Tag: Assault

  • उज्जैन में ‘पति-पत्नी और वो’ का हाई-वोल्टेज ड्रामा: रेस्टोरेंट में महिला मित्र के साथ दिखते ही जमकर मारपीट, वीडियो वायरल

    उज्जैन में ‘पति-पत्नी और वो’ का हाई-वोल्टेज ड्रामा: रेस्टोरेंट में महिला मित्र के साथ दिखते ही जमकर मारपीट, वीडियो वायरल


    मध्‍य प्रदेश । उज्जैन शहर में बुधवार शाम एक पारिवारिक विवाद ने अचानक सड़क पर बवाल का रूप ले लिया, जब पति, पत्नी और ‘वो’ के बीच हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा लोगों की भीड़ के सामने हिंसक झड़प में बदल गया। घटना कोयला फाटक क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत मधुर तिवारी अपनी महिला सहकर्मी के साथ एक रेस्टोरेंट में पहुंचे थे।

    जानकारी के अनुसार, इसी दौरान उनकी पत्नी वंदना, साली अतिप्रिया, ससुर और अन्य परिजन मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि महिला मित्र के साथ पति को देखकर परिवार भड़क गया और देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। इस दौरान सड़क पर मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई और कई लोगों ने घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पत्नी, साली और अन्य परिजन पति मधुर तिवारी और उनकी महिला सहकर्मी पर हमला करते नजर आ रहे हैं। दोनों खुद को बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन भीड़ के बीच मामला और बढ़ जाता है।

    पत्नी पक्ष का आरोप है कि पति का उनकी महिला सहकर्मी के साथ अवैध संबंध है और दोनों लंबे समय से संपर्क में थे। साली अतिप्रिया ने दावा किया कि दोनों को रंगे हाथों पकड़ा गया, जिसके बाद यह विवाद हुआ। वहीं पत्नी वंदना ने आरोप लगाया कि पति और महिला सहकर्मी लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं।

    दूसरी ओर, पति मधुर तिवारी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका परिवार पहले से ही विवादों में है और मामला कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्नी, साली और ससुर के हस्तक्षेप के कारण उनका वैवाहिक जीवन टूट चुका है। मधुर ने यह भी दावा किया कि घटना के दौरान उनकी महिला सहकर्मी के साथ मारपीट की गई और उनका पीछा किया गया।

    मधुर ने आगे आरोप लगाया कि उनके घर से सोना गायब है, जिसमें ससुर का हाथ होने की बात कही गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मारपीट के दौरान उनकी महिला सहकर्मी की गाड़ी की चाबी भी निकाल ली गई और वाहन को नुकसान पहुंचाया गया।

    फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस के सामने भी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। घटना से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर भी तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

  • खाकी का खौफ खत्म! मुरैना में चेकिंग टीम पर हमला कर ट्रैक्टर सहित फरार हुए आरोपी, पुलिस ने शुरू की नाकाबंदी

    खाकी का खौफ खत्म! मुरैना में चेकिंग टीम पर हमला कर ट्रैक्टर सहित फरार हुए आरोपी, पुलिस ने शुरू की नाकाबंदी

    मध्य प्रदेश । मुरैना जिले में चंबल की प्रतिबंधित रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन में लिप्त माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें अब कानून और प्रशासन का कोई डर नहीं रह गया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेशनल हाईवे-44 पर नहर के समीप अवैध रेत के परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करने उतरी परिवहन विभाग (RTO) की संयुक्त चेकिंग टीम पर हमला करने और उन्हें वाहन से कुचलने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इस जानलेवा हमले के दौरान मौके पर मौजूद परिवहन अधिकारी और सुरक्षाकर्मी बेहद बाल-बाल बचे।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, परिवहन विभाग की टीम वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले संदिग्ध और ओवरलोड वाहनों की नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान टीम को अवैध उत्खनन कर लाई जा रही रेत से भरी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली आती हुई दिखाई दी। आरटीओ के कर्मचारियों ने जब नियमानुसार उस वाहन को रुकने का इशारा किया, तो ट्रैक्टर चालक ने वाहन की रफ्तार धीमी करने के बजाय उसे सीधे चेकिंग कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ मोड़ दिया और उन्हें कुचलने का प्रयास किया।

    वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और आरटीओ अमले ने समय रहते मुस्तैदी दिखाई और सड़क किनारे कूदकर अपनी जान बचाई। शासकीय टीम को निशाना बनाने के तुरंत बाद आरोपी चालक बेहद लापरवाही और तेज गति से ट्रैक्टर-ट्रॉली को दौड़ाते हुए मौके से फरार हो गया। इस अप्रत्याशित हमले से हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्र में सघन नाकाबंदी लागू की गई।

    परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा घटना के संबंध में सिविल लाइन थाने में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने, जानलेवा हमला करने और अवैध खनिज परिवहन की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अज्ञात माफियाओं के खिलाफ आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा हाईवे और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हमलावर ट्रैक्टर और उसके चालक की सटीक पहचान की जा सके।

    मुरैना और चंबल संभाग में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक टीमों पर खनन माफियाओं द्वारा हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में पुलिस, वन विभाग और राजस्व टीम को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और दावा किया है कि सरकारी अमले पर हमला करने वाले तत्वों को जल्द ही गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • पाकिस्तान में फ्रांसीसी महिला से दरिंदगी के दोषियों को होगी फांसी: उच्च न्यायालय ने खारिज की अपील, वैश्विक स्तर पर न्यायिक कड़ेपन का समर्थन

    पाकिस्तान में फ्रांसीसी महिला से दरिंदगी के दोषियों को होगी फांसी: उच्च न्यायालय ने खारिज की अपील, वैश्विक स्तर पर न्यायिक कड़ेपन का समर्थन

    नई दिल्ली। पाकिस्तान की न्यायपालिका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित और संवेदनशील ‘लाहौर मोटरवे सामूहिक दुष्कर्म मामले’ में एक अत्यंत कड़ा और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। लाहौर उच्च न्यायालय (LHC) ने इस बर्बर कांड के दो मुख्य दोषियों, आबिद अली और शफकत अली की फांसी की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है। दोनों दोषियों ने साल 2021 में आतंकवाद निरोधी अदालत (ATC) द्वारा दी गई मौत की सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने अभियोजन पक्ष के पुख्ता सबूतों के आलोक में सिरे से खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद अब दोनों अपराधियों की मौत की सजा का क्रियान्वयन तय माना जा रहा है, जिसने वैश्विक स्तर पर भी मानवाधिकारों और महिला सुरक्षा से जुड़े संगठनों का ध्यान आकर्षित किया है।

    यह अत्यंत क्रूर और खौफनाक घटना 9 सितंबर 2020 की है, जब पाकिस्तानी मूल की एक फ्रांसीसी महिला अपने तीन मासूम बच्चों के साथ सियालकोट-लाहौर मोटरवे पर कार से यात्रा कर रही थी। देर रात अचानक कार का ईंधन समाप्त हो जाने के कारण उनका परिवार सुनसान सड़क के किनारे असहाय स्थिति में फंस गया था। महिला अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार के दरवाजे बंद कर भीतर ही मदद की प्रतीक्षा कर रही थी। इसी दौरान हथियारों से लैस हमलावरों ने वाहन की खिड़की का शीशा तोड़कर महिला को जबरन बाहर घसीट लिया और उसके ही रोते-बिलखते बच्चों के सामने बंदूक की नोक पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य वारदात को अंजाम दिया। अपराधी वहां से भागने से पहले पीड़ित परिवार से नकदी, आभूषण और बैंक कार्ड भी लूट ले गए थे।

    इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद पूरे पाकिस्तान में जनाक्रोश भड़क उठा था और कार्यस्थलों तथा सार्वजनिक मार्गों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानूनों की मांग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन हुए थे। जनभावनाएं उस समय और अधिक उग्र हो गई थीं, जब तत्कालीन लाहौर पुलिस प्रमुख उमर शेख ने प्रशासनिक विफलता को छुपाने के लिए उल्टा पीड़िता के समय और मार्ग चयन पर ही अनुचित सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि, बढ़ते दबाव के बीच पुलिस प्रशासन ने अपराधियों को पकड़ने के लिए एक व्यापक वैज्ञानिक अभियान चलाया। जांचकर्ताओं ने अत्याधुनिक मोबाइल फोन डेटा विश्लेषण और घटनास्थल से एकत्र किए गए डीएनए नमूनों की सहायता से आरोपियों को दबोचा था। बाद में न्यायिक कार्यवाही के दौरान पीड़िता ने भी दोनों की पहचान की थी और एक आरोपी ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।

    उच्च न्यायालय में अपील की सुनवाई के दौरान दोषियों के विधिक सलाहकारों ने दलील दी थी कि जांच एजेंसी की प्रक्रिया में कई तकनीकी कमियां हैं और साक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हैं। इसके विपरीत, सरकारी वकीलों ने अदालत के समक्ष अकाट्य वैज्ञानिक (डीएनए) और तकनीकी (सेलुलर लोकेशन) प्रमाण प्रस्तुत किए, जो सीधे तौर पर अपराधियों की अपराध स्थल पर उपस्थिति और संलिप्तता को प्रमाणित करते थे। उच्च न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को वैध मानते हुए स्पष्ट किया कि निचली अदालत का फैसला पूर्णतः न्यायसंगत था। इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसिद्ध वैश्विक उद्यमी और टेस्ला प्रमुख एलन मस्क ने भी सोशल मीडिया पर ‘शाबाश पाकिस्तान’ लिखते हुए न्यायिक कड़ेपन की सराहना की और कहा कि पश्चिमी देशों को भी हिंसक अपराधों के खिलाफ ऐसे ही कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।

  • मुजफ्फरनगर में फेरीवालों की पिटाई, भीड़ ने चाचा-भतीजे को पीटा; पुलिस ने बचाई जान

    मुजफ्फरनगर में फेरीवालों की पिटाई, भीड़ ने चाचा-भतीजे को पीटा; पुलिस ने बचाई जान




    नई दिल्ली। मुजफ्फरनगर (नई मंडी कोतवाली क्षेत्र) की वसुंधरा कॉलोनी में रविवार देर शाम उस समय हड़कंप मच गया जब कपड़े की फेरी लगाने पहुंचे आमिर मलिक और जावेद को स्थानीय लोगों ने संदिग्ध समझकर पीट दिया। दोनों रिश्ते में चाचा-भतीजे हैं और फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करते हैं।

    जानकारी के अनुसार, दोनों पहले भी कॉलोनी में सामान बेचने आ चुके थे और कुछ लोगों के बुलाने पर ही दोबारा वहां पहुंचे थे। लेकिन देर शाम और रात होने के कारण कुछ लोगों को उन पर शक हुआ, जिसके बाद भीड़ इकट्ठा हो गई और दोनों के साथ मारपीट शुरू कर दी गई।

    मारपीट में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें घायल अवस्था में दोनों दिखाई दे रहे हैं।सूचना मिलने पर नई मंडी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को भीड़ से बचाकर अपनी हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    पुलिस जांच में क्या आया सामने
    सीओ नई मंडी राजू कुमार साव के अनुसार, शुरुआती जांच में दोनों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। वे फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करते हैं और पहले भी इलाके में आ चुके हैं। पुलिस अब स्थानीय लोगों से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की जांच जारी है।

  • हैदराबाद में शर्मनाक वारदात: चाय के बहाने कार में घुमाया, फिर क्लासमेट को जबरन शराब पिलाकर बीटेक छात्र ने किया दुष्कर्म, आरोपी सलाखों के पीछे

    हैदराबाद में शर्मनाक वारदात: चाय के बहाने कार में घुमाया, फिर क्लासमेट को जबरन शराब पिलाकर बीटेक छात्र ने किया दुष्कर्म, आरोपी सलाखों के पीछे

