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  • बैंकों की 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल, ग्राहकों के लिए जारी हुई जरूरी बैंकिंग सलाह

    बैंकों की 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल, ग्राहकों के लिए जारी हुई जरूरी बैंकिंग सलाह

    नई दिल्ली ।देश में 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की प्रस्तावित बैंक हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। हड़ताल के मद्देनजर ग्राहकों को अपने जरूरी बैंकिंग काम पहले ही निपटाने की सलाह दी गई है। इस दौरान खास तौर पर बैंक शाखाओं में होने वाले काम प्रभावित हो सकते हैं।

    हड़ताल की तारीखों से पहले 26 सितंबर को सितंबर का चौथा शनिवार और 27 सितंबर को रविवार है। ऐसे में सामान्य बैंकिंग व्यवस्था के कारण शाखाओं से जुड़े काम पहले ही प्रभावित रहेंगे। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल होने से ग्राहकों को लगातार कई दिनों तक शाखा संबंधी काम के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

    इसी स्थिति को देखते हुए ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे हड़ताल शुरू होने से पहले अपने जरूरी लेनदेन और बैंक से जुड़े महत्वपूर्ण काम पूरे कर लें। इससे हड़ताल के दौरान शाखाओं में संभावित व्यवधान के कारण होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

    ग्राहकों के लिए यह भी स्पष्ट किया गया है कि इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। एटीएम और ग्राहक सेवा केंद्रों के जरिए मिलने वाली सुविधाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा मोबाइल बैंकिंग एप्लीकेशन के माध्यम से उपलब्ध वित्तीय सेवाओं का उपयोग जारी रखा जा सकता है।

    इंटरनेट बैंकिंग के जरिए कई जरूरी वित्तीय काम घर बैठे किए जा सकते हैं। इसी तरह यूपीआई के माध्यम से भुगतान और धनराशि से जुड़े कई सामान्य लेनदेन किए जा सकते हैं। इसलिए हड़ताल की अवधि में ग्राहकों को जहां संभव हो, डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

    प्रस्तावित हड़ताल को लेकर बैंक कर्मचारियों की यूनियनों की ओर से कई मांगें रखी गई हैं। इनमें पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू करना प्रमुख मांग है। फिलहाल बैंकों में रविवार के अलावा दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है। कर्मचारी सभी शनिवार को छुट्टी देने की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं।

    पांच दिन के कार्य सप्ताह को लेकर मार्च 2024 में हुए वेतन समझौते के दौरान सहमति बनी थी, लेकिन कर्मचारियों के अनुसार इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई व्यवस्था को लेकर भी यूनियनों ने विरोध जताया है।

    कर्मचारी संगठनों का कहना है कि संशोधित पीएलआई व्यवस्था में बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के बीच प्रोत्साहन को लेकर अंतर है। कर्मचारियों के विरोध के बाद सितंबर 2026 में इस संशोधित व्यवस्था को फिलहाल रोक दिया गया है।

    ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 27 सितंबर, रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में सामान्य बैंकिंग कामकाज की अनुमति दी गई है। इस दौरान शाखाएं, कार्यालय, एटीएम से जुड़ी शाखाएं और करेंसी चेस्ट संचालित रहेंगे। इसका उद्देश्य लगातार कई दिनों तक बैंकिंग सेवाओं में संभावित व्यवधान को कम करना है।

    इससे पहले 11 सितंबर को बैंक यूनियनों की ओर से एक दिन की हड़ताल की गई थी। अब 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है। यूनियनों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 26 अक्टूबर से देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा सकती है।

  • FASTag चोरी या गुम होने पर तुरंत करें ये जरूरी काम, नहीं तो टोल भुगतान के साथ खाते से पैसे कटने का खतरा

    FASTag चोरी या गुम होने पर तुरंत करें ये जरूरी काम, नहीं तो टोल भुगतान के साथ खाते से पैसे कटने का खतरा

