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  • राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, मनीष तिवारी बोले- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है पूरा मामला

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, मनीष तिवारी बोले- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है पूरा मामला

    नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले, यूनिफॉर्म सिविल कोड और सिंधु जल संधि सहित कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना आवश्यक है, क्योंकि यह मामला करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है।

    राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के बयान के बाद प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और धार्मिक संस्थाओं की गरिमा पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे।

    उन्होंने कहा कि अयोध्या स्थित रामलला का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस प्रकार के किसी भी विवाद का निष्पक्ष समाधान आवश्यक है। उनका कहना था कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के संदेह की स्थिति समाप्त हो सके और तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आएं।

    महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में ड्राफ्टिंग कमेटी गठित किए जाने के निर्णय पर भी मनीष तिवारी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख किया गया है, न कि कॉमन सिविल कोड का। उनके अनुसार दोनों अवधारणाओं को एक समान मानना उचित नहीं है और इस विषय पर संवैधानिक प्रावधानों को सही संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।

    तिवारी ने यह भी कहा कि पहले जब इस विषय पर चर्चा हुई थी, तब यह स्पष्ट किया गया था कि कुछ विशेष समुदायों और अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने का विचार सामने आया था। उनका तर्क था कि यदि विभिन्न समुदायों के पारंपरिक और प्रथागत कानूनों को अलग रखा जाता है तो फिर इसे वास्तविक अर्थों में समान नागरिक संहिता कहना कठिन होगा। उन्होंने इस विषय पर व्यापक संवाद और संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

    सिंधु जल संधि और पाकिस्तान के साथ संबंधों पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में कांग्रेस सांसद ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर देश की नीति लंबे समय से स्पष्ट रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई के मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति मौजूद है और इस दिशा में सरकार को प्रभावी ढंग से अपनी नीति लागू करनी चाहिए।

    तिवारी ने कहा कि आतंकवाद और सामान्य संबंध साथ-साथ नहीं चल सकते। उनके अनुसार भारत की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं तथा सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के विरुद्ध सख्त रुख बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर देश के भीतर व्यापक सहमति बनी हुई है और सरकार को उसी भावना के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए।

    राम मंदिर विवाद, यूनिफॉर्म सिविल कोड और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों पर दिए गए मनीष तिवारी के बयान ऐसे समय सामने आए हैं जब ये तीनों विषय राष्ट्रीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं। उनके बयान को विपक्ष के दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जबकि इन मुद्दों पर आगे भी राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

  • MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह

    MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह


    भोपाल।
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता (Senior Congress leader) दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी के मुद्दे को लेकर दो अक्टूबर (गांधी जयंती) से उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) से अयोध्या (Ayodhya) तक ‘गैर-राजनीतिक’ पदयात्रा करेंगे। सिंह ने इस बात की घोषणा भोपाल में अपने सरकारी आवास के बाहर एक बैनर लगाने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मैंने अपने घर के बाहर एक बैनर लगाया है, जिस पर लिखा है चंदा चोरों का प्रवेश वर्जित है। आगे उन्होंने कहा कि अब यह बैनर सभी मंदिरों के बाहर लगना चाहिए कि चंदा चोरों से सावधान।

    दरअसल सिंह ने अपने घर के बार जो बैनर लगाया उस पर लिखा है, ‘जय सिया राम। हमारी आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए समूचे देश के द्वारा दिए गए चंदा के चोरों एवं चढ़ावा चोरों का मेरे निवास पर प्रवेश निषेध है।’ इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि वह अदालत में वाद दायर कर राम मंदिर के लिए दिया गया अपना चंदा वापस मांगेंगे क्योंकि उनके धन का दुरुपयोग हुआ है।


    ‘पदयात्रा में हर दिन चलूंगा 10 से 15 किमी पैदल’

