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  • आधे मानसून में ही पिछड़ी बारिश, प्रदेश के 49 जिले प्रभावित; तीन दिन का अलर्ट बढ़ाएगा राहत की उम्मीद

    आधे मानसून में ही पिछड़ी बारिश, प्रदेश के 49 जिले प्रभावित; तीन दिन का अलर्ट बढ़ाएगा राहत की उम्मीद


    भोपाल। मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके कारण कई जिलों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक केवल 16.3 इंच वर्षा हुई है, जबकि इस समय तक करीब 20 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी लगभग 3.7 इंच पानी की कमी दर्ज की गई है। इसका असर खेती, जलाशयों और भूजल स्तर पर भी दिखाई देने लगा है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से 49 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। केवल छह जिलों में ही औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। राजधानी भोपाल में सामान्य से 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि इंदौर में 2 प्रतिशत, उज्जैन में 14 प्रतिशत और जबलपुर में 29 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। राहत की बात केवल ग्वालियर के लिए है, जहां अब तक सामान्य से 7 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है।

    भोपाल, जबलपुर, सागर, शहडोल, रीवा और नर्मदापुरम संभाग के सभी जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है। दूसरी ओर इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के कुछ जिलों में अपेक्षाकृत बेहतर बारिश हुई है। इससे साफ है कि पूरे प्रदेश में मानसून का वितरण संतुलित नहीं रहा है।

    हालांकि पिछले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिली। सीधी जिले में सबसे अधिक करीब 3 इंच वर्षा दर्ज की गई। ग्वालियर में 2.3 इंच, दतिया में 2 इंच, रीवा में 1.8 इंच, सतना में 1.2 इंच और शिवपुरी में लगभग 1 इंच बारिश हुई। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, धार, नर्मदापुरम, पन्ना, श्योपुर, शाजापुर, मंडला, टीकमगढ़, बालाघाट और छतरपुर सहित 20 से अधिक जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।

    मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए राहत भरी संभावना जताई है। विभाग के अनुसार प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और दमोह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रायसेन, सीहोर, विदिशा, धार, खरगोन, झाबुआ, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया, सागर और कई अन्य जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से तेज बारिश होने की संभावना है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो चुका है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। यदि यह मौसम प्रणाली मजबूत बनी रही तो अगले कुछ दिनों में लगातार अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे अब तक की बारिश की कमी काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि अगस्त का महीना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यदि इस दौरान अच्छी वर्षा होती है तो खरीफ फसलों को बड़ा फायदा मिलेगा।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत

    मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। जुलाई के तीसरे सप्ताह में हुई तेज बारिश ने प्रदेश के कई जिलों की तस्वीर बदल दी है और सूखे जैसे हालात से काफी राहत मिली है। इस दौरान प्रदेश में औसतन 3.3 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई जिससे नदियों झरनों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। हालांकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है और कई जिलों को अच्छी वर्षा का इंतजार है।

    मौसम विभाग के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में लगभग 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि सामान्य औसत 14.6 इंच माना जाता है। यानी मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस बार मानसून निर्धारित समय से नौ दिन की देरी से 24 जून को प्रदेश में पहुंचा था। देरी के कारण जून महीने में बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रहा लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति तेजी से सुधरी और बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ने से बारिश लगभग थम गई लेकिन तीसरे सप्ताह में जोरदार बरसात ने एक बार फिर राहत दी।

    प्रदेश के 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ हरदा बुरहानपुर मंदसौर नीमच आगर मालवा दमोह सिवनी निवाड़ी और भिंड प्रमुख हैं। सबसे अधिक बारिश देवास जिले में हुई है जहां करीब 19.3 इंच वर्षा दर्ज की गई है जो सामान्य से लगभग 54 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर आलीराजपुर प्रदेश का सबसे सूखा जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल 3.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 41 जिले अब भी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं। इनमें जबलपुर रीवा सतना सागर कटनी मंडला छिंदवाड़ा बालाघाट शहडोल उमरिया ग्वालियर मुरैना दतिया धार उज्जैन रतलाम विदिशा रायसेन नर्मदापुरम खरगोन खंडवा और अन्य जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश की अभी भी आवश्यकता बनी हुई है ताकि खेती और जल भंडारण की स्थिति बेहतर हो सके।

