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  • ग्वादर में सैन्य ठिकानों पर हमले का BLF का दावा, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मारने की बात कही

    ग्वादर में सैन्य ठिकानों पर हमले का BLF का दावा, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मारने की बात कही


    बलूचिस्तान।
    पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने ग्वादर में सैन्य ठिकानों और पुलिस स्टेशन पर हमले करने का दावा किया है। संगठन के मुताबिक, ऑपरेशन अलमास के तहत फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) के कैंप और माजानी पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया गया। सैन्य काफिले पर हमले का दावा भी किया गया है। वहीं, पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों ने हमले की कोशिश नाकाम करने और तीन हमलावरों को मार गिराने की जानकारी दी है। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

    FWO कैंप पर कब्जे और झंडा फहराने का दावा

    BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच ने गुरुवार को जारी बयान में ऑपरेशन की जानकारी दी। उनके अनुसार, अभियान में संगठन की विशेष सद्दो ऑपरेशनल बटालियन और अन्य इकाइयां शामिल थीं। BLF का दावा है कि ऑपरेशन की शुरुआत ग्वादर जीरो पॉइंट स्थित फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन के कैंप पर हमले से हुई।

    संगठन ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने सैन्य परिसर पर नियंत्रण हासिल कर वहां अपना झंडा फहराया। BLF के मुताबिक, इस दौरान पाकिस्तान की मिलिट्री इंटेलिजेंस के एक कैप्टन और स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) के कई कर्मियों की मौत हुई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। FWO पाकिस्तानी सेना से जुड़ा सैन्य इंजीनियरिंग संगठन है। यह सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं में काम करता है।

    माजानी पुलिस स्टेशन और सैन्य काफिले को निशाना बनाने का दावा

    BLF ने माजानी पुलिस स्टेशन पर कब्जा करने और वहां से सरकारी हथियार व उपकरण जब्त करने का दावा भी किया है। संगठन के अनुसार, इस झड़प में एक पुलिस अधिकारी की मौत हुई।

    इसके अलावा, BLF ने ग्वादर जिले के गाबद इलाके में सैन्य काफिले पर हमले की जिम्मेदारी ली है। संगठन का दावा है कि हमले में एक सैन्य वाहन नष्ट हुआ और कई सुरक्षाकर्मी मारे गए या घायल हुए। BLF ने गाबद क्रॉस स्थित पुलिस चौकी पर नियंत्रण हासिल करने का दावा भी किया है।

    पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का अलग दावा

    पाकिस्तानी मीडिया संस्थानों जियो न्यूज और डॉन से जुड़ी रिपोर्टों में सुरक्षा सूत्रों के हवाले से अलग जानकारी सामने आई है। पाकिस्तानी पक्ष के अनुसार, सुरक्षा बलों ने एक निर्माण कंपनी के खाली कैंप पर हमले की कोशिश नाकाम कर दी। इस कार्रवाई में तीन हमलावरों के मारे जाने की बात कही गई है। कुछ अन्य संदिग्धों को घेरने की जानकारी भी सामने आई।

    हालांकि, घटनास्थल पर हुई कार्रवाई, हताहतों की संख्या और सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए अहम है ग्वादर

    ग्वादर पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर है। यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का प्रमुख हिस्सा है। इस परियोजना के तहत चीन और पाकिस्तान के बीच व्यापार, परिवहन और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    ऐसे में ग्वादर में सैन्य ठिकानों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमलों के दावे पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्र में चल रही रणनीतिक परियोजनाओं को लेकर चिंता बढ़ा सकते हैं।

    बलूचिस्तान में लंबे समय से जारी है विद्रोह

    बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी विद्रोह चल रहा है। सशस्त्र संगठन पाकिस्तान सरकार पर क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और स्थानीय आबादी के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान सरकार इन संगठनों को आतंकवादी मानती है और उनके खिलाफ सुरक्षा अभियान चलाती है।

    ग्वादर में हालिया घटनाक्रम को लेकर BLF और पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के दावे अलग-अलग हैं। ऐसे में हमले की वास्तविक स्थिति, नुकसान और सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण को लेकर आधिकारिक तथा स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है।

  • ट्रंप की ईरान पर फिर हमले की धमकी, तेहरान की चेतावनी- समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काट देंगे

    ट्रंप की ईरान पर फिर हमले की धमकी, तेहरान की चेतावनी- समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काट देंगे


