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  • भेष बदलकर बस में पहुंचे परिवहन मंत्री, कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने पर उतारने को कहा, औचक निरीक्षण में सामने आई बड़ी लापरवाही

    भेष बदलकर बस में पहुंचे परिवहन मंत्री, कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने पर उतारने को कहा, औचक निरीक्षण में सामने आई बड़ी लापरवाही

    नई दिल्ली । कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने आम यात्री का भेष धारण कर बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (बीएमटीसी) की बसों में सफर किया और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं तथा कर्मचारियों के व्यवहार का प्रत्यक्ष रूप से निरीक्षण किया। करीब दो घंटे तक चले इस औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने दस से अधिक बसों में यात्रा की और कई महत्वपूर्ण खामियां सामने आने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान मंत्री ने देखा कि एक यात्री द्वारा निर्धारित बस स्टॉप पर उतरने का स्पष्ट संकेत देने के बावजूद संबंधित बस के चालक और परिचालक ने वाहन नहीं रोका। इस लापरवाही के कारण यात्री को परेशानी का सामना करना पड़ा। मंत्री ने इसे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के प्रति गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित ड्राइवर और कंडक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। उनका कहना था कि सार्वजनिक परिवहन में ऐसी अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इस निरीक्षण के दौरान स्वयं मंत्री को भी यात्रियों जैसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा। यात्रा के दौरान उन्होंने किराया देने के लिए 100 रुपये का नोट दिया, लेकिन कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने की बात कहते हुए उन्हें बस से उतर जाने के लिए कहा। मंत्री ने इस घटना को यात्रियों के साथ होने वाले व्यवहार का वास्तविक उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसी समस्याएं रोजाना सफर करने वाले लोगों के लिए गंभीर असुविधा का कारण बनती हैं और इनका समाधान किया जाना आवश्यक है।

    बसों के निरीक्षण के अलावा मंत्री ने शहर में ऑटो-रिक्शा सेवाओं का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने एक ऐसे मामले में हस्तक्षेप किया, जहां मीटर पर निर्धारित किराए से अधिक राशि यात्रियों से वसूली जा रही थी। उन्होंने मौके पर ही संबंधित चालक को नियमों का पालन करने और निर्धारित किराए से अधिक वसूली नहीं करने की हिदायत दी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े सभी साधनों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    बायराथी सुरेश ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। यदि चालक, परिचालक या अन्य कर्मचारी अपने दायित्वों का सही ढंग से पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि यात्रियों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए और सेवा की गुणवत्ता में लगातार सुधार लाया जाए।

    मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में इस तरह के औचक निरीक्षण नियमित रूप से जारी रहेंगे। उनका मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समय-समय पर आम नागरिक की तरह सेवाओं का अनुभव करना चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर मौजूद कमियों की सही जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि यात्रियों के हितों की रक्षा, कर्मचारियों में अनुशासन और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने के लिए सरकार लगातार निगरानी रखेगी और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाती रहेगी।

  • रेलवे, डिफेंस और ड्रोन सेक्टर पर दांव, 14 जुलाई से खुलेगा मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज का IPO; ग्रे मार्केट में 120% से अधिक प्रीमियम की चर्चा

    रेलवे, डिफेंस और ड्रोन सेक्टर पर दांव, 14 जुलाई से खुलेगा मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज का IPO; ग्रे मार्केट में 120% से अधिक प्रीमियम की चर्चा

    नई दिल्ली । हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में कार्यरत मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड अपना 160.34 करोड़ रुपये का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लेकर आ रही है। रेलवे, एयरोस्पेस, डिफेंस, मेट्रो, ड्रोन और सेमीकंडक्टर जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों के लिए अत्याधुनिक कंपोनेंट तैयार करने वाली कंपनी का यह इश्यू 14 जुलाई से निवेशकों के लिए खुलेगा। ग्रे मार्केट में मजबूत प्रीमियम की चर्चा के कारण इस आईपीओ ने बाजार सहभागियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। हालांकि ग्रे मार्केट प्रीमियम किसी भी शेयर के सूचीबद्ध होने के बाद उसके प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जाता।

