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  • क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अनाया बांगड़ को दी बड़ी राहत, कम्युनिटी क्रिकेट में वापसी के साथ एलीट क्रिकेट की शर्तें भी तय

    क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अनाया बांगड़ को दी बड़ी राहत, कम्युनिटी क्रिकेट में वापसी के साथ एलीट क्रिकेट की शर्तें भी तय

    नई दिल्ली ।पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगड़ की ट्रांस महिला बेटी अनाया बांगड़ के क्रिकेट करियर को लेकर बड़ी राहत सामने आई है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें महिलाओं के लोकल क्रिकेट में खेलने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अनाया एक बार फिर क्रिकेट मैदान पर वापसी की तैयारी कर रही हैं और ऑस्ट्रेलिया में अपने लिए उपयुक्त क्रिकेट क्लब तलाश रही हैं।

    अनाया कुछ समय पहले तक पुरुष वर्ग में क्रिकेट खेलती थीं और मुंबई की अंडर 19 टीम का हिस्सा भी रह चुकी हैं। इसके बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया के दौरान उन्हें क्रिकेट करियर को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि एक समय उन्हें लगने लगा था कि शायद वह दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी।

    अब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिली अनुमति ने उनके लिए खेल में वापसी का रास्ता खोल दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें तत्काल कम्युनिटी क्रिकेट में खेलने की मंजूरी मिली है। इसके दायरे में स्थानीय और राज्य स्तर की क्रिकेट शामिल है। इससे अनाया को प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में दोबारा कदम रखने का अवसर मिलेगा।

    हालांकि उच्च स्तर के एलीट महिला क्रिकेट में खेलने के लिए अलग पात्रता शर्तें लागू होंगी। उपलब्ध नियमों के मुताबिक मार्च 2027 तक अनाया को अपने शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर निर्धारित सीमा के भीतर बनाए रखना होगा। इसके साथ उन्हें संबंधित परीक्षणों में पात्रता बनाए रखना जरूरी होगा। एलीट स्तर पर खेलने की उनकी संभावनाएं इन्हीं शर्तों की पूर्ति पर निर्भर रहेंगी।

    महिला बिग बैश लीग जैसे बड़े टूर्नामेंट में खेलने के लिए एलीट क्रिकेट की पात्रता महत्वपूर्ण होगी। इसलिए फिलहाल अनाया का अगला लक्ष्य स्थानीय क्रिकेट से प्रतिस्पर्धी वापसी करना और निर्धारित नियमों के अनुरूप अपनी पात्रता बनाए रखना है। उनकी क्रिकेट यात्रा अब धीरे धीरे नए चरण में प्रवेश कर रही है।

    अनाया ने अपने अनुभव साझा करते हुए भारतीय क्रिकेट व्यवस्था और ऑस्ट्रेलिया के रुख में अंतर का भी जिक्र किया। उनके अनुसार उन्होंने अपनी मेडिकल रिपोर्ट और संबंधित रिसर्च डेटा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सामने रखा था, लेकिन उन्हें वहां से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके विपरीत क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनकी मेडिकल हिस्ट्री और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद अपना फैसला लिया।

    अनाया के लिए यह सफर केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने बताया कि जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया शारीरिक और मानसिक स्तर पर चुनौतीपूर्ण रही। इस दौरान परिवार, दोस्ती और करियर से जुड़े कई पहलुओं में बदलाव आया। हालांकि उनका कहना है कि अपने बदलाव के बाद वह अब पहले की तुलना में अधिक खुश और सुकून महसूस करती हैं।

    हार्मोन थेरेपी के बाद शरीर में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए अनाया ने अपनी शारीरिक क्षमता में कमी महसूस होने की बात कही। उन्होंने बताया कि पहले उनके शरीर में अधिक ताकत थी, जबकि अब मांसपेशियों की ताकत कम महसूस होती है। इसी वजह से तेज गति की गेंदों का सामना करना उनके लिए पहले जैसा आसान नहीं रहा।

    अब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की अनुमति के बाद अनाया के सामने मैदान पर लौटने का अवसर है। क्लब क्रिकेट से शुरुआत करते हुए उनका प्रदर्शन और आगे की पात्रता यह तय करेगी कि वह महिला क्रिकेट के किस स्तर तक पहुंच पाती हैं। उनके लिए यह वापसी लंबे अंतराल के बाद क्रिकेट से दोबारा जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

  • ऑस्ट्रेलियाई टीम में फेरबदल की मांग, बांग्लादेश के हाथों 9 विकेट की करारी शिकस्त के बाद दिग्गजों का फूटा गुस्सा

