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  • फतवा वायरल होने पर बढ़ा विवाद, मुस्लिम त्योहार कमेटी पहुंची थाने; शहर काजी को बदनाम करने की साजिश का आरोप

    फतवा वायरल होने पर बढ़ा विवाद, मुस्लिम त्योहार कमेटी पहुंची थाने; शहर काजी को बदनाम करने की साजिश का आरोप


    नई दिल्ली। राजधानी में सोशल मीडिया पर वायरल हुए फतवे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मंगलवार को ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी शाहजहांनाबाद थाने पहुंचे और थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

    कमेटी ने आरोप लगाया कि यह फतवा सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल कर शहर काजी की छवि धूमिल करने और शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।कमेटी ने आरोप लगाया कि यह फतवा सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल कर शहर काजी की छवि धूमिल करने और शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

    जानकारी के मुताबिक, पीरगेट निवासी सैयद सोहेल अली ने 6 मार्च 2026 को दारुल इफ्ता, मसाजिद कमेटी भोपाल से एक बीमारी के आधार पर फतवा मांगा था। इसके जवाब में 10 मार्च को फतवा जारी किया गया, जिस पर मुफ्ती-ए-शहर अब्दुल कलाम, मुफ्ती रईस और मुफ्ती जसीम दाद के हस्ताक्षर हैं।

    कमेटी का कहना है कि यह फतवा मूल रूप से एक व्यक्तिगत दस्तावेज था, लेकिन पिछले एक-दो दिनों से इसे सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।

    कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद दानिश ने कहा कि “फतवा किसी व्यक्ति विशेष के लिए होता है, लेकिन उसे सार्वजनिक कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। यह एक साजिश हो सकती है, जिसका उद्देश्य शहर काजी को पद से हटाना है।”

    वहीं, संरक्षक शमशुल हसन ने मांग की कि फतवा लेने वाले, जारी करने वाले और उसे वायरल करने वाले—तीनों की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि ईद से ठीक पहले इस तरह की घटना समाज में आक्रोश पैदा कर सकती है।

    कमेटी ने यह भी कहा कि परंपरा के अनुसार ईद पर शहर काजी ही ईदगाह में नमाज अदा कराते हैं, ऐसे में इस समय फतवा वायरल होना कई सवाल खड़े करता है और माहौल बिगड़ने की आशंका बढ़ा रहा है।

    उधर, शाहजहांनाबाद थाना प्रभारी यूपीएस चौहान ने बताया कि कमेटी की शिकायत मिल गई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि फतवा सोशल मीडिया पर किसने वायरल किया।

    साथ ही पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि ईद को देखते हुए शहर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।

  • भोपाल के 6 अस्पतालों पर 'तालाबंदी' की तलवार: 1 अप्रैल से संचालन पर रोक की चेतावनी; बिना रिन्यूअल इलाज करने पर होगी कानूनी स्ट्राइक

    भोपाल के 6 अस्पतालों पर 'तालाबंदी' की तलवार: 1 अप्रैल से संचालन पर रोक की चेतावनी; बिना रिन्यूअल इलाज करने पर होगी कानूनी स्ट्राइक



    भोपाल। राजधानी भोपाल में लाइसेंस नवीनीकरण (Renewal) की अनदेखी करने वाले निजी अस्पतालों पर प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय ने शहर के 6 प्रमुख अस्पतालों को कड़ा नोटिस जारी करते हुए अल्टीमेटम दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि 31 मार्च 2026 तक इन अस्पतालों ने पंजीयन का नवीनीकरण नहीं कराया, तो 1 अप्रैल से इनका संचालन पूरी तरह अवैध माना जाएगा और इन्हें सील करने की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    इन 6 अस्पतालों की बढ़ी मुश्किलें: नोटिस की लिस्ट
    स्वास्थ्य विभाग की रडार पर आए इन अस्पतालों ने तय समय-सीमा में आवेदन नहीं किया थाजहरा अस्पताल: लालघाटी चौराहा।सरदार पटेल अस्पताल: मोतिया तालाब रोड।राय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर: कैपिटल पेट्रोल पंप के पास।हेल्थ केयर हॉस्पिटल: बीडीए कॉलोनी, गोदरमऊ (गांधीनगर)।भगवती गौतम अस्पताल: दानिश कुंज, कोलार रोड।सचिन ममता अस्पताल: सोनागिरी, पिपलानी।

