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  • नेतन्याहू ने IDF को तेहरान पर हमले और तेज करने का आदेश दिया

    नेतन्याहू ने IDF को तेहरान पर हमले और तेज करने का आदेश दिया


    तेल अवीव। इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा संकेत देते हुए सेना को ईरान के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। यह घोषणा उन्होंने रक्षा मुख्यालय ‘किर्या’ में उच्चस्तरीय बैठक के बाद की।
    बैठक में रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज, सेना प्रमुख इयाल जमीर और खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्नेया शामिल थे। इसके बाद नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना ईरान के खिलाफ अपने ऑपरेशन को और व्यापक रूप देगी।
    तेहरान पर लगातार हमलों का दावा

    इजरायल ने कहा कि उसकी सेना Israel Defense Forces पहले से ही तेहरान को निशाना बनाकर कार्रवाई कर रही है और आने वाले दिनों में यह और तेज होगी। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक इजरायल अपने सुरक्षा लक्ष्यों को हासिल नहीं कर लेता।

    खामेनेई की मौत के बाद भड़का तनाव

    यह बयान उस घटनाक्रम के बाद आया जिसमें संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबरों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया। इसके बाद ईरान ने हमलों को “अवैध कार्रवाई” बताते हुए जवाबी मिसाइल हमले शुरू किए।

    इजरायल में नागरिक हताहत
    नेतन्याहू ने बताया कि ईरानी हमलों में इजरायल के कई नागरिकों की मौत हुई। तेल अवीव में एक महिला की जान गई, जबकि बेत शेमेश में नौ लोगों के मारे जाने की सूचना है।

    उन्होंने मृतकों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

    ‘पूरी ताकत से जारी रहेगा अभियान’

    प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में इजरायल की पूरी सैन्य क्षमता लगाई गई है और इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मिल रहा है, जिसमें अमेरिका का सहयोग शामिल बताया गया है। उनके अनुसार यह अभियान लंबे समय से घोषित सुरक्षा नीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य देश को भविष्य के खतरों से सुरक्षित करना है।

  • मोदी की इजरायल यात्रा पर कांग्रेस का हमला, नेतन्याहू से मुलाकात को बताया …

    मोदी की इजरायल यात्रा पर कांग्रेस का हमला, नेतन्याहू से मुलाकात को बताया …

    नई दिल्ली। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजरायल यात्रा को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायली नेतृत्व की आलोचना हो रही है, तब भारतीय प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई नैतिक सवाल खड़े करती है।

    कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री की इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू से प्रस्तावित मुलाकात को लेकर भी आपत्ति जताई और गाजा की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।

    जयराम रमेश ने ऐतिहासिक रुख का दिलाया हवाला
    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत का इतिहास फिलिस्तीनी मुद्दे पर संतुलित और सिद्धांत आधारित रहा है, लेकिन मौजूदा कूटनीतिक रुख उस परंपरा से अलग दिखाई देता है।
    उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में भारी तबाही और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार जैसे मुद्दों पर भारत को अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए।

    रमेश ने भारत के पुराने रुख की याद दिलाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1960 के गाजा दौरे और बाद के दशकों में फिलिस्तीन के समर्थन से जुड़े निर्णयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने 1988 में फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता देकर वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र नीति का परिचय दिया था।

    प्रियंका गांधी ने गाजा का मुद्दा उठाने की अपील
    की

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए गाजा पट्टी की मानवीय स्थिति का जिक्र करेंगे और निर्दोष नागरिकों के लिए न्याय की बात उठाएंगे।

    उन्होंने कहा कि भारत का ऐतिहासिक दायित्व रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति, न्याय और मानवीय मूल्यों की वकालत करता रहे।

    सरकार का फोकस: रणनीतिक और द्विपक्षीय सहयोग

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो रही है।

    2017 में मोदी की पहली इजरायल यात्रा के दौरान संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद कृषि, रक्षा तकनीक, जल प्रबंधन और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।

    राजनीतिक बनाम कूटनीतिक बहस

    इस मुद्दे ने एक बार फिर भारत की पश्चिम एशिया नीति को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस तेज कर दी है—एक तरफ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देने की दलील है, तो दूसरी ओर मानवीय और ऐतिहासिक दृष्टिकोण को बनाए रखने की मांग उठ रही है।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी; चोरी के शक में पीछा, नहर में छलांग लगाने से गई जान

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी; चोरी के शक में पीछा, नहर में छलांग लगाने से गई जान

    बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लक्षित हमलों की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। चोरी के संदेह में भीड़ के पीछा करने से बचने के लिए 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार ने नहर में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई।

    पुलिस ने मंगलवार दोपहर भंडारपुर गांव के निवासी मिथुन का शव बरामद किया। यह घटना पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा में तीव्र वृद्धि के बीच हुई है। मिथुन सरकार की मौत पिछले कुछ दिनों में सामने आई क्रूर हमलों की श्रृंखला में यह नई घटना है।

