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  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत ने जीते 12 पदक, दो सिल्वर के बाद भी मेडल टैली में नौवें नंबर पर बरकरार

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत ने जीते 12 पदक, दो सिल्वर के बाद भी मेडल टैली में नौवें नंबर पर बरकरार


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। छठे दिन दो और रजत पदक जीतने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 12 हो गई है और वह मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 34 स्वर्ण सहित 78 पदकों के साथ शीर्ष पर काबिज है।
    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। छठे दिन दो और रजत पदक जीतने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 12 हो गई है और वह मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 34 स्वर्ण सहित 78 पदकों के साथ शीर्ष पर काबिज है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: ऑस्ट्रेलिया का जलवा बरकरार, भारत 12 पदकों के साथ नौवें स्थान पर; मुक्केबाजी में तीन और मेडल पक्के

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत की झोली में दो और रजत पदक आए, जिससे देश के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई। हालांकि इसके बावजूद भारत मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया ने अपने दमदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए शीर्ष स्थान पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है।

    मेडल तालिका में ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे है। उसने अब तक कुल 78 पदक जीते हैं, जिनमें 34 स्वर्ण, 17 रजत और 27 कांस्य पदक शामिल हैं। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों का दबदबा लगभग हर खेल में देखने को मिल रहा है और फिलहाल उसके आसपास कोई अन्य देश नजर नहीं आ रहा।

    दूसरे स्थान पर कनाडा है, जिसने अब तक 35 पदक अपने नाम किए हैं। कनाडा के खाते में 13 स्वर्ण, 10 रजत और 12 कांस्य पदक हैं। तीसरे स्थान पर इंग्लैंड काबिज है, जिसके खिलाड़ियों ने 43 पदक जीते हैं। इनमें 10 स्वर्ण, 18 रजत और 15 कांस्य पदक शामिल हैं। मेजबान स्कॉटलैंड 7 स्वर्ण सहित 15 पदकों के साथ चौथे स्थान पर है, जबकि नाइजीरिया 6 स्वर्ण और कुल 11 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर बना हुआ है।

    भारत ने अब तक 2 स्वर्ण, 7 रजत और 3 कांस्य पदक जीतकर कुल 12 पदक हासिल किए हैं। छठे दिन महिला वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में मिले दो रजत पदकों ने भारत की पदक संख्या में इजाफा किया, हालांकि मेडल तालिका में उसकी रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ और वह नौवें स्थान पर कायम है।

    महिला वेटलिफ्टिंग के 69 किलोग्राम वर्ग में हरजिंदर कौर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाकर यह उपलब्धि हासिल की।

    एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालते हुए रजत पदक जीता। इसके साथ ही वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए और भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

    मुक्केबाजी में भी भारत का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा। प्रीति, प्रिया और जादुमणि सिंह ने अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाले सभी मुक्केबाजों का पदक सुनिश्चित हो जाता है। ऐसे में भारत के खाते में कम से कम तीन और कांस्य पदक पक्के हो चुके हैं, जिन्हें बेहतर रंग में बदलने का मौका अब सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में मिलेगा।

    भारतीय दल से आने वाले दिनों में वेटलिफ्टिंग, मुक्केबाजी, कुश्ती और एथलेटिक्स जैसी स्पर्धाओं में और पदकों की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ियों का मौजूदा प्रदर्शन जारी रहता है तो भारत मेडल तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

  • पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच कांग्रेस ने साझा की इंदिरा गांधी की ऐतिहासिक तस्वीरें, कूटनीति और प्रकृति संरक्षण की विरासत पर दिया जोर

    पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच कांग्रेस ने साझा की इंदिरा गांधी की ऐतिहासिक तस्वीरें, कूटनीति और प्रकृति संरक्षण की विरासत पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच राजनीतिक बयानबाजी का नया दौर देखने को मिला है। कांग्रेस ने इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के ऑस्ट्रेलिया दौरों की ऐतिहासिक तस्वीरें साझा करते हुए उनके पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों के प्रति लगाव और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में निभाई गई भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा। इस कदम को वर्तमान विदेश दौरे के बीच राजनीतिक और वैचारिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने वर्ष 1968 और 1981 के ऑस्ट्रेलिया दौरों से जुड़ी दो तस्वीरें साझा कीं। एक तस्वीर में इंदिरा गांधी कंगारू को भोजन कराती हुई दिखाई देती हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में वह सिडनी के तारोंगा जू में कोआला के साथ नजर आती हैं। इन तस्वीरों के माध्यम से कांग्रेस ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि इंदिरा गांधी विदेश यात्राओं के दौरान केवल कूटनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहती थीं, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण जैसे विषयों को भी महत्व देती थीं।

    कांग्रेस का कहना है कि इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान दिया। उन्होंने विभिन्न देशों के साथ जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण से जुड़े समझौतों को बढ़ावा दिया तथा वैश्विक स्तर पर प्रकृति संरक्षण के प्रयासों का समर्थन किया। उनके कार्यकाल में पर्यावरण से जुड़ी कई नीतियों और संरक्षण अभियानों को भी नई दिशा मिली, जिनका प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिला।

    इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑस्ट्रेलिया दौरा भी कई महत्वपूर्ण समझौतों और कार्यक्रमों के कारण चर्चा में रहा। दौरे के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक, तकनीकी और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई नई पहलों पर सहमति व्यक्त की। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला जैसे भविष्य की तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

    प्रधानमंत्री ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय मौजूद रहे। इसके अलावा उन्होंने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड का दौरा किया और दोनों देशों के बीच खेल सहयोग को नई दिशा देने वाले कार्यक्रमों में भी भाग लिया। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और उच्च तकनीक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से जुड़े कई निर्णय भी इस यात्रा के दौरान सामने आए, जिन्हें द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश यात्राओं के दौरान पूर्व और वर्तमान सरकारों की उपलब्धियों को लेकर राजनीतिक दल अक्सर अपनी-अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को सामने रखते हैं। कांग्रेस द्वारा इंदिरा गांधी के पुराने ऑस्ट्रेलिया दौरों को याद करना भी इसी क्रम का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें उनके पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में योगदान को रेखांकित किया गया है।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। रक्षा, व्यापार, शिक्षा, खेल, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे समय में वर्तमान कूटनीतिक उपलब्धियों के साथ-साथ ऐतिहासिक संदर्भों को भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े मुद्दे देश की आंतरिक राजनीति में भी लगातार महत्वपूर्ण स्थान बनाए हुए हैं।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौते पर छिड़ी क्रेडिट की लड़ाई, कांग्रेस बोली- इतिहास जानिए, फिर उपलब्धि का दावा कीजिए

    भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौते पर छिड़ी क्रेडिट की लड़ाई, कांग्रेस बोली- इतिहास जानिए, फिर उपलब्धि का दावा कीजिए

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम सहयोग को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग को लेकर हुई प्रगति के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच इस उपलब्धि का श्रेय लेने को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। दोनों दल इस मुद्दे पर अलग-अलग दावे कर रहे हैं और अपने-अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को सामने रखकर राजनीतिक बढ़त हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

    भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक साख लगातार मजबूत हुई है, जिसके कारण ऑस्ट्रेलिया जैसे महत्वपूर्ण साझेदार देश के साथ रणनीतिक संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। पार्टी का दावा है कि वर्तमान नेतृत्व में भारत को वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद और जिम्मेदार रणनीतिक साझेदार के रूप में स्वीकार किया गया है, जिससे यूरेनियम सहयोग जैसे महत्वपूर्ण समझौते संभव हो सके हैं।

    वहीं कांग्रेस ने भाजपा के इन दावों का विरोध करते हुए कहा है कि भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता कई वर्ष पहले ही खुल चुका था। पार्टी का तर्क है कि इस दिशा में प्रारंभिक और महत्वपूर्ण निर्णय पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में लिए गए थे। कांग्रेस का कहना है कि उस समय दोनों देशों के बीच विश्वास निर्माण और कूटनीतिक प्रयासों के परिणामस्वरूप ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बिक्री की नीति में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी।

