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  • Assam: चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, दो बड़े नेताओं ने छोड़ी पार्टी

    Assam: चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, दो बड़े नेताओं ने छोड़ी पार्टी


    दिसपुर।
    विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले असम (Assam) की राजनीति में हलचल मच गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) के प्रमुख चेहरों में शुमार नगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई (Pradyut Bordoloi) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। दूसरी ओर असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार (Navjyoti Talukdar) ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा असम में आगामी विधानसभा चुनावों से महज कुछ दिनों पहले आया है, जिससे कांग्रेस को गहरा धक्का लगा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे अपने त्यागपत्र में नवज्योति तालुकदार ने पार्टी की कार्यप्रणाली से लंबे समय से चली आ रही असंतुष्टि, समन्वय की कमी और अपनी बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद कोई समाधान न मिलने का हवाला दिया। उन्होंने लिखा है कि ऐसी परिस्थितियों में पार्टी में बने रहना न तो स्वीकार्य है और न ही फलदायी है।

    वहीं, नगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने अपने इस्तीफे पत्र में दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि अत्यंत दुख के साथ, मैं आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देता हूं। बता दें कि दोनों इस्तीफा असम विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया है, जब पार्टी के अंदर टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन को लेकर गहरी नाराजगी और अंतर्कलह सामने आ रही थी। बोरदोलोई ने हाल ही में पार्टी के असम प्रभारी और अन्य नेताओं को पत्र लिखकर लाहोरीघाट विधानसभा सीट के संभावित उम्मीदवार को लेकर गंभीर आपत्ति जताई थी और इस्तीफे की धमकी भी दी थी।

    इस्तीफे में तालुकदार ने क्या लिखा है?
    दूसरी ओर अपने इस्तीफे में तालुकदार ने साफ-साफ कहा है कि मैं नवज्योति तालुकदार तत्काल प्रभाव से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष पद, एआईसीसी सदस्य पद तथा प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। इसे इस मामले पर मेरा अंतिम संदेश समझें। मुझे उम्मीद है कि मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा और मेरी सभी जिम्मेदारियां बिना देरी के समाप्त कर दी जाएंगी। बता दें कि यह घटना भूपेन कुमार बोराह के बाद कांग्रेस के लिए बैंक टू बैक तीसरा बड़ा झटका है। फरवरी में एपीसीसी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोराह ने भी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।

    बता दें कि चुनाव आयोग ने रविवार को असम विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया। प्रदेश की सभी 126 सीटों पर एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होगी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा-नीत एनडीए सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस सत्ताधारी दल को हराकर सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरी है। 2021 के चुनाव में एनडीए (भाजपा, एजीपी और यूपीपीएल) ने 75 सीटें जीती थीं, जिसमें भाजपा अकेले 60 सीटों पर काबिज हुई थी। कांग्रेस और एआईयूडीएफ सहित महागठबंधन को मात्र 16 सीटें मिली थीं। 2016 में भाजपा ने 60 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को 26 और एआईयूडीएफ को 13 सीटें प्राप्त हुई थीं।

  • Assam: बरपेटा मेडिकल कॉलेज से हटेगा फखरुद्दीन अली अहमद का नाम, हिमंता सरकार ने दी मंजूरी

    Assam: बरपेटा मेडिकल कॉलेज से हटेगा फखरुद्दीन अली अहमद का नाम, हिमंता सरकार ने दी मंजूरी


    दिसपुर।
    असम सरकार (Assam Government) ने बरपेटा (Barpeta) स्थित फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (Fakhruddin Ali Ahmed Medical College and Hospital) का नाम बदलने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने इस संस्थान का नया नाम बरपेटा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रखने को मंजूरी दे दी है।

    मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फखरुद्दीन अली अहमद (Fakhruddin Ali Ahmed) भारत के राष्ट्रपति रह चुके हैं और वे असम से देश के पहले राष्ट्रपति थे। ऐसे में उनके सम्मान को बनाए रखते हुए राज्य सरकार ने किसी अन्य संस्थान को उनके नाम पर समर्पित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि असम मंत्रिमंडल ने तय किया है कि राज्य में एक अन्य संस्थान को फखरुद्दीन अली अहमद के नाम से जोड़ा जाएगा, ताकि उनके योगदान को उचित सम्मान दिया जा सके।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व सरमा ने मंगलवार को कहा कि असम के मुस्लिम ‘राजनीतिक रूप से’ मियां मुसलमानों के खिलाफ हैं। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय का एक तबका अब भाजपा का समर्थन कर रहा है। सरमा ने कहा कि असम के मुसलमानों ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि उनका धर्म समान हो सकता है, लेकिन वे मियां मुसलमानों से सांस्कृतिक रूप से अलग हैं। उन्होंने यहां एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि इस बार असम के मुसलमानों ने मन बना लिया है कि वे एक अलग समुदाय हैं, भले ही धर्म समान हो।

    मुख्यमंत्री से पूछा गया था कि क्या धार्मिक अल्पसंख्यक आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा का समर्थन करेंगे, इसके बाद उनका यह बयान आया है। दोनों समुदायों को उनकी मातृभाषा और मूल स्थान के आधार पर अलग करते हुए असम सीएम ने कहा कि राजनीतिक रूप से, असम के मुसलमान मियां मुसलमानों के खिलाफ हैं। कई लोग टीवी पर परिचर्चा में कहते हैं कि धर्म भले समान हो, लेकिन उनकी संस्कृति अलग-अलग हैं। बता दें कि ‘मियां’ मूल रूप से असम में बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, और गैर-बंगाली बोलने वाले लोग उन्हें आम तौर पर बांग्लादेशी प्रवासी बताते हैं।

  • असम के संगीत जगत में शोक: 75 साल की उम्र में समर हजारिका का निधन

    असम के संगीत जगत में शोक: 75 साल की उम्र में समर हजारिका का निधन


    नई दिल्ली। असम के प्रसिद्ध संगीतकार और गायक समर हजारिका का मंगलवार को गुवाहाटी में निधन हो गया। उनकी उम्र 75 वर्ष थी। समर लंबे समय से बीमार चल रहे थे और हाल ही में अस्पताल से घर लौटे थे। उनका निधन गुवाहाटी के निजारापार इलाके में उनके घर पर हुआ, जहां उनके परिवार के अन्य सदस्य भी रहते हैं।
    परिवार ने उनके निधन की पुष्टि कर दी है।

    समर हजारिका, भारत रत्न से सम्मानित भूपेन हजारिका के सबसे छोटे भाई थे। वे दस भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और उन्होंने अपने जीवन में असमिया संगीत को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समर ने रेडियो, एल्बम और फिल्मों के लिए कई गाने गाए और संगीत तैयार किया।

    उनका संगीत करियर 1960 के दशक में शुरू हुआ। उनका पहला एल्बम “उत्तर कोंवर प्रोतिमा बरुआ देवी” 1968 में रिलीज हुआ। इसके अलावा उन्होंने असमिया फिल्मों में प्लेबैक सिंगर के रूप में भी काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में उपोपथ, बोवारी और प्रवती पोखिर गान शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने भूपेन हजारिका की विरासत को सम्मान देने वाले कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया और मोह बिसारिसु हेजार सोकुट जैसे प्रसिद्ध असमिया गीत गाए।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने समर हजारिका के निधन पर शोक व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि समर हजारिका की आवाज हर मौके को खास बनाती थी और असम की संस्कृति में उनका योगदान अमूल्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके जाने से असम ने एक और बेहतरीन आवाज खो दी। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी उनके निधन पर दुख जताया और बताया कि उनका जाना माघ बिहू के दिन और भी दुखद है।

    समर हजारिका के निधन से असमिया संगीत प्रेमियों के लिए एक बड़ी क्षति हुई है। उन्होंने अपने जीवन में न केवल असमिया संगीत को समृद्ध किया, बल्कि भूपेन हजारिका की विरासत को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई।

    उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

    भूपेन हजारिका के बारे में जानकारी
    डॉ. भूपेन हजारिका असम के सुप्रसिद्ध संगीतकार, गायक और गीतकार थे। उनका जन्म 8 सितंबर 1926 को असम में हुआ था। उन्होंने असमिया, हिंदी और बंगाली सहित कई भाषाओं में गीत लिखे और गाए। भूपेन हजारिका के लोकप्रिय असमिया गीतों में “मोइ एति जाजाबोर,” “बिस्तीर्ण पारेरे,” और “मानुहे मानुहोर बाबे” शामिल हैं। वहीं, हिंदी गीतों में उन्होंने “ओ गंगा बहती हो क्यों,” “समय ओ धीरे चलो” जैसे गीत दिए।

