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  • भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, बैंकिंग और मेटल सेक्टर की मजबूत बढ़त से बढ़ा कॉरपोरेट मुनाफा

    भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, बैंकिंग और मेटल सेक्टर की मजबूत बढ़त से बढ़ा कॉरपोरेट मुनाफा


    नई दिल्ली ।
    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र का प्रदर्शन बाजार की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि के दौरान बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, धातु, सूचना प्रौद्योगिकी और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों की मजबूत वृद्धि ने कंपनियों के समग्र मुनाफे को मजबूती दी। हालांकि तेल विपणन कंपनियों को ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के कारण दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन अन्य प्रमुख क्षेत्रों के अच्छे प्रदर्शन से कुल आय पर इसका प्रभाव काफी हद तक संतुलित हो गया।

    तिमाही नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि यदि तेल विपणन कंपनियों को अलग कर दिया जाए तो भारतीय कंपनियों की आय में सालाना आधार पर करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव के बावजूद अधिकांश कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है और परिचालन स्तर पर बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है।

    प्रमुख क्षेत्रों में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं का रहा, जहां आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। धातु क्षेत्र ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल की। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 11 प्रतिशत और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे समग्र कॉरपोरेट आय को मजबूती मिली।

    अब तक अपने तिमाही परिणाम घोषित करने वाली निफ्टी की कई प्रमुख कंपनियों ने भी बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है। औसतन कंपनियों के मुनाफे में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि विश्लेषकों का अनुमान इससे काफी कम था। बड़ी संख्या में कंपनियां अपने अनुमानित लाभ से बेहतर नतीजे देने में सफल रहीं, जबकि अपेक्षाकृत कम कंपनियों के परिणाम अनुमान से कमजोर रहे।

    हालांकि सभी क्षेत्रों की स्थिति समान नहीं रही। तेल विपणन कंपनियों के अलावा सीमेंट, विमानन और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों पर लागत और मांग से जुड़ी चुनौतियों का असर देखने को मिला। विशेष रूप से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बनाया, जिससे इन क्षेत्रों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    बाजार पूंजीकरण के आधार पर देखें तो बड़ी कंपनियों ने स्थिर प्रदर्शन करते हुए अपनी आय में वृद्धि दर्ज की। दूसरी ओर मिड-कैप कंपनियों के समग्र आंकड़ों में गिरावट दिखाई दी, जिसका प्रमुख कारण तेल विपणन कंपनियों का कमजोर प्रदर्शन रहा। हालांकि इन कंपनियों को अलग करने पर मिड-कैप श्रेणी की अधिकांश कंपनियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे स्पष्ट होता है कि व्यापक स्तर पर कारोबार की स्थिति सकारात्मक बनी हुई है।

    स्मॉल-कैप कंपनियों ने इस तिमाही में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। इन कंपनियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें वित्तीय क्षेत्र की मजबूती और अनुकूल तुलनात्मक आधार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों में भी कारोबारी गतिविधियां बेहतर हो रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पहली तिमाही के मजबूत नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। हालांकि आने वाले महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और पूंजी बाजार में बढ़ती गतिविधियां निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। इसके बावजूद मौजूदा तिमाही के परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती का सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

  • शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सकारात्मक रुख देखने को मिला। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 250 अंकों की बढ़त के साथ 78,850 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी मामूली तेजी के साथ 24,650 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती घंटे में निवेशकों की ओर से बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। कारोबार के दौरान निवेशकों का रुझान चुनिंदा बड़े शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे बाजार का माहौल सकारात्मक बना रहा।

    आज के कारोबार में बैंकिंग कंपनियों के शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी निवेशकों ने भरोसा दिखाया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर मजबूत निवेश गतिविधियों और चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी के कारण बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है। हालांकि वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के चलते निवेशक सतर्क भी नजर आए और सीमित दायरे में कारोबार जारी रहा।

    इसी बीच रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की कंपनी जूनिपर ग्रीन एनर्जी ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की। कंपनी का शेयर राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज पर 245 रुपये और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर 242 रुपये के स्तर पर सूचीबद्ध हुआ। यह कंपनी के 225 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक रहा। मजबूत लिस्टिंग ने उन निवेशकों को शुरुआती दिन ही लाभ दिया जिन्होंने कंपनी के सार्वजनिक निर्गम में निवेश किया था।