    कांग्रेस ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्वीकार्यता बढ़ी और उसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के प्रति अपनी नीति में परिवर्तन किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि वर्तमान सरकार को पूरे घटनाक्रम के ऐतिहासिक संदर्भ को समझे बिना केवल राजनीतिक लाभ के लिए पूरे श्रेय का दावा नहीं करना चाहिए। कांग्रेस ने भाजपा के नेताओं से तथ्यों का अध्ययन करने और ऐतिहासिक घटनाक्रम को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की सलाह भी दी है।

    दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते को अंतिम रूप तक पहुंचाने में वर्तमान सरकार की सक्रिय कूटनीति, रणनीतिक दृष्टिकोण और वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पार्टी का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में तेजी से मजबूत हुए हैं, जिसका लाभ परमाणु ऊर्जा सहयोग में भी दिखाई दे रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश नीति और रणनीतिक समझौतों को लेकर श्रेय की राजनीति नई नहीं है। अक्सर अलग-अलग सरकारें अपने कार्यकाल में हुई प्रगति को प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जबकि ऐसे समझौते कई वर्षों तक चलने वाली कूटनीतिक प्रक्रिया का परिणाम होते हैं। इसलिए किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते के पीछे विभिन्न चरणों में किए गए प्रयासों और निरंतर संवाद की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंध भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा दे सकते हैं। हालांकि यूरेनियम सहयोग को लेकर शुरू हुई यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय हित से जुड़े ऐसे विषयों पर दीर्घकालिक कूटनीतिक प्रयासों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को दी नई उड़ान, कबड्डी से ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल तक साझा रोडमैप, खिलाड़ियों और खेल विज्ञान पर रहेगा विशेष फोकस

    भारत-ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को दी नई उड़ान, कबड्डी से ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल तक साझा रोडमैप, खिलाड़ियों और खेल विज्ञान पर रहेगा विशेष फोकस

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से एक व्यापक स्पोर्ट्स रोडमैप पर सहमति बनाई है। इस पहल का लक्ष्य दोनों देशों के बीच खिलाड़ियों के विकास, खेल विज्ञान, प्रशिक्षण, निवेश और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में सहयोग को मजबूत करना है। इस रोडमैप के माध्यम से खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, तकनीक, उद्योग और सांस्कृतिक साझेदारी के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।

    यह रोडमैप वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच हुए खेल सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में 2030 राष्ट्रमंडल खेल, 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक और पैरालंपिक सहित बड़े वैश्विक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए सहयोग के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनसे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। इसके तहत अनुभवों का आदान-प्रदान, संयुक्त प्रशिक्षण और खेल प्रबंधन में साझेदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।

    दोनों देशों ने खेल प्रशासन की अलग-अलग व्यवस्थाओं का सम्मान करते हुए संस्थागत सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। खेल संगठनों, विश्वविद्यालयों, राज्य सरकारों, निजी कंपनियों और सामुदायिक संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित कर नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों और साझा प्राथमिकताओं के आधार पर विभिन्न कार्यक्रमों का चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वयन किया जाएगा, जिससे सहयोग का दायरा लगातार विस्तारित हो सके।

    रोडमैप में खिलाड़ियों और कोचों के क्षमता विकास को विशेष महत्व दिया गया है। भारत में हाई-परफॉर्मेंस प्रशिक्षण केंद्रों के विकास, पैरा खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं, प्रशिक्षकों के आदान-प्रदान और ‘ट्रेन द ट्रेनर’ मॉडल के माध्यम से आधुनिक प्रशिक्षण प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। भारतीय खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया के उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने तथा ऑस्ट्रेलिया में योग और भारतीय खेल परंपराओं के प्रचार पर भी ध्यान दिया जाएगा।

    खेल विज्ञान और तकनीक इस साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार होंगे। दोनों देशों के विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान खिलाड़ियों के प्रदर्शन विश्लेषण, चोटों की रोकथाम, खेल पोषण, रिकवरी तकनीक, वियरेबल तकनीक और पैरा खेलों से जुड़े शोध पर मिलकर काम करेंगे। साथ ही डोपिंग रोधी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए संबंधित संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा तथा खेल नैतिकता और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

    इस साझेदारी के तहत खेल संस्कृति के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में कबड्डी और खो-खो जैसे भारतीय पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने की योजना है, जबकि भारत में ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल लीग और बास्केटबॉल जैसे खेलों की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी मुकाबलों और विशेष आयोजनों का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही भारत में नियमित रूप से बिग बैश लीग के मुकाबले आयोजित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के खेल प्रेमियों को नए अनुभव मिल सकें।

    रोडमैप में खेल उद्योग, खेल उपकरण निर्माण, मीडिया, प्रसारण, आयोजन प्रबंधन और स्टार्टअप क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की भी योजना शामिल है। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के बीच व्यावसायिक सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि खेल अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व और उच्च प्रदर्शन वाले खेलों में उनके अवसरों को बढ़ाने के लिए संयुक्त कार्यक्रमों और द्विपक्षीय प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापक साझेदारी दोनों देशों के खेल संबंधों को नई दिशा देने के साथ भविष्य की अंतरराष्ट्रीय खेल तैयारियों को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।

  • एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा संदेश: भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स रोडमैप लॉन्च, खेल साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा संदेश: भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स रोडमैप लॉन्च, खेल साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में भारत और ऑस्ट्रेलिया के खेल संबंधों को नई दिशा देने वाला भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलेबरेशन रोडमैप लॉन्च किया। इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने खेलों को दोनों देशों की दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार बताते हुए भविष्य में सहयोग को और विस्तार देने का संकल्प जताया।

    एमसीजी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के युवा खिलाड़ियों से मुलाकात की। क्रिकेट, कबड्डी और ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल से जुड़े खिलाड़ियों ने उनसे बातचीत की, ऑटोग्राफ लिए और सामूहिक तस्वीरें खिंचवाईं। कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेट कप्तान स्टीव वॉ और पूर्व महिला कप्तान लीसा स्टालेकर भी मौजूद रहीं।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड हर भारतीय के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां आते ही भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट मुकाबलों की यादें ताजा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि साझा जुनून और मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री ने युवा खिलाड़ियों की ऊर्जा और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें देखकर भविष्य के चैंपियनों की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि खेल देशों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं और भारत-ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में खेलों की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

    स्पोर्ट्स कोलेबरेशन रोडमैप के तहत दोनों देश क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में भी सहयोग बढ़ाएंगे। इसमें स्पोर्ट्स ट्रेनिंग, खेल विज्ञान, तकनीक, खेल अवसंरचना, निवेश और प्रतिभा विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में खेलों को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे खेलो इंडिया कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी की महत्वाकांक्षा का भी जिक्र किया, जबकि 2032 ओलंपिक खेलों की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में होगी।

    उन्होंने यह भी घोषणा की कि बिग बैश लीग 2026-27 का उद्घाटन मुकाबला भारत के चेन्नई में आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में किसी भी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने का बड़ा अवसर है और इससे दोनों देशों के खेल संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

    कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी खेलों के साथ-साथ शिक्षा, नवाचार और युवा विकास जैसे क्षेत्रों में भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देश खेल भावना के साथ आगे बढ़ेंगे और “हम साथ खेलेंगे, हम साथ जीतेंगे” की भावना को और मजबूत करेंगे।

  • एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा स्पोर्ट्स विजन: चेन्नई में होगा बीबीएल मुकाबला, भारत-ऑस्ट्रेलिया ने लॉन्च किया नया रोडमैप

    एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा स्पोर्ट्स विजन: चेन्नई में होगा बीबीएल मुकाबला, भारत-ऑस्ट्रेलिया ने लॉन्च किया नया रोडमैप


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में आयोजित विशेष कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया के खेल संबंधों को नई मजबूती देने वाली कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस दौरान दोनों देशों ने क्रिकेट से लेकर खेल विज्ञान, युवा विकास और खेल उद्योग तक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

    सबसे बड़ी घोषणा बिग बैश लीग (बीबीएल) को लेकर हुई। दोनों प्रधानमंत्रियों ने बताया कि 12 दिसंबर को बीबीएल के 16वें सीजन का उद्घाटन मुकाबला चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मुकाबला मेलबर्न रेनेगेड्स और पर्थ स्कॉर्चर्स के बीच होगा। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में पहली बार बिग बैश लीग का कोई मैच विदेशी धरती पर आयोजित किया जाएगा, जिसे दोनों देशों के खेल संबंधों के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

    एमसीजी में प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न खेलों में भाग लेने वाले युवा खिलाड़ियों से भी मुलाकात की। उन्होंने क्रिकेट, कबड्डी और ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल खेल रहे बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि खेल लोगों और देशों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में दोनों देश युवा प्रतिभाओं के विकास, खेल प्रशिक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर और खेल विज्ञान के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त रूप से स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन रोडमैप भी लॉन्च किया। इस पहल के तहत खेल प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, खेल विज्ञान, निवेश और खेल उद्योग में सहयोग को नई दिशा दी जाएगी। साथ ही दोनों देशों के युवा खिलाड़ियों के लिए यूथ स्पोर्ट्स फेस्टिवल आयोजित करने की भी घोषणा की गई, जिससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और सीखने का बेहतर अवसर मिलेगा।

    एमसीजी कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ और पूर्व महिला कप्तान लीसा स्थालेकर भी मौजूद रहीं। प्रधानमंत्री मोदी ने स्टीव वॉ के साथ मुलाकात कर तस्वीर खिंचवाई, जबकि लीसा स्थालेकर ने प्रधानमंत्री का ऑटोग्राफ लिया। प्रधानमंत्री ने शेन वॉर्न स्टैंड का भी दौरा किया और हाल ही में महिला टी20 विश्व कप जीतने पर ऑस्ट्रेलियाई टीम को बधाई दी।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की मेजबानी का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक की मेजबानी करेगा। ऐसे में दोनों देशों के पास खेल, खेल उद्योग और युवा विकास के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के व्यापक अवसर मौजूद हैं। यह पहल भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी को खेल कूटनीति के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • मोदी दौरे ने फिर दिखाई भारतीय समुदाय की ताकत, ऑस्ट्रेलिया में व्यापार, निवेश और राजनीतिक प्रभाव को मिली नई पहचान

    मोदी दौरे ने फिर दिखाई भारतीय समुदाय की ताकत, ऑस्ट्रेलिया में व्यापार, निवेश और राजनीतिक प्रभाव को मिली नई पहचान