    नई दिल्ली ।FASTag ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर टोल भुगतान की प्रक्रिया को काफी आसान बनाया है। वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा FASTag संबंधित बैंक खाते या वॉलेट से जुड़ा होता है और टोल प्लाजा से गुजरते समय निर्धारित राशि अपने आप कट जाती है। ऐसे में अगर FASTag चोरी हो जाए या वाहन से निकाल लिया जाए तो समय रहते उसे ब्लॉक करना जरूरी हो जाता है।

    FASTag के चोरी या गुम होने की जानकारी मिलते ही सबसे पहला कदम उसे बंद करवाना होना चाहिए। इसके लिए FASTag जारी करने वाले बैंक के टोल-फ्री कस्टमर केयर नंबर पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है। बैंक को FASTag के चोरी या गुम होने की जानकारी देकर उसे हॉटलिस्ट या ब्लॉक करने का अनुरोध किया जा सकता है।

    अगर संबंधित बैंक का कस्टमर केयर नंबर उपलब्ध नहीं है या तत्काल संपर्क करने में परेशानी हो रही है तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की हेल्पलाइन 1033 पर भी संपर्क किया जा सकता है। इस नंबर के माध्यम से FASTag की हॉटलिस्टिंग या ब्लॉकिंग के लिए अनुरोध दर्ज कराया जा सकता है।

    FASTag को ऑनलाइन भी बंद किया जा सकता है। इसके लिए जिस बैंक या वॉलेट से FASTag जुड़ा है, उसके आधिकारिक मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद FASTag से संबंधित सेक्शन में जाकर मैनेज FASTag या ब्लॉक/डीएक्टिवेट जैसे विकल्प को तलाशना होगा।

    ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान FASTag के बंद करने का कारण पूछा जा सकता है। ऐसी स्थिति में चोरी या गुम होने से संबंधित विकल्प का चयन करके FASTag को डीएक्टिवेट किया जा सकता है। इससे चोरी हुए या गुम FASTag के आगे इस्तेमाल की आशंका को कम करने में मदद मिलती है।

    अगर FASTag के साथ वाहन भी चोरी हुआ है या केवल FASTag ही चोरी किया गया है तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराना भी जरूरी कदम है। ऑनलाइन FIR या पुलिस शिकायत दर्ज कराने से चोरी की घटना का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार हो जाता है। इससे भविष्य में चोरी किए गए FASTag के किसी गलत इस्तेमाल से संबंधित स्थिति में वाहन मालिक के पास शिकायत का रिकॉर्ड मौजूद रहेगा।

    पुलिस शिकायत की जरूरत नया FASTag जारी कराने के दौरान भी पड़ सकती है। संबंधित बैंक नया FASTag जारी करने के लिए पुलिस रिपोर्ट की कॉपी मांग सकता है। इसलिए चोरी या गुम होने की स्थिति में ब्लॉक कराने के साथ शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी पूरी करना उपयोगी है।

    पुराना FASTag पूरी तरह ब्लॉक होने के बाद वाहन मालिक संबंधित बैंक से नया FASTag जारी करने का अनुरोध कर सकता है। नया FASTag मिलने और सक्रिय होने के बाद पुराने FASTag से जुड़े बकाया वॉलेट बैलेंस के संबंध में बैंक की प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    पुराने FASTag में मौजूद राशि को लेकर भी बैंक से जानकारी लेना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद बचा हुआ वॉलेट बैलेंस नए FASTag से जुड़े खाते में स्थानांतरित किया जा सकता है। इसलिए FASTag चोरी या गुम होने पर देरी करने के बजाय पहले उसे बंद कराना, फिर पुलिस शिकायत और नया FASTag जारी कराने की प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण है।

  • 504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थाओं से जुड़े 504 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में छह अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। जांच एजेंसी ने साकेत कुमार, राम कुमार सिंह, पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन पर बैंक अधिकारियों तथा अन्य आरोपियों के साथ कथित आपराधिक साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। चार्जशीट में सरकारी धन को निजी बैंकों में स्थानांतरित कराने, बैंक चयन और एफडी निवेश से जुड़े नियमों की अनदेखी तथा वित्त विभाग की निर्धारित सीमाओं को दरकिनार करने जैसे आरोप शामिल हैं।