    बारिश की कमी का असर प्रदेश के प्रमुख बांधों और नदियों पर भी देखने को मिला है। दूसरे सप्ताह में बारिश कमजोर रहने के कारण कई नदियों का जलस्तर घट गया था लेकिन पिछले सप्ताह हुई वर्षा से फिर जलस्तर में सुधार आने लगा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों को पूरी क्षमता तक भरने के लिए लगातार और व्यापक बारिश की जरूरत है।

    राजधानी भोपाल में इस सीजन में अब तक करीब 17.5 इंच बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से बेहतर स्थिति मानी जा रही है। इंदौर में लगभग 15 इंच वर्षा हो चुकी है जबकि उज्जैन में करीब 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबलपुर में 13.6 इंच वर्षा दर्ज होने के बावजूद यह सामान्य कोटे से कम है। ग्वालियर चंबल संभाग में भी पिछले दिनों बारिश की रफ्तार बढ़ी है और मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यहां भी अच्छी वर्षा होगी।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में निचले स्तर पर नमी बनी हुई है और मानसूनी सिस्टम सक्रिय है। इसी कारण जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में तेज और व्यापक बारिश होने की संभावना है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश का घाटा काफी हद तक पूरा हो सकता है और किसानों के साथ साथ जल संसाधनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

  • नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर लोग भोपाल की जर्जर मल्टियों में बारिश बन रही आफत कचरा सीलन और गिरती इमारतों ने बढ़ाई चिंता

    नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर लोग भोपाल की जर्जर मल्टियों में बारिश बन रही आफत कचरा सीलन और गिरती इमारतों ने बढ़ाई चिंता


    भोपाल । देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले भोपाल की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है। राजधानी के नेहरू नगर स्थित शबरी नगर मल्टी में रहने वाले हजारों लोगों की जिंदगी हर दिन बदबू गंदगी जर्जर इमारतों और हादसे के डर के बीच गुजर रही है। यहां रहने वाले परिवारों का कहना है कि यदि मजबूरी न होती तो कोई भी इंसान इस जगह रहने के बारे में सोच भी नहीं सकता। बारिश का मौसम शुरू होते ही उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं और हर तेज बारिश उनके लिए नई आफत लेकर आती है।

    मल्टी में रहने वाली महिलाओं का कहना है कि सुबह घर का दरवाजा खोलते ही कचरे की दुर्गंध उनका स्वागत करती है जबकि रातें इस चिंता में गुजरती हैं कि कहीं कमजोर हो चुकी दीवारें या छत भरभराकर न गिर जाएं। कई घरों में बारिश के दौरान छत से लगातार पानी टपकता है जिससे बेडरूम रसोई और पूरे घर में सीलन फैल जाती है। लोगों का कहना है कि कई बार सीवेज का गंदा पानी भी घरों तक पहुंच जाता है जिससे बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।

    शबरी नगर में करीब चालीस से अधिक बहुमंजिला इमारतें हैं जिनमें एक हजार से ज्यादा परिवार रहते हैं। इनमें कुछ इमारतें करीब बीस वर्ष पुरानी हैं जबकि कई पंद्रह वर्ष पहले बनाई गई थीं। समय के साथ इन भवनों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि जगह जगह दरारें दिखाई देती हैं। कई दीवारों में पेड़ उग आए हैं। छतों पर घास और झाड़ियां फैल चुकी हैं। कई स्थानों पर प्लास्टर झड़ चुका है और लोहे की सरिया बाहर नजर आने लगी है। लोगों का कहना है कि हल्का सा झटका भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम नियमित रूप से टैक्स और अन्य शुल्क तो वसूलता है लेकिन सफाई और रखरखाव की ओर कोई ध्यान नहीं देता। नालियां जाम रहती हैं सड़कों पर पानी भर जाता है और जगह जगह कचरे के ढेर लगे रहते हैं। खुले बिजली बोर्ड बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं जबकि टूटे पाइप और खराब सीवेज व्यवस्था ने हालात और खराब कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वादे करने जरूर आते हैं लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्याएं फिर अनदेखी कर दी जाती हैं।

    यह समस्या केवल शबरी नगर तक सीमित नहीं है। अर्जुन नगर श्याम नगर राहुल नगर और बीडीए के अंजली कॉम्प्लेक्स सहित शहर की कई सरकारी मल्टियों में रहने वाले लोग भी इसी तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। जर्जर भवनों खुले नालों गंदगी और जलभराव के कारण हजारों परिवार असुरक्षित माहौल में रहने को मजबूर हैं।

    इधर भोपाल की महापौर मालती राय का कहना है कि नगर निगम जर्जर इमारतों की पहचान कर रहा है और जहां भवन रहने योग्य नहीं हैं वहां लोगों को खाली करने की सूचना दी जा रही है। साथ ही सीवेज सफाई जल निकासी और गंदगी की समस्या दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि रहवासियों का कहना है कि उन्हें अब आश्वासनों से ज्यादा जमीन पर दिखाई देने वाले काम का इंतजार है क्योंकि उनकी सबसे बड़ी जरूरत सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन है।

  • मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल

    मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ले ली। राजधानी भोपाल, सीहोर और पांढुर्णा समेत कई जिलों में सुबह से बादल छाए रहे और कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब चार इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    बारिश के बीच कई जिलों से हादसों की खबरें भी सामने आई हैं। खरगोन जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में मजदूर राधेश्याम और गृहिणी केनू शामिल हैं। केनू अपने पीछे तीन साल के बेटे को छोड़ गई हैं। उधर बैतूल जिले के चिचोली क्षेत्र में चंपा नदी उफान पर होने के कारण सोमवार रात बड़ा हादसा हो गया। सिप्लाई गांव के राजेश बिहारे और दद्दू धुर्वे बाइक सहित नदी के रपटे से बह गए थे। रातभर चले तलाश अभियान के बाद मंगलवार सुबह दोनों के शव रपटे से करीब एक किलोमीटर दूर झाड़ियों में मिले।

    पांढुर्णा जिले में सोमवार रात से लगातार रुक-रुककर बारिश हो रही है। मंगलवार सुबह मुंगणापार-मोहगांव मार्ग पर एक बड़ा पेड़ बिजली के तारों पर गिर गया जिससे सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ और आसपास के आठ गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। प्रशासन ने पेड़ हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने का काम शुरू कर दिया है।

    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, आगर मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, हरदा, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत कुल 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। वहीं ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ और अलीराजपुर में हल्की बारिश की संभावना है।

    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसून की एंट्री 24 जून को हुई थी और शुरुआती दौर में 15 जिलों तक इसकी आधिकारिक पहुंच दर्ज की गई थी। हालांकि इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई और वह एक ही क्षेत्र में ठहर गया। इसी कारण प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी और उमस का असर भी बना रहा। फिलहाल मानसून के तेजी से आगे बढ़ने के संकेत नहीं मिले हैं लेकिन अगले कुछ दिनों तक अधिकांश जिलों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    एक जून से अब तक प्रदेश में औसतन 124.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी जबकि अभी तक केवल 75.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब 39 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 68 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी 11 प्रतिशत है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान नदी-नालों से दूर रहने, आकाशीय बिजली के समय खुले स्थानों में नहीं जाने और प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की है।

  • एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी

    एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून पूर्व गतिविधियां तेज हो गई हैं और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी है। सोमवार को राजधानी भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर सहित 28 जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं कई इलाकों में तेज हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित भी हुआ।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे और बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। सीहोर में दोपहर बाद अचानक मौसम बदला और तेज आंधी के साथ बारिश हुई। यहां हवा की अधिकतम रफ्तार 61 किलोमीटर प्रतिघंटा रिकॉर्ड की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। मौसम विभाग ने भोपाल और ग्वालियर संभाग के जिलों में अगले दो दिनों तक बारिश की संभावना जताई है। वहीं आगर-मालवा और राजगढ़ जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    बीते 24 घंटों के दौरान भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, नीमच, मंदसौर, खरगोन, देवास, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी, जबलपुर, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और आगर-मालवा सहित कुल 28 जिलों में बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर बादलों की गरज और तेज हवाओं के साथ मौसम ने अचानक करवट ली।

