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  • बलूचिस्तान में BLA का 22 हमलों का दावा, आठ दिन में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को मारने की बात कही

    बलूचिस्तान में BLA का 22 हमलों का दावा, आठ दिन में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को मारने की बात कही

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने सुरक्षा बलों के खिलाफ अपने अभियान को लेकर बड़ा दावा किया है। संगठन ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि उसके लड़ाकों ने पिछले आठ दिनों के दौरान प्रांत के अलग-अलग हिस्सों में 22 हमले किए। इन कार्रवाइयों में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा किया गया है।

    बीएलए के अनुसार, उसके निशाने पर पाकिस्तानी सेना, पुलिस चौकियां, सुरक्षा बलों के काफिले और सरकार समर्थित कथित हथियारबंद समूह रहे। संगठन ने सुरक्षा प्रतिष्ठानों के अलावा पुलों और कुछ व्यावसायिक वाहनों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही है। हालांकि, संगठन द्वारा बताए गए हताहतों और हमलों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

    बीएलए ने दावा किया कि कलात और सूरब क्षेत्रों में किए गए आईईडी हमलों में 20 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। इसके अलावा चगाई, खारन और पंजगुर में पुलिस तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। संगठन के अनुसार, अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान सुरक्षा बलों से जुड़े वाहनों और अन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए।

    संगठन ने एक कथित सदस्य को जिंदा पकड़े जाने का भी दावा किया है। इसके अलावा बीएलए की ओर से सुरक्षा बलों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नौ वाहनों को नष्ट किए जाने की बात कही गई है। इन दावों को संगठन ने अपने व्यापक सशस्त्र अभियान का हिस्सा बताया है।

    बलूचिस्तान में बीएलए लंबे समय से पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ सशस्त्र अभियान चला रहा है। संगठन अलग बलूच राष्ट्र की मांग को लेकर सक्रिय है और समय-समय पर सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों, परिवहन मार्गों तथा आर्थिक परियोजनाओं को निशाना बनाने का दावा करता रहा है। क्षेत्र में लंबे समय से जारी राजनीतिक असंतोष, संसाधनों पर अधिकार और विकास से जुड़े मुद्दे भी इस संघर्ष की पृष्ठभूमि में रहे हैं।

    हालिया घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अगस्त की शुरुआत में भी प्रांत के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा अभियानों और हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आई थीं। 12 अगस्त को सूरब जिले में एक कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 10 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया था, जबकि उसी दिन एक कार बम समय से पहले फटने की घटना में नागरिकों और विस्फोटक तैयार कर रहे लोगों की मौत हुई थी।

    बीएलए के ताजा दावों में कलात, सूरब, चगाई, खारन और पंजगुर जैसे इलाकों का उल्लेख किया गया है। इन क्षेत्रों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों और आवागमन से जुड़े ढांचे पर हमलों की खबरें बलूचिस्तान में सक्रिय उग्रवादी गतिविधियों की व्यापकता को रेखांकित करती हैं।

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। लंबे समय से चल रहे अलगाववादी संघर्ष के कारण यहां सुरक्षा व्यवस्था पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। बीएलए की ओर से लगातार हमलों के दावे के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर प्रांत में निगरानी और अभियान बढ़ाने का दबाव भी बढ़ रहा है।

    हालांकि, किसी भी संघर्ष क्षेत्र में किसी संगठन द्वारा जारी किए गए हताहतों के आंकड़ों को स्वतंत्र पुष्टि के बिना अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। इसलिए 22 हमलों और 26 सुरक्षाकर्मियों की मौत से जुड़े बीएलए के दावों की पुष्टि होने तक इन्हें संगठन के दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।

  • राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, घायल छात्र को दिखाकर उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

    राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, घायल छात्र को दिखाकर उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल


    नई दिल्ली । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को अपने आवास 10 जनपथ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीट पेपर लीक मामले और छात्रों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक छात्र को मीडिया के सामने पेश किया और उसकी चोटें दिखाते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

    राहुल गांधी ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की स्थिति के लिए मंत्री जिम्मेदार हैं और इसी कारण हजारों छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं।

    घायल छात्र की चोटें दिखाईं
    प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने छात्र के हाथ, पीठ और छाती पर लगी चोटों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहा था, तभी पैलेट गन से घायल हो गया।