    कांग्रेस नेता ने कहा, ‘राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के विरोध में मैं दो अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा शुरू करूंगा। यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। इसमें किसी दल का झंडा नहीं रहेगा। भगवान राम में आस्था रखने वाले और राम मंदिर में दान देने वाले सभी लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।’ एक प्रश्न के उत्तर में सिंह ने कहा कि यात्रा की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है और वह प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।


    ‘आडवाणी की रथयात्रा के दौरान दिया था चंदा’

    पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा, ‘मैंने लालकृष्ण आडवाणी (वरिष्ठ भाजपा नेता) की रथयात्रा के दौरान चंदा दिया था क्योंकि मुझे भगवान राम और मंदिर पर आस्था है। उस पहले अभियान में एकत्र किए गए चंदे का आज तक कोई हिसाब नहीं दिया गया। उच्चतम न्यायालय के फैसले (जिससे मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ) के बाद फिर से चंदा अभियान चलाया गया।’


    ‘मुकदमा दायर करते हुए वापस मांगूंगा चंदा’

    उन्होंने कहा, ‘मैंने तय किया है कि अयोध्या में मुकदमा दायर करूंगा कि मेरे द्वारा दिया गया चंदा गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। मैं अपना चंदा वापस चाहता हूं।’ सिंह का यह बयान राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की कथित चोरी के आरोपों के संदर्भ में आया, जिनकी जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है।


    ‘महाकाल मंदिर के पास की जमीन RSS को दी गई थी’

    सिंह ने दावा किया कि जब दूसरी बार विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने चंदा अभियान चलाया तो उन्होंने संगठन पर भरोसा नहीं होने के कारण उसमें योगदान नहीं दिया और सीधे 1 लाख 11 हजार रुपए का दान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की चोरी हुई है, उसी तरह उज्जैन में भी महाकाल मंदिर के पास की एक बहुमूल्य भूमि भाजपा की सुंदरलाल पटवा सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दे दी थी।


    ‘होटल के लिए अब उस स्कूल को गिराया जा रहा’
    सिंह ने आगे कहा, ‘मेरी सरकार आने के बाद मैंने इस पर आपत्ति जताई थी।’ उन्होंने आरोप लगाया कि अब वहां संचालित एक स्कूल को होटल बनाने के लिए गिराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां ठहरने वाले लोगों को स्वत: वीआईपी दर्शन की सुविधा मिल जाती है और संबंधित संगठन वहां से मिले दान का उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी भी जांच की मांग की जाएगी।

  • जब अजेय बजरंगबली की शक्ति भी पड़ गई थी कम; जानिए उन तीन महायोद्धाओं की गाथा जिनके सामने वीर हनुमान को स्वीकार करनी पड़ी थी हार

    जब अजेय बजरंगबली की शक्ति भी पड़ गई थी कम; जानिए उन तीन महायोद्धाओं की गाथा जिनके सामने वीर हनुमान को स्वीकार करनी पड़ी थी हार

    नई दिल्ली । सनातन धर्म और पौराणिक ग्रंथों में पवनपुत्र हनुमान जी को असीम बल, बुद्धि और अजेय शक्ति का प्रतीक माना गया है। रामायण काल से लेकर महाभारत काल तक उनके पराक्रम की अनगिनत गाथाएं प्रचलित हैं, जहां बड़े से बड़े मायावी राक्षस और योद्धा उनके सामने टिक नहीं सके। लेकिन धार्मिक इतिहास में कुछ ऐसे अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट प्रसंगों का भी वर्णन मिलता है, जब अप्रतिहत शक्तियों के स्वामी बजरंगबली को भी विशेष परिस्थितियों के कारण झुकना पड़ा या अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी। पौराणिक वृत्तांतों के अनुसार, ऐसे तीन प्रमुख अवसर आए जब हनुमान जी की शक्ति भी काम नहीं आई और उन्हें पराजय का वधु स्वीकार करना पड़ा।

    ऐसी ही पहली घटना महान संत और सिद्ध तपस्वी मच्छिंद्रनाथ जी से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार मच्छिंद्रनाथ जी भगवान श्रीराम की भक्ति में पूरी तरह लीन होकर रामेश्वरम के समीप समुद्र में स्नान कर रहे थे। उसी समय वहां मौजूद हनुमान जी ने एक साधारण वानर का रूप धारण कर उनकी परीक्षा लेने का विचार किया। हनुमान जी ने अपनी मायावी शक्ति से वहां मूसलाधार बारिश शुरू कर दी और स्वयं को बचाने के लिए एक कृत्रिम गुफा बनाने का उपक्रम करने लगे। जब मच्छिंद्रनाथ जी ने उन्हें इस कृत्य पर टोकते हुए ज्ञान दिया, तो हनुमान जी ने उनकी आध्यात्मिक क्षमता पर प्रश्न उठाते हुए उन्हें युद्ध की सीधी चुनौती दे दी। इसके बाद दोनों के मध्य एक भीषण युद्ध छिड़ गया, परंतु मच्छिंद्रनाथ जी की मंत्र शक्ति और योग बल के सामने हनुमान जी का प्रत्येक प्रहार निष्फल साबित हुआ। अंततः वायुदेव के हस्तक्षेप के बाद इस युद्ध को विराम दिया गया और हनुमान जी ने सहर्ष अपनी हार स्वीकार की।

    द्वितीय प्रसंग रामायण काल के सबसे विनाशकारी युद्ध के दौरान का है, जो रावण के परम पराक्रमी पुत्र मेघनाद यानी इंद्रजीत से संबद्ध है। माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान जी ने जब अशोक वाटिका को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया और रावण के छोटे पुत्र अक्षय कुमार का वध कर दिया, तब लंकाधिपति ने क्रोधित होकर मेघनाद को रणभूमि में भेजा। युद्ध क्षेत्र में जब मेघनाद के सभी दिव्य अस्त्र-शस्त्र हनुमान जी के सामने विफल हो गए, तब उसने अत्यंत विवश होकर पवनपुत्र पर सीधे ब्रह्मास्त्र का संधान कर दिया। यद्यपि हनुमान जी को स्वयं ब्रह्मा जी से यह वरदान प्राप्त था कि कोई भी अस्त्र उनका अनिष्ट नहीं कर सकता, परंतु सृष्टि के रचयिता और ब्रह्मास्त्र की मर्यादा एवं मान रखने के लिए हनुमान जी ने स्वेच्छा से स्वयं को उस बंधन में बंधने दिया। तकनीकी दृष्टिकोण से इस प्रसंग में मेघनाद हनुमान जी की गति को रोकने और उन्हें बंदी बनाने में सफल रहा था।

    तृतीय और सर्वाधिक भावुक कर देने वाला वृत्तांत भगवान श्रीराम के आत्मज लव और कुश से जुड़ा हुआ है। लंका विजय के पश्चात जब अयोध्या में प्रभु श्रीराम द्वारा अश्वमेध यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया, तो यज्ञ का अश्व देश के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण कर रहा था। इसी दौरान महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में निवास कर रहे बालक लव और कुश ने उस अश्व को बंदी बना लिया। अश्व को मुक्त कराने हेतु जब श्रीराम की चतुरंगिणी सेना वहां पहुंची, तो दोनों बालकों के अभूतपूर्व युद्ध कौशल के सम्मुख लक्ष्मण और शत्रुघ्न जैसे महारथी भी परास्त हो गए। स्थिति को नियंत्रण से बाहर होते देख स्वयं हनुमान जी, भरत और सुग्रीव के साथ युद्ध के मैदान में उतरे।

    रणभूमि में जब हनुमान जी ने इन दो अत्यंत छोटे बालकों के अलौकिक शौर्य और पराक्रम को देखा, तो वे विस्मय में पड़ गए। वास्तविकता का पता लगाने के लिए जब उन्होंने नेत्र बंद कर ध्यान लगाया, तो उन्हें तुरंत यह बोध हो गया कि ये दोनों बालक कोई साधारण क्षत्रिय नहीं, बल्कि उनके आराध्य प्रभु श्रीराम और माता सीता के ही अंश हैं। इस सत्य से अवगत होने के पश्चात हनुमान जी के लिए अपने ही स्वामी की संतानों पर अस्त्र उठाना सर्वथा असंभव हो गया। उन्होंने तुरंत युद्ध न करने का नीतिगत निर्णय लिया और अस्त्र त्याग कर शांत खड़े हो गए। इसके बाद लव और कुश ने उन पर निरंतर कई तीखे प्रहार किए, किंतु हनुमान जी ने बिना किसी प्रतिरोध या पलटवार के सब कुछ अत्यंत शांत भाव से सहन किया और प्रेम पूर्वक अपनी पराजय स्वीकार कर ली।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ओवैसी के बयान से सियासी घमासान, एनडीए नेताओं का पलटवार; बोले- जांच को सांप्रदायिक रंग देना अनुचित

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ओवैसी के बयान से सियासी घमासान, एनडीए नेताओं का पलटवार; बोले- जांच को सांप्रदायिक रंग देना अनुचित

    नई दिल्ली । राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। ओवैसी की टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मामले को धार्मिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय कानून और जांच की प्रक्रिया के आधार पर परखा जाना चाहिए। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

    ओवैसी ने अपने बयान में दावा किया था कि यदि ट्रस्ट में किसी मुस्लिम की भूमिका होती तो उसके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद कई भाजपा नेताओं ने इसे अनावश्यक और समाज में विभाजन पैदा करने वाला बयान बताया। उनका कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है तथा इसमें किसी भी प्रकार के धार्मिक भेदभाव का प्रश्न नहीं उठता।

    भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि पूरे मामले को हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि चढ़ावे और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उनके अनुसार विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जा चुका है और जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी ने भी ओवैसी के बयान की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रकार की टिप्पणियां राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले उसे सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को सभी समुदायों के लिए समान रूप से आवश्यक बताया।

    उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने भी कहा कि चढ़ावा चोरी का मामला पूरी तरह कानूनी जांच का विषय है और इसे धार्मिक पहचान से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी संस्था में वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार जांच एजेंसियों को निष्पक्ष रूप से अपना कार्य करने दिया जाना चाहिए।

    इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियों ने आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों, बैंक खातों और संपत्तियों की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है। कई बैंक खातों का रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज और लेनदेन का विवरण एकत्र किया जा रहा है ताकि कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी श्रृंखला को समझा जा सके। जांच के दौरान कुछ अन्य व्यक्तियों और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है।

    मामले में पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गबन और वित्तीय अनियमितता किस स्तर पर हुई, इसमें कितनी धनराशि प्रभावित हुई तथा किन-किन लोगों की भूमिका रही। वहीं राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष ढंग से पूरी कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • UP: अयोध्या में बड़ा हादसा…. एक ही परिवार की 5 महिलाएं सरयू में डूबीं

    UP: अयोध्या में बड़ा हादसा…. एक ही परिवार की 5 महिलाएं सरयू में डूबीं


    अयोध्या।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अयोध्या जिले (Ayodhya district) में मंगलवार को सरयू नदी (Saryu River) में स्नान के दौरान बड़ा हादसा हो गया। रौनाही थाना क्षेत्र के सनाहा गांव के पास एक ही परिवार की दो महिलाओं और तीन किशोरियों समेत पांच लोग नदी में डूब गए। स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों की मदद से तीन लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। देर शाम तक दो किशोरियों की तलाश जारी रही।

    जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब दो बजे एक ही परिवार की दो महिलाएं और तीन किशोरियां सरयू नदी के किनारे घूमने गई थीं। गांव से करीब एक किलोमीटर दूर पहुंचने के बाद मीरापुर रुदौली निवासी मेराज की 35 साल पत्नी शाहीन नदी में नहाने उतरीं। इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं। उन्हें बचाने के लिए 16 साल नाजिया, 15 साल रशीदा, 18 वर्षीय मरियम और 40 वर्षीय सजरूल निशा भी नदी में उतर गईं, लेकिन तेज बहाव की चपेट में आने से सभी डूब गईं।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग, गोताखोर और प्रशासन मौके पर पहुंच गया। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद सजरूल निशा, शाहीन और मरियम को नदी से बाहर निकाला गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। सीओ सदर अरविंद सोनकर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि देर शाम तक नाजिया और रशीदा की तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान जारी रहा।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर VHP ने बनाई दूरी, आलोक कुमार बोले- जो हुआ वह बेहद शर्मनाक, ट्रस्ट ही जवाबदेह

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर VHP ने बनाई दूरी, आलोक कुमार बोले- जो हुआ वह बेहद शर्मनाक, ट्रस्ट ही जवाबदेह

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज से स्पष्ट दूरी बना ली है। संगठन ने कहा है कि मंदिर के संचालन और ट्रस्ट से जुड़े सभी प्रशासनिक निर्णयों की जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट की है। वीएचपी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए इसे अत्यंत गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम बताया है।

    वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में संगठन की भूमिका मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने तक सीमित थी। उनके अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य कर रहा है और उसके प्रशासनिक तथा वित्तीय निर्णयों से वीएचपी का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी ट्रस्ट पर ही है।

    आलोक कुमार ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में मंदिरों का संचालन करना वीएचपी का दायित्व नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के निर्णयों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार जिस संस्था को मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वही उसके सभी निर्णयों और परिणामों के लिए उत्तरदायी है।

    उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के रूप में चंपत राय के कार्यों से भी स्वयं को अलग बताया। उनका कहना था कि ट्रस्ट के प्रशासनिक निर्णयों और वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है और किसी अन्य संगठन को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इस बयान को मौजूदा विवाद के बीच वीएचपी के स्पष्ट रुख के रूप में देखा जा रहा है।

    चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान राशि के प्रबंधन को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। प्रारंभिक जांच के बाद मामले की गंभीरता बढ़ने से ट्रस्ट के भीतर भी बदलाव देखने को मिले हैं। इसी क्रम में नैतिक आधार पर चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जबकि ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ दिया। इन घटनाक्रमों के बाद पूरे मामले की जांच और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या में जो कुछ भी हुआ, उससे देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालु आहत हुए हैं। उनके अनुसार जिन लोगों ने वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन का समर्थन किया, आर्थिक सहयोग दिया और अपनी आस्था इस अभियान से जोड़ी, उनके लिए यह घटनाक्रम बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी असर डालती हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

    उन्होंने यह भी दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद वीएचपी ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया था कि संगठन न तो मंदिर का निर्माण करेगा और न ही उसका संचालन करेगा। इसके बाद ट्रस्ट स्वतंत्र रूप से अपने सभी निर्णय लेता रहा है। इसलिए ट्रस्ट से जुड़े किसी भी प्रशासनिक या वित्तीय विवाद की जवाबदेही उसी संस्था की है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल राम मंदिर से जुड़े इस विवाद की निष्पक्ष जांच न केवल तथ्यों को स्पष्ट करेगी, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में अहम साबित होंगे।

  • राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरते हुए मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। पार्टी का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण में अब तक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। कांग्रेस ने विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सार्वजनिक करने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग दोहराई है।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया था, तो उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। पार्टी के अनुसार, जब मामला देशभर के श्रद्धालुओं के विश्वास और दान से जुड़ा है, तब जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की गोपनीयता नहीं बरती जानी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच के निष्कर्ष देश के सामने लाए जाने आवश्यक हैं।

    पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय के दौरान राम मंदिर परिसर में चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में चोरी के मामले सामने आए हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि पिछले वर्षों में कुल कितनी घटनाएं हुईं, कितना सामान गायब हुआ और दान में प्राप्त संपत्तियों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। पार्टी ने मांग की कि पूरे रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए ताकि किसी भी तरह की आशंका समाप्त हो सके।

