Tag: Attack

  • पचमढ़ी के आर्मी एजुकेशन सेंटर में बायसन का हमला, फुटबॉल खेल रहे 26 वर्षीय जवान की मौत

    पचमढ़ी के आर्मी एजुकेशन सेंटर में बायसन का हमला, फुटबॉल खेल रहे 26 वर्षीय जवान की मौत

    मध्य प्रदेश: के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी में जंगली बायसन के हमले में सेना के एक जवान की मौत हो गई। घटना गुरुवार शाम आर्मी एजुकेशन सेंटर परिसर की है। यहां कुछ सैनिक फुटबॉल खेल रहे थे। इसी दौरान जंगल से अचानक निकला एक बायसन मैदान में पहुंच गया और सैनिकों की ओर दौड़ पड़ा। हमले में 26 वर्षीय जवान आकाश चौहान गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल मिलिट्री अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

    मृतक जवान की पहचान उत्तराखंड निवासी आकाश चौहान के रूप में हुई है। वह आर्मी एजुकेशन सेंटर में चीनी भाषा का प्रशिक्षण ले रहे थे और 17वीं कमांड रेजिमेंट में पदस्थ थे। घटना के बाद सैन्य परिसर में शोक का माहौल है। अचानक हुए इस हमले से वहां मौजूद सैनिक भी सकते में आ गए।

    जानकारी के अनुसार, सैनिक जब मैदान में फुटबॉल खेल रहे थे, तभी झाड़ियों से निकलकर बायसन वहां पहुंचा। उसने अचानक सैनिकों पर हमला कर दिया। इस दौरान आकाश चौहान उसकी चपेट में आ गए। बायसन ने पीछे से उन पर हमला किया और उसके सींग जवान के पेट के आसपास लगे। इससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। साथी सैनिकों ने उन्हें तत्काल उपचार के लिए मिलिट्री अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक पचमढ़ी संजीव शर्मा ने बताया कि सेना की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, सैनिक मैदान में फुटबॉल खेल रहे थे, तभी बायसन झाड़ियों से निकलकर वहां पहुंचा और उन पर हमला कर दिया। उन्होंने बताया कि आर्मी परिसर जंगल से लगा हुआ है। इस वजह से बायसन का झुंड कई बार जंगल से निकलकर परिसर में आ जाता है। हालांकि, इस तरह की घटना पहले कभी सामने नहीं आई थी। मामले की जांच की जा रही है।

    पचमढ़ी में पिछले कुछ दिनों से बायसन के झुंड की आवाजाही लगातार देखी जा रही है। पचमढ़ी थाने में पदस्थ एसएन यादव के मुताबिक, आकाश चौहान प्रशिक्षण के लिए यहां आए थे। वह उत्तराखंड में देहरादून के पास के रहने वाले थे। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में बायसन का झुंड कई बार पचमढ़ी नगर के भीतर भी दिखाई दिया है।

    एक दिन पहले ही बायसन का झुंड शहीद द्वार के पास स्थित छोटी पुलिया पर आकर बैठ गया था। इसके कारण कई घंटे तक वहां से आवागमन बंद रहा। सड़क पर झुंड की मौजूदगी के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन से बायसन के झुंड को वापस जंगल में भेजने की मांग भी की थी।

    स्थानीय स्तर पर इस दिशा में कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी बीच आर्मी एजुकेशन सेंटर परिसर में हुए हमले ने वन्यजीवों की आवाजाही और मानव आबादी के बीच बढ़ते टकराव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल घटना की जांच की जा रही है।

  • 27 भारतीयों वाले जहाज पर चुंबक बम से हमला…. होर्मुज में पहली बार हुआ लिंपेट माइंस का इस्तेमाल

    27 भारतीयों वाले जहाज पर चुंबक बम से हमला…. होर्मुज में पहली बार हुआ लिंपेट माइंस का इस्तेमाल


    नई दिल्ली।
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में समुद्री जहाजों पर हमलों का खतरा बढ़ता जा रहा है. 30 अक्टूबर को 27 भारतीय नाविकों (27 Indian Sailors) को लेकर जा रहे पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर MT LOUISE 1 पर लिंपेट माइंस (चुंबक बम) (Limpet Mines -Magnetic Bombs) से हमला किया गया. धमाके के बाद जहाज के इंजन रूम में आग लग गई और टैंकर कुछ समय के लिए काम करना बंद कर गया. हालांकि, सभी 27 भारतीय क्रू मेंबर सुरक्षित हैं. केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसकी पुष्टि की है.

