Tag: Ayodhya

  • IRCTC की काशी तीर्थ यात्रा: सिर्फ 16,700 रुपये में काशी, अयोध्या और प्रयागराज के दर्शन, रहने-खाने की पूरी व्यवस्था

    IRCTC की काशी तीर्थ यात्रा: सिर्फ 16,700 रुपये में काशी, अयोध्या और प्रयागराज के दर्शन, रहने-खाने की पूरी व्यवस्था


    नई दिल्ली । देशभर के श्रद्धालुओं के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने एक विशेष आध्यात्मिक यात्रा पैकेज लॉन्च किया है। ‘काशी तीर्थ यात्रा’ नाम से शुरू की गई यह 9 दिवसीय धार्मिक यात्रा श्रद्धालुओं को भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कराने का अवसर देगी। खास बात यह है कि इस पैकेज में यात्रा, भोजन, ठहरने और स्थानीय परिवहन जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं, जिससे यात्रियों को अलग से किसी व्यवस्था की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

    यह विशेष यात्रा 9 सितंबर 2026 को तिरुनेलवेली से शुरू होकर 17 सितंबर 2026 तक चलेगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु गया, बोधगया, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करेंगे। IRCTC की भारत गौरव ट्रेन योजना के तहत संचालित इस टूर का उद्देश्य देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से लोगों को जोड़ना है।

    यात्रा के पहले दिन ट्रेन तिरुनेलवेली से रवाना होगी। रास्ते में कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को चढ़ने और उतरने की सुविधा दी जाएगी। तीसरे दिन श्रद्धालु गया पहुंचेंगे, जहां उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद बोधगया स्थित विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। यह वही स्थान है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और यह बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।

    इसके बाद यात्रा वाराणसी पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर, अन्नपूर्णा देवी मंदिर, काशी विशालाक्षी मंदिर और काल भैरव मंदिर के दर्शन करेंगे। वाराणसी की प्रसिद्ध गंगा आरती भी इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण होगी। शाम के समय गंगा घाटों पर होने वाली यह आरती श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और अद्भुत अनुभव प्रदान करती है।

    वाराणसी के बाद यात्रा अयोध्या पहुंचेगी। यहां श्रद्धालु राम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। इसके बाद ट्रेन प्रयागराज पहुंचेगी, जहां यात्री त्रिवेणी संगम में स्नान कर सकेंगे और प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर के दर्शन भी करेंगे।

    IRCTC ने इस पैकेज को तीन श्रेणियों में उपलब्ध कराया है। स्लीपर क्लास का किराया 16,700 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया है। वहीं थर्ड एसी के लिए 26,100 रुपये और सेकंड एसी के लिए 34,100 रुपये निर्धारित किए गए हैं। बच्चों के लिए अलग रियायती दरें लागू होंगी। पैकेज में रेल यात्रा, होटल में ठहरने की व्यवस्था, भोजन, स्थानीय परिवहन और दर्शनीय स्थलों का भ्रमण शामिल है।

    धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और श्रद्धालुओं को सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया यह पैकेज उन लोगों के लिए बेहतरीन अवसर है, जो एक ही यात्रा में भारत की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के दर्शन करना चाहते हैं। काशी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे पवित्र स्थलों की यात्रा निश्चित रूप से श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार और आध्यात्मिक अनुभव साबित हो सकती है।

  • शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी

    शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी


    अयोध्या  अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दानपात्रों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों को लेकर देशभर में चर्चा के बीच द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने मंदिरों के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जबलपुर प्रवास के दौरान उन्होंने कहा कि मंदिरों को केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से संचालित किया जाना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने सनातन धर्म बोर्ड या सनातन धर्म संरक्षण समिति के गठन की मांग भी रखी।

