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  • UAE में भ्रामक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में 35 लोग गिरफ्तार… 19 भारतीय भी शामिल

    UAE में भ्रामक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में 35 लोग गिरफ्तार… 19 भारतीय भी शामिल


    दुबई।
    संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.- UAE) में सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी वीडियो (Misleading and Fake Videos) पोस्ट करने के आरोप में 35 लोगों की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया है। इन आरोपियों में 19 भारतीय नागरिक (19 Indian Citizens) भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन लोगों ने क्षेत्रीय तनाव के बीच इंटरनेट पर ऐसी सामग्री साझा की जिससे लोगों में भ्रम और डर फैल सकता था।

    यूएई की आधिकारिक समाचार एजेंसी WAM के अनुसार, सभी आरोपियों को तेज सुनवाई (फास्ट-ट्रैक ट्रायल) के लिए अदालत में पेश किया जाएगा।


    डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी के बाद कार्रवाई

    यूएई के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की सख्त निगरानी के दौरान यह सामने आया कि कुछ लोग झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाकर सार्वजनिक व्यवस्था और देश की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। जांच में पाया गया कि आरोपी तीन अलग-अलग समूहों में काम कर रहे थे और उन्होंने अलग-अलग तरीकों से भ्रामक सामग्री पोस्ट की।


    पहला समूह: असली वीडियो के साथ भ्रामक दावे

    पहले समूह के 10 लोगों ने वास्तविक वीडियो क्लिप पोस्ट किए, जिनमें देश के हवाई क्षेत्र में मिसाइलों के गुजरने या उन्हें रोकने के दृश्य दिखाए गए थे। इन वीडियो के साथ ऐसे कमेंट और साउंड इफेक्ट जोड़े गए जिससे यह लगे कि देश पर हमला हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार इससे लोगों में डर और घबराहट फैल सकती थी। इस समूह में 5 भारतीय, 1 पाकिस्तानी, 1 नेपाली, 2 फिलीपीन नागरिक और 1 मिस्र का नागरिक शामिल है।


    दूसरा समूह: एआई से बनाए गए फर्जी वीडियो

    दूसरे समूह के 7 लोगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके विस्फोट, मिसाइल हमलों और आग लगने जैसे नकली दृश्य तैयार किए। इन वीडियो में राष्ट्रीय झंडे और तारीखें भी जोड़ी गईं ताकि लोग इन्हें असली समझ लें। कई वीडियो ऐसे थे जिन्हें दूसरे देशों की घटनाओं से जोड़कर यूएई का बताया गया। इस समूह में पांच भारतीय, एक नेपाली और एक बांग्लादेशी शामिल हैं।


    तीसरा समूह: दूसरे देश की सैन्य कार्रवाई का प्रचार

    तीसरे समूह के 6 लोगों पर एक ऐसे देश की सैन्य कार्रवाई और नेतृत्व की तारीफ करते हुए सामग्री साझा करने का आरोप है जिसे यूएई ने शत्रुतापूर्ण राज्य बताया है। इस समूह में पांच भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल है। इसके अलावा दो और भारतीयों पर भी इसी तरह के आरोप लगाए गए हैं।


    पहले भी 10 लोगों की गिरफ्तारी का आदेश

    इससे पहले शनिवार को भी 10 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जिनमें दो भारतीय शामिल थे। अभियोजन पक्ष ने सभी आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और उन्हें हिरासत में भेज दिया गया है।


    सख्त सजा का प्रावधान

    यूएई के कानून के अनुसार, इस तरह के अपराधों में कम से कम एक साल की जेल और एक लाख दिरहम (लगभग 22 लाख रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अटॉर्नी जनरल अल शम्सी ने कहा कि हालिया क्षेत्रीय तनाव का फायदा उठाकर झूठी जानकारी फैलाने की कोशिश की गई, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को खतरा हो सकता था।

  • गाजियाबाद से 6 संदिग्ध जासूस पकड़े, PAK भेजते थे लाइव वीडियो; दिल्ली में लगा रखा था IP सोलर कैमरा

    गाजियाबाद से 6 संदिग्ध जासूस पकड़े, PAK भेजते थे लाइव वीडियो; दिल्ली में लगा रखा था IP सोलर कैमरा

    नई दिल्‍ली। दिल्ली-एनसीआर के संवेदनशील स्थानों के वीडियो और फोटो बनाकर पाकिस्तान भेजने वाले छह संदिग्ध जासूसों को गाजियाबाद के कौशांबी थानाक्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों में एक महिला शामिल है। शनिवार को पकड़े गए ये छह आरोपी देश के खिलाफ बड़ी साजिश रच रहे थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी एक साल में 50 से अधिक वीडियो पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को भेज चुके हैं।