    20 जुलाई की झड़प का मामला
    गौरतलब है कि 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा निकाले गए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस घटना में 100 से अधिक छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

    छात्र की आंख की रोशनी पर संकट
    राहुल गांधी के साथ मौजूद छात्र की पहचान साहिल लोचाब (19) के रूप में हुई, जो दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ का निवासी है। परिवार के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पैलेट लगने से उसकी दाहिनी आंख गंभीर रूप से घायल हो गई। उसका उपचार एम्स के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में हुआ, जहां सर्जरी भी की गई। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया है कि घायल आंख की रोशनी लौटने की संभावना करीब एक प्रतिशत ही है, क्योंकि आंख की पुतली को गंभीर क्षति पहुंची है।

    पुलिस अधिकारी बनने का था सपना
    साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) का छात्र है। उसकी मां ज्योति ने बताया कि वह पहले भी CJP के प्रदर्शनों में शामिल हो चुका था। 20 जुलाई को भी वह यह कहकर घर से निकला था कि यह उसकी पढ़ाई और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने बताया कि साहिल का सपना पुलिस अधिकारी बनने का था।

  • सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 'उन्हें जिन्ना पसंद, हमें गन्ना'; विकास परियोजनाओं की दी सौगात

    सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 'उन्हें जिन्ना पसंद, हमें गन्ना'; विकास परियोजनाओं की दी सौगात


    बिजनौर/शामली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को शामली और बिजनौर का दौरा कर कई विकास परियोजनाओं की सौगात दी। शामली में उन्होंने 617.70 करोड़ रुपये की लागत वाली 90 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जबकि बिजनौर में जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला और प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख किया।

    ‘समाज को बांटने वालों से रहें सतर्क’
    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ राजनीतिक दल जाति और वर्ग के आधार पर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे तत्वों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता समाज को जोड़ना, सामाजिक समरसता को मजबूत करना और सभी वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

    बिजनौर-चांदपुर के लिए करीब 1000 करोड़ की परियोजनाएं
    सीएम योगी ने कहा कि महात्मा विदुर की धरती बिजनौर लगातार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि बिजनौर और चांदपुर विधानसभा क्षेत्रों के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा रहा है।

    विस्थापित परिवारों का भी किया जिक्र
    मुख्यमंत्री ने अपने पिछले दौरे को याद करते हुए कहा कि पड़ापुर क्षेत्र में पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए करीब 3000 विस्थापित लोगों को जमीन के पट्टे दिए गए थे। उन्होंने कहा कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे इन परिवारों को सरकार ने अधिकार दिलाने का काम किया है।

    2017 से पहले की कानून-व्यवस्था पर साधा निशाना
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले बिजनौर में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी और अपराधियों व माफिया का प्रभाव था। उन्होंने दावा किया कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के चलते अब जिले में कानून का राज स्थापित हुआ है और विकास कार्यों को गति मिली है।

    इसी दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “कुछ लोग ऐसा बिजनौर चाहते थे, जहां गुंडों और माफियाओं का कब्जा हो। वे समाज को बांटने की राजनीति करते हैं। उन्हें जिन्ना पसंद है, लेकिन हमें गन्ना पसंद है। हमारी सरकार की प्राथमिकता गन्ना किसानों का हित और गन्ने का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करना है।”

    गंगा एक्सप्रेसवे हरिद्वार तक बढ़ाने की घोषणा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार हरिद्वार तक किया जाएगा, जिससे बिजनौर सहित आसपास के क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिलेगा।

    बिजनौर में बनेगा नर्सिंग कॉलेज
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के बाद अब बिजनौर में नर्सिंग कॉलेज का निर्माण भी तेजी से कराया जा रहा है। इससे जिले की बेटियों को नर्सिंग की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर शिक्षा के साथ रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।

  • US: ट्रंप के डिनर हमले को लेकर नया खुलासा, हमलावर ने गोलीबारी से पहले परिवार को भेजा था मैसेज

    US: ट्रंप के डिनर हमले को लेकर नया खुलासा, हमलावर ने गोलीबारी से पहले परिवार को भेजा था मैसेज


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के डिनर कार्यक्रम (Dinner program) में हुए हमले को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं। हमलावर ने गोलीबारी करने के कुछ मिनट पहले अपने परिवार को एक संदेश भेजा था। इसमें उसने हमला करने की वजह को भी लिखा था। इस संदेश के मुताबिक काश पटेल को छोड़कर ट्रंप प्रशासन की पूरी टीम उसके निशाने पर थी।