    नई दिल्ली /हैदराबाद: महानगर के शैक्षणिक हलकों को झकझोर देने वाली एक बेहद संवेदनशील और गंभीर घटना में पुलिस ने एक तकनीकी संस्थान के छात्र को अपनी ही सहपाठी के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पीड़ित युवती और आरोपी दोनों ही क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और एक ही कक्षा में होने के कारण दोनों के बीच सामान्य जान-पहचान थी। इसी परिचय का फायदा उठाकर आरोपी ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया है।

    घटनाक्रम के अनुसार, यह पूरी वारदात बीते सप्ताह की रात को घटित हुई थी। आरोपी छात्र पीड़िता को उसके घर के पास से महज चाय पीने और साथ घूमने के बहाने अपनी कार में बिठाकर ले गया था। वह काफी देर तक युवती को कार में इधर-उधर घुमाता रहा, जिससे पीड़िता को उसकी वास्तविक और दुर्भावनापूर्ण मंशा का जरा भी अंदाजा नहीं हुआ। वापसी के दौरान आरोपी ने बीच रास्ते में गाड़ी रोककर शराब खरीदी। इसके बाद उसने कार के भीतर ही खुद भी शराब का सेवन किया और युवती को भी जबरन अत्यधिक मात्रा में शराब पीने पर मजबूर कर दिया। युवती के विरोध को दरकिनार करते हुए उसे पूरी तरह नशे की हालत में ला दिया गया।

    जब पीड़िता अत्यधिक नशे के कारण खुद को संभालने की स्थिति में नहीं रही, तब आरोपी उसे इब्राहिमपटनम इलाके में स्थित एक सुनसान कमरे पर लेकर गया। वहां उसने युवती की बेबसी का फायदा उठाते हुए उसके साथ जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। होश में आने और घटना की भयावहता को समझने के बाद, बीस वर्षीय पीड़िता ने हिम्मत दिखाई और सीधे स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर अपने साथ हुई इस बर्बरता की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता की मानसिक और शारीरिक स्थिति को समझते हुए तुरंत उसकी शिकायत के आधार पर संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला पंजीकृत कर लिया।

    मामला दर्ज होते ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी छात्र को चौबीस घंटे के भीतर धर दबोचा। शुरुआती पूछताछ और प्राथमिक जांच के बाद आरोपी को स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से विद्वान न्यायाधीश ने उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है और मामले से जुड़े तमाम वैज्ञानिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि आरोपी को कड़ी सजा मिल सके।

  • भिंड: मजदूरी का पैसा मांगने पर दबंगों ने की मारपीट, कट्टा लहराया और दो बार फायर किया व्यक्ति घायल, आरोपियों पर FIR दर्ज

    भिंड: मजदूरी का पैसा मांगने पर दबंगों ने की मारपीट, कट्टा लहराया और दो बार फायर किया व्यक्ति घायल, आरोपियों पर FIR दर्ज


    भिंड । मध्य प्रदेश जिले के देहात थाना क्षेत्र के टीकरी गांव में मजदूरी का बकाया पैसा लेने गए एक मजदूर से दबंगों द्वारा मारपीट और पिस्तौल के साथ दहशत फैलाने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार मजदूर अनूप रैयपुरिया और उनके छोटे भाई बॉबी ने लगभग एक माह पहले विकास चौरसिया के यहाँ कलर-पुट्टी का काम किया था जिसकी मजदूरी 5 400 रुपये तय थी लेकिन वह मजदूरी नहीं दी गई। पैसे की मांग को लेकर विवाद बढ़ गया जिसके बाद मामला हाथापाई और कट्टे की फायरिंग तक पहुँच गया।

    घटना के मुताबिक विकास चौरसिया अपने साथी बेतू जाटव सहित दो अन्य लोगों के साथ अनूप के घर पहुँचे और बॉबी से विवाद करने लगे। घर के बाहर बैठे बॉबी से पहले मारपीट शुरू हुई और जब अनूप ने बचाव के लिए बीच में आकर रोकने की कोशिश की तो आरोपियों ने उस पर भी हमला कर दिया। इस दौरान मारपीट से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और आसपास का माहौल tense हो गया।

    घायल युवक के बचाव के लिए गांव के अन्य लोग मौके पर इकट्ठा हुए इसी बीच बेतू जाटव ने अपनी जेब से कट्टा निकालकर लहराना शुरू कर दिया और वहां खड़े लोगों में दहशत फैलाने की कोशिश की। आरोप है कि उसने पहले कारतूस जारी करने का प्रयास किया लेकिन गोली मिस हो गई। भय फैलाने के लिए उसने दो बार फायर करने की कोशिश की लेकिन दोनों बार कारतूस चूक गया जिससे आसपास अफरा-तफरी मच गई। लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे और आरोपी भी मौके का फायदा उठाकर भाग निकले।

    पुलिस को सूचना मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पीड़ित अनूप रैयपुरिया की शिकायत पर चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है जिसमें दो नामजद और दो अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि मामला मारपीट और कट्टा लहराकर दहशत फैलाने का है तथा प्राथमिकी दर्ज कर जांच जारी है और आरोपियों की पतासाजी की जा रही है।

    स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि टीकरी गांव में इस तरह का हिंसा-उत्पीड़क व्यवहार कानून और व्यवस्था के लिए चुनौती है तथा ऐसे मामलों से ग्रामीणों में भय की स्थिति बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि मजदूरी के लिये जबरदस्ती पैसा मांगने पर इस तरह की हिंसा निंदनीय है और ऐसी घटनाएँ सामाजिक व्यवहार और ग्रामीण सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर चिंता का विषय हैं।

    घायल मजदूर को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल ले जाया गया है जहाँ उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है तथा जल्द ही आरोपियों को पकड़ने की कोशिश जारी है।

    इस घटना के वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है और अधिकारी इसे गंभीरता से ले रहे हैं। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में इस तरह की हिंसा और दबंगई रोकने में मदद मिले।

    कुल मिलाकर इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि मजदूरी विवाद जैसे मामूली मामलों में हिंसा की उग्र स्थिति कैसे उत्पन्न हो जाती है और ग्रामीण क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था तथा सामाजिक सद्भावना को बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन विवाद हाई कोर्ट तक पहुँचा, अधिकारियों के निलंबन और CBI जांच की मांग

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन विवाद हाई कोर्ट तक पहुँचा, अधिकारियों के निलंबन और CBI जांच की मांग

    नई दिल्ली। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और माघ मेला प्रशासन के बीच उत्पन्न विवाद अब इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। याचिका में 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन घटित घटना की CBI जांच कराने की मांग की गई है। यह मामला धार्मिक भावनाओं, प्रशासनिक हस्तक्षेप और नाबालिगों के अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है।

    अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष लेटर पिटीशन दाखिल की है। याचिकाकर्ता का दावा है कि माघ मेला सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र उत्सव है, जिसमें मौनी अमावस्या का संगम स्नान सर्वोच्च धार्मिक महत्व रखता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जब अपने शिष्यों के साथ पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तब मेला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने उन्हें जबरन पालकी से उतार दिया और पैदल स्नान करने का निर्देश दिया।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि स्वामीजी के साथ चल रहे 11 से 14 वर्ष आयु के नाबालिग बटुकों को हिरासत में लिया गया, उनके साथ कथित मारपीट की गई और उनकी शिखा (चोटी) पकड़कर घसीटा गया। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों के साथ इस प्रकार का व्यवहार जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन) एक्ट का उल्लंघन करता है और यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

    याचिका में यह भी उल्लेख है कि बटुकों की शिखा खींचना सनातन धर्म की धार्मिक भावनाओं का अपमान है। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पद और शंकराचार्य नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे, जबकि याचिकाकर्ता का कहना है कि शंकराचार्य की नियुक्ति की मान्य धार्मिक प्रक्रिया अखाड़ों और काशी विद्वत परिषद के माध्यम से होती है। प्रशासन को इस प्रक्रिया या पद की वैधता पर प्रश्न उठाने का अधिकार नहीं है।

    अधिवक्ता ने कोर्ट से मांग की है कि मामले की तुरंत CBI जांच करवाई जाए, मेला और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निलंबन किया जाए, और नाबालिग बटुकों के साथ मारपीट करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।

    धार्मिक अधिकारों और नाबालिग सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि प्रशासनिक हस्तक्षेप ने न केवल धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाई, बल्कि छोटे बच्चों के अधिकारों का भी उल्लंघन किया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक दखल और बाल सुरक्षा का संगम है और इसका निर्णय पूरे धार्मिक और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक मिसाल साबित हो सकता है। कोर्ट से उम्मीद जताई जा रही है कि CBI जांच और अधिकारियों के निलंबन के निर्देश जल्द जारी होंगे।

  • एमपी के हरदा में दबंगई: आदिवासी किसान को बेरहमी से पीटा, थूककर किया अपमानित; खुद को बताया करणी सेना का सदस्य

    एमपी के हरदा में दबंगई: आदिवासी किसान को बेरहमी से पीटा, थूककर किया अपमानित; खुद को बताया करणी सेना का सदस्य


    हरदा । मध्य प्रदेश के हरदा जिले से सामाजिक सौहार्द और मानवता को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। रहटगाँव थाना क्षेत्र के ग्राम कपासी में दबंगों ने एक आदिवासी किसान और उसके साथियों के साथ न केवल बर्बरतापूर्वक मारपीट की, बल्कि उन्हें थूककर अपमानित भी किया। हमलावरों ने खुद को करणी सेना का सदस्य बताते हुए इलाके में दहशत फैलाने की कोशिश की और पीड़ितों को जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद से स्थानीय आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है।

    विवाद की जड़ और हमला घटना 18 जनवरी 2026 की शाम करीब 5:30 बजे की है। पीड़ित किसान अपने खेत पर सिंचाई कार्य की देखरेख कर रहा था। इसी दौरान टेमागांव–कपासी मार्ग पर एक स्पोर्ट्स मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक बार-बार चक्कर लगा रहे थे। जब किसान ने उनकी संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए वहां रुकने का कारण पूछा, तो युवकों ने शालीनता दिखाने के बजाय गाली-गलौज शुरू कर दी। विवाद इतना बढ़ा कि बाइक पर पीछे बैठे युवक ने खेत की बाड़ से लकड़ी उखाड़कर किसान पर हमला कर दिया, जिससे उसके बाएं हाथ में गंभीर चोट आई।

    योजनाबद्ध तरीके से बुलाई गई भीड़ पीड़ित के अनुसार, प्राथमिक हमले के बाद मोटरसाइकिल सवार युवक ने फोन करके अपने अन्य साथियों को मौके पर बुलाया। कुछ ही देर में एक फोर व्हीलर वाहन से करीब आठ लोग वहां पहुंचे, जिनमें से एक की पहचान टिमरनी निवासी योगेन्द्र सिंह मौर्य के रूप में हुई है। इन सभी लोगों ने निहत्थे किसान को घेर लिया और सामूहिक रूप से मारपीट शुरू कर दी। जब किसान के दोस्त मनोज उइके और सुदामा धुर्वे उसे बचाने आए, तो हमलावरों ने उन्हें भी नहीं बख्शा और उनके साथ भी जमकर मारपीट की। अमानवीय कृत्य और धमकी हमलावरों की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी। खुद को करणी सेना का रसूखदार सदस्य बताते हुए उन्होंने आदिवासी किसान को डराया-धमकाया और जबरन माफी मंगवाई।

    अमानवीयता की हद तो तब पार हो गई जब एक आरोपी ने बीच-बचाव करने आए मनोज उइके पर थूककर उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। जाते-जाते आरोपियों ने पीड़ितों को चेतावनी दी कि यदि उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई, तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इस हमले में किसान के सीने, पीठ और हाथ में गंभीर चोटें आई हैं, वहीं मनोज के कान और पैर में चोट लगी है। पुलिसिया कार्रवाई घटना के बाद घायलों ने साहस दिखाते हुए रहटगाँव थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर योगेन्द्र सिंह मौर्य और अन्य अज्ञात साथियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपियों की तलाश के लिए टीमें रवाना कर दी गई हैं और कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

  • उज्जैन के बड़नगर में बिजली विभाग की टीम पर हमला: कनेक्शन काटने पर किसान ने की मारपीट

    उज्जैन के बड़नगर में बिजली विभाग की टीम पर हमला: कनेक्शन काटने पर किसान ने की मारपीट


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र में बिजली विभाग की टीम पर हमला होने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना ग्राम पिपलु में हुई, जहां एक किसान ने बिजली बिल का लंबा समय से भुगतान न करने के बाद जब बिजली विभाग की टीम ने उसका कनेक्शन काटा, तो किसान ने कर्मचारियों पर हमला कर दिया।

    घटना का विवरण

    बताया जा रहा है कि सुपरवाइजर जनार्दन द्विवेदी अपनी टीम के साथ बकाया बिजली बिल की वसूली के लिए किसान लोकेंद्र के घर पहुंचे थे। लोकेंद्र पर काफी समय से बिजली का बिल बकाया था, और जब विभागीय टीम ने कनेक्शन काटने की प्रक्रिया शुरू की, तो किसान लोकेंद्र आक्रोशित हो गए। उन्होंने जनार्दन द्विवेदी और उनके साथियों से मारपीट करना शुरू कर दिया।

    मोबाइल में कैद हुई मारपीट की घटना

    किसान द्वारा की गई मारपीट की घटना को किसी ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जिसके बाद इसका वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि किसान ने कनेक्शन काटने के दौरान कर्मचारियों से हाथापाई की। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद घटना ने काफी तूल पकड़ लिया।

    पुलिस में शिकायत और जांच

    मारपीट की इस घटना के बाद सभी कर्मचारी बड़नगर थाने पहुंचे और आरोपी किसान लोकेंद्र के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट करने की शिकायत की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी किसान के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    घटना का असर

    इस घटना ने बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में जहां एक ओर बिजली विभाग की टीम कनेक्शन काटने के लिए जाती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की हिंसक घटनाएं विभाग के कार्यों में रुकावट डाल सकती हैं।अब देखना होगा कि पुलिस मामले की जांच के बाद क्या कार्रवाई करती है और क्या किसान लोकेंद्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी या नहीं।

  • नशेड़ियों ने पुलिसकर्मियों पर किया हमला, पत्थरबाजी से डरकर भागे

    नशेड़ियों ने पुलिसकर्मियों पर किया हमला, पत्थरबाजी से डरकर भागे


    सतना । कोलगवां थाना क्षेत्र के वार्ड क्रमांक पंद्रह स्थित पानी टंकी क्षेत्र में नशेड़ियों ने पुलिस पर पत्थर से हमला कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब पुलिसकर्मी शराब पीकर हंगामा कर रहे युवकों को समझाने के लिए मौके पर पहुंचे थे। करीब एक दर्जन आरोपियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए, जिससे पुलिसकर्मियों को जान बचाकर पीछे हटना पड़ा।

    सूचना मिलने के बाद दो पुलिसकर्मी बाइक से मौके पर पहुंचे, जहां उन्होंने देखा कि कुछ युवक शराब पीकर गाली-गलौज कर रहे थे और क्षेत्र में अशांति फैला रहे थे। जैसे ही पुलिसकर्मियों ने नशेड़ियों को समझाने की कोशिश की, उन युवकों ने न केवल पुलिसकर्मियों से अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि पत्थरबाजी भी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ते देख पुलिसकर्मियों को अपनी जान की सुरक्षा के लिए वहां से भागना पड़ा।

    इस हमले में पांच पुलिसकर्मियों को चोटें आईं, लेकिन कोई बड़ी घटना नहीं घटी। पुलिस के अनुसार, मौके पर मौजूद नशेड़ियों का एक समूह था जो पहले तो गाली-गलौज कर रहा था और फिर अचानक हमला कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया, लेकिन हमलावरों का कुछ पता नहीं चल पाया है।पुलिस ने इस हमले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की योजना बनाई है। इस घटना ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि इलाके में बढ़ते नशे के मामलों पर नियंत्रण रखने के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।