    लापरवाही भारी: ढाई महीने की मोहलत, फिर भी नहीं जागे संचालक
    सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा के अनुसार, निजी अस्पतालों और क्लिनिकों को एनएचएस (NHS) पोर्टल पर आवेदन करने के लिए करीब ढाई महीने का पर्याप्त समय दिया गया था।
    नर्सिंग होम एक्ट का उल्लंघन: मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम 1973 के तहत बिना वैध पंजीयन के किसी भी निजी स्वास्थ्य संस्था का संचालन नियमों के खिलाफ है।

    3 साल का लाइसेंस: आमतौर पर 1 अप्रैल से अगले तीन वर्षों के लिए लाइसेंस जारी किया जाता है, जिसके लिए रिन्यूअल की प्रक्रिया अनिवार्य है।

    31 मार्च के बाद क्या होगा? प्रशासन का सख्त रुख
    स्वास्थ्य विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि1 अप्रैल से इन 6 अस्पतालों का संचालन पूरी तरह ‘अवैध’ घोषित किया जा सकता है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी निजी अस्पताल मानकों का पालन करें, ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिल सके।

    स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर नियमों को ताक पर रखना अब इन अस्पतालों को भारी पड़ने वाला है। 31 मार्च की रात इन संचालकों के लिए ‘अग्निपरीक्षा’ जैसी होगी—या तो कागजी प्रक्रिया पूरी करें, अन्यथा 1 अप्रैल की सुबह अस्पताल के गेट पर स्वास्थ्य विभाग का ताला लगा मिल सकता है।

    मुख्य कीवर्ड्स (Keywords with Comma)
    भोपाल न्यूज, सीएमएचओ भोपाल नोटिस, निजी अस्पताल रिन्यूअल, डॉ. मनीष शर्मा, नर्सिंग होम एक्ट एमपी, भोपाल हेल्थ अपडेट, जहरा अस्पताल लालघाटी, राय हॉस्पिटल भोपाल, स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई 2026।

  • भोपाल: मंडप से उठा गैंगस्टर दूल्हा! इल्लीगल गैंग बनाकर पुजारी का किया था अपहरण; शादी के खर्च के लिए मांगे थे 8 लाख

    भोपाल: मंडप से उठा गैंगस्टर दूल्हा! इल्लीगल गैंग बनाकर पुजारी का किया था अपहरण; शादी के खर्च के लिए मांगे थे 8 लाख


    भोपाल।  राजधानी की कोहेफिजा पुलिस ने एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग और ब्लैकमेलिंग कांड का पर्दाफाश करते हुए ‘इल्लीगल’ गैंग के सरगना आकाश उर्फ भूरा हड्डी को उसके अपने ही शादी समारोह से गिरफ्तार कर लिया है। 12 मार्च को होने वाली अपनी शादी की रकम जुटाने के लिए आकाश ने अपने साथियों और एक युवती के साथ मिलकर एक पुजारी का अपहरण किया और उसे रेप केस में फंसाने की धमकी देकर 8 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी।

    साजिश: युवती को ढाल बनाकर घर में घुसी गैंग
    पुलिस जांच के अनुसार, फरियादी पुजारी आरोपी आकाश उपाध्याय का किराएदार है। आरोपियों ने पुजारी को ‘सॉफ्ट टारगेट’ मानकर यह जाल बुना:

    हनीट्रैप का जाल: सोमवार रात गिरोह की एक युवती ने पुजारी का दरवाजा खटखटाया और अंदर घुसते ही शोर मचाना शुरू कर दिया।

    बंधक बनाकर मारपीट: तुरंत बाद 10-15 बदमाश कमरे में घुसे और पुजारी पर रेप की कोशिश का आरोप लगाकर उसे पीटना शुरू किया। आरोपी उसे जबरन वाहन में डालकर तौफीक उर्फ शूटर के कमरे पर ले गए और वहां बंधक बना लिया। आरोपियों ने पुजारी के साथ युवती की झूमाझटकी का वीडियो भी शूट किया, जिसे वायरल करने की धमकी देकर 8 लाख रुपये मांगे गए।

    एक्शन: निकाह से पहले पुलिस की ‘एंट्री’
    पुजारी के भाई ने डर के मारे पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए, जिसके बाद आरोपियों ने पुजारी को छोड़ा। मुक्त होते ही पीड़ित सीधे कोहेफिजा थाने पहुँचा।बुधवार दोपहर जब मुख्य आरोपी आकाश उर्फ भूरा हड्डी एयरपोर्ट रोड स्थित एक गार्डन में अपनी शादी की रस्मों में व्यस्त था, तभी पुलिस ने दबिश देकर उसे मंडप से उठा लिया।पुलिस ने आकाश सहित चार आरोपियों (रामजी ठाकुर, आकाश उपाध्याय और अन्य) को गिरफ्तार कर दो दिन की रिमांड पर लिया है। गैंग की युवती और अन्य सदस्य फिलहाल फरार हैं।

    आरोपी का प्रोफाइल: 35 केस और ‘इल्लीगल’ गैंग
    टीआई केजी शुक्ला के मुताबिक, आकाश उर्फ भूरा हड्डी एक आदतन अपराधी हैउस पर पहले से हत्या और लूट जैसे 35 संगीन मामले दर्ज हैं। वह हाल ही में गांधीनगर मर्डर केस में जमानत पर बाहर आया था।वह ‘इल्लीगल’ नाम से गैंग चलाता है, जिसमें 15 से ज्यादा युवक और युवतियां शामिल हैं, जो शहर में संगठित रूप से ब्लैकमेलिंग का धंधा करते हैं।

  • मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव का ऐलान: 12 मई को मतदान, 93 हजार अधिवक्ता चुनेंगे 26 सदस्य

    मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव का ऐलान: 12 मई को मतदान, 93 हजार अधिवक्ता चुनेंगे 26 सदस्य


    भोपाल । मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल के चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म हो गया है। चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है जिसके तहत 12 मई 2026 को मतदान कराया जाएगा जबकि मतगणना की प्रक्रिया 16 जून से शुरू होगी। इस चुनाव में प्रदेशभर के करीब 93 हजार अधिवक्ता भाग लेंगे और वे 26 सदस्यों के चयन के लिए मतदान करेंगे। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित उच्चाधिकार प्राप्त चुनाव समिति ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस एस. के. पालो को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया है।

    जारी किए गए चुनाव कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले 16 मार्च को प्रोविजनल मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद अधिवक्ताओं को 24 मार्च तक मतदाता सूची में अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। प्राप्त आपत्तियों के निराकरण के बाद 1 अप्रैल 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। अंतिम सूची जारी होने के बाद उम्मीदवारों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया 8 अप्रैल से 10 अप्रैल तक चलेगी जिसमें इच्छुक अधिवक्ता अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।

    नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 15 और 16 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इस दौरान चुनाव अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी उम्मीदवारों के दस्तावेज और पात्रता नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। इसके बाद जिन उम्मीदवारों को चुनाव नहीं लड़ना होगा वे 20 से 22 अप्रैल तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद 22 अप्रैल को शाम 5 बजे तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। इसी सूची के आधार पर 12 मई को प्रदेशभर में मतदान कराया जाएगा।

    इस चुनाव की खास बात यह है कि इसमें महिला अधिवक्ताओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है। मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल में कुल 25 सदस्यों का चुनाव होता है जबकि एक सदस्य नामित किया जाता है जिससे कुल संख्या 26 हो जाती है। इस बार सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। हालांकि इनमें से पांच पदों के लिए ही चुनाव कराया जाएगा जबकि शेष दो पदों पर मनोनयन के माध्यम से महिला प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।

    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो चुका था और तब से परिषद एक्सटेंशन पर काम कर रही है। इस मामले को लेकर अदालत में सुनवाई भी हुई थी। 4 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बार काउंसिल के चुनाव जल्द से जल्द कराए जाएं। अदालत के निर्देश के बाद अब चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।

    बार काउंसिल के इस चुनाव को प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि परिषद अधिवक्ताओं से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक पेशेवर और अनुशासनात्मक मामलों में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में प्रदेशभर के अधिवक्ताओं की नजर अब आगामी चुनाव प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

  • भोपाल में बिना अनुमति जुलूस धरना पर दो माह की रोक, उज्जैन में पानी के टैंक में गिरने से 7 वर्षीय मासूम की मौत

    भोपाल में बिना अनुमति जुलूस धरना पर दो माह की रोक, उज्जैन में पानी के टैंक में गिरने से 7 वर्षीय मासूम की मौत


    भोपाल । मध्यप्रदेश में एक ओर जहां राजधानी भोपाल में कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है वहीं उज्जैन जिले के खाचरोद से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। भोपाल में पुलिस प्रशासन ने बिना अनुमति किसी भी प्रकार के जुलूस धरना प्रदर्शन और रैली पर दो महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं उज्जैन के खाचरोद क्षेत्र में सात वर्षीय मासूम के पानी के टैंक में गिरने से मौत हो गई जिसके बाद मामले में नया मोड़ आ गया है और परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है।

