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  • अयोध्या में दीपोत्सव को भव्य बनाने की तैयारी शुरू, 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीये

    अयोध्या में दीपोत्सव को भव्य बनाने की तैयारी शुरू, 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीये


    नई दिल्ली। अयोध्या में 10वें दीपोत्सव को भव्य बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों को 30 लाख दीयों से रोशन करने का लक्ष्य रखा गया है। घाटों की सफाई के बाद दीये रखने के लिए मार्किंग का काम शुरू हो चुका है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन के साथ तैयारियों की औपचारिक शुरुआत होगी।

    दीपोत्सव की तैयारियों का समन्वय डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय कर रहा है। विश्वविद्यालय ने 30 लाख दीये जलाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 33 लाख दीये मंगवाए हैं। परिवहन और रखरखाव के दौरान दीयों के टूटने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त दीयों की व्यवस्था की गई है।

    शुक्रवार सुबह 7:30 बजे होगा भूमि पूजन

    दीपोत्सव की तैयारियों के लिए शुक्रवार सुबह 7:30 बजे घाट नंबर 10 पर भूमि पूजन किया जाएगा। इसमें डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति बिजेंद्र सिंह सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। भूमि पूजन के साथ घाटों पर दीयों की व्यवस्था और अन्य तैयारियों में तेजी आएगी।

    55 से बढ़ाकर 56 घाटों पर होगी दीयों की व्यवस्था

    इस बार दीपोत्सव के लिए 56 घाटों को शामिल किया गया है। इनमें विस्तारित राम की पैड़ी, चौधरी चरण सिंह घाट और भजन संध्या स्थल भी शामिल हैं। इससे पहले दीयों की व्यवस्था 55 घाटों पर की जाती थी।

    दीयों को निर्धारित संख्या और एक समान क्रम में लगाने के लिए ब्लॉक आधारित लेआउट तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, घाटों पर मार्किंग का काम तीन से चार दिनों में पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद दीये रखने और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    35 हजार स्वयंसेवक संभालेंगे व्यवस्था

    दीये लगाने और उन्हें जलाने के लिए करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को तैनात किया जाएगा। इनमें 30 डिग्री कॉलेज, 40 इंटरमीडिएट कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसर के विद्यार्थी शामिल होंगे। स्वयंसेवकों को अलग-अलग घाटों के हिसाब से जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। इसके लिए उनका प्रशिक्षण भी चल रहा है।

    स्वयंसेवकों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। उन्हें क्यूआर कोड, फोटो, संपर्क विवरण और तैनाती स्थल की जानकारी वाले पहचान पत्र दिए जाएंगे।

    दीयों की आपूर्ति, घाटों के प्रबंधन, स्वयंसेवकों की तैनाती और कार्यक्रम की सुरक्षा सहित सभी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने के लिए विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं। इस बार 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य दीपोत्सव को भव्य स्वरूप देने की तैयारी का अहम हिस्सा है।

  • उज्जैन से दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा शुरू, पत्नी संग दर्शन के बाद 70 दिन पैदल चलेंगे

    उज्जैन से दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा शुरू, पत्नी संग दर्शन के बाद 70 दिन पैदल चलेंगे

    मध्य प्रदेश: के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा 20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू हो गई। मंदिरों में चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर निकाली जा रही यह यात्रा लगभग 950 किलोमीटर की दूरी तय करके अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचेगी। इसे करीब 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।

    यात्रा शुरू करने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। उन्होंने सबसे पहले चिंतामन गणेश मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद नृसिंह घाट के पास बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। महाकाल मंदिर में दर्शन करने के बाद यात्रा आगे बढ़ी।

    यात्रा के पहले दिन लगभग तीन हजार लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई। आगे के पड़ावों पर प्रतिदिन एक हजार से 1,500 लोगों के जुड़ने का अनुमान है। इसमें साधु-संतों, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, विधायकों और महिलाओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। यात्रा के माध्यम से मंदिरों में आने वाले चढ़ावे और धार्मिक स्थलों के संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की मांग उठाई जा रही है।

    दिग्विजय सिंह ने यात्रा के दौरान भोजन, नाश्ते, चाय और ठहरने की व्यवस्था को लेकर भी बात कही है। अलग-अलग पड़ावों पर सहयोग करने वाले लोग इन व्यवस्थाओं में मदद करेंगे। उनका कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि यात्रा के दौरान भोजन और भंडारों का खर्च कौन उठा रहा है। यात्रा का उद्देश्य धार्मिक स्थलों से जुड़ी व्यवस्थाओं और चढ़ावे के उपयोग में स्पष्टता की मांग को सामने लाना है।