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ वहां रह रहे भारतीय समुदाय की बढ़ती भूमिका को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। पिछले कुछ वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती आबादी, उनकी आर्थिक भागीदारी और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय उपस्थिति ने दोनों देशों के संबंधों को मजबूत आधार प्रदान किया है। यही कारण है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली रणनीतिक वार्ताओं में भारतीय समुदाय को केवल प्रवासी समूह नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाओं, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाओं, उद्यमिता और शोध जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र वहां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि हजारों पेशेवर विभिन्न उद्योगों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय उद्यमियों ने छोटे और मध्यम उद्योगों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था में निवेश और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    राजनीतिक दृष्टि से भी भारतीय समुदाय का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न राज्यों और स्थानीय निकायों में भारतीय मूल के प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ी है। चुनावों के दौरान प्रमुख राजनीतिक दल भारतीय समुदाय से संवाद को प्राथमिकता दे रहे हैं और उनकी सामाजिक तथा आर्थिक प्राथमिकताओं को अपने एजेंडे में स्थान दे रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय मूल के मतदाता अब वहां की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण समूह के रूप में उभर चुके हैं।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट भी दोनों देशों को जोड़ने वाला सबसे मजबूत सांस्कृतिक माध्यम बना हुआ है। खेल के जरिए दोनों देशों के लोगों के बीच वर्षों से गहरा जुड़ाव बना है। क्रिकेट ने केवल खेल संबंधों को ही मजबूत नहीं किया, बल्कि पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यावसायिक अवसरों को भी नई दिशा दी है। दोनों देशों के बीच खेल सहयोग लगातार बढ़ रहा है और इससे सामाजिक स्तर पर भी निकटता मजबूत हुई है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे यह संकेत मिला कि भारत और ऑस्ट्रेलिया केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी के रूप में भी अपने संबंधों को नई ऊंचाई देना चाहते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की सफलता केवल आर्थिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यह समुदाय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विश्वास, सामाजिक सहयोग और दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश, शिक्षा, नवाचार और रक्षा सहयोग के विस्तार के साथ भारतीय समुदाय की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने की संभावना है। इसी कारण भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में भारतीय प्रवासी समुदाय को भविष्य की साझेदारी का एक मजबूत और भरोसेमंद स्तंभ माना जा रहा है।

  • मेलबर्न में PM मोदी की अपील पर रोशनी से जगमगाया स्टेडियम, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के सम्मान में हजारों लोगों ने जलाईं मोबाइल फ्लैशलाइट

    मेलबर्न में PM मोदी की अपील पर रोशनी से जगमगाया स्टेडियम, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के सम्मान में हजारों लोगों ने जलाईं मोबाइल फ्लैशलाइट

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में आयोजित भारतीय समुदाय के विशाल कार्यक्रम में भारत और ऑस्ट्रेलिया की मित्रता का एक विशेष दृश्य देखने को मिला। ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत से पहले मौजूद लोगों से ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के सम्मान में अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाने का आग्रह किया। उनकी अपील के तुरंत बाद हजारों लोगों ने एक साथ अपनी फ्लैशलाइट जलाकर पूरा स्टेडियम रोशनी से भर दिया। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला और उपस्थित लोगों ने दोनों देशों की मित्रता के समर्थन में जोरदार उत्साह व्यक्त किया।

    मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय मूल के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आयोजन में 30 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी ने इसे ऑस्ट्रेलिया में किसी वैश्विक नेता के स्वागत के लिए आयोजित सबसे बड़े सामुदायिक कार्यक्रमों में शामिल कर दिया। कार्यक्रम के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते संबंधों, सांस्कृतिक जुड़ाव और आर्थिक सहयोग को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय से मिलने की खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि वह लंबे समय से इस मुलाकात का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम को “हाउसफुल” और “ब्लॉकबस्टर” बताते हुए उपस्थित लोगों के उत्साह की सराहना की। इसके बाद उन्होंने विक्टोरिया राज्य के नेतृत्व और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के सम्मान में फ्लैशलाइट जलाने की अपील की, जिसे लोगों ने पूरे उत्साह के साथ स्वीकार किया। कुछ ही क्षणों में पूरा स्टेडियम मोबाइल की रोशनी से जगमगा उठा।

    ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होती साझेदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में दिखाई दे रहा उत्साह दोनों देशों के लोगों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का प्रतीक है। उन्होंने भारत की अपनी यात्राओं का उल्लेख करते हुए वहां की संस्कृति, ऊर्जा और विकास की प्रशंसा की तथा दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में दोनों देशों के बीच पिछले वर्षों में मजबूत हुए रिश्तों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में उनके पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद दोनों देशों के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में यह उनका तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है, जो द्विपक्षीय संबंधों की बढ़ती मजबूती का संकेत है। उन्होंने इस प्रगति का श्रेय दोनों देशों के लोगों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय को दिया।

    प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इंडोनेशिया की यात्रा के बाद शुरू हुआ है। ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। मेलबर्न में आयोजित यह कार्यक्रम केवल भारतीय समुदाय के सम्मान का अवसर नहीं रहा, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गहराते रणनीतिक और जन-स्तरीय संबंधों का भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर सामने आया।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई ऊर्जा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में यूरेनियम निर्यात समझौते पर बनी सहमति, रणनीतिक साझेदारी हुई और मजबूत

    भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई ऊर्जा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में यूरेनियम निर्यात समझौते पर बनी सहमति, रणनीतिक साझेदारी हुई और मजबूत

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई मजबूती देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था की पुष्टि भी की गई, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच उच्चस्तरीय वार्ता हुई। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, निवेश और व्यापारिक सहयोग जैसे कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक सहयोग पर भी पड़ेगा।

    संयुक्त बयान में दोनों देशों ने वर्ष 2015 के परमाणु सहयोग समझौते के तहत भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था को आगे बढ़ाने की पुष्टि की। इस निर्णय को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और भविष्य की ऊर्जा तकनीकों में संयुक्त सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

    दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख दोहराते हुए हर प्रकार के आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ की कड़ी निंदा की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों, उनके समर्थकों, वित्तपोषकों और सहयोगियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों ने आतंकवाद से जुड़े खतरों, ऑनलाइन कट्टरपंथ, नई तकनीकों के दुरुपयोग, आतंकी वित्तपोषण और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।

    हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दोनों नेताओं ने नियम-आधारित व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, हवाई आवाजाही और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व पर बल देते हुए क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए साझा प्रयास जारी रखने की बात कही।

    यात्रा के दौरान आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में दोनों देशों के उद्योगपतियों और निवेशकों ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऊर्जा, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और निवेश से जुड़ी योजनाओं को साझा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। वहीं ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने भी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूरेनियम आपूर्ति, स्वच्छ ऊर्जा सहयोग, निवेश और व्यापारिक साझेदारी से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी। साथ ही रक्षा, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच विश्वास और समन्वय पहले की तुलना में अधिक मजबूत होने की संभावना है। यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को व्यापक और दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

  • ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित CEO फोरम को संबोधित किया। इस दौरान दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने निवेश, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया की ओर से गुजरात में बड़े निवेश और वहां दो प्रमुख विश्वविद्यालयों के परिसर स्थापित करने की घोषणा भी की गई, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने आपसी विश्वास और साझा हितों के आधार पर सहयोग का मजबूत ढांचा तैयार किया है, जिसका लाभ अब व्यापार और निवेश के रूप में दिखाई देने लगा है।

    प्रधानमंत्री ने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। भारतीय उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में बेहतर पहुंच मिली है, जबकि दोनों देशों के उद्योगों के लिए नए अवसर भी तैयार हुए हैं। सरकार का लक्ष्य इस आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाकर निवेश तथा औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

    सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने गुजरात में निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया का एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल वर्ष के अंत में भारत का दौरा करेगा, जहां निवेश की नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि राज्यों के स्तर पर भी प्रत्यक्ष सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि क्षेत्रीय विकास और उद्योगों को नई गति मिल सके।

    प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि भारत हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी से निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, पूंजी और प्राकृतिक संसाधन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

    शिक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिली है। ऑस्ट्रेलिया की दो प्रमुख विश्वविद्यालयों ने गुजरात में अपने परिसर स्थापित करने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने इसे केवल शैक्षणिक सहयोग नहीं बल्कि प्रतिभा विकास और कौशल निर्माण की दिशा में दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को छात्र आदान-प्रदान से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर की प्रतिभा तैयार करने पर मिलकर काम करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राज्यों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और स्थानीय संस्थानों के बीच भी सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच बढ़ता संवाद निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा तथा आने वाले वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध आर्थिक सहयोग के एक नए दौर में प्रवेश करेंगे।