    जानकारी के मुताबिक, फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज में चुंबक विस्फोट के इस्तेमाल से किया गया यह पहला सफल हमला है. हमले में एक छोटी नाव टैंकर के पास पहुंची और उसके बाहरी हिस्से पर दो लिंपेट माइंस चिपकाकर वहां से निकल गई. इसके बाद जहाज में आग लग गई. क्रू मेंबर्स ने आग पर काबू पा लिया. घटना में किसी के घायल होने या समुद्र में तेल फैलने की जानकारी नहीं है. आग बुझने के बाद टैंकर ने फिर से अपना सफर शुरू कर दिया.


    एक दिन पहले दूसरे टैंकर पर भी हुआ था हमला

    केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि 29 अक्टूबर को लाइबेरिया के झंडे वाले बड़े तेल टैंकर MT ARZANAH पर भी होर्मुज में प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया था. इस जहाज पर दो भारतीय नागरिक सवार थे. इस तरह दोनों जहाजों पर कुल 29 भारतीय नागरिक मौजूद थे और सभी सुरक्षित हैं। सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सरकार हालात पर लगातार नजर रख रही है. जहाजों का प्रबंधन करने वाली कंपनियों के साथ संपर्क बनाए रखा जा रहा है, ताकि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनके हालात का ध्यान रखा जा सके.


    ओमान के पास हुई घटना

    ब्रिटिश नौसेना से जुड़ी एजेंसी UKMTO के मुताबिक, गुरुवार को यह घटना ओमान के खासाब शहर से करीब 25 समुद्री मील यानी लगभग 46 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुई. एजेंसी ने अपनी शुरुआती एडवाइजरी में जहाज का नाम नहीं बताया था. हालांकि, समुद्री सुरक्षा से जुड़े तीन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि हमला MT LOUISE 1 पर हुआ और जहाज के बाहरी हिस्से पर लिंपेट माइंस लगाई गई थीं। सूत्रों के मुताबिक, सितंबर में भी इसी तरह का हमला करने की कोशिश हुई थी, लेकिन उस समय विस्फोटक नहीं फटे थे. गुरुवार के हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी साफ नहीं हो पाया है।


    क्या होती हैं लिंपेट माइंस?

    लिंपेट माइंस छोटे आकार के विस्फोटक उपकरण होते हैं, जिन्हें चुंबक की मदद से जहाज के बाहरी हिस्से पर चिपकाया जा सकता है. समुद्री सुरक्षा कंपनी Marisks के मुताबिक, इस क्षेत्र में 2017 से इनका इस्तेमाल किया जा रहा है. ये विस्फोटक अपेक्षाकृत सस्ते और आसानी से उपलब्ध होते हैं. छोटी नाव के जरिए इन्हें किसी चलते हुए जहाज पर लगाकर हमलावर आसानी से वहां से निकल सकते हैं।

  • Ethiopia: ओरोमिया में ईसाई चर्चों और आसपास के गांवों में खूनी हमला… 40 से ज्यादा लोगों की मौत

    Ethiopia: ओरोमिया में ईसाई चर्चों और आसपास के गांवों में खूनी हमला… 40 से ज्यादा लोगों की मौत


    अदीस अबाबा।
    इथियोपिया (Ethiopia) के ओरोमिया राज्य (Oromia State) में ऑर्थोडॉक्स ईसाई चर्चों (Orthodox Christian churches) और आसपास के गांवों पर हमले होने की खबर है। इन हमलों में 40 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। दो स्थानीय निवासियों और एक पादरी के हवाले से एक न्यूज में यह जानकारी दी गई है। बता दें कि ओरोमिया इथियोपिया का सबसे बड़ा राज्य है। यहां लंबे समय से विद्रोह, सशस्त्र संघर्ष और जातीय तनाव की स्थिति बनी हुई है। हथियारबंद समूह अक्सर धर्म का इस्तेमाल कर समुदायों के बीच फूट डालने और लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं।

    एक न्यूज में स्थानीय लोगों के हवाले से बताया गया कि इस घटना में कुल 44 लोगों की मौत हुई है। एक अन्य निवासी ने मरने वालों की संख्या 51 बताई। दोनों ने हमले की पुष्टि की, लेकिन आंकड़ों में थोड़ा अंतर रहा। मीडिया और स्वतंत्र पत्रकारों पर इथियोपिया में भारी पाबंदियां होने के कारण इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। सरकारी इथियोपिया ह्यूमन राइट्स कमीशन ने इस मामले पर ज्यादा कुछ नहीं कहा। उसने केवल इतना कहा कि वह हालात पर नजर रख रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार, इलाके में धार्मिक तनाव बहुत ज्यादा है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह बड़ा संकट बन सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इलाके के दो चर्चों पर हमला हुआ। लोगों के कई घर भी तबाह कर दिए गए।