    जांच प्रक्रिया को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि कार्रवाई केवल सीमित स्तर तक की गई है, जबकि यदि किसी बड़े स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को केवल पद या प्रभाव के आधार पर जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी का कहना है कि जब मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए विभिन्न एजेंसियां और सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, तब लगातार चोरी की घटनाओं के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। कांग्रेस ने निजी सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका और उसकी जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं चूक हुई है तो उसकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि दान में प्राप्त आभूषणों, नकदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित प्रत्येक वस्तु का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए ताकि किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न न हो। इसके साथ ही पूरे चढ़ावे का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराने की मांग भी दोहराई गई है।

    पार्टी ने राज्य सरकार से SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था या प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार अब तक इस पूरे विवाद पर स्पष्ट स्थिति रखने से बच रही है।

    राम मंदिर को करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि इस तरह के किसी भी विवाद का समाधान केवल पारदर्शी जांच, जवाबदेही और तथ्यों को सार्वजनिक करने से ही संभव है। पार्टी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने और सभी संबंधित तथ्यों के सामने आने से ही श्रद्धालुओं का विश्वास और संस्थागत पारदर्शिता मजबूत हो सकेगी।

  • राम मंदिर दान गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, बोला- नियमित प्रक्रिया से होगी सुनवाई, जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं

    राम मंदिर दान गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, बोला- नियमित प्रक्रिया से होगी सुनवाई, जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले को नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही सुना जाएगा और तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी, “क्या बाद में सुनवाई होने से कोई आसमान टूट जाएगा”, सबसे अधिक चर्चा में रही। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी और किसी भी मामले में केवल आग्रह के आधार पर तत्काल सुनवाई नहीं की जा सकती।

    सोमवार को यह याचिका जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया कि राम मंदिर में दान राशि के कथित दुरुपयोग की गंभीरता को देखते हुए मामले की तत्काल सुनवाई की जाए और इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की निगरानी में कराई जाए। हालांकि पीठ ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि अदालत के नियमित कामकाज शुरू होने के बाद इस मामले पर सुनवाई करना पर्याप्त होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका को जुलाई के दूसरे सप्ताह, 12 से 17 जुलाई के बीच सूचीबद्ध किया जाएगा।

    जनहित याचिका दो अधिवक्ताओं की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं से प्राप्त दान राशि के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच पर उन्हें पूरा भरोसा नहीं है क्योंकि महत्वपूर्ण साक्ष्यों के संरक्षण और निष्पक्ष जांच को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच सीबीआई से कराने की मांग की है ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल हो सके।

    इस बीच पुलिस की जांच लगातार जारी है। अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की गई है। पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान भी दर्ज किया है। आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें ट्रस्टी अनिल मिश्रा भी शामिल हैं, से पूछताछ की जा सकती है। चंपत राय के ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद इस पूरे मामले को लेकर चर्चाएं और तेज हुई हैं, हालांकि जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।

    राम मंदिर दान विवाद उस समय सामने आया जब मंदिर के दान पात्र से नकदी चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की, जिसमें कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने दान राशि की गणना से जुड़े कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में उनकी गिरफ्तारी भी की। जांच एजेंसियां अब वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों का मिलान कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत ने मामले की गंभीरता को नकारा नहीं है, बल्कि केवल तत्काल सुनवाई की मांग को अस्वीकार किया है। अब इस जनहित याचिका पर नियमित सूची के अनुसार जुलाई के दूसरे सप्ताह में सुनवाई होने की संभावना है। उस दौरान अदालत यह तय करेगी कि उपलब्ध तथ्यों, जांच की स्थिति और याचिका में उठाए गए मुद्दों के आधार पर आगे किस प्रकार की न्यायिक कार्रवाई की जानी चाहिए।

  • केजरीवाल के अयोध्या दौरे पर कांग्रेस का हमला, अजय राय बोले- 'राम सबके हैं, VIP छूट क्यों?'

    केजरीवाल के अयोध्या दौरे पर कांग्रेस का हमला, अजय राय बोले- 'राम सबके हैं, VIP छूट क्यों?'


    लखनऊ। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के अयोध्या दौरे को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अयोध्या में दर्शन व्यवस्था को लेकर सरकार दोहरे मापदंड अपना रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब भगवान राम सबके हैं, तो फिर अलग-अलग नेताओं और श्रद्धालुओं के लिए अलग नियम क्यों बनाए जा रहे हैं।

    अजय राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि अयोध्या में अरविंद केजरीवाल को कैमरों और विशेष सुविधाओं के साथ दर्शन की अनुमति दी गई, जबकि कांग्रेस नेताओं और आम श्रद्धालुओं के लिए कड़े नियम लागू किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले जब वह स्वयं रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या गए थे, तब वहां की व्यवस्था अलग थी।

    उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए लिखा कि आखिर राजनीतिक सुविधा के अनुसार नियम बदलने का क्या औचित्य है। उन्होंने इसे आस्था के केंद्र पर वीआईपी संस्कृति और दोहरी राजनीति करार देते हुए कहा कि यह पूरी तरह निंदनीय है।

    दरअसल, अरविंद केजरीवाल शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे थे, जहां उन्होंने रामलला के दर्शन किए। दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले पर भी सवाल उठाए थे। उनके इस दौरे और बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

    इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बिना नाम लिए केजरीवाल पर तीखा हमला बोला था। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने उन्हें 15 वर्षों तक मौका दिया, लेकिन बदले में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या का विकास डबल इंजन सरकार की देन है और दिल्ली के नेताओं को यहां आकर विकास मॉडल देखना चाहिए।

    सीएम योगी ने कहा कि यदि दिल्ली में भी इसी तरह विकास कार्य किए गए होते, तो राजधानी की तस्वीर भी आज अलग होती। उन्होंने अयोध्या के कायाकल्प का उल्लेख करते हुए इसे भाजपा सरकार की उपलब्धि बताया।

    केजरीवाल के अयोध्या दौरे के बाद अब सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर कांग्रेस सरकार पर वीआईपी संस्कृति और भेदभाव का आरोप लगा रही है, तो दूसरी ओर भाजपा विपक्षी नेताओं के शासनकाल और कार्यशैली पर सवाल उठा रही है। ऐसे में अयोध्या एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है।

  • अयोध्या विवाद पर सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- प्रमाण हैं तो SIT को दें, बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करें

    अयोध्या विवाद पर सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- प्रमाण हैं तो SIT को दें, बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करें


    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया में आयोजित एक जनसभा के दौरान विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और जय श्रीराम का उद्घोष करने वालों पर कार्रवाई करते थे, वही आज आस्था की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आरोप जनता स्वीकार नहीं करेगी।

    सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय ऐसा था जब कुछ राजनीतिक दल और उनके समर्थक यह कहते थे कि भगवान राम का अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का विरोध करने के लिए अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ी गई और मंदिर निर्माण रोकने के प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर वे लोग थे जो जय श्रीराम का नारा लगाने वालों पर लाठीचार्ज और गोली चलाने तक से पीछे नहीं हटते थे, लेकिन आज वही लोग आस्था के साथ खिलवाड़ होने का आरोप लगा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग राम नवमी, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, कांवड़ यात्रा और दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान कानून व्यवस्था बिगड़ने का आरोप झेलते रहे, वे अब अयोध्या को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जनता को स्वीकार नहीं है।

    योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि उसने देश में भ्रष्टाचार और बेईमानी को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि देश को केवल लूटा ही नहीं गया बल्कि उसकी व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया गया। ऐसे लोग अब अयोध्या और धार्मिक आस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जो उचित नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच होगी और सच सभी के सामने लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    अपने संबोधन के अंत में सीएम योगी ने विपक्ष से अपील की कि यदि उनके पास किसी भी आरोप से जुड़े तथ्य या प्रमाण हैं तो उन्हें विशेष जांच दल यानी एसआईटी के सामने प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि यदि कोई ठोस सबूत नहीं है तो बेबुनियाद आरोप लगाने से बचना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।