    कंपनी का सार्वजनिक निर्गम 14 जुलाई से 16 जुलाई 2026 तक निवेश के लिए खुला रहेगा। शेयरों के आवंटन की प्रक्रिया 17 जुलाई को पूरी होने की संभावना है, जबकि कंपनी के शेयर 21 जुलाई को बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध हो सकते हैं। यह पूरा इश्यू फ्रेश शेयरों का है, इसलिए इससे जुटाई जाने वाली राशि सीधे कंपनी के विस्तार और परिचालन क्षमता बढ़ाने में उपयोग की जाएगी।

    मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज ने आईपीओ का प्राइस बैंड 315 रुपये से 331 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया है। आवेदन के लिए एक लॉट में 400 शेयर रखे गए हैं। खुदरा निवेशकों को न्यूनतम दो लॉट, यानी 800 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा। ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर इसके लिए लगभग 2.65 लाख रुपये का न्यूनतम निवेश आवश्यक होगा। वहीं, उच्च नेटवर्थ निवेशकों के लिए न्यूनतम आवेदन तीन लॉट का निर्धारित किया गया है, जिसके लिए लगभग 3.97 लाख रुपये का निवेश करना होगा।

    कंपनी ने बताया है कि आईपीओ से प्राप्त पूंजी का बड़ा हिस्सा उत्पादन क्षमता बढ़ाने में लगाया जाएगा। लगभग 61.03 करोड़ रुपये नई प्लांट एवं मशीनरी की खरीद पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा करीब 81.50 करोड़ रुपये कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने में लगाए जाएंगे, जबकि शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। कंपनी का मानना है कि इससे उसकी विनिर्माण क्षमता और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी।

    वर्ष 2021 में स्थापित मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग समाधान उपलब्ध कराती है। कंपनी रेलवे कोच के पुर्जे, ब्रेकिंग सिस्टम, डोर मैकेनिज्म, मेट्रो ट्रेन कपलर, एयरोस्पेस कंपोनेंट, ड्रोन पार्ट्स और सेमीकंडक्टर उद्योग में उपयोग होने वाले जटिल इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्माण करती है। इन क्षेत्रों में बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी अपने कारोबार के विस्तार की दिशा में लगातार निवेश कर रही है।

    कर्नाटक के बेंगलुरु में कंपनी की चार आधुनिक विनिर्माण इकाइयां संचालित हैं, जहां उन्नत सीएनसी मशीनिंग सेंटर, वायर ईडीएम मशीन, फाइबर लेजर कटिंग सिस्टम और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जाते हैं। आधुनिक तकनीक और विशेष इंजीनियरिंग क्षमता के कारण कंपनी ने हाई-प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

    बाजार में इस आईपीओ को लेकर उत्साह का एक कारण इसका मजबूत ग्रे मार्केट प्रीमियम भी बताया जा रहा है। हालांकि निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आईपीओ में निवेश का निर्णय केवल ग्रे मार्केट प्रीमियम के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं, जोखिम कारकों और मूल्यांकन का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने के बाद ही निवेश संबंधी फैसला करना चाहिए।

  • मुंबई से बेंगलुरु के बीच दौड़ेगी दूसरी वंदे भारत स्लीपर, 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ लंबी दूरी की यात्रा होगी और अधिक आरामदायक

    मुंबई से बेंगलुरु के बीच दौड़ेगी दूसरी वंदे भारत स्लीपर, 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ लंबी दूरी की यात्रा होगी और अधिक आरामदायक

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे लंबी दूरी की रेल यात्रा को आधुनिक और अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। मुंबई और बेंगलुरु के बीच दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द ही यात्रियों की सेवा में शामिल हो सकती है। अंतिम चरण के तकनीकी और सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद इस ट्रेन के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा। यह हाईस्पीड स्लीपर ट्रेन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बीच यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक विकल्प उपलब्ध कराएगी।

    यह ट्रेन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई और केएसआर बेंगलुरु रेलवे स्टेशन के बीच संचालित की जाएगी। लगभग 1100 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर यात्रा का समय मौजूदा पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में कम होने की उम्मीद है। प्रस्तावित समय-सारिणी के अनुसार ट्रेन शाम के समय मुंबई से रवाना होकर अगले दिन सुबह बेंगलुरु पहुंचेगी, जिससे व्यावसायिक यात्रियों और नियमित रेल यात्रियों को विशेष सुविधा मिलेगी।