    परमहंसी गंगा आश्रम के लिए रवाना होने से पहले जबलपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जब किसी कार्य की जिम्मेदारी उन लोगों को सौंप दी जाती है, जिन्हें उस विषय का पर्याप्त ज्ञान और अनुभव नहीं होता, तब इस प्रकार की घटनाएं सामने आती हैं। उनका कहना था कि मंदिरों की देखरेख करने वाले कई अधिकारी और कर्मचारी मंदिरों को धार्मिक आस्था के केंद्र के बजाय पर्यटन स्थल के रूप में देखते हैं, जबकि करोड़ों श्रद्धालु वहां दर्शन, साधना और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति के लिए जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों के अधिकांश मंदिर शासन के अधीन हैं और इनकी देखरेख करने वाले अधिकारियों का लगातार तबादला होता रहता है। ऐसे में उन्हें न तो धार्मिक परंपराओं की गहरी समझ होती है और न ही शास्त्रों, विधि-विधान तथा पाप-पुण्य की अवधारणा का पर्याप्त ज्ञान होता है। यही कारण है कि मंदिरों के संचालन और संरक्षण में अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती।

    अयोध्या में सामने आई कथित चोरी की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी मेहनत और विश्वास की कमाई मंदिरों में अर्पित करते हैं, इसलिए उस धन का उपयोग पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि किसी ने इस प्रकार का अपराध किया है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि मंदिरों की आय का उपयोग गौशालाओं, पाठशालाओं, यज्ञशालाओं, धर्मशालाओं और औषधालयों जैसे जनकल्याणकारी कार्यों में होना चाहिए। इसके साथ ही मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों का भी समुचित विकास किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।

    उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद यह अपेक्षा थी कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा पद्धति और परंपराओं को अधिक मजबूती मिलेगी, लेकिन कई क्षेत्रों में यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया। शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि धार्मिक स्थलों का संचालन ऐसे लोगों को सौंपा जाना चाहिए जिन्हें धर्म, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों की समझ हो। उन्होंने सरकारों से भी आग्रह किया कि वे मंदिरों की संपत्तियों और धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं, लेकिन धार्मिक संस्थानों के धन और संचालन में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचें।

  • अयोध्या में श्रद्धालुओं के लिए आज से खुल जाएंगे राम मंदिर परिसर के उप मंदिर…7 स्लॉट में होंगे दर्शन

    अयोध्या में श्रद्धालुओं के लिए आज से खुल जाएंगे राम मंदिर परिसर के उप मंदिर…7 स्लॉट में होंगे दर्शन


    अयोध्या।
    रामनगरी अयोध्या (Ramnagari Ayodhya) आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। सोमवार से राम मंदिर परिसर (Ram Temple complex) के उप मंदिरों (Sub-temples) के दर्शन आम भक्तों के लिए शुरू होने जा रहे हैं। दर्शन शुरू होने से पहले ही श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है और ऑनलाइन पास बनवाने की होड़ मच गई है। पहले ही दिन यानी 13 अप्रैल के लिए करीब 80 प्रतिशत पास बुक हो चुके हैं।

    जानकारी के अनुसार, पहले चरण में 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक दर्शन के लिए ऑनलाइन पास जारी किए जा रहे हैं। जैसे ही बुकिंग शुरू हुई, श्रद्धालुओं ने तेजी से स्लॉट आरक्षित कराने शुरू कर दिए। राम मंदिर ट्रस्ट के बेबसाइट पर 13 अप्रैल के सभी सात स्लॉटों के करीब 2600 पास शाम चार बजे तक बुक हो चुके थे। कुल सात स्लॉट (सुबह सात से नौ, नौ से 11, 11 से एक, एक से तीन, तीन से पांच, पांच से सात, सात से नौ) में रोजाना 3500 सामान्य पास जारी किए जाएंगे। हर स्लॉट में 500 पास जारी होंगे। पहले दिन के सुबह के पहले और दूसरे स्लॉट के सभी पास लगभग फुल हो चुके हैं, जबकि दिन के आखिरी दो स्लॉट के भी करीब 90 प्रतिशत पास बुक हो चुके हैं।

    एक पास पर अधिकतम पांच श्रद्धालु दर्शन कर पाएंगे। एक दिन में 17500 श्रद्धालुओं को दर्शन की सुविधा मिलेगी। उप मंदिरों के दर्शन को लेकर भक्तों में विशेष आकर्षण है। लंबे समय से श्रद्धालु इन मंदिरों के खुलने का इंतजार कर रहे थे। अब जैसे ही तिथि घोषित हुई, देशभर से रामभक्तों ने अयोध्या आने की तैयारी तेज कर दी है। मंदिर प्रशासन की ओर से दर्शन व्यवस्था को सुचारु और व्यवस्थित बनाने के लिए ऑनलाइन पास प्रणाली लागू की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम और सहज दर्शन का लाभ मिल सके।

    राम मंदिर परिसर के उप मंदिरों में सोमवार से दर्शन शुरू हो जाएगा। भक्त तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बेबसाइट srjbtkshetra.org पर जाकर जरूरी दिशा-निर्देशों का पालन कर पास बनवा सकते हैं। सामान्य पास पर श्रद्धालु सप्त मंडपम, शेषावतार, कुबेर टीला व राम परिवार का दर्शन कर सकेंगे। जबकि परकोटा के गणेश मंदिर का भी दर्शन होगा। अभी एक सप्ताह का ट्रायल किया जा रहा है। बाद में परकोटा के सभी मंदिरों में भी दर्शन शुरू हो जाएंगे। सुगम व विशिष्ट पासधारकों को भी उप मंदिरों में दर्शन की सुविधा प्रदान की जाएगी। – डॉ़ अनिल मिश्र, सदस्य, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट

  • चैत्र नवरात्र के पहले दिन अयोध्या आएंगी राष्ट्रपति, आम श्रद्धालु कर सकेंगे रामलला के दर्शन

    चैत्र नवरात्र के पहले दिन अयोध्या आएंगी राष्ट्रपति, आम श्रद्धालु कर सकेंगे रामलला के दर्शन



    नई दिल्ली। वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर 19 मार्च से अयोध्या में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हो रहा है। इस दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राम मंदिर में श्रीराम यंत्र स्थापना के लिए अयोध्या आएंगी। वहीं, इसी तिथि से चैत्र रामनवमी मेला और वासंतिक नवरात्र का भी शुभारंभ होगा। प्रतिपदा का दिन हिंदी नववर्ष का पहला दिन भी है, जिससे रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

    भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में तय किया गया कि नवरात्र के प्रथम दिन वीआईपी पास धारकों के लिए दर्शन बंद रहेंगे। आम श्रद्धालु सामान्य दर्शन मार्ग से श्रीराम लला के दर्शन कर सकेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय ने बताया कि सुबह 6 बजे से शाम तक अनवरत दर्शन जारी रहेगा।

    समारोह और आमंत्रित अतिथि

    रंगमहल बैरियर यानी क्रॉसिंग वन से सिर्फ आमंत्रित अतिथियों को श्रीराम यंत्र स्थापना समारोह में प्रवेश दिया जाएगा। मंदिर आंदोलन के सहयात्रियों को इस अवसर पर आमंत्रित नहीं किया गया है। केवल राम मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण अभियान में शामिल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कार्यकर्ता (करीब 3,500) और विश्व हिन्दू परिषद के अखिल भारतीय टोली के 45 पदाधिकारी तथा 300 संतों को शामिल किया गया है।

    इसके अलावा मंदिर निर्माण में लगी विभिन्न एजेंसियों के कर्मयोगियों के पारिवारिक सदस्य समेत लगभग 1,800 लोगों को भी व्यक्तिगत आमंत्रण भेजा गया है। चंपतराय ने बताया कि आमंत्रण हस्तांतरणीय नहीं है और अतिथियों के साथ सुरक्षा कर्मियों या अंगरक्षकों का प्रवेश नहीं होगा। समारोह स्थल पर किसी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र या हथियार ले जाने की अनुमति नहीं है। सिख परंपरा के आमंत्रित श्रद्धालुओं को कानूनी वैध हथियार और पांच पहचान चिन्हों सहित कटार ले जाने की अनुमति दी गई है। मोबाइल उपकरणों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। सभी अतिथि 18 मार्च तक अयोध्या पहुँच जाएंगे।

