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  • असम के CM बोले- घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी मुसलमानों को लात मार-मारकर भगाऊंगा

    असम के CM बोले- घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी मुसलमानों को लात मार-मारकर भगाऊंगा


    कोलकाता
    । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में असम (Assam) के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) भी प्रचार कर रहे हैं। वे बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) पर हमलावर हैं और उनपर बांग्लादेशी मुस्लिमों की घुसपैठ करवाने का आरोप लगा रहे। हाल ही में एक चुनावी रैली करते हुए हिमंत सरमा ने दो टूक कहा कि वह जितने भी बांग्लादेशी मुसलमान हैं, उन्हें लात मार-मारकर भगाने वाले हैं। वह किसी से डरते नहीं हैं।

    उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने बंगाल की सीमाओं को बांग्लादेश के साथ खोलकर रखा है। हर दिन बांग्लादेशी मुसलमान लोग, बंगाल की सीमा से आते हैं, मैं लात मारकर असम से भगाता हूं, लेकिन फिर आ जाते हैं। इसलिए अगर भारत को बांग्लादेशी मुसलमानों से मुक्त करना है तो पश्चिम बंगाल में भी भाजपा सरकार चाहिए।

    सरमा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से बनर्जी ने पूरे बंगाल को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने कहा, “हमें ममता बनर्जी को बंगाल के मुख्यमंत्री पद से हटाना होगा, अन्यथा एक दिन बांग्लादेशी मुसलमान हमसे यह राज्य छीन लेंगे।” भाजपा नेता ने दावा किया कि बनर्जी के कार्यकाल में उत्तर बंगाल में कोई विकास नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ”जैसे ही बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी, हम इस क्षेत्र से सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर कर देंगे।” उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य में सत्ता में आने पर गोरखालैंड मुद्दे का संवैधानिक समाधान तलाशेगी और ”गोरखाओं के लिए न्याय सुनिश्चित करेगी।”


    TMC ने दर्ज करवाई शिकायत

    वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत के खिलाफ निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान ‘ध्रुवीकरण करने वाले और आपराधिक रूप से धमकी भरे बयान” दिए हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दिए गए एक पत्र में, सत्तारूढ़ पार्टी ने वरिष्ठ भाजपा नेता पर चुनाव आचार संहिता (एमसीसी), भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। शिकायत में कहा गया, ”16 अप्रैल को, सरमा ने कूचबिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भड़काऊ, ध्रुवीकरण करने वाले और आपराधिक रूप से डराने वाले बयान दिए, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति मानहानिकारक भी थे।”

    इसमें यह भी दावा किया गया कि इस तरह के बयान पश्चिम बंगाल में विभिन्न समुदायों के बीच सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकते हैं, जिससे शांतिपूर्ण चुनाव बाधित हो सकता है। पार्टी ने दावा किया कि बनर्जी के खिलाफ की गई टिप्पणियां मानहानिकारक थीं और सार्वजनिक भाषण में गरिमा बनाए रखने के संबंध में एमसीसी का उल्लंघन करती हैं। शिकायत में कहा गया कि सरमा की टिप्पणियां चुनाव प्रचार अभियान में धर्म का उपयोग करने से परहेज करने के संबंध में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लंघन करती हैं।

  • असम के CM के गोमांस वाले बयान पर गरमाई सियासत… अखिलेश बोले- 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'

    असम के CM के गोमांस वाले बयान पर गरमाई सियासत… अखिलेश बोले- 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'


    दिसपुर।
    असम विधानसभा चुनावों (Assam Assembly elections.) के लिए प्रचार अभियान समाप्त हो गया है। मतदान से महज कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के ‘गोमांस सेवन’ पर दिए गये बयान पर राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है। सरमा ने कहा कि गोमांस खाने में कोई रोक नहीं है, लेकिन इसे निजी जगहों तक सीमित रखना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुस्लिम भाई गोमांस खाते हैं, हम उन्हें मना नहीं कर रहे हैं। हम बस यही कहते हैं कि इसे घर के अंदर खाएं, सार्वजनिक स्थानों पर नहीं। मंदिरों के 5 किलोमीटर दायरे में या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर इसका सेवन नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान से सियासी बवाल तेज हो गया है। विपक्ष इसे भाजपा (BJP) की दोहरी नीति बता रहा है।