    कंपनी का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम 30 जुलाई से 3 अगस्त के बीच निवेशकों के लिए खुला था। इस इश्यू का प्राइस बैंड 214 से 225 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। निवेशकों की अच्छी भागीदारी के चलते इस निर्गम को लगभग 7.97 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं और निवेशकों के सकारात्मक रुख का लाभ कंपनी को सूचीबद्ध होने के पहले ही दिन मिला।

    दूसरी ओर एशियाई बाजारों में कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग सभी प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता और विभिन्न आर्थिक संकेतकों का असर एशियाई बाजारों पर स्पष्ट रूप से नजर आया। वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिला-जुला प्रदर्शन दर्ज किया गया, जहां डाउ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में हल्की गिरावट रही।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो हाल के सात कारोबारी दिनों में उन्होंने कुल 2,703 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की है। हालांकि ताजा कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों की ओर से सीमित बिकवाली दर्ज की गई, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को संतुलित बनाए रखा। पिछले कारोबारी दिन भी सेंसेक्स 152 अंकों की बढ़त के साथ 78,581 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन शुरुआती तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी भी घरेलू बाजार में बना हुआ है और आगामी कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कॉर्पोरेट गतिविधियों पर भी बाजार की नजर रहेगी।

  • बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, आरबीआई के नए फैसले से जमा दरों और फंडिंग रणनीति पर पड़ेगा असर

    बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, आरबीआई के नए फैसले से जमा दरों और फंडिंग रणनीति पर पड़ेगा असर

     
    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए बल्क डिपॉजिट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, जिससे उन्हें जमा दरें तय करने में पहले की तुलना में अधिक लचीलापन मिलेगा। नए नियमों के तहत बैंक अब बल्क डिपॉजिट की कीमत तय करते समय लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो यानी एलसीआर के रन-ऑफ रेट्स को ध्यान में रख सकेंगे। माना जा रहा है कि यह बदलाव बैंकों की फंडिंग लागत, तरलता प्रबंधन और एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

    रेटिंग एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे बैंक अपनी जरूरतों और जमा की तरलता विशेषताओं के आधार पर बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरों को अधिक प्रभावी तरीके से तय कर सकेंगे। पहले जमा की लिक्विडिटी विशेषताओं के आधार पर ब्याज दरों में अंतर करने की गुंजाइश सीमित थी।

    नए ढांचे के तहत बैंक अलग-अलग प्रकार के डिपॉजिट और उनसे जुड़े तरलता जोखिम को ध्यान में रखते हुए कीमत तय कर पाएंगे। इससे बैंकों को यह आकलन करने में सुविधा होगी कि किसी जमा राशि के अचानक निकलने की स्थिति में उन्हें कितनी नकदी की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए बैंकों को पर्याप्त हाई-क्वालिटी लिक्विड एसेट्स रखने की आवश्यकता होगी, ताकि किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में नकदी की जरूरत पूरी की जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से बैंकों के बीच जमा आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। जिन बैंकों का जमा आधार मजबूत है और जिनके पास करंट अकाउंट तथा सेविंग्स अकाउंट की अच्छी हिस्सेदारी है, उन्हें इसका फायदा मिल सकता है। वहीं, कमजोर जमा आधार वाले बैंकों को फंड जुटाने के लिए अधिक लागत का सामना करना पड़ सकता है।

    आरबीआई ने नए नियमों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिस्क्लोजर से जुड़ी शर्तों को भी मजबूत किया है। बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक जैसी डिपॉजिट कैटेगरी के लिए ब्याज दर तय करने में किसी तरह का भेदभाव न हो। यानी समान परिस्थितियों वाले ग्राहकों के लिए दरों में मनमाना अंतर नहीं किया जा सकेगा।

    संशोधित निर्देशों के अनुसार, सभी बैंक शाखाओं में जमा पर लागू ब्याज दरों को समान रखना जरूरी होगा। हालांकि, बल्क डिपॉजिट के मामले में लिक्विडिटी रिस्क और उससे जुड़ी लागत के आधार पर कीमत तय करने की अनुमति दी गई है। यह व्यवस्था बैंकों को जोखिम और लागत के अनुसार बेहतर रणनीति बनाने में मदद करेगी।

    आरबीआई के नए निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इसके तहत बैंक द्वारा ग्राहकों को दिया जाने वाला वास्तविक ब्याज उनकी वेबसाइट पर पहले से घोषित ब्याज दरों के शेड्यूल के अनुसार ही होना चाहिए। इससे ग्राहकों को भी जमा दरों की जानकारी पहले से उपलब्ध रहेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

