बरायठा जंगल में पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में लगी गोली

    मध्य प्रदेश: के सागर जिले में जहरीली शराब कांड के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रवि लखेरा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी कई दिनों से फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। कार्रवाई के दौरान बरायठा के जंगल में पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें रवि लखेरा के पैर में गोली लगी।

    रवि लखेरा को बंडा जहरीली शराब कांड का मुख्य आरोपी बताया गया है। वह गढ़ी मलहरा शराब दुकान का ठेकेदार भी है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी और उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही थी।

    बताया गया है कि जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद पुलिस ने मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए अवैध शराब से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल शुरू की थी। जांच के दौरान रवि लखेरा के साथ मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर और शिवान्जय ठाकुर के नाम भी मुख्य आरोपियों के तौर पर सामने आए थे।

    पुलिस ने रवि लखेरा और मनीष लोधी की गिरफ्तारी पर 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इस कार्रवाई के बाद से पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। रवि लखेरा कई दिनों तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा और अलग-अलग ठिकानों पर छिपता रहा।

    पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को रवि लखेरा के बरायठा के जंगल में मौजूद होने की जानकारी मिलने के बाद उसे घेरने की कार्रवाई की गई। पुलिस ने जब उसे पकड़ने की कोशिश की तो उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।

    जवाबी कार्रवाई के दौरान रवि लखेरा के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। घायल आरोपी को इलाज के लिए सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उसका उपचार जारी है।

    पुलिस के मुताबिक, रवि लखेरा पहले भी नकली शराब से जुड़े मामलों में पुलिस के रडार पर रहा है। मई 2026 में उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में पकड़ी गई नकली शराब फैक्ट्री के मामले में भी उसका नाम सामने आया था। पुलिस की जांच में उसके अवैध शराब नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।

    सागर में जहरीली शराब कांड के बाद पुलिस ने अवैध शराब के पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की थी। इसी जांच में रवि लखेरा समेत अन्य आरोपियों के नाम सामने आए थे। अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    मुठभेड़ के दौरान आरोपी के घायल होने के बाद उसे पुलिस निगरानी में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उसका इलाज जारी है। पुलिस की कार्रवाई से इस मामले में फरार चल रहे आरोपियों की तलाश और अवैध शराब नेटवर्क की जांच को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्रवाई हुई है।

  • देवास में पुलिस को देखकर नदी में फेंकी अवैध पिस्टल, कांटाफोड़ और सतवास पुलिस ने पानी में उतरकर हथियार किया बरामद

    देवास में पुलिस को देखकर नदी में फेंकी अवैध पिस्टल, कांटाफोड़ और सतवास पुलिस ने पानी में उतरकर हथियार किया बरामद


    मध्य प्रदेश:
    के देवास जिले में अवैध हथियार के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने पुलिस से बचने और सबूत छिपाने के इरादे से अपने पास रखी अवैध देशी पिस्टल दतूनी नदी में फेंक दी थी। हालांकि पुलिस ने पीछा जारी रखा और दोनों को पकड़ने के बाद नदी में उतरकर हथियार भी बरामद कर लिया।

    मामला सतवास थाना क्षेत्र में पीपलकोटा के पास का बताया गया है। कांटाफोड़ थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि दो व्यक्ति अवैध हथियार लेकर कांटाफोड़ से खातेगांव की ओर जा रहे हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने संदिग्धों की तलाश शुरू की और उनका पीछा किया।

    पुलिस की गतिविधि की जानकारी मिलने के बाद दोनों आरोपियों ने बच निकलने की कोशिश की। पीछा किए जाने के दौरान वे सतवास क्षेत्र की ओर बढ़े। इस बीच कांटाफोड़ पुलिस ने सतवास थाना पुलिस को मामले की जानकारी दी, जिसके बाद सतवास पुलिस ने भी कार्रवाई शुरू कर दी।

    सतवास पुलिस ने पीपलकोटा के पास घेराबंदी कर दोनों संदिग्धों को पकड़ लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पकड़े जाने से पहले अपने पास मौजूद अवैध देशी पिस्टल दतूनी नदी में फेंक दी थी। उन्हें उम्मीद थी कि नदी में हथियार डालने के बाद पुलिस के हाथ कोई महत्वपूर्ण सबूत नहीं लगेगा।

    लेकिन पुलिस ने आरोपियों की इस कोशिश को नाकाम कर दिया। हथियार की तलाश के लिए कांटाफोड़ और सतवास पुलिस के जवान नदी में उतरे। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने पानी के भीतर से अवैध देशी पिस्टल बरामद कर ली। हथियार मिलने के बाद पुलिस की कार्रवाई मौके पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई और बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए।

    इस कार्रवाई में कांटाफोड़ और सतवास थाना पुलिस की संयुक्त भूमिका रही। पुलिस ने पहले आरोपियों को पकड़ने के लिए घेराबंदी की और इसके बाद नदी में फेंके गए हथियार को तलाशकर बरामद किया। इससे मामले में अवैध हथियार से जुड़ा महत्वपूर्ण साक्ष्य भी पुलिस के कब्जे में आ गया।

    पकड़े गए दोनों आरोपियों के संबंध में सामने आई जानकारी के मुताबिक, एक आरोपी देवास जिले के कवलासा क्षेत्र का रहने वाला है, जबकि दूसरा सीहोर जिले के जामुनियाकला का निवासी बताया गया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ सतवास थाने में प्राथमिकी दर्ज की है।

    मामले में पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई पूरी करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय के आदेश के बाद दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया। अब पुलिस मामले में अवैध हथियार की उपलब्धता और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

    घटना ने यह भी दिखाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपी द्वारा सबूत छिपाने की कोशिश हमेशा सफल नहीं होती। नदी में हथियार फेंके जाने के बावजूद पुलिस ने मौके पर तलाशी अभियान चलाकर पिस्टल बरामद कर ली। इससे जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि उनके पास अवैध हथियार कहां से आया था और उसे किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर 23 जून को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को पुलिस ने बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी। इस घटना के बाद से ही स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी।

    बताया गया है कि झड़प के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के हाथ में पहने कड़े से संजय कुमार के सिर पर चोट लगी। चोट लगने के बाद उन्हें उपचार के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया था। घटना को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया था और इसके बाद जांच आगे बढ़ाई जा रही थी।

    मामले में उस समय नया मोड़ आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में वह जंतर-मंतर पर हुई घटना और संजय कुमार को लगी चोट का जिक्र करता नजर आया। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद मामले में आरोपी की गिरफ्तारी की मांग फिर तेज हो गई।

    शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की और मामले में देरी पर सवाल उठाए।

    पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों को कार्रवाई के लिए 72 घंटे का भरोसा दिया गया था। हालांकि इसके बाद स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद है और पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों तथा उपलब्ध साक्ष्यों को खंगालेगी।

    स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कई कानूनी प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के साथ भारतीय न्याय संहिता के तहत पीछा करने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित धाराएं शामिल हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

    आरोपी के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के आधार पर पुलिस मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। सीजेपी के सह संयोजक सौरभ दास ने भी आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों और गिरफ्तारी की जानकारी दी है।

    हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर पुलिस पहले मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। 3 सितंबर को पुलिस ने बताया था कि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट में सिर की हड्डी में फ्रैक्चर या किसी गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस ने कार्रवाई में देरी के पीछे किसी राजनीतिक दबाव से भी इनकार किया था।

    अब गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण शुरू होगा। पुलिस घटना के दौरान मौजूद लोगों के बयान, उपलब्ध वीडियो और चिकित्सकीय दस्तावेजों समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इसके आधार पर आरोपों की स्थिति और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

    घटना के बाद से प्रदर्शन से जुड़े पक्ष स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। गिरफ्तारी के साथ अब यह मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है।

  • पुलिस हिरासत और मीडिया की अफवाहों पर छलका राज कुंद्रा का दर्द, शिल्पा शेट्टी से जुड़े कई राज किए उजागर

    पुलिस हिरासत और मीडिया की अफवाहों पर छलका राज कुंद्रा का दर्द, शिल्पा शेट्टी से जुड़े कई राज किए उजागर


    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और व्यवसायी राज कुंद्रा ने साल 2021 में हुई अपनी गिरफ्तारी और उसके बाद जेल में बिताए कठिन समय से जुड़े कई नए पहलुओं को उजागर किया है। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया कि किस प्रकार कानूनी कानूनी समस्याओं के साथ-साथ उन्हें व्यक्तिगत जीवन में भी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। जब वे सलाखों के पीछे थे, तब उनके पास कई तरह की भ्रामक खबरें पहुंच रही थीं, जिसने उन्हें मानसिक रूप से बेहद तोड़ दिया था।

    राज कुंद्रा ने खुलासा किया कि उन्हें अपनी गिरफ्तारी की जानकारी भी काफी नाटकीय ढंग से मिली थी। वे पुलिस स्टेशन केवल पूछताछ में शामिल होने के लिए गए थे, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस बारे में जब उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से सवाल किया, तो उन्हें बताया गया कि उच्च अधिकारियों के आदेश के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी उनके परिवार और पत्नी शिल्पा शेट्टी को भी मीडिया माध्यमों के जरिए ही मिल सकी थी।

    जेल में बिताए दिनों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि व्यावसायिक स्तर पर भी उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। उनके भारतीय व्यवसाय में हजारों लोग कार्यरत थे, और उनके अचानक हिरासत में जाने से पूरा काम ठप हो गया। इस दौरान उनकी पत्नी शिल्पा शेट्टी ने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के बजाय तुरंत बंद करने का कठिन फैसला लिया, क्योंकि अनिश्चितता के माहौल में प्रबंधन संभालना लगभग असंभव हो गया था। एक ही झटके में सब कुछ बदल जाने से वे गहरा सदमा महसूस कर रहे थे।

    सबसे अधिक निराशाजनक स्थिति तब पैदा हुई जब जेल के भीतर उन तक यह खबर पहुंची कि उनकी पत्नी उनसे अलग हो रही हैं और तलाक की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। राज कुंद्रा के अनुसार, इस एक अफवाह ने उन्हें अंदर से पूरी तरह झकझोर दिया था। उस समय उन्हें लगा कि जीवन का कोई अर्थ नहीं बचा है, क्योंकि उनके लिए उनका परिवार ही सबसे पहली प्राथमिकता था। मानसिक तनाव इस कदर बढ़ गया था कि वे रातों को सो नहीं पाते थे और उनके मन में बेहद नकारात्मक विचार आने लगे थे।

    हालांकि, बाद में सच्चाई सामने आने और परिवार के स्पष्ट रुख से उन्हें संबल मिला। शिल्पा शेट्टी ने हर परिस्थिति में अपने पति का समर्थन करने का फैसला किया, जिससे उन्हें इस कठिन दौर से बाहर निकलने में मदद मिली। रिहाई के बाद राज कुंद्रा ने अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने का प्रयास शुरू किया और एक नई शुरुआत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जांच में पूरा सहयोग दे रहे हैं और यदि किसी भी अदालत में वे दोषी पाए जाते हैं, तो वे हर प्रकार की सजा भुगतने के लिए तैयार हैं।

    इस मामले के तार देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े हुए थे, जहां जांच एजेंसियों ने कई राज्यों में फैली डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल की थी। कानूनी जानकारों और मध्य प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों के विश्लेषकों का मानना है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में मीडिया रिपोर्ट्स का व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। फिलहाल राज कुंद्रा अपने व्यापारिक उपक्रमों को फिर से स्थापित करने और अपनी छवि को सुधारने में जुटे हुए हैं।

  • आईएसआई समर्थित नेटवर्क की दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हमले की साजिश पंजाब पुलिस ने विफल की।

    आईएसआई समर्थित नेटवर्क की दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हमले की साजिश पंजाब पुलिस ने विफल की।

    नई दिल्ली । पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से सीमा पार संचालित एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े दो अलग-अलग आतंकी मॉड्यूल को निष्क्रय करते हुए राजधानी दिल्ली में एक संभावित भीषण हमले की योजना को समय रहते नाकाम कर दिया गया है। जांच अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार यह नेटवर्क काफी समय से देश के विभिन्न संवेदनशील हिस्सों में समानांतर गतिविधियां चलाने का प्रयास कर रहा था।

    प्रारंभिक तफ्तीश में इस बात की पुष्टि हुई है कि इस साजिश का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर क्षेत्र में एकत्रित हुए छात्र आंदोलनकारियों को निशाना बनाना था। आतंकियों की मंशा भीड़भाड़ वाले इलाके में अफरा-तफरी और अशांति फैलाकर व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने की थी। सुरक्षा बलों द्वारा सही समय पर की गई त्वरित और सटीक कार्रवाई के चलते किसी भी तरह की अनहोनी घटना को होने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

    कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस सिलसिले में विभिन्न स्थानों से कुल नौ संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपियों में चार नाबालिग भी शामिल पाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल आकाओं द्वारा मोहरे के रूप में किया जा रहा था। तलाशी अभियान के दौरान संदिग्धों के कब्जे से कई अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद और आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की गई हैं। पूछताछ में सामने आया है कि इन सभी को सरहद पार बैठे हैंडलरों के माध्यम से लगातार दिशा-निर्देश प्राप्त हो रहे थे।

    सुरक्षा तंत्र के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मॉड्यूल के कुछ सदस्यों ने पहले ही जंतर-मंतर पहुंचकर वहां का जायजा ले लिया था। उन्हें इस गतिविधि को अंजाम देने के लिए जरूरी संसाधन और सहायता मुहैया कराई जा रही थी। हालांकि, निरंतर निगरानी और खुफिया जानकारी के सटीक विश्लेषण के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर ली गई। इस घटनाक्रम के उपरांत दिल्ली समेत देश के अन्य संवेदनशील राज्यों में सुरक्षा ढांचा और मजबूत किया जा रहा है।

    जांच में यह पहलू भी उजागर हुआ है कि गिरोह के सदस्यों को विभिन्न रणनीतिक स्थानों और सुरक्षा बलों के काफिलों की गतिविधियों की रेकी करने का जिम्मा सौंपा गया था। वे अपने डिजिटल उपकरणों से गोपनीय वीडियो तैयार कर विदेशी हैंडलरों को भेज रहे थे। इस नेटवर्क का उद्देश्य केवल एक तात्कालिक हमला करना नहीं, बल्कि लंबे समय तक देश में अस्थिरता का माहौल बनाए रखना था, जिसके चलते अब जांच का दायरा कई अन्य राज्यों तक विस्तृत कर दिया गया है।

    मामले में नाबालिगों की मौजूदगी ने सुरक्षा विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है। गिरोह के सरगना युवाओं और किशोरों को भड़काकर तथा पैसों का लालच देकर गैरकानूनी गतिविधियों में धकेल रहे थे। इसके अलावा, अवैध बैंकिंग मार्गों और हवाला के माध्यम से पैसों के लेन-देन की बात भी सामने आई है। वित्तीय जांच एजेंसियां इस पूरे फंडिंग नेटवर्क की तह तक जाने के लिए बैंक खातों और विदेशी संपर्कों की सूक्ष्म पड़ताल में जुटी हुई हैं।

    पुलिस और जांच एजेंसियां वर्तमान में गिरफ्तार किए गए सभी नौ आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर विस्तृत पूछताछ कर रही हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि अंतर-राज्यीय और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के कारण इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का समय पर पर्दाफाश संभव हो सका है। आने वाले दिनों में इस मामले की विस्तृत जांच के आधार पर कई अन्य महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां और नए तथ्य सामने आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।