    16 कोच वाली इस आधुनिक ट्रेन में कुल 823 यात्रियों के बैठने और सोने की व्यवस्था की गई है। इसमें 11 एसी थर्ड टियर कोच, चार एसी सेकेंड क्लास कोच तथा एक फर्स्ट एसी कोच शामिल होगा। विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सीटों और बर्थ की डिजाइन को पहले की तुलना में अधिक आरामदायक बनाया गया है ताकि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान थकान कम महसूस हो।

    वंदे भारत स्लीपर के अंदरूनी ढांचे में आधुनिक सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। बेहतर कुशनिंग वाली बर्थ, अतिरिक्त साइड सपोर्ट, चौड़े गलियारे, स्वचालित दरवाजे, हर बर्थ पर रीडिंग लाइट, आधुनिक और स्वच्छ शौचालय तथा उन्नत वेंटिलेशन प्रणाली यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान करेगी। फर्स्ट एसी श्रेणी में निजी केबिन और कूपे की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे रात के सफर में अधिक गोपनीयता और आराम सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी इस ट्रेन को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। इसमें कवच एंटी-कोलिजन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जो संभावित रेल दुर्घटनाओं और ट्रेनों की टक्कर को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके साथ ही प्रत्येक कोच में आपातकालीन संचार प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी और यात्रियों की सुविधा के लिए डिजिटल सूचना प्रदर्शन प्रणाली भी उपलब्ध होगी।

    ट्रेन की अधिकतम गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक निर्धारित की गई है। हालांकि वास्तविक परिचालन गति रेल मार्ग और परिचालन परिस्थितियों के अनुसार तय होगी। आधुनिक सस्पेंशन और उन्नत कोच डिजाइन के कारण यात्रा के दौरान झटके और शोर पहले की तुलना में काफी कम रहने की संभावना है, जिससे रातभर का सफर अधिक शांत और आरामदायक बनेगा।

    इस नई सेवा से मुंबई, पुणे, सतारा, बेलगावी, हुबली, धारवाड़, दावणगेरे और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। भारतीय रेलवे चरणबद्ध तरीके से विभिन्न प्रमुख मार्गों पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का विस्तार करने की योजना पर कार्य कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य लंबी दूरी की रेल यात्रा को विश्वस्तरीय सुविधाओं, बेहतर सुरक्षा और तेज गति के साथ नई पहचान देना है, जिससे यात्रियों को समय की बचत के साथ अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव मिल सके।

  • ईमेल से मिली बम धमकी के बाद ISRO परिसर में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियों का व्यापक सर्च ऑपरेशन; स्रोत की पड़ताल जारी

    ईमेल से मिली बम धमकी के बाद ISRO परिसर में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियों का व्यापक सर्च ऑपरेशन; स्रोत की पड़ताल जारी

    नई दिल्ली । बेंगलुरु स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के न्यू BEL रोड परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सतर्क कर दी गई। धमकी भरा ईमेल प्राप्त होते ही एहतियात के तौर पर पूरे परिसर को तत्काल खाली कराया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई तथा सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर निगरानी बढ़ा दी गई।

    सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ता और अन्य सुरक्षा इकाइयों की टीमें मौके पर पहुंचीं। इसके बाद भवन और परिसर के प्रत्येक हिस्से की सावधानीपूर्वक जांच की गई। कई घंटों तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार का विस्फोटक, संदिग्ध सामग्री या सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली वस्तु बरामद नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में धमकी को फर्जी माना जा रहा है, हालांकि सुरक्षा एजेंसियां मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

    अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों से जुड़ी किसी भी प्रकार की धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यही कारण है कि सूचना मिलते ही निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार परिसर को खाली कराया गया और विशेषज्ञ टीमों की निगरानी में विस्तृत तलाशी अभियान चलाया गया। जांच पूरी होने तक सुरक्षा व्यवस्था को अतिरिक्त रूप से मजबूत रखा गया।

    जांच एजेंसियां अब धमकी भरे ईमेल के स्रोत, उसकी तकनीकी जानकारी और उसे भेजने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान करने में जुटी हैं। डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ईमेल किस माध्यम से भेजा गया और इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है। साइबर विशेषज्ञ भी तकनीकी जांच में सहयोग कर रहे हैं।

    हाल के समय में कई सरकारी संस्थानों, न्यायिक परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को भी इसी प्रकार के धमकी भरे ईमेल प्राप्त होने की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकांश मामलों में तलाशी के दौरान कोई विस्फोटक नहीं मिला, लेकिन प्रत्येक सूचना पर सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ कार्रवाई कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