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई के संकेत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर फिर हमला कर सकता है। इसके जवाब में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल ने दोबारा हमला किया, तो ईरान खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बना सकता है। इससे क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी और वैश्विक कारोबार प्रभावित होने का खतरा है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बनाने की योजना की जानकारी दी है। एक अधिकारी ने कहा कि ईरान पर हमला होने की स्थिति में समुद्र के नीचे की केबल और सैन्य ठिकानों समेत कोई भी जगह सुरक्षित नहीं रहेगी। अधिकारी ने दावा किया कि ईरान की इन केबल तक पहुंच है और वह उन्हें नष्ट कर सकता है।

    ट्रंप बोले- एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकते हैं

    ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान कहा कि अमेरिका एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकता है। यह नाम 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के लिए इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नई कार्रवाई कब और किस तरह की हो सकती है।

    इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका युद्ध को बहुत जल्दी खत्म कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या युद्ध को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए या फिर इसे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने देना चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका के पास संघर्ष खत्म करने की क्षमता है, लेकिन यह फैसला करना बाकी है कि ऐसा कब किया जाए।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही जारी है और अमेरिका को वह सब मिल रहा है, जिसकी उसे जरूरत है।

    ट्रंप पहले भी युद्ध के उद्देश्यों और उसकी समयसीमा को लेकर अलग-अलग बयान दे चुके हैं। इसी महीने उन्होंने कहा था कि अगले महीने होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा। इन चुनावों में अमेरिकी संसद पर नियंत्रण को लेकर फैसला होना है।

    तुर्की और फ्रांस ने नई सैन्य कार्रवाई से किया आगाह

    ईरान पर दोबारा हमले की आशंका के बीच कई देशों ने तनाव कम करने की अपील की है। शुक्रवार को इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के प्रतिनिधियों की बैठक हुई।

    तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि ईरान पर नया हमला तनाव बढ़ा सकता है और युद्ध पूरे क्षेत्र में फैलने का खतरा है। उन्होंने संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति को जरूरी बताया।

    फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने भी नई सैन्य कार्रवाई से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से किसी को फायदा नहीं होगा और इसका तेल की कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न करे।

    होर्मुज के नीचे मौजूद 7 इंटरनेट केबल निशाने पर

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबल को निशाना बना सकता है।

    समुद्र के नीचे बिछी केबल वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके जरिए दुनिया के करीब 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक का संचार होता है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा गुजरता है। इसके बावजूद इस क्षेत्र में कई केबल कटने से इंटरनेट सेवाओं और संचार व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    केबल क्षतिग्रस्त होने पर इंटरनेट की रफ्तार धीमी हो सकती है। इसके अलावा वित्तीय लेनदेन, ऑनलाइन कारोबार और क्लाउड सेवाओं में भी बाधा आने की आशंका है। असर कितना व्यापक होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक नेटवर्क पर कितनी जल्दी भेजा जा सकता है और उन नेटवर्क में कितनी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध है।

    युद्ध की स्थिति में केबल की मरम्मत भी मुश्किल हो सकती है। समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम, बीमा लागत में बढ़ोतरी और मरम्मत के लिए अनुमति मिलने में देरी से बहाली का काम प्रभावित हो सकता है।

    खाड़ी देशों के टेक्नोलॉजी निवेश पर भी खतरा

    खाड़ी के देश तेल पर अपनी निर्भरता कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बड़े केंद्र बनने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे में भारी निवेश कर रहे हैं। अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ उनकी साझेदारी भी बढ़ी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में ईरान के हमलों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में अमेजन वेब सर्विसेज की दो सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी। बहरीन में भी उसकी एक सुविधा के पास बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ था।

    हालांकि, इंटरनेट ट्रैफिक के लिए जमीन के रास्ते वैकल्पिक नेटवर्क मौजूद हैं। खाड़ी देशों की सरकारें और अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए नए बुनियादी ढांचे में निवेश कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक मध्य पूर्व में समुद्र के नीचे और जमीन के रास्ते कनेक्टिविटी पर 40 करोड़ डॉलर से अधिक निवेश करने की योजना बनाई है।

    फिलहाल, अमेरिका की ओर से संभावित नई सैन्य कार्रवाई और ईरान की चेतावनी ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक इंटरनेट और कारोबारी नेटवर्क पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • सऊदी में हूतियों के हमले जारी… तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय को बनाया निशाना

    सऊदी में हूतियों के हमले जारी… तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय को बनाया निशाना


    तेहरान।
    ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) ने रात में सऊदी अरब (Saudi Arabia) की तेल कंपनी अरामको (Oil company Aramco) के मुख्यालय पर हमला किया, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों के दफ्तरों को नुकसान पहुंचा। अधिकारियों ने बताया कि हमले में कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के इस्तेमाल वाली इमारत की सबसे ऊपरी तीन मंजिलें क्षतिग्रस्त हुई हैं। एक अधिकारी के अनुसार, कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का कार्यालय भी हमले की चपेट में आया। इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। हूती विद्रोहियों ने इससे पहले कहा था कि उन्होंने बैलिस्टिक मिसाइल से धहरान को निशाना बनाया, जहां अरामको का मुख्यालय है।

    इससे पहले बुधवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। स्थानीय निवासियों ने इसके लिए पड़ोसी देश यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर आरोप लगाया। हूती विद्रोहियों के एक अधिकारी ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि रूस और चीन समेत कई देशों ने संघर्षविराम समझौते के प्रयासों के तहत उनसे संपर्क किया है। हाल के दिनों में सऊदी अरब के संवेदनशील प्रतिष्ठानों से धुआं उठने की घटनाओं ने क्षेत्र और वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी दबाव बढ़ा है, जिन्होंने कहा है कि वह विचार कर रहे हैं कि अमेरिका को हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के हमलों में शामिल होना चाहिए या नहीं।

    सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बताया कि उसने धहरान की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल, रियाद को निशाना बनाने वाली क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों तथा ड्रोन और प्रिंस सुल्तान एयर बेस एवं सरकारी मिलिट्री इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन वाले खरज की ओर दागी गई एक क्रूज मिसाइल को रोक दिया। हूती विद्रोहियों ने इन हमलों को यमन की राजधानी सना और अन्य विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों पर सऊदी अरब की ”आक्रामकता” का जवाब बताया।

    विद्रोहियों के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को यमन में हुए हमलों में दो लोगों की मौत होने की जानकारी दी और इसके लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। हूती विद्रोही हालिया ईरान युद्ध के एक नए मोर्चे पर सऊदी अरब के हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल प्रतिष्ठानों को बार-बार निशाना बना रहे हैं। रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पिछले एक सप्ताह में कई हमले हुए हैं, जिनमें कम से कम 18 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

    वर्षों तक चले गृहयुद्ध से मजबूत हुए हूती विद्रोही इस समय ईरान के सबसे प्रभावी सशस्त्र सहयोगी माने जा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उनका अपना एजेंडा भी है। इन हमलों से अमेरिका के प्रमुख सहयोगी सऊदी अरब पर दबाव बढ़ रहा है। हूती विद्रोहियों के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों ने संघर्षविराम समझौते के तहत संपर्क किया है।

    उन्होंने कहा कि ओमान ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर वापस लाने की कोशिश की है, जबकि रूस और चीन ने ईरान के माध्यम से प्रयास किए हैं। इस बीच, विद्रोहियों ने हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों पर हमले जारी रखने की चेतावनी दी है। विमानन विश्लेषण कंपनी सिरियम के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में सऊदी अरब के विभिन्न हवाई अड्डों से रवाना होने वाली तीन हजार से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं या उन्हें परिचालन में नहीं बताया गया है।


    सऊदी अरब मिसाइलों को रोकने वाले हथियारों की कमी का सामना कर रहा

    हमलों में तेजी से सऊदी अरब के सामने हूती मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की चुनौती उजागर हुई है। सऊदी अरब ने अमेरिका सहित अपने सहयोगियों से अधिक सैन्य सहायता मांगी है। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हथियारों का दुनिया में सबसे बड़ा खरीदार सऊदी अरब मिसाइलों को रोकने वाले हथियारों की कमी का सामना कर रहा है। इस बीच, सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में हवाई हमले कर रहा है।


    दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए

    हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि मंगलवार को होदेदा प्रांत के रास ईसा बंदरगाह क्षेत्र में हुए हवाई हमले में दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए। मंत्रालय ने कहा कि हमले में सरकारी तेल कंपनी के एक प्रतिष्ठान को निशाना बनाया गया और इसके लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सना में एक तेल प्रतिष्ठान पर भी हमला किया।

  • हूतियों के हमलों से दहला सऊदी… दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी अरामको पर दागी मिसाइल

    हूतियों के हमलों से दहला सऊदी… दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी अरामको पर दागी मिसाइल


