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  • देश का अनोखा मंदिर, जहां शिव नहीं बल्कि नंदी के नाम से होती है पूजा, रहस्य से भरा है यह धाम

    देश का अनोखा मंदिर, जहां शिव नहीं बल्कि नंदी के नाम से होती है पूजा, रहस्य से भरा है यह धाम


    नई दिल्ली । भारत में भगवान शिव के असंख्य मंदिर हैं, लेकिन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में स्थित एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है, जो शिव के नाम से नहीं बल्कि उनके प्रिय भक्त, वाहन और गण नंदी के नाम से जाना जाता है। शिव और नंदी को एक-दूसरे के बिना अधूरा माना जाता है, लेकिन श्री दक्षिणामुख नंदी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र देश का ऐसा दुर्लभ स्थल है, जहां नंदी स्वयं शिवलिंग का लगातार अभिषेक करते दिखाई देते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धा के साथ-साथ अपने रहस्य के कारण भी भक्तों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    यह पवित्र मंदिर बेंगलुरु के मल्लेश्वरम लेआउट क्षेत्र में स्थित है और इसे नंदीश्वर तीर्थ, बसवा तीर्थ या स्थानीय भाषा में मल्लेश्वरम नंदी गुड़ी भी कहा जाता है। करीब 400 साल पुराने इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां नंदी की विशाल मूर्ति के मुख से लगातार जलधारा बहती रहती है, जो सीधे शिवलिंग का अभिषेक करती है। आश्चर्य की बात यह है कि आज तक कोई यह पता नहीं लगा सका है कि यह जलधारा आखिर कहां से आती है। वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टि से यह मंदिर एक रहस्य बना हुआ है।

    इतिहास की बात करें तो इस मंदिर का दोबारा प्रकट होना भी किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता। वर्ष 1997 में जब इस क्षेत्र में जमीन की खुदाई का काम चल रहा था, तब यह प्राचीन मंदिर फिर से सामने आया। अन्य दक्षिण भारतीय मंदिरों की तरह यहां कोई भव्य गोपुरम नहीं है और आकार में भी यह मंदिर अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक महत्ता और रहस्यमयी स्वरूप इसे विशिष्ट बनाता है। नंदी के मुख से निरंतर होते शिवाभिषेक को देखकर भक्तों की आस्था और भी गहरी हो जाती है।

    इस मंदिर की स्थापना को लेकर एक लोकप्रिय दंतकथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में मूंगफली की खेती हुआ करती थी। किसानों को बार-बार एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता था। हर पूर्णिमा की रात एक सांड खेतों में घुस आता और पूरी फसल को नष्ट कर देता। परेशान होकर एक रात सभी किसानों ने उस सांड को पकड़ने का फैसला किया। वे उसका पीछा करते हुए एक पहाड़ी तक पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचते ही सांड अचानक गायब हो गया। उसकी जगह उन्हें नंदी की एक मूर्ति दिखाई दी, जिसे कन्नड़ भाषा में बसवा कहा जाता है।

    किसानों ने इसे भगवान शिव के गण नंदी का संकेत मानते हुए उनके क्रोध को शांत करने के लिए उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवा दिया। मान्यता है कि मंदिर बनने के बाद सांड ने खेतों को नुकसान पहुंचाना बंद कर दिया। तभी से यहां हर साल उत्सव मनाया जाता है और किसान अपनी फसल का पहला हिस्सा नंदी को अर्पित करते हैं। बताया जाता है कि मंदिर में स्थापित नंदी की मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी नंदी मूर्तियों में से एक है। आज यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनोखी परंपरा और रहस्यमयी जलधारा के कारण देश के सबसे विशिष्ट और चमत्कारी मंदिरों में गिना जाता है।

  • कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे

    कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे




    बेंगलुरु।
    कर्नाटक कांग्रेस सरकार का बुलडोज़र अभियान अब राजनीति का नया विवाद बन गया है। 22 दिसंबर को सुबह 4 बजे कोगिलु गांव के फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में 400 से ज्यादा घरों को गिराया गया। अधिकांश प्रभावित परिवार मुस्लिम समुदाय से हैं। इस कार्रवाई से सैकड़ों लोग बेघर हो गए और ठंड में सड़कों पर या अस्थायी शेल्टरों में रात गुजारने को मजबूर हैं।कर्नाटक सरकार का कहना है कि ये घर उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास झील किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बने थे।
    निवासियों की आपत्ति
    स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और पुलिस ने जबरदस्ती उन्हें बेदखल किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई लोग 25 सालों से इलाके में रह रहे हैं और उनके पास वैध आधार कार्ड व वोटर आईडी हैं। निकाले गए ज्यादातर लोग प्रवासी और मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं।

    विरोध प्रदर्शन और सियासी हलचल
    इस कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के घर के पास भी प्रदर्शन हुआ।

    दलित संघर्ष समिति और कई अन्य संगठन भी इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।

    केरल सरकार की निंदा
    पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे “अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति” करार दिया। उन्होंने कहा कि डर और ज़बरदस्ती से शासन करने वाली सरकारें संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा का उल्लंघन करती हैं। केरल के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने इसे “अमानवीय कार्रवाई” बताया और कहा कि यह इमरजेंसी के दौर की याद दिलाती है।

    कर्नाटक उपमुख्यमंत्री का जवाब
    कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि यह इलाका अवैध कब्ज़े और कचरा फेंकने की जगह था, जिसे लैंड माफिया झुग्गी बस्ती में बदलने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों को नई जगह शिफ्ट करने का समय पहले ही दिया गया था। शिवकुमार ने पिनाराई विजयन पर तंज कसते हुए कहा कि नेताओं को ज़मीनी हकीकत जाने बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

    यह मामला न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे कर्नाटक की राजनीति में गर्मागरम बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस सरकार के बुलडोज़र अभियान ने शहर के गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को सीधे प्रभावित किया है, जबकि विपक्ष और पड़ोसी राज्यों ने इसे लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।