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  • भोपाल वालों के लिए मौसम का अपडेट: 18 अगस्त को बारिश की संभावना और सुहाने तापमान के संकेत

    भोपाल वालों के लिए मौसम का अपडेट: 18 अगस्त को बारिश की संभावना और सुहाने तापमान के संकेत


    नई दिल्ली । भोपाल में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ नजर आ रहा है। 18 अगस्त को राजधानी में बारिश के आसार बने हुए हैं और आसमान में बादलों की आवाजाही देखने को मिल सकती है। उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार मंगलवार को भोपाल में हल्की बारिश की संभावना है जबकि तापमान अपेक्षाकृत सामान्य रहने की उम्मीद है। सोमवार शाम तक भोपाल में बादल छाए हुए थे और मौसम में नमी बनी हुई थी।

    मौसम विभाग और उपलब्ध पूर्वानुमानों के संकेतों को देखें तो मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ी हैं। राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है और अगले कुछ दिनों में इसका प्रभाव अलग अलग क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। भोपाल भी उन इलाकों में शामिल है जहां हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में शहरवासियों को आने वाले दिनों में मौसम के बदलते मिजाज के लिए तैयार रहने की जरूरत है।

    18 अगस्त को भोपाल में सुबह से ही बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। बीच बीच में बारिश होने से मौसम सुहावना रह सकता है। बारिश के कारण तापमान में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। उपलब्ध पूर्वानुमान में मंगलवार को अधिकतम तापमान करीब 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

    भोपाल में लगातार बारिश के दौरान शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी सामने आ सकती है। सड़क पर निकलने वाले लोगों को मौसम की स्थिति देखकर यात्रा की योजना बनानी चाहिए। दोपहिया वाहन चालकों के लिए बारिश के दौरान विशेष सावधानी जरूरी होगी क्योंकि गीली सड़कों पर फिसलन बढ़ जाती है। तेज बारिश होने की स्थिति में खुले इलाकों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना भी बेहतर रहेगा।

    मानसून के दौरान भोपाल की झीलों और आसपास के इलाकों में भी मौसम का असर देखने को मिलता है। बारिश के बाद शहर का तापमान कम होने से लोगों को गर्मी से राहत मिलती है। हालांकि लगातार बारिश के कारण यातायात प्रभावित होने और कुछ इलाकों में पानी जमा होने की समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।

    18 अगस्त के बाद भी भोपाल में बारिश की संभावना बनी रहने के संकेत हैं। उपलब्ध साप्ताहिक पूर्वानुमान में 19 अगस्त को भी छिटपुट बारिश और 20 अगस्त को जोरदार बौछारों की संभावना दिखाई गई है। इसके बाद भी सप्ताह के बाकी दिनों में बारिश का दौर बने रहने का अनुमान है।

    कुल मिलाकर भोपाल में 18 अगस्त का मौसम राहत देने वाला रह सकता है। बादलों की मौजूदगी और हल्की बारिश से तापमान नियंत्रित रहने की संभावना है। हालांकि मानसून के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है इसलिए किसी भी यात्रा या जरूरी काम से पहले ताजा मौसम अपडेट देखना सबसे बेहतर रहेगा।

  • MP Weather Update: 60 घंटे की बारिश से बदली तस्वीर, नर्मदा-बेतवा उफान पर; डैम के गेट खुले, बड़े तालाब को भरने में बस कुछ फीट बाकी

    MP Weather Update: 60 घंटे की बारिश से बदली तस्वीर, नर्मदा-बेतवा उफान पर; डैम के गेट खुले, बड़े तालाब को भरने में बस कुछ फीट बाकी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में पिछले करीब 60 घंटे से लगातार बारिश का दौर जारी है। कई इलाकों में बारिश अब राहत के साथ आफत भी बनती दिखाई दे रही है। प्रदेश की नर्मदा काली सिंध और बेतवा समेत कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। कई जगह नदी नालों का जलस्तर बढ़ने से रास्ते प्रभावित हुए हैं तो कुछ इलाकों में पुल और सड़कें पानी में डूब गई हैं। दूसरी ओर लंबे समय से पानी की कमी और सूखे जैसे हालात से जूझ रहे बांधों में तेजी से पानी पहुंचने लगा है। आगर मालवा के कुंडालिया और उमरिया के जोहिला डैम से पानी छोड़ा जा रहा है। इससे जलस्रोतों में नई उम्मीद जगी है।

    मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक 498.3 मिलीमीटर यानी करीब 19.6 इंच बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। हालांकि यह सामान्य बारिश के आंकड़े 579.7 मिलीमीटर यानी करीब 22.8 इंच से अभी 3.2 इंच कम है। प्रदेश में अब तक करीब 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। इसके बावजूद पिछले दो दिनों से सक्रिय स्ट्रॉन्ग सिस्टम ने प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को जमकर भिगो दिया है।

    भोपाल में रुक रुककर हो रही बारिश से शहर का मौसम पूरी तरह बदल गया है। सुबह से बारिश और बादलों के कारण कई इलाकों में धुंध जैसा नजारा देखने को मिला। राजधानी की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब में भी लगातार पानी की आवक बनी हुई है। पिछले दो दिनों में बड़े तालाब का जलस्तर करीब तीन फीट बढ़ा है और यह 1663 फीट तक पहुंच गया है। इसकी कुल भराव क्षमता 1666.80 फीट बताई जा रही है। यानी तालाब को अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने में अब करीब चार फीट पानी की जरूरत रह गई है। बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो बड़े तालाब के जल्द लबालब होने की उम्मीद बढ़ गई है।

    भोपाल के कोलार केरवा और कलियासोत डैम में भी पानी का स्तर बढ़ा है। कोलार डैम का अधिकतम जलस्तर 1516.40 फीट है और मंगलवार दोपहर तक यहां 1496.65 फीट पानी दर्ज किया गया। केरवा डैम में जलस्तर 1652.52 फीट पहुंच चुका है जबकि इसकी क्षमता 1673 फीट है। दो दिनों में केरवा में करीब तीन फीट पानी बढ़ा है। वहीं कलियासोत डैम का जलस्तर 1650.09 फीट तक पहुंच गया है। इसकी कुल क्षमता 1659 फीट है। आने वाले समय में कैचमेंट एरिया में तेज बारिश होने पर इन बांधों में पानी की आवक और बढ़ सकती है।

    बारिश का असर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी साफ नजर आया। रायसेन के सेमरा स्थित सरकारी स्कूल में कमर तक पानी भर गया। सांची रोड और भोपाल रोड पर बेतवा नदी के छोटे पुल पानी में डूब गए। शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक बारिश का पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। इसी जिले में बारिश के पानी से भरे गड्ढे में स्कूल वैन फंस गई और बच्चों ने पत्थर डालकर उसे निकालने की कोशिश की।

    सीहोर में मूसलाधार बारिश के कारण एक मकान पानी से घिर गया और परिवार के फंसने की सूचना पर पुलिस तथा ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में मंदिर और दुकानों में पानी भर गया। वहीं इच्छावर में श्मशान घाट तक पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को शव को कंधे पर लेकर नदी पार करनी पड़ी।

    नर्मदा नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। कई स्थानों पर नदी उफान पर है और नर्मदा से जुड़े बांधों में पानी की आवक बढ़ी है। इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर डैम में भी जलस्तर बढ़ने की खबर है। आगर मालवा के कुंडालिया और उमरिया के जोहिला डैम से पानी छोड़ा जा रहा है। मऊगंज में सेलार नदी के बढ़े जलप्रवाह के कारण करीब 650 फीट की ऊंचाई से गिरती दूधिया जलधारा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    कुल मिलाकर दो दिन पहले तक सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे मध्य प्रदेश में बारिश ने तस्वीर काफी हद तक बदल दी है। नदियों और बांधों में बढ़ता पानी जहां किसानों और जलस्रोतों के लिए राहत की खबर है वहीं निचले इलाकों में जलभराव और नदी नालों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति यह तय करेगी कि प्रदेश में जल संकट की चिंता कितनी कम होती है और किन इलाकों में भारी बारिश नई चुनौती बनती है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: भोपाल में 7 इंच पानी से हाहाकार, विदिशा में 17 लोगों का रेस्क्यू; कई शहरों में रास्ते बंद

    मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: भोपाल में 7 इंच पानी से हाहाकार, विदिशा में 17 लोगों का रेस्क्यू; कई शहरों में रास्ते बंद