    नई दिल्ली।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) और यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के बीच छिड़ा संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. मंगलवार देर रात सऊदी अरब के पूर्वी शहर धहरान (Dharan) में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ (World’s Largest oil company, ‘Saudi Aramco’) के प्रशासनिक परिसर को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया गया. सऊदी सरकारी समाचार एजेंसी एसपीए ने बुधवार को ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले के बाद इमारत में आग लगी, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि मिसाइल हमले में ऑफिस बिल्डिंग की ऊपरी तीन मंजिलों को नुकसान पहुंचा. सूत्र और मामले से परिचित दो अन्य लोगों ने इमारत में आग लगने की जानकारी दी. हालांकि, हमले की जिम्मेदारी को लेकर उपलब्ध रिपोर्ट में स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

    अरामको का यह परिसर कंपनी के एक प्रमुख संचालन केंद्र के रूप में काम करता है. दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल अरामको सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था का अहम आधार है. इसके संचालन नेटवर्क में तेल के कुएं, पाइपलाइन, रिफाइनरी और निर्यात टर्मिनल शामिल हैं।


    रियाद समेत कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन नष्ट करने का दावा

    सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि धहरान के ऊपर रोकी गई एक मिसाइल के टुकड़े आवासीय इलाके में गिरे. हालांकि, इससे हुए नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई. अधिकारियों ने रियाद और देश के दक्षिणी हिस्से में भी मिसाइलों तथा ड्रोन को रोककर नष्ट करने की जानकारी दी।

    इससे पहले मंगलवार को सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हूतियों को बार-बार हमले करने के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी.

    रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह से हूती विद्रोही सऊदी अरब के अहम ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं. इनमें राजधानी रियाद का हवाई अड्डा भी शामिल है. शनिवार को रियाद हवाई अड्डे पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले में 13 लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी. रिपोर्ट इसे पिछले एक दशक में सऊदी अरब पर हुआ सबसे घातक हमला बताती है. लगातार हमलों के कारण देश में उड़ान सेवाएं भी प्रभावित हुईं. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया, जब सऊदी अरब में एक बड़े ऊर्जा सम्मेलन का आयोजन हो रहा था।


    हूतियों ने पहले ही अरामको को दी थी धमकी

    धहरान पर हमले से पहले हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने यमन की राजधानी सना पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हमलों के जवाब में ‘कड़ी और दर्दनाक’ कार्रवाई की चेतावनी दी थी. उनके मुताबिक, संभावित निशानों में धहरान स्थित अरामको मुख्यालय और रियाद की एक तेल रिफाइनरी शामिल थे.हूतियों ने सऊदी अरब में तेल क्षेत्र के कर्मचारियों को भी उन ठिकानों से दूर रहने की चेतावनी दी थी, जिन्हें वे संभावित लक्ष्य मानते हैं।


    सना में तेल डिपो पर भी हमला

    हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सऊदी अरब सना पर हमले कर रहा है. दूसरी ओर, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित एक तेल डिपो से नागरिकों को दूर रहने की चेतावनी दी. हूती संचालित अल-मसीरा टेलीविजन ने बताया कि गठबंधन ने यमन पेट्रोलियम कंपनी के सबाह केंद्रीय स्टेशन को निशाना बनाया. यह ईंधन डिपो सना के बाहर स्थित है. गठबंधन ने स्टेशन और अन्य ठिकानों पर हमले की पुष्टि की. उसका कहना था कि कार्रवाई का उद्देश्य हूतियों की सऊदी अरब, यमन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खतरा पहुंचाने की क्षमता को कमजोर करना था।

  • जेलेंस्की पर भड़के ट्रंप, बोले- यूक्रेन को चुन लेना चाहिए नया राष्ट्रपति, रूस की रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज

    जेलेंस्की पर भड़के ट्रंप, बोले- यूक्रेन को चुन लेना चाहिए नया राष्ट्रपति, रूस की रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज


    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं। ट्रंप ने जेलेंस्की की आलोचना करते हुए कहा है कि यूक्रेन को अब नया राष्ट्रपति चुन लेना चाहिए। उनका आरोप है कि जेलेंस्की के पास रूस के साथ समझौता करने के कई अवसर थे, लेकिन उन्होंने इन मौकों का लाभ नहीं उठाया।

    ट्रंप की नाराजगी खास तौर पर रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों को लेकर है। उनका मानना है कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने से ईंधन की वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस की ओर से यूक्रेन पर हमले जारी हैं और रूस से डीजल खरीदने की अमेरिकी योजना भी विवाद का विषय बनी हुई है।

    ‘ऐसा नेता चाहिए, जो रूस से समझौता कर सके’

    ट्रंप पहले भी जेलेंस्की को रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की सलाह दे चुके हैं। उनका तर्क है कि ऐसे हमलों से युद्ध समाप्त करने की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

    ट्रंप का आरोप है कि जेलेंस्की ने रूस के साथ समझौता करने के कई मौके गंवा दिए। अब उन्होंने यूक्रेन में ऐसे नेतृत्व की जरूरत बताई है, जो रूस के साथ बातचीत कर किसी समझौते तक पहुंच सके। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त कराने को लेकर अमेरिका की भूमिका और जेलेंस्की के नेतृत्व पर ट्रंप की नाराजगी फिर चर्चा में आ गई है।

    रूस के हमलों में 20 लोगों की मौत का दावा

    इस बीच यूक्रेन पर रूस के हमले लगातार जारी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को जापोरिज्जिया क्षेत्र में रूसी हवाई हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल बताए गए हैं, जबकि 18 लोग घायल हुए हैं।

    रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव को भी मिसाइल हमले से निशाना बनाया। इस हमले में चार लोगों के घायल होने की खबर है। रूस के हमलों में रिहायशी इलाकों और शहरों के साथ ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। लगातार हो रहे हमलों के बीच युद्धविराम और बातचीत की संभावनाएं अब भी चुनौती बनी हुई हैं।

    रूस से डीजल खरीदने की अमेरिकी योजना पर विवाद

    ट्रंप ने शुक्रवार को रूस से डीजल खरीदने से जुड़े समझौते का ऐलान किया था। उनके मुताबिक, रूस अमेरिका को तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और आगे भी बड़ी मात्रा में डीजल उपलब्ध कराने की योजना बताई गई।

    इस फैसले को लेकर यूक्रेन ने चिंता जताई है। उसकी आशंका है कि रूस को ऊर्जा उत्पाद बेचकर मिलने वाली कमाई युद्ध जारी रखने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। इस वजह से अमेरिकी योजना पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अमेरिका पहले रूस पर आर्थिक दबाव बनाने और प्रतिबंधों के जरिए उसकी युद्ध क्षमता सीमित करने की नीति का समर्थन करता रहा है।

    यूरोपीय देशों को भी रूस की ऊर्जा कमाई पर चिंता

    रूस से डीजल खरीदने की योजना को लेकर यूरोप के कुछ देशों ने भी चिंता जताई है। स्वीडन ने कहा है कि ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली कमाई रूस के युद्ध खर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं, जर्मनी ने रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को जारी रखने की बात कही है।

    इस पूरे विवाद में ट्रंप का जोर रूस और यूक्रेन के बीच समझौता कराने पर है। इसके विपरीत, जेलेंस्की का रुख रहा है कि रूस पर दबाव कम करने से उसके हमले रुकने के बजाय और बढ़ सकते हैं। रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों, अमेरिकी डीजल खरीद योजना और युद्ध समाप्त करने के तरीके को लेकर दोनों पक्षों के बीच यही मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं।

  • सऊदी अरब पर हूतियों के हमले जारी…. मक्का के बाद अब मदीना में पावर स्टेशन पर अटैक…

    सऊदी अरब पर हूतियों के हमले जारी…. मक्का के बाद अब मदीना में पावर स्टेशन पर अटैक…


    दुबई।
    मुसलमानों (Muslims) के सबसे पवित्र स्थलों में से एक मक्का (Mecca) पर हमले के बाद अब सऊदी अरब (Saudi Arabia) के मदीना (Medina) पर हमले की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यमन के हूती विद्रोहियों ने मदीना (Medina) पर एक बड़ा हमला किया है। सऊदी की सैन्य गठबंधन ने बताया है कि हमला मदीना स्थित ताइबा पावर डिस्ट्रीब्यूशन स्टेशन (Taiba Power Distribution Station) पर हुआ और हूती विद्रोहियों ने इसे ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। अहम बात यह है कि यह पावर स्टेशन सीधे तौर पर ‘मस्जिद-ए-नबवी’ मस्जिद को बिजली की आपूर्ति करता है।

    सऊदी सेना के एक प्रवक्ता ने सोशल मीडिया एक्स पर हमले का आरोप लगाया है। पर उन्होंने बताया कि यह हमला बीते मंगलवार को हुआ। ड्रोन हमले में एक ट्रांसफार्मर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि, पावर नेटवर्क को तुरंत बहाल कर दिया गया और इसलिए बिजली सेवा पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।


    दोनों पवित्र मस्जिदों पर हमले की कोशिश

    सऊदी की गठबंधन ने हूती विद्रोहियों के इस कदम की कड़ी निंदा की है। प्रवक्ता अल-मल्की ने कहा कि यह हमला दोनों पवित्र मस्जिदों को निशाना बनाने की कोशिशों का हिस्सा है। गौरतलब है कि इससे पहले बीते महीने हुती विद्रोहियों द्वारा मक्का को भी निशाना बनाने की खबरें सामने आई थीं। कथित तौर पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की और ड्रोन हमले किए। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया था। भारत समेत कई देशों ने इस हमले की कड़ी निंदा की थी।


    बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की खबर

    मदीना हमले के अलावा, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अन्य हिस्सों पर भी ताबड़तोड़ हमले किए हैं। बीते गुरुवार को सऊदी की एयर डिफेंस सिस्टम ने लाल सागर तट के पास खमिस मुशैत और जाज़ान में दो बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया। सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक खमिस मुशैत में मिसाइल और ड्रोन के मलबे गिरने के कारण कई इमारतों और वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है।


    आतंक मचा रहे हूती

    हूती विद्रोहियों के इन बढ़ते हमलों ने क्षेत्र में तनाव भड़का दिया है। समूह ने यमन में लाल सागर की तटरेखा और रणनीतिक रूप से बेहद अहम बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के द्वीपों पर लगभग नियंत्रण कर लिया है। हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका और ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज पहले से ही ठप पड़ा है। ऐसे में वैश्विक तेल आपूर्ति दबाव में है। अब बाब अल-मंडेब पर हमलों से मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

  • सऊदी अरब में हूती के हमलों के बाद US में बड़ा अलर्ट… यात्रा के लिए अनुमति लेना अनिवार्य

    सऊदी अरब में हूती के हमलों के बाद US में बड़ा अलर्ट… यात्रा के लिए अनुमति लेना अनिवार्य


    वाशिंगटन।
    यमन (Yemen) के हूती समूह (Houthi Group) के मिसाइल और ड्रोन हमलों (Missile- Drone Attacks) के बाद सऊदी अरब (Saudi Arabia) में सुरक्षा को लेकर अमेरिका ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। अमेरिकी मिशन ने सऊदी अरब में काम कर रहे अपने सरकारी कर्मचारियों को ताइफ और यनबू शहरों की यात्रा के लिए विशेष अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम सरकारी काम के साथ-साथ निजी यात्रा पर भी लागू होगा। अमेरिकी मिशन ने कहा कि यह फैसला मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए लिया गया है। साथ ही सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।


    हूतियों ने सऊदी अरब को कैसे निशाना बनाया?

    यह अमेरिकी अलर्ट ऐसे समय आया है जब हूती समूह ने सऊदी अरब की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इनमें राजधानी रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि मिसाइल को रास्ते में ही रोक दिया गया। गठबंधन ने बिश, ताइफ, फरासन और यनबू में नागरिक आबादी और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिशों की भी जानकारी दी है। रियाद में एयरपोर्ट के पास विस्फोट और धुएं का बड़ा गुबार दिखाई देने की खबर भी सामने आई, हालांकि सऊदी अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में किसी के हताहत होने या नुकसान की सूचना नहीं है।


    अमेरिका ने सऊदी अरब में रहने वाले नागरिकों को क्या कहा?

    अमेरिकी मिशन ने अपने नागरिकों से सतर्क रहने, स्थानीय मीडिया और सरकारी घोषणाओं पर नजर रखने तथा फोन चार्ज रखने को कहा है। हवाई हमले की स्थिति में लोगों को खिड़कियों और कांच के दरवाजों से दूर रहने की सलाह दी गई है। अमेरिका ने लोगों से प्रदर्शन और बड़ी भीड़ से बचने तथा ऐसे स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने को भी कहा है, जिन्हें सार्वजनिक रूप से अमेरिका से जुड़ा माना जाता है। अमेरिकी विदेश विभाग सऊदी अरब के लिए फिलहाल लेवल-3 ‘यात्रा पर पुनर्विचार करें’ की सलाह दे रहा है। इसमें ड्रोन और मिसाइल हमलों, सशस्त्र संघर्ष और आतंकवाद का खतरा बताया गया है।


    ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को क्या चेतावनी दी?

    सऊदी अरब पर हमलों के बीच ईरान ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी सैन्य केंद्रीय कमान ने रविवार को सरकारी मीडिया पर कहा कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी कोई नया बड़ा हमला करते हैं तो ईरान अमेरिका के खिलाफ लगातार जवाबी कार्रवाई करेगा। ईरान ने यह भी कहा कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के सहयोगियों को संघर्ष का पक्ष माना जाएगा। हालांकि, ईरान ने उस कथित हमले की कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी, जिसकी तैयारी होने की बात उसने कही है।


    कतर ने हूती हमलों पर क्या कहा?

