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राकेश अग्रवाल हत्याकांड में नए सुराग की तलाश, रेलवे स्टेशन के CCTV में कैद हुआ वरुण, रिश्तेदारों और दोस्तों से पूछताछ के बाद भी पुलिस के हाथ खाली
भोपाल । भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या का मामला लगातार उलझता जा रहा है। 30 सितंबर को हुई इस वारदात के बाद से मेडिसिनल केयरटेकर वरुण कुमार फरार है और पुलिस अब तक उसका पता नहीं लगा सकी है। आरोपी की तलाश में मध्य प्रदेश समेत पंजाब उत्तर प्रदेश और हरियाणा में संभावित ठिकानों पर जांच की जा रही है। इस बीच भोपाल रेलवे स्टेशन के CCTV कैमरों में वरुण की गतिविधियां सामने आई हैं। फुटेज के मुताबिक वह 30 सितंबर की सुबह करीब 3 बजकर 51 मिनट पर रेलवे स्टेशन पर दिखाई दिया था। पुलिस अब इन तस्वीरों के आधार पर उसकी फरारी के रास्ते और संभावित यात्रा से जुड़ी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।वरुण की तलाश को तेज करने के लिए पुलिस उसके रिश्तेदारों दोस्तों और परिचितों से लगातार पूछताछ कर रही है। अब तक 100 से अधिक लोगों से जानकारी जुटाई जा चुकी है। आरोपी के पिता ग्वालियर में बहन पटियाला में और कुछ दोस्त आगरा तथा मथुरा में रहते हैं। पुलिस इन लोगों से तीन से चार बार पूछताछ कर चुकी है। जांचकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि वारदात के बाद वरुण किन लोगों के संपर्क में रहा और क्या उसे फरार होने के दौरान किसी ने मदद पहुंचाई। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब तक किसी रिश्तेदार या दोस्त की संलिप्तता सामने नहीं आई है। पुलिस आगरा से वृंदावन जाने वाले मार्ग पर 80 से अधिक स्थानों पर आरोपी के पोस्टर भी चिपका चुकी है ताकि उसके बारे में सूचना मिलने की संभावना बढ़ सके।इस हत्याकांड की जांच में एक करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी का पुराना मामला भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार राकेश अग्रवाल ने करीब 11 महीने पहले अपने पूर्व परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी में निवेश और अधिक रिटर्न का लालच देकर किस्तों में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ली गई लेकिन बाद में पैसे वापस नहीं किए गए। जांच के बाद अक्टूबर 2025 में अजीत के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी और उसे गिरफ्तार भी किया गया था। अब पुलिस इस पुराने मामले से जुड़े लोगों दस्तावेजों अदालत की कार्यवाही और अग्रवाल की गवाही सहित सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। हालांकि धोखाधड़ी के मामले और हत्या के बीच किसी संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है।पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि वरुण कुमार को 27 सितंबर को वर्मा होम हेल्थ केयर एजेंसी के माध्यम से राकेश अग्रवाल के घर काम पर रखा गया था। एजेंसी से उसके दस्तावेज पुराने रोजगार और सत्यापन से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। वरुण का पंजाब के पटियाला एसपी कार्यालय से 1 मई 2025 को जारी चरित्र प्रमाण पत्र भी मिला है। यह प्रमाण पत्र उसने नौकरी के उद्देश्य से बनवाया था और इसमें उसे अच्छे चरित्र वाला तथा अपराधमुक्त बताया गया था। पुलिस अब इस दस्तावेज की पृष्ठभूमि और नौकरी पर रखे जाने से संबंधित प्रक्रिया की भी जांच कर रही है।फिलहाल भोपाल रेलवे स्टेशन के CCTV फुटेज आरोपी की तलाश में महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं। पुलिस फुटेज और संभावित यात्रा रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि स्टेशन पर दिखाई देने के बाद वरुण किस दिशा में गया। चार राज्यों में तलाश और परिचितों से पूछताछ के बावजूद आरोपी का पता नहीं चल पाया है। ऐसे में जांच की दिशा अब उसके संभावित ठिकानों संपर्कों और पुराने मामलों से जुड़े तथ्यों पर केंद्रित है। पुलिस को उम्मीद है कि CCTV फुटेज और अन्य जानकारियों के मिलान से फरारी के रास्ते का पता लगाने में मदद मिल सकती है। -

भोपाल IAS मर्डर केस: घर में गला रेती लाश और फरार केयरटेकर ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती लूट से लेकर पुराने विवाद तक जांच
नई दिल्ली। भोपाल के रातीबड़ इलाके के सूरज नगर में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद पुलिस की जांच कई एंगल पर आगे बढ़ रही है। 30 सितंबर की सुबह अग्रवाल अपने घर में मृत मिले थे। उनके गले पर धारदार हथियार से हमला किए जाने के निशान थे। घटना के बाद पुलिस ने घर के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ ही उनके पुराने विवादों और हाल की गतिविधियों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। जांच में करीब 11 महीने पुराने एक करोड़ रुपए से अधिक के कथित धोखाधड़ी मामले का एंगल भी सामने आया है। हालांकि पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि पुराने मामले का हत्या से सीधा संबंध है।जानकारी के मुताबिक राकेश अग्रवाल ने करीब 11 महीने पहले अपने पूर्व परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत की थी। आरोप था कि कंपनी में निवेश कराने और बेहतर रिटर्न दिलाने का भरोसा देकर उनसे एक करोड़ रुपए से अधिक की रकम अलग अलग किस्तों में ली गई थी। रकम वापस नहीं मिलने के बाद उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद अक्टूबर 2025 में पुलिस ने अजीत पाटनी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था और उसे गिरफ्तार किया गया था। अब इसी मामले में अग्रवाल की गवाही और अदालत में चल रही कार्रवाई को भी पुलिस जांच के दायरे में रख रही है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या गवाही या कोर्ट की कार्रवाई को लेकर राकेश अग्रवाल पर किसी तरह का दबाव बनाया गया था। हालांकि अभी तक ऐसा कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि पुराने धोखाधड़ी मामले के कारण ही हत्या हुई। पुलिस दोनों घटनाओं के बीच संभावित कनेक्शन की जांच कर रही है।
इस बीच हत्या की जांच में घर के केयरटेकर अरुण का नाम प्रमुखता से सामने आया है। पुलिस के अनुसार वारदात रात करीब 12 बजे से 2 बजे के बीच होने की आशंका है। इसके बाद करीब 2 बजकर 15 मिनट पर अरुण सीसीटीवी कैमरे में सूरज नगर से भदभदा की तरफ जाता दिखाई दिया। फुटेज में उसके पास पिट्ठू बैग भी नजर आने की बात सामने आई है। घटना के बाद से वह फरार है। पुलिस की पांच टीमें और क्राइम ब्रांच उसकी तलाश में जुटी हैं। उसकी आखिरी लोकेशन कुरवाई बीना रोड की ओर मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस लूट के एंगल की भी जांच कर रही है। घर में सामान और अलमारी की स्थिति को देखते हुए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या हत्या के पीछे चोरी या लूट का मकसद था। इसके साथ ही मृतक के पुराने मामलों कोर्ट से जुड़े दस्तावेज परिचितों और हाल के संपर्कों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
पुलिस को यह भी पता चला है कि केयरटेकर को एक होम हेल्थ केयर एजेंसी के माध्यम से राकेश अग्रवाल के घर काम पर रखा गया था। पुलिस एजेंसी के कार्यालय पहुंचकर उसके दस्तावेज नौकरी से जुड़ी जानकारी और पुलिस वेरिफिकेशन से संबंधित रिकॉर्ड जुटा रही है। इन दस्तावेजों के आधार पर उसके पुराने रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस केयरटेकर की गिरफ्तारी को अहम मान रही है। अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ के बाद हत्या की वास्तविक वजह और घटनाक्रम को लेकर तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है। मुख्यमंत्री ने भी डीजीपी को मामले की निगरानी करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस पुराने धोखाधड़ी विवाद लूट और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ा रही है।
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रिटायर्ड IAS की हत्या से भोपाल में सनसनी, नया केयरटेकर गायब, गैस भरकर सबूत मिटाने का प्रयास
भोपाल । भोपाल में बुधवार सुबह रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या की खबर से सनसनी फैल गई। सूरजनगर स्थित उनके घर में उनका शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक राकेश अग्रवाल के गले पर धारदार हथियार से हमला किए जाने के निशान मिले हैं। पुलिस को संदेह है कि हत्या के पीछे उनके केयरटेकर वरुण कुमार का हाथ हो सकता है जो वारदात के बाद से लापता है। खास बात यह है कि वरुण कुमार को महज दो दिन पहले ही पंजाब की एक एजेंसी के माध्यम से नौकरी पर रखा गया था। पुलिस उसके बारे में जानकारी जुटाने के साथ ही उसकी तलाश में जुटी है।राकेश अग्रवाल 1982 बैच के IAS अधिकारी थे और सेवानिवृत्ति के बाद अपनी पत्नी के साथ सूरजनगर स्थित मकान में रह रहे थे। बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे उनकी पत्नी की नींद खुली। वह रोजाना की तरह मॉर्निंग वॉक के लिए जाने की तैयारी कर रही थीं लेकिन जब उन्होंने मुख्य दरवाजा खोलने की कोशिश की तो वह बाहर से बंद मिला। इसके बाद उन्होंने दूसरे नौकर राजन थापा को फोन किया। स्थिति असामान्य लगने पर वह घर के अंदर राकेश अग्रवाल के कमरे की ओर गईं। कमरे का दरवाजा खोलने पर जमीन पर राकेश अग्रवाल का शव पड़ा मिला। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई।
रातीबड़ पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। शुरुआती जांच में राकेश अग्रवाल के गले पर धारदार हथियार से चोट के निशान मिले हैं जिससे हत्या की आशंका मजबूत हुई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात किस समय हुई और घर में उस दौरान कौन कौन मौजूद था। जांच में केयरटेकर वरुण कुमार का लापता होना भी महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक उसका सामान भी घर में नहीं मिला है। इससे पुलिस की जांच का एक प्रमुख फोकस उसकी तलाश और घटना से उसके संभावित संबंध पर है।
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। पुलिस को घर के अंदर आग लगाने की कोशिश के संकेत मिले हैं। किचन में LPG सिलेंडर का पाइप निकला हुआ मिला और पूरे घर में गैस फैल गई थी। ऐसे में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या हत्या के बाद घर में आग लगाकर घटना के निशान मिटाने का प्रयास किया गया था। हालांकि इस संबंध में जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
घटना के बाद पुलिस ने घर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है और किसी भी व्यक्ति के मकान के अंदर जाने पर रोक लगा दी गई है। पुलिस घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटा रही है। साथ ही घर में काम करने वाले अन्य लोगों से भी जानकारी ली जा रही है। राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद इलाके में भी लोगों के बीच चर्चा का माहौल है। फिलहाल पुलिस की जांच के केंद्र में लापता केयरटेकर वरुण कुमार है और उसकी तलाश के बाद मामले की कई अहम कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।
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घर में मिला महिला इंस्पेक्टर का खून से लथपथ शव पास पड़ा था हथौड़ा प्रेमी पर हत्या का शक फिर उठाया खौफनाक कदम
भोपाल। भोपाल में महिला RTO इंस्पेक्टर की हत्या और उसके बाद उनके प्रेमी की आत्महत्या का मामला सामने आने से सनसनी फैल गई है। खजूरी सड़क थाना क्षेत्र की लेखपाल कॉलोनी में सोमवार सुबह RTO इंस्पेक्टर मीनाक्षी गोखले का शव उनके घर के अंदर मिला। मीनाक्षी की उम्र करीब 45 वर्ष बताई गई है। उनके सिर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं और शव के पास ही खून से सना हथौड़ा पड़ा हुआ था। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मीनाक्षी भंवरी जोड़ के पास लेखपाल कॉलोनी में रहती थीं। उनके साथ एक रूममेट भी रहती थी। सोमवार सुबह करीब 7 बजे रूममेट ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस के पहुंचने पर घर के अंदर मीनाक्षी का शव मिला। घटनास्थल की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मामले को हत्या के एंगल से जांचना शुरू किया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
पुलिस की शुरुआती जांच में मीनाक्षी के प्रेमी पवन कुमार द्विवेदी का नाम सामने आया है। बताया गया है कि पवन मूल रूप से सीधी जिले का रहने वाला था और करीब दो दिन पहले ही भोपाल आया था। वह मीनाक्षी के साथ उनके घर में ही रह रहा था। पुलिस को आशंका है कि रविवार देर रात दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ होगा। इसके बाद पवन ने कथित तौर पर हथौड़े से मीनाक्षी के सिर पर वार किए जिससे उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद पवन ने भी कथित तौर पर घर से करीब 20 मीटर दूर स्थित एक पेड़ पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को उसकी जेब से बैंक पासबुक भी मिली है। पवन पहले इंदौर में कोचिंग क्लासेस चला चुका था और वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। पुलिस अब उसके भोपाल आने की वजह और मीनाक्षी के साथ उसके संबंधों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि पवन मीनाक्षी से शादी करना चाहता था जबकि मीनाक्षी शादी के लिए तैयार नहीं थीं। पुलिस को आशंका है कि इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ होगा। हालांकि पुलिस ने अभी इस वजह को अंतिम कारण नहीं माना है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है। फोरेंसिक साइंस लैब यानी FSL की टीम ने भी मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। अब पुलिस मीनाक्षी और पवन के बीच हुई बातचीत उनके पिछले संपर्क और घटना से पहले की गतिविधियों की जानकारी जुटाने में लगी है। फिलहाल मामले में हत्या और आत्महत्या की घटनाओं को जोड़कर जांच की जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की परिस्थितियों और घटनाक्रम को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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भोपाल में जुआ फड़ पर पुलिस की छापेमारी: कई जुआरी गिरफ्तार, TI समेत 3 पर गिरी गाज
भोपाल । भोपाल के चौक बाजार इलाके में जुए के अड्डे पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद कोतवाली थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। एसीपी कोतवाली संतोष पटेल की टीम ने क्षेत्र में दबिश देकर दर्जनभर से ज्यादा जुआरियों को पकड़ा था। मौके से करीब सवा दो लाख रुपए भी जब्त किए गए थे। कार्रवाई के बाद जब अधिकारियों ने जुए के अड्डे के संचालन और स्थानीय पुलिस की भूमिका को लेकर जानकारी जुटाई तो थाना स्तर पर लापरवाही का मामला सामने आया। इसके बाद कोतवाली थाना प्रभारी प्रभात गौड़ को निलंबित कर दिया गया।थाना प्रभारी के साथ बीट प्रभारी एएसआई राकेश गुर्जर और माइक्रो बीट प्रभारी आरक्षक नरेंद्र रावत पर भी कार्रवाई की गई है। तीनों पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच करने के साथ निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई डीसीपी जोन तीन आयुष गुप्ता के स्तर से की गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक चौक बाजार क्षेत्र में जुआ चलने की जानकारी सामने आने के बावजूद उसे रोकने के लिए थाना स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई थी।
दरअसल गत दिवस एसीपी कोतवाली संतोष पटेल अपनी टीम के साथ चौक बाजार क्षेत्र में पहुंचे थे। टीम ने जुए के अड्डे पर अचानक दबिश दी। पुलिस की कार्रवाई से वहां मौजूद जुआरियों में अफरा तफरी मच गई। टीम ने दर्जनभर से ज्यादा लोगों को पकड़ा और मौके से करीब 2.25 लाख रुपए बरामद किए। इस कार्रवाई के बाद वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान इस बात पर गया कि जिस इलाके में जुआ चल रहा था वहां स्थानीय पुलिस की ओर से पहले क्या कार्रवाई की गई थी।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जुआ बंद कराने को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से पहले निर्देश दिए जा चुके थे। इसके बावजूद गतिविधियां पूरी तरह नहीं रुक सकीं। थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर पुलिस अधिकारियों ने जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी जांच के दौरान थाना प्रभारी प्रभात गौड़ पर जुआरियों को संरक्षण देने से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की गई। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और विभागीय कार्रवाई के आधार पर ही तय होगा।
बीट और माइक्रो बीट स्तर के पुलिसकर्मियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया। अधिकारियों का मानना है कि किसी क्षेत्र में लगातार अवैध गतिविधि चलने की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होना पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। इसी आधार पर थाना प्रभारी के साथ बीट प्रभारी और माइक्रो बीट प्रभारी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
भोपाल में जुए से जुड़े मामलों में थाना स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई का यह दूसरा बड़ा मामला बताया जा रहा है। इससे पहले बजरिया थाना प्रभारी शिल्पा कौरव को भी निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ भी जुआरियों को संरक्षण देने से जुड़े आरोप सामने आए थे। अब कोतवाली क्षेत्र की कार्रवाई के बाद तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन से पुलिस विभाग में जिम्मेदारी और निगरानी को लेकर सख्ती का संकेत मिला है।
एसीपी कोतवाली संतोष पटेल ने कोतवाली थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की पुष्टि की है। पुलिस अब चौक बाजार में जुए के अड्डे से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि वहां जुए की गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं और इसमें कौन कौन लोग शामिल थे। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
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9 कमरों वाले स्पा सेंटर में पुलिस की दबिश 5 कमरों में मिले युवक युवतियां ग्राहक बनकर पहुंची थी पुलिस टीम
भोपाल । भोपाल में स्पा सेंटर की आड़ में चल रहे कथित अनैतिक देह व्यापार का पुलिस ने खुलासा किया है। पिपलानी थाना क्षेत्र के इंद्रपुरी स्थित Pink Vibes Spa में पुलिस ने शनिवार रात छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की थी। कार्रवाई के दौरान स्पा सेंटर के पांच कमरों में युवक युवतियां आपत्तिजनक परिस्थितियों में मिले। पुलिस ने मौके से 8800 रुपये नकद मोबाइल फोन और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी जब्त की है।पुलिस के मुताबिक इंद्रपुरी इलाके में संचालित स्पा सेंटर को लेकर लगातार जानकारी मिल रही थी कि वहां मसाज सेंटर की आड़ में अनैतिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पहले अपने स्तर पर इसकी पुष्टि करने की योजना बनाई। इसके लिए पुलिस टीम ने एक व्यक्ति को ग्राहक बनाकर स्पा सेंटर के अंदर भेजा। अंदर पहुंचने के बाद जब संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि हुई तो पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्पा सेंटर पर दबिश दी।
पुलिस की तलाशी के दौरान स्पा सेंटर के कुल नौ कमरों में से पांच कमरों में युवक और युवतियां आपत्तिजनक स्थिति में मिले। मौके पर मौजूद महिलाओं से महिला पुलिसकर्मियों की मदद से पूछताछ की गई। पूछताछ और मौके से मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को स्पा सेंटर में अनैतिक देह व्यापार संचालित किए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने वहां मौजूद संदिग्ध लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
पुलिस जांच में स्पा सेंटर से होने वाली कथित अवैध कमाई के बंटवारे को लेकर भी जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार आरोपियों को अलग अलग प्रतिशत के हिसाब से कमीशन दिया जाता था। जांच में भुवन सिंह चंदेल को 20 प्रतिशत दीपक ठाकुर को 10 प्रतिशत पंकज त्रिपाठी को 15 प्रतिशत और देवीसिंह रजक को 5 प्रतिशत कमीशन मिलने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।
कार्रवाई के बाद पुलिस ने भुवन सिंह चंदेल दीपक ठाकुर पंकज त्रिपाठी और देवीसिंह रजक को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 3 4 और 5 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि स्पा सेंटर का संचालन कब से किया जा रहा था और इसमें अन्य कौन कौन लोग शामिल थे।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब स्पा सेंटर से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि सेंटर पर आने वाले ग्राहकों और वहां काम करने वाले लोगों के बीच किस तरह संपर्क होता था तथा कथित अवैध गतिविधियों से होने वाली कमाई का नेटवर्क किस तरह संचालित किया जा रहा था। पुलिस जब्त मोबाइल फोन और अन्य सामान की भी जांच कर सकती है ताकि मामले से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंच बनाई जा सके।
पिपलानी थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई ने स्पा सेंटरों की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि अनैतिक गतिविधियों की सूचना मिलने पर आगे भी इसी तरह कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जता रही है।
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अवैध प्लॉटिंग विवाद में कारोबारी को पहले धमकाया फिर घर पर बरसाईं गोलियां 6 ऑडियो से जांच में नया मोड़ भोपाल में धमकी के बाद फायरिंग से सनसनी
भोपाल । भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र के गोरेगांव में रियल एस्टेट कारोबारी के घर के बाहर फायरिंग का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जमीन और कथित अवैध प्लॉटिंग से जुड़े विवाद में पहले कारोबारी को फोन पर धमकियां मिलने का दावा किया गया और इसके बाद देर रात उनके घर के बाहर गोलियां चलाने की घटना सामने आई। अब फरियादी पक्ष की ओर से जारी किए गए छह कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। इन ऑडियो में एक व्यक्ति कथित तौर पर कारोबारी को गाली गलौज करते हुए भोपाल में काम नहीं करने की धमकी देता सुनाई दे रहा है। वह खुद को मुरैना निवासी सौरभ चौहान बताता है और ग्वालियर से जमीन का काम करने की बात कहता है। हालांकि इन ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज और उनमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।मामला 60 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी संतोष सिंह तोमर से जुड़ा है। फरियादी के अनुसार गोरेगांव में कथित अवैध प्लॉटिंग को लेकर शिकायत करने के बाद उनका कुछ लोगों से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के बीच उन्हें कथित तौर पर फोन पर धमकियां दी गईं। इसके बाद 10 सितंबर की दरमियानी रात करीब ढाई बजे एक SUV में आधा दर्जन से ज्यादा लोग उनके घर पहुंचे। आरोप है कि घर के गेट के बाहर कई राउंड फायरिंग की गई और जान से मारने की धमकी देकर आरोपी मौके से फरार हो गए।
फरियादी पक्ष का दावा है कि फायरिंग की घटना अचानक नहीं हुई बल्कि इसके पहले से ही धमकियों का सिलसिला चल रहा था। जारी किए गए छह ऑडियो में कथित तौर पर जमीन विवाद को लेकर बातचीत और धमकी जैसी बातें सामने आती हैं। एक ऑडियो में खुद को सौरभ चौहान बताने वाला व्यक्ति कारोबारी को चुनौती देता सुनाई देता है। बातचीत में वह भोपाल में काम नहीं करने की बात कहता है। हालांकि पुलिस जांच में इन ऑडियो की वास्तविकता और कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि होना बाकी है।
फायरिंग के बाद पुलिस को रात करीब 2 बजकर 55 मिनट पर डायल 112 के जरिए सूचना दी गई। इसके करीब आधे घंटे बाद फरियादी पक्ष रातीबड़ थाने पहुंच गया। इसके बावजूद FIR अगले दिन 11 सितंबर की शाम करीब 5 बजे दर्ज होने की बात सामने आई है। FIR में फिलहाल किसी आरोपी को नामजद नहीं किया गया है। पुलिस ने मामले में उस SUV के नंबर MP 13 ZD 5656 का उल्लेख किया है जिससे आरोपी मौके पर पहुंचे थे।
फरियादी ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में भी शिकायत देकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। कारोबारी ने गांव में रहने वाले लखन मारण पर भी संदेह जताया है। पुलिस अब जमीन विवाद से लेकर धमकी वाले कथित ऑडियो और फायरिंग तक की पूरी कड़ी को जोड़ने में जुटी है। जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि फायरिंग से पहले किन लोगों ने फरियादी से संपर्क किया था और वारदात के बाद किन नंबरों से उन्हें धमकी या दबाव देने की कोशिश की गई।
इस मामले में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। क्या फायरिंग जमीन विवाद के चलते हुई थी। कथित ऑडियो में आवाज किस व्यक्ति की है। SUV से मौके पर कौन लोग पहुंचे थे और फायरिंग में कितने हथियारों का इस्तेमाल हुआ। इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल धमकी के कथित ऑडियो और घर के बाहर हुई फायरिंग ने भोपाल के इस जमीन विवाद को गंभीर बना दिया है और पुलिस की जांच अब घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने पर केंद्रित है।
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रात 3 बजे भोपाल में दहशत! दो बदमाशों ने खुलेआम चलाई गोलियां, CCTV में कैद हुई वारदात; FIR में देरी का आरोप
भोपाल । भोपाल में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात फायरिंग की घटना से इलाके में दहशत फैल गई। कजलीखेड़ा थाना क्षेत्र में रात करीब 3 बजे दो बदमाशों ने कथित तौर पर फायरिंग की। घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें दोनों आरोपी फायरिंग करते हुए नजर आ रहे हैं। देर रात हुई इस वारदात के बाद आसपास रहने वाले लोगों में डर का माहौल बन गया। पुलिस अब वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच में जुटी है।बताया जा रहा है कि फायरिंग की यह घटना पुरानी रंजिश से जुड़ी हुई है। घटना के बाद फरियादी अजय बैरागी शिकायत दर्ज कराने कजलीखेड़ा थाने पहुंचा। फरियादी ने आरोप लगाया कि उसने पुलिस को घटना की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग की लेकिन तत्काल FIR दर्ज नहीं की गई और उसे थाने से वापस भेज दिया गया। इस आरोप के सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं।
हालांकि कजलीखेड़ा थाना प्रभारी पल्लवी पांडे ने पुलिस पर लगे आरोपों को खारिज किया है। थाना प्रभारी के मुताबिक मामले में FIR दर्ज करने में पुलिस की ओर से किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है। उन्होंने बताया कि फरियादी पक्ष थाने में मौजूद है और मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है और आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।
पुलिस के मुताबिक फायरिंग का आरोप बैरागढ़ चीचली निवासी जीतू यादव पर लगाया गया है। दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद और पुरानी रंजिश होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पुरानी रंजिश की वजह क्या थी और इसी विवाद के चलते फायरिंग की घटना को अंजाम दिया गया या इसके पीछे कोई दूसरा कारण भी था।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिला है। वीडियो में दो लोग फायरिंग करते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस वीडियो की सत्यता और उसमें नजर आ रहे लोगों की पहचान की जांच कर रही है। इसके साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे अन्य कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा सकती है ताकि वारदात से पहले और बाद की गतिविधियों का पता लगाया जा सके।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फायरिंग के समय घटनास्थल पर कितने लोग मौजूद थे और आरोपियों के पास हथियार कहां से आया। घटना के बाद आरोपी मौके से किस दिशा में भागे और उन्हें किसी अन्य व्यक्ति ने मदद पहुंचाई या नहीं इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
आधी रात करीब 3 बजे हुई इस फायरिंग ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों के लिए देर रात खुलेआम गोली चलने की घटना डर का कारण बनी हुई है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार करना और फायरिंग के पीछे की वास्तविक वजह सामने लाना है। फिलहाल पुलिस वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
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17 वर्षीय किशोर हत्याकांड में पुलिस के सामने नई चुनौती तीन सर्चिंग के बाद मिली सिर्फ पॉलीथिन, 12 लाख के ट्रांजैक्शन की भी जांच
भोपाल । भोपाल के श्यामला हिल्स इलाके में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। हत्या के बाद किशोर के शरीर के एक हिस्से को काटकर छोटे तालाब में फेंके जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर तीन बार तालाब में सर्चिंग की लेकिन अब तक उस अंग की बरामदगी नहीं हो सकी है। तलाशी के दौरान पुलिस को एक पॉलीथिन जरूर मिली लेकिन उसमें वह अंग नहीं था जिसकी तलाश की जा रही थी। अब पुलिस आरोपियों के बयानों के साथ उनके बैंक खातों मोबाइल फोन कॉल डिटेल और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच कर रही है ताकि हत्या के पीछे के पूरे नेटवर्क और कथित आर्थिक लालच की वास्तविकता सामने लाई जा सके।पुलिस के अनुसार आरोपियों ने वारदात की साजिश 5 अगस्त को रची थी। इसके अगले दिन 6 अगस्त की रात किशोर को 100 रुपए देने का लालच देकर एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया। इसके बाद किलोल पार्क के आसपास उसकी हत्या कर दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि शरीर के हिस्से को काटने के लिए नया शेविंग ब्लेड खरीदा गया था जबकि हत्या में इस्तेमाल छुरी एक विधि विवादित बालक अपने साथ लेकर आया था। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी जोहेब खान के साथ आमिर और तीन विधि विवादित बालकों को पकड़ा है।
हत्या के बाद किशोर के शरीर के काटे गए अंग को छोटे तालाब में फेंकने की बात आरोपियों ने पुलिस को बताई थी। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने तालाब में तीन अलग अलग बार सर्चिंग की। हर बार उस इलाके के आसपास तलाश की गई जहां आरोपियों ने अंग फेंकने की बात कही थी। तलाशी के दौरान एक पॉलीथिन मिली और आरोपियों ने दावा किया कि इसी पॉलीथिन में अंग को बांधकर तालाब में फेंका गया था। हालांकि जब पुलिस ने इसकी जांच की तो पॉलीथिन के अंदर वह अंग मौजूद नहीं था।
अब पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि पानी के बहाव के कारण वह दूसरी जगह पहुंच गया हो या कई दिनों तक पानी में रहने के कारण जैविक अपघटन हो गया हो। पानी में मौजूद जीव जंतुओं और अन्य प्राकृतिक कारणों से भी उसके नष्ट होने की संभावना पर जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी संभावना को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना है। तालाब की गहराई पानी के बहाव और आसपास की भौगोलिक स्थिति को समझकर आगे की सर्चिंग की रणनीति तैयार की जा रही है।
मामले की जांच में आर्थिक लेन देन भी पुलिस के लिए अहम कड़ी बन गया है। मुख्य आरोपी जोहेब के बैंक खाते में 12 लाख रुपए आने की सूचना सामने आई थी लेकिन पुलिस की तस्दीक में खाते में इतनी रकम जमा होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के बैंक खातों की लेन देन हिस्ट्री खंगालना शुरू कर दिया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या वारदात से पहले या बाद में किसी बाहरी व्यक्ति की ओर से आरोपियों को कोई रकम मिली थी।
पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन कॉल डिटेल और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों के संपर्क में कौन लोग थे और वारदात से पहले तथा बाद में उनकी किस किस व्यक्ति से बातचीत हुई। पुलिस इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि कथित आर्थिक लालच की जानकारी आरोपियों को कहां से मिली और क्या इसके पीछे किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका थी।
पूछताछ में आरोपियों के व्यवहार को लेकर भी पुलिस ने जानकारी जुटाई है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपियों में घटना को लेकर पछतावे के स्पष्ट संकेत नहीं दिखे और वे कथित तौर पर घटना के बारे में सामान्य तरीके से बात कर रहे थे। अब जांच एजेंसियां उनके आपसी संपर्क और वारदात से पहले तथा बाद की गतिविधियों को जोड़कर मामले की पूरी कड़ी तैयार करने में जुटी हैं।
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती किशोर के शरीर के लापता हिस्से की बरामदगी और हत्या के पीछे के वास्तविक मकसद की पूरी पुष्टि करना है। तीन बार तालाब में तलाश के बावजूद सफलता नहीं मिलने के बाद पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल जांच के आधार पर आगे बढ़ रही है। इस मामले में आने वाले दिनों में बैंक लेन देन और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े नए सुराग सामने आने की उम्मीद है।
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भोपाल में 17 साल के किशोर की हत्या से सनसनी: दो करोड़ के लालच में वारदात का आरोप, शरीर का हिस्सा गायब
भोपाल । भोपाल में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले ने सनसनी फैला दी है। पुलिस जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक किशोर को कथित तौर पर दो करोड़ रुपए कमाने के लालच में निशाना बनाया गया। पुलिस को आशंका है कि हत्या के बाद उसके शरीर के एक हिस्से को अलग कर कहीं भेजने की योजना बनाई गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुलिस स्तर पर जांच और पुष्टि अभी जारी है।शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र का रहने वाला किशोर अपने परिवार का इकलौता बेटा था और मोती मस्जिद इकबाल मैदान समेत आसपास के इलाकों में फेरी लगाकर पेन और कॉपी बेचता था। उसकी कमाई से ही परिवार का गुजारा चलता था। छह अगस्त को वह इकबाल मैदान क्षेत्र से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की।
करीब पांच दिन बाद 11 अगस्त को किशोर का शव छोटे तालाब से बरामद हुआ। शव की स्थिति खराब होने के कारण तत्काल पहचान नहीं हो सकी। बाद में कपड़ों और चप्पलों के आधार पर 14 अगस्त को परिजनों ने उसकी पहचान की। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया।
जांच के दौरान पुलिस ने रविवार को मुखबिर की सूचना पर एक नाबालिग संदेही को हिरासत में लिया। पूछताछ में कथित तौर पर किशोर की हत्या और उसके शरीर के एक हिस्से को अलग किए जाने से जुड़ी जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने जोहेब नेहा समेत कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। करीब 13 लोगों से पूछताछ की जा रही है जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल बताए जा रहे हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ लोगों ने नाबालिगों को कथित तौर पर यह लालच दिया था कि शरीर के एक विशेष अंग को विदेश भेजकर करोड़ों रुपए कमाए जा सकते हैं। इसी लालच में किशोर को मदद करने का भरोसा देकर सुनसान स्थान पर ले जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि हत्या के बाद शरीर के एक हिस्से को अलग किया गया और उसे दिल्ली के रास्ते विदेश भेजने की योजना बनाई गई थी। इस कथित सौदे में शामिल लोगों और इसके पीछे मौजूद नेटवर्क का पता लगाने के लिए पुलिस पूछताछ कर रही है।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने रविवार रात कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी। छोटे तालाब और आसपास के इलाकों में भी तलाश अभियान चलाया गया लेकिन शव का लापता हिस्सा अभी बरामद नहीं हुआ है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित साजिश के पीछे कौन लोग हैं और क्या वास्तव में किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से इसका संबंध है।
मामले में उस समय एक नया मोड़ आया जब एक अन्य 17 वर्षीय किशोर अपने परिजनों के साथ थाने पहुंचा। उसने आरोप लगाया कि संदिग्धों ने उसे भी निशाना बनाने की कोशिश की थी। किशोर के मुताबिक आरोपियों ने उसे पकड़कर गला दबाने की कोशिश की और हथियार दिखाए। वह किसी तरह उनके चंगुल से निकलकर भाग गया। उसने यह भी दावा किया कि आरोपी आपस में हत्या के बाद शरीर से संबंधित हिस्सा निकालने की बात कर रहे थे।
फिलहाल पुलिस दोनों घटनाओं के बीच संबंध की जांच कर रही है। पुलिस का मुख्य फोकस आरोपों की पुष्टि करने के साथ शव के लापता हिस्से की बरामदगी और पूरी साजिश में शामिल लोगों की पहचान पर है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।