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव होने के बाद सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। राजधानी भोपाल समेत विदिशा सीहोर शाजापुर रायसेन राजगढ़ और कई अन्य जिलों में लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। विदिशा में बाढ़ के पानी में बच्चों समेत 17 लोग फंस गए जिन्हें पुलिस प्रशासन और होमगार्ड की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वहीं भोपाल में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 7 इंच बारिश दर्ज की गई जिसके बाद शहर के कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और घरों तक पानी पहुंच गया।

    भोपाल में बारिश का असर रेलवे स्टेशन से लेकर पुलिस थाने तक दिखाई दिया। भोपाल रेलवे स्टेशन के ट्रैक पर पानी भरने से रेल परिचालन प्रभावित होने की स्थिति बनी वहीं ईंटखेड़ी थाना परिसर में भी बारिश का पानी घुस गया। शहर की कई कॉलोनियों में जलभराव के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सेमरा इलाके में करीब 200 घरों के आसपास 5 से 6 फीट तक पानी भरने की सूचना है जिससे बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में ही फंसकर रह गए। अपोलो अस्पताल के आसपास की कॉलोनियों कंफर्ट ग्रीन कॉलोनी और पुलिस हाउसिंग कॉलोनी में भी पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। पेड़ गिरने के कारण वीआईपी रोड पर यातायात भी प्रभावित हुआ।

    बारिश का असर भोपाल के आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी देखने को मिला। भोपाल बैरसिया मार्ग पर ईंटखेड़ी पुल के आसपास पानी बढ़ने और कई नदियों नालों के उफान पर आने से आवागमन प्रभावित हुआ। बैरसिया और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव के कारण कई रास्तों पर आवाजाही रोकनी पड़ी। ब्यावरा में रेलवे अंडरपास में पानी भर जाने से करीब 25 गांवों का संपर्क टूट गया है। सीहोर में भी कई रास्तों पर पानी बहने लगा और श्यामपुर समेत कई इलाकों में मकानों के भीतर बारिश का पानी घुस गया। सेवनिया में मंदिर के डूबने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

    विदिशा में ग्राम बामनखेड़ा के लश्करपुर रोड पर बाढ़ का पानी भरने के बाद करीब 17 लोग फंस गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और होमगार्ड की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। लगातार बारिश के कारण जिले में नदी नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

    शाजापुर जिले के अकोदिया क्षेत्र में कालीसिंध नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण आसपास के निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी के आसपास नहीं जाने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। नलखेड़ा रोड की पड़ाव कॉलोनी में कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया। वहीं उकावल जाने वाले मार्ग के रेलवे अंडरब्रिज में पानी भरने से आवाजाही प्रभावित हुई।

    रतलाम में भी सुबह से हो रही बारिश के कारण नदी नालों और जलस्रोतों का जलस्तर बढ़ गया है। सैलाना के आडवानिया स्थित केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना तेज धार के साथ बहने लगा। सावन के दूसरे सोमवार के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ भी पहुंची। सीहोर में उफनते नाले के बीच एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने का मामला भी सामने आया। वहीं कई गांवों में रास्ते पानी में डूब गए हैं।

    पिछले 24 घंटे के आंकड़ों पर नजर डालें तो भोपाल में करीब 7 इंच बारिश हुई। नर्मदापुरम में 5 इंच रायसेन में 4.9 इंच राजगढ़ और शाजापुर में करीब 4.5 इंच तथा सीहोर में लगभग 4 इंच बारिश दर्ज की गई। मंडला में नर्मदा का जलस्तर कुछ कम हुआ है लेकिन छोटा पुल अब भी पानी में डूबा हुआ है। उमरिया के जोहिला डैम के दो गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

    लगातार बारिश से जहां किसानों को फसलों के लिए राहत मिली है वहीं जलभराव और बाढ़ ने कई इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। प्रशासन की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं और जहां भी लोग पानी में फंस रहे हैं वहां रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों से नदी नालों पुलों और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: भोपाल में 7 इंच पानी से हाहाकार, विदिशा में 17 लोगों का रेस्क्यू; कई शहरों में रास्ते बंद

    मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: भोपाल में 7 इंच पानी से हाहाकार, विदिशा में 17 लोगों का रेस्क्यू; कई शहरों में रास्ते बंद