    दरअसल, यह बयान मुख्यमंत्री के पिछले कई बयानों से बिल्कुल अलग है। कुछ दिन पहले जोरहाट में चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा था कि गाय का मांस खाने वालों को वह नहीं बख्शेंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने तब कहा था कि असम में पशु संरक्षण कानून है, सार्वजनिक रूप से गोमांस खाने पर 3 साल की जेल हो सकती है। मैं गाय का मांस खाने वालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराऊंगा।

    विपक्ष ने बीजेपी के खिलाफ खोला मोर्चा
    मुख्यमंत्री के इस बयान पर विपक्षी दलों ने हमलावर रुख अपनाया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, कि भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ। उन्होंने हिमंता के बयान वाला पोस्टर शेयर करते हुए भाजपा पर निशाना साधा।

    वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) ने भी भाजपा पर तीखा प्रहार किया। पार्टी ने कहा कि ‘गाय माता’ भाजपा के लिए सिर्फ चुनावी हथकंडा है, जिसका इस्तेमाल दंगे और अशांति फैलाने के लिए किया जाता है। आप ने आरोप लगाया कि उत्तर भारत में भाजपा और उसके समर्थक ‘ रक्षा’ के नाम पर हत्याएं करते हैं, वहीं असम के उनके नेता कह रहे हैं कि गोमांस खाओ लेकिन घर में।

    पुराने बयान और कानून का प्रावधान
    बता दें कि इस महीने के शुरू में हिमंता बिस्वा सरमा ने असम जातीय परिषद (एजेपी) की उम्मीदवार कुंकी चौधरी की मां सुजाता गुरुंग चौधरी पर गोमांस खाने और ‘राष्ट्र-विरोधी व सनातनी-विरोधी’ होने का आरोप लगाया था। उन्होंने चुनाव के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। एजेपी ने इन आरोपों को फर्जी और राजनीतिक साजिश बताया है।

    असम पशु संरक्षण अधिनियम, 2021 गायों के वध पर पूर्ण रोक नहीं लगाता, लेकिन सार्वजनिक स्थानों, रेस्तरां और सामुदायिक कार्यक्रमों में गोमांस के सेवन पर प्रतिबंध है। राज्य में दुकानों से गोमांस खरीदा जा सकता है और निजी स्थानों पर इसका सेवन किया जा सकता है। हाल ही में कैबिनेट ने होटलों और सार्वजनिक स्थानों में गोमांस पर और सख्ती की है।

  • Assam: CM हिमंत बिस्वा सरमा को गोली मारने की धमकी देने वाला गिरफ्तार, जानें क्या है पूरा मामला?

    Assam: CM हिमंत बिस्वा सरमा को गोली मारने की धमकी देने वाला गिरफ्तार, जानें क्या है पूरा मामला?


    ईटानगर।
    असम (Assam) के मुख्यमंत्री हिमंत बिश्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) को गोली मारने की धमकी देने के आरोप में एक व्यक्ति को अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के नाहरलागुन से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान डोलाहफुलबाड़ी गांव निवासी कृष्णा डोर्नाल (29) के रूप में हुई है, जिसे गुरुवार को गिरफ्तार किया गया।

    ईटानगर राजधानी क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक न्येलम नेगा ने बताया कि असम पुलिस ने सूचना दी थी कि आरोपी ने वॉट्सऐप के जरिए मुख्यमंत्री को धमकी भरा संदेश भेजा था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। पूछताछ के दौरान डोर्नाल ने पुलिस को बताया कि उसने शराब की एक दुकान से पैसे का गबन किया था। जब दुकान मालिक ने उससे हिसाब मांगा, तो उसने असम के मुख्यमंत्री के आधिकारिक ईमेल पर पैसे की मांग करते हुए संदेश भेजा।


    इंटरनेट से हासिल किया नंबर

    पुलिस ने बताया कि जब उसे कोई जवाब नहीं मिला, तो उसने इंटरनेट से एक वॉट्सऐप नंबर हासिल कर मुख्यमंत्री को धमकी भरा संदेश भेज दिया। अधिकारियों ने बताया कि आगे की जांच के लिए आरोपी को असम पुलिस के हवाले कर दिया गया है। एसपी नेगा ने लोगों से संयम बरतने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह का दुरुपयोग या कानून का उल्लंघन करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


    नामांकन भर चुके हैं हिमंता

    गौरतलब है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा चुनाव के लिए जलुकबाड़ी विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया। सरमा ने नामांकन के दौरान कहा कि जनता का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और उसी के सहारे वे आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने नामांकन से पहले खानापारा वेटरनरी मैदान से कामरूप (मेट्रो) के उपायुक्त कार्यालय तक एक विशाल रैली निकाली। इस रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग शामिल हुए। पूरे रास्ते में समर्थकों का उत्साह देखने लायक था और जगह-जगह उनका स्वागत किया गया। इस मौके पर उन्होंने लोगों से समर्थन और आशीर्वाद की अपील भी की।

    सरमा ने सोशल मीडिया पर साझा संदेश में कहाकि जलुकबाड़ी की जनता उनके परिवार की तरह है और उनके आशीर्वाद से ही वह नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं। उन्होंने अपनी मां के आशीर्वाद का जिक्र करते हुए कहा कि व्यस्तता के कारण भले ही वे उनके साथ अधिक समय नहीं बिता पाते, लेकिन उनकी मां का आशीर्वाद उन्हें लगातार असम की सेवा के लिए प्रेरित करता है। सरमा ने धार्मिक आस्था का भी उल्लेख किया और कहाकि मां कामाख्या और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के आशीर्वाद से उन्होंने यह नामांकन दाखिल किया है। उन्होंने इसे अपने जीवन की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक यात्रा बताते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

  • Assam: प्रद्युत बोरदोलोई ने इस्तीफे की बताई वजह, बोले- कांग्रेस में अकेलापन और अपमानित महसूस किया

    Assam: प्रद्युत बोरदोलोई ने इस्तीफे की बताई वजह, बोले- कांग्रेस में अकेलापन और अपमानित महसूस किया


    नई दिल्ली। असम से कांग्रेस के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उनके लिए बेहद कठिन था, लेकिन पार्टी के भीतर लगातार अपमान और नेतृत्व से सहानुभूति न मिलने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

    बोरदोलोई ने स्पष्ट किया कि असम कांग्रेस में कई लोग उनसे संपर्क करने के बावजूद बार-बार अपमानजनक व्यवहार कर रहे थे, और इस स्थिति ने उनके लिए पार्टी में अकेलापन बढ़ा दिया। उन्होंने कहा, “मैंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक को छोड़ दिया है और इसके लिए खुश नहीं हूं, लेकिन हालात ने मुझे यह निर्णय लेने पर मजबूर किया।”

    इस्तीफा और पार्टी के भीतर मतभेद

    प्रद्युत बोरदोलोई ने यह भी बताया कि वे जीवनभर कांग्रेस से जुड़े रहे, लेकिन हाल ही में उनकी स्थिति इतनी कठिन हो गई थी कि इस्तीफा देना अनिवार्य हो गया। उनका इस्तीफा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) अध्यक्ष को सौंप दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे असम कांग्रेस में आंतरिक मतभेद और नेताओं के बीच बढ़ते तनाव का संकेत मान रहे हैं।

    सीएम सरमा की प्रतिक्रिया

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि फिलहाल उनका सांसद प्रद्युत बोरदोलोई से कोई संपर्क नहीं है, लेकिन भविष्य में बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राजधानी में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि बोरदोलोई ने केंद्रीय गृह मंत्री से संपर्क किया होता, तो उन्हें इसकी जानकारी जरूर होती। फिलहाल ऐसा प्रतीत नहीं होता कि उन्होंने किसी भाजपा नेता से बात की हो।

    विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियां

    असम विधानसभा की कुल 126 सीटों में से बहुमत पाने के लिए 64 सीटें आवश्यक हैं। चुनाव अधिसूचना 16 मार्च को जारी की गई, जबकि नामांकन की अंतिम तारीख 23 मार्च है। नामांकन पत्रों की जांच 24 मार्च को होगी और नाम वापसी की आखिरी तारीख 26 मार्च निर्धारित की गई है। मतदान 9 अप्रैल को होगा और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

    पिछला चुनाव परिणाम

    2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने असम की 126 सीटों में से 60 सीटें जीती थीं। कांग्रेस के खाते में 29 सीटें आईं जबकि एआईयूडीएफ ने 16 सीटें हासिल कीं। असम गढ़ परिषद को नौ, यूपीपीएल को छह, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को चार, माकपा को एक और सिबसागर सीट पर निर्दलीय उम्मीदार अखिल गोगोई ने जीत दर्ज की थी।

  • Assam: चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, दो बड़े नेताओं ने छोड़ी पार्टी

    Assam: चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, दो बड़े नेताओं ने छोड़ी पार्टी


    दिसपुर।
    विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले असम (Assam) की राजनीति में हलचल मच गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) के प्रमुख चेहरों में शुमार नगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई (Pradyut Bordoloi) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। दूसरी ओर असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार (Navjyoti Talukdar) ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा असम में आगामी विधानसभा चुनावों से महज कुछ दिनों पहले आया है, जिससे कांग्रेस को गहरा धक्का लगा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे अपने त्यागपत्र में नवज्योति तालुकदार ने पार्टी की कार्यप्रणाली से लंबे समय से चली आ रही असंतुष्टि, समन्वय की कमी और अपनी बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद कोई समाधान न मिलने का हवाला दिया। उन्होंने लिखा है कि ऐसी परिस्थितियों में पार्टी में बने रहना न तो स्वीकार्य है और न ही फलदायी है।

    वहीं, नगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने अपने इस्तीफे पत्र में दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि अत्यंत दुख के साथ, मैं आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देता हूं। बता दें कि दोनों इस्तीफा असम विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया है, जब पार्टी के अंदर टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन को लेकर गहरी नाराजगी और अंतर्कलह सामने आ रही थी। बोरदोलोई ने हाल ही में पार्टी के असम प्रभारी और अन्य नेताओं को पत्र लिखकर लाहोरीघाट विधानसभा सीट के संभावित उम्मीदवार को लेकर गंभीर आपत्ति जताई थी और इस्तीफे की धमकी भी दी थी।

    इस्तीफे में तालुकदार ने क्या लिखा है?
    दूसरी ओर अपने इस्तीफे में तालुकदार ने साफ-साफ कहा है कि मैं नवज्योति तालुकदार तत्काल प्रभाव से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष पद, एआईसीसी सदस्य पद तथा प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। इसे इस मामले पर मेरा अंतिम संदेश समझें। मुझे उम्मीद है कि मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा और मेरी सभी जिम्मेदारियां बिना देरी के समाप्त कर दी जाएंगी। बता दें कि यह घटना भूपेन कुमार बोराह के बाद कांग्रेस के लिए बैंक टू बैक तीसरा बड़ा झटका है। फरवरी में एपीसीसी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोराह ने भी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।

    बता दें कि चुनाव आयोग ने रविवार को असम विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया। प्रदेश की सभी 126 सीटों पर एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होगी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा-नीत एनडीए सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस सत्ताधारी दल को हराकर सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरी है। 2021 के चुनाव में एनडीए (भाजपा, एजीपी और यूपीपीएल) ने 75 सीटें जीती थीं, जिसमें भाजपा अकेले 60 सीटों पर काबिज हुई थी। कांग्रेस और एआईयूडीएफ सहित महागठबंधन को मात्र 16 सीटें मिली थीं। 2016 में भाजपा ने 60 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को 26 और एआईयूडीएफ को 13 सीटें प्राप्त हुई थीं।

  • Assam: बरपेटा मेडिकल कॉलेज से हटेगा फखरुद्दीन अली अहमद का नाम, हिमंता सरकार ने दी मंजूरी