    इसी क्रम में एक संदिग्ध व्यक्ति को विभिन्न संस्थानों को कथित रूप से फर्जी बम धमकी वाले ईमेल भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या वर्तमान घटना का उससे कोई संबंध है या यह मामला अलग है। फिलहाल इस संबंध में विस्तृत जांच जारी है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

    सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि संबंधित परिसर पूरी तरह सुरक्षित है और सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी या अफवाह पर विश्वास न करें तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। मामले की जांच पूरी होने तक सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी।

  • डेकेयर सेंटर में बच्चों से कथित दुर्व्यवहार का मामला, कैपजेमिनी ने उठाया बड़ा कदम, पांच केयरगिवर्स पर केस दर्ज

    डेकेयर सेंटर में बच्चों से कथित दुर्व्यवहार का मामला, कैपजेमिनी ने उठाया बड़ा कदम, पांच केयरगिवर्स पर केस दर्ज

    नई दिल्ली। बेंगलुरु स्थित एक कॉर्पोरेट डेकेयर सेंटर में छोटे बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप सामने आने के बाद आईटी क्षेत्र में गंभीर चिंता का माहौल बन गया है। मामले के सामने आने के बाद कैपजेमिनी ने अपने कैंपस में संचालित डेकेयर सुविधा को एहतियातन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। कंपनी का कहना है कि कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा तथा बच्चों की भलाई उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वह पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग कर रही है।

    बताया गया है कि यह डेकेयर सेंटर बेंगलुरु के ब्रुकफील्ड क्षेत्र स्थित कंपनी के कैंपस में संचालित किया जा रहा था। मामले ने तब तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार के दृश्य दिखाई देने का दावा किया गया। वीडियो सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू की।

    जिला बाल संरक्षण इकाई की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। जांच के दौरान डेकेयर सेंटर में कार्यरत पांच महिला केयरगिवर्स के खिलाफ किशोर न्याय कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस अब उपलब्ध वीडियो, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि आरोपों की सत्यता का पता लगाया जा सके।

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डेकेयर सेंटर में दो से तीन वर्ष की आयु के बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता था। आरोपों के अनुसार बच्चों के रोने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता था, उनके साथ मारपीट की जाती थी और कई बार उनके साथ अमानवीय व्यवहार भी किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ बच्चों को बाथरूम में बंद करने, उनके साथ अनुचित शारीरिक व्यवहार करने और उन्हें भयभीत करने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। इन आरोपों की पुष्टि फिलहाल जांच के बाद ही हो सकेगी।

    कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है और संबंधित एजेंसियों को हर संभव सहयोग दिया जा रहा है। साथ ही, जांच पूरी होने तक डेकेयर सुविधा को बंद रखने का निर्णय एहतियाती कदम के रूप में लिया गया है। कंपनी ने यह भी भरोसा दिलाया है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला कॉर्पोरेट परिसरों में संचालित डेकेयर केंद्रों की निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के प्रशिक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। बच्चों की देखभाल से जुड़ी संस्थाओं में नियमित निरीक्षण, पारदर्शी निगरानी प्रणाली और शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस घटना ने अभिभावकों के बीच भी बच्चों की सुरक्षा और डेकेयर केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

  • हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की मजबूत छलांग, 61 यूनिकॉर्न के साथ दुनिया में चौथा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना देश

    हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की मजबूत छलांग, 61 यूनिकॉर्न के साथ दुनिया में चौथा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना देश

    नई दिल्ली । भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत ने 61 यूनिकॉर्न स्टार्टअप के साथ दुनिया में चौथा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि देश में नवाचार, तकनीकी विकास और निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत मानी जा रही है। यूनिकॉर्न उन स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है जिनका बाजार मूल्य एक अरब डॉलर या उससे अधिक होता है।

    रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अब भी यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। उसके पास 806 यूनिकॉर्न हैं, जो वैश्विक कुल का लगभग आधा हिस्सा हैं। इसके बाद चीन 381 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे और यूनाइटेड किंगडम 70 यूनिकॉर्न के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत 61 यूनिकॉर्न के साथ चौथे स्थान पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रहा है।

    देश के भीतर बेंगलुरु एक बार फिर स्टार्टअप राजधानी के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है। शहर में 25 यूनिकॉर्न कंपनियां मौजूद हैं, जो इसे भारत का सबसे बड़ा नवाचार केंद्र बनाती हैं। इसके बाद मुंबई 13 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे स्थान पर है। इन दोनों शहरों ने तकनीकी उद्यम, निवेश और प्रतिभा विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत किया है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या बढ़कर 1,603 तक पहुंच गई है। इन सभी कंपनियों का संयुक्त मूल्यांकन लगभग 8 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज़ प्रगति ने वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति दी है और इसी वजह से यूनिकॉर्न कंपनियों के मूल्यांकन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    हुरुन की रिपोर्ट के अनुसार एआई क्षेत्र ने इस वर्ष सबसे अधिक प्रभाव डाला है। वैश्विक यूनिकॉर्न कंपनियों की कुल वैल्यू में एआई आधारित कंपनियों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। एआई यूनिकॉर्न की संख्या भी तेजी से बढ़कर 215 हो गई है, जो फिनटेक क्षेत्र की कंपनियों के लगभग बराबर है। इससे स्पष्ट होता है कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक निवेश और तकनीकी विकास की सबसे महत्वपूर्ण ताकत बनी रह सकती है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2026 के दौरान 308 नए स्टार्टअप यूनिकॉर्न बने, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। हालांकि यह संख्या वर्ष 2021 के रिकॉर्ड स्तर से कम है, लेकिन इस बार उभरने वाले स्टार्टअप अधिक परिपक्व और उच्च गुणवत्ता वाले माने जा रहे हैं। इनमें एआई, रोबोटिक्स और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की कंपनियों का दबदबा देखने को मिला।

    वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका की एआई कंपनी एंथ्रोपिक सबसे अधिक मूल्यांकन वाली यूनिकॉर्न कंपनी बनी हुई है। इसके बाद ओपनएआई और चीन की बाइटडांस का स्थान है। इन कंपनियों की सफलता यह दर्शाती है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में एआई आधारित तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ती जाएगी और निवेशकों का झुकाव भी इसी क्षेत्र की ओर रहेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह रैंकिंग केवल संख्या का संकेत नहीं बल्कि देश की नवाचार क्षमता, उद्यमिता संस्कृति और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है। यदि निवेश, अनुसंधान, तकनीकी विकास और नीतिगत सहयोग की वर्तमान गति बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक यूनिकॉर्न सूची में और मजबूत स्थान हासिल कर सकता है। देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता भी लगातार विकसित कर रहा है।

  • शपथ के दो दिन बाद ही कांग्रेस सरकार में खींचतान, विभाग आवंटन को लेकर वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी खुलकर सामने आई

    शपथ के दो दिन बाद ही कांग्रेस सरकार में खींचतान, विभाग आवंटन को लेकर वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी खुलकर सामने आई

    नई दिल्ली । कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में गठित नई कांग्रेस सरकार को गठन के शुरुआती दिनों में ही आंतरिक असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। मंत्रिमंडल में विभागों के आवंटन को लेकर उठे विवाद अब और गहराते दिखाई दे रहे हैं। वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी के बाद अब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री केएच मुनियप्पा ने भी अपने विभाग में बदलाव की मांग उठाकर सरकार और पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।

    सरकार के गठन के बाद विभागों के वितरण को लेकर कांग्रेस के भीतर असंतोष की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। केएच मुनियप्पा ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने मौजूदा मंत्रालय को बदलने का अनुरोध पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखा है। उनका कहना है कि उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें ऐसे विभाग दिए जाने चाहिए जहां वे अधिक प्रभावी ढंग से जनसेवा कर सकें।

    मुनियप्पा ने संकेत दिया है कि वह इस विषय पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से भी चर्चा करेंगे। उनका मानना है कि वरिष्ठ नेताओं को उनकी अनुभव क्षमता और राजनीतिक योगदान के अनुरूप जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह पिछले कई वर्षों से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से जुड़े रहे हैं और अब नई जिम्मेदारी संभालकर जनता के लिए अधिक व्यापक स्तर पर काम करना चाहते हैं।

    वरिष्ठ मंत्री ने समाज कल्याण, कृषि और सिंचाई जैसे विभागों में रुचि जताई है। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में कार्य करने का उन्हें पर्याप्त अनुभव है और इन विभागों के माध्यम से वह ग्रामीण क्षेत्रों तथा सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी योगदान दे सकते हैं। उनके इस बयान ने सरकार के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं को और हवा दे दी है।