    ऑस्ट्रेलियाई टीम में फेरबदल की मांग, बांग्लादेश के हाथों 9 विकेट की करारी शिकस्त के बाद दिग्गजों का फूटा गुस्सा


    नई दिल्ली ।
    डार्विन के मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले में बांग्लादेश ने बड़ा उलटफेर करते हुए मेजबान ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से पराजित कर दिया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही बांग्लादेश ने टेस्ट श्रृंखला का आगाज धमाकेदार अंदाज में किया है। खेल के हर विभाग में ऑस्ट्रेलियाई टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जिसके बाद पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों का गुस्सा भड़क उठा है। पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग, मार्क वॉ और मैथ्यू हेडन ने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के प्रदर्शन की आलोचना करते हुए टीम प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।

    ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मार्क वॉ ने इस हार को ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर करार दिया है। उन्होंने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में इतना बड़ा उलटफेर नहीं देखा। वॉ ने रेखांकित किया कि बांग्लादेश की टीम अपने दो प्रमुख तेज गेंदबाजों के बिना मैदान पर उतरी थी, इसके बावजूद उसने ऑस्ट्रेलिया की पूरी तरह से मजबूत टीम को पछाड़ दिया। उनके अनुसार, यह पराजय गाबा में वेस्टइंडीज के हाथों मिली हार से भी अधिक चौंकाने वाली है।

    दूसरी ओर पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने इस हार को बेहद शर्मनाक बताते हुए टीम में बड़े बदलावों की वकालत की है। पोंटिंग का मानना है कि अब समय आ गया है जब ऑस्ट्रेलियाई टीम को भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि टीम को तुरंत नए सलामी बल्लेबाज और नंबर 3 के स्थान पर बदलाव करने की आवश्यकता है। पहले व्यापक बदलावों के पक्ष में न रहने वाले पोंटिंग ने स्वीकार किया कि इस करारी हार ने पूरी स्थिति बदल दी है।

    इसी बीच पूर्व दिग्गज मैथ्यू हेडन ने भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम की नाकामी पर चिंता जताई और सलाह दी कि ट्रेविस हेड को पुनः नंबर 5 के स्थान पर भेजा जाना चाहिए। मैच के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने भी बांग्लादेशी टीम के बेहतर प्रदर्शन की सराहना की और अपनी टीम की नाकामियों को स्वीकार किया। मध्य प्रदेश सहित दुनिया भर के क्रिकेट विशेषज्ञों की नजरें अब आगामी मुकाबले पर टिकी हैं।

    श्रृंखला के दूसरे टेस्ट मैच से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम पर मानसिक दबाव साफ दिखाई दे रहा है। पूर्व दिग्गजों के कड़े रुख और मीडिया में हो रही आलोचनाओं के बाद आगामी मैच के लिए ऑस्ट्रेलियाई प्लेइंग-11 में बड़े बदलाव होना लगभग तय माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रबंधन इन दिग्गजों के सुझावों पर किस तरह अमल करता है।

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    ऑस्ट्रेलिया बनाम बांग्लादेश डार्विन टेस्ट, मार्क वॉ रिकी पोंटिंग फोटो, पैट कमिंस ऑस्ट्रेलियाई टीम इंजरी, ट्रेविस हेड टेस्ट क्रिकेट

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    बांग्लादेश से हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में भूचाल, दिग्गजों ने उठाई टीम में बड़े बदलावों की मांग

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    डार्विन टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक हार, मार्क वॉ और रिकी पोंटिंग ने प्रबंधन पर दागे तीखे सवाल

  • अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की सूची में स्टीव स्मिथ चौथे पायदान पर पहुंचे।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की सूची में स्टीव स्मिथ चौथे पायदान पर पहुंचे।


    नई दिल्ली ।
    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर ऑस्ट्रेलियाई टीम के अनुभवी बल्लेबाज स्टीव स्मिथ ने एक नया और महत्वपूर्ण कीर्तिमान अपने नाम दर्ज कर लिया है। बांग्लादेश के खिलाफ खेले जा रहे टेस्ट मैच की पहली पारी में संकट के समय संयमित और उपयोगी अर्धशतकीय पारी खेलते हुए उन्होंने पूर्व महान कप्तान एलन बॉर्डर के रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं।