    Assam: बरपेटा मेडिकल कॉलेज से हटेगा फखरुद्दीन अली अहमद का नाम, हिमंता सरकार ने दी मंजूरी


    दिसपुर।
    असम सरकार (Assam Government) ने बरपेटा (Barpeta) स्थित फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (Fakhruddin Ali Ahmed Medical College and Hospital) का नाम बदलने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने इस संस्थान का नया नाम बरपेटा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रखने को मंजूरी दे दी है।

    मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फखरुद्दीन अली अहमद (Fakhruddin Ali Ahmed) भारत के राष्ट्रपति रह चुके हैं और वे असम से देश के पहले राष्ट्रपति थे। ऐसे में उनके सम्मान को बनाए रखते हुए राज्य सरकार ने किसी अन्य संस्थान को उनके नाम पर समर्पित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि असम मंत्रिमंडल ने तय किया है कि राज्य में एक अन्य संस्थान को फखरुद्दीन अली अहमद के नाम से जोड़ा जाएगा, ताकि उनके योगदान को उचित सम्मान दिया जा सके।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व सरमा ने मंगलवार को कहा कि असम के मुस्लिम ‘राजनीतिक रूप से’ मियां मुसलमानों के खिलाफ हैं। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय का एक तबका अब भाजपा का समर्थन कर रहा है। सरमा ने कहा कि असम के मुसलमानों ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि उनका धर्म समान हो सकता है, लेकिन वे मियां मुसलमानों से सांस्कृतिक रूप से अलग हैं। उन्होंने यहां एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि इस बार असम के मुसलमानों ने मन बना लिया है कि वे एक अलग समुदाय हैं, भले ही धर्म समान हो।

    मुख्यमंत्री से पूछा गया था कि क्या धार्मिक अल्पसंख्यक आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा का समर्थन करेंगे, इसके बाद उनका यह बयान आया है। दोनों समुदायों को उनकी मातृभाषा और मूल स्थान के आधार पर अलग करते हुए असम सीएम ने कहा कि राजनीतिक रूप से, असम के मुसलमान मियां मुसलमानों के खिलाफ हैं। कई लोग टीवी पर परिचर्चा में कहते हैं कि धर्म भले समान हो, लेकिन उनकी संस्कृति अलग-अलग हैं। बता दें कि ‘मियां’ मूल रूप से असम में बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, और गैर-बंगाली बोलने वाले लोग उन्हें आम तौर पर बांग्लादेशी प्रवासी बताते हैं।

  • असम के संगीत जगत में शोक: 75 साल की उम्र में समर हजारिका का निधन

    असम के संगीत जगत में शोक: 75 साल की उम्र में समर हजारिका का निधन


    नई दिल्ली। असम के प्रसिद्ध संगीतकार और गायक समर हजारिका का मंगलवार को गुवाहाटी में निधन हो गया। उनकी उम्र 75 वर्ष थी। समर लंबे समय से बीमार चल रहे थे और हाल ही में अस्पताल से घर लौटे थे। उनका निधन गुवाहाटी के निजारापार इलाके में उनके घर पर हुआ, जहां उनके परिवार के अन्य सदस्य भी रहते हैं।
    परिवार ने उनके निधन की पुष्टि कर दी है।

    समर हजारिका, भारत रत्न से सम्मानित भूपेन हजारिका के सबसे छोटे भाई थे। वे दस भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और उन्होंने अपने जीवन में असमिया संगीत को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समर ने रेडियो, एल्बम और फिल्मों के लिए कई गाने गाए और संगीत तैयार किया।

    उनका संगीत करियर 1960 के दशक में शुरू हुआ। उनका पहला एल्बम “उत्तर कोंवर प्रोतिमा बरुआ देवी” 1968 में रिलीज हुआ। इसके अलावा उन्होंने असमिया फिल्मों में प्लेबैक सिंगर के रूप में भी काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में उपोपथ, बोवारी और प्रवती पोखिर गान शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने भूपेन हजारिका की विरासत को सम्मान देने वाले कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया और मोह बिसारिसु हेजार सोकुट जैसे प्रसिद्ध असमिया गीत गाए।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने समर हजारिका के निधन पर शोक व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि समर हजारिका की आवाज हर मौके को खास बनाती थी और असम की संस्कृति में उनका योगदान अमूल्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके जाने से असम ने एक और बेहतरीन आवाज खो दी। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी उनके निधन पर दुख जताया और बताया कि उनका जाना माघ बिहू के दिन और भी दुखद है।