    तेज हवाओं की बात करें तो सीहोर के अलावा सागर और गुना में 59 किमी प्रतिघंटा, भोपाल में 57 किमी प्रतिघंटा, जबलपुर में 50 किमी प्रतिघंटा तथा नर्मदापुरम में 48 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। इंदौर और अशोकनगर में 44 किमी, ग्वालियर में 43 किमी, राजगढ़ में 39 किमी तथा आगर-मालवा, रीवा, खंडवा और बड़वानी में 37 किमी प्रतिघंटा की गति से तेज आंधी दर्ज की गई।

    रविवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम खराब रहा। भोपाल में दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही, जबकि सीहोर, इंदौर, रायसेन और खरगोन में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। रायसेन में तेज हवाओं के कारण कुछ मकानों के छप्पर उड़ गए, जबकि कई जिलों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। खरगोन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को निंदाई और बुआई के कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा।

    बारिश और बादलों के कारण तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। भोपाल में अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री, इंदौर में 36.3 डिग्री, ग्वालियर में 39.2 डिग्री, उज्जैन में 36.5 डिग्री और जबलपुर में 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    प्रदेश में केवल खजुराहो, दतिया, नौगांव और मंडला ऐसे स्थान रहे जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। वहीं शिवपुरी सबसे ठंडा शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पचमढ़ी में 35 डिग्री, सिवनी में 36 डिग्री, राजगढ़ में 36.4 डिग्री तथा नर्मदापुरम और श्योपुर में 36.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक आंधी-बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है तथा मानसून की प्रगति को भी बल मिल सकता है।

  • पहली बारिश में डूबा भोपाल! सड़कों पर तालाब, फ्लाइओवर पर जाम और खुले नालों ने बढ़ाया खतरा

    पहली बारिश में डूबा भोपाल! सड़कों पर तालाब, फ्लाइओवर पर जाम और खुले नालों ने बढ़ाया खतरा


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मानसून के आगमन से पहले हुई बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी है। नगर निगम और प्रशासन की ओर से नाले-नालियों की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष इंतजाम के दावे किए गए थे, लेकिन पहली ही तेज बारिश में ये दावे धरातल पर कमजोर नजर आए। शहर के कई हिस्सों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जबकि जलभराव के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई।

    बारिश का सबसे ज्यादा असर शहर के व्यस्त मार्गों और प्रमुख चौराहों पर देखने को मिला। बोर्ड ऑफिस से ज्योति टॉकीज तक का मार्ग महज कुछ मिनटों की बारिश में पानी से भर गया। सड़क पर इतना पानी जमा हो गया कि वाहन चालकों को रास्ता पहचानने में भी परेशानी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान इस इलाके में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है।

    रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से एम्स की ओर जाने वाले फ्लाइओवर पर भी भारी जलभराव देखने को मिला। सड़क पर पानी भरने के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। इस दौरान एक एम्बुलेंस भी वाहनों की कतार में फंस गई, जिससे आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ा। कई स्थानों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लगा।

    शहर के पॉश इलाकों में शामिल रानी कमलापति स्टेशन रोड, एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और सात नंबर क्षेत्र भी जलभराव से अछूते नहीं रहे। इन क्षेत्रों में सड़कों पर घंटों पानी जमा रहा। कई जगहों पर जल निकासी की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई, जिसके कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    भोपाल में अधूरी सड़क परियोजनाएं भी बारिश के दौरान बड़ी समस्या बनकर सामने आई हैं। कई इलाकों में सीवेज पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए महीनों पहले सड़कें खोदी गई थीं, लेकिन अब तक उनका पुनर्निर्माण नहीं किया गया। रचना नगर समेत कई कॉलोनियों में सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बारिश के कारण ये गड्ढे पानी से भर गए, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ गया है।

    वहीं खुले नाले भी शहरवासियों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बागसेवनियां से कटारा हिल्स मार्ग और दस नंबर मार्केट सहित कई क्षेत्रों में नालों को अब तक ढंका नहीं गया है। बारिश के दौरान नाले और सड़क के बीच का अंतर मिट जाता है, जिससे लोगों के गिरने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार बच्चे और राहगीर नालों में गिर चुके हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार पहले भी एक बच्चे की जान नाले में गिरने से जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

    नगर निगम ने मानसून से पहले विशेष सफाई अभियान चलाने और जलभराव की समस्या को नियंत्रित करने का दावा किया था। हालांकि पहली ही बारिश ने इन तैयारियों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि मानसून की शुरुआत में ही यह स्थिति है, तो आगामी दिनों में भारी बारिश के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं।

    अब लोगों की नजर प्रशासन और नगर निगम पर है कि वे मानसून के दौरान जलभराव, खुले नालों और अधूरी सड़कों जैसी समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से कर पाते हैं। राजधानी के नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार बारिश उनके लिए राहत लेकर आए, परेशानी नहीं।

  • MP में 4 दिन आंधी-बारिश का अलर्ट: भोपाल और जबलपुर में सुबह हल्की बारिश, रीवा समेत 5 जिलों में भी आसार

    MP में 4 दिन आंधी-बारिश का अलर्ट: भोपाल और जबलपुर में सुबह हल्की बारिश, रीवा समेत 5 जिलों में भी आसार


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है और अगले चार दिन प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। शुक्रवार को साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन की एक्टिविटी के चलते प्रदेश के 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। शनिवार को बादल छाए हुए हैं और नए मौसम सिस्टम की वजह से 23 और 24 फरवरी को मौसम फिर बदलने की संभावना है। ये सिस्टम प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी जिलों में अधिक असर दिखा सकते हैं।

    पिछले तीन दिन से प्रदेश में आंधी-बारिश का मौसम बना हुआ है। कुछ जिलों में ओलों की बूंदें भी गिरी हैं। शुक्रवार को भोपाल रतलाम मंदसौर शाजापुर धार इंदौर रायसेन उज्जैन सागर छतरपुर समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश दर्ज की गई।

    मौसम के इस तेवर से कुछ जिलों में तेज आंधी और झोंकों के चलते फसलों को नुकसान पहुंचा है। खासकर रतलाम शाजापुर और उज्जैन में गेहूं की फसलें आड़ी हो गई हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आगामी तीन दिनों में प्रदेश के लगभग 25 जिलों में आंधी-बारिश के कारण फसलों को और नुकसान हो सकता है।

    किसानों की फसलों पर असर के चलते सरकार ने भी सर्वे अभियान शुरू कर दिया है। राजस्व अमला प्रभावित क्षेत्रों में जाकर फसल नुकसान का आंकलन कर रहा है और संभावित राहत कार्यों की तैयारी में जुट गया है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दो दिन ऐसा रहेगा:

    22 फरवरी: इस दिन किसी विशेष बारिश का अलर्ट नहीं है लेकिन बादल छाए रह सकते हैं।
    23 फरवरी: दक्षिणी हिस्सों में नए सिस्टम के प्रभाव से बारिश होने की संभावना है।
    24 फरवरी: दक्षिण-पूर्वी जिलों में तेज बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है।

    भोपाल और जबलपुर में सुबह हल्की बारिश दर्ज की गई है। रीवा सतना अनूपपुर शहडोल और उमरिया सहित पांच जिलों में भी मौसम के बिगड़ने के आसार हैं। विशेषज्ञ लोगों से सतर्क रहने और घर से अनावश्यक बाहर न निकलने की सलाह दे रहे हैं।

    सरकारी विभाग ने किसानों और ग्रामीणों से कहा है कि वे मौसम के हालात पर नजर रखें और फसलों और पशुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएं। तेज आंधी और बारिश के चलते सड़क मार्ग और बिजली नेटवर्क प्रभावित हो सकते हैं इसलिए लोग सतर्क रहें।

    मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले चार दिनों में आंधी-बारिश का दौर राज्य में कई जगह प्रभावित रहेगा। विशेषकर दक्षिण-पूर्वी जिलों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।