    नए नियमों के तहत बैंकों को प्रत्येक कार्य दिवस की सुबह 10 बजे तक अपनी वेबसाइट पर बल्क डिपॉजिट के लिए लागू ब्याज दरें प्रकाशित करनी होंगी। इसके लिए उन्हें 10 मिनट का अतिरिक्त समय यानी ग्रेस पीरियड भी दिया जाएगा। इससे बैंकिंग व्यवस्था में स्पष्टता बढ़ेगी और ग्राहक भी बेहतर जानकारी के आधार पर अपने निवेश संबंधी फैसले ले सकेंगे।

    कुल मिलाकर, आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में तरलता प्रबंधन को मजबूत करने और जमा बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे बैंकों को अपनी वित्तीय रणनीति तैयार करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, जबकि नियामकीय निगरानी और पारदर्शिता भी बनी रहेगी।

  • RBI के नए FD नियम 1 अक्टूबर से लागू, अब हर बैंक शाखा में समान जमा पर मिलेगा एक जैसा ब्याज

    RBI के नए FD नियम 1 अक्टूबर से लागू, अब हर बैंक शाखा में समान जमा पर मिलेगा एक जैसा ब्याज

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए बैंकिंग व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इनके लागू होने के बाद एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में समान अवधि और समान राशि की फिक्स्ड डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्याज दर देने की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। इससे ग्राहकों को बैंक की किसी भी शाखा में समान शर्तों पर एक जैसा ब्याज मिलने का अधिकार मिलेगा।

    RBI के नए निर्देश सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के साथ-साथ स्मॉल फाइनेंस बैंक, रीजनल रूरल बैंक, लोकल एरिया बैंक, पेमेंट बैंक और शहरी सहकारी बैंकों पर भी लागू होंगे। इसका उद्देश्य देशभर में जमा योजनाओं को अधिक पारदर्शी बनाना और ग्राहकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना है। इससे बैंकिंग प्रणाली में एकरूपता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

    नए नियमों के अनुसार यदि कोई ग्राहक किसी बैंक की किसी भी शाखा में समान दिन, समान अवधि और समान राशि की फिक्स्ड डिपॉजिट कराता है तो उस पर मिलने वाली ब्याज दर पूरे बैंक नेटवर्क में एक जैसी होगी। केवल शाखा बदलने के आधार पर ब्याज दर में अंतर नहीं रखा जा सकेगा। इससे ग्राहकों को बेहतर स्पष्टता मिलेगी और शाखा के अनुसार ब्याज दरों में अंतर की स्थिति समाप्त होगी।

    RBI ने बैंकों के लिए ब्याज दरों की जानकारी सार्वजनिक करना भी अनिवार्य किया है। अब सभी बैंक अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं की ब्याज दरों का विवरण पहले से अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराएंगे। इससे ग्राहक निवेश का निर्णय लेने से पहले विभिन्न अवधि की ब्याज दरों की आसानी से तुलना कर सकेंगे। यह व्यवस्था बैंकिंग सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ ग्राहकों के विश्वास को भी मजबूत करेगी।

    बल्क डिपॉजिट से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। बैंकों को प्रत्येक कार्यदिवस सुबह निर्धारित समय तक अपनी वेबसाइट पर बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरें अपडेट करनी होंगी। इससे बड़े निवेशकों को रोजाना उपलब्ध दरों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी और निवेश संबंधी निर्णय अधिक जानकारी के आधार पर लिए जा सकेंगे।

    RBI ने बल्क डिपॉजिट और रुपये में किए गए एनआरआई डिपॉजिट के मामले में बैंकों को कुछ परिचालन संबंधी लचीलापन भी दिया है। बैंक अपनी तरलता की आवश्यकता, फंडिंग लागत और नियामकीय मानकों को ध्यान में रखते हुए इन श्रेणियों में ब्याज दर तय कर सकेंगे। हालांकि यह छूट केवल निर्धारित श्रेणियों तक सीमित रहेगी और सामान्य खुदरा ग्राहकों के लिए समान FD पर समान ब्याज का नियम प्रभावी रहेगा।