    जांच के मुताबिक अधिकारियों पर सरकारी धन के निवेश में प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने के साथ-साथ कथित तौर पर रिश्वत या अन्य अनुचित लाभ लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। मामले में सबूत छिपाने और वित्तीय फैसलों के जरिए कुछ निजी बैंक अधिकारियों को फायदा पहुंचाने की बात भी चार्जशीट में कही गई है।

    साकेत कुमार के संबंध में आरोप है कि उन्होंने 16 जून 2025 से 10 अप्रैल 2026 के बीच विकास एवं पंचायत विभाग के आयुक्त एवं सचिव के पद पर रहते हुए हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। जांच के अनुसार, एक निजी बैंक के पूर्व अधिकारी की सिफारिश पर एचपीजीसीएल पेंशन फंड ट्रस्ट से 25 करोड़ रुपये निकाले गए और उन्हें संबंधित बैंक में जमा कराया गया।

    पंचकूला नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राम कुमार सिंह को लेकर भी चार्जशीट में वित्तीय लेनदेन का उल्लेख है। जांच के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को उनके आवास पर 50 लाख रुपये पहुंचाए गए। इसके बाद 22 जनवरी को दिल्ली में उनके बेटे प्रशांत सिंह को तीन अलग-अलग किश्तों में कुल दो करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप है। इन किश्तों में एक करोड़ रुपये, 50 लाख रुपये और 50 लाख रुपये शामिल थे।

    हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष विनीत गर्ग के मामले में भी कथित अनुचित लाभ का उल्लेख किया गया है। जांच में आरोप लगाया गया कि दीपावली से पहले एक बैंक अधिकारी के माध्यम से उनके घर 50-50 ग्राम वजन के दो सोने के सिक्के पहुंचाए गए। चार्जशीट में पंकज अग्रवाल के लिए होटल में पार्टियों और नृत्य कार्यक्रमों के आयोजन का भी उल्लेख है। इन घटनाओं को सरकारी वित्तीय फैसलों से जुड़े कथित अनुचित लाभ के संदर्भ में जांचा गया।

    एचपीजीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष मोहम्मद शाइन पर भी बैंक को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। चार्जशीट के मुताबिक नवंबर 2024 में इंडसइंड बैंक में करीब 108.46 करोड़ रुपये की एफडी समय से पहले तुड़वाई गई। इसमें से 50 करोड़ रुपये दूसरे निजी बैंक में जमा कराए गए। जांच एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया से एचपीजीसीएल को करीब 1.66 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ।

    वहीं, प्रदीप कुमार पर ब्याज दरों से संबंधित अनियमितताओं के जरिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है। चार्जशीट के अनुसार इस मामले में बोर्ड को करीब 159.86 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    कुल मिलाकर जांच में सरकारी संस्थाओं के बैंक खातों और सावधि जमा से जुड़े फैसलों, बैंक चयन, धन हस्तांतरण और कथित निजी लाभ के बीच संबंधों की पड़ताल की गई है। छह अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल चार्जशीट में दर्ज आरोप हैं। मामले में इन आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांच होगी और अंतिम जिम्मेदारी अदालत के निर्णय के आधार पर तय होगी।

  • 1 अक्टूबर से SBI के BSBD खाताधारकों के लिए बदलेगा ATM कैश निकासी नियम, लिमिट के बाद लगेगा अतिरिक्त चार्ज

    1 अक्टूबर से SBI के BSBD खाताधारकों के लिए बदलेगा ATM कैश निकासी नियम, लिमिट के बाद लगेगा अतिरिक्त चार्ज

    नई दिल्ली ।भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI के कुछ खाताधारकों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से कैश निकासी के नियम बदलने जा रहे हैं। यह बदलाव खास तौर पर ब्रांच के जरिए खोले गए Basic Savings Bank Deposit यानी BSBD खातों से जुड़े ग्राहकों पर लागू होगा। नए नियम के तहत महीने में तय मुफ्त कैश निकासी की सीमा पार करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।

    BSBD खाताधारकों को हर महीने चार बार तक कैश निकालने की सुविधा मुफ्त मिलेगी। इसका मतलब है कि ग्राहक एक महीने में अधिकतम चार कैश निकासी ट्रांजैक्शन बिना अतिरिक्त शुल्क के कर सकेंगे। यह निकासी ATM या लागू अन्य माध्यमों से की जा सकती है।