    इस मुकाबले में जब ऑस्ट्रेलियाई टीम का ऊपरी क्रम लगातार ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा था, तब स्टीव स्मिथ ने एक छोर संभालकर धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी का परिचय दिया। मुश्किल परिस्थितियों में खेलते हुए उन्होंने टीम के स्कोर को सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाने का हरसंभव प्रयास किया। अपनी इस जुझारू पारी के दौरान उन्होंने मैदान के चारों तरफ आकर्षक शॉट लगाए और टीम के अन्य बल्लेबाजों के विफल रहने के बावजूद अपनी उपयोगिता साबित की।

    स्टीव स्मिथ ने अब अपने करियर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 17 हजार सात सौ से अधिक रन बना लिए हैं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने तीन सौ साठ मैचों की चार सौ तीस पारियों का सामना किया है। उनके खाते में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुल 49 शतक और 85 अर्धशतक दर्ज हो चुके हैं। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि वह आधुनिक युग के सबसे निरन्तर और विश्वसनीय खिलाड़ियों में से एक हैं।

    पूर्व कप्तान एलन बॉर्डर ने अपने करियर के दौरान चार सौ उनतीस अंतरराष्ट्रीय मैचों में कुल 17698 रन बनाए थे। बॉर्डर के इस ऐतिहासिक आंकड़े को पार करके स्टीव स्मिथ ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास में अपना नाम और अधिक मजबूती से दर्ज करवा लिया है। क्रिकेट समीक्षकों का मानना है कि स्मिथ का यह मुकाम उनकी कड़ी मेहनत और तकनीकी श्रेष्ठता का ही प्रतिफल है।

    ऑस्ट्रेलिया के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग शीर्ष स्थान पर काबिज हैं। पोंटिंग ने अपने करियर में 27 हजार तीन सौ चौंसठ रन बनाए हैं, जिनमें 70 शतक शामिल हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर पूर्व सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर हैं और तीसरे स्थान पर पूर्व दिग्गज कप्तान स्टीव वॉ मौजूद हैं।

    विश्व स्तर पर दर्ज हुई इस नई उपलब्धि का प्रभाव न केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में देखा जा रहा है, बल्कि भारत के खेल प्रेमियों में भी इसको लेकर गहरा उत्साह है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के युवा खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों के बीच स्टीव स्मिथ की इस तकनीकी पारी और रिकॉर्ड की व्यापक चर्चा हो रही है। मध्य प्रदेश के खेल अकादमियों में अभ्यास कर रहे नवोदित खिलाड़ी उनकी बल्लेबाजी शैली और मुश्किल समय में टिके रहने की क्षमता से प्रेरणा ले रहे हैं।

    बल्लेबाजी के क्षेत्र में लगातार नए रिकॉर्ड स्थापित करने वाले स्टीव स्मिथ का यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब उनकी टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। क्रिकेट विशेषज्ञों के अनुसार जिस तरह से स्मिथ कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर रन बनाते हैं, वह उनकी मानसिक मजबूती को दर्शाता है। खेल के सबसे लंबे प्रारूप में उनका यह अनुभव आने वाले मुकाबलों में भी टीम के लिए बेहद निर्णायक साबित होगा।

    स्टीव स्मिथ अब 50 अंतरराष्ट्रीय शतकों के बेहद करीब पहुंच चुके हैं और आगामी मैचों में उनकी नजरें इस खास आंकड़े को हासिल करने पर होंगी। हालांकि उनकी वर्तमान उम्र को देखते हुए रिकी पोंटिंग के कुल रनों के रिकॉर्ड तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन चौथे स्थान पर पहुंचना ही अपने आप में एक अभूतपूर्व उपलब्धि है जिसने उनके करियर में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

  • भारत ने 20 से अधिक देशों में 7 हजार टन से ज्यादा मखाना भेजा, बिहार के किसानों को मिला वैश्विक बाजार का लाभ

    भारत ने 20 से अधिक देशों में 7 हजार टन से ज्यादा मखाना भेजा, बिहार के किसानों को मिला वैश्विक बाजार का लाभ

    नई दिल्ली ।भारत का मखाना निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में नई ऊंचाई पर पहुंचा है। इस अवधि में भारत ने 20 से अधिक देशों को 7,000 मीट्रिक टन से ज्यादा मखाना और उससे बने मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्यात किया। अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाने की मांग बढ़ने से बिहार के किसानों और इस क्षेत्र से जुड़े उद्योग को नए अवसर मिल रहे हैं।

    मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। देश के कुल मखाना उत्पादन का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा बिहार में होता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में भारतीय मखाने की बढ़ती मांग का सीधा लाभ राज्य के उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को मिल सकता है।