    राजधानी भोपाल में पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह आदेश जारी किया है। आदेश के तहत शहर में बिना प्रशासनिक अनुमति के किसी भी प्रकार के जुलूस आंदोलन रैली धरना प्रदर्शन घेराव और सरकारी भवनों के घेराव पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यह आदेश आगामी दो महीनों तक प्रभावी रहेगा। पुलिस प्रशासन का कहना है कि शहर में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि कोई संगठन समूह या व्यक्ति किसी प्रकार का सार्वजनिक कार्यक्रम रैली या प्रदर्शन करना चाहता है तो उसे पहले प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अनुमति के बिना किए गए किसी भी आयोजन को अवैध माना जाएगा और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने सभी विभागों संगठनों और नागरिकों से इस आदेश का पालन करने की अपील की है।

    इधर उज्जैन जिले के खाचरोद क्षेत्र की लंगर कॉलोनी में सात वर्षीय मासूम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार ध्रुव नामक बच्चा खेलते समय पानी के टैंक में गिर गया। घटना के बाद परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    मृतक ध्रुव 7 देवास निवासी धर्मेंद्र बलाई का बेटा था। बताया जा रहा है कि ध्रुव अपनी मां ममता बाई के साथ खाचरोद में किराए के मकान में रह रहा था। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। हालांकि मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब बच्चे के पिता धर्मेंद्र बलाई ने अपनी पत्नी ममता बाई और खाचरोद थाने में पदस्थ एएसआई प्रभुलाल डालमिया पर हत्या की आशंका जताई है। पिता ने इस संबंध में एसडीओपी को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि घटना संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।

    फिलहाल पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • MP में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के संकेत: स्टाइपेंड को लेकर जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज, जस्टिस मार्च

    MP में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के संकेत: स्टाइपेंड को लेकर जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज, जस्टिस मार्च


    भोपाल ।मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका के बीच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज हो गया है। स्टाइपेंड में बढ़ोतरी और लंबित भुगतान को लेकर नाराज रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध का नया चरण शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर काली पट्टी बांधकर ड्यूटी कर रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व Junior Doctors Association जूडा कर रही है जिसने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सोमवार से नॉन इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा।

    आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र प्रदेश की राजधानी Bhopal सहित अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज बन गए हैं। जूडा के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार के 7 जून 2021 के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से CPE के आधार पर स्टाइपेंड में बढ़ोतरी लागू होनी थी और साथ ही लंबित एरियर का भुगतान भी किया जाना था। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। डॉक्टरों का आरोप है कि बार बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद भुगतान और संशोधन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है।

    जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में देरी केवल आर्थिक समस्या नहीं है बल्कि इसका असर उनके मानसिक और पेशेवर मनोबल पर भी पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय तक ड्यूटी करने और मरीजों की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद उन्हें अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। इसी वजह से अब उन्होंने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति अपनाई है।

    जूडा के अनुसार विरोध की शुरुआत काली पट्टी बांधकर काम करने से की गई है ताकि मरीजों की सेवा भी जारी रहे और सरकार तक उनकी आवाज भी पहुंचे। इसके बाद रविवार को डॉक्टर जस्टिस मार्च निकालेंगे जिसमें बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टर शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होंगे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। इस मार्च का उद्देश्य शासन और प्रशासन को यह संदेश देना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और अब इस पर तुरंत निर्णय लिया जाना चाहिए।

    डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इसके बाद भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो सोमवार से नॉन इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। इसमें ओपीडी रूटीन चेकअप और सामान्य चिकित्सा सेवाएं शामिल होंगी। हालांकि जूडा ने भरोसा दिलाया है कि इमरजेंसी सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में भी जूनियर डॉक्टर इसी मुद्दे को लेकर विरोध जता चुके हैं लेकिन स्टाइपेंड संशोधन का मामला अब भी अटका हुआ है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।

  • भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल ।राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस और अन्य शुल्क वसूले जाने के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। पालक महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए घेराव किया और निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल फीस, बस शुल्क, किताबों और अन्य मदों में लगातार मनमानी वसूली कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान पालक महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा माफिया सक्रिय है और निजी स्कूल संचालकों के दबाव में प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि अभिभावक लंबे समय से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से स्कूलों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।

    प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने DEO कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की और शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। पालक महासंघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन अधिकारी ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय छोड़कर चले गए। इस घटना से प्रदर्शनकारियों में और अधिक आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसे अभिभावकों की समस्याओं के प्रति प्रशासन की उदासीनता बताया।

    अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल हर साल फीस में मनमानी बढ़ोतरी कर देते हैं, जबकि बस शुल्क और किताबों के नाम पर भी भारी रकम वसूली जाती है। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।

    पालक महासंघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए और फीस, बस चार्ज तथा किताबों की कीमतों के लिए एक पारदर्शी और तय ढांचा बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और दोषी स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग भी उठाई है।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव डालने वाले लोगों की जांच की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। पालक महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • सुख, शांति और समृद्धि के रंग बिखेरती होली, मुख्यमंत्री निवास में मयूर नृत्य और ब्रज गीतों का आनंद

    सुख, शांति और समृद्धि के रंग बिखेरती होली, मुख्यमंत्री निवास में मयूर नृत्य और ब्रज गीतों का आनंद

    भोपाल में बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास में होली मिलन समारोह आयोजित किया, जहां संतों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, कार्यकर्ताओं और मीडिया साथियों ने उत्साह और उमंग के साथ होली खेली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को इस पावन पर्व की बधाई और मंगलकामनाएं दीं और कहा कि यह उत्सव हर आंगन में सुख, शांति और समृद्धि के नए रंग बिखेरे। उन्होंने समाज में सद्भाव, सकारात्मकता और एकता के रंग हमेशा चटकते रहने की कामना की।

    मुख्यमंत्री ने सभी से आत्मीयता और सौहार्द के साथ पर्व मनाने का आग्रह किया। उन्होंने होली के इस अवसर पर मुख्यमंत्री निवास पहुंचे नागरिकों के साथ रंगों और गुलाल के आदान-प्रदान का आनंद लिया। समारोह में पधारे संतों से आशीर्वाद लिया और वरिष्ठ व गणमान्य नागरिकों का अभिवादन किया। गुलाल उड़ाकर पुष्प वर्षा के बीच सभी आगंतुकों का स्वागत करने के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेजबानी की गरिमा का परिचय दिया।

    सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह में चार चाँद लगा दिए। मंच पर प्रस्तुति दे रहे कलाकारों ने मयूर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी और ब्रज एवं बरसाने के पारंपरिक होली गीतों का सस्वर गायन किया, जिसमें “रंग बरसे”, “होली के दिन दिल खिल जाते हैं”, “होली खेलें रघुवीरा” और “आज ब्रज में होली रे रसिया” शामिल थे। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ सुर में सुर मिलाकर कलाकारों ने सभी का उत्साह दोगुना कर दिया।

    मुख्यमंत्री निवास में समारोह में शामिल होने वाले प्रमुख अतिथियों में राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, वरिष्ठ सांसद श्री विष्णु दत्त शर्मा, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, नगर निगम अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, श्री मनु श्रीवास्तव, श्री शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव और सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसंपर्क श्री मनीष सिंह थे। इसके अलावा खाटू श्याम मंदिर भोपाल के प्रमुख प्रचारक पूज्य अनिल आनंद महाराज सहित कई जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, पत्रकार और वरिष्ठ अधिकारी समारोह में मौजूद रहे और सभी ने मुख्यमंत्री को होली की शुभकामनाएं दीं।

    उड़ते रंग गुलाल और पुष्प वर्षा के बीच मुख्यमंत्री निवास में होली का वातावरण अत्यंत उल्लासपूर्ण और मनमोहक रहा। सभी ने हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर बधाई दी। मंच पर प्रस्तुति देने वाले कलाकारों के साथ मुख्यमंत्री ने भी गुलाल लगाया और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के ताल में अपने सुर मिलाए। समारोह में परंपरागत व्यंजन जैसे गुजिया, बालूशाही और ठंडाई भी उपस्थित लोगों को परोसे गए, जिससे पर्व का आनंद और बढ़ गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि यह प्रेम, भाईचारे और समाज में सद्भाव बढ़ाने का प्रतीक है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी त्यौहार को हर्षोल्लास और शालीनता के साथ मनाएं और समाज में भाईचारे और एकता का संदेश फैलाएं।

  • श्रद्धा की भूल या घातक लापरवाही? भोपाल में 12वीं की छात्रा ने भभूत समझकर खाई चूहामार दवा, बोर्ड परीक्षा से पहले बुझ गया घर का चिराग

    श्रद्धा की भूल या घातक लापरवाही? भोपाल में 12वीं की छात्रा ने भभूत समझकर खाई चूहामार दवा, बोर्ड परीक्षा से पहले बुझ गया घर का चिराग

    ईटखेड़ी /राजधानी भोपाल के ईटखेड़ी इलाके से एक ऐसी खबर आई है जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि सुरक्षा और सावधानी को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ लांबाखेड़ा निवासी 17 वर्षीय वैष्णवी सेन, जो कि 12वीं कक्षा की छात्रा थी, एक भयावह दुर्घटना का शिकार हो गई। घर के मंदिर में जिसे वह श्रद्धावश ‘भभूत’ (पवित्र राख) समझकर खा रही थी, वह वास्तव में चूहों को मारने वाला घातक जहर था। नियति का क्रूर खेल देखिए कि जिस मंदिर में परिवार सुख-शांति की प्रार्थना करता था, वहीं अनजाने में रखी गई एक दवा ने जवान बेटी की जान ले ली।

    घटना की शुरुआत 26 जनवरी को हुई थी। जानकारी के अनुसार, वैष्णवी की मां घर में चूहों के उत्पात से परेशान थीं और उन्होंने चूहों को भगाने के उद्देश्य से पाउडरनुमा चूहामार दवा मंदिर के पास रख दी थी। इसी बीच वैष्णवी पूजा करने पहुँची और उसने अनजाने में उस पाउडर को मंदिर की भभूत समझ लिया। भक्ति और विश्वास के वशीभूत होकर उसने उस जहरीले पाउडर का सेवन कर लिया। उस समय उसे जरा भी आभास नहीं था कि यह कदम उसके जीवन का आखिरी कदम साबित होगा।

    दवा खाने के कुछ देर बाद वैष्णवी सामान्य रूप से अपनी कोचिंग चली गई, लेकिन वहां उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। घर लौटने पर जब उसे लगातार उल्टियां होने लगीं, तब परिजनों ने उससे पूछताछ की। वैष्णवी ने मासूमियत से जवाब दिया कि उसने मंदिर में रखी भभूत खाई है। यह सुनते ही मां के पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उन्हें पता था कि वह भभूत नहीं बल्कि जहर था। आनन-फानन में उसे भानपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया।

    परिजनों को लगा कि खतरा टल गया है, लेकिन जहर अपना असर दिखा चुका था। कुछ दिनों बाद वैष्णवी की हालत दोबारा गंभीर होने लगी। उसे तुरंत हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद सोमवार सुबह उसने अंतिम सांस ली। वैष्णवी के पिता मनोज सेन और पूरा परिवार इस समय गहरे सदमे में है। सबसे दुखद पहलू यह है कि वैष्णवी की 10 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली थीं। वह भविष्य के सपने बुन रही थी और अपनी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी थी, लेकिन एक छोटी सी गलतफहमी ने सब कुछ खत्म कर दिया।

    पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। एएसआई एस.के. बाजपेयी के अनुसार, शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि घर में कीटनाशक या जहरीले पदार्थों को रखते समय अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए, विशेषकर उन जगहों पर जहाँ भ्रम की स्थिति पैदा हो सके। वैष्णवी की मौत ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है।

  • शबरी जयंती पर CM डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं, मां शबरी को भक्ति की मिसाल बताया

    शबरी जयंती पर CM डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं, मां शबरी को भक्ति की मिसाल बताया


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मां शबरी जयंती के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की परम भक्त मां शबरी ने आस्था, श्रद्धा और भक्ति को जीवन का सर्वोच्च मार्ग बताया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि मां शबरी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है और उनके आदर्शों को आत्मसात करना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मां शबरी ने अपनी साधना और भक्ति के माध्यम से यह सिखाया कि सच्ची भक्ति में जाति, वर्ग या सामाजिक स्थिति का कोई महत्व नहीं होता। उन्होंने कहा कि मां शबरी का जीवन संदेश है कि श्रद्धा और समर्पण से हर मुश्किल आसान हो जाती है। मुख्यमंत्री ने मां से प्रार्थना की कि उनकी कृपा सभी पर बनी रहे और देश-समाज में शांति, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शबरी जयंती का पर्व हमें प्रेम, धैर्य और सेवा की भावना से प्रेरित करता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस पावन दिन पर भगवान श्रीराम और मां शबरी की भक्ति में लीन होकर अपने जीवन को सकारात्मक बनाएं और समाज में भाईचारे का संदेश फैलाएं।