    समर हजारिका के निधन से असमिया संगीत प्रेमियों के लिए एक बड़ी क्षति हुई है। उन्होंने अपने जीवन में न केवल असमिया संगीत को समृद्ध किया, बल्कि भूपेन हजारिका की विरासत को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई।

    उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

    भूपेन हजारिका के बारे में जानकारी
    डॉ. भूपेन हजारिका असम के सुप्रसिद्ध संगीतकार, गायक और गीतकार थे। उनका जन्म 8 सितंबर 1926 को असम में हुआ था। उन्होंने असमिया, हिंदी और बंगाली सहित कई भाषाओं में गीत लिखे और गाए। भूपेन हजारिका के लोकप्रिय असमिया गीतों में “मोइ एति जाजाबोर,” “बिस्तीर्ण पारेरे,” और “मानुहे मानुहोर बाबे” शामिल हैं। वहीं, हिंदी गीतों में उन्होंने “ओ गंगा बहती हो क्यों,” “समय ओ धीरे चलो” जैसे गीत दिए।

    समर हजारिका ने भूपेन हजारिका की संगीत विरासत को जीवित रखा और असमिया संस्कृति में संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका निधन असम और भारत के संगीत प्रेमियों के लिए अपूरणीय क्षति है।

  • केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह असम पहुंचे, हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री ने किया स्वागत

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह असम पहुंचे, हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री ने किया स्वागत


    गुवाहाटी।
    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज गुवाहाटी पहुंचे।। गृहमंत्री का लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने गर्मजोशी से स्वागत किया। हवाई अड्डे से गृह मंत्री सीधे हेलीकॉप्टर के जरिए श्रीमंत शंकरदेव के जन्म स्थान बटद्रबा थान के लिए रवाना हुए। वहां वो भव्य सांस्कृतिक प्रकल्प का उद्घाटन करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने अमित शाह को असम की पुण्यभूमि का आत्मिक शुभचिंतक बताते हुए कहा कि उनकी यह यात्रा राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री असम की विरासत और विकास से जुड़े कई अहम परियोजनाओं को प्रदेशवासियों को समर्पित करेंगे। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि अमित शाह की यह यात्रा असम के लिए विकास और सांस्कृतिक नवजागरण के एक नए दौर की शुरुआत करेगी।

  • ढाका में भारतीय उच्चायोग को धमकी, भारत ने बांग्लादेशी हाई कमिश्नर को किया तलब; कूटनीतिक तनाव गहराया

    ढाका में भारतीय उच्चायोग को धमकी, भारत ने बांग्लादेशी हाई कमिश्नर को किया तलब; कूटनीतिक तनाव गहराया


    नई दिल्ली / ढाका /भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक बार फिर तल्खी देखने को मिल रही है। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग को कथित रूप से धमकी मिलने की खबर के बाद भारत सरकार ने बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब किया है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमकी किस तरह की थी और किस माध्यम से दी गई। इसके बावजूद इस मामले को गंभीर मानते हुए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर कड़ा संदेश दिया है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब बांग्लादेश में विजय दिवस मनाए जाने के ठीक एक दिन बाद माहौल संवेदनशील बना हुआ है। बुधवार को ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हुई जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने भारत में तैनात बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब कर इस विषय पर स्पष्टीकरण मांगा। फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।इस बीच यह भी ध्यान देने योग्य है कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर लगातार बयानबाजी और आपसी आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं। इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने रविवार को ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया था। यह तलबगी अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा दिए गए कथिती भड़काऊ बयानोंको लेकर की गई थी।

