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  • दतिया हार के बाद भाजपा में समीक्षा शुरू, सीएम आवास पर हुई बड़ी बैठक, भीतरघात की होगी जांच

    दतिया हार के बाद भाजपा में समीक्षा शुरू, सीएम आवास पर हुई बड़ी बैठक, भीतरघात की होगी जांच


    भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक समीक्षा तेज कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भोपाल स्थित आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में चुनावी नतीजों, भीतरघात की शिकायतों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी ने पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का भी गठन किया है।

    सोमवार को आए उपचुनाव परिणामों में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से पराजित किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, चुनाव प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने भी बैठक में पहुंचकर कथित भीतरघात से जुड़े ऑडियो साक्ष्य संगठन के समक्ष रखे।

    भीतरघात और फर्जी प्रचार की होगी जांच
    सूत्रों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने के कारण कुछ स्थानीय पार्षदों और संगठन पदाधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित भ्रामक पोस्ट और फर्जी पत्रों की भी जांच होगी। ऐसे मामलों में शामिल लोगों की सूची तैयार कर उनके राजनीतिक संबंधों की पड़ताल की जाएगी।

    उल्लेखनीय है कि पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में सक्रिय प्रचार किया था, लेकिन इसके बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

    दो सदस्यीय जांच समिति गठित
    प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने चुनावी हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा के लिए प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा की दो सदस्यीय समिति बनाई है। समिति जमीनी स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी।

    खंडेलवाल ने स्पष्ट कहा कि भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है और संगठन के नियमों के विरुद्ध कार्य करने वाले किसी भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

    पार्टी के भीतर भी उठे सवाल
    चुनाव परिणाम के बाद भाजपा के भीतर से भी आत्ममंथन की आवाजें सामने आई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया पर “आत्ममंथन का समय…” लिखकर संगठन को संकेत दिया, जबकि टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी प्रभावी होने लगते हैं तो चुनावी परिणाम प्रभावित होते हैं।

    जनादेश स्वीकार, भविष्य की तैयारी
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी कमियों का आकलन करेगी और भविष्य में अधिक मजबूती के साथ जनता के बीच जाएगी।

    दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 66,757 (42.39%) और भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 60,741 (38.57%) मत मिले। हार के बाद भाजपा ने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और चुनावी रणनीति की समीक्षा का अभियान शुरू कर दिया है।

  • बांकीपुर में बीजेपी का गढ़ कैसे टूटा? प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत के पीछे रहे ये 5 बड़े फैक्टर

    बांकीपुर में बीजेपी का गढ़ कैसे टूटा? प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत के पीछे रहे ये 5 बड़े फैक्टर


    पटना । बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात के विधानसभा उपचुनावों के नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा बांकीपुर सीट की रही, जहां जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19 हजार से अधिक वोटों से पराजित कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता तीसरे स्थान पर रहीं।

    यह हार बीजेपी के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि बांकीपुर सीट 1995 से पार्टी के कब्जे में थी। यह सीट हाल ही में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने इसी सीट पर करीब 52 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन महज आठ महीने बाद पार्टी को यहां हार का सामना करना पड़ा।

    1. सम्राट चौधरी के नेतृत्व की पहली परीक्षा
    बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बीजेपी की पहली चुनावी परीक्षा थी। चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने मुकाबले को सीधे अपने और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच की लड़ाई के रूप में पेश किया। जीत के बाद भी उन्होंने कहा कि बांकीपुर की जनता ने बीजेपी नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया है कि बिहार को बेहतर नेतृत्व की जरूरत है।

    2. लंबे समय से सत्ता विरोधी माहौल
    करीब तीन दशक से यह सीट नितिन नवीन और उनके परिवार के पास रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार एक ही परिवार के प्रतिनिधित्व के कारण क्षेत्र में सत्ता विरोधी भावना (एंटी-इनकंबेंसी) मजबूत हो चुकी थी। स्थानीय विकास और बदलाव के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने इसका लाभ उठाया।

    3. स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित प्रचार
    प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार में बड़े राजनीतिक वादों के बजाय स्थानीय विकास को प्राथमिकता दी। उन्होंने जनता से कहा कि विधायक बनने के बाद क्षेत्र रातों-रात नहीं बदलेगा, लेकिन कुछ महीनों में बदलाव दिखाई देगा। यह व्यावहारिक संदेश मतदाताओं को प्रभावित करता नजर आया।

    4. राजद के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध
    विश्लेषकों के अनुसार मुस्लिम-यादव (एम-वाई) वोट बैंक का एक हिस्सा इस बार राजद के बजाय जन सुराज के साथ गया। बीजेपी को हराने की रणनीति के तहत कई मतदाताओं ने प्रशांत किशोर को मजबूत विकल्प माना। इसका असर यह रहा कि राजद तीसरे स्थान पर खिसक गया और उसकी जमानत तक जब्त हो गई।

    5. सवर्ण वोटों का झुकाव
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक, खासकर ब्राह्मण और कायस्थ समुदाय के एक हिस्से ने इस बार प्रशांत किशोर का समर्थन किया। बांकीपुर में इन समुदायों का प्रभाव निर्णायक माना जाता है और वोटों का यह बदलाव चुनाव परिणाम पर भारी पड़ा।

    बीजेपी के लिए बड़ा संदेश
    बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम सिर्फ एक सीट की हार-जीत नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत माना जा रहा है। वहीं, जन सुराज पार्टी के लिए यह पहली चुनावी जीत भविष्य की राजनीति में उसकी बढ़ती भूमिका का संकेत मानी जा रही है।

  • दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44% मतदान, लोकतंत्र के पर्व में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी

    दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44% मतदान, लोकतंत्र के पर्व में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी


    दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए गुरुवार को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में मतदान संपन्न हो गया। लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदाताओं ने उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, पूरे विधानसभा क्षेत्र में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

    सुबह मतदान शुरू होते ही विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं ने भी बड़ी संख्या में मतदान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

    निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े तथा पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के नेतृत्व में सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई थी। मतदाताओं के लिए पेयजल, छाया, चिकित्सा सहायता और दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। प्रशासन और पुलिस ने पूरे दिन मतदान प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी, जिससे मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

    निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, विधानसभा क्षेत्र के 2,20,410 मतदाताओं ने मतदान किया। इनमें 1,16,116 पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 74.09, जबकि 1,04,284 महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 68.48 रहा। वहीं 10 अन्य मतदाताओं में से 40 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।

    मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतदान दल कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ईवीएम और निर्वाचन सामग्री लेकर सुरक्षित रूप से संग्रहण केंद्र पहुंचे, जहां सामग्री जमा कराने की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी कराई गई।

    जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े ने मतदान प्रक्रिया को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी मतदाताओं, निर्वाचन ड्यूटी में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों, पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बल, मीडिया प्रतिनिधियों और अन्य सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।