    अगर कोई ग्राहक एक महीने में चार बार से ज्यादा कैश निकालता है, तो पांचवें और उसके बाद होने वाले प्रत्येक अतिरिक्त कैश निकासी ट्रांजैक्शन पर 15 रुपये का शुल्क लगाया जाएगा। इसके साथ लागू GST भी देना होगा। ऐसे में बार-बार नकद राशि निकालने वाले ग्राहकों के लिए हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर शुल्क का असर पड़ेगा।

    ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि नया नियम SBI के सभी खाताधारकों पर लागू नहीं होगा। इसमें विशेष रूप से BSBD खातों से जुड़े ग्राहकों को ध्यान में रखा गया है। इसलिए कैश निकालने से पहले यह देखना जरूरी होगा कि उनका खाता किस श्रेणी में आता है और उस पर कौन से नियम लागू हैं।

    डिजिटल ट्रांजैक्शन को लेकर इस बदलाव का कोई असर नहीं बताया गया है। ग्राहक पहले की तरह डिजिटल पेमेंट के माध्यम से लेन-देन कर सकेंगे और डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या पर इस बदलाव के तहत कोई सीमा नहीं होगी। यानी नया शुल्क केवल तय मुफ्त कैश निकासी सीमा पार करने वाले अतिरिक्त ट्रांजैक्शन से संबंधित है।

    Aadhaar Enabled Payment System यानी AePS से होने वाली कैश निकासी को लेकर भी नियम में बदलाव किया गया है। पहले AePS के जरिए किए जाने वाले ट्रांजैक्शन को डिजिटल लेन-देन माना जाता था और इन्हें महीने में मिलने वाली चार मुफ्त कैश निकासी की सीमा में शामिल नहीं किया जाता था। अब यह छूट हटा दी गई है। बदले हुए नियमों के तहत AePS से होने वाली कैश निकासी भी संबंधित मुफ्त सीमा और अतिरिक्त शुल्क के दायरे में आएगी।

    SBI ने हाल के महीनों में बैंकिंग सेवाओं से जुड़े अन्य बदलाव भी किए हैं। अगस्त में बैंक ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की घरेलू बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में बदलाव किया था। नई ब्याज दरें 15 अगस्त से लागू की गई थीं।

    बैंक ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में वित्तीय प्रदर्शन में भी बढ़ोतरी दर्ज की थी। अप्रैल से जून तिमाही में SBI का नेट प्रॉफिट 21,121 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 19,160 करोड़ रुपये था। इस तरह नेट प्रॉफिट में 10.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

  • बैंक हड़ताल से पहले रविवार को खुलेंगी बैंक शाखाएं, ग्राहकों की सुविधा के लिए सरकार ने लिया अहम फैसला

    बैंक हड़ताल से पहले रविवार को खुलेंगी बैंक शाखाएं, ग्राहकों की सुविधा के लिए सरकार ने लिया अहम फैसला

    नई दिल्ली । बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल से पहले आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं में परेशानी से बचाने के लिए रविवार को बैंक खुले रखने का फैसला किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार को सामान्य रूप से काम करेंगे। इसका उद्देश्य लगातार कई दिनों तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति को कम करना है।

    बैंक कर्मचारियों की हड़ताल 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित है। इससे पहले 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत की छुट्टियां हैं। ऐसे में शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद लगातार तीन दिन हड़ताल होने पर बैंकिंग गतिविधियां कई दिनों तक प्रभावित हो सकती थीं। रविवार को बैंक खोलने का फैसला इसी संभावित व्यवधान को कम करने के लिए किया गया है।

    भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम से जुड़ी शाखाओं और करेंसी चेस्ट को रविवार को पूरी तरह चालू रखने की अनुमति दी है। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को रविवार को सामान्य कामकाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रस्तावित हड़ताल बैंक यूनियनों की कुछ मांगों को लेकर है। यूनियनों की प्रमुख मांगों में पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करना और परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई योजना को वापस लेना शामिल है। मौजूदा व्यवस्था में बैंक कर्मचारियों को महीने में दो शनिवार की छुट्टी मिलती है। यूनियनें बाकी दो शनिवार को भी अवकाश घोषित किए जाने की मांग कर रही हैं।