    इससे पहले रामलिंगा रेड्डी भी विभाग आवंटन को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग दिए जाने का आश्वासन मिला था, लेकिन अंतिम समय में उन्हें बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इस फैसले के बाद उन्होंने अपनी असहमति खुलकर व्यक्त की थी, जिससे सरकार के भीतर असंतोष पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आया।

    मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हालांकि स्थिति को सामान्य बताते हुए कहा है कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाएगा। उन्होंने रामलिंगा रेड्डी को अपना करीबी सहयोगी और सम्मानित वरिष्ठ नेता बताते हुए भरोसा जताया कि उनकी चिंताओं का समाधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर संवाद जारी है और किसी भी प्रकार के मतभेद को सुलझाने की कोशिश की जाएगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के शुरुआती चरण में इस तरह की नाराजगी प्रशासनिक स्थिरता और राजनीतिक संदेश दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। कांग्रेस नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि वह वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाओं और सरकार की कार्यक्षमता के बीच संतुलन बनाए रखे। यदि असंतोष को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह आगे चलकर संगठनात्मक एकता को प्रभावित कर सकता है।

    फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में नाराज नेताओं से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। विभागों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व और राजनीतिक प्रबंधन क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।

  • बंगलूरू आई युगांडा की महिला में इबोला के लक्षण दिखने के बाद अस्पताल में कराया भर्ती, पुणे भेजे सैंपल

    बंगलूरू आई युगांडा की महिला में इबोला के लक्षण दिखने के बाद अस्पताल में कराया भर्ती, पुणे भेजे सैंपल


    बंगलूरू।
    इबोला वायरस (Ebola Virus) को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंता के बीच बंगलूरू ( Bengaluru) में युगांडा (Uganda) की एक 28 वर्षीय महिला को एहतियात के तौर पर सरकारी अस्पताल में भर्ती (Admitted Hospital) कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि महिला में इबोला जैसे हल्के लक्षण दिखाई देने के बाद उसे विशेष निगरानी में रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार महिला हाल ही में इबोला प्रभावित क्षेत्र से भारत आई थी। शुरुआत में वह एक होटल में ठहरी हुई थी, लेकिन शरीर दर्द जैसे लक्षण सामने आने के बाद उसे बंगलूरू के सरकारी ‘एपिडेमिक डिजीज हॉस्पिटल’ में शिफ्ट कर दिया गया।

    जांच के लिए भेजा गया संदिग्ध मरीज का सैंपल
    स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि महिला के सैंपल लेकर जांच के लिए पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) भेजे गए हैं। फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। नियमों के मुताबिक दोबारा जांच भी की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि महिला की हालत अभी स्थिर है और डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि चूंकि महिला इबोला प्रभावित इलाके से आई थी और बाद में उसमें हल्के लक्षण दिखाई दिए, इसलिए सावधानी के तौर पर उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।


    WHO ने घोषित किया ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी

    दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 17 मई को कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला संक्रमण को ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति’ घोषित किया था। इसके बाद कई देशों ने सतर्कता बढ़ा दी है।


    22 मई को कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

    इसी के मद्देनजर कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने पिछले शुक्रवार को एडवाइजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि जो लोग हाल ही में इबोला प्रभावित अफ्रीकी देशों से लौटे हैं, वे 21 दिनों तक अपनी सेहत की निगरानी करें और खुद पर नजर रखें। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी कहा है कि अगर किसी व्यक्ति में बुखार, शरीर दर्द या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। इसके लिए ‘रैपिड रिस्पॉन्स टीम’ भी निगरानी और सर्विलांस का काम करेगी।


    राजधानी बंगलूरू में बनाया गया आइसोलेशन सेंटर

    बंगलूरू में राजीव गांधी छाती रोग संस्थान को आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, जबकि एपिडेमिक डिजीज हॉस्पिटल को क्वारंटीन और इलाज केंद्र के तौर पर तय किया गया है। वहीं मंगलुरु में श्रीनिवास पोर्ट अस्पताल को क्वारंटीन सेंटर और वेनलॉक जिला अस्पताल को इलाज केंद्र बनाया गया है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

  • पीएम मोदी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, बेंगलुरु में विस्फोटक मिलने के बाद प्रशासन का बड़ा कदम

    पीएम मोदी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, बेंगलुरु में विस्फोटक मिलने के बाद प्रशासन का बड़ा कदम

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक संवेदनशील मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। बेंगलुरु दौरे के दौरान प्रधानमंत्री के निर्धारित कार्यक्रम के आसपास संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिलने के मामले ने सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस महकमे की चिंता बढ़ा दी थी। अब इस पूरे प्रकरण में शुरुआती जांच के आधार पर छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई सुरक्षा में संभावित लापरवाही और चूक को गंभीरता से लेते हुए की गई है, जबकि मामले की जांच अभी भी जारी है।

    जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री 10 मई को बेंगलुरु दौरे पर पहुंचे थे। इसी दौरान शहर के बाहरी इलाके में ऐसी जगह पर दो जिलेटिन की छड़ें मिलने की सूचना सामने आई जो प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित बताई गई। जैसे ही इस घटना की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन तक पहुंची, पूरे विभाग में हलचल मच गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू कर दी गई और आंतरिक जांच बैठा दी गई।

    इस मामले में पुलिस विभाग ने शुरुआती स्तर पर कार्रवाई करते हुए छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है उनमें एक पुलिस सब इंस्पेक्टर, एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल शामिल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित रखने का फैसला लिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यह संदेश देने की कोशिश भी मानी जा रही है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

    घटना सामने आने के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया था। इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय मानते हुए सवाल उठाए गए कि इतने संवेदनशील दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई। मामले को लेकर राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर भी चर्चा तेज हो गई थी। साथ ही इस घटना के पीछे की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की पहचान को लेकर भी जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई थीं।

    प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की सुरक्षा को देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में गिना जाता है। ऐसे में किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या विस्फोटक सामग्री मिलने की सूचना को अत्यधिक गंभीरता से लिया जाता है। यही कारण है कि इस मामले में भी प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि यह रिपोर्ट तय करेगी कि सुरक्षा व्यवस्था में वास्तविक चूक कहां हुई और इसके पीछे किन परिस्थितियों ने भूमिका निभाई। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि यह केवल लापरवाही का मामला था या इसके पीछे कोई और गंभीर पहलू छिपा हुआ है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा प्रबंधन को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • PM मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक पर सख्त एक्शन: बेंगलुरु में रूट के पास विस्फोटक मिलने के बाद 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड

    PM मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक पर सख्त एक्शन: बेंगलुरु में रूट के पास विस्फोटक मिलने के बाद 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की चूक को बेहद गंभीर माना जाता है और बेंगलुरु में सामने आए एक मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और जिम्मेदारियों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानमंत्री के निर्धारित दौरे के दौरान उनके रूट के पास विस्फोटक सामग्री मिलने के मामले में अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। सुरक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही को गंभीर मानते हुए छह पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई ने पुलिस विभाग के भीतर भी हलचल तेज कर दी है और पूरे मामले को अत्यधिक संवेदनशील माना जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि यह घटना प्रधानमंत्री के निर्धारित कार्यक्रम के दौरान सामने आई थी। जिस इलाके से विस्फोटक सामग्री बरामद हुई, वह सुरक्षा दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा था। सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि उस इलाके में पहले से सुरक्षा बलों की तैनाती मौजूद थी और संबंधित अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इसके बावजूद संदिग्ध सामग्री का समय पर पता न चलना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    मामले की जानकारी सामने आते ही प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया था। प्रधानमंत्री की सुरक्षा देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होती है और इस तरह की घटनाओं को किसी भी स्थिति में सामान्य नहीं माना जाता। घटना के तुरंत बाद पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर सुरक्षा घेरे के भीतर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों की समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।

    प्रारंभिक जांच में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध और लापरवाहीपूर्ण पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर एक पुलिस सब इंस्पेक्टर, एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबलों पर कार्रवाई की गई है। विभाग का मानना है कि संवेदनशील ड्यूटी के दौरान अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती गई, जिसके कारण यह स्थिति पैदा हुई। इसी आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई को जरूरी माना गया।

    सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री जैसे अति विशिष्ट व्यक्ति की यात्रा के दौरान बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है। इसमें रूट की जांच, निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की प्रक्रिया शामिल होती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की चूक न केवल सुरक्षा तंत्र के लिए चिंता का विषय बनती है बल्कि भविष्य की रणनीतियों पर भी असर डालती है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में छोटी से छोटी गलती भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है। प्रशासन अब इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है और उम्मीद की जा रही है कि आगे सुरक्षा व्यवस्थाओं को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।