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  • एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा संदेश: भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स रोडमैप लॉन्च, खेल साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा संदेश: भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स रोडमैप लॉन्च, खेल साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में भारत और ऑस्ट्रेलिया के खेल संबंधों को नई दिशा देने वाला भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलेबरेशन रोडमैप लॉन्च किया। इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने खेलों को दोनों देशों की दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार बताते हुए भविष्य में सहयोग को और विस्तार देने का संकल्प जताया।

    एमसीजी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के युवा खिलाड़ियों से मुलाकात की। क्रिकेट, कबड्डी और ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल से जुड़े खिलाड़ियों ने उनसे बातचीत की, ऑटोग्राफ लिए और सामूहिक तस्वीरें खिंचवाईं। कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेट कप्तान स्टीव वॉ और पूर्व महिला कप्तान लीसा स्टालेकर भी मौजूद रहीं।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड हर भारतीय के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां आते ही भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट मुकाबलों की यादें ताजा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि साझा जुनून और मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री ने युवा खिलाड़ियों की ऊर्जा और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें देखकर भविष्य के चैंपियनों की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि खेल देशों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं और भारत-ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में खेलों की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

    स्पोर्ट्स कोलेबरेशन रोडमैप के तहत दोनों देश क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में भी सहयोग बढ़ाएंगे। इसमें स्पोर्ट्स ट्रेनिंग, खेल विज्ञान, तकनीक, खेल अवसंरचना, निवेश और प्रतिभा विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में खेलों को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे खेलो इंडिया कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी की महत्वाकांक्षा का भी जिक्र किया, जबकि 2032 ओलंपिक खेलों की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में होगी।

    उन्होंने यह भी घोषणा की कि बिग बैश लीग 2026-27 का उद्घाटन मुकाबला भारत के चेन्नई में आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में किसी भी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने का बड़ा अवसर है और इससे दोनों देशों के खेल संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

    कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी खेलों के साथ-साथ शिक्षा, नवाचार और युवा विकास जैसे क्षेत्रों में भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देश खेल भावना के साथ आगे बढ़ेंगे और “हम साथ खेलेंगे, हम साथ जीतेंगे” की भावना को और मजबूत करेंगे।

  • एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा स्पोर्ट्स विजन: चेन्नई में होगा बीबीएल मुकाबला, भारत-ऑस्ट्रेलिया ने लॉन्च किया नया रोडमैप

    एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा स्पोर्ट्स विजन: चेन्नई में होगा बीबीएल मुकाबला, भारत-ऑस्ट्रेलिया ने लॉन्च किया नया रोडमैप


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में आयोजित विशेष कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया के खेल संबंधों को नई मजबूती देने वाली कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस दौरान दोनों देशों ने क्रिकेट से लेकर खेल विज्ञान, युवा विकास और खेल उद्योग तक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

    सबसे बड़ी घोषणा बिग बैश लीग (बीबीएल) को लेकर हुई। दोनों प्रधानमंत्रियों ने बताया कि 12 दिसंबर को बीबीएल के 16वें सीजन का उद्घाटन मुकाबला चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मुकाबला मेलबर्न रेनेगेड्स और पर्थ स्कॉर्चर्स के बीच होगा। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में पहली बार बिग बैश लीग का कोई मैच विदेशी धरती पर आयोजित किया जाएगा, जिसे दोनों देशों के खेल संबंधों के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

    एमसीजी में प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न खेलों में भाग लेने वाले युवा खिलाड़ियों से भी मुलाकात की। उन्होंने क्रिकेट, कबड्डी और ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल खेल रहे बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि खेल लोगों और देशों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में दोनों देश युवा प्रतिभाओं के विकास, खेल प्रशिक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर और खेल विज्ञान के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त रूप से स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन रोडमैप भी लॉन्च किया। इस पहल के तहत खेल प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, खेल विज्ञान, निवेश और खेल उद्योग में सहयोग को नई दिशा दी जाएगी। साथ ही दोनों देशों के युवा खिलाड़ियों के लिए यूथ स्पोर्ट्स फेस्टिवल आयोजित करने की भी घोषणा की गई, जिससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और सीखने का बेहतर अवसर मिलेगा।

    एमसीजी कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ और पूर्व महिला कप्तान लीसा स्थालेकर भी मौजूद रहीं। प्रधानमंत्री मोदी ने स्टीव वॉ के साथ मुलाकात कर तस्वीर खिंचवाई, जबकि लीसा स्थालेकर ने प्रधानमंत्री का ऑटोग्राफ लिया। प्रधानमंत्री ने शेन वॉर्न स्टैंड का भी दौरा किया और हाल ही में महिला टी20 विश्व कप जीतने पर ऑस्ट्रेलियाई टीम को बधाई दी।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की मेजबानी का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक की मेजबानी करेगा। ऐसे में दोनों देशों के पास खेल, खेल उद्योग और युवा विकास के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के व्यापक अवसर मौजूद हैं। यह पहल भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी को खेल कूटनीति के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • मोदी दौरे ने फिर दिखाई भारतीय समुदाय की ताकत, ऑस्ट्रेलिया में व्यापार, निवेश और राजनीतिक प्रभाव को मिली नई पहचान

    मोदी दौरे ने फिर दिखाई भारतीय समुदाय की ताकत, ऑस्ट्रेलिया में व्यापार, निवेश और राजनीतिक प्रभाव को मिली नई पहचान


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ वहां रह रहे भारतीय समुदाय की बढ़ती भूमिका को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। पिछले कुछ वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती आबादी, उनकी आर्थिक भागीदारी और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय उपस्थिति ने दोनों देशों के संबंधों को मजबूत आधार प्रदान किया है। यही कारण है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली रणनीतिक वार्ताओं में भारतीय समुदाय को केवल प्रवासी समूह नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाओं, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाओं, उद्यमिता और शोध जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र वहां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि हजारों पेशेवर विभिन्न उद्योगों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय उद्यमियों ने छोटे और मध्यम उद्योगों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था में निवेश और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    राजनीतिक दृष्टि से भी भारतीय समुदाय का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न राज्यों और स्थानीय निकायों में भारतीय मूल के प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ी है। चुनावों के दौरान प्रमुख राजनीतिक दल भारतीय समुदाय से संवाद को प्राथमिकता दे रहे हैं और उनकी सामाजिक तथा आर्थिक प्राथमिकताओं को अपने एजेंडे में स्थान दे रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय मूल के मतदाता अब वहां की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण समूह के रूप में उभर चुके हैं।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट भी दोनों देशों को जोड़ने वाला सबसे मजबूत सांस्कृतिक माध्यम बना हुआ है। खेल के जरिए दोनों देशों के लोगों के बीच वर्षों से गहरा जुड़ाव बना है। क्रिकेट ने केवल खेल संबंधों को ही मजबूत नहीं किया, बल्कि पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यावसायिक अवसरों को भी नई दिशा दी है। दोनों देशों के बीच खेल सहयोग लगातार बढ़ रहा है और इससे सामाजिक स्तर पर भी निकटता मजबूत हुई है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे यह संकेत मिला कि भारत और ऑस्ट्रेलिया केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी के रूप में भी अपने संबंधों को नई ऊंचाई देना चाहते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की सफलता केवल आर्थिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यह समुदाय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विश्वास, सामाजिक सहयोग और दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश, शिक्षा, नवाचार और रक्षा सहयोग के विस्तार के साथ भारतीय समुदाय की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने की संभावना है। इसी कारण भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में भारतीय प्रवासी समुदाय को भविष्य की साझेदारी का एक मजबूत और भरोसेमंद स्तंभ माना जा रहा है।

  • मेलबर्न में PM मोदी की अपील पर रोशनी से जगमगाया स्टेडियम, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के सम्मान में हजारों लोगों ने जलाईं मोबाइल फ्लैशलाइट

    मेलबर्न में PM मोदी की अपील पर रोशनी से जगमगाया स्टेडियम, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के सम्मान में हजारों लोगों ने जलाईं मोबाइल फ्लैशलाइट

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में आयोजित भारतीय समुदाय के विशाल कार्यक्रम में भारत और ऑस्ट्रेलिया की मित्रता का एक विशेष दृश्य देखने को मिला। ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत से पहले मौजूद लोगों से ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के सम्मान में अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाने का आग्रह किया। उनकी अपील के तुरंत बाद हजारों लोगों ने एक साथ अपनी फ्लैशलाइट जलाकर पूरा स्टेडियम रोशनी से भर दिया। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला और उपस्थित लोगों ने दोनों देशों की मित्रता के समर्थन में जोरदार उत्साह व्यक्त किया।

    मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय मूल के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आयोजन में 30 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी ने इसे ऑस्ट्रेलिया में किसी वैश्विक नेता के स्वागत के लिए आयोजित सबसे बड़े सामुदायिक कार्यक्रमों में शामिल कर दिया। कार्यक्रम के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते संबंधों, सांस्कृतिक जुड़ाव और आर्थिक सहयोग को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय से मिलने की खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि वह लंबे समय से इस मुलाकात का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम को “हाउसफुल” और “ब्लॉकबस्टर” बताते हुए उपस्थित लोगों के उत्साह की सराहना की। इसके बाद उन्होंने विक्टोरिया राज्य के नेतृत्व और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के सम्मान में फ्लैशलाइट जलाने की अपील की, जिसे लोगों ने पूरे उत्साह के साथ स्वीकार किया। कुछ ही क्षणों में पूरा स्टेडियम मोबाइल की रोशनी से जगमगा उठा।

    ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होती साझेदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में दिखाई दे रहा उत्साह दोनों देशों के लोगों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का प्रतीक है। उन्होंने भारत की अपनी यात्राओं का उल्लेख करते हुए वहां की संस्कृति, ऊर्जा और विकास की प्रशंसा की तथा दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में दोनों देशों के बीच पिछले वर्षों में मजबूत हुए रिश्तों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में उनके पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद दोनों देशों के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में यह उनका तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है, जो द्विपक्षीय संबंधों की बढ़ती मजबूती का संकेत है। उन्होंने इस प्रगति का श्रेय दोनों देशों के लोगों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय को दिया।

    प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इंडोनेशिया की यात्रा के बाद शुरू हुआ है। ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। मेलबर्न में आयोजित यह कार्यक्रम केवल भारतीय समुदाय के सम्मान का अवसर नहीं रहा, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गहराते रणनीतिक और जन-स्तरीय संबंधों का भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर सामने आया।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई ऊर्जा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में यूरेनियम निर्यात समझौते पर बनी सहमति, रणनीतिक साझेदारी हुई और मजबूत

    भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई ऊर्जा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में यूरेनियम निर्यात समझौते पर बनी सहमति, रणनीतिक साझेदारी हुई और मजबूत

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई मजबूती देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था की पुष्टि भी की गई, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच उच्चस्तरीय वार्ता हुई। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, निवेश और व्यापारिक सहयोग जैसे कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक सहयोग पर भी पड़ेगा।

    संयुक्त बयान में दोनों देशों ने वर्ष 2015 के परमाणु सहयोग समझौते के तहत भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था को आगे बढ़ाने की पुष्टि की। इस निर्णय को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और भविष्य की ऊर्जा तकनीकों में संयुक्त सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

    दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख दोहराते हुए हर प्रकार के आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ की कड़ी निंदा की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों, उनके समर्थकों, वित्तपोषकों और सहयोगियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों ने आतंकवाद से जुड़े खतरों, ऑनलाइन कट्टरपंथ, नई तकनीकों के दुरुपयोग, आतंकी वित्तपोषण और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।

    हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दोनों नेताओं ने नियम-आधारित व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, हवाई आवाजाही और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व पर बल देते हुए क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए साझा प्रयास जारी रखने की बात कही।

    यात्रा के दौरान आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में दोनों देशों के उद्योगपतियों और निवेशकों ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऊर्जा, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और निवेश से जुड़ी योजनाओं को साझा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। वहीं ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने भी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूरेनियम आपूर्ति, स्वच्छ ऊर्जा सहयोग, निवेश और व्यापारिक साझेदारी से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी। साथ ही रक्षा, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच विश्वास और समन्वय पहले की तुलना में अधिक मजबूत होने की संभावना है। यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को व्यापक और दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

  • ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित CEO फोरम को संबोधित किया। इस दौरान दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने निवेश, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया की ओर से गुजरात में बड़े निवेश और वहां दो प्रमुख विश्वविद्यालयों के परिसर स्थापित करने की घोषणा भी की गई, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने आपसी विश्वास और साझा हितों के आधार पर सहयोग का मजबूत ढांचा तैयार किया है, जिसका लाभ अब व्यापार और निवेश के रूप में दिखाई देने लगा है।

    प्रधानमंत्री ने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। भारतीय उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में बेहतर पहुंच मिली है, जबकि दोनों देशों के उद्योगों के लिए नए अवसर भी तैयार हुए हैं। सरकार का लक्ष्य इस आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाकर निवेश तथा औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

    सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने गुजरात में निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया का एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल वर्ष के अंत में भारत का दौरा करेगा, जहां निवेश की नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि राज्यों के स्तर पर भी प्रत्यक्ष सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि क्षेत्रीय विकास और उद्योगों को नई गति मिल सके।

    प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि भारत हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी से निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, पूंजी और प्राकृतिक संसाधन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

    शिक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिली है। ऑस्ट्रेलिया की दो प्रमुख विश्वविद्यालयों ने गुजरात में अपने परिसर स्थापित करने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने इसे केवल शैक्षणिक सहयोग नहीं बल्कि प्रतिभा विकास और कौशल निर्माण की दिशा में दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को छात्र आदान-प्रदान से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर की प्रतिभा तैयार करने पर मिलकर काम करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राज्यों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और स्थानीय संस्थानों के बीच भी सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच बढ़ता संवाद निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा तथा आने वाले वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध आर्थिक सहयोग के एक नए दौर में प्रवेश करेंगे।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में नई गति की उम्मीद, पीएम मोदी की यात्रा से वार्षिक समिट, आर्थिक सहयोग और लोगों के जुड़ाव को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

    भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में नई गति की उम्मीद, पीएम मोदी की यात्रा से वार्षिक समिट, आर्थिक सहयोग और लोगों के जुड़ाव को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तेजी से मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। यात्रा से पहले ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त नागेश सिंह ने दोनों देशों के बीच विकसित हो रहे रणनीतिक सहयोग, आर्थिक साझेदारी, रक्षा संबंधों, लोगों के बीच बढ़ते संपर्क और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह दौरा दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करेगा तथा भविष्य के सहयोग के लिए नए रास्ते खोलेगा।

    उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दोनों देशों के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं। वर्ष 2020 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उनके अनुसार दोनों लोकतांत्रिक देशों के साझा मूल्य इस संबंध को और अधिक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

    नागेश सिंह ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाए रखने के पक्षधर हैं। हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष और अस्थिरता के बावजूद भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध स्थिरता और भरोसे के साथ आगे बढ़े हैं। यही कारण है कि दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी एक-दूसरे के साथ समन्वय बढ़ा रहे हैं।

    उन्होंने आर्थिक सहयोग को भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार ऑस्ट्रेलिया के पास प्रचुर मात्रा में महत्वपूर्ण खनिज और प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं, जबकि भारत के पास विशाल बाजार और मजबूत विनिर्माण क्षमता है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनका मानना है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभदायक साबित होगी।

    भारतीय उच्चायुक्त ने दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी जुड़ाव को भी संबंधों की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लगभग दस लाख लोग विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षा, व्यवसाय, राजनीति और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में भारतीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी दोनों देशों के बीच मजबूत सामाजिक और सांस्कृतिक पुल का कार्य कर रही है। इससे आपसी विश्वास और सहयोग को लगातार नई मजबूती मिल रही है।

    उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आयोजित होने वाले वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन को भी विशेष महत्व का बताया। उनके अनुसार भारत बहुत कम देशों के साथ हर वर्ष शीर्ष नेतृत्व स्तर पर नियमित शिखर बैठक आयोजित करता है। यह परंपरा दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और निरंतर संवाद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा उसी निरंतरता का हिस्सा है और इससे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई पहल सामने आने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री के ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित करने के लिए एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। उच्चायुक्त ने बताया कि इस कार्यक्रम को लेकर भारतीय समुदाय में व्यापक उत्साह है और देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होने पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल भारतीय समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों की गहराई को भी प्रदर्शित करेगा।

    खेल सहयोग पर उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट से आगे बढ़कर अन्य खेलों में भी साझेदारी का विस्तार करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच खेलों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और नई खेल संस्कृतियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हो रही है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की द्विपक्षीय साझेदारी अपने स्वतंत्र आधार पर आगे बढ़ रही है और इसका मूल उद्देश्य शांति, स्थिरता, साझा विकास तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना है।

  • तीन देशों की अहम यात्रा पर रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    तीन देशों की अहम यात्रा पर रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय विदेश यात्रा पर इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे के लिए रवाना हो गए हैं। यह यात्रा भारत के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों, उच्चस्तरीय वार्ताओं और भारतीय समुदाय के साथ संवाद के माध्यम से तीनों देशों के साथ सहयोग को और व्यापक बनाने पर जोर रहेगा। यात्रा का उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, तकनीक और लोगों के बीच संबंधों को नई दिशा देना भी है।

    रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दौरा भारत के प्रमुख विकास साझेदार देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ युवाओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा से भारत के वैश्विक सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी को नया बल मिलेगा।

    यात्रा का पहला पड़ाव इंडोनेशिया है, जहां प्रधानमंत्री कई उच्चस्तरीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। दोनों देशों के बीच वर्षों से मजबूत सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और समुद्री संबंध रहे हैं। इस दौरे के दौरान द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा के साथ भविष्य की साझेदारी को और व्यापक बनाने पर चर्चा होने की संभावना है। सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यक्रम भी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को नई मजबूती देंगे।

    इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे, जहां रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग जैसे प्रमुख विषयों पर वार्ता होगी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग, उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचार और खेल विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है।

    ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय को भारत और संबंधित देशों के बीच सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे संवाद दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड जाएंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई गति देने, निवेश बढ़ाने और व्यावसायिक सहयोग को विस्तार देने पर चर्चा होगी। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। भारतीय समुदाय के साथ संवाद भी इस दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार, शिक्षा, कृषि, नवाचार और सेवा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित उच्चस्तरीय संवाद से दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूती मिल सकती है।

    प्रधानमंत्री की यह तीन देशों की यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और मुक्त, समावेशी तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को भी आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सहयोग और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के भारत के प्रयासों को भी इस दौरे से नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • 6 से 11 जुलाई तक प्रधानमंत्री मोदी का अहम विदेश दौरा, व्यापार, रक्षा और निवेश समेत कई मुद्दों पर होगी उच्चस्तरीय बातचीत

    6 से 11 जुलाई तक प्रधानमंत्री मोदी का अहम विदेश दौरा, व्यापार, रक्षा और निवेश समेत कई मुद्दों पर होगी उच्चस्तरीय बातचीत

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की बहुस्तरीय विदेश यात्रा पर रहेंगे। इस दौरे का उद्देश्य तीनों देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना है। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री विभिन्न शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और व्यापार, निवेश, रक्षा, क्षेत्रीय सहयोग तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे अहम विषयों पर चर्चा करेंगे।

    प्रधानमंत्री अपनी यात्रा की शुरुआत इंडोनेशिया से करेंगे, जहां वह 6 से 8 जुलाई तक आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वह इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेता भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे और भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों पर भी विचार-विमर्श करेंगे। यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इंडोनेशिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर प्रंबानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को नई मजबूती देने का प्रतीक मानी जा रही है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री वहां भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे और प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद करेंगे।

    इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करेंगे। मेलबर्न में वह ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज़ के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, आर्थिक साझेदारी, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे।

    ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में भाग लेंगे, जहां दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों और निवेशकों को संबोधित करेंगे। इस मंच पर व्यापारिक सहयोग बढ़ाने, निवेश के नए अवसर तलाशने और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर रहेगा। प्रधानमंत्री मेलबर्न में भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।

    यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 10 और 11 जुलाई को न्यूजीलैंड पहुंचेंगे। यह दौरा विशेष महत्व रखता है क्योंकि लगभग चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की राजकीय यात्रा होगी। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ उनकी विस्तृत वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, वाणिज्य, रक्षा, कृषि, शिक्षा और अन्य सहयोगी क्षेत्रों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में बढ़ते संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए नई पहल पर भी चर्चा होने की संभावना है।

    न्यूजीलैंड में प्रधानमंत्री व्यापार और खेल जगत की प्रमुख हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित कर दोनों देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने का संदेश देंगे। यह छह दिवसीय विदेश दौरा भारत की सक्रिय कूटनीतिक नीति, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की रणनीति और प्रमुख साझेदार देशों के साथ बहुआयामी संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • विमेंस टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया का एकतरफा दबदबा, बेथ मूनी के नाबाद अर्धशतक से वेस्टइंडीज को 8 विकेट से दी मात

    विमेंस टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया का एकतरफा दबदबा, बेथ मूनी के नाबाद अर्धशतक से वेस्टइंडीज को 8 विकेट से दी मात

    नई दिल्ली । विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वेस्टइंडीज को 8 विकेट से हराकर लगातार अपनी मजबूत दावेदारी साबित की। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम ने आठवीं बार टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई और एक बार फिर खिताब जीतने की ओर मजबूत कदम बढ़ाया। टीम की जीत में बेथ मूनी की नाबाद अर्धशतकीय पारी निर्णायक साबित हुई, जबकि गेंदबाजों ने भी शुरुआती चरण में वेस्टइंडीज को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोक दिया।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत संतुलित रही। कप्तान हेली मैथ्यूज और किआना जोसेफ ने पहले विकेट के लिए उपयोगी साझेदारी कर टीम को संभली हुई शुरुआत दिलाई। हालांकि शुरुआती विकेट गिरने के बाद मध्यक्रम ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी के सामने टिक नहीं सका। नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से रन गति भी प्रभावित हुई और टीम बड़े स्कोर की ओर नहीं बढ़ सकी।

    मध्यक्रम में शेमेन कैंपबेल ने पारी को संभालने का प्रयास किया, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। अंतिम ओवरों में डिएंड्रा डॉटिन ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए टीम के स्कोर को सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचाया। उन्होंने तेज रन बनाते हुए महत्वपूर्ण योगदान दिया और जनिलेया ग्लासगो के साथ उपयोगी साझेदारी निभाई। निर्धारित 20 ओवर में वेस्टइंडीज ने सात विकेट पर 125 रन बनाए।

    ऑस्ट्रेलिया की ओर से गेंदबाजी में सोफी मोलिनक्स, एशले गार्डनर और जॉर्जिया वेयरहैम ने शानदार प्रदर्शन किया। तीनों गेंदबाजों ने दो-दो विकेट लेकर वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी को लगातार दबाव में रखा। एनाबेल सदरलैंड ने भी एक विकेट हासिल कर विपक्षी टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोकने में अहम भूमिका निभाई।

    126 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने शुरुआत से ही सकारात्मक बल्लेबाजी की। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बावजूद बेथ मूनी ने पारी को पूरी तरह संभाल लिया। उन्होंने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए लगातार रन बनाए और विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। उनके साथ एशले गार्डनर ने भी तेज गति से रन जुटाए और दोनों के बीच हुई नाबाद साझेदारी ने मुकाबले को पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया।

    बेथ मूनी ने सिर्फ 36 गेंदों में आठ चौकों की मदद से नाबाद 61 रन की मैच विजयी पारी खेली। वहीं एशले गार्डनर ने 20 गेंदों में 35 रन बनाकर उनका बेहतरीन साथ निभाया। ऑस्ट्रेलिया ने लक्ष्य केवल 13 ओवर में हासिल कर अपनी बल्लेबाजी की गहराई और आक्रामकता का शानदार प्रदर्शन किया। वेस्टइंडीज की ओर से चिनेल हेनरी और हेली मैथ्यूज को एक-एक विकेट मिला, लेकिन वे टीम को मुकाबले में बनाए रखने में सफल नहीं हो सकीं।

    इस प्रभावशाली जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में उसका प्रदर्शन लगातार मजबूत रहता है। अब टीम की नजर फाइनल में एक और विश्व खिताब जीतने पर होगी, जबकि वेस्टइंडीज का अभियान सेमीफाइनल में समाप्त हो गया।