    पुलिस ने शनिवार सुबह गुप्त सूचना पर भोवापुर तिराहा के पास से मेरठ के परतापुर निवासी सुहेल मलिक, भोवापुर निवासी प्रवीन, राज, शिवा और रितिक को गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ के बाद आनंद विहार बॉर्डर से संभल निवासी साने इरम उर्फ महक को पकड़ लिया।
    दिल्ली में आईपी सोलर कैमरे लगा पाक भेजते थे लाइव वीडियो

    आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन मिले हैं। इनमें दिल्ली के रेलवे स्टेशनों और सैन्य ठिकानों के फोटो, वीडियो हैं। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि इन लोगों ने दिल्ली में कुछ स्थान पर आईपी सोलर कैमरे भी लगा रखे थे और वहां की लाइव वीडियो पाकिस्तान भेजते थे। सूत्रों के अनुसार, अभी तक दिल्ली में सिर्फ एक स्थान पर ऐसे कैमरे के बारे में आरोपियों ने बताया है। इसकी सूचना दिल्ली पुलिस को दे दी गई है। आगे की जांच में पता चलेगा कि और कितनी जगहों पर आरोपियों ने ऐसे कैमरे लगाए थे।
    पाकिस्तान से आई डिमांड पर आरोपी संबंधित जगह जाकर फोटो-वीडियो बनाकर भेजते थे। लोकेशन के हिसाब से इन्हें पांच से आठ हजार रुपये तक एक जगह के मिलते थे। आरोपियों के मोबाइलों से पुलिस को अब तक एक ही पाकिस्तानी नंबर मिला है। जांच में सामने आया है कि आरोपी करीब एक साल से पाकिस्तान में बैठे सरगना के संपर्क में थे। बातचीत सिर्फ वॉट्सऐप चैट के जरिये होती थी। पाकिस्तान में बैठा मास्टरमाइंड गिरोह से जुड़ने वाले हर सदस्य से सीधे संपर्क में रहता था। वह सभी से अलग-अलग स्थानों के फोटो और वीडियो की मांग करता था और आरोपी उसका आदेश को पूरा करते थे। हालांकि, अब तक की जांच में सुहेल के खाते में ही पाकिस्तान से रकम भेजने की बात सामने आई है। बाकी आरोपियों के बैंक खातों की जानकारी भी जल्द पुलिस को मिलेगी। शनिवार शाम सभी आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने सभी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।
    दिल्ली के कई स्थानों पर थी नजर

    मोबाइल से दिल्ली स्थित आनंद विहार रेलवे स्टेशन, दिल्ली कैंटोनमेंट, बीएसएफ व सीआरपीएफ के मुख्यालय समेत कई संवेदनशील स्थानों के फोटो-वीडियो मिले हैं। इन्हें पाकिस्तानी नंबर पर भेजा गया है। आरोपियों के मोबाइल से 20 से अधिक स्थानों के 50 वीडियो और इससे भी अधिक फोटो मिले हैं। सभी वीडियो और फोटो दिल्ली में ही अलग-अलग संवेदनशील स्थानों के हैं। पुलिस इन चैट और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। आशंका है कि दिल्ली में घटना को अंजाम देने साजिश की जा रही थी। दिल्ली में बीते साल लाल किला के पास हुए धमाके से भी इसे जोड़कर देखा जा रहा है।
    सुहेल-इरम मिलने आते थे

    मेरठ में रहने वाले गिरोह का सरगना सुहेल बिजनौर के नरगढ़ी का मूल निवासी है। राज वाल्मीकि औरैया कोतवाली क्षेत्र, शिवा बदायूं के उझियानी और रितिक शाहजहांपुर के कटरा का है। सुहेल और इरम के अलावा बाकी चारों भोवापुर में किराये के मकान में रहते थे। चारों साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों में कर्मचारी के पद पर काम करते थे। कानून-व्यवस्था एवं यातायात के एडिशनल सीपी राजकरन नैय्यर ने बताया कि सभी छह आरोपियों के मोबाइल से पाकिस्तानी नंबर पर बातचीत और संवेदनशील ठिकानों के फोटो और वीडियो मिले हैं। आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच की जा रही है।
    नाहल में पकड़े गए आरोपियों से भी संबंध होने की आशंका

    गाजियाबाद के नाहल क्षेत्र से एटीएस ने भी छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। आशंका है कि इनका एटीएस द्वारा पकड़े गए आरोपियों से भी संपर्क था। हालांकि, अभी तक पुलिस जांच में यह तथ्य नहीं आया है। नाहल के किसी भी आरोपी या उनसे जुड़े पाकिस्तानी नंबर पुलिस को आरोपियों के फोन से नहीं मिले। आरोपियों के सभी आठ मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाएंगे तभी पता चल पाएगा कि आरोपी कब से पाकिस्तान के संपर्क में थे।
    गिरोह में कुछ और युवतियां शामिल

    सुहेल के बाद इरम गिरोह में दूसरे नंबर पर थी। दोनों समय-समय पर मेरठ और संभल से आकर चारों से मिलते थे। इरम मुख्य रूप से गिरोह में शामिल करने के लिए युवाओं को चिह्नित कर उनसे संपर्क करती थी। शुरुआत में कंटेंट के लिए फोटो व वीडियो के लिए बात करते। पहली बार आरोपियों को रुपये मिल जाते, जिसके बाद वे सवाल पूछे बिना आरोपियों की कही बात मानते रहते थे। अंदेशा है कि गिरोह में कुछ और युवतियां भी शामिल हो सकती हैं।
    एजेंसियों ने पूछताछ की

    आरोपियों के पकड़े जाते ही इसकी सूचना खुफिया एजेंसियों को दी गई। तुरंत एटीएस और आईबी के साथ स्थानीय खुफिया इकाई पहुंची और आरोपियों से लंबी पूछताछ की। सभी के बयान दर्ज किए गए। पाकिस्तान में कितने लोगों से संपर्क हैं, कितने समय से काम कर रहे हैं, गिरोह में कितने लोग, कहां-कहां के शामिल हैं। फोटो-वीडियो क्यों मंगाए गए, क्या साजिश है, इन सभी बिंदुओं पर पूछताछ के बाद खुफिया टीम कौशांबी थाने से लौट गई।
    स्थानीय लोगों की सजगता से पकड़े गए

    आरोपी दिल्ली के अलावा आसपास के इलाकों के भी फोटो और वीडियो बनाते थे। आरोपियों ने पड़ोसियों को बताया था कि इसके लिए रुपये मिलते हैं और वे रुपयों का लालच देकर अन्य लोगों को भी इससे जोड़ने के प्रयास में थे। आसपास के लोगों को इनकी गतिविधि पर शक हुआ और इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस के मुताबिक स्थानीय लोगों की सजगता से बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है।

  • महिला IAS के फार्म हाउस में जुए का भंडाफोड़, 18 गिरफ्तार, 13 लाख नकद जब्त

    महिला IAS के फार्म हाउस में जुए का भंडाफोड़, 18 गिरफ्तार, 13 लाख नकद जब्त


    महू । महू के मानपुर थाना क्षेत्र में बुधवार तड़के पुलिस ने अवलीपुरा स्थित एक फार्म हाउस पर छापा मारकर बड़े पैमाने पर जुए का भंडाफोड़ किया। यह फार्म हाउस IAS वंदना वैद्य और उनके पति अम्बरीश वैद्य के नाम पर दर्ज है। वंदना वैद्य वर्तमान में वित्त विकास निगम, इंदौर की प्रबंध संचालक (MD) हैं।

    सूत्रों के अनुसार फार्म हाउस की देखभाल फिलहाल गांव के एक व्यक्ति द्वारा की जा रही थी। पुलिस ने मौके पर 18 जुआरियों को गिरफ्तार किया, जबकि पांच आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे।

    जब्त सामग्री और संपत्ति
    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 13 लाख 67 हजार 971 रुपए नकद, 52 ताश के पत्ते, 10 नई ताश की गड्डियां, 30 मोबाइल फोन और दो कारें जब्त की हैं। जब्त की गई संपत्ति की कुल कीमत लगभग 28 लाख 67 हजार 971 रुपए बताई जा रही है।

    दबिश की कहानी
    पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि अवलीपुरा के फार्म हाउस में बड़े पैमाने पर जुआ चल रहा है। पुलिस टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी और मौके पर दबिश दी। मुख्य गेट बाहर से बंद था, लेकिन अंदर से लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। पुलिस ने पीछे से प्रवेश किया और बरामदे में रोशनी में जुआ खेलते लोगों को रंगे हाथों पकड़ लिया।

    18 गिरफ्तार आरोपियों को एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद सभी को जेल भेज दिया गया। पुलिस अभी भी भागे हुए पांच आरोपियों की तलाश कर रही है।

    जुए का प्लान और सरगना
    जानकारी के अनुसार यह जुआ 1 मार्च को जमने वाला था, लेकिन किसी कारणवश कैंसिल हो गया। नई तारीख 10 मार्च तय की गई थी। पकड़े गए जुआरियों का कहना है कि वे पहली बार यहां आए थे। पुलिस ने मुख्य सरगना जगदीश राठौर उर्फ कूबड़ा की पहचान की है, जो लगातार जगह बदलकर जुए के अड्डे चलाता है।