    महत्वपूर्ण बात यह है कि इन नए नियमों का अर्थ यह नहीं है कि 1 अक्टूबर से सभी बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज दरें स्वतः बढ़ या घट जाएंगी। RBI ने केवल ब्याज निर्धारण की प्रक्रिया और पारदर्शिता से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। ब्याज दरें तय करने का अधिकार पहले की तरह बैंकों के पास ही रहेगा और वे अपनी वित्तीय स्थिति, बाजार की परिस्थितियों तथा धन जुटाने की लागत के आधार पर दरों में परिवर्तन कर सकेंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों से ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाएं अधिक स्पष्ट और भरोसेमंद बनेंगी। समान जमा पर समान ब्याज मिलने, ब्याज दरों की सार्वजनिक उपलब्धता और अलग-अलग शाखाओं के बीच असमानता समाप्त होने से निवेशकों को बेहतर निर्णय लेने में सुविधा होगी। इससे बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

  • 3 से 9 अगस्त के बीच केवल दो दिन बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले छुट्टियों की सूची जरूर देखें

    3 से 9 अगस्त के बीच केवल दो दिन बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले छुट्टियों की सूची जरूर देखें

    नई दिल्ली । अगस्त के पहले पूर्ण सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए बैंक अवकाश की जानकारी पहले से जानना महत्वपूर्ण है। 3 अगस्त से 9 अगस्त 2026 के बीच अधिकांश राज्यों में बैंक सामान्य कार्य दिवसों पर खुले रहेंगे, जबकि सप्ताहांत में निर्धारित अवकाश के कारण दो दिन शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। ऐसे में जिन लोगों को बैंक शाखा में जाकर जरूरी कार्य पूरे करने हैं, उन्हें पहले से अपनी योजना बना लेनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    भारतीय रिजर्व बैंक प्रत्येक महीने विभिन्न राज्यों के लिए बैंक अवकाश का कैलेंडर जारी करता है। इस सूची में राष्ट्रीय अवकाश, क्षेत्रीय त्योहारों से जुड़े अवकाश और साप्ताहिक छुट्टियां शामिल रहती हैं। चूंकि अलग-अलग राज्यों में स्थानीय पर्व और विशेष अवसर अलग हो सकते हैं, इसलिए कुछ स्थानों पर अतिरिक्त अवकाश भी घोषित किए जा सकते हैं। हालांकि 3 अगस्त से 9 अगस्त के बीच सामान्य परिस्थितियों में अधिकांश राज्यों में बैंक सोमवार से शुक्रवार तक नियमित रूप से संचालित होंगे।

    इस सप्ताह के दौरान 3 अगस्त सोमवार, 4 अगस्त मंगलवार, 5 अगस्त बुधवार, 6 अगस्त गुरुवार और 7 अगस्त शुक्रवार को बैंक शाखाएं सामान्य समय के अनुसार खुली रहेंगी। इन दिनों ग्राहक नकद जमा, निकासी, चेक जमा, डिमांड ड्राफ्ट, पासबुक अपडेट, ऋण संबंधी कार्य, खाता खुलवाने तथा अन्य बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। यदि किसी राज्य में स्थानीय अवकाश घोषित नहीं है तो इन दिनों सभी नियमित बैंकिंग गतिविधियां जारी रहेंगी।

    सप्ताह के अंत में 8 अगस्त को महीने का दूसरा शनिवार होने के कारण देशभर में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। इसके अगले दिन 9 अगस्त रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा, जिसके चलते बैंक शाखाओं में कोई नियमित कार्य नहीं होगा। इस प्रकार 3 अगस्त से 9 अगस्त के बीच सामान्य रूप से बैंक केवल दो दिन बंद रहेंगे। हालांकि कुछ राज्यों में स्थानीय त्योहार या विशेष सरकारी अवकाश घोषित होने पर संबंधित क्षेत्रों में अतिरिक्त छुट्टी लागू हो सकती है।

    बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को आवश्यक डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं का लाभ मिलता रहेगा। मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, एटीएम से नकद निकासी, आईएमपीएस, एनईएफटी तथा अन्य ऑनलाइन लेनदेन सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी। इससे ग्राहक बिना बैंक शाखा पहुंचे भी अधिकांश वित्तीय कार्य आसानी से कर सकेंगे। हालांकि चेक क्लियरेंस, शाखा में नकद जमा, केवाईसी अपडेट, दस्तावेज सत्यापन तथा कुछ विशेष बैंकिंग प्रक्रियाएं केवल कार्य दिवसों में ही पूरी की जा सकेंगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जिन ग्राहकों को बड़े वित्तीय लेनदेन, ऋण संबंधी दस्तावेज जमा करने, चेक क्लियर कराने या अन्य महत्वपूर्ण शाखा आधारित कार्य करने हैं, उन्हें अवकाश से पहले ही यह प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए। इससे छुट्टियों के दौरान किसी प्रकार की देरी या असुविधा से बचा जा सकता है। साथ ही बैंक जाने से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक अवकाश सूची की जांच करना भी उपयोगी रहेगा, क्योंकि विभिन्न राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अवकाश अलग-अलग हो सकते हैं। समय रहते योजना बनाकर ग्राहक अपनी बैंकिंग जरूरतों को बिना किसी परेशानी के पूरा कर सकते हैं।