    यात्रा का पहला पड़ाव उज्जैन के कानीपुरा में रखा गया है। शहर में यात्रा पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, कमरी मार्ग चौराहा, टंकी चौराहा, मिर्जा नईम बेग मार्ग, तेलीवाड़ा चौराहा, कंठाल चौराहा, निजातपुरा और कोयला फाटक सहित कई इलाकों से होकर गुजरेगी। इसके बाद नगर निगम के सामने, गाड़ी अड्डा चौराहा, दरगाह मंडी और कानीपुरा रोड से आगे बढ़ेगी। तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी में रात के भोजन और विश्राम की व्यवस्था रखी गई है।

    कानीपुरा से आगे यात्रा सिंदुरिया, तराना और कनासिया होते हुए शाजापुर जिले की ओर जाएगी। मध्य प्रदेश में इसका प्रस्तावित मार्ग सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर और चंदेरी से होकर गुजरेगा। इसके बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी। वहां तालबेहट, जेरोन और ओरछा के बाद चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचने की योजना है। यात्रा का अंतिम पड़ाव राम मंदिर होगा।

    यात्रा के साथ एक विशेष रथ भी चल रहा है। इसमें भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। रथ में गंगा, यमुना, शिप्रा, कावेरी और नर्मदा नदियों के जल से भरे कलश भी रखे गए हैं। इस रथ का निर्माण भरत पोरवाल के निर्देशन में महावीर जैन और सतीश शर्मा ने किया है।

    करीब 70 दिनों में यात्रा पूरी करने के लिए दिग्विजय सिंह ने पैदल चलने की तैयारी पहले से की थी। इसके लिए वह प्रतिदिन लगभग आठ किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास कर रहे थे। अब उज्जैन से शुरू हुई यह यात्रा निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए अयोध्या में समाप्त होगी।

  • राम मंदिर में अयोध्यावासियों के लिए अलग प्रवेश द्वार की तैयारी, आधार कार्ड से मिल सकता है सीधे दर्शन का लाभ

    राम मंदिर में अयोध्यावासियों के लिए अलग प्रवेश द्वार की तैयारी, आधार कार्ड से मिल सकता है सीधे दर्शन का लाभ

    अयोध्या। राम मंदिर में स्थानीय निवासियों को रामलला के सीधे दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर जल्द मंथन होगा। इसके तहत अयोध्यावासियों को आधार कार्ड के माध्यम से प्रवेश देने और संत-महंतों व गृहस्थों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था बनाने पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव ने 15 अक्टूबर को धार्मिक न्यास समिति की बैठक बुलाई है। पहली बार भौतिक रूप से आयोजित होने वाली इस बैठक में अयोध्या के संत-महंतों और गृहस्थों को रामलला के दर्शन सुलभ कराने के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा होगी। बैठक में तैयार रूपरेखा को दो दिसंबर को ट्रस्ट की कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्ताव के रूप में रखा जाएगा। इसके बाद ट्रस्ट की सहमति और सुझावों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    पुलिस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट अहम

    स्थानीय निवासियों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था लागू करने से पहले पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की सकारात्मक रिपोर्ट जरूरी मानी जा रही है। 15 अक्टूबर को होने वाली बैठक में यह भी स्पष्ट होने की संभावना है कि संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट ट्रस्ट को मिली है या नहीं।

    यदि रिपोर्ट अनुकूल रही, तो स्थानीय लोगों के लिए सीधे दर्शन की सुविधा देने की योजना आगे बढ़ सकती है। इसके साथ ही संत-महंतों और गृहस्थों के लिए निर्धारित प्रवेश द्वार बनाने पर भी निर्णय लिया जा सकता है।

    यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलती है, तो स्थानीय दर्शनार्थियों के लिए पहले से लागू व्यवस्था जारी रह सकती है। इसके तहत अयोध्या के निवासियों को आधार कार्ड के माध्यम से छह महीने की अवधि वाला नियमित दर्शन पास उपलब्ध कराया जाता है।

    अलग-अलग लेन बनाने की मांग

    राम मंदिर में स्थानीय दर्शनार्थियों के लिए अलग प्रवेश लेन बनाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। स्थानीय संत-महंतों का कहना है कि अलग लेन की व्यवस्था नहीं होने से दर्शन के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए स्थानीय निवासियों, संत-महंतों और गृहस्थों के लिए अलग-अलग प्रवेश व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

    धार्मिक न्यास समिति की बैठक में इन समस्याओं और संभावित समाधानों पर विचार किया जाएगा। बैठक में बनने वाली रूपरेखा के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

    15 अक्टूबर से निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक

    राम मंदिर की निर्माण समिति की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक भी 15 अक्टूबर से शुरू होगी। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या पहुंचेंगे। संभावना जताई जा रही है कि धार्मिक न्यास समिति की बैठक में उन्हें भी आमंत्रित किया जा सकता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश व्यवस्था से जुड़े विषय पर उनका सुझाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    निर्माण समिति की बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव भी पहली बार हिस्सा लेंगे। इस दौरान निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के साथ अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निर्माण कार्यों का भी अवलोकन किया जाएगा।

    अब 15 अक्टूबर की बैठकों में स्थानीय निवासियों के लिए दर्शन व्यवस्था और मंदिर निर्माण से जुड़े विषयों पर होने वाली चर्चा के बाद आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • अयोध्या में योगी बनाम अखिलेश का मुकाबला हुआ तो कौन पड़ेगा भारी? पिछले चुनावों के आंकड़े क्या कहते हैं

    अयोध्या में योगी बनाम अखिलेश का मुकाबला हुआ तो कौन पड़ेगा भारी? पिछले चुनावों के आंकड़े क्या कहते हैं

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने के साथ ही नेताओं के बीच जुबानी जंग भी बढ़ने लगी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती ने सियासी चर्चा को और तेज कर दिया है। हालांकि, दोनों नेताओं के अयोध्या से चुनाव लड़ने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन इस बयानबाजी के बाद संभावित मुकाबले को लेकर कयास लगाए जाने लगे हैं।

    दरअसल, अयोध्या में एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती देते हुए कहा कि वह पवन पांडेय के खिलाफ चुनाव लड़कर दिखाएं। इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चेलों से मुकाबला करने के बजाय दोनों अयोध्या से नामांकन कर चुनाव लड़ें। इस बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि दोनों नेता वास्तव में अयोध्या विधानसभा सीट से आमने-सामने आते हैं, तो किसका पलड़ा भारी रह सकता है?

    फिलहाल यह मुकाबला काल्पनिक है। इसके संभावित नतीजे का अनुमान पिछले चुनावों, सामाजिक समीकरणों, स्थानीय मुद्दों और दोनों दलों के संगठनात्मक प्रभाव के आधार पर ही लगाया जा सकता है। यहां दिए गए जातीय आंकड़े विभिन्न मीडिया रिपोर्टों पर आधारित अनुमान हैं, आधिकारिक मतदाता आंकड़े नहीं। इसलिए इन्हें चुनाव परिणाम की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।

    अयोध्या में जातीय समीकरण की क्या है तस्वीर?

    अयोध्या विधानसभा क्षेत्र के जातीय समीकरण को लेकर अलग-अलग चुनावी रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट में ब्राह्मण मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत, यादव मतदाताओं की 12 प्रतिशत और दलित मतदाताओं की 15 प्रतिशत बताई गई थी। वहीं, दूसरी रिपोर्ट में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 40 हजार और दलित मतदाताओं की संख्या लगभग 65 हजार बताई गई थी।

    एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में करीब 45 हजार ब्राह्मण, 43 हजार अनुसूचित जाति और 36 हजार यादव मतदाता थे। इन आंकड़ों में अंतर होने के कारण जातीय समीकरण का आकलन करते समय सावधानी जरूरी है।

    अगड़ी जातियों का रुख किसके पक्ष में जा सकता है?

    अयोध्या विधानसभा सीट पर ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य, बनिया, अग्रवाल और कायस्थ जैसे समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ब्राह्मण मतदाता भाजपा और सपा, दोनों के लिए अहम हो सकते हैं। उनका रुख संभावित मुकाबले की दिशा प्रभावित कर सकता है।

    ठाकुर मतदाताओं को भाजपा के परंपरागत समर्थक वर्गों में गिना जाता है, जबकि वैश्य, बनिया और अग्रवाल समुदाय का प्रभाव शहरी और कारोबारी मतदाताओं के बीच महत्वपूर्ण माना जाता है। इन वर्गों का झुकाव किस पार्टी की ओर रहता है, यह उम्मीदवारों की छवि, स्थानीय मुद्दों और चुनाव प्रचार पर भी निर्भर करेगा।

    पिछड़ी जातियों के वोट पर भी रहेगी नजर

    अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में यादव, कुर्मी, मौर्य, कुशवाहा, निषाद, केवट, राजभर, लोध और अन्य पिछड़ी जातियों के मतदाता भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    यादव समुदाय को समाजवादी पार्टी का पारंपरिक समर्थक वर्ग माना जाता है। अखिलेश यादव के लिए चुनौती यह होगी कि वह यादव मतदाताओं के साथ-साथ दूसरे पिछड़े वर्गों और दलित मतदाताओं का कितना समर्थन हासिल कर पाते हैं।

    दूसरी ओर, कुर्मी, मौर्य, निषाद और राजभर जैसे समुदायों के बीच भाजपा की पकड़ संभावित मुकाबले में उसके लिए फायदेमंद हो सकती है। हालांकि, किसी समुदाय के सभी मतदाताओं के एक ही पार्टी को वोट देने की धारणा सही नहीं मानी जा सकती। स्थानीय उम्मीदवार, क्षेत्रीय समस्याएं और व्यक्तिगत पसंद भी मतदान को प्रभावित करते हैं।

    योगी के लिए राम मंदिर और विकास होंगे अहम मुद्दे

    यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं, तो राम मंदिर, धार्मिक पर्यटन, शहर का विकास, बुनियादी सुविधाएं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे चुनाव प्रचार के केंद्र में रह सकते हैं। भाजपा के संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी उनके लिए महत्वपूर्ण होगी।

    इसके साथ ही यह देखना होगा कि अगड़ी जातियों के अलावा पिछड़े वर्गों और दलित मतदाताओं के बीच भाजपा कितना समर्थन बनाए रख पाती है। केवल राम मंदिर या विकास के मुद्दे के आधार पर नतीजे का अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं होगा।

    अखिलेश के लिए पीडीए की कितनी होगी भूमिका?

    अखिलेश यादव की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए सामाजिक गठजोड़ को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन ने इस रणनीति को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया था।

    अयोध्या विधानसभा सीट पर अखिलेश यादव के लिए अहम सवाल यह होगा कि यादव मतदाताओं के साथ दूसरे पिछड़े वर्गों और दलित समुदायों का कितना समर्थन मिल पाता है। इसके अलावा ब्राह्मणों और अन्य गैर-यादव मतदाताओं का रुख भी संभावित मुकाबले पर असर डाल सकता है।

    पिछले तीन विधानसभा चुनावों में क्या रहा परिणाम?

    अयोध्या विधानसभा सीट पर पिछले तीन चुनावों के नतीजे बताते हैं कि यहां भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले का रुख समय के साथ बदला है।

    विधानसभा चुनाव विजेता पार्टी जीत का अंतर
    2012 तेज नारायण पांडेय (पवन पांडेय) सपा 5,405
    2017 वेद प्रकाश गुप्ता भाजपा 50,440
    2022 वेद प्रकाश गुप्ता भाजपा 19,990

    इन नतीजों से स्पष्ट है कि समाजवादी पार्टी वर्ष 2012 में अयोध्या सीट जीत चुकी है, जबकि भाजपा ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। वर्ष 2022 में भाजपा की जीत का अंतर 2017 के मुकाबले कम रहा था।

    वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने जीत दर्ज की थी। हालांकि, अयोध्या विधानसभा क्षेत्र के चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, इस हिस्से में भाजपा के लल्लू सिंह को सपा के अवधेश प्रसाद के मुकाबले करीब 4,667 मतों की बढ़त मिली थी। इससे पता चलता है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं का रुख अलग-अलग हो सकता है।

    आखिर किसका पलड़ा रहेगा भारी?

    योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच अयोध्या से संभावित मुकाबले में किसी एक को अभी से विजेता घोषित करना जल्दबाजी होगी। योगी के पक्ष में भाजपा का संगठन, हिंदुत्व की राजनीति और अयोध्या के विकास से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वहीं, अखिलेश यादव के लिए पीडीए का सामाजिक समीकरण, पिछड़े वर्गों और दलित मतदाताओं का समर्थन तथा स्थानीय स्तर पर पार्टी की सक्रियता निर्णायक साबित हो सकती है।

    पिछले चुनावों के आंकड़े भाजपा की लगातार दो विधानसभा जीत और सपा की पुरानी जीत, दोनों को सामने रखते हैं। ऐसे में अंतिम नतीजा उम्मीदवारों की लोकप्रियता, चुनावी रणनीति, स्थानीय मुद्दों और विभिन्न समुदायों के मतदान व्यवहार पर निर्भर करेगा। जब तक दोनों नेताओं के अयोध्या से चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं होती, तब तक यह चर्चा केवल संभावनाओं और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित अनुमान ही रहेगी। वास्तविक तस्वीर चुनाव के नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर सियासी घमासान, रामलला के दर्शन नहीं करने को लेकर संतों और भाजपा नेताओं ने उठाए सवाल

    अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर सियासी घमासान, रामलला के दर्शन नहीं करने को लेकर संतों और भाजपा नेताओं ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर भाजपा नेताओं और संतों ने सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव बीते दिन पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में शामिल होने अयोध्या पहुंचे थे। हालांकि, उनके राम मंदिर में रामलला के दर्शन नहीं करने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर समेत भाजपा नेताओं ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा।

    उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस तरह की राजनीति की जा रही है, उससे खुद अखिलेश यादव के सशंकित होने का संकेत मिलता है। राजभर ने कहा कि यदि अखिलेश यादव अयोध्या गए थे, तो उन्हें हनुमानगढ़ी और भगवान राम के दर्शन भी कर लेने चाहिए थे। उनके मुताबिक, ऐसा करने से इस तरह के सवाल खड़े नहीं होते। राजभर ने श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन स्थल पर नारेबाजी को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जहां भागवत कथा हो रही है, वहां अखिलेश यादव के लोग नारेबाजी कर रहे हैं। उन्होंने इस कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि भागवत कथा के स्थान को राजनीतिक मंच बनाना अखिलेश यादव को ही शोभा देता है।

    उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस मामले में समाजवादी पार्टी को आत्मावलोकन करने की सलाह दी। भाजपा नेता ने सपा पर मुस्लिम तुष्टिकरण और जाति के नाम पर वोट मांगने की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति करने वाले लोग उत्तर प्रदेश में सफल नहीं होंगे। पाठक ने अयोध्या में प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल करने का दावा भी किया। उनके बयान से स्पष्ट है कि भाजपा नेता अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को आगामी चुनावों के राजनीतिक संदर्भ में देख रहे हैं।

    भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने भी अखिलेश यादव के दौरे को लेकर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने सत्ता में रहते हुए अयोध्या को भुला दिया था। त्रिपाठी ने कहा कि योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद अयोध्या में 50 हजार से अधिक की परियोजनाएं आई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर भाजपा का मंदिर नहीं है, लेकिन अयोध्या पहुंचने के बावजूद अखिलेश यादव रामलला के दर्शन करने नहीं गए। उनके बयान में अयोध्या के विकास और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों को लेकर सपा की भूमिका पर सवाल उठाए गए।

    अखिलेश यादव के राम मंदिर में दर्शन नहीं करने को लेकर संतों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। अयोध्या दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के मंच से भगवान कृष्ण और न्याय की बात की, लेकिन राम के बारे में कुछ नहीं कहा। यह बात संतों को खटकी और उनके दौरे को लेकर सवाल उठने लगे। इस तरह धार्मिक आयोजन में उनकी मौजूदगी और रामलला के दर्शन नहीं करने का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

    उत्तर प्रदेश में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नेताओं के दौरे और बयानों को चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर उठे सवालों के बीच भाजपा नेताओं ने सपा की राजनीतिक रणनीति और धार्मिक मुद्दों पर उसके रुख को निशाने पर लिया है। वहीं, इस पूरे विवाद का केंद्र अखिलेश यादव का भागवत कथा में शामिल होना और रामलला के दर्शन नहीं करना बना हुआ है।

  • राम मंदिर दान चोरी की गोपनीय जानकारी लीक करने वाले तक पहुंची पुलिस, लखनऊ कनेक्शन भी सामने आया

    राम मंदिर दान चोरी की गोपनीय जानकारी लीक करने वाले तक पहुंची पुलिस, लखनऊ कनेक्शन भी सामने आया

    नई दिल्ली ।अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान चोरी मामले की जांच अब केवल चोरी की घटनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस की पड़ताल मंदिर और ट्रस्ट से जुड़ी गोपनीय जानकारियों के बाहर पहुंचने की कड़ी तक भी पहुंच गई है। जांच के दौरान पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों से पूछताछ की गई है और उनके बयान दर्ज किए गए हैं।

    पूछताछ से मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंची है, जिस पर दान चोरी से संबंधित संवेदनशील जानकारी एक प्रमुख राजनीतिक नेता तक पहुंचाने का संदेह है। जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित व्यक्ति की नेता से संपर्क था और वह उनसे मिलने के लिए लखनऊ भी गया था।

    गोपनीय जानकारी लीक होने का मामला उस समय जांच के दायरे में आया, जब चढ़ावा चोरी की घटना के करीब एक महीने बाद ट्रस्ट पदाधिकारियों के बीच हुई बातचीत से जुड़ी जानकारियां सामने आईं। इस बातचीत में मंदिर और ट्रस्ट के भीतर की सूचनाओं के बाहर पहुंचने को लेकर चिंता जताई गई थी।

    इसके बाद पुलिस ने यह पता लगाने पर ध्यान केंद्रित किया कि मंदिर और ट्रस्ट से जुड़ी अंदरूनी जानकारी किस व्यक्ति के माध्यम से बाहर पहुंची। जांच के दौरान एक कर्मचारी के प्रमुख राजनीतिक नेता के संपर्क में रहने और उनसे मिलने के लिए लखनऊ जाने की जानकारी सामने आई।

    पुलिस अब इस जानकारी का मिलान अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ में सामने आए तथ्यों से कर रही है। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

    जांच का एक हिस्सा संदिग्ध की सोशल मीडिया गतिविधियों से भी जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, जुलाई के बाद उसके फेसबुक अकाउंट से कई पोस्ट हटा दी गईं। 28 जुलाई के बाद अकाउंट पर कोई नई पोस्ट भी नहीं की गई। पुलिस ने हटाई गई पोस्ट से संबंधित डेटा हासिल करने के लिए साइबर सेल की मदद ली है।

    जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि चढ़ावा चोरी की घटना के बाद संबंधित लोगों के बीच किस तरह संपर्क हुआ और उस दौरान कौन-कौन सी सूचनाएं साझा की गईं। सोशल मीडिया गतिविधियों और आपसी संपर्कों को जांच के उपलब्ध तथ्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दान चोरी मामले में बैंक के संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ पूरी की जा चुकी है। भारतीय स्टेट बैंक से जुड़े सभी संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। इनमें तीन कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की गई। इनमें से दो कर्मचारियों से मिली जानकारी को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पुलिस इन बयानों को अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर मामले की पूरी कड़ी तैयार करने में जुटी है। जांच का उद्देश्य चोरी की घटना के साथ-साथ उससे जुड़ी सूचनाओं के संभावित लीक की भूमिका को भी स्पष्ट करना है।

    मामले की विवेचना अब अंतिम चरण में बताई जा रही है। पुलिस 25 सितंबर को आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है। जांच के दौरान दो और नाम सामने आने की संभावना भी जताई गई है, हालांकि इन नामों को लेकर अंतिम कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    22 सितंबर को आरोपियों की गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे हो रहे हैं। कानून के अनुसार, निर्धारित अवधि के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं होने की स्थिति में आरोपियों को जमानत का अधिकार मिल सकता है। इसलिए अब आरोपपत्र दाखिल होने और आरोपियों की जमानत से जुड़े घटनाक्रम पर भी नजर बनी हुई है।

  • राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का पुराना बयान फिर चर्चा में, कहा था- मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी

    राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का पुराना बयान फिर चर्चा में, कहा था- मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी

    नई दिल्ली ।स्वरा भास्कर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर दोबारा चर्चा में है। वीडियो में वह अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देती नजर आ रही हैं। अपने बयान में स्वरा ने कहा था कि वह फैसले से काफी दुखी और निराश हुई थीं। उन्होंने यह भी बताया था कि फैसले के बाद उन्होंने अपने परिचित मुस्लिम दोस्तों को संदेश भेजकर माफी मांगी थी।

    वीडियो में स्वरा भास्कर ने कहा था कि राम जन्मभूमि मामले में फैसला आने के बाद उन्हें लगा था कि यह फैसला उचित नहीं था। उन्होंने कहा था कि उस समय वह काफी नाराज थीं और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि देश में ऐसा फैसला कैसे आया। उन्होंने बताया था कि उनके फोन में मौजूद कई मुस्लिम परिचितों को उन्होंने संदेश भेजे थे।

    स्वरा के अनुसार, इन लोगों में शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान और फहाद अहमद समेत कई लोग शामिल थे। उन्होंने कहा था कि एक हिंदू होने के नाते वह अपने मुस्लिम परिचितों को यह बताना चाहती थीं कि फैसले को लेकर उन्हें खेद है और वह इससे सहमत नहीं हैं। उनके इस पुराने बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने स्वरा के बयान की आलोचना की और उनके पुराने रुख को लेकर सवाल उठाए। कई लोगों ने धार्मिक नारे और टिप्पणियां भी कीं। दूसरी ओर, कुछ समर्थकों ने उनके विचार व्यक्त करने के अधिकार का समर्थन किया। उनका तर्क रहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी नागरिक को न्यायिक फैसले पर अपनी व्यक्तिगत राय या असहमति व्यक्त करने का अधिकार है।

    राम जन्मभूमि विवाद पर स्वरा भास्कर पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जता चुकी थीं। 2019 में फैसले के बाद उनके बयानों को लेकर विवाद हुआ था। एक वकील की ओर से उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग किए जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, उस समय अटॉर्नी जनरल ने इस कार्रवाई की मांग से असहमति जताई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को अयोध्या भूमि विवाद पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए अधिकार देने का फैसला किया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।

    फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 1949 में विवादित परिसर में मूर्तियां रखे जाने और 1992 में बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराए जाने को कानून का उल्लंघन बताया था। अदालत ने विवादित भूमि पर रामलला के अधिकार से संबंधित निष्कर्ष भी दर्ज किए थे। फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ।

    अब स्वरा भास्कर के पुराने बयान का वीडियो फिर सामने आने से उनके 2019 के रुख पर सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है। बयान को लेकर आलोचना और समर्थन, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

  • 15 करोड़ की अयोध्या प्रॉपर्टी में धर्मशाला बनाएंगे अमिताभ बच्चन, पिता हरिवंश राय बच्चन को करेंगे समर्पित

    15 करोड़ की अयोध्या प्रॉपर्टी में धर्मशाला बनाएंगे अमिताभ बच्चन, पिता हरिवंश राय बच्चन को करेंगे समर्पित


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को लेकर खबर है कि वह अयोध्या में खरीदी गई अपनी प्रॉपर्टी पर धर्मशाला का निर्माण कराने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि यह धर्मशाला उनके पिता और प्रसिद्ध हिंदी कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन की स्मृति को समर्पित होगी। इसके लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण में भवन के नक्शे की मंजूरी को लेकर आवेदन भी दिया गया है।

    अमिताभ बच्चन ने कुछ समय पहले अयोध्या में करीब 15 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी खरीदी थी। अब इसी संपत्ति पर प्रस्तावित धर्मशाला को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अनुराग जैन के मुताबिक देशभर की कई जानी-मानी हस्तियां अयोध्या के विकास में योगदान दे रही हैं। उन्होंने बताया कि अमिताभ बच्चन से जुड़ा यह मामला फिलहाल आम लोगों की आपत्तियों के लिए खुला है।

    पिता की याद में होगा निर्माण

    अमिताभ बच्चन के पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के चर्चित कवि और अनुवादक थे। उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में ‘मधुशाला’ शामिल है। अमिताभ बच्चन कई मौकों पर अपने पिता को याद करते रहे हैं और उनकी कविताओं की पंक्तियां सोशल मीडिया पर भी साझा करते हैं।

    अमिताभ की मां तेजी बच्चन सामाजिक कार्यों से जुड़ी थीं और थिएटर में भी सक्रिय रहीं। ऐसे में पिता की स्मृति में धर्मशाला का निर्माण उनके परिवार से जुड़ी विरासत को आगे बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

    ‘कौन बनेगा करोड़पति’ को कर रहे हैं होस्ट

    अमिताभ बच्चन के काम की बात करें तो वह फिलहाल टीवी के लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ को होस्ट कर रहे हैं। शो में वह प्रतियोगियों के साथ सवाल-जवाब करने के अलावा अपनी जिंदगी से जुड़े किस्से और अनुभव भी साझा करते हैं।

    फिल्मों की बात करें तो अमिताभ बच्चन पिछली बार 2024 में रिलीज हुई रजनीकांत स्टारर ‘वेट्टैयन’ में नजर आए थे। इसके अलावा वह ‘कल्कि 2898 एडी’ और ‘सेक्शन 84’ जैसे प्रोजेक्ट्स से भी जुड़े हैं। ‘कल्कि 2898 एडी’ में उनके साथ प्रभास और कमल हासन नजर आएंगे, जबकि ‘सेक्शन 84’ में अभिषेक बनर्जी और निमरत कौर प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

  • राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, शिकायतों के बाद हटाए गए तीन कर्मचारियों की वापसी; संदीप गुप्ता को फिर मिली पुरानी जिम्मेदारी

    राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, शिकायतों के बाद हटाए गए तीन कर्मचारियों की वापसी; संदीप गुप्ता को फिर मिली पुरानी जिम्मेदारी

    नई दिल्ली । राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में बदलाव के बीच अलग-अलग शिकायतों और आरोपों के चलते मंदिर की जिम्मेदारियों से हटाए गए तीन कर्मचारियों की वापसी हो गई है। नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आगमन के बाद संदीप गुप्ता, केडी तिवारी और बजरंग पाठक को उनके पुराने दायित्वों के साथ बहाल किया गया है। इस फैसले के बाद मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं में पुराने कर्मचारियों की भूमिकाएं फिर से बहाल होने का सिलसिला सामने आया है।

    इन तीनों कर्मचारियों को अलग-अलग मामलों के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं से हटाया गया था। संदीप गुप्ता तीर्थ यात्री सेवा केंद्र में लॉकर व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। लॉकर में सामान रखने को लेकर एक विदेशी महिला से उनकी कहासुनी हुई थी, जिसके बाद महिला ने ट्रस्ट को शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर तत्कालीन अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने संदीप को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। जवाब से संतुष्ट नहीं होने के बाद उन्हें काम से हटा दिया गया था।