    न्यूयॉर्क पोस्ट ने हमलावर एलन के द्वारा परिवार को भेजे गए इस मैसेज को प्रकाशित किया है। इस मैसेज में वह साफ तौर पर कहता हुआ नजर आता है कि काश पटेल को छोड़कर ट्रंप प्रशासन के सभी अधिकारी मेरे निशाने पर हैं। उसने लिखा, “मैं अब यह और स्वीकार करने को तैयार नहीं हूं कि एक पीडोफाइल, बलात्कारी और गद्दार मेरे हाथों को उसके अपराधों से रंगे।” कथित तौर पर इस मैसेज में एलन ने सीधे तौर पर ट्रंप का नाम नहीं लिया। लेकिन ट्रंप का नाम यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ लगातार जोड़ा जाता रहा है। ऐसे में संभव है कि वह ट्रंप की ही बात कर रहा हो।

    न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा देखे गए इस मैसेज में कोल ने लिखा, “ट्रंप प्रशासन के सभी अधिकारी, पटेल को छोड़कर मेरे निशाने पर हैं। और उन्हें इसमें उनके पद के अनुसार प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही उसने यह भी लिखा कि संयुक्त राज्य सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स को केवल जरूरत पड़ने पर ही निशाना बनाया जाएगा। अगर वह नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं करते हैं, तो उन्होंने गैर घातक तरीके से रास्ते से हटाया जाएगा।


    होटल की सुरक्षा पर भी बात

    हमले के ठीक पहले परिवार को भेजे गए इस मैसेज में एलन ने होटल में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था के बारे में भी लिखा। उसने लिखा कि यहां कि सुरक्षा व्यवस्था केवल प्रदर्शनकारियों को रोकने तक ही सीमित थी। उसने लिखा, “मैं कई हथियारों के साथ अंदर चला जाता हूँ और वहाँ कोई भी यह नहीं सोचता कि मैं खतरा हो सकता हूं।” एलन ने अंत में संभावित तौर पर ट्रंप को निशाना बनाते हुए लिखा, “इस स्तर पर ऐसी अक्षमता पागलपन हैं। मैं ईमानदारी के साथ उम्मीद करता हूं कि जब इस देश को वास्तव में सक्षम नेतृत्व मिलेगा, तब तक इसे सुधार लिया जाएगा।”

    इससे पहले, रविवार को एक वाइट हाउस की तरफ से होटल में आयोजित इस डिनर में लगभग अमेरिकी प्रशासन के सभी बड़े लोग मौजूद थे। उसी वक्त वहां पर गोलियों की आवाज सुनाई दी। हमला होने का संकेत मिलते हैं वहां पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने सभी राजनेताओं और उनके साथियों को वहां से बाहर निकाल दिया। हमलावर कोल एलन को भी गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में इस हमले को लेकर ट्रंप ने कहा कि हमलावर में ईसाइयों को लेकर नफरत भरी हुई है।

    बता दें, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप के ऊपर जानलेवा हमला करने की कोशिश हुई हो। 2024 में चुनावी रैली के दौरान भी ट्रंप के ऊपर हमला हुआ था। इस हमले में गोली ट्रंप के कान को घायल करती हुई निकल गई थी। इसके कुछ समय बाद ट्रंप के घर के बाहर भी हमला हुआ था। और अब यह तीसरी बार उनके ऊपर जानलेवा हमला करने की कोशिश हुई है।

  • परमाणु ठिकानों पर हमलों से बढ़ा खतरा, डब्ल्यूएचओ ने दी गंभीर चेतावनी

    परमाणु ठिकानों पर हमलों से बढ़ा खतरा, डब्ल्यूएचओ ने दी गंभीर चेतावनी


    जिनेवा।
    अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर किए हमले से पश्चिम एशिया में संकट की स्थिति बनी हुई है। इस बीच ईरान के परमाणु ठिकानों पर हो रहे हमलों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।

    डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने बताया कि नतांज एनरिचमेंट कॉम्प्लेक्स और डिमोना जैसे संवेदनशील परमाणु स्थलों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी इन घटनाओं की जांच कर रही है। फिलहाल किसी तरह के रेडिएशन स्तर में वृद्धि के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    टेड्रोस ने चेतावनी दी कि परमाणु ठिकानों को निशाना बनाना बेहद खतरनाक है, क्योंकि इससे बड़े पैमाने पर जनस्वास्थ्य संकट और पर्यावरणीय नुकसान हो सकता है। अगर ऐसे हमले जारी रहते हैं, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

    डब्ल्यूएचओ ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से 13 देशों में अपने स्टाफ और संयुक्त राष्ट्र के कर्मियों को संभावित न्यूक्लियर आपात स्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

    डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई में संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और मौजूदा संकट का समाधान केवल शांति और संवाद के जरिए ही संभव है।

  • ईरान के राष्ट्रपति ने PM मोदी से की अमेरिका-इजरायल को हमला करने से रोकेने की अपील

    ईरान के राष्ट्रपति ने PM मोदी से की अमेरिका-इजरायल को हमला करने से रोकेने की अपील


    तेहरान।
    मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष (Middle East Conflict) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन (Iranian President Masoud Pezeshkian) से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मार्ग को सुरक्षित रखने की भी अपील की। ईरान के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के समक्ष विदेशी हस्तक्षेप के बिना क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने के लिए पश्चिम एशियाई देशों को शामिल करते हुए एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

    वार्ता के ईरानी ब्योरे के अनुसार, पेजेश्कियन ने भारत से आग्रह किया कि वह ब्रिक्स (BRICS) के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की शत्रुता को रोकने के लिए अपनी स्वतंत्र भूमिका का लाभ उठाए।

    आपको बता दें कि ब्रिक्स दुनिया की पांच सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। ब्रिक्स के सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। वर्ष 2024 में समूह में विस्तार के बाद अब इसके सदस्य देशों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। नए सदस्यों में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।


    परमाणु हथियारों के पक्ष में नहीं थे खामेनेई

    ब्योरे के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने उस अमेरिकी दावे को खारिज कर दिया कि अमेरिका ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए उसके खिलाफ सैन्य हमला शुरू किया था। ब्योरे में कहा गया है कि पेजेश्कियन ने इस बात पर भी जोर दिया कि दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने परमाणु हथियारों का दृढ़ता से विरोध किया था और उनके विकास की दिशा में किसी भी कदम को प्रतिबंधित करने के लिए प्रशासनिक और धार्मिक दोनों तरह के निर्देश जारी किए थे।


    पीएम मोदी ने दी ईद की बधाई

    ईरान के राष्ट्रपति के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और आशा जताई कि त्योहार का यह मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाए। प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ”राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात की और ईद एवं नवरोज की शुभकामनाएं दीं। हमने आशा व्यक्त की कि त्योहार का मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाए।”


    ईरान के समर्थन की सराहना

    मोदी ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं। उन्होंने कहा, ”नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया कि जहाजरानी मार्ग खुले और सुरक्षित रहें।” प्रधानमंत्री ने ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए ईरान के निरंतर समर्थन की भी सराहना की।

    मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति के बीच टेलीफोन पर यह दूसरी बातचीत थी। पश्चिम एशियाई गैस केंद्रों पर नए हमलों को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के मद्देनजर दोनों नेताओं के बीच यह वार्ता हुई।


    अमेरिका-इजरायल को रोकना होगा

    ईरान द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र से इतर विश्व नेताओं के साथ संवाद करने के लिए ईरान की निरंतर तत्परता को दोहराया जिसमें तेहरान की शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों की पुष्टि और निगरानी के लिए वार्ताएं शामिल हैं। वार्ता के ब्योरे के अनुसार, ”राष्ट्रपति ने पश्चिमी एशिया के देशों से मिलकर एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा, जिसका उद्देश्य विदेशी हस्तक्षेप के बिना क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना है। ब्योरे के मुताबिक, ”उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्र में युद्ध और संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका और इजरायल द्वारा आक्रामकता का तत्काल समापन आवश्यक है।”

    ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता का जिक्र करते हुए पेजेश्कियन ने समूह से ईरान के खिलाफ आक्रामकता रोकने और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता की रक्षा करने में स्वतंत्र भूमिका निभाने का आह्वान किया। ईरान की ओर से जारी वार्ता के ब्योरे में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और फारस की खाड़ी में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

    ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने 12 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी को ईरान की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी थी और क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम पर अपना दृष्टिकोण साझा किया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में उभर रही सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और भारत के इस रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।

    अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने अपने पड़ोसी देशों और इजरायल को निशाना बनाया। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को भी नियंत्रित करता है, जो एक महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन मार्ग है। इसके माध्यम से विश्व के 20 प्रतिशत ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। संघर्ष के बाद से, ईरान ने बहुत कम जहाजों को इससे गुजरने की अनुमति दी है। संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के नेताओं से भी बात की है। इनमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस और मलेशिया के नेता शामिल हैं।

  • बांग्लादेश में नई सरकार आने के बाद भी हिंदुओं पर हमले जारी… फिर हुई दो की हत्या

    बांग्लादेश में नई सरकार आने के बाद भी हिंदुओं पर हमले जारी… फिर हुई दो की हत्या


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यकों (Minorities) के लिए हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। नई सरकार (New government) आने के बाद भी हिंदुओं और हिंदू मंदिरों (Hindu Temples) पर हमले का सिलसिला नहीं रुका है। पिछले एक हफ्ते में अलग-अलग घटनाओं में दो हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। वहीं, चार अन्य लोग, जिसमें एक पुजारी भी शामिल है, मंदिर के बाहर बम धमाके में घायल हो गए हैं। बांग्लादेश के दक्षिणपंथी ग्रुप, जातियो हिंदुओ मोहाजोतो ने इसकी जानकारी दी है। 6 मार्च और 7 मार्च को बोगुरा और कॉक्स बाजार में दो व्यक्तियों की हत्या कर दी गई, जबकि 8 मार्च को चुमिल्ला शहर में पूजा के दौरान एक हिंदु मंदिर पर क्रूड बम फेंके गए, जिससे काफी डर फैल गया।


    मंदिर पर हमले की पुष्टि

    बांग्लादेश समाचार की एक रिपोर्ट में कालीगाछ टाला काली मंदिर पर हमले की पुष्टि की है। कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी तौहीदुल अनवर ने बताया कि पुरोहित केशोब चक्रवर्ती, साथ ही अन्य दो लोगों को अस्पताल में उपचार मिला। मंदिर समिति के अध्यक्ष सजोल कुमार चंदा ने कहाकि धमाका धार्मिक समारोह के दौरान हुआ। सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर एक नकाबपोश व्यक्ति को धमाके से थोड़ी देर पहले मंदिर में प्रवेश करते और एक बैग छोड़ते हुए दिखाया गया। घायल पुजारी केशब चक्रवर्ती ने बताया कि बम विस्फोट के बाद, मेरे सामने एक सफेद चीज गिरी…बाद में, धुआं देखकर, दूसरों ने मुझे बताया कि यह एक बम था।


    क्षेत्र में फैल गई घबराहट

    विस्फोट के बाद क्षेत्र में घबराहट फैल गई। पहले धमाके के बाद, हमलावरों ने कथित तौर पर नजदीकी बौद्ध मंदिर और एक निजी ऑफिस के पास दो और साधारण बम फोड़ दिए। मेट्रोपॉलिटन पूजा उत्सव फ्रंट के संयोजक श्यामल कृष्ण ने स्थल का दौरा किया और जिम्मेदारों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया।

    उन्होंने कहाकि जो लोग शांतिपूर्ण वातावरण को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें जल्दी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। घटना के बाद पुलिस अधिकारियों, जिनमें कुमिला के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद अनीसुज्जमान भी शामिल थे, ने स्थल का दौरा किया और जांच में सहायता के लिए एक एंटी बम स्क्वॉड को बुलाया गया।

  • Iran-US War: ट्रंप की धमकी के बाद और तेज हुए ईरान के हमले….. दुबई की इमारतें हुईं धुआं-धुआं

    Iran-US War: ट्रंप की धमकी के बाद और तेज हुए ईरान के हमले….. दुबई की इमारतें हुईं धुआं-धुआं


    दुबई।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच छिड़ा युद्ध पूरी दुनिया को संकट में डालने वाला साबित हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने शनिवार को भी धमकी देते हुए कहा कि उनका हमला अब और तेज होगा। वहीं जानकारों का कहना है कि अगर एक सप्ताह युद्ध और चलता रहा तो कई देशों में मंदी जैसे हालात हो जाएंगे। उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान पर बहुत तगड़ा हमला होने वाला है। ईरान (Iran) के व्यवहार की वजह से उसे बड़ी तबाही झेलनी होगी।

    इससे पहले ईरानी राष्ट्रपति पजेश्कियां (Iranian President Pajeshkian) ने कहा था ईरान समर्पण करने वाला नहीं है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के बिना शर्त सरेंडर करने की मांग को ठुकरा दिया था। उन्होंने कहा था कि ईरानियों के आत्मसमर्पण करने का विचार डोनाल्ड ट्रंप को कहीं दफना देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि वह तब तक पड़ोसी खाड़ी देशों पर हमला नहीं करेंगे जब तक कि उधर से हमला नहीं होता है।

    बता दें कि ईरान पड़ोसी देशों में अमेरिका बेसों पर लगातार हमले कर रहा था। इसके अलावा ईरान ने यूएई के दुबई में खूब हमले किए। वह 28 फरवरी को हुए हवाई हमले के बाद युद्ध शुरू होने और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद से ईरान की देखरेख करने वाली त्रिपक्षीय नेतृत्व परिषद के एक सदस्य हैं। उन्होंने यह संदेश इस संघर्ष के पूरे क्षेत्र में फैलने के ठीक एक सप्ताह बाद दिया। इस संघर्ष से वैश्विक बाजार और हवाई यात्रा प्रभावित हुई तथा ईरान का अपना नेतृत्व सैकड़ों इजराइली और अमेरिकी हवाई हमलों से काफी कमजोर हो गया है।


    रेवोल्यूशनरी गार्ड ने पैदा कर दिया भ्रम

    ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता जनरल अबोलफजल शेखरची ने पेजेशकियान के बयान के बाद यह कहकर और भ्रम पैदा कर दिया कि तेहरान ने उन देशों पर हमला नहीं किया है जिन्होंने ‘अमेरिका को हमारे देश पर आक्रमण करने के लिए जगह नहीं दी।’ अमेरिकी हमले खाड़ी अरब देशों से नहीं हो रहे हैं, जिन पर अब हमला हो रहा है। संभवतः मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल के जवाब में, शनिवार को ईरान के एक प्रमुख धर्मगुरु, अयातुल्ला नासिर मकारम शिराजी ने देश की विशेषज्ञ सभा से नये सर्वोच्च नेता का नाम जल्द से जल्द तय करने का आग्रह किया। युद्ध में 88 धर्मगुरुओं की समिति से जुड़े भवनों पर हवाई हमले हुए हैं, जिससे समूह की किसी भी बैठक में देरी होने की संभावना है।


    और भीषण बमबारी होगी

    अमेरिका का कहना है कि आगे और भी भीषण बमबारी होगी। संघर्ष खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही। ट्रंप प्रशासन ने इजराइल को 15.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर के नये हथियार बिक्री की मंजूरी दे दी। वहीं ट्रंप ने कहा है कि ईरान के “बिना शर्त आत्मसमर्पण” के बिना वे उससे बातचीत नहीं करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने आगामी बमबारी अभियान की चेतावनी दी।


    संयुक्त राष्ट्र में क्या बोले ईरान के राजदूत

    संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि देश अपनी रक्षा के लिए ‘सभी आवश्यक उपाय’ करेगा। एसोसिएटेड प्रेस के वीडियो में पश्चिमी तेहरान के ऊपर धमाका और धुआं उठता हुआ दिखाई दिया। इजराइल ने कहा कि उसने व्यापक स्तर पर हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर लगातार हमले किए हैं, जिनमें उसकी सैन्य क्षमताओं, नेतृत्व और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाया गया है।

    देशों के अधिकारियों के अनुसार, इस लड़ाई में ईरान में कम से कम 1,230 लोग, लेबनान में 200 से अधिक और इजराइल में 11 लोग मारे गए हैं। छह अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं। शनिवार सुबह, ईरान से मिसाइल दागे जाने के कारण पूरे इजराइल में लोग बचने के लिए आश्रयों की ओर भागे। इस बीच यरुशलम में जोरदार धमाके सुनाई दिए। इजराइल की आपातकालीन सेवाओं ने तत्काल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी। संघर्ष बढ़ने के साथ ही ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले किए। दुबई में शनिवार सुबह कई धमाकों की आवाज सुनी गई और सरकार ने हवाई सुरक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी। अलर्ट बजने के बाद दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों का इंतजार कर रहे यात्रियों को विशाल हवाई अड्डे की सुरंगों में ले जाया गया।

  • ईरानी हमलों से खाड़ी में बढ़ा तनाव, अरब लीग ने रविवार को बुलाई विदेश मंत्रियों की आपात बैठक

    ईरानी हमलों से खाड़ी में बढ़ा तनाव, अरब लीग ने रविवार को बुलाई विदेश मंत्रियों की आपात बैठक


    काहिरा। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और कई अरब देशों पर हुए कथित ईरानी हमलों के बाद स्थिति पर चर्चा के लिए अरब लीग ने विदेश मंत्रियों की आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है। यह बैठक रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित की जाएगी।

    अरब लीग के सहायक महासचिव होसाम जकी ने शनिवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि इस विशेष बैठक का प्रस्ताव कुवैत, सऊदी अरब, कतर, ओमान, जॉर्डन और मिस्र जैसे सदस्य देशों ने संयुक्त रूप से रखा है। बैठक में खाड़ी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा को प्रभावित करने वाली हालिया घटनाओं की समीक्षा की जाएगी और इस मुद्दे पर साझा अरब रुख तय करने की कोशिश की जाएगी।

    पड़ोसी देशों को निशाना बनाने का इरादा नहीं: ईरान

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की बात कही गई थी। राज्य टीवी पर प्रसारित अपने रिकॉर्डेड संदेश में उन्होंने कहा कि ऐसी उम्मीद करना केवल एक सपना है, जो कभी पूरा नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

    क्षेत्रीय हमलों पर जताया खेद

    हालांकि राष्ट्रपति पेजेशकियन ने खाड़ी के कुछ देशों पर हुए हालिया हमलों पर खेद भी जताया। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं गलतफहमी के कारण हुईं और ईरान भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने का प्रयास करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पड़ोसी देशों की जमीन से ईरान पर कोई हमला नहीं किया जाता, तब तक तेहरान की ओर से किसी को निशाना बनाने का इरादा नहीं है।

    ईरानी मीडिया के अनुसार, इस संबंध में ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब शनिवार सुबह बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर हमलों की खबरों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

    पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहा तनाव

    पश्चिम एशिया में हालात पिछले कुछ दिनों में तेजी से बदले हैं। 28 फरवरी को शुरू हुए टकराव के बाद से ईरान, इस्राइल समेत पश्चिम एशिया के 13 देशों को निशाना बना चुका है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सैन्य गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

  • ईरान ने दुबई में US मिलिट्री ठिकानों पर किया हमला, शाहेद-136 ड्रोन से साधा निशाना

    ईरान ने दुबई में US मिलिट्री ठिकानों पर किया हमला, शाहेद-136 ड्रोन से साधा निशाना


    दुबई।
    ईरान (Iran) ने यूएई (UAE) के दुबई (Dubai) में यूएस मिलिट्री ठिकाने (US Military Bases) पर बड़ा ड्रोन हमला किया है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, ईरान ने शाहेद-136 ड्रोन (Shahed-136 Drone) से दुबई में उस बिल्डिंग पर हमला किया है, जहां अमेरिकी मिलिट्री के अधिकारी मौजूद थे.

    इससे पहले सऊदी में स्थित अमेरिकी दूतावास पर ईरान ने ड्रोन के जरिए निशाना साधा था, जहां पर हमले के बाद आग लगने की खबर आई थी. हालांकि, रिपोर्ट्स में पता चला है कि एंबेसी हमले के वक्त खाली थी.


    कतर की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन्स

    कतर के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसने हमले शुरू होने के बाद से देश पर दागे गए अधिकांश ईरानी प्रोजेक्टाइल को रोक दिया है, जिसमें तीनों क्रूज मिसाइलें, 101 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 98, 39 ड्रोन में से 24 और दोनों SU-24 लड़ाकू जेट शामिल हैं।

    सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी किया है. रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता, मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा, “रियाद और अल-खार्ज शहरों के पास 8 ड्रोन को रोका और नष्ट किया गया.”

    सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दिखाया गया है कि मंगलवार सुबह-सुबह ईरानी ड्रोन के हमले के बाद इज़राइल में US एंबेसी में आग लग गई.