    मखाना निर्यात को बेहतर तरीके से दर्ज करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अलग पहचान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 से इसके लिए अलग एचएस कोड लागू किया है। इससे मखाने के व्यापार और निर्यात से जुड़े आंकड़ों की निगरानी अधिक स्पष्ट तरीके से की जा सकेगी।

    इसी क्रम में बिहार से जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाने की पहली व्यावसायिक समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है। इस खेप के जरिए बिहार के एक प्रमुख भौगोलिक संकेतक उत्पाद ने नए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश किया है। बिहटा स्थित औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना ऑस्ट्रेलिया भेजा गया।

    इस खेप के लिए मखाना दरभंगा जिले के किसानों से खरीदा गया था। निर्यात से जुड़ी इस पहल का उद्देश्य बिहार के स्थानीय उत्पाद को वैश्विक बाजार से जोड़ना और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने वाली आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है।

    इस निर्यात प्रक्रिया से जुड़े किसानों को मौजूदा बाजार भाव की तुलना में करीब 18 प्रतिशत अधिक कीमत मिलने की बात सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि किसानों को सीधे निर्यात आधारित बाजारों से जोड़ने और मूल्यवर्धित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने से उनकी आमदनी बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

    मखाने की वैश्विक मांग बढ़ने के पीछे स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। ऐसे में भारतीय मखाना कृषि आधारित निर्यात के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उत्पाद के रूप में अपनी जगह मजबूत कर सकता है।

    बिहार सरकार भी मखाना क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसमें किसानों के साथ प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को सहयोग देने तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरत के अनुरूप गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    राज्य के कृषि मंत्री ने मखाने को बिहार की पहचान से जुड़ा उत्पाद बताते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिहार आधारित निर्यातकों की भागीदारी बढ़ने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। उन्होंने वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गुणवत्ता मानकों के पालन को महत्वपूर्ण बताया।

    मखाना प्रसंस्करण से जुड़े फोरी समुदाय की पारंपरिक विशेषज्ञता को भी इस उद्योग की महत्वपूर्ण ताकत माना गया है। राज्य सरकार की ओर से इस समुदाय समेत मखाना क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों को सहयोग जारी रखने की बात कही गई है।

    ऑस्ट्रेलिया में जीआई टैग वाले मिथिला मखाने की पहली समुद्री खेप पहुंचना बिहार के कृषि उत्पादों के लिए नए बाजारों के विस्तार का संकेत है। आने वाले समय में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों में मांग बढ़ने से मखाना उद्योग में प्रसंस्करण, निर्यात और रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं। इससे बिहार के किसानों को घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय मूल्य श्रृंखला से जुड़ने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।

  • पीयूष गोयल बोले- मिथिला मखाना की बढ़ती विदेशी मांग से बिहार के किसानों को मिल रहे आय और रोजगार के नए अवसर

    पीयूष गोयल बोले- मिथिला मखाना की बढ़ती विदेशी मांग से बिहार के किसानों को मिल रहे आय और रोजगार के नए अवसर

    नई दिल्ली । बिहार के प्रसिद्ध जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को बताया कि बिहार से पहली बार 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना समुद्री मार्ग के जरिए ऑस्ट्रेलिया निर्यात किया गया है। इस उपलब्धि को राज्य के किसानों और कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि विदेशी बाजारों में मिथिला मखाना की बढ़ती मांग से बिहार के किसानों के लिए आय बढ़ाने और नए कारोबारी अवसर पैदा होने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

    पीयूष गोयल ने बताया कि कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के सहयोग से जीआई टैग वाले मिथिला मखाना की खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई। खास बात यह रही कि निर्यात के लिए मखाना सीधे दरभंगा के किसानों से खरीदा गया। इससे स्थानीय उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का अवसर मिला। मंत्री के अनुसार, इस पहल में शामिल किसानों को सामान्य बाजार भाव की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक लाभ प्राप्त हुआ है। इससे मखाना उत्पादन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं को बल मिला है।

    मिथिला मखाना बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मिथिला क्षेत्र में उत्पादित यह कृषि उपज अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पौष्टिकता के लिए देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी पहचान बना रही है। बदलती खाद्य आदतों के बीच मखाना स्वास्थ्यवर्धक स्नैक के रूप में तेजी से लोकप्रिय हुआ है। कम तेल में तैयार किए जाने वाले और विभिन्न स्वादों में उपलब्ध मखाने की मांग विशेष रूप से शहरी तथा अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता बाजार में बढ़ी है।

