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  • महाकाल मंदिर पहुंचीं अभिनेत्री सारा अर्जुन, मां के जन्मदिन पर लिया आशीर्वाद, भस्म आरती में हुईं शामिल

    महाकाल मंदिर पहुंचीं अभिनेत्री सारा अर्जुन, मां के जन्मदिन पर लिया आशीर्वाद, भस्म आरती में हुईं शामिल


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के फिल्म ‘धुरंधर’ की अभिनेत्री सारा अर्जुन अपने परिवार के साथ दर्शन करने पहुंचीं। इस अवसर पर उनके पिता राज अर्जुन और मां सान्या भी मौजूद रहीं। अभिनेत्री सारा ने सुबह करीब 4 बजे होने वाली प्रसिद्ध भस्म आरती में भाग लिया और करीब दो घंटे तक पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना की। उन्होंने नंदी हॉल से भगवान महाकाल के दर्शन कर “जय महाकाल” के जयकारे लगाए।


    मां के जन्मदिन पर लिया आशीर्वाद

    सारा अर्जुन पहली बार महाकाल मंदिर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वे अपनी मां के जन्मदिन के अवसर पर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने आई हैं। दर्शन के दौरान उन्होंने सभी के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की। भस्म आरती के बाद सारा ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कही। इसके बाद गर्भगृह की देहरी से जल अर्पित कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा उनका स्वागत भी किया गया। दर्शन के बाद सारा ने कहा कि महाकाल के दरबार में आकर उन्हें बेहद शांति और सुकून का अनुभव हुआ। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की भी सराहना की।


    सारा अर्जुन का करियर

    सारा अर्जुन ने बहुत कम उम्र में विज्ञापनों से अपने करियर की शुरुआत की थी। हाल ही में रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ से उन्हें खास पहचान मिली है। वे हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं।


    भस्म आरती में दिखा अलौकिक नजारा

    इधर शनिवार तड़के महाकाल मंदिर के कपाट खुलते ही विधि-विधान से पूजन शुरू हुआ। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस) से अभिषेक किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। इसके बाद भगवान का रजत मुकुट, रुद्राक्ष माला, बिल्वपत्र और सुगंधित पुष्पों से विशेष श्रृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिपुण्ड, त्रिशूल और डमरू का अलंकरण किया गया, जिससे भगवान महाकाल का राजाधिराज स्वरूप प्रकट हुआ। कपूर आरती के पश्चात महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।


    भक्तिमय हुआ वातावरण

    भस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। “जय श्री महाकाल” के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं भी व्यक्त कीं।

  • महाकाल के दर्शन करने उज्‍जैन पहुंची एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे, पति संग भस्म आरती में हुईं शामिल

    महाकाल के दर्शन करने उज्‍जैन पहुंची एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे, पति संग भस्म आरती में हुईं शामिल


    उज्जैन। प्रसिद्ध टीवी और फिल्म एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे मंगलवार सुबह अपने पति विक्की जैन के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। यहां दोनों ने भस्म आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। सुबह करीब 4 बजे मंदिर पहुंचे इस कपल ने नंदी हाल में बैठकर दर्शन किए और पूरे समय भक्ति भाव में लीन नजर आए।

    नंदी के कान में मांगी मनोकामना
    दर्शन के दौरान दोनों ने नंदी जी का पूजन किया और परंपरा के अनुसार उनके कान में अपनी इच्छा भी व्यक्त की। इसके बाद मंदिर की देहरी से जल अर्पित कर भगवान महाकाल से आशीर्वाद प्राप्त किया।

    पहली बार भस्म आरती में शामिल हुईं अंकिता

    अंकिता लोखंडे ने बताया कि वह इंदौर की रहने वाली हैं और बचपन से कई बार महाकाल मंदिर आ चुकी हैं, लेकिन भस्म आरती में शामिल होने का यह उनका पहला अनुभव था। उन्होंने कहा कि इस अनुभव को शब्दों में बयां करना मुश्किल है और इसे सामने से देखने का एहसास बेहद अलग और दिव्य है।

    मंदिर व्यवस्था की सराहना

    अंकिता ने मंदिर की व्यवस्थाओं की भी तारीफ करते हुए कहा कि यहां दर्शन की पूरी व्यवस्था बेहद सुव्यवस्थित और संतोषजनक है।

  • रंगपंचमी पर सबसे पहले महाकाल को चढ़ा रंग, भस्म आरती में केसर जल अर्पित, शिव परिवार को लगाया हर्बल गुलाल

    रंगपंचमी पर सबसे पहले महाकाल को चढ़ा रंग, भस्म आरती में केसर जल अर्पित, शिव परिवार को लगाया हर्बल गुलाल


    उज्जैन। रंगपंचमी के अवसर पर रविवार तड़के विश्व प्रसिद्ध उज्‍जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को सबसे पहले रंग अर्पित कर पर्व की शुरुआत की गई। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद भस्म आरती के दौरान भगवान महाकालेश्वर का विशेष पूजन किया गया और उन्हें एक लोटा केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का त्रिपुंड, मुंडमाल और रजत आभूषणों से राजा स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया।
    शिव परिवार को लगाया हर्बल रंग

    रंगपंचमी के मौके पर भस्म आरती के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन कर सबसे पहले भगवान महाकाल को रंग अर्पित किया। इस दौरान भगवान महाकाल के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी को भी हर्बल रंग चढ़ाया गया।

    पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर मंत्रोच्चार के साथ हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड लगाकर विशेष श्रृंगार किया गया।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित कर फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

    सुरक्षा के चलते रंग लाने पर रोक

    दो साल पहले धुलेंडी के दिन गर्भगृह में आग लगने की घटना को देखते हुए इस बार भी मंदिर में श्रद्धालुओं, पंडे-पुजारियों को रंग लाने की अनुमति नहीं दी गई। दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सख्त जांच के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया गया।

    पहले हर साल श्रद्धालु रंग-गुलाल लेकर मंदिर पहुंचते थे, जिससे पूरा माहौल ब्रज की होली जैसा दिखाई देता था। इस बार भगवान को अर्पित किया जाने वाला केसर युक्त जल भी मंदिर की कोठार शाखा से ही पुजारियों को उपलब्ध कराया गया।

    मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह, नंदी मंडपम, गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम और पूरे मंदिर परिसर में रंग या गुलाल ले जाने, उड़ाने या लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है। साथ ही किसी भी उपकरण से रंग उड़ाने की भी अनुमति नहीं दी गई है।

    शाम की आरती में भी चढ़ेगा रंग

    संध्या आरती के दौरान भगवान महाकाल को एक लोटा केसर युक्त जल और लगभग 500 ग्राम गुलाल अर्पित किया जाएगा। यह सामग्री मंदिर की कोठार शाखा द्वारा भस्म आरती और शासकीय पुजारियों को उपलब्ध कराई जाएगी।

  • उज्जैन महाकाल में भव्य होली 2026: हर्बल गुलाल, पंचामृत भस्मारती और चंद्र ग्रहण के बीच खुले पट, श्रद्धालुओं ने किया अनोखा अनुभव

    उज्जैन महाकाल में भव्य होली 2026: हर्बल गुलाल, पंचामृत भस्मारती और चंद्र ग्रहण के बीच खुले पट, श्रद्धालुओं ने किया अनोखा अनुभव


    उज्जैन। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को होली का पर्व भव्य और अनोखे अंदाज में मनाया गया। सुबह 4 बजे भस्मारती के समय पुजारी-पुरोहितों ने बाबा महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से रंग खेला। इस अवसर पर भगवान शिव के परिवार माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय को भी गुलाल अर्पित किया गया। भगवान महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक किया गया, उसके बाद दूध, दही, घी, शकर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजा संपन्न हुई। नंदी जी का स्नान, ध्यान और पूजा भी विधिपूर्वक किया गया। भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला धारण की।

    इस साल 3 मार्च को 14 मिनट का खग्रास चंद्र ग्रहण सुबह 6:32 से शाम 6:46 तक रहेगा। ग्रहण के कारण मंदिर में सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान महाकाल को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया गया। इस दौरान श्रद्धालु और पुजारी भगवान को स्पर्श नहीं करेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर का शुद्धिकरण होगा, उसके बाद भगवान का जलाभिषेक और संध्या आरती के साथ भोग अर्पित किया जाएगा।

    महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या बदलती है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार और चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार आरती का समय तय होता है। इस साल 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू होने से भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन में समय का बदलाव किया जाएगा।

    मंदिर के पुजारी महेश शर्मा के अनुसार, भगवान महाकाल कालों के काल हैं और दक्षिण की ओर मुख करके बैठे हैं। इसलिए ग्रहण या किसी भी नक्षत्र का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ग्रहण के दौरान मंदिर की व्यवस्थाएं सामान्य रहेंगी, पुजारी मंत्रोच्चार करेंगे और भक्त सुरक्षित दर्शन कर सकेंगे।

    भक्तों और स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन अत्यंत दर्शनीय रहा। पारंपरिक विधियों, भस्मारती और हर्बल गुलाल के संगम ने होली को भव्य बना दिया। इस अवसर पर धार्मिक अनुशासन और ग्रहण के नियमों का पालन करते हुए भगवान महाकाल की भव्य पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद और भक्ति का अनुभव लेकर आई।

  • पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल में किया ध्यान

    पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल में किया ध्यान


    उज्जैन। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज तड़के उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे और भस्म आरती में शामिल हुए। भस्म आरती में बाबा महाकाल के दर्शन लाभ लेने के बाद उन्हें श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।

    इस दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि भारत में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है जो हमारी वर्षों पुरानी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास सराहनीय है।

    धनखड़ ने कहा मैं प्रशासन की सरलता सुगमता और लगनशीलता से बहुत प्रभावित हूं। यहां सभी से समानता का व्यवहार किया जा रहा है। मैं एक स्वच्छ छवि लेकर यहां से जा रहा हूं। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर में आकर अहंकार ईर्ष्या अहम और प्रतिशोध का त्याग होता है।

    इसके बाद पूर्व उपराष्ट्रपति नंदी हॉल में बैठकर ध्यान साधना में लीन हुए। उनका यह दौरा धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है साथ ही यह महाकालेश्वर मंदिर की लोकप्रियता और अनुशासन को भी दर्शाता है।

  • महाकाल के दरबार में भारतीय क्रिकेटर: कर्ण शर्मा और सिद्धार्थ कौल ने की भस्म आरती, कहा मिलती है सकारात्मक ऊर्जा

    महाकाल के दरबार में भारतीय क्रिकेटर: कर्ण शर्मा और सिद्धार्थ कौल ने की भस्म आरती, कहा मिलती है सकारात्मक ऊर्जा


    उज्जैन । धर्मनगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। आम भक्तों के साथ साथ देश विदेश की चर्चित हस्तियां भी बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रही हैं। इसी क्रम में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी कर्ण शर्मा और सिद्धार्थ कौल मंगलवार तड़के महाकाल मंदिर पहुंचे जहां उन्होंने भगवान महाकालेश्वर की प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर पूजा अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

    सुबह ब्रह्ममुहूर्त में होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान दोनों क्रिकेटरों ने पूरे विधि विधान से दर्शन किए। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग के समक्ष उन्होंने ध्यान लगाया और नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना भी कही। भस्म आरती के आध्यात्मिक वातावरण और मंत्रोच्चार के बीच दोनों खिलाड़ी श्रद्धा में लीन दिखाई दिए।

    भस्म आरती के उपरांत मंदिर समिति की ओर से दोनों खिलाड़ियों का पारंपरिक रूप से सम्मान किया गया। उन्हें प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी क्रिकेटरों की एक झलक पाने के लिए उत्साह दिखाया हालांकि दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रही।

    इस अवसर पर कर्ण शर्मा ने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें बार बार उज्जैन आने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा जब भी बाबा बुलाते हैं मैं दर्शन के लिए जरूर आता हूं। यहां आकर मन को शांति मिलती है और मंदिर की व्यवस्थाएं भी अत्यंत सुव्यवस्थित हैं। उन्होंने भस्म आरती को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव बताते हुए कहा कि इस आरती में शामिल होना किसी भी श्रद्धालु के लिए विशेष सौभाग्य की बात है।

    वहीं सिद्धार्थ कौल ने भी बाबा महाकाल के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महाकाल के दर्शन से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भस्म आरती के दौरान जो आध्यात्मिक वातावरण बनता है वह मन और आत्मा को एक अलग शक्ति देता है। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार बाबा महाकाल की भस्म आरती में जरूर शामिल होना चाहिए कौल ने कहा।

    उल्लेखनीय है कि महाकाल मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। देश विदेश से श्रद्धालु इस अनूठी आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। क्रिकेटरों की इस आध्यात्मिक यात्रा ने एक बार फिर यह साबित किया कि खेल जगत की हस्तियां भी अपनी आस्था से गहराई से जुड़ी हैं और महत्वपूर्ण अवसरों पर ईश्वर का आशीर्वाद लेना नहीं भूलतीं।

  • बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत अवसर

    बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत अवसर


    उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के भस्म आरती का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। मंदिर के कपाट खुलते ही सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्ति वाचन किया गया और पुजारियों ने आज्ञा लेकर चांदी द्वार खोला।

    इसके बाद गर्भगृह के पट खोलकर भगवान महाकाल का श्रृंगार किया गया। पंचामृत से पूजन और कर्पूर आरती के पश्चात भगवान को भांग, चंदन, सिंदूर और आभूषणों से सजाया गया। इस दिव्य श्रृंगार से महाकाल का स्वरूप अत्यंत आकर्षक और अलौकिक दिखाई दिया।

    नंदी हाल में नंदी जी का विधिवत स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। तत्पश्चात भगवान महाकाल का जल से अभिषेक और पंचामृत से विशेष पूजा हुई, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। इसके बाद ड्रायफ्रूट, फल और मिठाई का भोग अर्पित कर भस्म अर्पित किया गया।

    भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की माला धारण कराई गई। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और बाबा महाकाल के दिव्य आशीर्वाद का अनुभव किया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी भस्म अर्पित की गई।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इस आरती को इसलिए अत्यंत विशेष और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। भस्म आरती का यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का अद्भुत अवसर प्रदान करता है।

  • महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन

    महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन


    उज्जैन का विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था के महासागर में डूबने जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 रविवार को मनाया जाएगा और इसे लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए महाकाल मंदिर के पट लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे ताकि देश और विदेश से आने वाले लाखों भक्त बिना किसी बाधा के बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें।

    6 फरवरी से ही महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि के साथ भगवान शिव के विवाहोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। यह आयोजन 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे मंदिर परिसर को भव्य और आकर्षक सजावट से सजाया जा रहा है। फूलों की विशेष साज सज्जा के साथ महादेव का दिव्य श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    महाशिवरात्रि के दिन 15 फरवरी को सुबह 6 बजे से दर्शन प्रारंभ होंगे और 16 फरवरी की सुबह तक बिना किसी विश्राम के जारी रहेंगे। इन 44 घंटों के दौरान मंदिर नॉनस्टॉप खुला रहेगा। श्रद्धालु दिन और रात किसी भी समय बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन भक्तों के लिए की गई है जो दूर दराज से उज्जैन पहुंचते हैं और महाशिवरात्रि पर महाकाल के साक्षात दर्शन की अभिलाषा रखते हैं।

    महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस दिन चारों प्रहर महादेव की पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर शिव नाम का स्मरण करते हैं। उज्जैन नगरी इस अवसर पर पूरी तरह शिवमय हो जाती है। हर ओर हर हर महादेव के जयघोष गूंजते हैं और वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो जाता है।

    इस पर्व का सबसे विशेष और आकर्षक आयोजन 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे होने वाली भस्म आरती होगी। महाकालेश्वर मंदिर में दोपहर की भस्म आरती साल में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर ही आयोजित की जाती है। यह अद्भुत और दुर्लभ दृश्य देखने के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल को फलों फूलों और सप्तधान्य से निर्मित भव्य सेहरा बांधा जाता है। यह श्रृंगार अपने आप में अद्वितीय होता है और श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभूति का क्षण बन जाता है।

    महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि का यह भव्य समापन 16 फरवरी को भस्म आरती के साथ होगा। उज्जैन का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत खास है। महाकाल की नगरी में इस दौरान उमड़ने वाली आस्था यह दर्शाती है कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है जितनी सदियों पहले थी। महाकाल के दरबार में इस महापर्व पर शामिल होना हर शिवभक्त के लिए सौभाग्य की बात मानी जाती है और इस वर्ष 44 घंटे के निरंतर दर्शन ने इस उत्सव को और भी ऐतिहासिक बना दिया है।

  • केन्द्रीय रेल एवं जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने किए बाबा महाकाल के दर्शन, भस्म आरती में हुए शामिल

    केन्द्रीय रेल एवं जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने किए बाबा महाकाल के दर्शन, भस्म आरती में हुए शामिल


    उज्जैन। केन्द्रीय रेल एवं जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना शुक्रवार तड़के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। उन्होंने बाबा महाकाल की सुप्रसिद्ध भस्म आरती में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ लिया और देश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

    विधि-विधान से की पूजा-अर्चना

    सुबह होने वाली भस्म आरती के दौरान केन्द्रीय मंत्री सोमन्ना मंदिर के नंदी हॉल में मौजूद रहे। आरती के पश्चात उन्होंने गर्भगृह की दहलीज से भगवान महाकालेश्वर का पूजन-अभिषेक किया। मंदिर के पुजारियों ने उन्हें विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई और बाबा महाकाल का आशीर्वाद स्वरूप प्रसाद व स्मृति चिह्न भेंट किया।

    उज्जैन आगमन और दर्शन

    केन्द्रीय मंत्री वी. सोमन्ना अपनी धार्मिक यात्रा के तहत उज्जैन पहुंचे थे। दर्शन के बाद उन्होंने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और वहां चल रहे विकास कार्यों की भी सराहना की। गौरतलब है कि उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु और विशिष्ट अतिथि दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

  • महाकाल की शरण में टीम इंडिया: निर्णायक मैच से पहले विराट कोहली और कुलदीप यादव ने की भस्म आरती , बाबा महाकाल से मांगी जीत की कामना

    महाकाल की शरण में टीम इंडिया: निर्णायक मैच से पहले विराट कोहली और कुलदीप यादव ने की भस्म आरती , बाबा महाकाल से मांगी जीत की कामना


    उज्जैन । न्यूजीलैंड के खिलाफ इंदौर में होने वाले निर्णायक वनडे मुकाबले से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के सितारे आध्यात्मिक ऊर्जा लेने उज्जैन पहुंचे। टीम इंडिया के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली और स्पिनर कुलदीप यादव ने शुक्रवार तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव के दर्शन किए और अलौकिक मानी जाने वाली भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। दोनों खिलाड़ी सुबह करीब 4 बजे मंदिर पहुंचे और लगभग दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर ध्यान और आराधना में लीन रहे। भस्म आरती के दौरान विराट कोहली पूरी तरह पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। उनके मस्तक पर त्रिपुण्ड सुशोभित था और वे पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते दिखाई दिए। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं की नजरें भी एक पल के लिए विराट और कुलदीप पर ठहर गईं। हालांकि दोनों खिलाड़ियों ने पूरी सादगी और श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए और किसी तरह की औपचारिकता से दूर रहे।

    दर्शन के बाद कुलदीप यादव ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि उन्होंने खेल और जीवन दोनों में सफलता के लिए भगवान महाकाल से आशीर्वाद मांगा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की आध्यात्मिक अनुभूति खिलाड़ियों को मानसिक शांति और आत्मविश्वास देती है जो मैदान पर बेहतर प्रदर्शन में मददगार होती है। विराट कोहली ने भले ही कोई बयान नहीं दिया लेकिन उनका शांत और ध्यानमग्न चेहरा यह साफ बयां कर रहा था कि वे इस निर्णायक मुकाबले को लेकर पूरी तरह केंद्रित हैं।गौरतलब है कि इससे पहले भी भारतीय टीम के कई खिलाड़ी बड़े मुकाबलों से पहले महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाते रहे हैं। हाल ही में टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर और विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल भी उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। क्रिकेट और आस्था का यह संगम उज्जैन में अक्सर देखने को मिलता है जहां खिलाड़ी मैदान पर उतरने से पहले आध्यात्मिक बल लेने आते हैं।

    इंदौर में खेला जाने वाला यह एकदिवसीय मुकाबला भारत और न्यूजीलैंड के बीच चल रही वनडे सीरीज का आखिरी और निर्णायक मैच है। दोनों टीमें अब तक एक-एक मैच जीतकर बराबरी पर हैं ऐसे में यह मुकाबला सीरीज का फैसला करेगा। भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को टीम इंडिया से जीत की पूरी उम्मीद है वहीं विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ी से एक बड़ी पारी की आस भी लगाई जा रही है।अब सबकी नजरें रविवार को होने वाले इस हाई-वोल्टेज मुकाबले पर टिकी हैं। महाकाल के आशीर्वाद के साथ टीम इंडिया मैदान में उतरेगी और करोड़ों प्रशंसक दुआ कर रहे हैं कि बाबा महाकाल की कृपा से जीत भारतीय टीम के हिस्से आए और देशभर में एक बार फिर जश्न का माहौल बने।