    कतर ने रियाद को निशाना बनाकर किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमले और बिश, ताइफ, फरासन तथा यनबू में नागरिक आबादी और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिशों की कड़ी निंदा की है। कतर के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को सऊदी अरब की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई है। इस बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया की यात्रा करने या वहां से गुजरने वाले अपने नागरिकों को भी सतर्क रहने को कहा है। अमेरिकी चेतावनी में उड़ानें रद्द होने और हवाई क्षेत्र बंद होने जैसी संभावित परेशानियों का भी जिक्र किया गया है।

  • सागर जहरीली शराब कांड पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, पूछा- 20 साल से BJP की सत्ता, जवाबदेही कब तय होगी?

    सागर जहरीली शराब कांड पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, पूछा- 20 साल से BJP की सत्ता, जवाबदेही कब तय होगी?


    सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की। राहुल गांधी ने कहा कि मध्य प्रदेश में जहरीली दवा, शराब और दूषित पानी से लोगों की जान जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन 20 साल से अधिक समय से सत्ता में रहने वाली भाजपा सरकार इनसे सबक लेने और रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने में नाकाम रही है।
    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में शासन व्यवस्था कमजोर हो गई है। उन्होंने सागर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जहरीली शराब ने कई परिवारों को उजाड़ दिया, लेकिन ऐसी घटनाओं के बाद एक जैसी कार्रवाई दोहराई जाती है—कुछ गिरफ्तारियां, कुछ अधिकारियों का निलंबन और जांच के आदेश। उनके मुताबिक, यह पहली बार नहीं हुआ है।

    इंदौर के दूषित पानी और जहरीली कफ सिरप का भी किया जिक्र

    राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में हाल की अन्य घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा पिछले साल जहरीली कफ सिरप से कई छोटे बच्चों की जान जाने का भी उन्होंने जिक्र किया।

    उन्होंने सवाल उठाया कि जहरीली दवा, शराब और पानी से जुड़ी घटनाओं के बाद नए कानून और नियम बनाए जाते हैं, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं होता। राहुल गांधी ने कहा कि व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है, ताकि अगली घटना होने का इंतजार न करना पड़े।

    ‘छोटे कर्मचारियों तक सीमित न रहे कार्रवाई’

    राहुल गांधी ने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार को 20 साल से ज्यादा समय हो चुका है। उन्होंने सवाल किया कि हादसों की रोकथाम के लिए ठोस व्यवस्था क्यों नहीं बन पाई और हर घटना के बाद होने वाली कार्रवाई में जवाबदेही किस स्तर तक तय की जाती है।

    उन्होंने सागर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि मौतों की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उनका कहना है कि कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जांच में जिस किसी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

    अब तक 15 मौतें, 14 आरोपी गिरफ्तार

    पुलिस के मुताबिक सागर जिले में जहरीली शराब त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। इलाज के दौरान दो और पीड़ितों की मौत होने के बाद यह आंकड़ा बढ़ा। पुलिस ने बताया कि मामले में कुल 30 आरोपियों में से अब तक 14 को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

    इससे पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सागर जिले के बांदा क्षेत्र में जहरीली शराब से कई परिवार तबाह हो गए हैं और वे न्याय की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर अपनी जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी प्रभावित परिवारों में से कुछ से मुलाकात की थी।

  • बलूचिस्तान में BLA का 22 हमलों का दावा, आठ दिन में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को मारने की बात कही

    बलूचिस्तान में BLA का 22 हमलों का दावा, आठ दिन में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को मारने की बात कही

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने सुरक्षा बलों के खिलाफ अपने अभियान को लेकर बड़ा दावा किया है। संगठन ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि उसके लड़ाकों ने पिछले आठ दिनों के दौरान प्रांत के अलग-अलग हिस्सों में 22 हमले किए। इन कार्रवाइयों में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा किया गया है।

    बीएलए के अनुसार, उसके निशाने पर पाकिस्तानी सेना, पुलिस चौकियां, सुरक्षा बलों के काफिले और सरकार समर्थित कथित हथियारबंद समूह रहे। संगठन ने सुरक्षा प्रतिष्ठानों के अलावा पुलों और कुछ व्यावसायिक वाहनों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही है। हालांकि, संगठन द्वारा बताए गए हताहतों और हमलों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

    बीएलए ने दावा किया कि कलात और सूरब क्षेत्रों में किए गए आईईडी हमलों में 20 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। इसके अलावा चगाई, खारन और पंजगुर में पुलिस तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। संगठन के अनुसार, अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान सुरक्षा बलों से जुड़े वाहनों और अन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए।

    संगठन ने एक कथित सदस्य को जिंदा पकड़े जाने का भी दावा किया है। इसके अलावा बीएलए की ओर से सुरक्षा बलों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नौ वाहनों को नष्ट किए जाने की बात कही गई है। इन दावों को संगठन ने अपने व्यापक सशस्त्र अभियान का हिस्सा बताया है।

    बलूचिस्तान में बीएलए लंबे समय से पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ सशस्त्र अभियान चला रहा है। संगठन अलग बलूच राष्ट्र की मांग को लेकर सक्रिय है और समय-समय पर सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों, परिवहन मार्गों तथा आर्थिक परियोजनाओं को निशाना बनाने का दावा करता रहा है। क्षेत्र में लंबे समय से जारी राजनीतिक असंतोष, संसाधनों पर अधिकार और विकास से जुड़े मुद्दे भी इस संघर्ष की पृष्ठभूमि में रहे हैं।

    हालिया घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अगस्त की शुरुआत में भी प्रांत के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा अभियानों और हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आई थीं। 12 अगस्त को सूरब जिले में एक कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 10 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया था, जबकि उसी दिन एक कार बम समय से पहले फटने की घटना में नागरिकों और विस्फोटक तैयार कर रहे लोगों की मौत हुई थी।

    बीएलए के ताजा दावों में कलात, सूरब, चगाई, खारन और पंजगुर जैसे इलाकों का उल्लेख किया गया है। इन क्षेत्रों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों और आवागमन से जुड़े ढांचे पर हमलों की खबरें बलूचिस्तान में सक्रिय उग्रवादी गतिविधियों की व्यापकता को रेखांकित करती हैं।

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। लंबे समय से चल रहे अलगाववादी संघर्ष के कारण यहां सुरक्षा व्यवस्था पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। बीएलए की ओर से लगातार हमलों के दावे के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर प्रांत में निगरानी और अभियान बढ़ाने का दबाव भी बढ़ रहा है।

    हालांकि, किसी भी संघर्ष क्षेत्र में किसी संगठन द्वारा जारी किए गए हताहतों के आंकड़ों को स्वतंत्र पुष्टि के बिना अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। इसलिए 22 हमलों और 26 सुरक्षाकर्मियों की मौत से जुड़े बीएलए के दावों की पुष्टि होने तक इन्हें संगठन के दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।

  • राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, घायल छात्र को दिखाकर उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

    राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, घायल छात्र को दिखाकर उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल


    नई दिल्ली । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को अपने आवास 10 जनपथ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीट पेपर लीक मामले और छात्रों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक छात्र को मीडिया के सामने पेश किया और उसकी चोटें दिखाते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

    राहुल गांधी ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की स्थिति के लिए मंत्री जिम्मेदार हैं और इसी कारण हजारों छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं।

    घायल छात्र की चोटें दिखाईं
    प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने छात्र के हाथ, पीठ और छाती पर लगी चोटों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहा था, तभी पैलेट गन से घायल हो गया।

    20 जुलाई की झड़प का मामला
    गौरतलब है कि 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा निकाले गए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस घटना में 100 से अधिक छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

    छात्र की आंख की रोशनी पर संकट
    राहुल गांधी के साथ मौजूद छात्र की पहचान साहिल लोचाब (19) के रूप में हुई, जो दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ का निवासी है। परिवार के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पैलेट लगने से उसकी दाहिनी आंख गंभीर रूप से घायल हो गई। उसका उपचार एम्स के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में हुआ, जहां सर्जरी भी की गई। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया है कि घायल आंख की रोशनी लौटने की संभावना करीब एक प्रतिशत ही है, क्योंकि आंख की पुतली को गंभीर क्षति पहुंची है।

    पुलिस अधिकारी बनने का था सपना
    साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) का छात्र है। उसकी मां ज्योति ने बताया कि वह पहले भी CJP के प्रदर्शनों में शामिल हो चुका था। 20 जुलाई को भी वह यह कहकर घर से निकला था कि यह उसकी पढ़ाई और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने बताया कि साहिल का सपना पुलिस अधिकारी बनने का था।