  • आरबीआई की विशेष योजना से विदेशी मुद्रा प्रवाह मजबूत, एफसीएनआर (बी) जमा में सार्वजनिक बैंकों की अहम भूमिका

    आरबीआई की विशेष योजना से विदेशी मुद्रा प्रवाह मजबूत, एफसीएनआर (बी) जमा में सार्वजनिक बैंकों की अहम भूमिका

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष जमा योजना के तहत विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है। हालिया आकलनों के अनुसार, केवल 45 दिनों के भीतर इन जमाओं का स्तर वर्ष 2013 में दर्ज 26 अरब डॉलर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पार कर चुका है। मौजूदा रुझानों को देखते हुए सितंबर के अंत तक एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट 65 से 70 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जबकि कुल जमा 80 से 85 अरब डॉलर के दायरे में रह सकती है।

    17 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लगभग 20 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया है। इसमें 17.4 अरब डॉलर का योगदान केवल एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट से आया है। यह संकेत देता है कि विशेष योजना को प्रवासी भारतीयों और विदेशी मुद्रा निवेशकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि जमा में आई यह तेजी देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान परिपक्व होने वाली बड़ी संख्या में मौजूदा एफसीएनआर (बी) जमाओं का नवीनीकरण होने की संभावना है। विशेष योजना के तहत उपलब्ध अपेक्षाकृत अधिक ब्याज दरें जमाकर्ताओं को अपनी राशि दोबारा निवेश करने के लिए आकर्षित कर सकती हैं। इससे कुल जमा राशि में और वृद्धि होने की उम्मीद है।

    रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि मौजूदा आधारभूत अनुमान के अतिरिक्त लगभग 10 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूंजी भी देश में आ सकती है। यह अतिरिक्त निवेश मुख्य रूप से उन देशों से आने की संभावना है जहां कर संबंधी रियायतें उपलब्ध हैं और प्रवासी भारतीयों की अच्छी संख्या मौजूद है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो विदेशी मुद्रा प्रवाह अपेक्षा से अधिक मजबूत हो सकता है।

    एफसीएनआर (बी) जमा अभियान को आगे बढ़ाने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन बैंकों ने न केवल अपने व्यापक ग्राहक आधार का लाभ उठाया है, बल्कि विभिन्न देशों में रहने वाले भरोसेमंद और उच्च साख वाले ग्राहकों के साथ लंबे समय से बने संबंधों का भी प्रभावी उपयोग किया है। इसके साथ ही ऑनशोर और ऑफशोर बैंकिंग रणनीतियों के संतुलित उपयोग ने भी पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को गति दी है।

    हालांकि मजबूत पूंजी प्रवाह के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में कुछ सवाल भी बने हुए हैं। वित्तीय बाजारों में यह चर्चा जारी है कि इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने के बाद भी रुपये पर दबाव क्यों बना हुआ है और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की स्थिति पर इसका वास्तविक प्रभाव किस प्रकार दिखाई देगा। यह विषय आने वाले समय में नीति निर्माताओं और बाजार विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

    विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप पूरी तरह नियमित नहीं रहा। इसके बावजूद यह आवश्यक माना गया है कि रुपये की मूलभूत मजबूती को बनाए रखा जाए, ताकि वह वैश्विक आर्थिक झटकों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके और भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर प्रतिकूल असर न पड़े। वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं में बढ़ते तनाव और असंतुलित पूंजी प्रवाह के दौर में विदेशी मुद्रा प्रबंधन और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

  • 16 से 19 जुलाई के बीच कई शहरों में अलग-अलग दिनों पर बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले जरूर देखें अपने शहर की छुट्टियों की सूची

    16 से 19 जुलाई के बीच कई शहरों में अलग-अलग दिनों पर बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले जरूर देखें अपने शहर की छुट्टियों की सूची