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव होने के बाद सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। राजधानी भोपाल समेत विदिशा सीहोर शाजापुर रायसेन राजगढ़ और कई अन्य जिलों में लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। विदिशा में बाढ़ के पानी में बच्चों समेत 17 लोग फंस गए जिन्हें पुलिस प्रशासन और होमगार्ड की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वहीं भोपाल में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 7 इंच बारिश दर्ज की गई जिसके बाद शहर के कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और घरों तक पानी पहुंच गया।

    भोपाल में बारिश का असर रेलवे स्टेशन से लेकर पुलिस थाने तक दिखाई दिया। भोपाल रेलवे स्टेशन के ट्रैक पर पानी भरने से रेल परिचालन प्रभावित होने की स्थिति बनी वहीं ईंटखेड़ी थाना परिसर में भी बारिश का पानी घुस गया। शहर की कई कॉलोनियों में जलभराव के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सेमरा इलाके में करीब 200 घरों के आसपास 5 से 6 फीट तक पानी भरने की सूचना है जिससे बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में ही फंसकर रह गए। अपोलो अस्पताल के आसपास की कॉलोनियों कंफर्ट ग्रीन कॉलोनी और पुलिस हाउसिंग कॉलोनी में भी पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। पेड़ गिरने के कारण वीआईपी रोड पर यातायात भी प्रभावित हुआ।

    बारिश का असर भोपाल के आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी देखने को मिला। भोपाल बैरसिया मार्ग पर ईंटखेड़ी पुल के आसपास पानी बढ़ने और कई नदियों नालों के उफान पर आने से आवागमन प्रभावित हुआ। बैरसिया और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव के कारण कई रास्तों पर आवाजाही रोकनी पड़ी। ब्यावरा में रेलवे अंडरपास में पानी भर जाने से करीब 25 गांवों का संपर्क टूट गया है। सीहोर में भी कई रास्तों पर पानी बहने लगा और श्यामपुर समेत कई इलाकों में मकानों के भीतर बारिश का पानी घुस गया। सेवनिया में मंदिर के डूबने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

    विदिशा में ग्राम बामनखेड़ा के लश्करपुर रोड पर बाढ़ का पानी भरने के बाद करीब 17 लोग फंस गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और होमगार्ड की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। लगातार बारिश के कारण जिले में नदी नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

    शाजापुर जिले के अकोदिया क्षेत्र में कालीसिंध नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण आसपास के निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी के आसपास नहीं जाने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। नलखेड़ा रोड की पड़ाव कॉलोनी में कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया। वहीं उकावल जाने वाले मार्ग के रेलवे अंडरब्रिज में पानी भरने से आवाजाही प्रभावित हुई।

    रतलाम में भी सुबह से हो रही बारिश के कारण नदी नालों और जलस्रोतों का जलस्तर बढ़ गया है। सैलाना के आडवानिया स्थित केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना तेज धार के साथ बहने लगा। सावन के दूसरे सोमवार के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ भी पहुंची। सीहोर में उफनते नाले के बीच एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने का मामला भी सामने आया। वहीं कई गांवों में रास्ते पानी में डूब गए हैं।

    पिछले 24 घंटे के आंकड़ों पर नजर डालें तो भोपाल में करीब 7 इंच बारिश हुई। नर्मदापुरम में 5 इंच रायसेन में 4.9 इंच राजगढ़ और शाजापुर में करीब 4.5 इंच तथा सीहोर में लगभग 4 इंच बारिश दर्ज की गई। मंडला में नर्मदा का जलस्तर कुछ कम हुआ है लेकिन छोटा पुल अब भी पानी में डूबा हुआ है। उमरिया के जोहिला डैम के दो गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

    लगातार बारिश से जहां किसानों को फसलों के लिए राहत मिली है वहीं जलभराव और बाढ़ ने कई इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। प्रशासन की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं और जहां भी लोग पानी में फंस रहे हैं वहां रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों से नदी नालों पुलों और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।

  • भोपाल में अगले कई दिन बारिश के आसार मौसम विभाग के पूर्वानुमान से बढ़ी राहत लेकिन सतर्क रहें लोग

    भोपाल में अगले कई दिन बारिश के आसार मौसम विभाग के पूर्वानुमान से बढ़ी राहत लेकिन सतर्क रहें लोग


    भोपाल । भोपाल में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम एक बार फिर करवट लेता नजर आ रहा है। रविवार को शहर में बादल छाए रहने के बाद सोमवार से बारिश का दौर बढ़ने के आसार हैं। मौसम के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 10 अगस्त को भोपाल में रुक रुककर बारिश हो सकती है। इसके बाद मंगलवार को भी बारिश की संभावना बनी रहेगी जबकि बुधवार को हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। यानी राजधानी में आने वाले कुछ दिनों तक मौसम पूरी तरह साफ रहने के बजाय बादलों और बारिश के बीच बदलता नजर आ सकता है।

    बारिश के कारण भोपाल के तापमान में भी बहुत ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है। दिन का तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है जबकि रात में तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस तक रहने के आसार हैं। ऐसे मौसम में सुबह और शाम के समय वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा और सुहाना महसूस हो सकता है। हालांकि लगातार बादल और बारिश के कारण कई इलाकों में उमस की स्थिति भी बनी रह सकती है।

    सोमवार को बारिश का दौर रहने के कारण शहर में लोगों को आवाजाही के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को गीली सड़कों पर अतिरिक्त सतर्कता रखनी चाहिए। बारिश के दौरान दृश्यता कम होने और सड़क पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हो सकता है। निचले इलाकों और जलभराव वाले रास्तों पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    भोपाल में बारिश के साथ तापमान में राहत मिलने की संभावना है। गर्मी और तेज धूप से परेशान लोगों के लिए बादल और बारिश राहत लेकर आ सकते हैं। हालांकि लगातार बारिश होने पर शहर की सड़कों पर जलभराव और यातायात संबंधी परेशानी भी सामने आ सकती है। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की ओर से जल निकासी व्यवस्था पर नजर रखना जरूरी होगा।

    आने वाले दिनों में भी मौसम पूरी तरह स्थिर रहने की संभावना नहीं है। गुरुवार को बारिश की संभावना बनी रहेगी जबकि शुक्रवार को बारिश के साथ गरज चमक और तूफानी गतिविधि की आशंका भी जताई गई है। इसके बाद शनिवार को हल्की बारिश और रविवार को कुछ समय के लिए बारिश की बौछारें देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में अगले सप्ताह के दौरान भोपाल के मौसम में बादलों और बारिश का असर लगातार बना रहने की संभावना है।

    मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए। बारिश के दौरान खुले स्थानों पर अनावश्यक रूप से रुकने से बचें और गरज चमक के समय पेड़ या बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों। घर से बाहर निकलते समय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा की योजना बनाना बेहतर रहेगा। किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए भी स्थानीय मौसम की जानकारी पर नजर रखना जरूरी है।

    कुल मिलाकर भोपाल में अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहने के संकेत हैं। सोमवार से बारिश की संभावना बढ़ने के साथ तापमान में राहत बनी रह सकती है। हालांकि बारिश के कारण जलभराव और यातायात जैसी स्थानीय समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। इसलिए लोगों के लिए बारिश का आनंद लेने के साथ जरूरी सावधानी बरतना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।

  • आधे मानसून में ही पिछड़ी बारिश, प्रदेश के 49 जिले प्रभावित; तीन दिन का अलर्ट बढ़ाएगा राहत की उम्मीद

    आधे मानसून में ही पिछड़ी बारिश, प्रदेश के 49 जिले प्रभावित; तीन दिन का अलर्ट बढ़ाएगा राहत की उम्मीद


    भोपाल। मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके कारण कई जिलों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक केवल 16.3 इंच वर्षा हुई है, जबकि इस समय तक करीब 20 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी लगभग 3.7 इंच पानी की कमी दर्ज की गई है। इसका असर खेती, जलाशयों और भूजल स्तर पर भी दिखाई देने लगा है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से 49 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। केवल छह जिलों में ही औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। राजधानी भोपाल में सामान्य से 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि इंदौर में 2 प्रतिशत, उज्जैन में 14 प्रतिशत और जबलपुर में 29 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। राहत की बात केवल ग्वालियर के लिए है, जहां अब तक सामान्य से 7 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है।

    भोपाल, जबलपुर, सागर, शहडोल, रीवा और नर्मदापुरम संभाग के सभी जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है। दूसरी ओर इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के कुछ जिलों में अपेक्षाकृत बेहतर बारिश हुई है। इससे साफ है कि पूरे प्रदेश में मानसून का वितरण संतुलित नहीं रहा है।

    हालांकि पिछले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिली। सीधी जिले में सबसे अधिक करीब 3 इंच वर्षा दर्ज की गई। ग्वालियर में 2.3 इंच, दतिया में 2 इंच, रीवा में 1.8 इंच, सतना में 1.2 इंच और शिवपुरी में लगभग 1 इंच बारिश हुई। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, धार, नर्मदापुरम, पन्ना, श्योपुर, शाजापुर, मंडला, टीकमगढ़, बालाघाट और छतरपुर सहित 20 से अधिक जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।

    मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए राहत भरी संभावना जताई है। विभाग के अनुसार प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और दमोह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रायसेन, सीहोर, विदिशा, धार, खरगोन, झाबुआ, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया, सागर और कई अन्य जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से तेज बारिश होने की संभावना है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो चुका है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। यदि यह मौसम प्रणाली मजबूत बनी रही तो अगले कुछ दिनों में लगातार अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे अब तक की बारिश की कमी काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि अगस्त का महीना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यदि इस दौरान अच्छी वर्षा होती है तो खरीफ फसलों को बड़ा फायदा मिलेगा।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत

    मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। जुलाई के तीसरे सप्ताह में हुई तेज बारिश ने प्रदेश के कई जिलों की तस्वीर बदल दी है और सूखे जैसे हालात से काफी राहत मिली है। इस दौरान प्रदेश में औसतन 3.3 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई जिससे नदियों झरनों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। हालांकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है और कई जिलों को अच्छी वर्षा का इंतजार है।

    मौसम विभाग के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में लगभग 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि सामान्य औसत 14.6 इंच माना जाता है। यानी मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस बार मानसून निर्धारित समय से नौ दिन की देरी से 24 जून को प्रदेश में पहुंचा था। देरी के कारण जून महीने में बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रहा लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति तेजी से सुधरी और बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ने से बारिश लगभग थम गई लेकिन तीसरे सप्ताह में जोरदार बरसात ने एक बार फिर राहत दी।

    प्रदेश के 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ हरदा बुरहानपुर मंदसौर नीमच आगर मालवा दमोह सिवनी निवाड़ी और भिंड प्रमुख हैं। सबसे अधिक बारिश देवास जिले में हुई है जहां करीब 19.3 इंच वर्षा दर्ज की गई है जो सामान्य से लगभग 54 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर आलीराजपुर प्रदेश का सबसे सूखा जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल 3.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 41 जिले अब भी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं। इनमें जबलपुर रीवा सतना सागर कटनी मंडला छिंदवाड़ा बालाघाट शहडोल उमरिया ग्वालियर मुरैना दतिया धार उज्जैन रतलाम विदिशा रायसेन नर्मदापुरम खरगोन खंडवा और अन्य जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश की अभी भी आवश्यकता बनी हुई है ताकि खेती और जल भंडारण की स्थिति बेहतर हो सके।

    बारिश की कमी का असर प्रदेश के प्रमुख बांधों और नदियों पर भी देखने को मिला है। दूसरे सप्ताह में बारिश कमजोर रहने के कारण कई नदियों का जलस्तर घट गया था लेकिन पिछले सप्ताह हुई वर्षा से फिर जलस्तर में सुधार आने लगा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों को पूरी क्षमता तक भरने के लिए लगातार और व्यापक बारिश की जरूरत है।

    राजधानी भोपाल में इस सीजन में अब तक करीब 17.5 इंच बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से बेहतर स्थिति मानी जा रही है। इंदौर में लगभग 15 इंच वर्षा हो चुकी है जबकि उज्जैन में करीब 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबलपुर में 13.6 इंच वर्षा दर्ज होने के बावजूद यह सामान्य कोटे से कम है। ग्वालियर चंबल संभाग में भी पिछले दिनों बारिश की रफ्तार बढ़ी है और मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यहां भी अच्छी वर्षा होगी।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में निचले स्तर पर नमी बनी हुई है और मानसूनी सिस्टम सक्रिय है। इसी कारण जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में तेज और व्यापक बारिश होने की संभावना है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश का घाटा काफी हद तक पूरा हो सकता है और किसानों के साथ साथ जल संसाधनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

  • नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर लोग भोपाल की जर्जर मल्टियों में बारिश बन रही आफत कचरा सीलन और गिरती इमारतों ने बढ़ाई चिंता

    नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर लोग भोपाल की जर्जर मल्टियों में बारिश बन रही आफत कचरा सीलन और गिरती इमारतों ने बढ़ाई चिंता


    भोपाल । देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले भोपाल की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है। राजधानी के नेहरू नगर स्थित शबरी नगर मल्टी में रहने वाले हजारों लोगों की जिंदगी हर दिन बदबू गंदगी जर्जर इमारतों और हादसे के डर के बीच गुजर रही है। यहां रहने वाले परिवारों का कहना है कि यदि मजबूरी न होती तो कोई भी इंसान इस जगह रहने के बारे में सोच भी नहीं सकता। बारिश का मौसम शुरू होते ही उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं और हर तेज बारिश उनके लिए नई आफत लेकर आती है।

    मल्टी में रहने वाली महिलाओं का कहना है कि सुबह घर का दरवाजा खोलते ही कचरे की दुर्गंध उनका स्वागत करती है जबकि रातें इस चिंता में गुजरती हैं कि कहीं कमजोर हो चुकी दीवारें या छत भरभराकर न गिर जाएं। कई घरों में बारिश के दौरान छत से लगातार पानी टपकता है जिससे बेडरूम रसोई और पूरे घर में सीलन फैल जाती है। लोगों का कहना है कि कई बार सीवेज का गंदा पानी भी घरों तक पहुंच जाता है जिससे बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।

    शबरी नगर में करीब चालीस से अधिक बहुमंजिला इमारतें हैं जिनमें एक हजार से ज्यादा परिवार रहते हैं। इनमें कुछ इमारतें करीब बीस वर्ष पुरानी हैं जबकि कई पंद्रह वर्ष पहले बनाई गई थीं। समय के साथ इन भवनों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि जगह जगह दरारें दिखाई देती हैं। कई दीवारों में पेड़ उग आए हैं। छतों पर घास और झाड़ियां फैल चुकी हैं। कई स्थानों पर प्लास्टर झड़ चुका है और लोहे की सरिया बाहर नजर आने लगी है। लोगों का कहना है कि हल्का सा झटका भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम नियमित रूप से टैक्स और अन्य शुल्क तो वसूलता है लेकिन सफाई और रखरखाव की ओर कोई ध्यान नहीं देता। नालियां जाम रहती हैं सड़कों पर पानी भर जाता है और जगह जगह कचरे के ढेर लगे रहते हैं। खुले बिजली बोर्ड बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं जबकि टूटे पाइप और खराब सीवेज व्यवस्था ने हालात और खराब कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वादे करने जरूर आते हैं लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्याएं फिर अनदेखी कर दी जाती हैं।

    यह समस्या केवल शबरी नगर तक सीमित नहीं है। अर्जुन नगर श्याम नगर राहुल नगर और बीडीए के अंजली कॉम्प्लेक्स सहित शहर की कई सरकारी मल्टियों में रहने वाले लोग भी इसी तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। जर्जर भवनों खुले नालों गंदगी और जलभराव के कारण हजारों परिवार असुरक्षित माहौल में रहने को मजबूर हैं।

    इधर भोपाल की महापौर मालती राय का कहना है कि नगर निगम जर्जर इमारतों की पहचान कर रहा है और जहां भवन रहने योग्य नहीं हैं वहां लोगों को खाली करने की सूचना दी जा रही है। साथ ही सीवेज सफाई जल निकासी और गंदगी की समस्या दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि रहवासियों का कहना है कि उन्हें अब आश्वासनों से ज्यादा जमीन पर दिखाई देने वाले काम का इंतजार है क्योंकि उनकी सबसे बड़ी जरूरत सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन है।

  • मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल

    मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ले ली। राजधानी भोपाल, सीहोर और पांढुर्णा समेत कई जिलों में सुबह से बादल छाए रहे और कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब चार इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    बारिश के बीच कई जिलों से हादसों की खबरें भी सामने आई हैं। खरगोन जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में मजदूर राधेश्याम और गृहिणी केनू शामिल हैं। केनू अपने पीछे तीन साल के बेटे को छोड़ गई हैं। उधर बैतूल जिले के चिचोली क्षेत्र में चंपा नदी उफान पर होने के कारण सोमवार रात बड़ा हादसा हो गया। सिप्लाई गांव के राजेश बिहारे और दद्दू धुर्वे बाइक सहित नदी के रपटे से बह गए थे। रातभर चले तलाश अभियान के बाद मंगलवार सुबह दोनों के शव रपटे से करीब एक किलोमीटर दूर झाड़ियों में मिले।