    ठहरने और भोजन की व्यवस्था

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय ने बताया कि अतिथियों के ठहरने और भोजन-जलपान की पूरी व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा की गई है। गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं में लगभग 3,000 कमरे बुक किए गए हैं। अलग-अलग जोनों के अनुसार भोजनालय तय किए गए हैं और कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने के लिए विशेष टोलियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगर निगम ने भी सभी अतिथि ठहराव स्थलों पर विशेष सजावट और तैयारियां कर दी हैं, जिसकी झलक भक्तों को 18 मार्च से दिखाई देने लगेगी।

  • अयोध्या में अमिताभ बच्चन ने दो साल में चौथी जमीन खरीदी

    अयोध्या में अमिताभ बच्चन ने दो साल में चौथी जमीन खरीदी


    मुंबई। अमिताभ बच्‍चन ने भगवान राम की नगरी में एक और जमीन खरीदकर चर्चा बटोर ली है। सदी के महानायक ने पिछले दो वर्षों में यहां चौथी बार निवेश किया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने करीब 10,617 वर्ग मीटर जमीन लगभग 25.20 करोड़ रुपये में खरीदी है।
    यह जमीन The House of Abhinandan Lodha की परियोजना के पास स्थित है और सरयू नदी के तट के नजदीक विकसित हो रहे लक्जरी लैंड प्रोजेक्ट के आसपास बताई जा रही है। इस जमीन की खरीद एबी कॉर्प लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजेश ऋषिकेश यादव ने पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए पूरी की।

    अयोध्या में तेजी से बढ़ रहा निवेश
    राम मंदिर अयोध्‍या के निर्माण और उद्घाटन के बाद से अयोध्या में पर्यटन, कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहा है। इसी वजह से बड़े उद्योगपति और फिल्मी हस्तियां भी यहां रियल एस्टेट में निवेश कर रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अयोध्या सिर्फ धार्मिक पर्यटन ही नहीं बल्कि रियल एस्टेट निवेश का भी बड़ा केंद्र बन सकता है।

    पहले कहां-कहां खरीदी जमीन?
    अमिताभ बच्चन इससे पहले भी अयोध्या में तीन प्लॉट खरीद चुके हैं।
    2024: The Sarayu Project Ayodhya में लगभग 10,000 वर्ग फुट का प्लॉट करीब 14.5 करोड़ रुपये में खरीदा था।

    2025: सरयू नदी के पास ही 25,000 वर्ग फुट का प्लॉट लगभग 40 करोड़ रुपये में लिया।

    2025: उसी क्षेत्र के पास एक और जमीन में निवेश किया गया था, जो सरयू तट के आसपास विकसित हो रही परियोजनाओं से जुड़ी बताई जाती है।

    2026 (नया सौदा): सरयू किनारे के पास लक्जरी प्रोजेक्ट के आसपास 10,617 वर्ग मीटर जमीन 25.20 करोड़ रुपये में खरीदी गई है।

    यूपी से खास जुड़ाव

    अमिताभ बच्चन का उत्तर प्रदेश से पुराना रिश्ता है। उनका पैतृक संबंध Prayagraj से रहा है। ऐसे में अयोध्या में लगातार निवेश को उनके यूपी से भावनात्मक जुड़ाव के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि अयोध्या में तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन के कारण यहां जमीन की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे बड़े निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है।

  • UP की अर्थव्यवस्था का बड़ा पावरहाउस बना अयोध्या का भव्य राम मंदिर… बदली आर्थिक तस्वीर

    UP की अर्थव्यवस्था का बड़ा पावरहाउस बना अयोध्या का भव्य राम मंदिर… बदली आर्थिक तस्वीर


    लखनऊ।
    अयोध्या (Ayodhya) में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर (Lord Shri Ram Magnificent Temple ) के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद न केवल धार्मिक आस्था का सैलाब उमड़ा है, बल्कि इस पावन नगरी की आर्थिक तस्वीर भी पूरी तरह बदल गई है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ (Indian Institute of Management (IIM) Lucknow) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट ‘इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या’ (अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण) में चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, अयोध्या अब केवल एक धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा पावरहाउस (Uttar Pradesh’s Economy Major Powerhouse) बनकर उभरा है। मंदिर उद्घाटन के बाद शहर में पर्यटन, विदेशी निवेश, स्थानीय कारोबार और रोजगार के अवसरों में ऐसी वृद्धि हुई है जिसकी कल्पना कुछ वर्षों पहले तक असंभव थी।


    श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि

    आईआईएम की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या की स्थिति बेहद अलग थी। तब सालाना करीब 1.7 लाख श्रद्धालु ही अयोध्या पहुंचते थे और स्थानीय बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर था। लेकिन जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद तस्वीर जादुई रूप से बदली है। आंकड़ों के मुताबिक, पहले छह महीनों में ही 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। अब अनुमान है कि हर साल पांच से छह करोड़ आगंतुक स्थायी रूप से अयोध्या आएंगे। पर्यटकों की इस भारी संख्या से प्रदेश सरकार को मिलने वाले कर राजस्व में 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये की भारी बढ़त होने की संभावना जताई गई है।


    आतिथ्य क्षेत्र और एमएसएमई (MSME) का विस्तार

    प्रतिदिन औसतन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन ने आतिथ्य (Hospitality) और सेवा क्षेत्र को नई संजीवनी दी है। रिपोर्ट बताती है कि अयोध्या में 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे शुरू हुए हैं। दुनिया भर के दिग्गज होटल समूहों जैसे ताज और मैरियट ने अयोध्या में अपनी विस्तार योजनाएं धरातल पर उतार दी हैं। इसके साथ ही, लगभग 6,000 नए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) स्थापित हुए हैं। अध्ययन का अनुमान है कि अगले चार-पांच वर्षों में अयोध्या में 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जो स्थानीय युवाओं के लिए वरदान साबित होंगे।


    स्थानीय दुकानदारों और प्रॉपर्टी की कीमतों में उछाल

    इस आर्थिक क्रांति का सबसे सीधा लाभ अयोध्या के छोटे व्यापारियों को मिला है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन दुकानदारों की औसत कमाई पहले मात्र 400 से 500 रुपये प्रतिदिन थी, वह अब बढ़कर 2,500 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई है। इसके अलावा, मंदिर के आसपास की संपत्तियों (Real Estate) की कीमतों में 5 से 10 गुना तक का जबरदस्त उछाल आया है। कनेक्टिविटी बेहतर होने और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनने से निवेश की गति और तेज हो गई है। आईआईएम की यह स्टडी स्पष्ट करती है कि अयोध्या का मॉडल अब देश के अन्य धार्मिक शहरों के लिए ‘इकॉनमिक ब्लूप्रिंट’ का काम करेगा।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ अयोध्या के संत समाज का गुस्सा, केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ अयोध्या के संत समाज का गुस्सा, केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील


    अयोध्या । बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग का मामला गरमा गया है। इस घटना को लेकर अयोध्या के संत समाज ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है और हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। संत समाज का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। सीताराम योग सदन मंदिर के महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने बांग्लादेश में जारी हिंसा को अमानवीय बताया और कहा कि बांग्लादेश के जिहादी लोग हिंदुओं को ढूंढ-ढूंढकर अपना निशाना बना रहे हैं और ये पूरे हिंदू धर्म पर हमला है।

    उन्होंने कहा कि पहले दीपू चंद्र दास को मारा और आग लगा दीफिर एक और हिंदू शख्स को मारा और एक छोटी बच्ची को भी नहीं छोड़ा। वहां की सरकार जिहादियों की तरह काम करती है और बांग्लादेश को एक इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहती है। उन्होंने आगे पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि इसका असर भारत पर देखने को भी मिलेगा। अब समय आ गया है कि सरकार को बांग्लादेश के बॉर्डर खोल देने चाहिए और वहां फंसे हिंदुओं को बचाना चाहिए। जैसे पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया थावैसे ही बांग्लादेश के कट्टरपंथियों को सबक सिखाने के लिए ऑपरेशन चलाना चाहिए।

    अयोध्याधाम के साकेत भवन मंदिर के सीताराम दास जी महाराज ने भी अपील की है कि केंद्र सरकार सेना और सशस्त्र बल का सहारा लेकर हिंदुओं को बचाए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में इंसानियत नहीं बची है और मैं पीएम से निवेदन करता हूं कि राफेलतेजस और ब्रह्मोस क्या कर रहे हैं? अभी तक भारत में बांग्लादेश को मिला लेना चाहिए था और कड़ा सबक सिखाना चाहिए। बता दें कि बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने पीटा और फिर पेड़ से बांधकर आग लगा दी। इस घटना के सात दिन बाद एक अन्य हिंदू युवक को भी भीड़ ने मार डाला। 29 साल के अमृत मंडल उर्फ सम्राट को गांव की भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया।

  • बगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद स्थल पर जुटी भीड़, सैकड़ों लोगों ने अदा की जुमे की नमाज

    बगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद स्थल पर जुटी भीड़, सैकड़ों लोगों ने अदा की जुमे की नमाज


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल (West Bengal)के मुर्शिदाबाद (Murshidabad)जिले में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद शैली वाली मस्जिद के स्थल पर सैकड़ों लोगों ने शुक्रवार की नमाज अदा की। निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir)ने 6 दिसंबर को इस मस्जिद की नींव रखी थी। यह तारीख वही है जब 1992 में अयोध्या(Ayodhya) की बाबरी मस्जिद को ढहाया गया था। आज सुबह से ही आसपास के गांवों से लोग खेतों के रास्ते इस स्थल की ओर आने लगे थे। नमाज के समय नजदीक आने पर आयोजकों ने लाउडसर्स के जरिए भीड़ को निर्देश दिए। तस्वीरों में दिख रहा है कि नमाजियों की लंबी-लंबी कतारें खेतों से होते हुए खुले मैदान तक पहुंच रही थीं।

    पहले से क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पिछले हफ्ते तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित किए गए हुमायूं कबीर भी नमाज में शामिल हुए। किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल बढ़ा दिया गया था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। आयोजकों ने करीब 1 हजार लोगों के लिए खाने की व्यवस्था की थी, लेकिन भीड़ उससे कहीं अधिक थी। पड़ोस के प्लासी से आए लोगों ने करीब डेढ़ क्विंटल चावल से खिचड़ी बनाई। खाना बनाने वाली कमेटी के एक सदस्य ने कहा, ‘हम ये सवाब के लिए कर रहे हैं। पता नहीं कितने लोग आएंगे, लेकिन उन्हें खिलाना बड़ा पुण्य है।’

    राजनीतिक बयानबाजियां तेज
    नींव रखे जाने के बाद से बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनने वाली इस मस्जिद के लिए भारी चंदा आ रहा है। स्थल पर रखे दान-पात्र तेजी से भरते दिखे और डिजिटल योगदान के लिए क्यूआर कोड भी लगाए गए थे। नींव समारोह ने तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं पैदा की थीं। भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सांप्रदायिक तुष्टिकरण का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि यह सारा मामला भाजपा के इशारे पर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र को ध्रुवीकृत करने की साजिश है। हुमायूं कबीर ने कहा कि वे सिर्फ लोगों की मांग पर ऐसा कर रहे हैं।

  • सुल्तानपुर में बोलेरो-ट्रॉला टक्कर में 3 श्रद्धालुओं की मौत8 घायल ड्राइवर की नींद बनी हादसे का कारण

    सुल्तानपुर में बोलेरो-ट्रॉला टक्कर में 3 श्रद्धालुओं की मौत8 घायल ड्राइवर की नींद बनी हादसे का कारण


    रीवा । मध्य प्रदेश से अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की यात्रा शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक हादसे में तब्दील हो गई। यह हादसा उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में हुआजब श्रद्धालुओं से भरी बोलेरो वाहन की ट्रॉले से टक्कर हो गई। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गईजबकि आठ अन्य घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया हैऔर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का संज्ञान लिया हैघायलों को बेहतर इलाज और त्वरित सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

    हादसा कैसे हुआ

    घटना शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे पूराकलंदर थाना क्षेत्र के कल्याण भदरसा के पास हुई। मध्य प्रदेश के श्रद्धालु अयोध्या जा रहे थेऔर जैसे ही उनकी बोलेरो वाहन कल्याण भदरसा के समीप पहुंचीड्राइवर को नींद आ गई। ड्राइवर ने सोचा था कि चाय पिलाकर थोड़ा आराम किया जा सकता हैलेकिन उसने सलाह को नजरअंदाज कर दिया। ड्राइवर की नींद के कारण उसने वाहन को विपरीत दिशा में चला दिया और सामने से आ रहे ट्रॉले में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयाजिससे तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और बाकी आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

    मृतकों की पहचान और घायल श्रद्धालु

    मृतकों की पहचान मध्य प्रदेश के रीवा जिले के बेलाही रामपुर हाउस झरिया थाना सिविल लाइन क्षेत्र के रहने वाले तीन श्रद्धालुओं के रूप में हुई है। घायल श्रद्धालुओं का इलाज अस्पताल में चल रहा हैजहां उन्हें चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। घायलों में से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही हैऔर उन्हें बेहतर इलाज के लिए भर्ती किया गया है। पुलिस और चिकित्सा टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

    मुख्यमंत्री योगी का संज्ञान

    इस दर्दनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लिया और घायलों को बेहतर उपचार प्रदान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि घायलों को किसी भी तरह की चिकित्सा सुविधा में कमी नहीं आनी चाहिए और उनके उपचार में पूरी तत्परता से काम किया जाए। साथ हीउन्होंने दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश भी दिए और इस तरह के हादसों को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की बात की।

    दुर्घटना के कारण और प्रतिक्रिया

    यह हादसा ड्राइवर की लापरवाही और नींद के कारण हुआजो एक बहुत ही सामान्य लेकिन खतरनाक कारण बन सकता है। सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण ड्राइवर की थकान या नींद होती हैजिसे अक्सर हल्के में लिया जाता है। यह हादसा एक बार फिर से यह दर्शाता है कि सड़क सुरक्षा के उपायों के अलावायात्रियों और चालक दोनों को सड़क पर सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ चलना चाहिए।

    चाय पिलाकर आराम करने की सलाह भी एक अहम पहलू हैजो इस हादसे से पहले दिए गए थेलेकिन ड्राइवर ने इसे नजरअंदाज किया। अगर उस समय ड्राइवर ने थोड़ी देर के लिए आराम किया होता तो शायद यह दुर्घटना न होती।

    सुल्तानपुर में सड़क सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता

    सुल्तानपुर जैसे प्रमुख मार्गों पर जहां यात्री वाहन और भारी वाहन दोनों का आवागमन होता हैसड़क सुरक्षा और यात्री जागरूकता को बढ़ावा देने की जरूरत है। यात्री वाहनों में ड्राइवरों को सही समय पर आराम करने और जागरूक रहने के लिए ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। साथ हीयात्री वाहन में यात्रा करने वाले सभी लोगों को सुरक्षित यात्रा की अहमियत समझानी चाहिएताकि इस प्रकार के हादसों को रोका जा सके।

    यह हादसा सड़क सुरक्षा के प्रति हमारी सतर्कता और जिम्मेदारी की अहमियत को उजागर करता है। ड्राइवर की नींद और लापरवाही के कारण तीन अनमोल जीवन चले गए और आठ लोग घायल हो गए। यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि लंबी यात्रा पर जाने से पहले ड्राइवरों को अपनी थकान को गंभीरता से लेना चाहिए और समय-समय पर आराम करना चाहिए।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा त्वरित सहायता के निर्देश और घायलों के उपचार की दिशा में उठाए गए कदम सराहनीय हैंलेकिन हमें इस प्रकार के हादसों को रोकने के लिए और अधिक जागरूकता और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।