    संदीप गुप्ता शहीद कारसेवक वासुदेव गुप्ता के बेटे हैं। मंदिर में उन्हें काम दिए जाने के पीछे परिवार की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा गया था। नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आने के बाद संदीप की बहाली की सिफारिश की गई। इसके बाद उन्हें दोबारा उसी स्थान पर तैनात कर दिया गया और पुरानी जिम्मेदारी सौंप दी गई।

    दूसरी ओर, बजरंग पाठक प्रसाद व्यवस्था के प्रभारी थे। रामजन्मभूमि परिसर में तैनात एक महिला क्षेत्राधिकारी ने अपने मेहमानों के लिए प्रसाद दिलाने की सिफारिश की थी। बजरंग पाठक ने इसके लिए ट्रस्ट से आदेश लाने की बात कही और सिफारिश के आधार पर प्रसाद उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद क्षेत्राधिकारी ने ट्रस्ट से उनकी शिकायत की थी।

    शिकायत के बाद तत्कालीन अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने रामलला के आभूषणों और दानदाताओं से प्राप्त वस्तुओं की देखरेख करने वाले केडी तिवारी तथा प्रसाद व्यवस्था प्रभारी बजरंग पाठक को राम मंदिर से हटाकर बाग बिजैसी स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम भेज दिया था। केडी तिवारी ने वहां अपनी नई तैनाती पर काम शुरू कर दिया था, जबकि बजरंग पाठक ने आदेश का पालन नहीं किया और कारसेवक पुरम में सेवा देते रहे। इसके बाद उन्हें भी व्यवस्था से बाहर कर दिया गया था।

    अब स्वामी गोविंद देव गिरि के फैसले के बाद केडी तिवारी और बजरंग पाठक की भी राम मंदिर की पुरानी जिम्मेदारियों पर वापसी हो गई है। इससे मंदिर की व्यवस्थाओं में कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को लेकर नए प्रशासनिक दौर की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।

    इस बीच चढ़ावा प्रकरण के बाद महासचिव पद से त्यागपत्र देने वाले विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपतराय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी तीर्थ यात्री सेवा केंद्र पहुंचे। दोनों ने कर्मचारियों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि किसी भी तरह की परेशानी या समस्या होने पर उन्हें इसकी जानकारी दी जाए। दोनों ने करीब एक घंटे तक सेवा केंद्र में कर्मचारियों के साथ समय बिताया।

  • अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों की हुई पहली बैठक, जानिए क्‍या बोले सीईओ जितेंद्र मिश्रा ?

    अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों की हुई पहली बैठक, जानिए क्‍या बोले सीईओ जितेंद्र मिश्रा ?

    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नई जिम्मेदारियां तय होने के बाद गुरुवार को नवनियुक्त पदाधिकारियों की पहली बैठक हुई। रामघाट स्थित कार्यशाला के श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र कार्यालय में हुई इस बैठक में ट्रस्ट की नई प्रशासनिक व्यवस्था और कामकाज को लेकर चर्चा की गई।

    बैठक के बाद बाहर आए नवनियुक्त सीईओ और पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि आज सभी ने एक-दूसरे से परिचय किया और कई मुद्दों पर चर्चा हुई। आगे भी कई बैठकें होंगी, ताकि वे यहां की पूरी कार्यप्रणाली को समझ सकें। इसके बाद वे अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे। जितेंद्र मिश्रा ने कहा, “मैं बहुत सौभाग्यशाली हूं कि मुझे प्रभु श्रीराम और रामभक्तों की सेवा करने का अवसर मिला है।”

    बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद
    बैठक में नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्रा के अलावा ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देवगिरी, कोषाध्यक्ष महेश भागचंद, ट्रस्टी मदन मोहन पांडे सहित अकाउंटिंग व्यवस्था से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

    नई जिम्मेदारियां तय होने के बाद हुई यह पहली बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें ट्रस्ट के कामकाज और वित्तीय व्यवस्था को लेकर आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की गई। सभी पदाधिकारियों के एक-दूसरे से परिचय के बाद लेखा-जोखा, अकाउंटिंग सिस्टम और ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े विषयों की जानकारी भी साझा की गई।

    कार्यभार संभालने से पहले व्यवस्था समझेंगे सीईओ
    नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्रा के पदभार ग्रहण करने से पहले हुई इस बैठक को ट्रस्ट की नई प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आगे होने वाली बैठकों के जरिए ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े कामकाज को विस्तार से समझेंगे, इसके बाद औपचारिक रूप से जिम्मेदारी संभालेंगे।

    माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंदिर और ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक कार्यों, लेखा-जोखा और वित्तीय व्यवस्था को लेकर नई कार्ययोजना का खाका इन्हीं बैठकों के जरिए तैयार किया जाएगा।