    पीएलआई योजना को लेकर सरकार ने पहले ही एक कदम उठाया है। कर्मचारियों और यूनियनों की ओर से उठाई गई चिंताओं पर चर्चा के बाद सरकार ने इस योजना को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इससे यूनियनों की दो प्रमुख मांगों में से एक पर कार्रवाई हो चुकी है।

    सरकार ने कहा है कि बैंक ग्राहकों का कल्याण और उनकी सुविधा प्राथमिकता में है। इसी को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बैंकिंग सेवाओं को लगातार जारी रखने के लिए कदम उठाए गए हैं। सरकार और बैंक प्रबंधन ने यूनियनों से प्रस्तावित हड़ताल को वापस लेने की अपील भी की है।

    सरकार का कहना है कि यूनियनों की अधिकांश चिंताओं का काफी हद तक समाधान किया जा चुका है, जबकि शेष मांग पर अभी विचार किया जा रहा है। बैंकिंग क्षेत्र के कर्मचारियों से बातचीत के जरिए मुद्दों का समाधान करने और बैंकिंग सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने की अपील की गई है।

    रविवार को बैंक खुले रहने से ग्राहकों को हड़ताल से पहले बैंकिंग से जुड़े जरूरी काम निपटाने का अवसर मिलेगा। नकदी से जुड़े काम, शाखा स्तर की सेवाओं और अन्य जरूरी बैंकिंग गतिविधियों के लिए रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा एटीएम से जुड़ी व्यवस्थाओं और करेंसी चेस्ट को भी चालू रखने की अनुमति दी गई है।

    प्रस्तावित हड़ताल के दौरान बैंकिंग सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह कर्मचारियों की भागीदारी और संबंधित संस्थानों की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार की ओर से रविवार को बैंक खुले रखने का निर्णय ग्राहकों के लिए लगातार छुट्टियों और हड़ताल से पैदा होने वाले संभावित व्यवधान को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।

  • शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए बुधवार को बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी-ईरान वार्ता की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों के करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहने से बाजार धारणा को कुछ सहारा मिला। इसके साथ ही घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेतों ने भी निवेशकों के रुख को सकारात्मक बनाए रखा।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स 299.17 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,828.25 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 117.80 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,446.80 के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों ने पिछले सत्र की कमजोरी के बाद अच्छी वापसी की।

    व्यापक बाजार में भी खरीदारी का माहौल देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.70 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.89 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि तेजी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की सक्रियता बनी रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.4 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। इसके अलावा एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, रियल्टी और सीमेंट से जुड़े शेयरों में भी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और मेटल शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।

    दूसरी ओर, आईटी और मीडिया क्षेत्र दबाव में रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मीडिया 0.50 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। आईटी शेयरों में सुस्ती के कारण बाजार की कुल बढ़त ऊपरी स्तरों पर कुछ सीमित रही।

    निफ्टी50 के प्रमुख तेजी वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, हिंडाल्को, टाटा स्टील, अपोलो हॉस्पिटल्स और जेएसडब्ल्यू स्टील शामिल रहे। इनके अलावा ग्रासिम, नेस्ले इंडिया, आईटीसी, एलएंडटी, पावर ग्रिड और अदाणी पोर्ट्स में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं एचसीएल टेक, टाइटन, इंफोसिस, कोल इंडिया, टीसीएस, विप्रो, एनटीपीसी, बीईएल और ट्रेंट जैसे शेयरों में कमजोरी रही।

    बाजार की चाल पर नजर डालें तो कारोबारी सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर बना रहा। मजबूत अमेरिकी डॉलर के बीच भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। हालांकि, सितंबर के फ्लैश पीएमआई के उम्मीद से बेहतर आंकड़ों ने घरेलू आर्थिक गतिविधियों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।

    महंगाई का दबाव बढ़े बिना आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार मजबूत रहने की उम्मीद ने निवेशकों के भरोसे को सहारा दिया। व्यापक बाजार में खरीदारी और एशियाई बाजारों की मजबूती के बीच घरेलू शेयरों में भी सकारात्मक रुख बना रहा। हालांकि, आईटी क्षेत्र की कमजोरी के कारण प्रमुख सूचकांकों की बढ़त दिन के ऊपरी स्तरों तक पूरी तरह कायम नहीं रह सकी।

  • बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, हड़ताल से पहले रविवार को खुलेगा बैंक, जानिए 27 सितंबर के फैसले का पूरा असर

    बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, हड़ताल से पहले रविवार को खुलेगा बैंक, जानिए 27 सितंबर के फैसले का पूरा असर

    नई दिल्ली ।सरकारी बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को देखते हुए केंद्र सरकार ने ग्राहकों को राहत देने के लिए 27 सितंबर 2026, रविवार को बैंक शाखाएं खुली रखने का फैसला किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लगातार छुट्टियों और हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित असर को कम करना है।

    सरकार के इस निर्णय के तहत सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 27 सितंबर को सामान्य कार्यदिवस की तरह काम करेंगे। इससे उन ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेने का अवसर मिलेगा, जिन्हें नकद लेनदेन, दस्तावेजी कामकाज या अन्य जरूरी शाखा संबंधी सेवाओं की आवश्यकता है।

    बैंक कर्मचारियों के संयुक्त संगठन ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। प्रस्तावित हड़ताल से ठीक पहले 26 सितंबर को शनिवार और 27 सितंबर को रविवार है। ऐसे में लगातार छुट्टियों के साथ हड़ताल होने पर बैंकिंग सेवाओं में कई दिनों तक व्यवधान की स्थिति बन सकती थी।

    इसी संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए रविवार को बैंक खोलने का फैसला किया गया है। सरकार का कहना है कि आम नागरिकों की जरूरी बैंकिंग जरूरतें लंबे समय तक प्रभावित न हों और सेवाओं में निरंतरता बनी रहे, इसके लिए पहले से आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

    27 सितंबर को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में भी कामकाज होगा। बैंक शाखाओं के अलावा संबंधित बैंकिंग ढांचे को भी सक्रिय रखने की व्यवस्था की गई है। इसका मकसद ग्राहकों को जरूरी सेवाओं के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराना है।

    हड़ताल का मुख्य मुद्दा बैंकों में सप्ताह के दौरान पांच कार्यदिवस लागू करने की मांग है। बैंक कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मार्च 2024 में हुए द्विपक्षीय वेतन संशोधन समझौते के दौरान पांच कार्यदिवस की व्यवस्था को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया है।

    बैंक कर्मचारी संगठन इसी मांग को लेकर सरकार और बैंक प्रबंधन के समक्ष अपनी बात रखते रहे हैं। प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल भी इसी मुद्दे को लेकर बुलाई गई है। सरकार की ओर से कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की गई है।

    बैंकिंग सेवाएं आम नागरिकों, कारोबारियों और विभिन्न संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। लगातार छुट्टियों के बाद हड़ताल होने की स्थिति में शाखाओं पर काम का दबाव बढ़ सकता है। रविवार को बैंक खोलने का फैसला इसी संभावित व्यवधान को कम करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

    ग्राहकों के लिए 27 सितंबर का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि यह सामान्य रविवार होने के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में बैंकिंग कार्य उपलब्ध रहेगा। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल के कारण शाखाओं के नियमित कामकाज पर असर पड़ सकता है।

    सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से सेवाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया गया है। वहीं कर्मचारी संगठन अपनी पांच दिवसीय कार्यसप्ताह की मांग को लेकर हड़ताल के कार्यक्रम पर कायम हैं। ऐसे में सितंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं की स्थिति पर ग्राहकों और कारोबारियों की नजर रहेगी।

  • भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार, सेंसेक्स 22 अंक फिसला जबकि निफ्टी 53 अंक चढ़कर 23,270 पर बंद हुआ

    भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार, सेंसेक्स 22 अंक फिसला जबकि निफ्टी 53 अंक चढ़कर 23,270 पर बंद हुआ

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार मिला-जुला रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के नतीजों और उसके संकेतों का आकलन करने के बीच घरेलू बाजार में पूरे सत्र के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 में हल्की बढ़त दर्ज की गई। व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने प्रमुख सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

    बीएसई सेंसेक्स 21.86 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,314.59 पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 74,336.45 के स्तर पर बंद हुआ था। गुरुवार को सूचकांक 153.83 अंक यानी 0.20 प्रतिशत नीचे 74,182.62 पर खुला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 74,677.56 का ऊपरी स्तर छुआ, जो पिछले बंद स्तर से 341.11 अंक यानी 0.45 प्रतिशत अधिक था। दिन के दौरान इसका निचला स्तर 74,163.95 रहा।

    निफ्टी50 में इसके विपरीत बढ़त दर्ज की गई। सूचकांक 53 अंक यानी 0.23 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,270.60 पर बंद हुआ। पिछले सत्र में निफ्टी 23,217.60 पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 22.34 अंक की गिरावट के साथ 23,195.25 पर खुला। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 23,363.55 का इंट्रा-डे हाई बनाया, जो 145.95 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की बढ़त थी। इसका निचला स्तर 23,193.65 रहा।

    व्यापक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.92 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.76 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि प्रमुख सूचकांकों में सीमित उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की रुचि चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बनी रही।

    सेक्टरवार कारोबार में रियल्टी, ऑटो और मेटल सूचकांकों का प्रदर्शन बेहतर रहा। दूसरी ओर बैंकिंग से जुड़े सूचकांकों पर दबाव दिखाई दिया। निफ्टी बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक में गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी50 में एचडीएफसी लाइफ का शेयर 5.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ प्रमुख लाभ वाले शेयरों में रहा। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, एसबीआई लाइफ, डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज, बीईएल, इंडिगो और टाटा स्टील भी बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर ओएनजीसी, टाइटन, एचडीएफसी बैंक, एचयूएल, कोल इंडिया और नेस्ले इंडिया में गिरावट रही।

    बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच हालिया गिरावट के बाद कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग भी देखने को मिली। निवेशकों ने मजबूत कमाई की संभावना, अच्छे ऑर्डर बुक और बेहतर बैलेंस शीट वाली कंपनियों पर ध्यान बनाए रखा। कैपिटल गुड्स, इंडस्ट्रियल, डिफेंस, पावर और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में चुनिंदा कंपनियों के प्रति रुचि बनी रही।

    वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से जुड़े संकेतों का असर भी बाजार के रुख पर रहा। वहीं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिकी टैरिफ से जुड़े जोखिमों के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता बनी रहने की बात कही गई। आने वाले सत्रों में वैश्विक आर्थिक संकेतक और केंद्रीय बैंकों के फैसले बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • शेयर बाजार में दो दिन बाद रिकवरी, सेंसेक्स 333 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,217 पर बंद, आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

    शेयर बाजार में दो दिन बाद रिकवरी, सेंसेक्स 333 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,217 पर बंद, आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

    नई दिल्ली ।अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के फैसले से पहले बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने पिछले दो कारोबारी सत्रों की गिरावट से उबरते हुए बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया। तेल की कीमतों में नरमी और एफएमसीजी, पीएसयू बैंक तथा रियल्टी शेयरों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में रहे।

    सेंसेक्स 332.63 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,336.45 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 99 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,217.60 अंक पर बंद हुआ। इस तरह दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों ने पिछले दो दिनों की कमजोरी के बाद बाजार में रिकवरी दर्ज की।

    हालांकि व्यापक बाजार में स्थिति पूरी तरह सकारात्मक नहीं रही। निफ्टी मिडकैप में 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.18 प्रतिशत नीचे रहा। इससे संकेत मिला कि प्रमुख शेयरों में खरीदारी के बावजूद व्यापक बाजार में दबाव बना रहा।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी एफएमसीजी सबसे ज्यादा बढ़ने वाले प्रमुख सूचकांकों में रहा। इसमें 1.63 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी पीएसयू बैंक 1.44 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 0.99 प्रतिशत चढ़ा। इन क्षेत्रों में खरीदारी ने बाजार की रिकवरी को मजबूती दी।

