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  • महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का दिव्य नजारा, पंचामृत अभिषेक से सजा बाबा महाकाल का स्वरूप

    महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का दिव्य नजारा, पंचामृत अभिषेक से सजा बाबा महाकाल का स्वरूप

    उज्जैन उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के होने वाली भस्म आरती के दौरान भक्तों को बाबा महाकाल के अलौकिक स्वरूप के दर्शन प्राप्त हुए। सुबह चार बजे जैसे ही मंदिर के पट खोले गए, पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से बने पंचामृत से उनका अभिषेक संपन्न हुआ। पूरे वातावरण में मंत्रोच्चार और हरिओम के जयघोष से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा।

    भव्य श्रृंगार और भस्म अर्पण की परंपरा

    अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। पहले ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंका गया और फिर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके पश्चात भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पमालाओं से अलंकृत किया गया। भांग, चंदन और त्रिपुंड से किया गया यह श्रृंगार बाबा महाकाल को राजाधिराज स्वरूप प्रदान करता है। इसके बाद कपूर आरती और फल-मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिभाव से भर गया।

    श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक मान्यता

    भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पारंपरिक रूप से भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं, जिससे यह आरती अत्यंत पवित्र और अद्वितीय मानी जाती है। इस अवसर पर पूरा मंदिर परिसर जय महाकाल के उद्घोष से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने दिव्य अनुभूति का अनुभव किया।

  • रविवार की भस्म आरती में Mahakaleshwar Jyotirlinga का अलौकिक रूप: रजत मुकुट और भस्म से हुआ भव्य श्रृंगार

    रविवार की भस्म आरती में Mahakaleshwar Jyotirlinga का अलौकिक रूप: रजत मुकुट और भस्म से हुआ भव्य श्रृंगार


    नई दिल्ली । विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान अद्भुत आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला। सुबह करीब 4 बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले, पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न कराया।
    इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया गया। इस दौरान त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू के साथ भांग अर्पित कर विशेष श्रृंगार किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
    भस्म अर्पण के साथ हुआ दिव्य श्रृंगार
    कपूर आरती के बाद हरिओम जल अर्पित किया गया और फिर भगवान महाकाल के ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। भस्म अर्पण के बाद भगवान का दिव्य श्रृंगार और भी भव्य रूप में सामने आया।
    शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ सुगंधित पुष्पों की मालाएं बाबा महाकाल को अर्पित की गईं। मोगरे और गुलाब के फूलों से सजे भगवान महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
    भोग और आरती के बाद भक्तों को मिला दर्शन
    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती के दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
    आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरा मंदिर परिसर “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
  • उज्जैन में महाकाल के दरबार में दिखे मिलिंद सोमन-नितीश राणा, नंदी हॉल में किया जाप

    उज्जैन में महाकाल के दरबार में दिखे मिलिंद सोमन-नितीश राणा, नंदी हॉल में किया जाप


    नई दिल्ली। धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित भस्म आरती में फिल्म अभिनेता मिलिंद सोमन और भारतीय क्रिकेटर नितीश राणा ने अपनी-अपनी पत्नियों के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए। दोनों ने सुबह 4 बजे होने वाली इस विशेष आरती में भाग लेकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

    रात 2 बजे पहुंचे, नंदी हॉल में साधना का माहौल
    दोनों सेलिब्रिटी देर रात करीब 2 बजे मंदिर पहुंचे। नितीश राणा अपनी पत्नी साँची मारवाह के साथ, जबकि मिलिंद सोमन अपनी पत्नी अंकिता कोंवर के साथ यहां आए। उन्होंने मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर करीब दो घंटे तक भस्म आरती में भाग लिया। इस दौरान वे ध्यान और जाप में लीन नजर आए, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।

    नंदी जी के कान में कही मनोकामना
    भस्म आरती के दौरान दोनों ने नंदी भगवान का पूजन किया और परंपरा के अनुसार उनके कान में अपनी मनोकामना भी व्यक्त की। आरती के पश्चात उन्होंने गर्भगृह की देहरी से भगवान महाकाल के दर्शन किए और जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया।