    पांढुर्णा जिले में सोमवार रात से लगातार रुक-रुककर बारिश हो रही है। मंगलवार सुबह मुंगणापार-मोहगांव मार्ग पर एक बड़ा पेड़ बिजली के तारों पर गिर गया जिससे सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ और आसपास के आठ गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। प्रशासन ने पेड़ हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने का काम शुरू कर दिया है।

    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, आगर मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, हरदा, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत कुल 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। वहीं ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ और अलीराजपुर में हल्की बारिश की संभावना है।

    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसून की एंट्री 24 जून को हुई थी और शुरुआती दौर में 15 जिलों तक इसकी आधिकारिक पहुंच दर्ज की गई थी। हालांकि इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई और वह एक ही क्षेत्र में ठहर गया। इसी कारण प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी और उमस का असर भी बना रहा। फिलहाल मानसून के तेजी से आगे बढ़ने के संकेत नहीं मिले हैं लेकिन अगले कुछ दिनों तक अधिकांश जिलों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    एक जून से अब तक प्रदेश में औसतन 124.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी जबकि अभी तक केवल 75.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब 39 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 68 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी 11 प्रतिशत है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान नदी-नालों से दूर रहने, आकाशीय बिजली के समय खुले स्थानों में नहीं जाने और प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की है।

  • एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी

    एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून पूर्व गतिविधियां तेज हो गई हैं और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी है। सोमवार को राजधानी भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर सहित 28 जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं कई इलाकों में तेज हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित भी हुआ।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे और बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। सीहोर में दोपहर बाद अचानक मौसम बदला और तेज आंधी के साथ बारिश हुई। यहां हवा की अधिकतम रफ्तार 61 किलोमीटर प्रतिघंटा रिकॉर्ड की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। मौसम विभाग ने भोपाल और ग्वालियर संभाग के जिलों में अगले दो दिनों तक बारिश की संभावना जताई है। वहीं आगर-मालवा और राजगढ़ जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    बीते 24 घंटों के दौरान भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, नीमच, मंदसौर, खरगोन, देवास, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी, जबलपुर, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और आगर-मालवा सहित कुल 28 जिलों में बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर बादलों की गरज और तेज हवाओं के साथ मौसम ने अचानक करवट ली।

    तेज हवाओं की बात करें तो सीहोर के अलावा सागर और गुना में 59 किमी प्रतिघंटा, भोपाल में 57 किमी प्रतिघंटा, जबलपुर में 50 किमी प्रतिघंटा तथा नर्मदापुरम में 48 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। इंदौर और अशोकनगर में 44 किमी, ग्वालियर में 43 किमी, राजगढ़ में 39 किमी तथा आगर-मालवा, रीवा, खंडवा और बड़वानी में 37 किमी प्रतिघंटा की गति से तेज आंधी दर्ज की गई।

    रविवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम खराब रहा। भोपाल में दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही, जबकि सीहोर, इंदौर, रायसेन और खरगोन में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। रायसेन में तेज हवाओं के कारण कुछ मकानों के छप्पर उड़ गए, जबकि कई जिलों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। खरगोन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को निंदाई और बुआई के कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा।

    बारिश और बादलों के कारण तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। भोपाल में अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री, इंदौर में 36.3 डिग्री, ग्वालियर में 39.2 डिग्री, उज्जैन में 36.5 डिग्री और जबलपुर में 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    प्रदेश में केवल खजुराहो, दतिया, नौगांव और मंडला ऐसे स्थान रहे जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। वहीं शिवपुरी सबसे ठंडा शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पचमढ़ी में 35 डिग्री, सिवनी में 36 डिग्री, राजगढ़ में 36.4 डिग्री तथा नर्मदापुरम और श्योपुर में 36.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक आंधी-बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है तथा मानसून की प्रगति को भी बल मिल सकता है।