    बता दें कि इथियोपिया हॉर्न ऑफ अफ्रीका का देश है, जो कई आंतरिक संघर्षों से जूझ रहा है। पिछले महीने उत्तरी टिग्रे राज्य में भी भारी लड़ाई हुई थी। देश के बीचों-बीच स्थित ओरोमिया राज्य में करीब 4 करोड़ लोग रहते हैं। यहां मुस्लिम, प्रोटेस्टेंट और ऑर्थोडॉक्स समुदाय साथ रहते हैं। झगड़े की मुख्य वजह राजनीतिक और जातीय प्रतिनिधित्व की शिकायतें रही हैं, लेकिन लड़ाकों को इकट्ठा करने के लिए धर्म का भी इस्तेमाल किया जाता रहा है।

    हमला किए गए चर्चों में से एक के डीकन ने कहा कि वे इन दुखद हत्याओं से बहुत सदमे में हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह तुरंत दखल दे और इलाके में सुरक्षा बहाल करे। डीकन के अनुसार मरने वालों की संख्या 46 है।

    हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से हमले की विस्तृत पुष्टि या कार्रवाई की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय लोग सुरक्षा की मांग कर रहे हैं और चर्चों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील कर रहे हैं।

  • ग्वालियर में 14 साल के बच्चे पर चाकू से नौ वार, बलि देने की धमकी का आरोप, जंगल में छोड़कर भागा पड़ोसी

    ग्वालियर में 14 साल के बच्चे पर चाकू से नौ वार, बलि देने की धमकी का आरोप, जंगल में छोड़कर भागा पड़ोसी


    मध्य प्रदेश: के ग्वालियर जिले में 14 साल के बच्चे पर चाकू से हमला करने का गंभीर मामला सामने आया है। करहिया थाना क्षेत्र के रिठौदन गांव में रहने वाले एक पड़ोसी पर आरोप है कि वह बच्चे को झांकी दिखाने के बहाने बाइक से गोलेश्वर मंदिर की पहाड़ी के पास जंगल में ले गया। वहां उसने बच्चे से कथित तौर पर कहा कि वह उसकी बलि देगा और फिर चाकू से लगातार नौ वार कर दिए। गंभीर रूप से घायल होने के बाद बच्चा जमीन पर गिरकर बेहोश हो गया। आरोपी उसे मृत समझकर जंगल में छोड़कर फरार हो गया।

    पीड़ित बच्चे की पहचान निशांत के रूप में बताई गई है। परिजनों के मुताबिक, आरोपी विक्की गौड़ उनके पड़ोस में रहता है। आरोप है कि वह निशांत को बाइक पर बैठाकर जंगल की ओर ले गया था। बच्चे को शुरुआत में इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसके साथ कोई अनहोनी होने वाली है। लेकिन जंगल पहुंचने के बाद आरोपी का व्यवहार बदल गया और घटना ने गंभीर रूप ले लिया।

    निशांत के अनुसार, उसने आरोपी से पूछा कि वह उसे वहां क्यों लेकर आया है। इस पर आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि वह उसकी बलि देना चाहता है। इसके बाद उसने चाकू निकालकर बच्चे पर हमला कर दिया। आरोप है कि आरोपी ने निशांत के गले पर चार वार किए। इसके अलावा उसके माथे और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चाकू से हमला किया गया। इस तरह बच्चे पर कुल नौ वार किए गए। हमले के दौरान चाकू टूटने की बात भी सामने आई है। गंभीर चोटों के कारण निशांत वहीं गिर पड़ा और बेहोश हो गया।

    आरोपी को जब लगा कि बच्चा मर चुका है, तो वह उसे जंगल में ही छोड़कर भाग गया। बताया गया है कि निशांत कई घंटे तक घायल अवस्था में जंगल में पड़ा रहा। देर रात उसे होश आया तो वह किसी तरह अपने घर पहुंचा। उसके शरीर पर गंभीर चोटें थीं और वह खून से लथपथ था। बच्चे की हालत देखकर परिजन घबरा गए और उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।

    घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस से शिकायत की। परिजनों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद शुरुआत में उचित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद परिवार घायल बच्चे को लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और अपनी शिकायत दर्ज कराई। निशांत ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान आरोपी ने उसे धमकी भी दी थी। बच्चे के मुताबिक, आरोपी ने कहा था कि उसकी बलि देने के बाद वह उसके भाई को भी मार देगा। उसने रामबरन नाम के एक अन्य युवक की बलि देने की बात भी कही थी। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी विक्की गौड़ के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। देहात के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयराज कुबेर के अनुसार, करहिया थाना पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है। घटना के पीछे की वास्तविक वजह और आरोपी की मंशा का पता लगाने के लिए मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल आरोपी फरार बताया गया है।

    पुलिस जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि बच्चे पर हमला किन परिस्थितियों में हुआ और क्या घटना के पीछे वास्तव में बलि देने की मंशा थी। फिलहाल परिवार के आरोप, बच्चे के बयान और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी और जांच के निष्कर्षों के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हमला, 1 की मौत और 8 घायल, कई फ्लाइट्स के रूट बदले

    सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हमला, 1 की मौत और 8 घायल, कई फ्लाइट्स के रूट बदले


    नई दिल्ली। सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार देर रात हुए हमले में एक सऊदी नागरिक की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हो गए। सऊदी सिविल एविएशन अथॉरिटी ने गुरुवार सुबह इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि हमले में एयरपोर्ट को भी नुकसान पहुंचा है। वैश्विक फ्लाइट ट्रैकिंग सेवा Flightradar24 के मुताबिक, घटना के बाद रात में कई उड़ानों के रूट डायवर्ट किए गए।

    किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट फारस की खाड़ी के पास दम्माम में स्थित है। यह बहरीन और कतर के नजदीक है। इससे पहले भी सऊदी अरब के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर मिसाइल और प्रोजेक्टाइल हमलों के दौरान इस एयरपोर्ट को निशाना बनाया जा चुका है। ताजा हमले पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई है। वहीं, सऊदी गठबंधन ने बताया कि उसने देश के पूर्वी क्षेत्र में ड्रोन से किए गए चार हमलों को नाकाम कर दिया।

    तेल क्षेत्र में ड्रोन का मलबा गिरने से 2 की मौत
    एयरपोर्ट पर हमले से पहले दक्षिण-पूर्वी सऊदी अरब में अरामको के संचालन वाले शायबह तेल क्षेत्र में एक इंटरसेप्ट किए गए ड्रोन का मलबा गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य घायल हुए थे।

    सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, मृतकों में नेपाल और फिलीपींस के नागरिक शामिल थे। घायलों में पाकिस्तान और भारत के नागरिक थे। मंत्रालय ने बताया कि ड्रोन का मलबा गिरने से तेल क्षेत्र में एक ठेकेदार के वाहन में आग भी लग गई।

    सऊदी तेल ठिकानों पर लगातार हमले
    सऊदी अरब में हाल के दिनों में तेल प्रतिष्ठानों और अन्य अहम ठिकानों के आसपास ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। पिछले महीने इंटरसेप्ट किए गए हूती ड्रोन का मलबा गिरने से सऊदी अरब में रह रहे एक यमनी नागरिक की मौत हो गई थी। हूतियों की ओर से सऊदी शिपिंग और तेल ठिकानों को निशाना बनाकर हमले बढ़ाए जाने के बीच इसे नागरिक की पहली मौत बताया गया था।

    इस महीने की शुरुआत में भी सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में हुए हमले के बाद दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल अरामको की एक प्रशासनिक इमारत में मामूली आग लग गई थी।

    ताजा घटनाओं ने सऊदी अरब के हवाई और ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। किंग फहद एयरपोर्ट पर हुई मौत और घायलों के अलावा तेल क्षेत्र में हुए नुकसान से क्षेत्र में जारी सुरक्षा चुनौतियां एक बार फिर सामने आई हैं।

  • मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हमले की तैयारी में अमेरिका-इजरायल! परमाणु ठिकाने और मिसाइल भंडार निशाने पर

    मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हमले की तैयारी में अमेरिका-इजरायल! परमाणु ठिकाने और मिसाइल भंडार निशाने पर


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव का खतरा मंडराने लगा है। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित हमलों के निशाने पर ईरान के परमाणु केंद्र, मिसाइल और ड्रोन भंडार के साथ ऊर्जा ढांचा भी हो सकता है। हालांकि, अब तक किसी भी हमले की योजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।

    रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित सैन्य अभियान छोटा, लेकिन बेहद तीव्र हो सकता है। अमेरिका और इजरायल की योजना कथित तौर पर तीन दिनों तक हमले कर ईरान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और उसे परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए मजबूर करने की है। संभावित लक्ष्यों में परमाणु ठिकानों के अलावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के कमांड सेंटर भी शामिल हैं।

    पिकैक्स माउंटेन पर हमले की भी चर्चा
    ईरान के पहाड़ों के नीचे स्थित परमाणु केंद्र ‘पिकैक्स माउंटेन’ भी संभावित निशाने पर हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह इस ठिकाने के खिलाफ 22,000 पाउंड वजनी GBU-43/B बम के इस्तेमाल पर विचार करने की बात कही थी। इसे MOAB यानी ‘मदर ऑफ ऑल बम्स’ भी कहा जाता है।

    हालांकि, ऊर्जा ढांचे पर हमले को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच मतभेद की स्थिति बताई जा रही है। कुछ अधिकारियों का मानना है कि तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने से बचना चाहिए। ऐसा करने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार प्रभावित हो सकता है और अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसी वजह से ऊर्जा प्रतिष्ठानों को संभावित लक्ष्यों में शामिल करने को लेकर असमंजस बना हुआ है।

    ईरान की चेतावनी- जवाब सीमित नहीं रहेगा
    दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि उस पर नया हमला हुआ तो उसकी जवाबी कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। तेहरान ने संकेत दिया है कि संभावित जवाबी हमलों में सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों, डेटा सेंटरों और समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

    ईरानी अधिकारियों के रुख से संकेत मिलता है कि किसी नए संघर्ष की स्थिति में युद्ध को सीमित रखना आसान नहीं होगा। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ने और संघर्ष के दूसरे देशों तक फैलने की आशंका भी गहरा सकती है।

    ईरान की सीमा के पास इजरायल का बड़ा हवाई अभ्यास
    इस बीच, इजरायल ने सोमवार को ईरान की सीमा के नजदीक एक बड़ा वायुसेना अभ्यास किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली वायुसेना के दर्जनों लड़ाकू और हवा में ईंधन भरने वाले विमान इजरायल से 800 मील से अधिक दूर तक गए। विमानों ने सीरिया और इराक के हवाई क्षेत्र से गुजरते हुए ईरान की सीमा के पास उड़ान भरी और फिर लौट आए।

    अधिकारियों के अनुसार, विमानों का यह मार्ग ईरान पर संभावित हमले के लिए इस्तेमाल किए जा सकने वाले रास्ते जैसा था। हालांकि, इजरायल ने इसे प्रशिक्षण अभ्यास बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य ईरान को कड़ा संदेश देना था। इजरायल ने इस अभियान की जानकारी अमेरिका को पहले ही दे दी थी।

    रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि यदि ईरान ने अभ्यास में शामिल इजरायली विमानों पर हमला किया तो इजरायल को बड़े सैन्य अभियान का बहाना मिल सकता है। इससे अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती थीं।

    ट्रंप के सामने तीन बड़ी चुनौतियां
    पिछले अनुभवों को देखते हुए ट्रंप फिलहाल ईरान पर नए हमले का आदेश देने से बचते नजर आ रहे हैं। हालांकि, जब तक ईरान परमाणु वार्ता की मेज पर लौटकर समझौते की दिशा में आगे नहीं बढ़ता, तब तक सैन्य कार्रवाई की आशंका बनी रह सकती है।

    अमेरिका के सामने नई जंग शुरू करने के रास्ते में तीन बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, हमले की स्थिति में तेल की कीमतों में तेज उछाल का खतरा। दूसरी, संघर्ष का पूरे मिडिल ईस्ट में फैल जाना। तीसरी, अमेरिकी सेना के पास मिसाइलों को रोकने वाले इंटरसेप्टर की संभावित कमी।

    ऐसे में सैन्य योजनाएं तैयार होने की खबरों के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन हमले को मंजूरी देगा या कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता देगा। फिलहाल, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच पूरे क्षेत्र की निगाहें वॉशिंगटन के अगले कदम पर टिकी हैं।

  • रियाद के बाद दम्माम एयरपोर्ट पर हूतियों का हमला, सऊदी अरब में हवाई सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

    रियाद के बाद दम्माम एयरपोर्ट पर हूतियों का हमला, सऊदी अरब में हवाई सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। सऊदी अरब में हवाई अड्डों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले की खबरों के बाद रविवार देर शाम पूर्वी प्रांत के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, दम्माम को भी निशाना बनाए जाने की सूचना सामने आई। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है।

    सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने दम्माम एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक, हवाई अड्डे की सुविधाओं को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और सुरक्षा जांच जारी है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक स्थिति, किसी के हताहत होने और उड़ानों के संचालन पर पड़े प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

    रियाद एयरपोर्ट हमले में भारतीय नागरिक की भी मौत

    इससे पहले शनिवार को रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले के बाद सऊदी अधिकारियों ने शुरुआत में एक अमेरिकी नागरिक समेत 12 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी थी। बाद में भारतीय दूतावास ने बताया कि हमले में घायल एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। इसके बाद मृतकों की संख्या 13 बताई गई, जबकि घायलों की संख्या 300 से अधिक रही।

    रविवार को रियाद एयरपोर्ट के टर्मिनल-4 को भी एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, इस घटना के बाद आग लग गई। अधिकारियों ने नुकसान का आकलन शुरू किया। गठबंधन ने एयरपोर्ट के आसपास एक क्रूज मिसाइल को रोकने का दावा भी किया।

    हूतियों की चेतावनी- हमले और तेज हो सकते हैं

    हूती सैन्य प्रवक्ता याहिया सारे ने टेलीविजन संबोधन में रियाद पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा करते हुए चेतावनी दी थी कि जब तक सऊदी अरब यमन में अपनी कथित ‘आक्रामकता’ बंद नहीं करता, तब तक हालात और बिगड़ सकते हैं।

    समाचार एजेंसी अनादोलु की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने दम्माम और रियाद एयरपोर्ट के अलावा सऊदी अरब की प्रमुख ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा भी किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पूरी पुष्टि होना अभी बाकी है।

    हवाई अड्डों पर हमलों की खबरें ऐसे समय सामने आई हैं, जब सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच सैन्य तनाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने हाल के हफ्तों में यमन में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज की है और वहां की सरकारी सेनाओं को समर्थन दिया है।

    यमन पर 124 हवाई हमलों का हूतियों का दावा

    हूती-नियंत्रित विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि सऊदी अरब ने यमन में सैन्य कार्रवाई और हस्तक्षेप बंद नहीं किया, तो जवाबी हमले और तेज किए जा सकते हैं। हूती पक्ष ने पिछले 24 घंटों में यमन पर 124 हवाई हमले किए जाने का आरोप भी लगाया है। इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य कार्रवाई के दावों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। हवाई अड्डों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की खबरें इस तनाव के व्यापक असर की आशंका बढ़ाती हैं।

    तेल उद्योग के लिहाज से अहम है दम्माम

    दम्माम सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत का प्रमुख शहर है और तेल एवं गैस उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्र का प्रमुख हवाई संपर्क केंद्र है।

    रियाद के बाद दम्माम एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने की खबर से सऊदी अरब के नागरिक विमानन ढांचे की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल हवाई अड्डे पर नुकसान, संभावित हताहतों और उड़ानों के संचालन पर प्रभाव के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि इस घटना का हवाई यातायात पर कितना असर पड़ा है।

  • होर्मुज स्‍ट्रेट में अमेरिका के पसीने छुड़ा रहा ईरान…. 72 घंटे में 5 जहाजों पर किया हमला

    होर्मुज स्‍ट्रेट में अमेरिका के पसीने छुड़ा रहा ईरान…. 72 घंटे में 5 जहाजों पर किया हमला


    तेहरान।
    लाल सागर (Red Sea) की तरफ से हूती (Houthis) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से लेकर ओमान की खाड़ी तक ईरान (Iran) गदर मचाए हुए हैं. ताबड़तोड़ हमले से अमेरिका (America) और उसके सहयोगियों के माथे से पसीना निकल रहा है. ईरान ने खासकर होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को श्‍मशान बना रखा है. दुनिया का एनर्जी कॉरिडोर कहे जाने वाला होर्मुज अमेरिका और ईरान की पंजे में फंसकर फड़फड़ा है. अब ईरान की तरफ से होर्मुज स्‍ट्रेट में एक बार फिर से हमला करने की खबर है।

    बताया जा रहा है कि ईरानी हमले का शिकार बने जहाज में आग लग गई है. पिछले 72 घंटे में 5 जहाजों पर अटैक किया गया है. पहले से ही वीरान हो चुके होर्मुज से अब हर कोई गुजरने से डर रहा है. अमेरिका ने इस समुद्री गलियारे में पूर्ण सुरक्षा देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन तेल, गैस और अन्‍य जरूरी सामानों से लदे टैंकर्स को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. ईरान जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों की आवाजाही न के बराबर रह गई है।

    ओमान के पास रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और टैंकर पर हमला किए जाने की खबर है, जिसके बाद जहाज में आग लग गई. ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि चालक दल सुरक्षित है, जबकि जहाज को हुए नुकसान का तत्काल पता नहीं चल सका है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि करीब 25 लाख बैरल क्षमता वाला सुपरटैंकर ओमान के तट से लगभग 8 किलोमीटर दूर प्रभावित हुआ है. हालांकि, हमले के लिए जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब 29 सितंबर को तीन टैंकरों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी. इससे क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।


    ईरान में एंटी टेररिस्‍ट ऑपरेशन

    ईरान के दक्षिण-पूर्वी शहर जाहेदान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अभियान चलाकर 6 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है. अभियान के दौरान कई विस्फोटक उपकरण भी बरामद किए गए. ईरानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में हाल के हफ्तों में सुरक्षा बलों पर हमलों में वृद्धि हुई है, जिसके बाद आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है. IRGC के करीबी एक ईरानी सूत्र ने अभियान की जानकारी साझा की. हालांकि, मारे गए लोगों की पहचान और उनके किसी संगठन से जुड़े होने के संबंध में तत्काल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. जाहेदान और ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के कुछ हिस्सों में सुरक्षा स्थिति लंबे समय से संवेदनशील रही है. अधिकारियों ने क्षेत्र में सुरक्षा अभियानों और निगरानी को बढ़ाया है।

    अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाते हुए मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करनी शुरू कर दी है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यूएसएस मेकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडी ग्रुप करीब 2,000 मरीन के साथ क्षेत्र की ओर रवाना हुआ है. इस बल में उभयचर अभियानों के लिए प्रशिक्षित 13वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट शामिल है. इसके अलावा यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. इससे क्षेत्र में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की संख्या तीन तक पहुंच सकती है. कुल अमेरिकी सैन्य मौजूदगी में करीब 9,000 अतिरिक्त सैनिक शामिल हो सकते हैं. इसी बीच सऊदी अरब और कतर में ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए दो अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरियां तैनात की गई हैं. यह कदम ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका के बीच उठाया गया है।

  • यूक्रेन पर रूस का मिसाइल-ड्रोन अटैक, बिजली और इंटरनेट केंद्रों को बनाया निशाना

    यूक्रेन पर रूस का मिसाइल-ड्रोन अटैक, बिजली और इंटरनेट केंद्रों को बनाया निशाना

    कीव। रूस ने यूक्रेन पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। बुधवार को यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि रातभर चले हमलों में राजधानी कीव और आसपास के इलाकों को निशाना बनाया गया। हमलों में ऊर्जा ढांचे के साथ एक अहम इंटरनेट केंद्र को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक कीव और उसके उत्तरी बाहरी इलाके में दो महिलाओं और 14 वर्षीय बच्चे समेत कई लोगों की मौत हुई है।

    कीव के मेयर विटाली क्लिचको ने बताया कि शहर के एक गोदाम पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई। वहीं, कीव क्षेत्र के विशहोरोद में एक निजी मकान के मलबे से 14 वर्षीय बच्चे का शव बरामद किया गया। इसी मकान से तीन अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर तकाचेंको के अनुसार, राजधानी और आसपास के इलाकों में कई लोग घायल भी हुए हैं।

    अगस्त के अंत से बढ़े हवाई हमले

    यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, अगस्त के अंत से रूस ने हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ाई है। यह हमले ऐसे समय हो रहे हैं जब यूक्रेन सर्दियों की तैयारी कर रहा है। रूस की ओर से लगातार ऊर्जा संयंत्रों, बिजली सबस्टेशनों और उनसे जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है।

    यूक्रेन की बिजली कंपनी डीटीईके ने नुकसान का विस्तृत आंकड़ा नहीं दिया, लेकिन बताया कि उसके कर्मचारियों ने हमलों के बाद करीब 8,000 घरों में बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी।

    188 ड्रोन और कई मिसाइलें दागने का दावा

    यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर के हमलों में एंटी-शिप और बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ 188 ड्रोन दागे। यूक्रेन का दावा है कि इनमें से पांच मिसाइलों और 155 ड्रोन को रोक दिया गया। बाकी हथियारों में से कुछ अपने निशाने तक पहुंचे।

    रूस ने भी हमलों की पुष्टि की है। उसके रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी सेना ने कीव में सैन्य गतिविधियों से जुड़े एक डेटा सेंटर, कीव क्षेत्र के बिजली संयंत्र, ओडेसा क्षेत्र के एक औद्योगिक परिसर और इजमाइल बंदरगाह की सुविधाओं को निशाना बनाया।

    हालांकि, यूक्रेन ने रूस के इन विशिष्ट दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि कीव के कम से कम चार जिलों में नागरिक इलाके भी हमलों की चपेट में आए।

    जेलेंस्की बोले- ऊर्जा व्यवस्था पर है मुख्य निशाना

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि रूस के हमलों का मुख्य निशाना कीव और उसके आसपास की ऊर्जा व्यवस्था है। उन्होंने इसे मुश्किल हमला बताते हुए कहा कि लगातार हो रहे हमलों से यूक्रेन की वायु रक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

    जेलेंस्की ने उन देशों का भी आभार जताया, जिन्होंने हाल में यूक्रेन को हवाई रक्षा के लिए सहायता उपलब्ध कराई है।

    युद्ध खत्म कराने की कोशिशों के बीच जारी हैं हमले

    रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए साढ़े चार साल से अधिक समय हो चुका है। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूस अमेरिकी प्रयासों के तहत युद्ध समाप्त करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ने को तैयार नहीं है।

    वहीं, रूस का कहना है कि वह सीमित अवधि के युद्धविराम के बजाय व्यापक और स्थायी समझौता चाहता है। रूस की ओर से यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों पर उसके दावे और क्षेत्रीय रियायतों की मांग विवाद का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है, जबकि कीव अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। दोनों पक्षों की अलग-अलग शर्तों के बीच शांति वार्ता में प्रगति नहीं हो सकी है और इसी दौरान हवाई हमले लगातार जारी हैं।

  • TMC विधायक कुणाल घोष की कार पर हुगली में हमला, अंडे फेंके और शीशा तोड़ा; चार महीने में तीसरी घटना

    TMC विधायक कुणाल घोष की कार पर हुगली में हमला, अंडे फेंके और शीशा तोड़ा; चार महीने में तीसरी घटना

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में शनिवार को TMC विधायक कुणाल घोष की कार को भीड़ ने घेर लिया। कुणाल घोष श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की रैली में शामिल होने के लिए जा रहे थे। उत्तरपाड़ा में उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेरकर अंडे फेंके गए। हमले के दौरान कार का पीछे का शीशा भी टूट गया।

    घटना के सामने आए वीडियो में कुणाल घोष ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। कार की पिछली सीट पर भी कुछ लोग मौजूद थे। वीडियो में भीड़ की ओर से विरोध करते हुए ‘गो बैक’ के नारे लगाए जाने की बात सामने आई है। कुछ दृश्यों में कुणाल घोष अंडे फेंकने वाले लोगों के सामने हाथ जोड़ते हुए भी दिखाई दिए।

    हमले के बाद कुणाल घोष ने घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने इसे जंगलराज बताते हुए कहा कि उनकी कार पर पत्थर और अंडे फेंके गए तथा रास्ता रोक दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था। घोष के मुताबिक, वह कोलकाता लौट रहे हैं और लालबाजार या भवानी भवन जाकर शिकायत दर्ज कराएंगे।

    TMC नेताओं ने इस घटना के पीछे BJP के शामिल होने का आरोप लगाया है। पार्टी नेता असित मजूमदार ने कहा कि यह आम लोगों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि पहले से सुनियोजित हमला था। वहीं उत्तरपाड़ा से BJP विधायक दीपांजन चक्रवर्ती ने घटना को लोगों का गुस्सा बताया।

    कुणाल घोष पर पिछले कुछ महीनों में विरोध और हमले की अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। 15 जून को कोलकाता के कालीघाट में ममता बनर्जी के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान उन पर अंडा फेंका गया था। शिकायत के बाद पुलिस ने चंदन सिंह और रवि कोयल को गिरफ्तार किया था। बाद में दोनों को जमानत मिल गई थी।

    इसके अलावा अगस्त में कोलकाता के गरपार इलाके में कुणाल घोष के घर, क्लब और पार्टी ऑफिस में तोड़फोड़ का आरोप लगा था। उस समय वह घर पर मौजूद नहीं थे। घोष ने दावा किया था कि बाहर से लोगों को बुलाकर उन्हें निशाना बनाया गया और पार्टी ऑफिस के बाहर लगे ममता बनर्जी तथा उनके पोस्टर और बैनर फाड़े गए।

    पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ विरोध की कई घटनाओं का भी जिक्र सामने आया है। 28 मई को नॉर्थ 24 परगना में TMC सांसद सौगत रॉय की कार पर अंडे फेंके जाने और नारेबाजी की बात कही गई। 30 मई को सोनारपुर में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अंडे, पत्थर और जूते फेंके जाने का आरोप लगा था। सुरक्षाकर्मियों को उन्हें हेलमेट पहनाकर वहां से निकालना पड़ा था।

    6 जून को मदन मित्रा के काफिले पर अंडे फेंके जाने की घटना सामने आई। इसके बाद युवा नेता सौमित्र बनर्जी और पूर्व मंत्री उदयन गुहा के खिलाफ भी अंडे और जूते फेंके जाने की घटनाएं बताई गईं। 1 जुलाई को कृष्णनगर में TMC सांसद महुआ मोइत्रा पर अंडे, सब्जियां और पत्थर फेंके जाने का आरोप लगा।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कुणाल घोष की ओर से ममता बनर्जी के सुरक्षा घेरे के बावजूद विरोध प्रदर्शन होने पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं मई 2026 में अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा Z+ से घटाकर Z किए जाने और कुणाल घोष की अतिरिक्त सुरक्षा को विधायक स्तर तक सीमित किए जाने की जानकारी दी गई है।