    हिंदू, बौद्ध और ईसाई एकता परिषद ने एक बयान जारी कर दिसंबर महीने में कम से कम 51 लक्षित घटनाओं का खुलासा किया है, जिनमें 10 हत्याएं शामिल हैं। परिषद ने आगजनी, बलात्कार और लूटपाट के मामलों का विस्तृत विवरण देते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है कि ये अत्याचार 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होते हैं।

    परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश ने पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना किया है, लेकिन वर्तमान समय में संस्थागत कमजोरी और बढ़ती सांप्रदायिक चिंता का खतरनाक संयोजन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ये सब उस समय हो रहा जब देश 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि शेख हसीना सरकार के 2024 में गिरने के बाद अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी आई है।

    पिछले कुछ दिनों में हुई अन्य घटनाएं…

    5 जनवरी को जेसोर जिले में हिंदू व्यापारी और समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक राणा कांति बैरागी की गोली मारकर हत्या
    5 जनवरी को ही नरसिंगदी में किराने की दुकान मालिक मोनी चक्रवर्ती की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या
    3 जनवरी को शरियतपुर जिले में खोकोन चंद्र दास पर हमला, इलाज के दौरान अस्पताल में मौत
    इससे पहले दिसंबर में राजबारी में अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या और मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीटकर हत्या कर शव जलाने की घटनाएं सामने आई थीं।
    वहीं, मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का मानना है कि हालिया हत्याएं कोई छिटपुट त्रासदी नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की अपने सबसे कमजोर नागरिकों की रक्षा करने की क्षमता में आई व्यापक विफलता के संकेत हैं। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अंतरिम प्रशासन की स्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त की है।

  • Pakistan: उत्तर वजीरिस्तान में सुसाइड बॉम्बर ने सैन्य चौकी को उड़ाया, 4 सैनिकों की मौत

    Pakistan: उत्तर वजीरिस्तान में सुसाइड बॉम्बर ने सैन्य चौकी को उड़ाया, 4 सैनिकों की मौत


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के उत्तर-पश्चिमी इलाके उत्तर वजीरिस्तान (North Waziristan) में शुक्रवार को एक बड़ा आतंकी हमला (Major terrorist attack) हुआ। सुसाइड कार बॉम्बर (Suicide car bomber) और तीन बंदूकधारियों ने एक गांव के पास स्थित सैन्य चौकी पर हमला किया, जिसके बाद घंटों चली गोलीबारी में चार पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। इस हमले में कम से कम 15 नागरिक घायल हो गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

    पाकिस्तानी सेना और स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह इलाका खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आता है, जो अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है और अतीत में पाकिस्तानी तालिबान तथा अन्य उग्रवादी संगठनों का गढ़ रहा है। पुलिस ने बताया कि धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के कई मकान ढह गए, जिससे स्थानीय नागरिकों को गंभीर चोटें आईं। सेना के बयान में कहा गया कि सभी हमलावरों को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ के दौरान मार गिराया।

    सेना के मुताबिक, हमलावरों ने पहले चौकी की सुरक्षा घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी को चौकी की बाहरी दीवार से टकरा दिया। इस विस्फोट से पास के घरों और एक मस्जिद को भी नुकसान पहुंचा। हालांकि किसी भी संगठन ने तुरंत हमले की जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने इस हमले के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को जिम्मेदार ठहराया है। सेना का दावा है कि इस हमले की योजना अफगान सीमा के उस पार बनाई गई और वहीं से इसे निर्देशित किया गया।

    इस पर अफगानिस्तान की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अफगान तालिबान लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि वे किसी भी देश के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देते, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि अफगानिस्तान के तालिबान शासक अपने क्षेत्र से आतंकियों को पाकिस्तान पर हमले करने से रोकेंगे। साथ ही यह भी कहा कि पाकिस्तान को आतंकियों और उनके मददगारों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है।

    हमले के कुछ घंटे बाद ही पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय सक्रिय हुआ। मंत्रालय ने इस्लामाबाद में अफगान तालिबान के उप-मिशन प्रमुख को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि पाकिस्तान ने अफगान भूमि से संचालित आतंकवादी हमलों के दोषियों और मददगारों के खिलाफ पूर्ण जांच और निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। बयान में यह भी कहा गया कि अफगान तालिबान से यह अपेक्षा की गई है कि वह अपने क्षेत्र में सक्रिय सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस, तत्काल और सत्यापन योग्य कदम उठाए तथा पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद के लिए अफगान जमीन के इस्तेमाल को पूरी तरह रोके।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव हाल के महीनों में बढ़ा है। अक्टूबर में सीमा पर झड़पें हुई थीं, जब काबुल में 9 अक्टूबर को हुए विस्फोटों के लिए अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। बाद में कतर की मध्यस्थता से युद्धविराम तो हुआ, लेकिन नवंबर में तुर्की में हुई बातचीत में दोनों देश किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सके।