    मानपुर थाना प्रभारी लोकेंद्र हीहोर ने बताया कि कार्रवाई मुखबिर की सूचना पर की गई थी और पकड़े गए आरोपियों से नकदी, मोबाइल और वाहन जब्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए टीम सतर्क है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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  • बंगाल में पकड़े गए बांग्लादेश के दो आरोपी, युवा नेता हादी की हत्या में बताए जा रहे शामिल

    बंगाल में पकड़े गए बांग्लादेश के दो आरोपी, युवा नेता हादी की हत्या में बताए जा रहे शामिल


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सीमा के पास पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन पर बांग्लादेश के युवा नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शरिफ उस्मान हादी की हत्या में शामिल होने का आरोप है।

    पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बोंगांव सीमा क्षेत्र में छापेमारी कर दोनों संदिग्धों को पकड़ा। पुलिस के मुताबिक आरोपी भारत में छिपे हुए थे और मौका मिलते ही वापस बांग्लादेश भागने की योजना बना रहे थे।

    गुप्त सूचना के बाद हुई कार्रवाई

    पुलिस को सूचना मिली थी कि बांग्लादेश में गंभीर अपराध करने के बाद दो लोग अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए हैं। इसके बाद STF ने बोंगांव इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया।

    7 और 8 मार्च की रात छापेमारी कर दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी पहचान राहुल उर्फ फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों पर हत्या और वसूली जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं।

    मेघालय सीमा से भारत में घुसे

    जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी मेघालय सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे। इसके बाद वे अलग-अलग जगहों पर घूमते रहे और अंत में पश्चिम बंगाल के बोंगांव इलाके में पहुंच गए।

    पुलिस को शक है कि वे कुछ समय तक सीमा के पास छिपे रहने के बाद फिर से बांग्लादेश भागने की योजना बना रहे थे।

    ढाका में हुई थी गोली मारकर हत्या

    जानकारी के अनुसार 12 दिसंबर को ढाका के बिजयनगर इलाके में शरिफ उस्मान हादी पर उस समय हमला किया गया था जब वह रिक्शा से यात्रा कर रहे थे। हमलावरों ने करीब से गोली चलाई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

    बेहतर इलाज के लिए 15 दिसंबर को उन्हें एयर एंबुलेंस से सिंगापुर भेजा गया, लेकिन 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।

    हत्या के बाद ढाका में प्रदर्शन

    हादी की मौत के बाद ढाका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनके समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग की थी। उस समय मोहम्मद यूनुस ने इस घटना के बाद राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया था।

    बताया जाता है कि हादी को फरवरी 2026 के राष्ट्रीय चुनाव में ढाका-8 सीट से संभावित उम्मीदवार माना जा रहा था।

    आगे की जांच जारी

    पुलिस ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या की साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे और भारत में आने के बाद आरोपियों ने किन लोगों से संपर्क किया।

  • ग्वालियर: एटीएम में छल, मदद के नाम पर हो रही थी ठगी, पुलिस ने किया खुलासा

    ग्वालियर: एटीएम में छल, मदद के नाम पर हो रही थी ठगी, पुलिस ने किया खुलासा

    ग्वालियर के मुरार इलाके में एटीएम के भीतर चल रही एक चालाक ठगी का खुलासा हुआ है। सदर बाजार स्थित एक एटीएम में एक युवक लोगों की मदद करने का बहाना कर उनके कार्ड बदलता था। आज का दिन भी इस कहानी का नया अध्याय बन गया जब युवक को पकड़ लिया गया।

    पकड़े गए आरोपी की पहचान प्रदीप शिवहरे उर्फ पिंकू, निवासी कोटेश्वर के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार यह युवक एटीएम पर आने वाले ग्राहकों को मशीन चलाने में मदद करने का नाटक करता था। इस दौरान वह असली कार्ड की जगह दूसरा कार्ड थमा देता और किसी तरह पिन की जानकारी हासिल करने की कोशिश करता। इसके बाद वह मौके से खिसक जाता।

    हालांकि आज की घटना में पीड़ित ने समय रहते संदेह कर लिया। जैसे ही कार्ड बदलने की कोशिश हुई, पीड़ित ने विरोध किया और शोर मचाया। आसपास मौजूद लोग तुरंत सक्रिय हो गए और आरोपी को दबोच लिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उसे हिरासत में ले लिया।

    पुलिस पूछताछ में आरोपी ने हैरान करने वाले खुलासे किए। उसके पास 100 से अधिक एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं। ये कार्ड विभिन्न खाताधारकों के थे और सभी जब्त कर लिए गए। पुलिस अब इनके असली मालिकों की पहचान करने में जुटी हुई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं था बल्कि यह एक संगठित ठगी का हिस्सा हो सकता है।

    ASP अनु बेनीवाल ने बताया कि आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने लोग इस ठगी का शिकार हो चुके हैं और क्या इस गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हैं। गहन पूछताछ के जरिए पुलिस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। इस दौरान अन्य बड़े खुलासे होने की संभावना भी जताई जा रही है।

    स्थानीय लोग इस घटना को लेकर काफी चौकन्ने हैं। उनका कहना है कि अब एटीएम पर सहायता लेने से पहले सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है। वहीं पुलिस का भी कहना है कि लोगों को हमेशा अपने कार्ड और पिन की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और किसी अनजान व्यक्ति की मदद लेने से पहले सावधान रहना चाहिए।

    ग्वालियर में यह घटना लोगों के लिए चेतावनी का संदेश बन गई है कि मदद के बहाने ठगी की घटनाएं कहीं भी हो सकती हैं। यह मामला यह भी साबित करता है कि सतर्कता और सामूहिक चौकसी ही ऐसे अपराधों को रोक सकती है। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और सभी संभावित शिकारों और संदिग्धों की पहचान कर रही है।

  • इस देश में खुलेआम किस करने पर दो महिलाएं गिरफ्तार… यहां समलैंगिकता है जघन्य अपराध!

    इस देश में खुलेआम किस करने पर दो महिलाएं गिरफ्तार… यहां समलैंगिकता है जघन्य अपराध!


    कंपाला।
    दुनिया में आज भी कई ऐसे देश हैं, जिनमें समलैंगिकता (Homosexuality) को जघन्य अपराध माना जाता है। अफ्रीकी देश युगांडा (African Country Uganda) भी उन्हीं देशों में से एक है। यहां पर दो युवा महिलाओं (Two Young Women) को खुले आम प्यार का इजहार करना महंगा पड़ गया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महिलाओं को किस करते हुए देखा गया, चूंकि यह देश के कानून के खिलाफ है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

    पुलिस के बयान के मुताबिक एक महिला की उम्र करीब 22 साल है, जबकि दूसरी की उम्र करीब 21 साल है। दोनों को देश के अरुआ शहर से गिरफ्तार किया गया है, जहां पर वह खुले आम किस करने और असामान्य कृत्यों में संलिप्त थीं, जिन्हें यौन प्रकृति का माना जाता है।

    आपको बता दें, युगांडा में वर्ष 2023 में एंटी होमोसेक्सुएलिटी एक्ट लागू किया गया है। देश की सरकार द्वारा लागू किए गए इस कानून का पश्चिमी देशों ने भरपूर विरोध किया था लेकिन यहां की सरकार सबसे कठोर एलजीबीटीक्यू विरोधी कानून लागू करने पर लगी हुई है। इस कानून के तहत समलैंगिक संबंध रखने वाले लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है, जबकि गंभीर मामलों में मृत्युदंड का भी प्रावधान है।


    बार-बार पकड़े जाने पर मृत्युदंड का प्रावधान
    समलैंगिक संबंधों को लेकर युगांड़ा का कानून सबसे ज्यादा कठोर है। 2023 में पारित किए गए कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति बार-बार समलैंगिक संबंध बनाते पकड़ा जाता है, या ऐसा समलैंगिक संबंध जिससे लाइलाज बीमारी फैलती हो, नाबालिग, बुजुर्ग या दिव्यांग व्यक्ति के साथ समलैंगिक संबंध बनाने पर व्यक्ति को मृत्युदंड दिया जा सकता है।

    गौरतलब है कि युगांडा पूर्वी अफ्रीका का एक रूढ़िवादी और मुख्यतः ईसाई बहुल देश है। इस कानून के कारण मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में व्यापक आक्रोश फैल गया था और संयुक्त राष्ट्र तथा पश्चिमी देशों ने इसकी निंदा की थी। विश्व बैंक ने देश को दी जाने वाली वित्तीय सहायता निलंबित कर दी थी, हालांकि 2025 के मध्य में इसे फिर से बहाल कर दिया गया। इस महीने की शुरुआत में, एक युगांडा अदालत ने “गंभीर समलैंगिकता” श्रेणी के तहत आरोपित पहले व्यक्ति के खिलाफ मामला खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि लंबी न्यायिक हिरासत के कारण उसकी मानसिक स्थिति अस्थिर हो गई थी।

  • US में F-35 का रिटायर्ड पायलट गिरफ्तार, चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त प्रशिक्षण देने का आरोप