    समर हजारिका ने भूपेन हजारिका की संगीत विरासत को जीवित रखा और असमिया संस्कृति में संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका निधन असम और भारत के संगीत प्रेमियों के लिए अपूरणीय क्षति है।

  • केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह असम पहुंचे, हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री ने किया स्वागत

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह असम पहुंचे, हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री ने किया स्वागत


    गुवाहाटी।
    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज गुवाहाटी पहुंचे।। गृहमंत्री का लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने गर्मजोशी से स्वागत किया। हवाई अड्डे से गृह मंत्री सीधे हेलीकॉप्टर के जरिए श्रीमंत शंकरदेव के जन्म स्थान बटद्रबा थान के लिए रवाना हुए। वहां वो भव्य सांस्कृतिक प्रकल्प का उद्घाटन करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने अमित शाह को असम की पुण्यभूमि का आत्मिक शुभचिंतक बताते हुए कहा कि उनकी यह यात्रा राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री असम की विरासत और विकास से जुड़े कई अहम परियोजनाओं को प्रदेशवासियों को समर्पित करेंगे। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि अमित शाह की यह यात्रा असम के लिए विकास और सांस्कृतिक नवजागरण के एक नए दौर की शुरुआत करेगी।

  • ढाका में भारतीय उच्चायोग को धमकी, भारत ने बांग्लादेशी हाई कमिश्नर को किया तलब; कूटनीतिक तनाव गहराया

    ढाका में भारतीय उच्चायोग को धमकी, भारत ने बांग्लादेशी हाई कमिश्नर को किया तलब; कूटनीतिक तनाव गहराया


    नई दिल्ली / ढाका /भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक बार फिर तल्खी देखने को मिल रही है। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग को कथित रूप से धमकी मिलने की खबर के बाद भारत सरकार ने बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब किया है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमकी किस तरह की थी और किस माध्यम से दी गई। इसके बावजूद इस मामले को गंभीर मानते हुए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर कड़ा संदेश दिया है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब बांग्लादेश में विजय दिवस मनाए जाने के ठीक एक दिन बाद माहौल संवेदनशील बना हुआ है। बुधवार को ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हुई जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने भारत में तैनात बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब कर इस विषय पर स्पष्टीकरण मांगा। फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।इस बीच यह भी ध्यान देने योग्य है कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर लगातार बयानबाजी और आपसी आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं। इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने रविवार को ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया था। यह तलबगी अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा दिए गए कथिती भड़काऊ बयानोंको लेकर की गई थी।

    पीटीआई-भाषा के अनुसार बांग्लादेश सरकार ने भारत के समक्ष यह आपत्ति दर्ज कराई थी कि शेख हसीना को भारत में रहते हुए ऐसे बयान देने की अनुमति दी जा रही है जो बांग्लादेश की आंतरिक स्थिति को अस्थिर कर सकते हैं। बांग्लादेश का आरोप है कि हसीना अपने समर्थकों को कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसा रही हैं और उनका उद्देश्य आगामी संसदीय चुनावों को बाधित करना है।गौरतलब है कि शेख हसीना इस समय भारत में हैं। बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। इसके बाद से ही बांग्लादेश भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। इस मुद्दे ने भी दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है।

    तनाव को और हवा देने वाले बयान बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी NCP के नेता हसनत अब्दुल्ला की ओर से सामने आए हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि यदि भारत बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश करता है तो ढाका को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को ‘अलग-थलगकरने की दिशा में कदम उठाना चाहिए और क्षेत्र में अलगाववादी तत्वों को समर्थन देना चाहिए। उनके इस बयान को भारत में गंभीर उकसावे के रूप में देखा गया।इन बयानों पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि पिछले एक वर्ष से बांग्लादेश की ओर से बार-बार ऐसे बयान सामने आ रहे हैं जिनमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को अलग कर बांग्लादेश का हिस्सा बनाने की बात की जाती है। मुख्यमंत्री ने इसे न केवल अव्यावहारिक बल्कि खतरनाक सोच करार दिया था।

    हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा था कि भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में बांग्लादेश द्वारा इस तरह की बातें सोचना भी गलत मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने यह तक कहा कि इस तरह की सोच को किसी भी स्तर पर प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए और बांग्लादेश को दी जाने वाली मदद पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।फिलहाल ढाका में भारतीय उच्चायोग को मिली धमकी दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया जाना और तीखे राजनीतिक बयान-इन सबने भारत-बांग्लादेश संबंधों को एक संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश इस तनाव को कूटनीतिक बातचीत के जरिए कैसे संभालते हैं।

  • बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी

    बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में जैसे-जैसे आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं वहीं राजनीतिक माहौल में भी गर्माहट बढ़ गई है। नेताओं ने भारत के खिलाफ आरोप लगाना शुरू कर दिया है। इस बीच नेशनल सिटिजन पार्टी के प्रमुख संयोजक हसनत अब्दुल्ला ने तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत ने बांग्लादेश के चुनावी प्रक्रिया में दखल दिया तो इसका असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ेगा और वे एक-दूसरे से अलग-थलग हो जाएंगे।

    यह बयान पूर्वोत्तर भारत के राज्यों को लेकर आया है जिन्हें “सेवल सिस्टर्स” के नाम से जाना जाता है। इनमें अरुणाचल प्रदेश असम मणिपुर मेघालय नगालैंड मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं। यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से संवेदनशील है और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ है। हसनत का यह बयान एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है कि अगर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप किया गया तो इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।

    हसनत ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की सरकार के खिलाफ विदेशी एजेंटों को समर्थन देने वालों को बांग्लादेश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उनका आरोप था कि शेख हसीना और उनके समर्थक अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए भारत का समर्थन लेते हैं जिससे बांग्लादेश की संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है।

    हसनत ने आगे कहा “यदि भारत ने उन ताकतों को शरण दी जो बांग्लादेश की स्वतंत्रता और संप्रभुता का उल्लंघन करती हैं तो इसका परिणाम गंभीर होगा और यह पूरे क्षेत्र में अशांति पैदा करेगा।” बांग्लादेश के इस वरिष्ठ नेता का मानना है कि भारत को अपनी नीतियों में बदलाव लाकर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए वरना दोनों देशों के बीच रिश्ते और भी तनावपूर्ण हो सकते हैं।

    यह बयान बांग्लादेश में बढ़ते राजनीतिक तनाव और शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध को भी दर्शाता है। हालांकि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में बदलाव के बावजूद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को सुधारने की आवश्यकता है ताकि दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक माहौल बना रहे।

  • हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी को ठहराया मेसी के कोलकाता इवेंट में भगदड़ के लिए जिम्मेदारकहा गिरफ्तार हो राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त

    हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी को ठहराया मेसी के कोलकाता इवेंट में भगदड़ के लिए जिम्मेदारकहा गिरफ्तार हो राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त


    नई दिल्ली । लियोनेल मेसी के भारत दौरे के पहले दिन कोलकाता में आयोजित उनके कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ ने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी की सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में वीआईपी कल्चर के चलते इस कार्यक्रम का संचालन सही तरीके से नहीं हो सकाजिससे अफरा-तफरी मच गई। सरमा ने यहां तक कहा कि राज्य के मुख्यमंत्रीगृहमंत्री और पुलिस आयुक्त को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

    सरमा ने आरोप लगाया कि बंगाल में ऐसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान भीड़ प्रबंधन की भारी नाकामी नजर आती है। उन्होंने कहा”दूसरे राज्यों में भीड़ को शांतिपूर्वक संभाला जाता हैलेकिन बंगाल में कुछ भी सुनिश्चित नहीं होता। यहां वीआईपी कल्चर का प्रभाव बहुत ज्यादा हैजो कार्यक्रमों को बर्बाद कर देता है।

    उनके अनुसारगुवाहाटी में गायक जुबिन गर्ग के निधन के बाद तीन दिनों तक 10 लाख लोग सड़कों पर थेलेकिन कोई हादसा नहीं हुआ। वहींमुंबई में विश्व कप फाइनल भी शांति से संपन्न हुआ था। सरमा ने कहा”बंगाल में कोई बड़ी घटना कभी भी घट सकती हैक्योंकि यहां हर चीज पर वीआईपी कल्चर हावी है।

    कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुए इस कार्यक्रम में हजारों प्रशंसक अपने पसंदीदा फुटबॉल आइकॉन मेसी की एक झलक पाने पहुंचे थे। लेकिन केवल 15 मिनट के कार्यक्रम के बाद मेसी वहां से चले गएजिससे दर्शकों में नाराजगी फैल गई। गुस्साए प्रशंसकों ने आयोजकों पर आरोप लगाते हुए पानी की बोतलें फेंकी। आयोजकों का कहना था कि कार्यक्रम लगभग 45 मिनट तक चलने वाला थालेकिन मेसी केवल 15 मिनट के बाद ही चले गए।

    इसके बाद प्रशंसकों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान टीएमसी नेताओं और वीआईपी लोगों के परिवारों ने मेसी को घेरे रखाजिससे आम दर्शकों को किसी भी प्रकार का सामान्य अनुभव नहीं मिला।हिमंत सरमा ने इस घटना की जिम्मेदारी राज्य सरकार की ठहराते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन सही ढंग से किया जाताअगर वहां पर कानून और व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू किया जाता।

  • हिमंत बिस्वा सरमा का तंज, कहा- मैं भूल गया कांग्रेस से आया हूं, कट्टर भाजपाई बनने का रहता है प्रयास

    हिमंत बिस्वा सरमा का तंज, कहा- मैं भूल गया कांग्रेस से आया हूं, कट्टर भाजपाई बनने का रहता है प्रयास


    नई दिल्‍ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma)ने कांग्रेस पर एकबार फिर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि वह कट्टर भाजपाई (Hardcore BJP)बनने की कोशिश करते रहते हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वह भूल गए हैं कि वह कांग्रेस से भाजपा (BJP)में आए थे। उन्होंने साल 2015 में कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए थे।

    सरमा से जब पूछा गया कि सिर्फ असम नहीं, बल्कि भारत के कई राज्यों में आप भाजपा के गो टू मैन बन गए हैं, अब तो कोई यकीन भी नहीं करता कि आप कांग्रेस से आए हैं। आज तक के कार्यक्रम में पूछे गए इस सवाल का जवाब मजाकिया अंदाज में दिया।

    उन्होंने कहा, ‘मैं भी भूल गया हूं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सबको भूल जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘बीजेपी से ज्यादा तो बीजेपी नहीं हो सकता पर अच्छा बीजेपी होने की कोशिश करता हूं। पूरा कट्टर बीजेपी बन जाऊं, उसका प्रयास तो होता रहता है।’

    क्यों छोड़ी कांग्रेस
    सरमा ने साल 2015 में कांग्रेस छोड़ दी थी। उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद की राजनीति के आरोप लगाए थे। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि जब से उनके बेटे गौरव गोगोई राजनीति में आए हैं, तब से वह मतलबी हो गए है। खास बात है कि वह कांग्रेस में रहते हुए मंत्री बने थे। वहीं, भाजपा में आने के बाद वह मंत्री बने और बाद में असम के मुख्यमंत्री का पद भी संभाला।

    असम की सुरक्षा के लिए सामुदायिक रक्षा तंत्र तैयार करें: हिमंत
    गुरुवार को सरमा ने लोगों से अपील की कि वे राज्य की सुरक्षा के लिए सामुदायिक स्तर पर मिलकर रक्षा तंत्र तैयार करें। सरमा ने लोगों से आग्रह किया कि वे उन लोगों का सामाजिक और आर्थिक रूप से बहिष्कार करें जो कथित तौर पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमें उन्हें (जो लोग अतिक्रमण करते हैं) आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। लेकिन अगर वे ऊपरी असम के कुछ स्थानों पर पहले से ही मौजूद हैं, तो हम उन्हें वहां से हटा देंगे, जैसा हमने उरीयमघाट में किया था।’

    राज्य सरकार ने नगालैंड के साथ राज्य की सीमा पर उरीयमघाट में रेंगमा संरक्षित वन में बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाया, जिसमें लगभग 11,000 बीघे (लगभग 1,500 हेक्टेयर) भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस अभियान में लगभग 1,800 परिवार प्रभावित हुए, जिनमें अधिकतर मुस्लिम समुदाय के थे। उन्होंने कहा कि सरकार अकेले असम को ‘सुरक्षित’ नहीं बना सकती है। सभी को उस प्रक्रिया में योगदान देना होगा।