    इसके विपरीत निफ्टी आईटी पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। इसके अलावा निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी50 में टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एलएंडटी और बजाज फिनसर्व के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। वहीं एचडीएफसी लाइफ, एसबीआई लाइफ, एसबीआई और आईटीसी के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।

    बाजार के तकनीकी रुझान को लेकर विशेषज्ञों ने निफ्टी के लिए 23,300 से 23,400 के स्तर को अहम बाधा बताया है। उनके मुताबिक व्यापक तकनीकी स्थिति में सुधार के लिए निफ्टी का 23,500 के ऊपर टिकना जरूरी होगा। दूसरी ओर 23,100 से 23,070 का स्तर तत्काल समर्थन क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि निफ्टी 23,070 के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में सूचकांक 23,000 से 22,800 के दायरे तक जा सकता है। इसलिए आने वाले सत्रों में इन स्तरों पर बाजार की दिशा पर नजर रहेगी।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के नतीजों पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों को लेकर किस तरह का रुख अपनाता है। फेड की टिप्पणी से वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार की दिशा भी प्रभावित हो सकती है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फेड की टिप्पणी संतुलित रहती है तो बाजार में आगे रिकवरी की संभावना बनी रह सकती है। वहीं सख्त रुख, बॉन्ड यील्ड में दोबारा तेजी या ब्रेंट क्रूड के 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने की स्थिति में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और बाजार की रिकवरी सीमित हो सकती है।

    विश्लेषकों के मुताबिक अब निवेशकों का ध्यान फेड चेयरमैन की टिप्पणियों पर रहेगा। भविष्य की ब्याज दरों को लेकर मिलने वाले संकेत वैश्विक तरलता, पूंजी प्रवाह और वित्तीय बाजारों की निकट अवधि की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • सेंसेक्स 74,902 और निफ्टी 23,477 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने गिरावट का सिलसिला तोड़ा

    सेंसेक्स 74,902 और निफ्टी 23,477 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने गिरावट का सिलसिला तोड़ा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीन कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला गुरुवार को थम गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 138.36 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,902.59 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 46.30 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की तेजी रही और यह 23,477.80 के स्तर पर बंद हुआ।

    कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,764.23 से 21.69 अंक नीचे 74,742.54 पर खुला। इसके बाद दिन में यह 146.73 अंक यानी 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,910.96 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 165.75 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,598.47 के निचले स्तर तक भी गया।

    निफ्टी 50 ने पिछले बंद स्तर 23,431.50 की तुलना में 15 अंक की बढ़त के साथ 23,446.60 पर कारोबार की शुरुआत की। दिन के दौरान इंडेक्स 63.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,494.95 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। वहीं एक समय यह 51.40 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,380.10 के इंट्रा-डे निचले स्तर पर भी पहुंचा।

    व्यापक बाजार में हालांकि दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 0.38 प्रतिशत और 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। यानी प्रमुख सूचकांकों में तेजी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी मीडिया, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी एफएमसीजी में दबाव देखा गया।

    निफ्टी 50 में एचसीएल टेक, हिंडाल्को और टाटा स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर एचडीएफसी लाइफ, पावरग्रिड, ओएनजीसी, भारतीय एयरटेल और टेक महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई।

    गुरुवार के कारोबार के दौरान बाजार के लिए पश्चिम एशिया का तनाव भी महत्वपूर्ण कारक बना रहा। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं। तेल की कीमतों में यह मजबूती भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का कच्चा तेल आयात करता है।

    ईरान की ओर से कहा गया कि छह महीने से चल रहे संघर्ष के दौरान जहाजों पर हुए सबसे बड़े हमलों में अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को डुबो दिया। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमला करने की बात कही। इस घटनाक्रम के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर असर बना रहा।

    ऊंची कच्चे तेल की कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसके साथ ही इससे मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ने और आर्थिक विकास तथा कंपनियों की लाभप्रदता पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका रहती है। गुरुवार के सत्र में इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी भारतीय बाजार ने तीन सत्रों की लगातार गिरावट के बाद कारोबार बढ़त के साथ समाप्त किया।