    नई दिल्ली ।
    अगले सप्ताह बैंकिंग सेवाओं से जुड़ा कोई भी आवश्यक कार्य करने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए बैंक अवकाश की जानकारी पहले से जानना महत्वपूर्ण होगा। 16 जुलाई से 19 जुलाई के बीच देश के अलग-अलग शहरों में स्थानीय पर्वों, स्मृति दिवस और साप्ताहिक अवकाश के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि बैंक पहुंचने से पहले अपने शहर में लागू अवकाश की स्थिति अवश्य जांच लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    16 जुलाई को देश के कुछ चुनिंदा शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इस दिन भुवनेश्वर, देहरादून और इंफाल में स्थानीय पर्वों और सांस्कृतिक आयोजनों के चलते बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। ओडिशा में रथ यात्रा तथा उत्तराखंड में हरेला पर्व के अवसर पर अवकाश रहेगा, जबकि संबंधित स्थानीय अवकाश के कारण इंफाल में भी बैंक सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इन शहरों में ग्राहकों को अपने बैंकिंग कार्य निर्धारित तिथि से पहले या बाद में निपटाने की योजना बनानी चाहिए।

    17 जुलाई को बैंक अवकाश केवल मेघालय की राजधानी शिलांग में रहेगा। यहां तिरोत सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर सरकारी अवकाश घोषित होने के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। यह अवकाश केवल स्थानीय स्तर पर लागू होगा, इसलिए देश के अन्य हिस्सों में सामान्य बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी।

    18 जुलाई को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में द्रुकपा त्शे-जी पर्व के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। यह पर्व स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, जिसके कारण इस दिन बैंक शाखाओं में नियमित कामकाज नहीं होगा। गंगटोक के अलावा देश के अधिकांश शहरों में बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे।

    19 जुलाई को रविवार होने के कारण पूरे देश में सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक शाखा स्तर पर बंद रहेंगे। यह नियमित साप्ताहिक अवकाश है और देशभर में लागू होगा। जिन ग्राहकों को नकद जमा, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट या अन्य शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता है, उन्हें रविवार से पहले अपने कार्य पूरे करने चाहिए।

    हालांकि शाखाएं बंद रहने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम, कार्ड भुगतान और अन्य ऑनलाइन सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक धन हस्तांतरण, बिल भुगतान, बैलेंस जांच और अन्य डिजिटल लेनदेन पहले की तरह कर सकेंगे।

    भारतीय रिजर्व बैंक प्रत्येक वर्ष और प्रत्येक महीने के लिए बैंक अवकाश की सूची जारी करता है, जिसमें राष्ट्रीय अवकाशों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों और शहरों के स्थानीय त्योहारों एवं विशेष अवसरों को भी शामिल किया जाता है। यही कारण है कि पूरे देश में सभी शहरों में एक ही दिन बैंक बंद नहीं रहते। ऐसे में किसी भी महत्वपूर्ण बैंकिंग कार्य के लिए शाखा जाने से पहले अपने शहर में लागू अवकाश की जानकारी की पुष्टि करना ग्राहकों के लिए सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। इससे समय की बचत होगी और बैंकिंग कार्य बिना किसी अनावश्यक परेशानी के पूरे किए जा सकेंगे।

  • बाजार में लौटा निवेशकों का भरोसा, चौथे दिन भी जारी रही तेजी; बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार उछाल

    बाजार में लौटा निवेशकों का भरोसा, चौथे दिन भी जारी रही तेजी; बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार उछाल

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। लगातार चौथे सत्र में बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की, जिससे निवेशकों का विश्वास और मजबूत होता नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 24,350 के स्तर के पार पहुंच गया। बाजार की इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग शेयरों का रहा, जहां निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के कई प्रमुख बैंकों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

    कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों का रुझान मजबूत बना रहा। बेहतर मानसून की संभावनाओं, घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सुधार और विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने बाजार के माहौल को सकारात्मक बनाए रखा। शुरुआती सत्र में प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।

    बैंकिंग सेक्टर ने बाजार की तेजी में अहम भूमिका निभाई। कई प्रमुख निजी बैंकों के शेयरों में उल्लेखनीय खरीदारी देखने को मिली, जिससे बैंकिंग सूचकांक में अच्छी मजबूती आई। वित्तीय क्षेत्र के अलावा रक्षा, दूरसंचार, इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक क्षेत्र की कुछ कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। इन क्षेत्रों में आई मजबूती ने बाजार को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    हालांकि सभी क्षेत्रों में तेजी का माहौल नहीं रहा। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे आईटी सूचकांक पर दबाव बना। इसके अलावा कुछ ऑटो, पेंट और एविएशन कंपनियों के शेयर भी शुरुआती कारोबार में कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। इसके बावजूद बाजार की समग्र दिशा सकारात्मक बनी रही और प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते रहे।