    मंदिर समिति ने किया सम्मान
    दर्शन के बाद मंदिर समिति की ओर से दोनों का पारंपरिक तरीके से सम्मान भी किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम भी किए गए थे, क्योंकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने पहुंचे थे।

    “बाबा का बुलावा आया” – मिलिंद सोमन
    मिलिंद सोमन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे लंबे समय से महाकाल के दर्शन करने की इच्छा रखते थे, लेकिन अब जाकर उन्हें यह अवसर मिला। उन्होंने कहा, “यहां आकर बहुत शांति और ऊर्जा का अनुभव हुआ। लगता है कि बाबा का बुलावा आया, तभी यहां आना संभव हो पाया।” उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी की भी यहां आने की इच्छा थी, जो अब पूरी हो गई।

    आस्था और भक्ति का अनूठा संगम
    महाकाल मंदिर में भस्म आरती का धार्मिक महत्व बेहद खास है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में प्रसिद्ध हस्तियों की मौजूदगी इस आध्यात्मिक आयोजन को और भी खास बना देती है।

  • वैशाख कृष्ण एकादशी पर महाकालेश्वर मंदिर में दिव्य भस्म आरती का भव्य आयोजन

    वैशाख कृष्ण एकादशी पर महाकालेश्वर मंदिर में दिव्य भस्म आरती का भव्य आयोजन

    उज्जैन। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर सोमवार तड़के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का दिव्य आयोजन श्रद्धा और आस्था के वातावरण में संपन्न हुआ। प्रातः लगभग चार बजे मंदिर के कपाट खुलते ही धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई और गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना के साथ भगवान महाकाल का अभिषेक किया गया। इस पवित्र अवसर पर मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष संचार महसूस किया गया और श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।

    कपाट खुलने के पश्चात पुजारियों ने विधि-विधान से सभी देवी-देवताओं का पूजन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार की ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु ध्यानमग्न होकर इस दिव्य अनुष्ठान का साक्षी बने।

    अभिषेक के पश्चात भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया जिसमें भांग, चंदन और आभूषणों का प्रयोग किया गया। भगवान के मस्तक पर शिवलिंग, डमरू और अन्य प्रतीकों से अलंकरण किया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत आकर्षक और दिव्य दिखाई दिया। सुगंधित पुष्पों और रुद्राक्ष की मालाओं से सजाए गए इस श्रृंगार ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इसके साथ ही रजत निर्मित शेषनाग मुकुट और मुण्डमाल अर्पित कर श्रृंगार को भव्य रूप दिया गया।

    भस्म आरती से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई और ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म अर्पित की गई। यह प्राचीन परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और विधि से निभाई जा रही है, जो इस आरती को विशेष महत्व प्रदान करती है।

    असुबह आयोजित इस आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान महाकाल के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही और हर ओर जयकारों की गूंज सुनाई देती रही। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कीं और आशीर्वाद प्राप्त किया।

    आरती के दौरान मंदिर परिसर में व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं ताकि श्रद्धालुओं को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित दर्शन का अवसर मिल सके। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, आस्था और अनुशासन का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

  • महाकाल मंदिर पहुंचीं अभिनेत्री सारा अर्जुन, मां के जन्मदिन पर लिया आशीर्वाद, भस्म आरती में हुईं शामिल

    महाकाल मंदिर पहुंचीं अभिनेत्री सारा अर्जुन, मां के जन्मदिन पर लिया आशीर्वाद, भस्म आरती में हुईं शामिल


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के फिल्म ‘धुरंधर’ की अभिनेत्री सारा अर्जुन अपने परिवार के साथ दर्शन करने पहुंचीं। इस अवसर पर उनके पिता राज अर्जुन और मां सान्या भी मौजूद रहीं। अभिनेत्री सारा ने सुबह करीब 4 बजे होने वाली प्रसिद्ध भस्म आरती में भाग लिया और करीब दो घंटे तक पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना की। उन्होंने नंदी हॉल से भगवान महाकाल के दर्शन कर “जय महाकाल” के जयकारे लगाए।


    मां के जन्मदिन पर लिया आशीर्वाद

    सारा अर्जुन पहली बार महाकाल मंदिर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वे अपनी मां के जन्मदिन के अवसर पर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने आई हैं। दर्शन के दौरान उन्होंने सभी के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की। भस्म आरती के बाद सारा ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कही। इसके बाद गर्भगृह की देहरी से जल अर्पित कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा उनका स्वागत भी किया गया। दर्शन के बाद सारा ने कहा कि महाकाल के दरबार में आकर उन्हें बेहद शांति और सुकून का अनुभव हुआ। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की भी सराहना की।


    सारा अर्जुन का करियर

    सारा अर्जुन ने बहुत कम उम्र में विज्ञापनों से अपने करियर की शुरुआत की थी। हाल ही में रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ से उन्हें खास पहचान मिली है। वे हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं।


    भस्म आरती में दिखा अलौकिक नजारा

    इधर शनिवार तड़के महाकाल मंदिर के कपाट खुलते ही विधि-विधान से पूजन शुरू हुआ। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस) से अभिषेक किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। इसके बाद भगवान का रजत मुकुट, रुद्राक्ष माला, बिल्वपत्र और सुगंधित पुष्पों से विशेष श्रृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिपुण्ड, त्रिशूल और डमरू का अलंकरण किया गया, जिससे भगवान महाकाल का राजाधिराज स्वरूप प्रकट हुआ। कपूर आरती के पश्चात महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।


    भक्तिमय हुआ वातावरण

    भस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। “जय श्री महाकाल” के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं भी व्यक्त कीं।

  • महाकाल के दर्शन करने उज्‍जैन पहुंची एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे, पति संग भस्म आरती में हुईं शामिल

    महाकाल के दर्शन करने उज्‍जैन पहुंची एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे, पति संग भस्म आरती में हुईं शामिल


    उज्जैन। प्रसिद्ध टीवी और फिल्म एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे मंगलवार सुबह अपने पति विक्की जैन के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। यहां दोनों ने भस्म आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। सुबह करीब 4 बजे मंदिर पहुंचे इस कपल ने नंदी हाल में बैठकर दर्शन किए और पूरे समय भक्ति भाव में लीन नजर आए।

    नंदी के कान में मांगी मनोकामना
    दर्शन के दौरान दोनों ने नंदी जी का पूजन किया और परंपरा के अनुसार उनके कान में अपनी इच्छा भी व्यक्त की। इसके बाद मंदिर की देहरी से जल अर्पित कर भगवान महाकाल से आशीर्वाद प्राप्त किया।

    पहली बार भस्म आरती में शामिल हुईं अंकिता

    अंकिता लोखंडे ने बताया कि वह इंदौर की रहने वाली हैं और बचपन से कई बार महाकाल मंदिर आ चुकी हैं, लेकिन भस्म आरती में शामिल होने का यह उनका पहला अनुभव था। उन्होंने कहा कि इस अनुभव को शब्दों में बयां करना मुश्किल है और इसे सामने से देखने का एहसास बेहद अलग और दिव्य है।

    मंदिर व्यवस्था की सराहना

    अंकिता ने मंदिर की व्यवस्थाओं की भी तारीफ करते हुए कहा कि यहां दर्शन की पूरी व्यवस्था बेहद सुव्यवस्थित और संतोषजनक है।

  • रंगपंचमी पर सबसे पहले महाकाल को चढ़ा रंग, भस्म आरती में केसर जल अर्पित, शिव परिवार को लगाया हर्बल गुलाल

    रंगपंचमी पर सबसे पहले महाकाल को चढ़ा रंग, भस्म आरती में केसर जल अर्पित, शिव परिवार को लगाया हर्बल गुलाल


    उज्जैन। रंगपंचमी के अवसर पर रविवार तड़के विश्व प्रसिद्ध उज्‍जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को सबसे पहले रंग अर्पित कर पर्व की शुरुआत की गई। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद भस्म आरती के दौरान भगवान महाकालेश्वर का विशेष पूजन किया गया और उन्हें एक लोटा केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का त्रिपुंड, मुंडमाल और रजत आभूषणों से राजा स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया।
    शिव परिवार को लगाया हर्बल रंग

    रंगपंचमी के मौके पर भस्म आरती के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन कर सबसे पहले भगवान महाकाल को रंग अर्पित किया। इस दौरान भगवान महाकाल के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी को भी हर्बल रंग चढ़ाया गया।

    पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर मंत्रोच्चार के साथ हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड लगाकर विशेष श्रृंगार किया गया।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित कर फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

    सुरक्षा के चलते रंग लाने पर रोक

    दो साल पहले धुलेंडी के दिन गर्भगृह में आग लगने की घटना को देखते हुए इस बार भी मंदिर में श्रद्धालुओं, पंडे-पुजारियों को रंग लाने की अनुमति नहीं दी गई। दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सख्त जांच के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया गया।

    पहले हर साल श्रद्धालु रंग-गुलाल लेकर मंदिर पहुंचते थे, जिससे पूरा माहौल ब्रज की होली जैसा दिखाई देता था। इस बार भगवान को अर्पित किया जाने वाला केसर युक्त जल भी मंदिर की कोठार शाखा से ही पुजारियों को उपलब्ध कराया गया।

    मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह, नंदी मंडपम, गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम और पूरे मंदिर परिसर में रंग या गुलाल ले जाने, उड़ाने या लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है। साथ ही किसी भी उपकरण से रंग उड़ाने की भी अनुमति नहीं दी गई है।

    शाम की आरती में भी चढ़ेगा रंग

    संध्या आरती के दौरान भगवान महाकाल को एक लोटा केसर युक्त जल और लगभग 500 ग्राम गुलाल अर्पित किया जाएगा। यह सामग्री मंदिर की कोठार शाखा द्वारा भस्म आरती और शासकीय पुजारियों को उपलब्ध कराई जाएगी।

  • उज्जैन महाकाल में भव्य होली 2026: हर्बल गुलाल, पंचामृत भस्मारती और चंद्र ग्रहण के बीच खुले पट, श्रद्धालुओं ने किया अनोखा अनुभव

    उज्जैन महाकाल में भव्य होली 2026: हर्बल गुलाल, पंचामृत भस्मारती और चंद्र ग्रहण के बीच खुले पट, श्रद्धालुओं ने किया अनोखा अनुभव


    उज्जैन। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को होली का पर्व भव्य और अनोखे अंदाज में मनाया गया। सुबह 4 बजे भस्मारती के समय पुजारी-पुरोहितों ने बाबा महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से रंग खेला। इस अवसर पर भगवान शिव के परिवार माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय को भी गुलाल अर्पित किया गया। भगवान महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक किया गया, उसके बाद दूध, दही, घी, शकर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजा संपन्न हुई। नंदी जी का स्नान, ध्यान और पूजा भी विधिपूर्वक किया गया। भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला धारण की।

    इस साल 3 मार्च को 14 मिनट का खग्रास चंद्र ग्रहण सुबह 6:32 से शाम 6:46 तक रहेगा। ग्रहण के कारण मंदिर में सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान महाकाल को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया गया। इस दौरान श्रद्धालु और पुजारी भगवान को स्पर्श नहीं करेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर का शुद्धिकरण होगा, उसके बाद भगवान का जलाभिषेक और संध्या आरती के साथ भोग अर्पित किया जाएगा।

    महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या बदलती है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार और चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार आरती का समय तय होता है। इस साल 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू होने से भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन में समय का बदलाव किया जाएगा।

    मंदिर के पुजारी महेश शर्मा के अनुसार, भगवान महाकाल कालों के काल हैं और दक्षिण की ओर मुख करके बैठे हैं। इसलिए ग्रहण या किसी भी नक्षत्र का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ग्रहण के दौरान मंदिर की व्यवस्थाएं सामान्य रहेंगी, पुजारी मंत्रोच्चार करेंगे और भक्त सुरक्षित दर्शन कर सकेंगे।

    भक्तों और स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन अत्यंत दर्शनीय रहा। पारंपरिक विधियों, भस्मारती और हर्बल गुलाल के संगम ने होली को भव्य बना दिया। इस अवसर पर धार्मिक अनुशासन और ग्रहण के नियमों का पालन करते हुए भगवान महाकाल की भव्य पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद और भक्ति का अनुभव लेकर आई।

  • पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल में किया ध्यान

    पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल में किया ध्यान


    उज्जैन। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज तड़के उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे और भस्म आरती में शामिल हुए। भस्म आरती में बाबा महाकाल के दर्शन लाभ लेने के बाद उन्हें श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।

    इस दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि भारत में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है जो हमारी वर्षों पुरानी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास सराहनीय है।

    धनखड़ ने कहा मैं प्रशासन की सरलता सुगमता और लगनशीलता से बहुत प्रभावित हूं। यहां सभी से समानता का व्यवहार किया जा रहा है। मैं एक स्वच्छ छवि लेकर यहां से जा रहा हूं। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर में आकर अहंकार ईर्ष्या अहम और प्रतिशोध का त्याग होता है।

    इसके बाद पूर्व उपराष्ट्रपति नंदी हॉल में बैठकर ध्यान साधना में लीन हुए। उनका यह दौरा धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है साथ ही यह महाकालेश्वर मंदिर की लोकप्रियता और अनुशासन को भी दर्शाता है।

  • महाकाल के दरबार में भारतीय क्रिकेटर: कर्ण शर्मा और सिद्धार्थ कौल ने की भस्म आरती, कहा मिलती है सकारात्मक ऊर्जा

    महाकाल के दरबार में भारतीय क्रिकेटर: कर्ण शर्मा और सिद्धार्थ कौल ने की भस्म आरती, कहा मिलती है सकारात्मक ऊर्जा


    उज्जैन । धर्मनगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। आम भक्तों के साथ साथ देश विदेश की चर्चित हस्तियां भी बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रही हैं। इसी क्रम में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी कर्ण शर्मा और सिद्धार्थ कौल मंगलवार तड़के महाकाल मंदिर पहुंचे जहां उन्होंने भगवान महाकालेश्वर की प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर पूजा अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

    सुबह ब्रह्ममुहूर्त में होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान दोनों क्रिकेटरों ने पूरे विधि विधान से दर्शन किए। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग के समक्ष उन्होंने ध्यान लगाया और नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना भी कही। भस्म आरती के आध्यात्मिक वातावरण और मंत्रोच्चार के बीच दोनों खिलाड़ी श्रद्धा में लीन दिखाई दिए।

    भस्म आरती के उपरांत मंदिर समिति की ओर से दोनों खिलाड़ियों का पारंपरिक रूप से सम्मान किया गया। उन्हें प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी क्रिकेटरों की एक झलक पाने के लिए उत्साह दिखाया हालांकि दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रही।

    इस अवसर पर कर्ण शर्मा ने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें बार बार उज्जैन आने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा जब भी बाबा बुलाते हैं मैं दर्शन के लिए जरूर आता हूं। यहां आकर मन को शांति मिलती है और मंदिर की व्यवस्थाएं भी अत्यंत सुव्यवस्थित हैं। उन्होंने भस्म आरती को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव बताते हुए कहा कि इस आरती में शामिल होना किसी भी श्रद्धालु के लिए विशेष सौभाग्य की बात है।

    वहीं सिद्धार्थ कौल ने भी बाबा महाकाल के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महाकाल के दर्शन से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भस्म आरती के दौरान जो आध्यात्मिक वातावरण बनता है वह मन और आत्मा को एक अलग शक्ति देता है। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार बाबा महाकाल की भस्म आरती में जरूर शामिल होना चाहिए कौल ने कहा।

    उल्लेखनीय है कि महाकाल मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। देश विदेश से श्रद्धालु इस अनूठी आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। क्रिकेटरों की इस आध्यात्मिक यात्रा ने एक बार फिर यह साबित किया कि खेल जगत की हस्तियां भी अपनी आस्था से गहराई से जुड़ी हैं और महत्वपूर्ण अवसरों पर ईश्वर का आशीर्वाद लेना नहीं भूलतीं।