    ऑस्ट्रेलिया को समुद्री मार्ग से हुआ यह निर्यात ऐसे समय में हुआ है, जब बिहार के मखाना उत्पाद लगातार नए विदेशी बाजारों में पहुंच बना रहे हैं। इससे पहले बिहार से पहली बार समुद्री मार्ग के जरिए कनाडा को भी मखाना निर्यात किया गया था। उस दौरान दरभंगा से सात मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा भेजा गया था। इस निर्यात को भी कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था।

    विदेशी बाजारों में बढ़ती मांग का असर केवल मखाना किसानों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। निर्यात बढ़ने से मखाना की सफाई, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और मूल्य संवर्धन से जुड़े कारोबार को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे बिहार में कृषि आधारित छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार बनी रहती है तो स्थानीय स्तर पर मखाना प्रसंस्करण केंद्रों और आधुनिक पैकेजिंग सुविधाओं के विस्तार को भी बढ़ावा मिल सकता है।

    ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे बाजारों में भारतीय मखाने की पहुंच बढ़ना बिहार के कृषि उत्पादों के लिए सकारात्मक संकेत है। समुद्री मार्ग से निर्यात होने से बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक नियमित आपूर्ति की संभावनाएं बढ़ती हैं और कृषि उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने में मदद मिलती है। इससे किसानों को स्थानीय बाजार पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।

    मिथिला मखाना का लगातार विदेशी बाजारों में पहुंचना बिहार के कृषि निर्यात के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है। बेहतर कीमत, बढ़ता निर्यात और प्रसंस्करण क्षेत्र में संभावित निवेश किसानों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकता है। आने वाले समय में यदि अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मिथिला मखाना की मांग बढ़ती है तो बिहार भारत के प्रमुख कृषि निर्यात केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

  • बॉक्सिंग में गोल्डन पंच, एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन… भारत ने 16 मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ में बदली तस्वीर

    बॉक्सिंग में गोल्डन पंच, एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन… भारत ने 16 मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ में बदली तस्वीर


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार दिनों में शामिल हो गया। भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही दिन में 16 पदक जीतकर न केवल देश का गौरव बढ़ाया बल्कि पदक तालिका में भी लंबी छलांग लगाते हुए चौथा स्थान हासिल कर लिया। मुक्केबाजी, एथलेटिक्स और पैरा स्पर्धाओं में मिले शानदार परिणामों ने यह साबित कर दिया कि भारत अब कॉमनवेल्थ खेलों में एक मजबूत खेल शक्ति बनकर उभर रहा है।

    भारत ने 10वें दिन के बाद कुल 39 पदक अपने नाम कर लिए हैं। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय दल ने पदक तालिका में छह स्थान की छलांग लगाई और चौथे पायदान पर पहुंच गया। मेजबान स्कॉटलैंड को पीछे छोड़ते हुए भारत ने शीर्ष चार देशों में अपनी जगह मजबूत कर ली है।

    पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा लगातार कायम है। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने अब तक 61 स्वर्ण, 38 रजत और 50 कांस्य सहित कुल 149 पदक जीतकर पहला स्थान बरकरार रखा है। इंग्लैंड 99 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है, जबकि कनाडा 57 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत के चौथे स्थान पर पहुंचने के बाद स्कॉटलैंड पांचवें स्थान पर खिसक गया है। नाइजीरिया, वेल्स और न्यूजीलैंड क्रमशः छठे, सातवें और आठवें स्थान पर बने हुए हैं।

    भारतीय सफलता की सबसे बड़ी कहानी मुक्केबाजी से निकली, जहां खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते। इनमें सात स्वर्ण पदक शामिल रहे। पुरुष वर्ग में अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने स्वर्ण जीतकर देश का मान बढ़ाया। महिला वर्ग में जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी और प्रीति ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी का दबदबा साबित किया। वहीं जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीतकर भारत के पदकों की संख्या बढ़ाई।

    एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल ने रजत पदक हासिल किया, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। पैरा एथलेटिक्स की शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। भारतीय सेना के इस पैरा खिलाड़ी ने अपने संघर्ष और मेहनत से देश को गौरवान्वित किया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में अहम योगदान दिया।

    भारत के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए भी सकारात्मक संदेश दिया है। मुक्केबाजी में लगातार स्वर्ण पदकों की बरसात, एथलेटिक्स में नए रिकॉर्ड और पैरा खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारतीय खेलों का भविष्य पहले से कहीं अधिक मजबूत नजर आ रहा है।

    अब भारतीय दल की नजर बाकी प्रतियोगिताओं पर है, जहां पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ियों ने यही लय बरकरार रखी तो भारत पदक तालिका में और ऊपर पहुंच सकता है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह ऐतिहासिक दिन भारतीय खेलों के स्वर्णिम अध्याय के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत ने जीते 12 पदक, दो सिल्वर के बाद भी मेडल टैली में नौवें नंबर पर बरकरार

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत ने जीते 12 पदक, दो सिल्वर के बाद भी मेडल टैली में नौवें नंबर पर बरकरार


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। छठे दिन दो और रजत पदक जीतने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 12 हो गई है और वह मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 34 स्वर्ण सहित 78 पदकों के साथ शीर्ष पर काबिज है।
    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। छठे दिन दो और रजत पदक जीतने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 12 हो गई है और वह मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 34 स्वर्ण सहित 78 पदकों के साथ शीर्ष पर काबिज है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: ऑस्ट्रेलिया का जलवा बरकरार, भारत 12 पदकों के साथ नौवें स्थान पर; मुक्केबाजी में तीन और मेडल पक्के

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत की झोली में दो और रजत पदक आए, जिससे देश के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई। हालांकि इसके बावजूद भारत मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया ने अपने दमदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए शीर्ष स्थान पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है।

    मेडल तालिका में ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे है। उसने अब तक कुल 78 पदक जीते हैं, जिनमें 34 स्वर्ण, 17 रजत और 27 कांस्य पदक शामिल हैं। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों का दबदबा लगभग हर खेल में देखने को मिल रहा है और फिलहाल उसके आसपास कोई अन्य देश नजर नहीं आ रहा।

    दूसरे स्थान पर कनाडा है, जिसने अब तक 35 पदक अपने नाम किए हैं। कनाडा के खाते में 13 स्वर्ण, 10 रजत और 12 कांस्य पदक हैं। तीसरे स्थान पर इंग्लैंड काबिज है, जिसके खिलाड़ियों ने 43 पदक जीते हैं। इनमें 10 स्वर्ण, 18 रजत और 15 कांस्य पदक शामिल हैं। मेजबान स्कॉटलैंड 7 स्वर्ण सहित 15 पदकों के साथ चौथे स्थान पर है, जबकि नाइजीरिया 6 स्वर्ण और कुल 11 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर बना हुआ है।

    भारत ने अब तक 2 स्वर्ण, 7 रजत और 3 कांस्य पदक जीतकर कुल 12 पदक हासिल किए हैं। छठे दिन महिला वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में मिले दो रजत पदकों ने भारत की पदक संख्या में इजाफा किया, हालांकि मेडल तालिका में उसकी रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ और वह नौवें स्थान पर कायम है।

    महिला वेटलिफ्टिंग के 69 किलोग्राम वर्ग में हरजिंदर कौर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाकर यह उपलब्धि हासिल की।

    एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालते हुए रजत पदक जीता। इसके साथ ही वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए और भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

    मुक्केबाजी में भी भारत का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा। प्रीति, प्रिया और जादुमणि सिंह ने अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाले सभी मुक्केबाजों का पदक सुनिश्चित हो जाता है। ऐसे में भारत के खाते में कम से कम तीन और कांस्य पदक पक्के हो चुके हैं, जिन्हें बेहतर रंग में बदलने का मौका अब सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में मिलेगा।

    भारतीय दल से आने वाले दिनों में वेटलिफ्टिंग, मुक्केबाजी, कुश्ती और एथलेटिक्स जैसी स्पर्धाओं में और पदकों की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ियों का मौजूदा प्रदर्शन जारी रहता है तो भारत मेडल तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

  • पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच कांग्रेस ने साझा की इंदिरा गांधी की ऐतिहासिक तस्वीरें, कूटनीति और प्रकृति संरक्षण की विरासत पर दिया जोर

    पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच कांग्रेस ने साझा की इंदिरा गांधी की ऐतिहासिक तस्वीरें, कूटनीति और प्रकृति संरक्षण की विरासत पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच राजनीतिक बयानबाजी का नया दौर देखने को मिला है। कांग्रेस ने इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के ऑस्ट्रेलिया दौरों की ऐतिहासिक तस्वीरें साझा करते हुए उनके पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों के प्रति लगाव और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में निभाई गई भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा। इस कदम को वर्तमान विदेश दौरे के बीच राजनीतिक और वैचारिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने वर्ष 1968 और 1981 के ऑस्ट्रेलिया दौरों से जुड़ी दो तस्वीरें साझा कीं। एक तस्वीर में इंदिरा गांधी कंगारू को भोजन कराती हुई दिखाई देती हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में वह सिडनी के तारोंगा जू में कोआला के साथ नजर आती हैं। इन तस्वीरों के माध्यम से कांग्रेस ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि इंदिरा गांधी विदेश यात्राओं के दौरान केवल कूटनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहती थीं, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण जैसे विषयों को भी महत्व देती थीं।