    US में F-35 का रिटायर्ड पायलट गिरफ्तार, चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त प्रशिक्षण देने का आरोप


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पर पूर्व अमेरिकी वायु सेना (American Air Force) के एलीट फाइटर पायलट और एफ-35 प्रशिक्षक (F-35 Trainer) गेराल्ड एडी ब्राउन जूनियर को चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त रूप से लड़ाकू प्रशिक्षण देने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि उन्हें शस्त्र निर्यात नियंत्रण अधिनियम (AECA) के उल्लंघन के तहत आरोपित किया गया है। उन्हें 26 फरवरी 2026 को इंडियाना के दक्षिणी जिले में मजिस्ट्रेट जज के समक्ष पेश किया जाना है।

    राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन ए आइजेनबर्ग ने कहा कि अमेरिकी वायु सेना ने मेजर ब्राउन को एक विशिष्ट लड़ाकू पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया था और राष्ट्र की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब उन पर चीनी सैन्य पायलटों को प्रशिक्षण देने का आरोप है। न्याय विभाग के अनुसार, 24 वर्ष से अधिक समय तक अमेरिकी वायु सेना में सेवा देने वाले पूर्व एफ-35 प्रशिक्षक पायलट ब्राउन ने कथित तौर पर अगस्त 2023 से चीनी सैन्य पायलटों (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स – PLAAF) को लड़ाकू विमान प्रशिक्षण प्रदान करने की साजिश रची। यह प्रशिक्षण अंतर्राष्ट्रीय शस्त्र व्यापार विनियम (ITAR) के तहत रक्षा सेवा माना जाता है, जिसके लिए स्टेट डिपार्टमेंट से लाइसेंस जरूरी था, जो ब्राउन के पास नहीं था।

    ब्राउन के सैन्य करियर में संवेदनशील इकाइयों का नेतृत्व, युद्ध अभियानों का संचालन और एफ-4, एफ-15, एफ-16, ए-10 तथा एफ-35 जैसे विमानों पर लड़ाकू पायलट एवं सिम्युलेटर प्रशिक्षक के रूप में सेवा शामिल थी। 1996 में सक्रिय सेवा छोड़ने के बाद उन्होंने वाणिज्यिक पायलट और अमेरिकी रक्षा ठेकेदारों के लिए अनुबंध सिम्युलेटर प्रशिक्षक के तौर पर काम किया। दिसंबर 2023 में ब्राउन चीन गए, जहां उन्होंने PLAAF पायलटों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। शिकायत के मुताबिक, पहले दिन उन्होंने अमेरिकी वायु सेना के बारे में तीन घंटे तक सवालों के जवाब दिए, दूसरे दिन खुद के बारे में प्रस्तुति दी, और फरवरी 2026 की शुरुआत तक अमेरिका लौटने तक सिम्युलेटर एवं उड़ान प्रशिक्षण संचालित किया। उन्होंने अमेरिकी वायु सेना के अभियानों पर विस्तृत जानकारी भी साझा की।

    एफबीआई के काउंटरइंटेलिजेंस और जासूसी प्रभाग के सहायक निदेशक रोमन रोजहाव्स्की ने कहा कि ब्राउन ने कथित तौर पर अपने देश के साथ विश्वासघात किया, क्योंकि उन्होंने चीनी पायलटों को उन लोगों के खिलाफ लड़ने का प्रशिक्षण दिया जिनकी रक्षा करने की उन्होंने शपथ ली थी। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है। यह गिरफ्तारी 2017 में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के पूर्व पायलट डैनियल एडमंड डुग्गन के खिलाफ इसी तरह के आरोपों के बाद हुई है। न्याय विभाग ने जोर दिया कि चीन अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नाटो और सहयोगी देशों के वर्तमान एवं पूर्व सैन्य कर्मियों को निशाना बनाना जारी रखे हुए है।

  • MP: खरगोन में शख्स ने 20 साल की उम्र में चुराया था 100 रु का गेहूं, पुलिस ने 45 साल बाद किया गिरफ्तार

    MP: खरगोन में शख्स ने 20 साल की उम्र में चुराया था 100 रु का गेहूं, पुलिस ने 45 साल बाद किया गिरफ्तार


    खरगोन।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के खरगोन जिले (Khargone district) से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, क्योंकि यहां पर पुलिस ने एक बार फिर यह साबित करके दिखा दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे (Law Arm too Long) होते हैं और अपराधी चाहकर भी उसके चंगुल से नहीं बच सकता है। दरअसल यहां पर पुलिस 65 वर्षीय एक बुजुर्ग को उस अपराध के मामले में गिरफ्तार किया है, जो उसने 45 साल पहले किया था और जिस समय उसकी उम्र मात्र 20 साल थी। आरोपी की पहचान सलीम के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक सलीम की गिरफ्तारी साल 1980 में दर्ज गेहूं चोरी के एक मामले को लेकर हुई है।


    1980 में चुराया था 100 रुपए का गेहूं

    मंडलेश्वर की अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (SDOP) श्वेता शुक्ला ने मामले की जानकारी देते हुए रविवार को बताया कि सलीम और उसके छह अन्य साथियों ने साल 1980 में बालसमुंद के काकड़ इलाके में खेतों से गेहूं चुराया था। आरोपियों ने वारदात के वक्त जो गेहूं चोरी किया था, वह करीब एक क्विंटल यानी 100 किलोग्राम था और उस समय उसकी कीमत लगभग 100 रुपए थी। क्योंकि तब अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं की कीमत करीब 1.15 रुपए प्रति किलोग्राम थी।


    किराने की दुकान चला रहा था आरोपी

    SDOP ने आगे बताया कि बलकवाड़ा थाना क्षेत्र के बलखड गांव का रहने वाला सलीम चोरी की उस घटना के बाद भाग गया था और पड़ोसी धार जिले के बाग कस्बे में जाकर अपने बेटे के साथ किराने की दुकान चलाने लगा। उन्होंने कहा कि यह मामला अदालतों में लंबित रहा इस दौरान सलीम के खिलाफ कई बार वारंट भी जारी किया गया था।


    पुलिस को यूं मिला आरोपी का सुराग

    खलटका थाने के प्रभारी मिथुन चौहान ने बताया कि एक अन्य आरोपी को तलाश करने के दौरान पुलिस को पता चला कि सलीम किराने की दुकान के जरिए जीवन यापन चला रहा है। उन्होंने कहा कि पहचान की पुष्टि होने के बाद उसे शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस अधिकारी श्वेता शुक्ला ने कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसका मानना था कि इतने सालों के बाद मामले को भुला दिया गया होगा और वह कानूनी कार्रवाई से बच गया है। हालांकि उसका ये अनुमान पूरी तरह गलत साबित हो गया। चौहान ने बताया कि सलीम को यहां एक अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

  • साबरकांठा में ‘जहर का कारोबार’: डिटर्जेंट-यूरिया मिलाकर 5 साल से बन रहा था नकली दूध

    साबरकांठा में ‘जहर का कारोबार’: डिटर्जेंट-यूरिया मिलाकर 5 साल से बन रहा था नकली दूध


    नई दिल्ली। गुजरात के साबरकांठा जिले में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यहां डिटर्जेंट, यूरिया और अन्य खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल कर नकली दूध और छाछ बनाने वाली एक फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया है, जो पिछले करीब पांच वर्षों से अवैध रूप से संचालित हो रही थी। इस कार्रवाई में अधिकारियों ने करीब 71 लाख रुपये का सामान जब्त किया है और एक नाबालिग समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    यह छापेमारी श्री सत्य डेयरी प्रोडक्ट्स नाम की यूनिट पर की गई, जहां कथित तौर पर पानी, मिल्क पाउडर, कास्टिक सोडा, रिफाइंड पामोलिन तेल, सोयाबीन तेल, डिटर्जेंट पाउडर और यूरिया खाद मिलाकर बड़े पैमाने पर नकली दूध तैयार किया जा रहा था। यह मिलावटी दूध आसपास के कई गांवों में पाउच में पैक कर सप्लाई किया जाता था, जिससे हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा था।

    300 लीटर असली दूध से बनाते थे 1800 लीटर नकली दूध

    जांच में सामने आया कि आरोपी बेहद संगठित तरीके से इस धंधे को चला रहे थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपी रोजाना लगभग 300 लीटर असली दूध का इस्तेमाल करते थे। इसमें विभिन्न केमिकल और पाउडर मिलाकर वे 1,700 से 1,800 लीटर तक नकली दूध तैयार कर लेते थे। यानी कम मात्रा में असली दूध को आधार बनाकर उसकी मात्रा छह गुना तक बढ़ा दी जाती थी। इसके बाद इस दूध को पाउच में पैक कर गांव-गांव पहुंचाया जाता था, जहां आम लोग इसे असली समझकर इस्तेमाल करते थे। इसी तरह मिलावटी छाछ भी तैयार की जाती थी, जिससे यह कारोबार और अधिक फैल गया था।

    छापे में मिली खतरनाक सामग्री

    लोकल क्राइम ब्रांच, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी FSL और फूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर इस फैक्ट्री पर कार्रवाई की। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में खतरनाक केमिकल और मिलावट में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया। जब्त किए गए सामान में 450 किलो व्हे पाउडर, 625 किलो स्किम्ड मिल्क पाउडर, 300 किलो प्रीमियम SMP पाउडर, यूरिया खाद, कास्टिक सोडा, डिटर्जेंट पाउडर, सोयाबीन तेल और पामोलिन तेल शामिल हैं। इसके अलावा मौके से 1,962 लीटर तैयार मिलावटी दूध और 1,180 लीटर मिलावटी छाछ भी बरामद की गई, जिन्हें बाजार में भेजने की तैयारी थी।  अधिकारियों के अनुसार, इन केमिकल्स का इस्तेमाल दूध की मोटाई, झाग और प्रोटीन की मात्रा को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए किया जाता था, ताकि देखने में यह असली लगे और ग्राहक आसानी से धोखा खा जाएं।

    स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिटर्जेंट, यूरिया और कास्टिक सोडा जैसे तत्वों का सेवन शरीर के लिए बेहद खतरनाक होता है। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी दूध का सेवन करने से पेट, किडनी और लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी ज्यादा हानिकारक साबित हो सकता है।

    पांच साल से चल रहा था गोरखधंधा

    जांच में यह भी सामने आया है कि यह फैक्ट्री करीब पांच वर्षों से लगातार चल रही थी। इतने लंबे समय तक इस यूनिट का संचालन होना इस बात का संकेत है कि यह नेटवर्क काफी संगठित और योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था। गांवों में इसकी नियमित सप्लाई के कारण इसका दायरा भी काफी बड़ा हो गया था। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से दूध बनाने और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण भी बरामद किए गए। अधिकारियों ने मौके पर ही यूनिट को सील कर दिया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

    एक नाबालिग समेत पांच गिरफ्तार

    इस मामले में एक नाबालिग सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस धंधे से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे और सप्लाई चेन कितनी दूर तक फैली हुई थी। जांच के दौरान और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही, जिन इलाकों में यह दूध सप्लाई किया गया, वहां लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मिलावट के खिलाफ सख्ती जारी

    फूड एंड ड्रग्स विभाग ने साफ किया है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा। खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि आम लोगों की सेहत से कोई समझौता न हो।

  • बैतूल में खेत में करंट से ग्रामीण की मौत, आरोपी गिरफ्तार

    बैतूल में खेत में करंट से ग्रामीण की मौत, आरोपी गिरफ्तार


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में खेत में अवैध रूप से बिजली का करंट फैलाने से एक ग्रामीण की मौत का मामला सामने आया। पुलिस ने इस हत्या के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। घटना 4 सितंबर 2025 की है, जब ग्राम झाडेगांव निवासी सदन पन्द्राम जंगल में अपने मवेशी चराने गया था। इसी दौरान पास के खेत में लगे नंगे तार की चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक के भाई शिवलाल पन्द्राम की शिकायत पर कोतवाली थाना में मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने मृतक के परिवार के बयान, घटनास्थल निरीक्षण और साक्ष्यों के आधार पर गहन जांच शुरू की। विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि ग्राम भोगीतेड़ा निवासी शिवचरण उपासे ने अपने खेत की मेढ़ पर खूंटी गाड़कर नंगे तार में करंट प्रवाहित कर रखा था। पुलिस के अनुसार, यह तार जानबूझकर लगाया गया था, जिससे हादसा घटित हुआ।

    कोतवाली पुलिस ने आरोपी शिवचरण उपासे के खिलाफ अपराध क्रमांक 37/25 के तहत धारा 105 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि आरोपी को पकड़कर पूछताछ की जा रही है और इस घटना में उसकी भूमिका की पुष्टि की जा रही है। पुलिस ने मृतक के परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन भी दिया है। इस हादसे ने इलाके में सुरक्षा की गंभीर स्थिति को उजागर किया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई खेतों में नंगे तार लगाकर करंट फैलाने की घटनाएं होती रहती हैं, जिससे लोगों और मवेशियों के जीवन को खतरा रहता है। पुलिस अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की लापरवाही और जानलेवा गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    घटना के बाद पुलिस ने इलाके में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है और ग्रामीणों को सुरक्षित रहने की हिदायत दी है। इसके अलावा मृतक परिवार को मुआवजा और कानूनी सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को कानून के अनुसार कठोर सजा दिलाने के लिए पूरी तरह से जांच जारी रहेगी। इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अवैध बिजली प्रयोग न केवल गैरकानूनी है बल्कि मानव जीवन के लिए भी घातक साबित हो सकता है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दें, ताकि भविष्य में किसी और अनहोनी की घटना को रोका जा सके।