    व्यापक बाजार में भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में सीमित लेकिन स्थिर बढ़त दर्ज की गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि केवल बड़ी कंपनियों तक ही खरीदारी सीमित नहीं रही, बल्कि निवेशकों ने मध्यम और छोटी कंपनियों में भी निवेश करना जारी रखा। व्यापक भागीदारी को बाजार की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग स्थिर स्तर पर खुला। मुद्रा बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव की अनुपस्थिति ने भी निवेशकों को राहत दी। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली, जिसे आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ऊर्जा लागत में कमी का प्रभाव आने वाले समय में कई उद्योगों के परिचालन खर्च पर भी पड़ सकता है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत अनुकूल बने रहते हैं और विदेशी निवेशकों का निवेश जारी रहता है, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी कायम रह सकता है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर भी नजर बनाए रखनी होगी।

    लगातार चौथे दिन दर्ज हुई यह तेजी इस बात का संकेत है कि बाजार में फिलहाल निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। आने वाले कारोबारी सत्रों में आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक संकेतों और कॉरपोरेट प्रदर्शन के आधार पर बाजार की आगे की दिशा तय होगी, लेकिन फिलहाल शुरुआती रुझान निवेशकों के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है।

  • July Bank Holiday 2026: जुलाई में 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, छुट्टियों की पूरी लिस्ट देखकर ही करें जरूरी काम की प्लानिंग

    July Bank Holiday 2026: जुलाई में 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, छुट्टियों की पूरी लिस्ट देखकर ही करें जरूरी काम की प्लानिंग

    नई दिल्ली। जुलाई 2026 की शुरुआत के साथ ही बैंक ग्राहकों के लिए छुट्टियों का कैलेंडर जानना जरूरी हो गया है। यदि आपको बैंक शाखा में जाकर नकदी जमा करनी है, चेक क्लियर कराना है, डिमांड ड्राफ्ट बनवाना है या किसी अन्य बैंकिंग सेवा का लाभ लेना है, तो पहले अपने शहर की अवकाश सूची जरूर देख लें। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी बैंक अवकाश कैलेंडर के अनुसार, जुलाई महीने में विभिन्न राज्यों में स्थानीय पर्व, सांस्कृतिक आयोजनों और नियमित साप्ताहिक अवकाश को मिलाकर कुल 12 दिन बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहेगा।

    हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि सभी छुट्टियां पूरे देश में एक साथ लागू नहीं होंगी। बैंक अवकाश की व्यवस्था राज्यवार और स्थानीय त्योहारों के आधार पर तय होती है। इसका मतलब है कि जिस दिन किसी राज्य में बैंक बंद रहेंगे, उसी दिन दूसरे राज्यों में बैंक सामान्य रूप से खुले भी रह सकते हैं। इसलिए ग्राहकों को अपने शहर और राज्य के अनुसार बैंक अवकाश की जानकारी पहले से प्राप्त कर लेनी चाहिए।

    महीने की शुरुआत में 5 जुलाई को रविवार होने के कारण देशभर में बैंक बंद रहेंगे। इसके बाद 6 जुलाई को मिजोरम की राजधानी आइजोल में एमएचआईपी डे के अवसर पर स्थानीय बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा। 9 जुलाई को मेघालय के शिलॉन्ग में बेह देइंखलाम पर्व के कारण बैंक बंद रहेंगे। वहीं 11 जुलाई को दूसरे शनिवार और 12 जुलाई को रविवार के कारण देशभर के सभी सरकारी और निजी बैंक शाखाओं में नियमित अवकाश रहेगा।

    जुलाई के मध्य में भी कई राज्यों में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी। 16 जुलाई को रथ यात्रा, कांग रथयात्रा और हरेला पर्व के अवसर पर भुवनेश्वर, देहरादून, इम्फाल और शिलॉन्ग में बैंक बंद रहेंगे। इसके अगले दिन 17 जुलाई को शिलॉन्ग में यू तिरोत सिंह की पुण्यतिथि पर स्थानीय अवकाश रहेगा। 18 जुलाई को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में द्रुकपा त्शे-जी पर्व के अवसर पर बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। 19 जुलाई को रविवार होने से पूरे देश में बैंकिंग अवकाश रहेगा।