    कांग्रेस का कहना है कि इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान दिया। उन्होंने विभिन्न देशों के साथ जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण से जुड़े समझौतों को बढ़ावा दिया तथा वैश्विक स्तर पर प्रकृति संरक्षण के प्रयासों का समर्थन किया। उनके कार्यकाल में पर्यावरण से जुड़ी कई नीतियों और संरक्षण अभियानों को भी नई दिशा मिली, जिनका प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिला।

    इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑस्ट्रेलिया दौरा भी कई महत्वपूर्ण समझौतों और कार्यक्रमों के कारण चर्चा में रहा। दौरे के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक, तकनीकी और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई नई पहलों पर सहमति व्यक्त की। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला जैसे भविष्य की तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

    प्रधानमंत्री ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय मौजूद रहे। इसके अलावा उन्होंने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड का दौरा किया और दोनों देशों के बीच खेल सहयोग को नई दिशा देने वाले कार्यक्रमों में भी भाग लिया। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और उच्च तकनीक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से जुड़े कई निर्णय भी इस यात्रा के दौरान सामने आए, जिन्हें द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश यात्राओं के दौरान पूर्व और वर्तमान सरकारों की उपलब्धियों को लेकर राजनीतिक दल अक्सर अपनी-अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को सामने रखते हैं। कांग्रेस द्वारा इंदिरा गांधी के पुराने ऑस्ट्रेलिया दौरों को याद करना भी इसी क्रम का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें उनके पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में योगदान को रेखांकित किया गया है।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। रक्षा, व्यापार, शिक्षा, खेल, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे समय में वर्तमान कूटनीतिक उपलब्धियों के साथ-साथ ऐतिहासिक संदर्भों को भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े मुद्दे देश की आंतरिक राजनीति में भी लगातार महत्वपूर्ण स्थान बनाए हुए हैं।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौते पर छिड़ी क्रेडिट की लड़ाई, कांग्रेस बोली- इतिहास जानिए, फिर उपलब्धि का दावा कीजिए

    भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौते पर छिड़ी क्रेडिट की लड़ाई, कांग्रेस बोली- इतिहास जानिए, फिर उपलब्धि का दावा कीजिए

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम सहयोग को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग को लेकर हुई प्रगति के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच इस उपलब्धि का श्रेय लेने को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। दोनों दल इस मुद्दे पर अलग-अलग दावे कर रहे हैं और अपने-अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को सामने रखकर राजनीतिक बढ़त हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

    भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक साख लगातार मजबूत हुई है, जिसके कारण ऑस्ट्रेलिया जैसे महत्वपूर्ण साझेदार देश के साथ रणनीतिक संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। पार्टी का दावा है कि वर्तमान नेतृत्व में भारत को वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद और जिम्मेदार रणनीतिक साझेदार के रूप में स्वीकार किया गया है, जिससे यूरेनियम सहयोग जैसे महत्वपूर्ण समझौते संभव हो सके हैं।

    वहीं कांग्रेस ने भाजपा के इन दावों का विरोध करते हुए कहा है कि भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता कई वर्ष पहले ही खुल चुका था। पार्टी का तर्क है कि इस दिशा में प्रारंभिक और महत्वपूर्ण निर्णय पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में लिए गए थे। कांग्रेस का कहना है कि उस समय दोनों देशों के बीच विश्वास निर्माण और कूटनीतिक प्रयासों के परिणामस्वरूप ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बिक्री की नीति में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी।

    कांग्रेस ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्वीकार्यता बढ़ी और उसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के प्रति अपनी नीति में परिवर्तन किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि वर्तमान सरकार को पूरे घटनाक्रम के ऐतिहासिक संदर्भ को समझे बिना केवल राजनीतिक लाभ के लिए पूरे श्रेय का दावा नहीं करना चाहिए। कांग्रेस ने भाजपा के नेताओं से तथ्यों का अध्ययन करने और ऐतिहासिक घटनाक्रम को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की सलाह भी दी है।

    दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते को अंतिम रूप तक पहुंचाने में वर्तमान सरकार की सक्रिय कूटनीति, रणनीतिक दृष्टिकोण और वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पार्टी का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में तेजी से मजबूत हुए हैं, जिसका लाभ परमाणु ऊर्जा सहयोग में भी दिखाई दे रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश नीति और रणनीतिक समझौतों को लेकर श्रेय की राजनीति नई नहीं है। अक्सर अलग-अलग सरकारें अपने कार्यकाल में हुई प्रगति को प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जबकि ऐसे समझौते कई वर्षों तक चलने वाली कूटनीतिक प्रक्रिया का परिणाम होते हैं। इसलिए किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते के पीछे विभिन्न चरणों में किए गए प्रयासों और निरंतर संवाद की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंध भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा दे सकते हैं। हालांकि यूरेनियम सहयोग को लेकर शुरू हुई यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय हित से जुड़े ऐसे विषयों पर दीर्घकालिक कूटनीतिक प्रयासों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को दी नई उड़ान, कबड्डी से ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल तक साझा रोडमैप, खिलाड़ियों और खेल विज्ञान पर रहेगा विशेष फोकस

    भारत-ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को दी नई उड़ान, कबड्डी से ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल तक साझा रोडमैप, खिलाड़ियों और खेल विज्ञान पर रहेगा विशेष फोकस

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से एक व्यापक स्पोर्ट्स रोडमैप पर सहमति बनाई है। इस पहल का लक्ष्य दोनों देशों के बीच खिलाड़ियों के विकास, खेल विज्ञान, प्रशिक्षण, निवेश और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में सहयोग को मजबूत करना है। इस रोडमैप के माध्यम से खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, तकनीक, उद्योग और सांस्कृतिक साझेदारी के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।

    यह रोडमैप वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच हुए खेल सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में 2030 राष्ट्रमंडल खेल, 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक और पैरालंपिक सहित बड़े वैश्विक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए सहयोग के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनसे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। इसके तहत अनुभवों का आदान-प्रदान, संयुक्त प्रशिक्षण और खेल प्रबंधन में साझेदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।

    दोनों देशों ने खेल प्रशासन की अलग-अलग व्यवस्थाओं का सम्मान करते हुए संस्थागत सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। खेल संगठनों, विश्वविद्यालयों, राज्य सरकारों, निजी कंपनियों और सामुदायिक संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित कर नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों और साझा प्राथमिकताओं के आधार पर विभिन्न कार्यक्रमों का चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वयन किया जाएगा, जिससे सहयोग का दायरा लगातार विस्तारित हो सके।

    रोडमैप में खिलाड़ियों और कोचों के क्षमता विकास को विशेष महत्व दिया गया है। भारत में हाई-परफॉर्मेंस प्रशिक्षण केंद्रों के विकास, पैरा खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं, प्रशिक्षकों के आदान-प्रदान और ‘ट्रेन द ट्रेनर’ मॉडल के माध्यम से आधुनिक प्रशिक्षण प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। भारतीय खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया के उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने तथा ऑस्ट्रेलिया में योग और भारतीय खेल परंपराओं के प्रचार पर भी ध्यान दिया जाएगा।

    खेल विज्ञान और तकनीक इस साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार होंगे। दोनों देशों के विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान खिलाड़ियों के प्रदर्शन विश्लेषण, चोटों की रोकथाम, खेल पोषण, रिकवरी तकनीक, वियरेबल तकनीक और पैरा खेलों से जुड़े शोध पर मिलकर काम करेंगे। साथ ही डोपिंग रोधी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए संबंधित संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा तथा खेल नैतिकता और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

    इस साझेदारी के तहत खेल संस्कृति के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में कबड्डी और खो-खो जैसे भारतीय पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने की योजना है, जबकि भारत में ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल लीग और बास्केटबॉल जैसे खेलों की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी मुकाबलों और विशेष आयोजनों का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही भारत में नियमित रूप से बिग बैश लीग के मुकाबले आयोजित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के खेल प्रेमियों को नए अनुभव मिल सकें।

    रोडमैप में खेल उद्योग, खेल उपकरण निर्माण, मीडिया, प्रसारण, आयोजन प्रबंधन और स्टार्टअप क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की भी योजना शामिल है। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के बीच व्यावसायिक सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि खेल अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व और उच्च प्रदर्शन वाले खेलों में उनके अवसरों को बढ़ाने के लिए संयुक्त कार्यक्रमों और द्विपक्षीय प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापक साझेदारी दोनों देशों के खेल संबंधों को नई दिशा देने के साथ भविष्य की अंतरराष्ट्रीय खेल तैयारियों को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।