    पीटीआई-भाषा के अनुसार बांग्लादेश सरकार ने भारत के समक्ष यह आपत्ति दर्ज कराई थी कि शेख हसीना को भारत में रहते हुए ऐसे बयान देने की अनुमति दी जा रही है जो बांग्लादेश की आंतरिक स्थिति को अस्थिर कर सकते हैं। बांग्लादेश का आरोप है कि हसीना अपने समर्थकों को कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसा रही हैं और उनका उद्देश्य आगामी संसदीय चुनावों को बाधित करना है।गौरतलब है कि शेख हसीना इस समय भारत में हैं। बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। इसके बाद से ही बांग्लादेश भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। इस मुद्दे ने भी दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है।

    तनाव को और हवा देने वाले बयान बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी NCP के नेता हसनत अब्दुल्ला की ओर से सामने आए हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि यदि भारत बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश करता है तो ढाका को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को ‘अलग-थलगकरने की दिशा में कदम उठाना चाहिए और क्षेत्र में अलगाववादी तत्वों को समर्थन देना चाहिए। उनके इस बयान को भारत में गंभीर उकसावे के रूप में देखा गया।इन बयानों पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि पिछले एक वर्ष से बांग्लादेश की ओर से बार-बार ऐसे बयान सामने आ रहे हैं जिनमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को अलग कर बांग्लादेश का हिस्सा बनाने की बात की जाती है। मुख्यमंत्री ने इसे न केवल अव्यावहारिक बल्कि खतरनाक सोच करार दिया था।

    हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा था कि भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में बांग्लादेश द्वारा इस तरह की बातें सोचना भी गलत मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने यह तक कहा कि इस तरह की सोच को किसी भी स्तर पर प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए और बांग्लादेश को दी जाने वाली मदद पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।फिलहाल ढाका में भारतीय उच्चायोग को मिली धमकी दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया जाना और तीखे राजनीतिक बयान-इन सबने भारत-बांग्लादेश संबंधों को एक संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश इस तनाव को कूटनीतिक बातचीत के जरिए कैसे संभालते हैं।

  • बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी

    बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में जैसे-जैसे आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं वहीं राजनीतिक माहौल में भी गर्माहट बढ़ गई है। नेताओं ने भारत के खिलाफ आरोप लगाना शुरू कर दिया है। इस बीच नेशनल सिटिजन पार्टी के प्रमुख संयोजक हसनत अब्दुल्ला ने तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत ने बांग्लादेश के चुनावी प्रक्रिया में दखल दिया तो इसका असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ेगा और वे एक-दूसरे से अलग-थलग हो जाएंगे।

    यह बयान पूर्वोत्तर भारत के राज्यों को लेकर आया है जिन्हें “सेवल सिस्टर्स” के नाम से जाना जाता है। इनमें अरुणाचल प्रदेश असम मणिपुर मेघालय नगालैंड मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं। यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से संवेदनशील है और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ है। हसनत का यह बयान एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है कि अगर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप किया गया तो इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।

    हसनत ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की सरकार के खिलाफ विदेशी एजेंटों को समर्थन देने वालों को बांग्लादेश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उनका आरोप था कि शेख हसीना और उनके समर्थक अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए भारत का समर्थन लेते हैं जिससे बांग्लादेश की संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है।

    हसनत ने आगे कहा “यदि भारत ने उन ताकतों को शरण दी जो बांग्लादेश की स्वतंत्रता और संप्रभुता का उल्लंघन करती हैं तो इसका परिणाम गंभीर होगा और यह पूरे क्षेत्र में अशांति पैदा करेगा।” बांग्लादेश के इस वरिष्ठ नेता का मानना है कि भारत को अपनी नीतियों में बदलाव लाकर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए वरना दोनों देशों के बीच रिश्ते और भी तनावपूर्ण हो सकते हैं।

    यह बयान बांग्लादेश में बढ़ते राजनीतिक तनाव और शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध को भी दर्शाता है। हालांकि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में बदलाव के बावजूद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को सुधारने की आवश्यकता है ताकि दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक माहौल बना रहे।