    महीने के अंतिम सप्ताह में भी कुछ स्थानों पर बैंक बंद रहेंगे। 22 जुलाई को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में खर्ची पूजा के अवसर पर बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा। इसके अलावा 25 जुलाई को चौथा शनिवार और 26 जुलाई को रविवार होने के कारण पूरे देश में सभी बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को अपने जरूरी बैंकिंग कार्य इन तिथियों को ध्यान में रखकर पहले ही पूरे कर लेने चाहिए।

    बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों की डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड जैसी सभी ऑनलाइन सुविधाएं पहले की तरह चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक धन हस्तांतरण, बिल भुगतान, ऑनलाइन खरीदारी और नकदी निकासी जैसे अधिकांश कार्य बिना किसी रुकावट के कर सकेंगे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक शाखा में जाकर किए जाने वाले कार्यों की योजना पहले से बना लेने पर अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है। खासतौर पर व्यापारियों, वेतनभोगी कर्मचारियों और ऐसे ग्राहकों के लिए, जिन्हें शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता होती है, बैंक अवकाश की जानकारी पहले से होना बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

  • RBI का फरवरी तोहफा: लोन की EMI में बड़ी कटौती के संकेत जानें कैसे आपकी जेब को मिलेगी राहत

    RBI का फरवरी तोहफा: लोन की EMI में बड़ी कटौती के संकेत जानें कैसे आपकी जेब को मिलेगी राहत


    नई दिल्ली । देश के करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों और कर्जदारों के लिए फरवरी का महीना खुशियों की सौगात लेकर आ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समिति की बैठक को लेकर वित्तीय गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका की ताजा रिपोर्ट और आर्थिक संकेतकों की मानें तो आगामी 6 फरवरी को केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती का ऐतिहासिक फैसला ले सकता है। यदि यह अनुमान हकीकत में बदलता है तो आपके होम लोन कार लोन और पर्सनल लोन की मासिक किस्तों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी जिससे आम आदमी की मासिक बजट योजना को बड़ी मजबूती मिलेगी।

    मुद्रास्फीति में नरमी और रेपो रेट का गणित आर्थिक विशेषज्ञों का तर्क है कि देश में मुद्रास्फीति महंगाई दर के आंकड़े अब धीरे-धीरे आरबीआई के संतोषजनक दायरे में आ रहे हैं। इसी अनुकूल स्थिति का लाभ उठाते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में नरमी का रुख अपना सकता है। वर्तमान में जो रेपो रेट लागू है उसमें कटौती के बाद यह घटकर 5.25 प्रतिशत के स्तर पर आ सकता है। गौरतलब है कि रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से पैसा उधार लेते हैं। जब बैंकों को केंद्रीय बैंक से सस्ता फंड मिलता है तो वे अपनी लेंडिंग दरों में कटौती करते हैं जिसका सीधा फायदा अंतिम उपभोक्ता को सस्ती EMI के रूप में मिलता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह वर्तमान कटौती चक्र की अंतिम कटौती हो सकती है जिसके बाद स्थिरता का दौर शुरू होगा।

    सिस्टम में नकदी बढ़ाने का मास्टर प्लान आरबीआई केवल ब्याज दरें घटाने तक सीमित नहीं है बल्कि वह भारतीय बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक लिक्विडिटी मैनेजमेंट प्लान पर भी काम कर रहा है। इसके तहत केंद्रीय बैंक 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। ओपन मार्केट ऑपरेशंसके माध्यम से होने वाली यह खरीद दो चरणों में 29 जनवरी और 5 फरवरी को आयोजित की जाएगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकों के हाथ में अधिक पैसा देना है ताकि वे आम जनता और उद्योगों को बिना किसी बाधा के कर्ज बांट सकें। इसके अतिरिक्त 4 फरवरी को 10 अरब डॉलर की डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी भी की जाएगी जो विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने और दीर्घकालिक तरलता को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी।

    अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति वित्तीय जानकारों का कहना है कि बजट के ठीक बाद आरबीआई के ये कदम वास्तविक अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे। ब्याज दरों में कमी से न केवल व्यक्तिगत कर्जदारों को राहत मिलेगी बल्कि कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए भी पूंजी जुटाना सस्ता होगा जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 6 फरवरी को होने वाले औपचारिक ऐलान पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं।