Tag: Arrest

  • महिला सिपाही के ब्लैकमेल नेटवर्क का खुलासा, कई दारोगा और सिपाही बने शिकार

    महिला सिपाही के ब्लैकमेल नेटवर्क का खुलासा, कई दारोगा और सिपाही बने शिकार



    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश पुलिस की एक महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा का ब्लैकमेलिंग नेटवर्क इन दिनों सुर्खियों में है जिसके कारण पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। मीनाक्षी की गतिविधियों का खुलासा कुठौंद थाना प्रभारी अरुण कुमार राय की गोली लगने से हुई मौत के बाद हुआ जिसके बाद से उसकी काली करतूतों की परत दर परत खुल रही है। जांच में यह सामने आया कि वर्ष 2022 में मीनाक्षी ने पीलीभीत जिले के पूरनपुर थाने में तैनाती के दौरान एक सिपाही को प्रेमजाल में फंसाकर उससे मोटी रकम की मांग की थी। इसके बाद यह सिलसिला बरेली और जालौन जिलों तक फैल गयाजहां उसने कई दारोगा और सिपाहियों को अपने जाल में फंसाया और उनसे पैसे की मांग की।

    प्रेमजाल और पैसों का दबाव

    मीनाक्षी की कार्यशैली बहुत ही चालाकी से भरी हुई थी। वह पहले जान-पहचान बनाने के लिए पुलिसकर्मियों से संपर्क करती फिर धीरे-धीरे निजी बातचीत और करीबी का हवाला देती थी। इसके बाद वह उन पर पैसों का दबाव बनाती थी। यह दबाव इस तरह से बनता था कि वह खुद को पीड़िता के रूप में प्रस्तुत करती थी जिसके बाद पुलिसकर्मी न चाहते हुए भी पैसों का भुगतान करने के लिए मजबूर हो जाते थे।

    चौंकाने वाली बात यह है कि मीनाक्षी ने इस पूरी प्रक्रिया में अपने परिवार के सदस्यों खासकर अपने पिता और भाई को भी शामिल किया था। मीनाक्षी के पिता और भाई उसे इस खेल में सहयोग करते थे और उसे हिम्मत भी देते थे। जेल जाने के दौरान भी मीनाक्षी के पिता ने उसे जल्द से जल्द बाहर निकालने का वादा किया था जिससे यह संकेत मिलता है कि यह पूरे परिवार का संगठित प्रयास था।

    मीनाक्षी का नेटवर्क और अन्य शिकार

    मीनाक्षी शर्मा के इस ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का दायरा काफी बड़ा था। जांच में यह सामने आया कि वह अकेली नहीं थी बल्कि उसके परिवार के लोग भी इसमें शामिल थे। उसकी सक्रियता पीलीभीत के पूरनपुर थाने तक सीमित नहीं रही बल्कि बरेली और जालौन जिलों में भी उसने कई पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। मीनाक्षी का यह नेटवर्क न सिर्फ पुलिस महकमे के लिए शर्मिंदगी का कारण बना बल्कि यह भी बताता है कि कैसे एक सिपाही ने अपनी शक्ति का गलत उपयोग किया। उसके खिलाफ पुलिस ने जांच तेज कर दी है और अब तक कई अन्य पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है जो मीनाक्षी के शिकार बने थे। वहीं अधिकारियों का कहना है कि मीनाक्षी के इस पूरे गिरोह को जल्द ही पकड़ा जाएगा और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    जांच और गिरफ्तारी

    महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। मीनाक्षी के पिता और भाई का भी पुलिस ने पता लगाकर उन्हें हिरासत में लिया है। अब जांच के दौरान यह जानने की कोशिश की जा रही है कि मीनाक्षी ने किन-किन अन्य पुलिसकर्मियों को अपने जाल में फंसाया और वह किस तरह से इन रकमों को इकट्ठा करती थी।इस मामले ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है

    और अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या पुलिस महकमें में अन्य किसी महिला या पुरुष कर्मी की तरफ से भी ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं जिसे उजागर नहीं किया गया हो।उत्तर प्रदेश पुलिस के एक महिला सिपाही द्वारा किए गए इस ब्लैकमेलिंग नेटवर्क ने न केवल पुलिस महकमे को शर्मिंदा किया है बल्कि यह भी दिखाया है कि एक सिपाही अपने कद और शक्ति का गलत उपयोग कैसे कर सकता है। इस मामले की गहन जांच जारी है और पुलिस विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। मीनाक्षी और उसके परिवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न घटित हों।
  • उदयपुर: फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट और पत्नी श्वेतांबरी भट्ट 7 दिन की पुलिस रिमांड पर, 30 करोड़ की ठगी केस में सबूत जुटाए जाएंगे

    उदयपुर: फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट और पत्नी श्वेतांबरी भट्ट 7 दिन की पुलिस रिमांड पर, 30 करोड़ की ठगी केस में सबूत जुटाए जाएंगे


    उदयपुर / पुलिस ने फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को 30 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार कर 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। दोनों को मुंबई से ट्रांजिट रिमांड के तहत उदयपुर लाया गया और मंगलवार को एसीजेएम कोर्ट-4 में पेश किया गया।

    पुलिस के अनुसार, आरोप है कि भट्ट दंपती ने फिल्म निर्माण के नाम पर बड़ी रकम ली, लेकिन न तो शूटिंग पूरी की और न ही रकम लौटाई। शिकायत इंदिरा ग्रुप के डायरेक्टर डॉ. अजय मर्डिया द्वारा दर्ज कराई गई थी, जो इंदिरा आईवीएफ से जुड़ा मामला है।

    रिमांड के दौरान पुलिस क्या करेगी?

    बैंक स्टेटमेंट और भुगतान स्रोतों की जांच

    अनुबंधों की वैधता और परियोजना का वित्तीय लेखा-जोखा देखना

    डिजिटल सबूत जैसे ईमेल, व्हाट्सएप चैट और अन्य संचार रिकॉर्ड की जांच

    संभावित गवाहों और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत छानबीन

    पुलिस का कहना है कि रिमांड अवधि में सभी महत्वपूर्ण सबूत जुटाकर आरोपीयों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

    भट्ट दंपती का बयान

    विक्रम और श्वेतांबरी भट्ट ने आरोपों का खंडन किया है और कहा कि आरोप निराधार हैं। उनके वकीलों ने बताया कि वे न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करेंगे और सच्चाई सामने आएगी।

    स्थानीय प्रशासन ने भी कहा कि जांच को निष्पक्ष और तेज गति से पूरा किया जाएगा, ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके। रिमांड अवधि के बाद कोर्ट अगली सुनवाई में हिरासत या जमानत से जुड़े आदेश देगा।