Tag: Bhopal Protest News

  • 42°C गर्मी में सड़क पर उतरे PESA मोबिलाइजर, सेवा समाप्ति आदेश रद्द करने की मांग

    42°C गर्मी में सड़क पर उतरे PESA मोबिलाइजर, सेवा समाप्ति आदेश रद्द करने की मांग


    मध्य प्रदेश । खरगोन जिले में भीषण गर्मी के बीच पेसा मोबिलाइजर कर्मचारियों का गुस्सा सड़क पर उतर आया। 42 डिग्री सेल्सियस तापमान में लगभग 200 कर्मचारियों ने सेवा समाप्ति आदेश के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले निकाली गई यह आक्रोश रैली दोपहर 2 बजे शुरू हुई। प्रदर्शनकारी कर्मचारी नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश को तुरंत रद्द कर उनकी बहाली की मांग की गई।

    कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पेसा कानून और विभिन्न सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसके बावजूद सरकार ने अचानक उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। उनका कहना है कि वे पिछले पांच वर्षों से मात्र 4000 रुपये मासिक वेतन पर कार्य कर रहे थे और अब उन्हें बेरोजगार कर दिया गया है।

    प्रदर्शन के दौरान भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने भी सरकार पर नाराजगी जताई। संगठन के नेताओं ने कहा कि पेसा मोबिलाइजरों ने ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं को लागू करने में अहम योगदान दिया है, लेकिन उनके साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया है।

    कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर सेवा समाप्ति आदेश वापस लेकर बहाली नहीं की गई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद वे भोपाल कूच करेंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।

    प्रदर्शन में नरेंद्र पटेल, अपर्णा बैरागी और पुनीत तारे सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल रहे। भीषण गर्मी के बावजूद कर्मचारियों का आक्रोश कम नहीं हुआ और वे लगातार सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

  • तिलक विवाद गरमाया: Bhopal में Lenskart स्टाफ को तिलक लगाकर जताया विरोध, बोले-‘अपमान नहीं सहेंगे’

    तिलक विवाद गरमाया: Bhopal में Lenskart स्टाफ को तिलक लगाकर जताया विरोध, बोले-‘अपमान नहीं सहेंगे’


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की राजधानी Bhopal के न्यू मार्केट रोशनपुरा इलाके में Lenskart के शोरूम के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ। हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने कथित ड्रेस कोड विवाद को लेकर शोरूम का घेराव किया और कर्मचारियों को तिलक लगाकर तथा मंत्रोच्चार के साथ कलावा बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।

     “सनातन प्रतीकों का अपमान नहीं सहेंगे”
    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि देश में तिलक, कलावा और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी कंपनी ने इन पर रोक लगाने की कोशिश की, तो उसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि संगठन Lenskart के बहिष्कार की अपील कर रहा है और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

     कर्मचारियों का दावा- “कोई रोक नहीं”
    प्रदर्शन के बीच शोरूम कर्मचारियों ने इन आरोपों को खारिज किया। एक कर्मचारी ने बताया कि उन्हें कभी भी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया। उनका कहना है कि नवरात्रि जैसे अवसरों पर वे खुद इन धार्मिक प्रतीकों के साथ काम पर आते रहे हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर चल रही बातें उनकी व्यक्तिगत अनुभव से मेल नहीं खातीं और उन्हें कंपनी की ओर से कोई दबाव महसूस नहीं हुआ।

    सोशल मीडिया से शुरू हुआ पूरा विवाद
    दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से हुई। इसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोका गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई लोगों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया।

     ‘ग्रूमिंग गाइड’ पर भी उठे सवाल
    सोशल मीडिया पर एक कथित ‘ग्रूमिंग गाइड’ भी वायरल हुई, जिसमें महिला कर्मचारियों के लिए बिंदी और क्लचर पर पाबंदी की बात कही गई थी। साथ ही कलावा या रिस्ट बैंड पर भी रोक का दावा किया गया।
    हालांकि, इन दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इससे विवाद और गहरा गया।

    कंपनी की सफाई
    विवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि कंपनी सभी धर्मों और उनकी मान्यताओं का सम्मान करती है। कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है।
    इसके बावजूद प्रदर्शन कर रहे संगठन कंपनी के जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने विरोध जारी रखने की बात कही है।

  • रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का अर्धनग्न प्रदर्शन जारी

    रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का अर्धनग्न प्रदर्शन जारी


    भोपाल /मध्यप्रदेश में चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है राजधानी भोपाल में दूसरे दिन भी चयनित अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर डटे रहे और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए मुंडन कराकर विरोध दर्ज कराया भावी शिक्षकों का कहना है कि वे चयनित होने के बावजूद नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं जबकि प्रदेश में हजारों शिक्षक पद आज भी खाली पड़े हैं

    सोमवार को अभ्यर्थियों ने पैदल मार्च निकालते हुए लोक शिक्षण संचालनालय का घेराव किया था इसके बाद मंगलवार को आंदोलन और उग्र रूप में सामने आया जब भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने मुंडन कराकर अपना आक्रोश जताया कई अभ्यर्थी अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शन करते नजर आए उनका कहना है कि यह आंदोलन सम्मान और रोजगार के लिए हैप्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रदेश में हजारों शिक्षक पद रिक्त होने के बावजूद सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में सीटों की संख्या कम कर दी गई है उनका कहना है कि शिक्षक भर्ती परीक्षाएं ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं वर्तमान में केवल 13 हजार पदों पर भर्ती निकाली गई है जबकि आवश्यकता कहीं अधिक है

    अभ्यर्थियों के अनुसार माध्यमिक शिक्षकों के करीब 10 हजार पद रिक्त हैं जबकि प्राथमिक शिक्षकों के लगभग 3 हजार पद खाली हैं इसके बावजूद सरकार ने केवल सीमित संख्या में ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की है चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं फिर भी नियुक्ति नहीं मिलने से उनका भविष्य अंधकार में है

    प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि शिक्षक भर्ती की संख्या बढ़ाकर कम से कम 25 हजार पदों पर नियुक्ति की जाए इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया का दूसरा चरण भी जल्द शुरू किया जाए ताकि रिक्त पदों को भरा जा सके उनका कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है

    भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की है

    राजधानी भोपाल में चल रहे इस प्रदर्शन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला हैचयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का यह आंदोलन अब प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है मुंडन और अर्धनग्न प्रदर्शन के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं जब तक रिक्त पदों पर भर्ती नहीं होती और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा